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               <title>First Verdict Media - karamchari lehar </title>
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               <lastBuildDate><![CDATA[Fri, 01 May 2026 08:50:55 +0530]]></lastBuildDate>
            <language>en</language>	<image>
            	<title>First Verdict Media - karamchari lehar </title>
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            <description>First Verdict Media provides the latest information from and in-depth coverage of India and the world. Find breaking news, India news, Himachal news, top stories, elections, politics, business, cricket, movies, lifestyle, health, videos, photos and more.</description>
            
           <item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/news/karamchari-lehar/himachal/himachal-final-hearing-will-be-held-on-the-petition-regarding-outsourced-recruitments-know-the-full-news]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल: आउटसोर्स भर्तियों की याचिका पर होगी अंतिम सुनवाई, जानें पूरी खबर ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/news/karamchari-lehar/himachal/himachal-final-hearing-will-be-held-on-the-petition-regarding-outsourced-recruitments-know-the-full-news]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 25 Dec 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर से इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। सरकारी व अर्ध-सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले में आंशिक सुनवाई की। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा लागू की गई आउटसोर्स नीति की वैधता के प्रश्न तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में आउटसोर्स भर्तियों की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कई गैर-पंजीकृत और अनुभवहीन संस्थाओं को मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है।

अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नई टेंडर प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश मामलों में आउटसोर्स कर्मचारी वही रहते हैं, केवल ठेकेदार बदल जाते हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कमीशन के लेन-देन तक सीमित होकर रह जाती है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि हजारों नियमित पदों के बावजूद उनके विरुद्ध आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल आपात परिस्थितियों में ही लागू की जानी चाहिए। याचिकाओं में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी, हालांकि अदालत ने इसे फिलहाल उचित नहीं माना।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बजाय अभी आउटसोर्स नीति की वैधता पर ही विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को आउटसोर्स भर्तियों पर पूर्ण रोक लगाई थी और 8 जनवरी 2025 को इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी थी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर से इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। सरकारी व अर्ध-सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले में आंशिक सुनवाई की। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा लागू की गई आउटसोर्स नीति की वैधता के प्रश्न तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में आउटसोर्स भर्तियों की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कई गैर-पंजीकृत और अनुभवहीन संस्थाओं को मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नई टेंडर प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश मामलों में आउटसोर्स कर्मचारी वही रहते हैं, केवल ठेकेदार बदल जाते हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कमीशन के लेन-देन तक सीमित होकर रह जाती है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि हजारों नियमित पदों के बावजूद उनके विरुद्ध आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल आपात परिस्थितियों में ही लागू की जानी चाहिए। याचिकाओं में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी, हालांकि अदालत ने इसे फिलहाल उचित नहीं माना।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बजाय अभी आउटसोर्स नीति की वैधता पर ही विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को आउटसोर्स भर्तियों पर पूर्ण रोक लगाई थी और 8 जनवरी 2025 को इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी थी।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall42204.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Himachal: Final hearing will be held on the petition regarding outsourced recruitments, know the full news]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/now-class-iv-employees-working-on-daily-wages-will-also-get-the-benefit-of-ops]]></guid>
                       <title><![CDATA[अब दैनिक वेतन आधार पर काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी मिलेगा OPS का लाभ ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/now-class-iv-employees-working-on-daily-wages-will-also-get-the-benefit-of-ops]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 20 Nov 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश के हजारों दैनिक वेतन आधार पर लंबे समय तक कार्य करने वाले कर्मचारियों को पेंशन का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें ओपीएस के तहत शामिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सुरेंद्र सिंह केस का लाभ सभी को देने का फैसला लिया है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को इस बाबत आदेश जारी किए। वित्त विभाग की ओर से 14 फरवरी 2019 की अधिसूचना को संशोधित कर दिया गया है। यह फैसला पुरानी पेंशन योजना की 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी बहाली के बाद लिया है। संशोधित निर्देशों का लाभ केवल उन कर्मियों को मिलेगा जो अब सीसीएस पेंशन नियम 1972 यानी ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत हैं। इसके तहत पांच वर्ष दैनिक वेतन सेवा को 1 वर्ष क्वालीफाइंग सर्विस माना जाएगा। अधिकतम 2 वर्ष की क्वालीफाइंग सर्विस का लाभ मिलेगा। चाहे उनकी नियमितीकरण की तिथि कोई भी रही हो।

यह लाभ उन चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को मिलेगा, जिनकी सेवाएं नियमितीकरण नीति के तहत नियमित की थीं। पेंशन तभी मिलेगी जब नियमित सेवा और दैनिक वेतन सेवा से प्राप्त लाभ के कुल 10 वर्ष बनेंगे। जिनको 15 मई 2003 या उसके बाद नियमित किया गया था और जो एनपीएस में थे, वे भी पेंशन के हकदार होंगे। इन्हें ओपीएस विकल्प चुनना होगा और सरकार के योगदान और लाभांश को सरकारी खजाने में जमा करवाना होगा। जिन कर्मियों ने यह विकल्प नहीं चुना है, वे 60 दिन में विकल्प दर्ज कर सकते हैं। पेंशन की प्रभावी तिथि 15 मई 2003 से पहले नियमित हुए कर्मियों के लिए एक जनवरी 2018 रखी गई है। 15 मई 2003 या इसके बाद में नियमित हुए और पहले एनपीएस में शामिल कर्मचारी को पेंशन 1 अप्रैल 2023 से लागू होगी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश के हजारों दैनिक वेतन आधार पर लंबे समय तक कार्य करने वाले कर्मचारियों को पेंशन का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें ओपीएस के तहत शामिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सुरेंद्र सिंह केस का लाभ सभी को देने का फैसला लिया है। वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को इस बाबत आदेश जारी किए। वित्त विभाग की ओर से 14 फरवरी 2019 की अधिसूचना को संशोधित कर दिया गया है। यह फैसला पुरानी पेंशन योजना की 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी बहाली के बाद लिया है। संशोधित निर्देशों का लाभ केवल उन कर्मियों को मिलेगा जो अब सीसीएस पेंशन नियम 1972 यानी ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत हैं। इसके तहत पांच वर्ष दैनिक वेतन सेवा को 1 वर्ष क्वालीफाइंग सर्विस माना जाएगा। अधिकतम 2 वर्ष की क्वालीफाइंग सर्विस का लाभ मिलेगा। चाहे उनकी नियमितीकरण की तिथि कोई भी रही हो।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">यह लाभ उन चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को मिलेगा, जिनकी सेवाएं नियमितीकरण नीति के तहत नियमित की थीं। पेंशन तभी मिलेगी जब नियमित सेवा और दैनिक वेतन सेवा से प्राप्त लाभ के कुल 10 वर्ष बनेंगे। जिनको 15 मई 2003 या उसके बाद नियमित किया गया था और जो एनपीएस में थे, वे भी पेंशन के हकदार होंगे। इन्हें ओपीएस विकल्प चुनना होगा और सरकार के योगदान और लाभांश को सरकारी खजाने में जमा करवाना होगा। जिन कर्मियों ने यह विकल्प नहीं चुना है, वे 60 दिन में विकल्प दर्ज कर सकते हैं। पेंशन की प्रभावी तिथि 15 मई 2003 से पहले नियमित हुए कर्मियों के लिए एक जनवरी 2018 रखी गई है। 15 मई 2003 या इसके बाद में नियमित हुए और पहले एनपीएस में शामिल कर्मचारी को पेंशन 1 अप्रैल 2023 से लागू होगी।</span></p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Now-Class-IV-employees-working-on-daily-wages-will-also-get-the-benefit-of-OPS]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/light-drizzle-expected-in-7-districts-know-when-the-weather-will-remain-clear]]></guid>
                       <title><![CDATA[7 जिलों में हल्की बूंदाबांदी के आसार, जाने कब से रहेगा मौसम साफ़  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/light-drizzle-expected-in-7-districts-know-when-the-weather-will-remain-clear]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 10 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश में मौसम साफ होता नजर आ रहा हैं। सात जिलों के कुछ भागों में आज और कल हल्की बूंदाबांदी हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और लाहौल स्पीति जिला के कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार है, अन्य जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। 12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में मौसम साफ हो जाएगा। बीते दो दिनों के दौरान भी कुछ ही क्षेत्रों में हल्की बारिश व बूंदाबांदी हुई है। ज्यादातर भागों में धूप खिली है। प्रदेश में बीते 48 घंटे में अधिकतम तापमान में 8 डिग्री से ज्यादा का उछाल आया है। प्रदेशवासियों ने ठंड से राहत की सांस ली है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में अभी भी तापमान नॉर्मल से नीचे है। मनाली का पारा अभी भी सामान्य से 6.4 डिग्री कम होने के बाद 16.4 डिग्री सेल्सियस है। केलांग व मंडी का तापमान नॉर्मल से 5-5 डिग्री, हमीरपुर का 3.9 डिग्री, सोलन 3 डिग्री और शिमला का सामान्य से 1.6 डिग्री कम पारा है। इसी तरह सभी शहरों में न्यूनतम तापमान भी नॉर्मल से कम है। अगले एक सप्ताह के दौरान तापमान में दो से चार डिग्री का उछाल आएगा।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश में मौसम साफ होता नजर आ रहा हैं। सात जिलों के कुछ भागों में आज और कल हल्की बूंदाबांदी हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और लाहौल स्पीति जिला के कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार है, अन्य जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। 12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में मौसम साफ हो जाएगा। बीते दो दिनों के दौरान भी कुछ ही क्षेत्रों में हल्की बारिश व बूंदाबांदी हुई है। ज्यादातर भागों में धूप खिली है। प्रदेश में बीते 48 घंटे में अधिकतम तापमान में 8 डिग्री से ज्यादा का उछाल आया है। प्रदेशवासियों ने ठंड से राहत की सांस ली है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में अभी भी तापमान नॉर्मल से नीचे है। मनाली का पारा अभी भी सामान्य से 6.4 डिग्री कम होने के बाद 16.4 डिग्री सेल्सियस है। केलांग व मंडी का तापमान नॉर्मल से 5-5 डिग्री, हमीरपुर का 3.9 डिग्री, सोलन 3 डिग्री और शिमला का सामान्य से 1.6 डिग्री कम पारा है। इसी तरह सभी शहरों में न्यूनतम तापमान भी नॉर्मल से कम है। अगले एक सप्ताह के दौरान तापमान में दो से चार डिग्री का उछाल आएगा।</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41689.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Light-drizzle-expected-in-7-districts-know-when-the-weather-will-remain-clear]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/college-lecturers-not-eligible-for-ops-benefits-during-contract-period-higher-education-directorate]]></guid>
                       <title><![CDATA[कॉलेज प्रवक्ताओं को अनुबंध अवधि पर नहीं मिलेगा OPS का लाभ :उच्च शिक्षा निदेशालय ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/college-lecturers-not-eligible-for-ops-benefits-during-contract-period-higher-education-directorate]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 22 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को अब अनुबंध सेवा अवधि के आधार पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ नहीं मिलेगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अब केवल नियमित नियुक्ति की तिथि से ही OPS का लाभ दिया जाएगा, अनुबंध सेवा अवधि को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा की ओर से सोमवार को सभी सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी निर्देश में कहा गया है कि ओपीएस की पात्रता सूची केवल उन्हीं कर्मचारियों की तैयार की जाए, जिनकी सेवा नियमित हो चुकी है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।

कौन-कौन होंगे प्रभावित?

इस फैसले का सीधा असर उन सैकड़ों कॉलेज प्रवक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्होंने मई 2023 और जून 2024 में जारी वित्त विभाग के आदेशों के आधार पर अनुबंध सेवा को भी OPS पात्रता में शामिल करवाया था। उस दौरान सरकार ने सभी पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन चुनने का विकल्प दिया था, और कई प्रोफेसरों ने अपनी अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन लाभों में जोड़ने का निर्णय लिया था। हालांकि, अब 20 फरवरी 2025 से प्रभावी नए अधिनियम के तहत सभी पूर्व आदेश और कार्यालय ज्ञापन निरस्त कर दिए गए हैं।

&nbsp;

धारा 6(2) का हवाला, लाभ वापस लिए जाएंगे

अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी केवल नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा संबंधी लाभों का पात्र होगा। साथ ही तीसरे उप-प्रावधान के अनुसार, अनुबंध सेवा के लिए पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस ले लिए जाएंगे।

&nbsp;

आर्थिक नुकसान की आशंका

इस बदलाव के चलते कई प्रवक्ताओं को अपने पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। इससे न केवल उनकी संभावित पेंशन राशि में कटौती होगी, बल्कि कुछ मामलों में ओपीएस की पात्रता भी समाप्त हो सकती है, जिससे उन्हें नई पेंशन योजना (NPS) में ही रहना पड़ सकता है।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को अब अनुबंध सेवा अवधि के आधार पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ नहीं मिलेगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अब केवल नियमित नियुक्ति की तिथि से ही OPS का लाभ दिया जाएगा, अनुबंध सेवा अवधि को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। </span></span><span style="white-space-collapse: preserve; font-size: 18px;">उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा की ओर से सोमवार को सभी सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी निर्देश में कहा गया है कि ओपीएस की पात्रता सूची केवल उन्हीं कर्मचारियों की तैयार की जाए, जिनकी सेवा नियमित हो चुकी है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।</span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">कौन-कौन होंगे प्रभावित?</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">इस फैसले का सीधा असर उन सैकड़ों कॉलेज प्रवक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्होंने मई 2023 और जून 2024 में जारी वित्त विभाग के आदेशों के आधार पर अनुबंध सेवा को भी OPS पात्रता में शामिल करवाया था। उस दौरान सरकार ने सभी पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन चुनने का विकल्प दिया था, और कई प्रोफेसरों ने अपनी अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन लाभों में जोड़ने का निर्णय लिया था। </span></span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">हालांकि, अब 20 फरवरी 2025 से प्रभावी नए अधिनियम के तहत सभी पूर्व आदेश और कार्यालय ज्ञापन निरस्त कर दिए गए हैं।</span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">धारा 6(2) का हवाला, लाभ वापस लिए जाएंगे</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी केवल नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा संबंधी लाभों का पात्र होगा। साथ ही तीसरे उप-प्रावधान के अनुसार, अनुबंध सेवा के लिए पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस ले लिए जाएंगे।</span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">आर्थिक नुकसान की आशंका</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">इस बदलाव के चलते कई प्रवक्ताओं को अपने पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। इससे न केवल उनकी संभावित पेंशन राशि में कटौती होगी, बल्कि कुछ मामलों में ओपीएस की पात्रता भी समाप्त हो सकती है, जिससे उन्हें नई पेंशन योजना (NPS) में ही रहना पड़ सकता है।</span></span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41023.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[College Lecturers Not Eligible for OPS Benefits During Contract Period: Higher Education Directorate]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal-high-court-verdict-dependents-of-home-guards-not-entitled-to-compassionate-appointment]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला, होमगार्ड के आश्रितों को नहीं मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का लाभ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal-high-court-verdict-dependents-of-home-guards-not-entitled-to-compassionate-appointment]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 22 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत होमगार्ड के आश्रितों को नौकरी का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ ने जोगेंद्र और मनो देवी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि होमगार्ड न तो सरकारी सेवा के स्थायी कर्मचारी होते हैं और न ही उन्हें सरकारी सेवक की श्रेणी में रखा जा सकता है, इसलिए उनके आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं माने जा सकते। अदालत ने कहा कि होमगार्ड की सेवा स्वैच्छिक और अस्थायी प्रकृति की होती है, अतः उनके आश्रितों को स्थायी सरकारी नौकरी की मांग का वैधानिक अधिकार नहीं है।

&nbsp;

क्या था मामला?

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उनके पति हिमाचल प्रदेश होमगार्ड अधिनियम, 1968 के तहत सेवारत थे और ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत नौकरी की मांग की, जिसे राज्य सरकार ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि होमगार्ड इस योजना के अंतर्गत नहीं आते। याचिकाकर्ताओं ने अपनी बात के समर्थन में झारखंड हाईकोर्ट के चंदा देवी बनाम झारखंड राज्य मामले का हवाला भी दिया, लेकिन हिमाचल हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उस मिसाल को खारिज कर दिया कि उस मामले के तथ्य मौजूदा केस से अलग हैं।

दालत की टिप्पणी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि &quot;जब स्वयं होमगार्ड की सेवा स्थायी नहीं है और वह स्वैच्छिक रूप से दी जाती है, तो उनके आश्रितों को स्थायी सरकारी नौकरी का दावा करने का अधिकार नहीं हो सकता।&quot;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत होमगार्ड के आश्रितों को नौकरी का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ ने जोगेंद्र और मनो देवी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि होमगार्ड न तो सरकारी सेवा के स्थायी कर्मचारी होते हैं और न ही उन्हें सरकारी सेवक की श्रेणी में रखा जा सकता है, इसलिए उनके आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं माने जा सकते। </span></span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">अदालत ने कहा कि होमगार्ड की सेवा स्वैच्छिक और अस्थायी प्रकृति की होती है, अतः उनके आश्रितों को स्थायी सरकारी नौकरी की मांग का वैधानिक अधिकार नहीं है।</span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">क्या था मामला?</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उनके पति हिमाचल प्रदेश होमगार्ड अधिनियम, 1968 के तहत सेवारत थे और ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत नौकरी की मांग की, जिसे राज्य सरकार ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि होमगार्ड इस योजना के अंतर्गत नहीं आते। </span></span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">याचिकाकर्ताओं ने अपनी बात के समर्थन में झारखंड हाईकोर्ट के चंदा देवी बनाम झारखंड राज्य मामले का हवाला भी दिया, लेकिन हिमाचल हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उस मिसाल को खारिज कर दिया कि उस मामले के तथ्य मौजूदा केस से अलग हैं।</span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">दालत की टिप्पणी</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">कोर्ट ने स्पष्ट किया कि &quot;जब स्वयं होमगार्ड की सेवा स्थायी नहीं है और वह स्वैच्छिक रूप से दी जाती है, तो उनके आश्रितों को स्थायी सरकारी नौकरी का दावा करने का अधिकार नहीं हो सकता।&quot;</span></span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41022.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Himachal High Court Verdict: Dependents of Home Guards Not Entitled to Compassionate Appointment]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/-1752917096]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल में बदली सरकारी भर्ती प्रक्रिया: अब पहले 'ट्रेनी', फिर सरकारी नौकरी]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/-1752917096]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sat, 19 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में सीधी भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलते हुए एक नई &#39;जॉब ट्रेनी स्कीम&#39; लागू कर दी है। अब ग्रुप-A, ग्रुप-B और ग्रुप-C पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों को पहले एक तय समय के लिए &#39;जॉब ट्रेनी&#39; के रूप में रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें नियमित वेतन की जगह मासिक मानदेय मिलेगा, और परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन के बाद ही वे स्थायी नियुक्ति की पात्रता प्राप्त करेंगे।

&nbsp;

क्या है नई नीति का मकसद?


सरकार का कहना है कि इस नई भर्ती नीति का उद्देश्य सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इस स्कीम के ज़रिए युवाओं में जवाबदेही, प्रेरणा और पेशेवर रवैये को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, यह मॉडल सरकारी प्रशासनिक तंत्र को अधिक दक्ष, परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

&nbsp;

नई स्कीम के प्रमुख बिंदु:


सीधी नौकरी नहीं, पहले ट्रेनी:&nbsp;चयनित उम्मीदवारों को पहले &ldquo;Job Trainee&rdquo; के रूप में तय मानदेय पर नियुक्त किया जाएगा। यह सीधी सरकारी नौकरी नहीं मानी जाएगी।

प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव:&nbsp;ट्रेनी कार्यकाल के दौरान उम्मीदवारों को विभागीय जिम्मेदारियों के अनुसार रोल-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा।

दो साल बाद परीक्षा:&nbsp;दो साल की ट्रेनी अवधि के बाद एक Efficiency Test (प्रशिक्षण उपरांत परीक्षा) अनिवार्य होगी। इसे पास करने पर ही आगे स्थायी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा।

गारंटी/एफिडेविट अनिवार्य:&nbsp;नियुक्ति से पहले उम्मीदवार को यह शपथ पत्र देना होगा कि वह सरकारी सेवाओं से जुड़े किसी भी लाभ का दावा नहीं करेगा।

नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं:&nbsp;जॉब ट्रेनी किसी भी रूप में सरकार का नियमित कर्मचारी नहीं माना जाएगा। उसे CCS, CCA, पेंशन, अवकाश जैसे नियमों का लाभ नहीं मिलेगा, और वह इस आधार पर कोई दावा भी नहीं कर सकता।

मानदेय पर नियुक्ति:&nbsp;चयनित ट्रेनी को सरकार द्वारा तय मासिक मानदेय मिलेगा, जो वित्त विभाग द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।

TA/DA और मेडिकल लाभ:&nbsp;जरूरत पड़ने पर ट्रेनी को TA/DA मिलेगा। साथ ही HIMCARE और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत चिकित्सा सुविधा भी दी जाएगी।

आरक्षण नीति लागू:&nbsp;आरक्षण और बैकलॉग पदों पर भी यह नीति लागू होगी और रोस्टर प्रणाली का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

नियम उल्लंघन पर सेवा समाप्ति:&nbsp;यदि किसी ट्रेनी पर अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, या अन्य गंभीर आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवा समाप्त की जा सकती है।

सेवा स्थायी करने के नियम:&nbsp;ट्रेनी कार्यकाल पूरा करने के बाद अगली वित्तीय वर्ष में स्थायी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा&mdash;परंतु केवल तभी जब उम्मीदवार सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता परीक्षा (Efficiency Bar Test) में सफल होगा।


कहां लागू होगी यह स्कीम?


यह नीति सभी विभागों में कुछ पदों को छोड़कर Group-A, Group-B और Group-C पदों पर लागू होगी।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह नीति रिफॉर्म-ओरिएंटेड फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसका मकसद भर्ती प्रणाली को दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;">हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में सीधी भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलते हुए एक नई &#39;जॉब ट्रेनी स्कीम&#39; लागू कर दी है। अब ग्रुप-A, ग्रुप-B और ग्रुप-C पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों को पहले एक तय समय के लिए &#39;जॉब ट्रेनी&#39; के रूप में रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें नियमित वेतन की जगह मासिक मानदेय मिलेगा, और परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन के बाद ही वे स्थायी नियुक्ति की पात्रता प्राप्त करेंगे।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong><span style="font-size:22px;">क्या है नई नीति का मकसद?</span></strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:20px;">सरकार का कहना है कि इस नई भर्ती नीति का उद्देश्य सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इस स्कीम के ज़रिए युवाओं में जवाबदेही, प्रेरणा और पेशेवर रवैये को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, यह मॉडल सरकारी प्रशासनिक तंत्र को अधिक दक्ष, परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><span style="font-size:22px;"><strong>नई स्कीम के प्रमुख बिंदु:</strong></span></span></p>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:20px;"><em><strong>सीधी नौकरी नहीं, पहले ट्रेनी:</strong>&nbsp;</em>चयनित उम्मीदवारों को पहले &ldquo;Job Trainee&rdquo; के रूप में तय मानदेय पर नियुक्त किया जाएगा। यह सीधी सरकारी नौकरी नहीं मानी जाएगी।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव:&nbsp;</strong>ट्रेनी कार्यकाल के दौरान उम्मीदवारों को विभागीय जिम्मेदारियों के अनुसार रोल-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>दो साल बाद परीक्षा:&nbsp;</strong>दो साल की ट्रेनी अवधि के बाद एक Efficiency Test (प्रशिक्षण उपरांत परीक्षा) अनिवार्य होगी। इसे पास करने पर ही आगे स्थायी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>गारंटी/एफिडेविट अनिवार्य:&nbsp;</strong>नियुक्ति से पहले उम्मीदवार को यह शपथ पत्र देना होगा कि वह सरकारी सेवाओं से जुड़े किसी भी लाभ का दावा नहीं करेगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं:&nbsp;</strong>जॉब ट्रेनी किसी भी रूप में सरकार का नियमित कर्मचारी नहीं माना जाएगा। उसे CCS, CCA, पेंशन, अवकाश जैसे नियमों का लाभ नहीं मिलेगा, और वह इस आधार पर कोई दावा भी नहीं कर सकता।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>मानदेय पर नियुक्ति:&nbsp;</strong>चयनित ट्रेनी को सरकार द्वारा तय मासिक मानदेय मिलेगा, जो वित्त विभाग द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>TA/DA और मेडिकल लाभ:&nbsp;</strong>जरूरत पड़ने पर ट्रेनी को TA/DA मिलेगा। साथ ही HIMCARE और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत चिकित्सा सुविधा भी दी जाएगी।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>आरक्षण नीति लागू:&nbsp;</strong>आरक्षण और बैकलॉग पदों पर भी यह नीति लागू होगी और रोस्टर प्रणाली का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>नियम उल्लंघन पर सेवा समाप्ति:&nbsp;</strong>यदि किसी ट्रेनी पर अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, या अन्य गंभीर आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवा समाप्त की जा सकती है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:20px;"><strong>सेवा स्थायी करने के नियम:&nbsp;</strong>ट्रेनी कार्यकाल पूरा करने के बाद अगली वित्तीय वर्ष में स्थायी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा&mdash;परंतु केवल तभी जब उम्मीदवार सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता परीक्षा (Efficiency Bar Test) में सफल होगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:20px;"><strong>कहां लागू होगी यह स्कीम?</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:20px;">यह नीति सभी विभागों में कुछ पदों को छोड़कर Group-A, Group-B और Group-C पदों पर लागू होगी।<br />
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह नीति रिफॉर्म-ओरिएंटेड फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसका मकसद भर्ती प्रणाली को दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41000.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Government Recruitment Process Changed in Himachal: Now 'Trainee' First, Permanent Job Later]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/from-august-1-hrtc-employees-to-follow-work-to-rule-limit-duty-to-8-hours-protest-intensifies-over-pending-salaries-and-allowances]]></guid>
                       <title><![CDATA[1 अगस्त से HRTC कर्मचारियों का ‘वर्क टू रूल’, सिर्फ 8 घंटे देंगे ड्यूटी; वेतन-भत्तों की मांग को लेकर तेज हुआ विरोध]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/from-august-1-hrtc-employees-to-follow-work-to-rule-limit-duty-to-8-hours-protest-intensifies-over-pending-salaries-and-allowances]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sat, 19 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारी पहली अगस्त से &lsquo;वर्क टू रूल&rsquo; के तहत केवल आठ घंटे की निर्धारित ड्यूटी करेंगे। यह फैसला शुक्रवार को सरकाघाट और शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न बस अड्डों में आयोजित गेट मीटिंग्स के दौरान लिया गया। कर्मचारियों ने चेताया है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। ड्राइवर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन राणा ने कहा कि निगम के कर्मचारी बारिश, भूस्खलन और रेड-ऑरेंज अलर्ट जैसे हालातों में भी अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा और ओवरटाइम का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि एचआरटीसी प्रबंधन और प्रदेश सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीन हैं।

2016 से एरियर और 2018 से डीए का नहीं हुआ भुगतान

शिमला के पुराने बस अड्डे पर भी शुक्रवार दोपहर बाद ड्राइवर यूनियन ने गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 2016 से एरियर और 2018 से महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान लंबित है। प्रदर्शन के दौरान यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान रंजीत ठाकुर की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

कंडक्टर यूनियन का भी समर्थन

उधर, राज्य एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन की बैठक डीडीयू के पास एक निजी हॉल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष जीवन सिंह ने की। इसमें प्रांतीय प्रधान प्रीत महिंद्र, मुख्य सलाहकार यशवंत सिंह ठाकुर, महासचिव दीपेंद्र कंवर, संगठन मंत्री प्रमोद ठाकुर और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। यूनियन ने स्पष्ट किया कि ड्राइवर यूनियन की ओर से चलाए जा रहे इस आंदोलन को पूरा समर्थन दिया जाएगा और कंडक्टर भी 1 अगस्त से सीमित कार्य अवधि के तहत ड्यूटी करेंगे।

गेट मीटिंग्स 30 जुलाई तक

HRTC यूनियन ने बताया कि प्रदेशभर में 30 जुलाई तक गेट मीटिंग्स का सिलसिला जारी रहेगा। यदि तब तक भी सरकार और प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में &lsquo;वर्क टू रूल&rsquo; लागू कर दिया जाएगा, जिसके तहत कर्मचारी केवल निर्धारित आठ घंटे ही काम करेंगे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p data-end="636" data-start="258">&nbsp;हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारी पहली अगस्त से &lsquo;वर्क टू रूल&rsquo; के तहत केवल आठ घंटे की निर्धारित ड्यूटी करेंगे। यह फैसला शुक्रवार को सरकाघाट और शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न बस अड्डों में आयोजित गेट मीटिंग्स के दौरान लिया गया। कर्मचारियों ने चेताया है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। ड्राइवर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन राणा ने कहा कि निगम के कर्मचारी बारिश, भूस्खलन और रेड-ऑरेंज अलर्ट जैसे हालातों में भी अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा और ओवरटाइम का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि एचआरटीसी प्रबंधन और प्रदेश सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीन हैं।</p>

<h3 data-end="1042" data-start="991"><strong>2016 से एरियर और 2018 से डीए का नहीं हुआ भुगतान</strong></h3>

<p data-end="1342" data-start="1044">शिमला के पुराने बस अड्डे पर भी शुक्रवार दोपहर बाद ड्राइवर यूनियन ने गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 2016 से एरियर और 2018 से महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान लंबित है। प्रदर्शन के दौरान यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान रंजीत ठाकुर की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।</p>

<h3 data-end="1375" data-start="1344"><strong>कंडक्टर यूनियन का भी समर्थन</strong></h3>

<p data-end="1823" data-start="1377">उधर, राज्य एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन की बैठक डीडीयू के पास एक निजी हॉल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष जीवन सिंह ने की। इसमें प्रांतीय प्रधान प्रीत महिंद्र, मुख्य सलाहकार यशवंत सिंह ठाकुर, महासचिव दीपेंद्र कंवर, संगठन मंत्री प्रमोद ठाकुर और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। यूनियन ने स्पष्ट किया कि ड्राइवर यूनियन की ओर से चलाए जा रहे इस आंदोलन को पूरा समर्थन दिया जाएगा और कंडक्टर भी 1 अगस्त से सीमित कार्य अवधि के तहत ड्यूटी करेंगे।</p>

<h3 data-end="1853" data-start="1825"><strong>गेट मीटिंग्स 30 जुलाई तक</strong></h3>

<p data-end="2132" data-start="1855">HRTC यूनियन ने बताया कि प्रदेशभर में 30 जुलाई तक गेट मीटिंग्स का सिलसिला जारी रहेगा। यदि तब तक भी सरकार और प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में &lsquo;वर्क टू रूल&rsquo; लागू कर दिया जाएगा, जिसके तहत कर्मचारी केवल निर्धारित आठ घंटे ही काम करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall40997.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[From August 1, HRTC employees to follow ‘Work to Rule’, limit duty to 8 hours; protest intensifies over pending salaries and allowances]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/now-every-government-employee-must-serve-at-least-once-in-a-tribal-or-remote-area]]></guid>
                       <title><![CDATA[अब हर सरकारी कर्मचारी को एक बार जनजातीय या दुर्गम क्षेत्र में करनी होगी सेवा]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/now-every-government-employee-must-serve-at-least-once-in-a-tribal-or-remote-area]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 18 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सेवाकाल में कम से कम एक बार दुर्गम, ग्रामीण या जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देना अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद लिया गया है, जिसमें कर्मचारियों की मनमानी और असमान तैनातियों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।&nbsp;मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागीय आयुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को निर्देश जारी कर सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

कर्मचारियों की मनमानी पर हाईकोर्ट की सख्ती

यह निर्णय &quot;भारती राठौर बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य&quot; मामले में प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। अदालत ने पाया कि कुछ कर्मचारी बार-बार दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं, जबकि कई अन्य ऐसे क्षेत्रीय पोस्टिंग से पूरी तरह बचते रहे हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों को सेवा के दौरान कम से कम एक बार इन क्षेत्रों में तैनात किया जाए, ताकि तैनाती की प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और पारदर्शी हो।

बार-बार दुर्गम पोस्टिंग पर भी लगी रोक

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए हैं कि एक ही कर्मचारी को बार-बार जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों में तैनात न किया जाए, ताकि असंतोष और पक्षपात की भावना से बचा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई विभाग इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

2013 के निर्देशों की फिर से याद दिलाई गई

सरकार ने सभी विभागों को वर्ष 2013 में जारी &quot;सीजीपी-2013&quot; के पैरा 12 और 12.1 की याद दिलाई है, जिसमें पहले से ही प्रत्येक कर्मचारी को सेवा के दौरान कम से कम एक बार दूरस्थ, दुर्गम या जनजातीय क्षेत्र में तैनाती देने का प्रावधान है। अब इन निर्देशों को और अधिक कड़ाई से लागू करने की बात कही गई है।

पोस्टिंग पैटर्न की समीक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम पर विचार

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने मौजूदा पोस्टिंग पैटर्न की समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि स्थानांतरण की निगरानी और कर्मचारियों की शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p data-end="593" data-start="253" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सेवाकाल में कम से कम एक बार दुर्गम, ग्रामीण या जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देना अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद लिया गया है, जिसमें कर्मचारियों की मनमानी और असमान तैनातियों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागीय आयुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों को निर्देश जारी कर सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।</span></p>

<h3 data-end="879" data-start="829" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong data-end="879" data-start="833">कर्मचारियों की मनमानी पर हाईकोर्ट की सख्ती</strong></span></h3>

<p data-end="1333" data-start="881" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">यह निर्णय &quot;भारती राठौर बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य&quot; मामले में प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। अदालत ने पाया कि कुछ कर्मचारी बार-बार दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं, जबकि कई अन्य ऐसे क्षेत्रीय पोस्टिंग से पूरी तरह बचते रहे हैं।<br data-end="1159" data-start="1156" />
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों को सेवा के दौरान कम से कम एक बार इन क्षेत्रों में तैनात किया जाए, ताकि तैनाती की प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और पारदर्शी हो।</span></p>

<h3 data-end="1380" data-start="1335" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong data-end="1380" data-start="1339">बार-बार दुर्गम पोस्टिंग पर भी लगी रोक</strong></span></h3>

<p data-end="1677" data-start="1382" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए हैं कि एक ही कर्मचारी को बार-बार जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों में तैनात न किया जाए, ताकि असंतोष और पक्षपात की भावना से बचा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई विभाग इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</span></p>

<h3 data-end="1727" data-start="1679" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong data-end="1727" data-start="1683">2013 के निर्देशों की फिर से याद दिलाई गई</strong></span></h3>

<p data-end="2020" data-start="1729" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">सरकार ने सभी विभागों को वर्ष 2013 में जारी &quot;सीजीपी-2013&quot; के पैरा 12 और 12.1 की याद दिलाई है, जिसमें पहले से ही प्रत्येक कर्मचारी को सेवा के दौरान कम से कम एक बार दूरस्थ, दुर्गम या जनजातीय क्षेत्र में तैनाती देने का प्रावधान है। अब इन निर्देशों को और अधिक कड़ाई से लागू करने की बात कही गई है।</span></p>

<h3 data-end="2091" data-start="2022" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong data-end="2091" data-start="2026">पोस्टिंग पैटर्न की समीक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम पर विचार</strong></span></h3>

<p data-end="2382" data-start="2093" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने मौजूदा पोस्टिंग पैटर्न की समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि स्थानांतरण की निगरानी और कर्मचारियों की शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall40984.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Now every government employee must serve at least once in a tribal or remote area.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/power-employees-raise-slogan-of-rebellion-in-dharamshala-grand-power-panchayat-roars-against-privatisation]]></guid>
                       <title><![CDATA[धर्मशाला में बिजली कर्मचारियों का हल्लाबोल: निजीकरण के खिलाफ गरजी बिजली महापंचायत]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/power-employees-raise-slogan-of-rebellion-in-dharamshala-grand-power-panchayat-roars-against-privatisation]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 10 Jul 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड के अस्तित्व और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बुधवार को धर्मशाला कॉलेज ऑडिटोरियम में बिजली महापंचायत का आयोजन किया गया। बिजली बोर्ड कर्मचारियों, इंजीनियरों, पेंशनरों और आउटसोर्स कर्मियों की संयुक्त कार्रवाई समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांगड़ा ज़िले से हज़ारों कर्मचारियों और जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह समिति की सातवीं जिला स्तरीय महापंचायत थी, जिसका उद्देश्य बोर्ड को निजीकरण से बचाना और कर्मचारियों से जुड़ी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था।

&nbsp;

निजीकरण के खिलाफ एकजुट हुआ बिजली विभाग

महापंचायत में संयोजक इंजीनियर लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार जहां ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण बिजली बोर्ड बदहाली की कगार पर है। उन्होंने कहा कि देशभर में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने केंद्र की नीतियों के विरोध में हड़ताल की है। संयुक्त समिति का कहना है कि बिजली कंपनियों के निजी हाथों में जाने से&mdash;कर्मचारियों की सेवा शर्तें और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी, उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, और सेवाओं की गुणवत्ता गिरेगी l समिति ने यह भी चेताया कि बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। एक समय में 43,000 कर्मचारियों वाला बोर्ड अब सिर्फ 13,000 नियमित कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। इसके बावजूद बोर्ड प्रबंधन कर्मचारियों को &quot;सरप्लस&quot; बताकर अन्य विभागों में भेजने में लगा है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

&nbsp;

प्रदर्शन के बाद रैली, डीसी के माध्यम से सीएम को सौंपा ज्ञापन

महापंचायत के बाद सैकड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्ज़ ने रैली निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय तक मार्च किया। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगें रखीं।

&nbsp;

ये है मांगें&nbsp;

बिजली बोर्ड में पैरा टी-मेट की भर्ती बंद हो, खाली पदों पर नियमित भर्ती शुरू की जाए

&nbsp;

मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन प्रणाली दी जाए

&nbsp;

पेंशनरों की दो साल से लंबित बकाया राशि, लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान जल्द किया जाए

&nbsp;

आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी किया जाए

&nbsp;

बोर्ड की संरचना से छेड़छाड़ (संचार व सिस्टम प्लानिंग विंग) का विरोध

&nbsp;

उपकेंद्रों का संचालन संचार विंग को देने का विरोध

&nbsp;

बोर्ड कर्मचारियों के लिए केंद्र के वेतनमान लागू करने की सिफारिशों का विरोध, क्योंकि इससे मौजूदा वेतन घट जाएगा

&nbsp;

इस मौके पर ई. विकास गुप्ता, ई. ए.एस. गुप्ता, चंद्र सिंह मंडयाल, दलीप डटवालिया, कुलदीप खरवाड़ा, कामेश्वर दत्त शर्मा, मनोहर धीमान, सुबीर सपहिया, पंकज राणा, मनोज सूद और विनोद कुमार समेत कई वरिष्ठ कर्मचारी और संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड के अस्तित्व और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बुधवार को धर्मशाला कॉलेज ऑडिटोरियम में बिजली महापंचायत का आयोजन किया गया। बिजली बोर्ड कर्मचारियों, इंजीनियरों, पेंशनरों और आउटसोर्स कर्मियों की संयुक्त कार्रवाई समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांगड़ा ज़िले से हज़ारों कर्मचारियों और जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह समिति की सातवीं जिला स्तरीय महापंचायत थी, जिसका उद्देश्य बोर्ड को निजीकरण से बचाना और कर्मचारियों से जुड़ी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था।</span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">निजीकरण के खिलाफ एकजुट हुआ बिजली विभाग</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">महापंचायत में संयोजक इंजीनियर लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार जहां ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण बिजली बोर्ड बदहाली की कगार पर है। उन्होंने कहा कि देशभर में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने केंद्र की नीतियों के विरोध में हड़ताल की है। </span></span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">संयुक्त समिति का कहना है कि बिजली कंपनियों के निजी हाथों में जाने से&mdash;</span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">कर्मचारियों की सेवा शर्तें और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी, उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, </span><span style="font-size: 18px; text-align: justify; white-space-collapse: preserve;">और </span><span style="font-size: 18px; white-space-collapse: preserve;">सेवाओं की गुणवत्ता गिरेगी l </span><span style="white-space-collapse: preserve; font-size: 18px;">समिति ने यह भी चेताया कि बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। एक समय में 43,000 कर्मचारियों वाला बोर्ड अब सिर्फ 13,000 नियमित कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। इसके बावजूद बोर्ड प्रबंधन कर्मचारियों को &quot;सरप्लस&quot; बताकर अन्य विभागों में भेजने में लगा है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकता है।</span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">प्रदर्शन के बाद रैली, डीसी के माध्यम से सीएम को सौंपा ज्ञापन</span></span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">महापंचायत के बाद सैकड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्ज़ ने रैली निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय तक मार्च किया। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगें रखीं।</span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;">ये है मांगें&nbsp;</span></strong></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">बिजली बोर्ड में पैरा टी-मेट की भर्ती बंद हो, खाली पदों पर नियमित भर्ती शुरू की जाए</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन प्रणाली दी जाए</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">पेंशनरों की दो साल से लंबित बकाया राशि, लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान जल्द किया जाए</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी किया जाए</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">बोर्ड की संरचना से छेड़छाड़ (संचार व सिस्टम प्लानिंग विंग) का विरोध</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">उपकेंद्रों का संचालन संचार विंग को देने का विरोध</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">बोर्ड कर्मचारियों के लिए केंद्र के वेतनमान लागू करने की सिफारिशों का विरोध, क्योंकि इससे मौजूदा वेतन घट जाएगा</span></span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text xkrh14z" style="white-space-collapse: preserve;">इस मौके पर ई. विकास गुप्ता, ई. ए.एस. गुप्ता, चंद्र सिंह मंडयाल, दलीप डटवालिया, कुलदीप खरवाड़ा, कामेश्वर दत्त शर्मा, मनोहर धीमान, सुबीर सपहिया, पंकज राणा, मनोज सूद और विनोद कुमार समेत कई वरिष्ठ कर्मचारी और संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</span></span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall40912.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Power Employees Raise Slogan of Rebellion in Dharamshala: Grand Power Panchayat Roars Against Privatisation]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/employee-wave-sukhu-government-on-jairams-path]]></guid>
                       <title><![CDATA[कर्मचारी लहर: जयराम की राह पर सुक्खू सरकार]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/employee-wave-sukhu-government-on-jairams-path]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 07 Mar 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[दो समानांतर महासंघ, न मान्यता मिली न जेसीसी
यूपीएस पर सरकार के रुख पर भी नज़र

सवा दो साल बीत गए, मगर हिमाचल की सुक्खू सरकार ने अब तक अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता नहीं दी। जेसीसी की बैठक तो और भी दूर की कौड़ी लगती है। महासंघ की मान्यता के लिए दो दावेदार मैदान में हैं&mdash;प्रदीप ठाकुर और त्रिलोक ठाकुर। दोनों ही समानांतर महासंघ तैयार कर चुके हैं, दोनों ही कर्मचारियों के मसले उजागर कर रहे हैं और दोनों ही मान्यता की अर्जी समय-समय पर मुख्यमंत्री को सौंप चुके हैं। मुख्यमंत्री मुलाकात भी दोनों महासंघों से कर रहे हैं। अभी बीते कल ही त्रिलोक गुट मुख्यमंत्री से मिला था... इससे पहले समय-समय पर प्रदीप गुट भी मुख्यमंत्री से मिला है। मगर मान्यता अब तक किसी को नहीं मिली। हां, आश्वासन ज़रूर मिला है कि बजट सत्र के बाद इस मसले पर चर्चा करेंगे। मगर यह आश्वासन तो पहले भी मिला था और तब से मिल रहा है जब से प्रदेश में सरकार बनी है। ज़ाहिर है, लगातार बढ़ते इस इंतज़ार से अंदरखाने कर्मचारियों में रोष पनपने लगा है।

वैसे देखा जाए तो कर्मचारी संगठनों को देर से मान्यता देने की रवायत हिमाचल में पुरानी है। पूर्व की जयराम सरकार ने भी अश्विनी ठाकुर वाले महासंघ को मान्यता देने में साढ़े तीन साल से भी ज़्यादा का वक्त लिया था। इससे पहले भी कुछ सरकारों ने यही किया। हालांकि, इस बार माना जा रहा था कि सरकार जल्द महासंघ को मान्यता दे सकती है, किंतु ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान सरकार भी पूर्व सरकार की परिपाटी पर ही आगे बढ़ रही है&mdash;वही कर रही है जो पूर्व की जयराम सरकार ने किया। मान्यता के लिए कर्मचारियों को अंत तक लटकाए रखा।

बता दें कि हिमाचल में अभी कर्मचारियों के कई मसले लंबित हैं। सभी कर्मचारी संगठन विभिन्न स्तरों पर अपने मसले उजागर भी कर रहे हैं, मगर कर्मचारी संगठन मानते हैं कि इनके निपटारे के लिए जेसीसी ज़रूरी है। हालांकि, फिलहाल इसके कोई संकेत नहीं हैं। जानकार मान रहे हैं कि संभवतः अपने चौथे साल में ही सरकार इस पर निर्णय ले। वैसे देरी की वजह भी स्वाभाविक है। जेसीसी में सरकार पर कर्मचारियों की लंबित मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में लाज़मी है कि खराब आर्थिक स्थिति के बीच सरकार फिलहाल इसे टालना चाहे। लेकिन सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में वित्तीय स्थिति बेहतर होगी?

वैसे इन दिनों कर्मचारी राजनीति में एक और बड़ा मसला भी है&mdash;ओपीएस और यूपीएस के बीच छिड़ी प्रतिस्पर्धा। प्रदीप ठाकुर ओपीएस आंदोलन से निकले हैं और उनकी पूरी राजनीति अब तक इसी के इर्द-गिर्द रही है। कांग्रेस सरकार के गठन के बाद ओपीएस बहाली का श्रेय भी प्रदीप गुट को दिया जाता है और इसी के चलते काफ़ी संख्या में कर्मचारी उनके साथ हैं। किंतु बीते दिनों यूपीएस का जिक्र कर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्र सरकार भी आर्थिक मदद की पेशकश कर प्रदेश सरकार से यूपीएस लागू करने का आग्रह कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान का खंडन कांग्रेस के किसी नेता ने नहीं किया। इशारा साफ़ है कि यूपीएस लागू हो या न हो, लेकिन मंथन तो चल रहा है। माहिर मानते हैं कि सरकार बीच का रास्ता पकड़ सकती है। इस बीच प्रदीप गुट खुलकर यूपीएस के विरोध में बोल रहा है, जबकि त्रिलोक गुट यूं तो ओपीएस के ही समर्थन में है, मगर यह भी कह रहा है कि यदि कोई कर्मचारी यूपीएस लेना चाहे तो सरकार को विकल्प देना चाहिए। यानी यूपीएस फैक्टर कर्मचारी राजनीति के समीकरण भी बदल सकता है।

बहरहाल, इंतज़ार सरकार के फैसले का है&mdash;यूपीएस पर भी और महासंघ की मान्यता पर भी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p data-end="139" data-start="50" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong data-end="97" data-start="50">दो समानांतर महासंघ, न मान्यता मिली न जेसीसी</strong><br data-end="100" data-start="97" />
<strong data-end="137" data-start="100">यूपीएस पर सरकार के रुख पर भी नज़र</strong></span></p>

<p data-end="970" data-start="141" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">सवा दो साल बीत गए, मगर हिमाचल की सुक्खू सरकार ने अब तक अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता नहीं दी। जेसीसी की बैठक तो और भी दूर की कौड़ी लगती है। महासंघ की मान्यता के लिए दो दावेदार मैदान में हैं&mdash;प्रदीप ठाकुर और त्रिलोक ठाकुर। दोनों ही समानांतर महासंघ तैयार कर चुके हैं, दोनों ही कर्मचारियों के मसले उजागर कर रहे हैं और दोनों ही मान्यता की अर्जी समय-समय पर मुख्यमंत्री को सौंप चुके हैं। मुख्यमंत्री मुलाकात भी दोनों महासंघों से कर रहे हैं। अभी बीते कल ही त्रिलोक गुट मुख्यमंत्री से मिला था... इससे पहले समय-समय पर प्रदीप गुट भी मुख्यमंत्री से मिला है। मगर मान्यता अब तक किसी को नहीं मिली। हां, आश्वासन ज़रूर मिला है कि बजट सत्र के बाद इस मसले पर चर्चा करेंगे। मगर यह आश्वासन तो पहले भी मिला था और तब से मिल रहा है जब से प्रदेश में सरकार बनी है। ज़ाहिर है, लगातार बढ़ते इस इंतज़ार से अंदरखाने कर्मचारियों में रोष पनपने लगा है।</span></p>

<p data-end="1468" data-start="972" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">वैसे देखा जाए तो कर्मचारी संगठनों को देर से मान्यता देने की रवायत हिमाचल में पुरानी है। पूर्व की जयराम सरकार ने भी अश्विनी ठाकुर वाले महासंघ को मान्यता देने में साढ़े तीन साल से भी ज़्यादा का वक्त लिया था। इससे पहले भी कुछ सरकारों ने यही किया। हालांकि, इस बार माना जा रहा था कि सरकार जल्द महासंघ को मान्यता दे सकती है, किंतु ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान सरकार भी पूर्व सरकार की परिपाटी पर ही आगे बढ़ रही है&mdash;वही कर रही है जो पूर्व की जयराम सरकार ने किया। मान्यता के लिए कर्मचारियों को अंत तक लटकाए रखा।</span></p>

<p data-end="2044" data-start="1470" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">बता दें कि हिमाचल में अभी कर्मचारियों के कई मसले लंबित हैं। सभी कर्मचारी संगठन विभिन्न स्तरों पर अपने मसले उजागर भी कर रहे हैं, मगर कर्मचारी संगठन मानते हैं कि इनके निपटारे के लिए जेसीसी ज़रूरी है। हालांकि, फिलहाल इसके कोई संकेत नहीं हैं। जानकार मान रहे हैं कि संभवतः अपने चौथे साल में ही सरकार इस पर निर्णय ले। वैसे देरी की वजह भी स्वाभाविक है। जेसीसी में सरकार पर कर्मचारियों की लंबित मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में लाज़मी है कि खराब आर्थिक स्थिति के बीच सरकार फिलहाल इसे टालना चाहे। लेकिन सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में वित्तीय स्थिति बेहतर होगी?</span></p>

<p data-end="3031" data-start="2046" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">वैसे इन दिनों कर्मचारी राजनीति में एक और बड़ा मसला भी है&mdash;ओपीएस और यूपीएस के बीच छिड़ी प्रतिस्पर्धा। प्रदीप ठाकुर ओपीएस आंदोलन से निकले हैं और उनकी पूरी राजनीति अब तक इसी के इर्द-गिर्द रही है। कांग्रेस सरकार के गठन के बाद ओपीएस बहाली का श्रेय भी प्रदीप गुट को दिया जाता है और इसी के चलते काफ़ी संख्या में कर्मचारी उनके साथ हैं। किंतु बीते दिनों यूपीएस का जिक्र कर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्र सरकार भी आर्थिक मदद की पेशकश कर प्रदेश सरकार से यूपीएस लागू करने का आग्रह कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान का खंडन कांग्रेस के किसी नेता ने नहीं किया। इशारा साफ़ है कि यूपीएस लागू हो या न हो, लेकिन मंथन तो चल रहा है। माहिर मानते हैं कि सरकार बीच का रास्ता पकड़ सकती है। इस बीच प्रदीप गुट खुलकर यूपीएस के विरोध में बोल रहा है, जबकि त्रिलोक गुट यूं तो ओपीएस के ही समर्थन में है, मगर यह भी कह रहा है कि यदि कोई कर्मचारी यूपीएस लेना चाहे तो सरकार को विकल्प देना चाहिए। यानी यूपीएस फैक्टर कर्मचारी राजनीति के समीकरण भी बदल सकता है।</span></p>

<p data-end="3110" data-is-last-node="" data-is-only-node="" data-start="3033" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">बहरहाल, इंतज़ार सरकार के फैसले का है&mdash;यूपीएस पर भी और महासंघ की मान्यता पर भी।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall39656.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Employee Wave: Sukhu Government on Jairam's Path]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/no-jcc-yet-by-sukkhu-government]]></guid>
                       <title><![CDATA[जयराम ने साढ़े तीन साल बाद दी थी मान्यता, सुक्खू सरकार भी उसी राह पर !]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/no-jcc-yet-by-sukkhu-government]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 27 Feb 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[
दो समानांतर महासंघ, न मान्यता मिली न जेसीसी का गठन&nbsp;

यूपीएस पर सरकार के रुख पर भी नज़र



हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार अपना करीब सवा दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाली है लेकिन इस दौरान हिमाचल प्रदेश में न तो अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता मिली है और न ही जेसीसी का गठन हुआ है। ऐसे अंदरखाते कर्मचारियों में रोष पनपता दिख रहा है। कर्मचारियों के कई मसले लंबित है और कर्मचारी संगठन मानते है कि इनके निबटारे के लिए जेसीसी जरूरी है।

&nbsp; हिमाचल में कमर्चारियों के दोनों समानांतर महासंघ मान्यता की बाबत सरकार के समक्ष अपना -अपना दावा रख चुके है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। इन दो गुटों में से एक के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर है जो ओपीएस आंदोलन का नेतृत्व करते रहे है, जबकि दूसरे गुट के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर है। इससे पहले में भी प्रदेश में कर्मचारियों के समांनातर गुट रहे है, लेकिन सरकारें अपने करीबियों पर भरोसा जताती रही है।&nbsp;

&nbsp; &nbsp;हालांकि कर्मचारी संगठनों&nbsp; को देर से मान्यता देने की रवायत हिमाचल में पुरानी है। पूर्व की जयराम सरकार ने भी अश्वनी ठाकुर वाले महासंघ को मान्यता देने में साढ़े तीन साल से भी ज्यादा का वक्त लिया था।&nbsp; हालांकि इस बार माना जा रहा था की सरकार जल्द अपने चेहते महासंघ को मान्यता दे सकती है, किन्तु ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान सरकार भी पूर्व सरकार की परिपाटी पर ही आगे बढ़ रही है और जानकार मान रहे है कि संभवतः अपने चौथे साल में ही सरकार इस पर निर्णय ले।&nbsp;

&nbsp; &nbsp;वैसे देरी की वजह भी स्वाभाविक है। जेसीसी में सरकार पर कर्मचारियों की लंबित मांगो को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में लाजमी है खराब आर्थिक स्थिति के बीच सरकार फिलहाल इसे टालना चाहे।&nbsp;

&#39;यूपीएस&#39; बदल न दे&nbsp;समीकरण !

&nbsp; प्रदीप ठाकुर ओपीएस आंदोलन से निकले है और उनकी पूरी राजनीति अब तक इसी के इर्द गिर्द रही है। कांग्रेस सरकार का गठन के बाद ओपीएस बहाली का श्रेय भी प्रदीप गुट को दिया जाता है और इसी के चलते काफी संख्या में कर्मचारी इनके साथ है। किन्तु बीते दिनों यूपीएस का जिक्र कर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्र सरकार भी आर्थिकी मदद की पेशकश कर प्रदेश सरकार से यूपीएस लागू करने का आग्रह कर रही है। दिलचस्प बात ये है कि मंत्री विक्रमादित्य&nbsp; सिंह के ब्यान का खंडन कांग्रेस के किसी नेता ने नहीं किया। इशारा साफ़ है कि यूपीएस लागू हो या न हो, लेकिन मंथन तो चला है। माहिर मानते है कि सरकार बीच का रास्ता पकड़ सकती है। इस बीच प्रदीप गुट खुलकर यूपीएस के विरोध में बोल रहा है, जबकि त्रिलोक गुट का कहना है कि यदि कर्मचारी यूपीएस लेना चाहे तो सरकार को विकल्प देना चाहिए। यानी यूपीएस फैक्टर कर्मचारी राजनीति के समीकरण भी बदल सकता है।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;">दो समानांतर महासंघ, न मान्यता मिली न जेसीसी का गठन&nbsp;</span></strong></p>

<p style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;">यूपीएस पर सरकार के रुख पर भी नज़र</span></strong></p>
</blockquote>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार अपना करीब सवा दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाली है लेकिन इस दौरान हिमाचल प्रदेश में न तो अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता मिली है और न ही जेसीसी का गठन हुआ है। ऐसे अंदरखाते कर्मचारियों में रोष पनपता दिख रहा है। कर्मचारियों के कई मसले लंबित है और कर्मचारी संगठन मानते है कि इनके निबटारे के लिए जेसीसी जरूरी है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; हिमाचल में कमर्चारियों के दोनों समानांतर महासंघ मान्यता की बाबत सरकार के समक्ष अपना -अपना दावा रख चुके है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। इन दो गुटों में से एक के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर है जो ओपीएस आंदोलन का नेतृत्व करते रहे है, जबकि दूसरे गुट के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर है। इससे पहले में भी प्रदेश में कर्मचारियों के समांनातर गुट रहे है, लेकिन सरकारें अपने करीबियों पर भरोसा जताती रही है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; &nbsp;हालांकि कर्मचारी संगठनों&nbsp; को देर से मान्यता देने की रवायत हिमाचल में पुरानी है। पूर्व की जयराम सरकार ने भी अश्वनी ठाकुर वाले महासंघ को मान्यता देने में साढ़े तीन साल से भी ज्यादा का वक्त लिया था।&nbsp; हालांकि इस बार माना जा रहा था की सरकार जल्द अपने चेहते महासंघ को मान्यता दे सकती है, किन्तु ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान सरकार भी पूर्व सरकार की परिपाटी पर ही आगे बढ़ रही है और जानकार मान रहे है कि संभवतः अपने चौथे साल में ही सरकार इस पर निर्णय ले।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; &nbsp;वैसे देरी की वजह भी स्वाभाविक है। जेसीसी में सरकार पर कर्मचारियों की लंबित मांगो को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में लाजमी है खराब आर्थिक स्थिति के बीच सरकार फिलहाल इसे टालना चाहे।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>&#39;यूपीएस&#39; बदल न दे&nbsp;समीकरण !</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; प्रदीप ठाकुर ओपीएस आंदोलन से निकले है और उनकी पूरी राजनीति अब तक इसी के इर्द गिर्द रही है। कांग्रेस सरकार का गठन के बाद ओपीएस बहाली का श्रेय भी प्रदीप गुट को दिया जाता है और इसी के चलते काफी संख्या में कर्मचारी इनके साथ है। किन्तु बीते दिनों यूपीएस का जिक्र कर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्र सरकार भी आर्थिकी मदद की पेशकश कर प्रदेश सरकार से यूपीएस लागू करने का आग्रह कर रही है। दिलचस्प बात ये है कि मंत्री विक्रमादित्य&nbsp; सिंह के ब्यान का खंडन कांग्रेस के किसी नेता ने नहीं किया। इशारा साफ़ है कि यूपीएस लागू हो या न हो, लेकिन मंथन तो चला है। माहिर मानते है कि सरकार बीच का रास्ता पकड़ सकती है। इस बीच प्रदीप गुट खुलकर यूपीएस के विरोध में बोल रहा है, जबकि त्रिलोक गुट का कहना है कि यदि कर्मचारी यूपीएस लेना चाहे तो सरकार को विकल्प देना चाहिए। यानी यूपीएस फैक्टर कर्मचारी राजनीति के समीकरण भी बदल सकता है।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall39593.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[no-jcc-yet-by-sukkhu-government]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/big-blow-to-employees-in-himachal-pradesh-demotion-instead-of-promotion-salary-to-be-recovered]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को बड़ा झटका .....प्रमोशन के बजाय डिमोशन, वेतन की होगी रिकवरी]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/big-blow-to-employees-in-himachal-pradesh-demotion-instead-of-promotion-salary-to-be-recovered]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 27 Feb 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश में कुछ सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन के बजाय डिमोशन मिलने वाला है और सिर्फ यही नहीं, इसके साथ ही उन्हें अतिरिक्त मिली सैलरी भी वापस करनी होगी। यह सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन सच है। दरअसल, 20 फरवरी 2024 से लागू हुए &quot;सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक, 2024&quot; के तहत एक अहम बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में कॉन्ट्रैक्ट पीरियड का सिनिओरिटी में लाभ नहीं मिलेगा। यदि पहले किसी कर्मचारी को इस आधार पर प्रमोशन या वित्तीय लाभ दिया गया था, तो अब न केवल वह डिमोट होगा, बल्कि उससे अतिरिक्त वेतन की रिकवरी (वसूली) भी की जाएगी।

&nbsp;

सरल भाषा में कहें तो कर्मचारियों की वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ केवल उनके रेगुलर&nbsp;होने की तिथि से ही मान्य होंगे, कॉन्ट्रैक्ट के सालों को इसमें नहीं गिना जाएगा। बता दें, पहले कई विभागों में कर्मचारियों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता एवं वित्तीय लाभ दिया गया था। लेकिन अब इस संशोधन के बाद उन सभी कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें इस लाभ का फायदा मिला था।

&nbsp;

ऐसे में अब अनुबंध अवधि को वरिष्ठता में जोड़कर प्रमोशन पाने वालों को वापस उनके पुराने पद पर भेजा जाएगा। जिन कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन मिला है, उनसे वह राशि वापस ली जाएगी और कर्मचारियों की अगली वेतन वृद्धि भी रोकी जाएगी। जाहिर है, यह प्रदेश के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है और कर्मचारी इस फैसले से नाराज़ हैं। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की ओर से जल्द ही &quot;सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक, 2024&quot; को चुनौती दी जाएगी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text false" style="white-space-collapse: preserve;">हिमाचल प्रदेश में कुछ सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन के बजाय डिमोशन मिलने वाला है और सिर्फ यही नहीं, इसके साथ ही उन्हें अतिरिक्त मिली सैलरी भी वापस करनी होगी। यह सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन सच है। </span><span style="white-space-collapse: preserve;">दरअसल, 20 फरवरी 2024 से लागू हुए &quot;सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक, 2024&quot; के तहत एक अहम बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में </span>कॉन्ट्रैक्ट पीरियड का सिनिओरिटी<span style="white-space-collapse: preserve;"> में लाभ नहीं मिलेगा। यदि पहले किसी कर्मचारी को इस आधार पर प्रमोशन या वित्तीय लाभ दिया गया था, तो अब न केवल वह डिमोट होगा, बल्कि उससे अतिरिक्त वेतन की रिकवरी (वसूली) भी की जाएगी।</span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text false" style="white-space-collapse: preserve;">सरल भाषा में कहें तो कर्मचारियों की वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ केवल उनके </span>रेगुलर&nbsp;<span class="selectable-text copyable-text false" style="white-space-collapse: preserve;">होने की तिथि से ही मान्य होंगे, कॉन्ट्रैक्ट के सालों को इसमें नहीं गिना जाएगा। बता दें, पहले कई विभागों में कर्मचारियों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता एवं वित्तीय लाभ दिया गया था। लेकिन अब इस संशोधन के बाद उन सभी कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें इस लाभ का फायदा मिला था।</span></span></p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p class="selectable-text copyable-text x15bjb6t x1n2onr6" dir="ltr" style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span class="selectable-text copyable-text false" style="white-space-collapse: preserve;">ऐसे में अब अनुबंध अवधि को वरिष्ठता में जोड़कर प्रमोशन पाने वालों को वापस उनके पुराने पद पर भेजा जाएगा। जिन कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन मिला है, उनसे वह राशि वापस ली जाएगी और कर्मचारियों की अगली वेतन वृद्धि भी रोकी जाएगी। जाहिर है, यह प्रदेश के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है और कर्मचारी इस फैसले से नाराज़ हैं। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की ओर से जल्द ही &quot;सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक, 2024&quot; को चुनौती दी जाएगी।</span></span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall39590.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Big Blow to Employees in Himachal Pradesh Demotion Instead of Promotion, Salary to be Recovered]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal-cook-category-employees-working-in-police-department-met-ld-chauhan-in-shimla]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल:  पुलिस विभाग में कार्यरत कुक श्रेणी कर्मचारियों ने शिमला में एल ड़ी चौहान से की मुलाकात ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal-cook-category-employees-working-in-police-department-met-ld-chauhan-in-shimla]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 30 Sep 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यरत कुक श्रेणी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ के राज्य उपाध्यक्ष एल ड़ी चौहान से शिमला में मुलाकात की तथा महासंघ के साथ जुड़ने बारे अपना विश्वास प्रकट किया। हिमाचल प्रदेश एनजीओ फेडरेशन के राज्य उपाध्यक्ष ने इन कर्मियों की मांगों को सुना तथा आश्वस्त किया कि जल्द इन मांगों को पुलिस महानिदेशक तथा गृह सचिव के समक्ष रखा जाएगा। चौहान ने कहा कि&nbsp; प्रदेश पुलिस विभाग में मुख्यालय, थानों, अधीक्षक कार्यालयों, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, 6 भारतीय आरक्षी वाहनियों, एक बटालियन में लगे मेस में लगभग 250 के करीब कुक अपनी सेवाएं दिन रात देते है, लेकिन विभाग द्वारा आज तक इनके लिए कोई भी पदोन्नति का प्रावधान नही किया गया है तथा तृतीय श्रेणी में होने पर भी इनको वेतन वही पुराने वाला चतुर्थ श्रेणी के बराबर निर्धारित किया गया है, जो कि इस श्रेणी के साथ सरासर अन्याय है। चौहान ने कहा कि 1996 से पूर्व कुक चतुर्थ श्रेणी में थे तथा न्यायालय के आदेश पर 1996 के बाद इस श्रेणी को क्लास-3 तो बनाया गया लेकिन 2012 के revise वेतन आयोग में इनको छोड़ दिया गया, इससे जहां इनको वितीय नुकसान हुआ वही अब ये लिपिक या अन्य श्रेणी पर पदोन्नत या LDR भर्ती पात्रता से भी बाहर हो गए, क्योंकि उसके लिए चतुर्थ श्रेणी ही पात्र है। एल ड़ी चौहान ने प्रदेश सरकार व पुलिस महानिदेशक से मांग रखी है जल्द कुक श्रेणी की अगली पदोन्नति हेतु नियमो में प्रावधान किया जाए तथा इनकी वेतन विसंगति को भी दुरुस्त करते हुए पूर्व की भांति इन्हें लिपिक व कॉन्स्टेबल के बराबर वेतन निर्धारित किया जाए, क्योंकि पदोन्नति सभी का संवैधानिक अधिकार है। महासंघ जल्द इस मुद्दे पर सचिव गृह से भी मुलाकात करेगा तथा कुक श्रेणी को न्याय देने की गुहार करेगा।
&nbsp;&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यरत कुक श्रेणी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ के राज्य उपाध्यक्ष एल ड़ी चौहान से शिमला में मुलाकात की तथा महासंघ के साथ जुड़ने बारे अपना विश्वास प्रकट किया। हिमाचल प्रदेश एनजीओ फेडरेशन के राज्य उपाध्यक्ष ने इन कर्मियों की मांगों को सुना तथा आश्वस्त किया कि जल्द इन मांगों को पुलिस महानिदेशक तथा गृह सचिव के समक्ष रखा जाएगा। चौहान ने कहा कि&nbsp; प्रदेश पुलिस विभाग में मुख्यालय, थानों, अधीक्षक कार्यालयों, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, 6 भारतीय आरक्षी वाहनियों, एक बटालियन में लगे मेस में लगभग 250 के करीब कुक अपनी सेवाएं दिन रात देते है, लेकिन विभाग द्वारा आज तक इनके लिए कोई भी पदोन्नति का प्रावधान नही किया गया है तथा तृतीय श्रेणी में होने पर भी इनको वेतन वही पुराने वाला चतुर्थ श्रेणी के बराबर निर्धारित किया गया है, जो कि इस श्रेणी के साथ सरासर अन्याय है। चौहान ने कहा कि 1996 से पूर्व कुक चतुर्थ श्रेणी में थे तथा न्यायालय के आदेश पर 1996 के बाद इस श्रेणी को क्लास-3 तो बनाया गया लेकिन 2012 के revise वेतन आयोग में इनको छोड़ दिया गया, इससे जहां इनको वितीय नुकसान हुआ वही अब ये लिपिक या अन्य श्रेणी पर पदोन्नत या LDR भर्ती पात्रता से भी बाहर हो गए, क्योंकि उसके लिए चतुर्थ श्रेणी ही पात्र है। एल ड़ी चौहान ने प्रदेश सरकार व पुलिस महानिदेशक से मांग रखी है जल्द कुक श्रेणी की अगली पदोन्नति हेतु नियमो में प्रावधान किया जाए तथा इनकी वेतन विसंगति को भी दुरुस्त करते हुए पूर्व की भांति इन्हें लिपिक व कॉन्स्टेबल के बराबर वेतन निर्धारित किया जाए, क्योंकि पदोन्नति सभी का संवैधानिक अधिकार है। महासंघ जल्द इस मुद्दे पर सचिव गृह से भी मुलाकात करेगा तथा कुक श्रेणी को न्याय देने की गुहार करेगा।<br />
&nbsp;&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37962.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Himachal: Cook category employees working in Police Department met LD Chauhan in Shimla.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/solan-employees-of-mahasangh-district-solan-gave-a-warm-welcome-to-the-education-minister-on-his-arrival-in-arki]]></guid>
                       <title><![CDATA[सोलन: शिक्षा मंत्री के अर्की में पधारने पर महासंघ जिला सोलन के कर्मचारी वर्ग ने किया जोरदार स्वागत ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/solan-employees-of-mahasangh-district-solan-gave-a-warm-welcome-to-the-education-minister-on-his-arrival-in-arki]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 19 Sep 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[सोलन:&nbsp; बीते दिन राज्यस्तरीय सायर मेले के सुअवसर पर मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री&nbsp; रोहित ठाकुर का अर्की में पधारने पर अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला सोलन के कर्मचारी वर्ग के द्वारा जिला अध्यक्ष मनदीप ठाकुर की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय सायर मेले की आखरी संध्या पर जोरदार स्वागत किया गया तथा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थ&nbsp; को शॉल, टोपी व वीरता और शौर्य का प्रतीक खुखरी भेंट कर सम्मानित किया गया।&nbsp;जिला कर्मचारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए मनदीप ठाकुर के द्वारा शिक्षा मंत्री को&nbsp; मांग पत्र के माध्यम से राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता प्रदान करने के बारे में अपनी बात रखी। इसके अतिरिक्त अन्य&nbsp; मांगो में&nbsp; शिक्षा विभाग में अराजपत्रित कर्मचारी वर्ग की मुख्य मांगो के संदर्भ में मांग पत्र दिया। जिन पर&nbsp; मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी के माध्यम से राज्य उपाध्यक्ष आई डी शर्मा के द्वारा&nbsp; शिक्षा मंत्री&nbsp; रोहित ठाकुर के समक्ष&nbsp; शिक्षा विभाग में&nbsp; कार्यरत श्रेणी IV कर्मचारी वर्ग की पदोन्नति लिपिक पद पर और अराजपत्रित श्रेणी lll लिपिक वर्ग की पदोन्नति वरिष्ठ सहायक पद पर करने की मांग पर अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा, जिस पर कार्यवाई करते हुए शिक्षा मंत्री&nbsp; के द्वारा तुरंत प्रभाव से उच्च अधिकारी वर्ग को फोन के माध्यम से अधिकारी वर्ग से जानकारी ली, जिस पर अधिकारी वर्ग के द्वारा लिपिक से वरिष्ठ सहायक की पदोन्नति पर&nbsp; शीघ्र लिस्ट जारी करने हेतु आश्वस्त किया। तो वन्ही अधिकारी वर्ग के द्वारा&nbsp; श्रेणी IV कर्मचारी वर्ग की लंबित पदोन्नति पर जानकारी देते हुए कहा कि पात्र कर्मचारी वर्ग को शीघ्र लिपिक पद पदोन्नति आदेश जारी कर दिए जाएगें, मंत्री के द्वारा अन्य मांगों पर भी आवश्यक कार्यवाही हेतु आश्वस्त किया। इस मौके पर राज्य संगठन सचिव किशोर कुमार, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला सोलन&nbsp; महासचिव हरचरण सिंह, जिला उपाध्यक्ष देशराज ठाकुर, वित सचिव मोहन राठौर, सह सचिव सत्य देव रतुड़ी, ब्लॉक अध्यक्ष अर्की ओम प्रकाश ठाकुर, ब्लॉक दाडलाघाट उपाध्यक्ष अशोक अवस्थी सह सचिव भुवनेश्वर शर्मा, अनिल कुमार, खेम चंद, सोहन लाल आदि अन्य कर्मचारी साथी मौजूद रहे ।&nbsp; &nbsp;&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">सोलन:&nbsp; बीते दिन राज्यस्तरीय सायर मेले के सुअवसर पर मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री&nbsp; रोहित ठाकुर का अर्की में पधारने पर अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला सोलन के कर्मचारी वर्ग के द्वारा जिला अध्यक्ष मनदीप ठाकुर की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय सायर मेले की आखरी संध्या पर जोरदार स्वागत किया गया तथा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थ&nbsp; को शॉल, टोपी व वीरता और शौर्य का प्रतीक खुखरी भेंट कर सम्मानित किया गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">जिला कर्मचारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए मनदीप ठाकुर के द्वारा शिक्षा मंत्री को&nbsp; मांग पत्र के माध्यम से राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को मान्यता प्रदान करने के बारे में अपनी बात रखी। इसके अतिरिक्त अन्य&nbsp; मांगो में&nbsp; शिक्षा विभाग में अराजपत्रित कर्मचारी वर्ग की मुख्य मांगो के संदर्भ में मांग पत्र दिया। जिन पर&nbsp; मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी के माध्यम से राज्य उपाध्यक्ष आई डी शर्मा के द्वारा&nbsp; शिक्षा मंत्री&nbsp; रोहित ठाकुर के समक्ष&nbsp; शिक्षा विभाग में&nbsp; कार्यरत श्रेणी IV कर्मचारी वर्ग की पदोन्नति लिपिक पद पर और अराजपत्रित श्रेणी lll लिपिक वर्ग की पदोन्नति वरिष्ठ सहायक पद पर करने की मांग पर अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा, जिस पर कार्यवाई करते हुए शिक्षा मंत्री&nbsp; के द्वारा तुरंत प्रभाव से उच्च अधिकारी वर्ग को फोन के माध्यम से अधिकारी वर्ग से जानकारी ली, जिस पर अधिकारी वर्ग के द्वारा लिपिक से वरिष्ठ सहायक की पदोन्नति पर&nbsp; शीघ्र लिस्ट जारी करने हेतु आश्वस्त किया। तो वन्ही अधिकारी वर्ग के द्वारा&nbsp; श्रेणी IV कर्मचारी वर्ग की लंबित पदोन्नति पर जानकारी देते हुए कहा कि पात्र कर्मचारी वर्ग को शीघ्र लिपिक पद पदोन्नति आदेश जारी कर दिए जाएगें, मंत्री के द्वारा अन्य मांगों पर भी आवश्यक कार्यवाही हेतु आश्वस्त किया। इस मौके पर राज्य संगठन सचिव किशोर कुमार, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला सोलन&nbsp; महासचिव हरचरण सिंह, जिला उपाध्यक्ष देशराज ठाकुर, वित सचिव मोहन राठौर, सह सचिव सत्य देव रतुड़ी, ब्लॉक अध्यक्ष अर्की ओम प्रकाश ठाकुर, ब्लॉक दाडलाघाट उपाध्यक्ष अशोक अवस्थी सह सचिव भुवनेश्वर शर्मा, अनिल कुमार, खेम चंद, सोहन लाल आदि अन्य कर्मचारी साथी मौजूद रहे ।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37836.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Solan: Employees of Mahasangh District Solan gave a warm welcome to the Education Minister on his arrival in Arki.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/financial-security-provided-by-ups-after-retirement-will-boost-the-morale-of-employees-and-officers-dhumal]]></guid>
                       <title><![CDATA[सेवानिवृत्ति के बाद UPS द्वारा मिलने वाली वित्तीय सुरक्षा बढ़ाएगी कर्मचारियों अधिकारियों का मनोबल: धूमल]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/financial-security-provided-by-ups-after-retirement-will-boost-the-morale-of-employees-and-officers-dhumal]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 25 Aug 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[**पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा यूपीएस के उपरान्त कर्मचारियों के मन से सेवानिवृति के बाद आर्थिक असुरक्षा की शंका का भाव हुआ समाप्त

** धूमल ने&nbsp;प्रधानमंत्री मोदी&nbsp; को यूनिफाइड पेंशन स्कीम की मंजूरी पर धन्यवाद व्यक्त किया

वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को मंजूरी देने के फैसले का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय को कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया, जिससे सरकारी कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित रहेगा। प्रो. धूमल ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के पश्चात यूनिफाइड पेंशन स्कीम द्वारा मिलने वाले वित्तीय सुरक्षा लाभों से कर्मचारी और अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा। 25 वर्ष नौकरी करने के पश्चात कर्मचारियों को उसकी एवरेज बेसिक पे का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा और यदि कर्मचारी 10 साल नौकरी करता है तो उसको कम से कम ₹10000 पेंशन प्रतिमाह जरूर मिलेगी यही नहीं सेवानिवृत कर्मचारियों की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी को 60% पेंशन मिलेगी। यूनिफाइड पेंशन स्कीम आने के उपरांत जो कर्मचारी और अधिकारियों के मन में सेवा निवृत्ति के पश्चात आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक शंका का माहौल बना हुआ था वह समाप्त होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि UPS के तहत कर्मचारियों के भविष्य की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस योजना के अंतर्गत, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों द्वारा अंशदान किया जाएगा, जो एक केंद्रीय कोष में जमा होगा। इस कोष का सुरक्षित और पारदर्शी निवेश किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को उनकी सेवा के बाद पेंशन के रूप में एक स्थिर आय प्राप्त होगी। यह स्थिरता कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा का आधार बनेगी।&nbsp;प्रो धूमल ने कहा कि&nbsp; यूनिफाइड पेंशन स्कीम में पेंशन प्रक्रिया को पारदर्शी और स्थिर बनाया गया है। सरकार द्वारा कोष का प्रबंधन किया जाएगा, जिससे पेंशन की राशि का निर्धारण निष्पक्ष और संतुलित तरीके से होगा। इससे कर्मचारियों को पेंशन के मामले में किसी भी तरह की असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।&nbsp;पूर्व मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि UPS ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के बीच के अंतर को समाप्त कर दिया है। यह समायोजन सभी कर्मचारियों को एक समान पेंशन का अधिकार देता है, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी असमानता का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह समायोजन विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है जो पुरानी और नई पेंशन योजनाओं के बीच भ्रमित थे।

उन्होंने कहा कि UPS के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। पेंशन की राशि को इस प्रकार से निर्धारित किया गया है कि वह कर्मचारियों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो। इससे कर्मचारियों को वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी और वे सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने जीवन को सम्मानजनक तरीके से जी सकेंगे।&nbsp;प्रो धूमल ने कहा कि&nbsp; यह योजना न केवल कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगी। UPS के माध्यम से कर्मचारियों को पेंशन की गारंटी मिलने से उनके परिवार के सदस्य भी सुरक्षित और संरक्षित महसूस करेंगे।&nbsp;प्रो. धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि UPS न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें उनके योगदान को उचित सम्मान देने में भी सहायक होगी। प्रो. धूमल ने आशा व्यक्त की कि इस योजना से कर्मचारियों को आत्मविश्वास मिलेगा और वे अपनी सेवाओं को और भी अधिक समर्पण और उत्साह के साथ निभा सकेंगे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">**पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा यूपीएस के उपरान्त कर्मचारियों के मन से सेवानिवृति के बाद आर्थिक असुरक्षा की शंका का भाव हुआ समाप्त</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">** </span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">धूमल ने</span><span style="font-size:18px;">&nbsp;प्रधानमंत्री मोदी&nbsp; को यूनिफाइड पेंशन स्कीम की मंजूरी पर धन्यवाद व्यक्त किया</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को मंजूरी देने के फैसले का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय को कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया, जिससे सरकारी कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित रहेगा। प्रो. धूमल ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के पश्चात यूनिफाइड पेंशन स्कीम द्वारा मिलने वाले वित्तीय सुरक्षा लाभों से कर्मचारी और अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा। 25 वर्ष नौकरी करने के पश्चात कर्मचारियों को उसकी एवरेज बेसिक पे का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा और यदि कर्मचारी 10 साल नौकरी करता है तो उसको कम से कम ₹10000 पेंशन प्रतिमाह जरूर मिलेगी यही नहीं सेवानिवृत कर्मचारियों की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी को 60% पेंशन मिलेगी। यूनिफाइड पेंशन स्कीम आने के उपरांत जो कर्मचारी और अधिकारियों के मन में सेवा निवृत्ति के पश्चात आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक शंका का माहौल बना हुआ था वह समाप्त होगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि UPS के तहत कर्मचारियों के भविष्य की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस योजना के अंतर्गत, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों द्वारा अंशदान किया जाएगा, जो एक केंद्रीय कोष में जमा होगा। इस कोष का सुरक्षित और पारदर्शी निवेश किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को उनकी सेवा के बाद पेंशन के रूप में एक स्थिर आय प्राप्त होगी। यह स्थिरता कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा का आधार बनेगी।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">प्रो धूमल ने कहा कि&nbsp; यूनिफाइड पेंशन स्कीम में पेंशन प्रक्रिया को पारदर्शी और स्थिर बनाया गया है। सरकार द्वारा कोष का प्रबंधन किया जाएगा, जिससे पेंशन की राशि का निर्धारण निष्पक्ष और संतुलित तरीके से होगा। इससे कर्मचारियों को पेंशन के मामले में किसी भी तरह की असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">पूर्व मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि UPS ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के बीच के अंतर को समाप्त कर दिया है। यह समायोजन सभी कर्मचारियों को एक समान पेंशन का अधिकार देता है, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी असमानता का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह समायोजन विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है जो पुरानी और नई पेंशन योजनाओं के बीच भ्रमित थे।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">उन्होंने कहा कि UPS के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। पेंशन की राशि को इस प्रकार से निर्धारित किया गया है कि वह कर्मचारियों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो। इससे कर्मचारियों को वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी और वे सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने जीवन को सम्मानजनक तरीके से जी सकेंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">प्रो धूमल ने कहा कि&nbsp; यह योजना न केवल कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगी। UPS के माध्यम से कर्मचारियों को पेंशन की गारंटी मिलने से उनके परिवार के सदस्य भी सुरक्षित और संरक्षित महसूस करेंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">प्रो. धूमल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि UPS न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें उनके योगदान को उचित सम्मान देने में भी सहायक होगी। प्रो. धूमल ने आशा व्यक्त की कि इस योजना से कर्मचारियों को आत्मविश्वास मिलेगा और वे अपनी सेवाओं को और भी अधिक समर्पण और उत्साह के साथ निभा सकेंगे।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37549.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Financial security provided by UPS after retirement will boost the morale of employees and officers: Dhumal]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/a-delegation-of-electricity-board-technical-employees-met-the-electricity-board-management-class]]></guid>
                       <title><![CDATA[विद्युत बोर्ड प्रबंधक वर्ग से मिला बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी का प्रतिनिधि मंडल ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/a-delegation-of-electricity-board-technical-employees-met-the-electricity-board-management-class]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 23 Aug 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[
बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधि मंडल बीते कल प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा की अध्यक्षता में विद्युत बोर्ड प्रबंधक वर्ग से मिला, जिसमे नॉन आईटीआई&nbsp; टी मेट एवं&nbsp; नान आईटीआई&nbsp; ALM&nbsp; को एकमुश्त पदोन्नत करने जनरेशन विंग में फिटर से फोरमैन एवं कनिष्ठ अभियंता पदोन्नत करने बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा हुई, जिसमे बोर्ड प्रबंधक वर्ग ने इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कर्मचारियों के हित में फैसला लेने का आश्वासन दिया। उसके उपरांत संघ का&nbsp; प्रतिनिधिमंडल हिमाचल&nbsp; प्रदेश सरकार&nbsp; में तकनीकी शिक्षा मंत्री&nbsp; राजेश धर्माणी से राज्य सचिवालय में मिला।&nbsp; राजेश धर्माणी को सरकार द्वारा बिजली बोर्ड के संदर्भ मे कैबिनेट सब कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है । इसी संदर्भ में तकनीकी कर्मचारी संघ ने मंत्री&nbsp; को&nbsp; विद्युत बोर्ड में फील्ड की वर्तमान वास्तविक स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया, जिसमे तकनीकी संघ ने बोर्ड में खाली चल रही तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी की वजह से बढ़ रहे वर्क लोड और हादसों पर भी चर्चा की गई । तकनीकी कर्मचारियों की संख्या कम होने पर भी 26 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को&nbsp; तकनीकी कर्मचारी पूरे प्रदेश विद्युत आपूर्ति सुचारु रुप से दे रहा है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए जल्द पुरानी पेंशन सरकार की तर्ज़ पर बहाल हो , जो कर्मचारी 12- 14 वर्ष से विभिन्न&nbsp; एजेंसी&nbsp; के माध्यम से आउटसोर्स पर कार्य कर रहे है उन के लिए नीति बनाकर बोर्ड में मर्ज किया जाए । बिजली बोर्ड में तकनीकी कर्मचारियों की जल्द भर्ती हो।&nbsp;विद्युत को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्टोर में आवश्यक सामान जैसे फ्यूज वायर, टेप , mccb , किट कैट, केबल, की उपलब्धता सुनिश्चित करना। मंत्री ने उपरोक्त सभी मांगों को सब कमिटी में चर्चा के उपरांत पूरी करने का आश्वासन दिया है ।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधि मंडल बीते कल प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा की अध्यक्षता में विद्युत बोर्ड प्रबंधक वर्ग से मिला, जिसमे नॉन आईटीआई&nbsp; टी मेट एवं&nbsp; नान आईटीआई&nbsp; ALM&nbsp; को एकमुश्त पदोन्नत करने जनरेशन विंग में फिटर से फोरमैन एवं कनिष्ठ अभियंता पदोन्नत करने बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा हुई, जिसमे बोर्ड प्रबंधक वर्ग ने इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कर्मचारियों के हित में फैसला लेने का आश्वासन दिया। उसके उपरांत संघ का&nbsp; प्रतिनिधिमंडल हिमाचल&nbsp; प्रदेश सरकार&nbsp; में तकनीकी शिक्षा मंत्री&nbsp; राजेश धर्माणी से राज्य सचिवालय में मिला।&nbsp; राजेश धर्माणी को सरकार द्वारा बिजली बोर्ड के संदर्भ मे कैबिनेट सब कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है । इसी संदर्भ में तकनीकी कर्मचारी संघ ने मंत्री&nbsp; को&nbsp; विद्युत बोर्ड में फील्ड की वर्तमान वास्तविक स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया, जिसमे तकनीकी संघ ने बोर्ड में खाली चल रही तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी की वजह से बढ़ रहे वर्क लोड और हादसों पर भी चर्चा की गई । तकनीकी कर्मचारियों की संख्या कम होने पर भी 26 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को&nbsp; तकनीकी कर्मचारी पूरे प्रदेश विद्युत आपूर्ति सुचारु रुप से दे रहा है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए जल्द पुरानी पेंशन सरकार की तर्ज़ पर बहाल हो , जो कर्मचारी 12- 14 वर्ष से विभिन्न&nbsp; एजेंसी&nbsp; के माध्यम से आउटसोर्स पर कार्य कर रहे है उन के लिए नीति बनाकर बोर्ड में मर्ज किया जाए । बिजली बोर्ड में तकनीकी कर्मचारियों की जल्द भर्ती हो।&nbsp;विद्युत को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्टोर में आवश्यक सामान जैसे फ्यूज वायर, टेप , mccb , किट कैट, केबल, की उपलब्धता सुनिश्चित करना। मंत्री ने उपरोक्त सभी मांगों को सब कमिटी में चर्चा के उपरांत पूरी करने का आश्वासन दिया है ।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37514.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[A delegation of Electricity Board technical employees met the Electricity Board management class.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/himachal-employees-anger-will-erupt-again-today-against-sukhu-government-regarding-da-and-arrears]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल: DA और एरियर को लेकर सुक्खू सरकार के खिलाफ आज फिर फूटेगा कर्मचारियों का गुस्सा ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/himachal-employees-anger-will-erupt-again-today-against-sukhu-government-regarding-da-and-arrears]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 23 Aug 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[**हिमाचल&nbsp; सचिवालय में कर्मचारियों का जनरल हाउस आज

हिमाचल में डीए और एरियर समेत अन्य मांगों को लेकर आज सरकार पर फिर से कर्मचारियों का गुस्सा फूटेगा। शिमला स्थित सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण में 21 अगस्त को हुए जनरल हाउस में कर्मचारी संगठनों ने सरकार को वार्ता के लिए गुरुवार तक का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने कर्मचारियों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा परिसंघ के क्लास वन से लेकर क्लास फोर तक के सभी कर्मचारी शुक्रवार को फिर से सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण में एकत्रित होकर सरकार खिलाफ अपना गुबार निकालेंगे। हिमाचल में डीए और छठे वेतनमान का संशोधित एरियर न मिलने से कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों दो टूक चेतावनी दी है कि अब भी अगर सरकार की नींद नहीं टूटी तो विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होते ही कर्मचारी कैजुअल लीव पर चले जाएंगे।&nbsp;

हिमाचल प्रदेश सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण होने जा रहे जनरल हाउस में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन शामिल होंगे। जो डीए और एरियर की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे। इसमें हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्पलाईज यूनियन, लोकायुक्त कार्यालय कर्मचारी संगठन, हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय संगठन, स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ, हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ व जूनियर ऑफिस अस्सिटेंट( आई टी) ने लिखित तौर पर जनरल हाउस का समर्थन किया है। ऐसे में आज ये सभी कर्मचारी संगठन भी आम सभा में शामिल होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।&nbsp;

वित्तीय संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार पर कर्मचारियों की देनदारी लगातार बढ़ रही है। इसमें पूर्व हिमाचल दिवस, स्वतंत्रता दिवस या दिवाली के मौके पर कर्मचारियों की देनदारियों को निपटाया जाता रहा है, लेकिन अब कर्ज के बोझ से दबी सरकार का खजाना कर्मचारियों के लिए खाली है। हालत ये है कि प्रदेश सरकार को डीए की तीन किस्त देनी है, जिसमें पहली किस्त 1 जनवरी 2023, दूसरी 1 जुलाई 2023 और तीसरी किस्त 1 जनवरी 2024 से दी जानी अभी बाकी है।&nbsp; इस पर अब 1 जुलाई 2024 से चौथी किस्त भी देय हो गई है। यही नहीं कर्मचारियों को अभी छठे वेतनमान का संशोधित एरियर नहीं मिला है, जिससे प्रदेश भर में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन अब सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतर गए हैं।&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">**हिमाचल&nbsp; सचिवालय में कर्मचारियों का जनरल हाउस आज</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल में डीए और एरियर समेत अन्य मांगों को लेकर आज सरकार पर फिर से कर्मचारियों का गुस्सा फूटेगा। शिमला स्थित सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण में 21 अगस्त को हुए जनरल हाउस में कर्मचारी संगठनों ने सरकार को वार्ता के लिए गुरुवार तक का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने कर्मचारियों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा परिसंघ के क्लास वन से लेकर क्लास फोर तक के सभी कर्मचारी शुक्रवार को फिर से सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण में एकत्रित होकर सरकार खिलाफ अपना गुबार निकालेंगे। हिमाचल में डीए और छठे वेतनमान का संशोधित एरियर न मिलने से कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों दो टूक चेतावनी दी है कि अब भी अगर सरकार की नींद नहीं टूटी तो विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होते ही कर्मचारी कैजुअल लीव पर चले जाएंगे।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के प्रांगण होने जा रहे जनरल हाउस में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन शामिल होंगे। जो डीए और एरियर की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे। इसमें हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्पलाईज यूनियन, लोकायुक्त कार्यालय कर्मचारी संगठन, हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय संगठन, स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ, हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ व जूनियर ऑफिस अस्सिटेंट( आई टी) ने लिखित तौर पर जनरल हाउस का समर्थन किया है। ऐसे में आज ये सभी कर्मचारी संगठन भी आम सभा में शामिल होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">वित्तीय संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार पर कर्मचारियों की देनदारी लगातार बढ़ रही है। इसमें पूर्व हिमाचल दिवस, स्वतंत्रता दिवस या दिवाली के मौके पर कर्मचारियों की देनदारियों को निपटाया जाता रहा है, लेकिन अब कर्ज के बोझ से दबी सरकार का खजाना कर्मचारियों के लिए खाली है। हालत ये है कि प्रदेश सरकार को डीए की तीन किस्त देनी है, जिसमें पहली किस्त 1 जनवरी 2023, दूसरी 1 जुलाई 2023 और तीसरी किस्त 1 जनवरी 2024 से दी जानी अभी बाकी है।&nbsp; इस पर अब 1 जुलाई 2024 से चौथी किस्त भी देय हो गई है। यही नहीं कर्मचारियों को अभी छठे वेतनमान का संशोधित एरियर नहीं मिला है, जिससे प्रदेश भर में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन अब सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतर गए हैं।&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37507.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Himachal: Employees' anger will erupt again today against Sukhu government regarding DA and arrears.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/the-delegation-of-new-pension-scheme-employees-federation-met-shiv-pratap-shukla-under-the-chairmanship-of-state-president-pradeep-thakur]]></guid>
                       <title><![CDATA[प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में शिव प्रताप शुक्ला से मिला नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधि मंडल]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/the-delegation-of-new-pension-scheme-employees-federation-met-shiv-pratap-shukla-under-the-chairmanship-of-state-president-pradeep-thakur]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Wed, 31 Jul 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[
आज राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधि मंडल मिला l प्रदीप ठाकुर ने महामहिम महोदय को अवगत करवाया की हिमाचल प्रदेश के 136000 कर्मचारीयों का 9000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार के पास है l जो पुरानी पेंशन बहाली के बाद कर्मचारियों तथा प्रदेश&nbsp; सरकार को वापिस मिलना चाहिए l इस विषय से संबंधित राज्यपाल को ज्ञापन दिया और आग्रह किया&nbsp; कि यह राशि प्रदेश सरकार तथा प्रदेश के कर्मचारियों की है और पुरानी पेंशन बहाल होने के उपरांत अब प्रदेश का तथा प्रदेश के कर्मचारियों का पैसा जो एनपीएस (NPS) में योगदान के रूप में केंद्र के पास जमा है वह जल्द से जल्द हिमाचल प्रदेश सरकार तथा कर्मचारियों को वापिस मिलना चाहिए l&nbsp;

राज्यपाल ने इस उपलक्ष्य पर कहा कि वह इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे और आश्वस्त किया की वह अपनी ओर से माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे l नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के महासचिव भरत शर्मा ने कहा केंद्र से 9000 करोड़ रुपए की वापसी के लिए हमारे प्रयास जारी है l गत माह उपयुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को केंद्र सरकार से शेयर वापिस हेतु ज्ञापन सौंपे गए थे और आज इस विषय से संबंधित ज्ञापन&nbsp; राज्यपाल को&nbsp; दिया गया है l आने वाले समय में लोकसभा तथा राज्य सभा सांसद के माध्यम से भी इस विषय पर ज्ञापन दिए जाएंगे l हमारे प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक राज्य सरकार तथा कर्मचारियों का शेयर एनएसडीएल (NSDL) से वापिस नही आ जाता l इस मौके पर राज्य महासचिव भरत शर्मा, जिला शिमला नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के महासचिव नारायण सिंह, हिमराल संगठन सचिव&nbsp; अमर देव, उपाध्यक्ष&nbsp; विजय ठाकुर, जिला मंडी उपाध्यक्ष दिनेश तथा अन्य पदाधिकारी इस मौके पर उपस्थित रहे l
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">आज राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधि मंडल मिला l प्रदीप ठाकुर ने महामहिम महोदय को अवगत करवाया की हिमाचल प्रदेश के 136000 कर्मचारीयों का 9000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार के पास है l जो पुरानी पेंशन बहाली के बाद कर्मचारियों तथा प्रदेश&nbsp; सरकार को वापिस मिलना चाहिए l इस विषय से संबंधित राज्यपाल को ज्ञापन दिया और आग्रह किया&nbsp; कि यह राशि प्रदेश सरकार तथा प्रदेश के कर्मचारियों की है और पुरानी पेंशन बहाल होने के उपरांत अब प्रदेश का तथा प्रदेश के कर्मचारियों का पैसा जो एनपीएस (NPS) में योगदान के रूप में केंद्र के पास जमा है वह जल्द से जल्द हिमाचल प्रदेश सरकार तथा कर्मचारियों को वापिस मिलना चाहिए l&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">राज्यपाल ने इस उपलक्ष्य पर कहा कि वह इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे और आश्वस्त किया की वह अपनी ओर से माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे l नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के महासचिव भरत शर्मा ने कहा केंद्र से 9000 करोड़ रुपए की वापसी के लिए हमारे प्रयास जारी है l गत माह उपयुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को केंद्र सरकार से शेयर वापिस हेतु ज्ञापन सौंपे गए थे और आज इस विषय से संबंधित ज्ञापन&nbsp; राज्यपाल को&nbsp; दिया गया है l आने वाले समय में लोकसभा तथा राज्य सभा सांसद के माध्यम से भी इस विषय पर ज्ञापन दिए जाएंगे l हमारे प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक राज्य सरकार तथा कर्मचारियों का शेयर एनएसडीएल (NSDL) से वापिस नही आ जाता l इस मौके पर राज्य महासचिव भरत शर्मा, जिला शिमला नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के महासचिव नारायण सिंह, हिमराल संगठन सचिव&nbsp; अमर देव, उपाध्यक्ष&nbsp; विजय ठाकुर, जिला मंडी उपाध्यक्ष दिनेश तथा अन्य पदाधिकारी इस मौके पर उपस्थित रहे l</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37168.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[The delegation of New Pension Scheme Employees Federation met Shiv Pratap Shukla under the chairmanship of State President Pradeep Thakur.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/hrtc-retired-employees-get-angry-at-the-government-if-their-demands-are-not-met-then-they-will-surround-the-secretariat-and-corporation-headquarters]]></guid>
                       <title><![CDATA[सरकार पर फूटा एचआरटीसी सेवानिवृत्त कर्मचारियों का गुस्सा, मांगें न मानी तो करेंगे सचिवालय व निगम मुख्यालय का घेराव]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/hrtc-retired-employees-get-angry-at-the-government-if-their-demands-are-not-met-then-they-will-surround-the-secretariat-and-corporation-headquarters]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 30 Jul 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[
&nbsp;हिमाचल परिवहन निगम सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण मंच मण्डी द्वारा मंगलवार को मांगों को लेकर बस स्टैंड से जिलाधीश कार्यालय तक विरोध रैली निकाली गई। रैली के दौरान परिवहन मंत्री व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष बलराम पूरी व कार्यकारी अध्यक्ष बृज लाल ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण मंच ने समय- समय पर मांग पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री को अवगत करवाया है। परन्तु आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बहुत से सेवानिवृत कर्मचारी जीवन के अपने अंतिम पड़ाव में है और सरकार द्वारा उनको सड़क पर उतरने के लिए मजबुर किया जा रहा हैं। कहा कि कर्मचारियों की लगभग 300 करोड़ देनदारिया बाकी है, जबकि कई कर्मचारी के तो उच्च न्यायालय सें निर्णय उनके हक में आ चुके है।लेकिन निगम प्रबन्धन उच्च न्यायालय के फैसलों की भी अवमानना कर उनको लागू करने में टालमटोल कर रहा है, जबकि कई सेवानिवृत कर्मचारी तो अपने वित्तीय लाभों के इन्तजार करते करते स्वर्ग सिधार गए&nbsp; है।&nbsp;उन्होंने कहा कि 24 जून को कल्याणमंच की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मंडी में हुई थी। उसमें सरकार को 15 जूलाई तक का समय दिया गया था। परन्तु सरकार की तरफ से उन्हें वार्ता के लिए कोई भी पत्र प्राप्त नही हुआ। इसलिए कल्याण मंच ने तय कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के सभी जिलाधीशों के माध्यम से सीएम सुक्खू को ज्ञापन प्रेषित किया हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार व निगम प्रबन्धक मांगों पर विचार नहीं करता है और देय भत्ते जल्द जारी नहीं करते है, तो दूसरे चरण में निगम मुख्यालय तथा सचिवालय के साथ विधान सभा का घेराव करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">&nbsp;हिमाचल परिवहन निगम सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण मंच मण्डी द्वारा मंगलवार को मांगों को लेकर बस स्टैंड से जिलाधीश कार्यालय तक विरोध रैली निकाली गई। रैली के दौरान परिवहन मंत्री व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष बलराम पूरी व कार्यकारी अध्यक्ष बृज लाल ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत कर्मचारी कल्याण मंच ने समय- समय पर मांग पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री को अवगत करवाया है। परन्तु आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बहुत से सेवानिवृत कर्मचारी जीवन के अपने अंतिम पड़ाव में है और सरकार द्वारा उनको सड़क पर उतरने के लिए मजबुर किया जा रहा हैं। कहा कि कर्मचारियों की लगभग 300 करोड़ देनदारिया बाकी है, जबकि कई कर्मचारी के तो उच्च न्यायालय सें निर्णय उनके हक में आ चुके है।लेकिन निगम प्रबन्धन उच्च न्यायालय के फैसलों की भी अवमानना कर उनको लागू करने में टालमटोल कर रहा है, जबकि कई सेवानिवृत कर्मचारी तो अपने वित्तीय लाभों के इन्तजार करते करते स्वर्ग सिधार गए&nbsp; है।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px;">उन्होंने कहा कि 24 जून को कल्याणमंच की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मंडी में हुई थी। उसमें सरकार को 15 जूलाई तक का समय दिया गया था। परन्तु सरकार की तरफ से उन्हें वार्ता के लिए कोई भी पत्र प्राप्त नही हुआ। इसलिए कल्याण मंच ने तय कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के सभी जिलाधीशों के माध्यम से सीएम सुक्खू को ज्ञापन प्रेषित किया हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार व निगम प्रबन्धक मांगों पर विचार नहीं करता है और देय भत्ते जल्द जारी नहीं करते है, तो दूसरे चरण में निगम मुख्यालय तथा सचिवालय के साथ विधान सभा का घेराव करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37145.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[HRTC retired employees get angry at the government, if their demands are not met then they will surround the secretariat and corporation headquarters.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/water-guards-of-the-state-upset-due-to-not-getting-salary-every-month]]></guid>
                       <title><![CDATA[ हर महीने पगार न मिलने से प्रदेश के वाटरगार्ड खफा]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/water-guards-of-the-state-upset-due-to-not-getting-salary-every-month]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 30 Jul 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[घुमारवीं में इंटक से संबंधित ऑल हिमाचल पीडब्ल्यूडी-आईपीएच एंड कांट्रैक्चुअल वर्कर्ज यूनियन की राज्य स्तरीय कार्यकारणी की बैठक प्रदेशाध्यक्ष दीप धीमान की अध्यक्षता मे हुई। इसमें जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा की गई। बैठक में वाटर गार्ड संघ के प्रधान भूपेंद्र चंदेल ने कहा कि वाटर गार्डों को प्रत्येक माह उनका मासिक वेतन नहीं मिल रहा है और उन्हे रेगलुर के बाद बकाया राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया है। इंटक महासचिव जगतार सिंह बैंस ने कहा कि यूनियन जलशक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के प्रत्येक अनुभाग में कर्मचारियों को सदस्य बनाएगी और उनकी समस्याओं का निवारण करवाने का प्रयास करेगी। हिमाचल प्रदेश के सभी निर्माण प्रोजेक्टों मे भी कामगारों को युनियन का सदस्य बनाकर उन्हें हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड से मिलने वाली सुविधाओं को दिलाएगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष में चार बार यूनियन की राज्य कार्यकारणी की चार बैठके होंगी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">घुमारवीं में इंटक से संबंधित ऑल हिमाचल पीडब्ल्यूडी-आईपीएच एंड कांट्रैक्चुअल वर्कर्ज यूनियन की राज्य स्तरीय कार्यकारणी की बैठक प्रदेशाध्यक्ष दीप धीमान की अध्यक्षता मे हुई। इसमें जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा की गई। बैठक में वाटर गार्ड संघ के प्रधान भूपेंद्र चंदेल ने कहा कि वाटर गार्डों को प्रत्येक माह उनका मासिक वेतन नहीं मिल रहा है और उन्हे रेगलुर के बाद बकाया राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया है। इंटक महासचिव जगतार सिंह बैंस ने कहा कि यूनियन जलशक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के प्रत्येक अनुभाग में कर्मचारियों को सदस्य बनाएगी और उनकी समस्याओं का निवारण करवाने का प्रयास करेगी। हिमाचल प्रदेश के सभी निर्माण प्रोजेक्टों मे भी कामगारों को युनियन का सदस्य बनाकर उन्हें हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड से मिलने वाली सुविधाओं को दिलाएगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष में चार बार यूनियन की राज्य कार्यकारणी की चार बैठके होंगी।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37135.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Water guards of the state upset due to not getting salary every month]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/himachal-unemployed-art-teachers-association-expressed-objection-over-closure-of-schools]]></guid>
                       <title><![CDATA[हिमाचल: स्कूलों को बंद करने पर बेरोजगार कला अध्यापक संघ ने जताया ऐतराज]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/himachal/himachal-unemployed-art-teachers-association-expressed-objection-over-closure-of-schools]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 30 Jul 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[बेरोजगार कला अध्यापक संघ ने कड़ा ऐतराज करते हुए कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार उन गरीब बच्चों और गरीब अभिभावकों के साथ भदा मजाक कर रही है, जिस सरकार ने बेरोजगारों को बड़े-बड़े सपने दिखाए थे कि हम सत्ता में आते ही ऐसे काम करेंगे जो पूर्व सरकार ने नहीं किए थे। लेकिन उसके विपरीत सरकार कर रही है। संघ के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा है कि सरकार स्कूलों को बंद कर रही है और कुछ मर्ज कर रही है। संघ के पदाधिकारी ने कहा है कि स्कूल में बच्चे ना होने का कारण टीचरों की भर्ती न होना है । हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग 17000 से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। और जिन स्कूलों में टीचर नहीं थे उसमें अभिभावक बहुत बार अपना विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं और कई जिलों में उपयुक्त के मध्य और एसडीएम के मध्य से मांग पत्र दे चुके हैं। और मंत्री विधायकों के द्वारा भी अपने मांग पत्र दे चुके हैं। एसएमसी कमेटीयां भी टीचर भर्ती को लेकर धरना-प्रदर्शन और चका जाम तक कर चुकी हैं। तथा टीचर रखने को लेकर कई स्कूलों के बच्चे अपना विरोध कर चुके हैं और स्कूल में टीचर ना होने पर सोशल मीडिया प्रींट मिडिया में भी कभी बार दिखाया गया है, लेकिन सरकार ने उन स्कूलों में टीचर&nbsp; रखने के बजाय स्कूलों को बंद करने तथा मर्ज करने का फैसला लिया है। जो निंदनीय है राज्य कार्यकारिणी संघ के अध्यक्ष बलवंत, उपाध्यक्ष जगदीश ठाकुर, महासचिव विजय चौहान, सहसचिव पाल सिंह, कोषाध्यक्ष शक्ति प्रसाद , संगठनमंत्री संतोष नांटा मुख्य सलाहकार सुखराम मिडिया प्रभारी अशोक कुमार और सीमा कुमारी और समस्त सदस्यों तथा जिला के समस्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों ने माननीय मुख्यमंत्री, माननीय शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्कूल बंद करने की बजाय स्कूलों में टीचर तथा अन्य स्टाफ रखने पर बल दें। न कि स्कूलों को बंद करने का निर्णय लें संघ ने कहा है कि सरकार को 2 साल का कार्यकाल खत्म होने पर है लेकिन रोजगार देने की बजाय बेरोजगारों को मानसिक तनाव में डाला जा रहा है।

&nbsp;संघ ने कहा है कि अभी तक जो भी रिजल्ट घोषित नहीं हुए हैं उनको जल्द से जल्द घोषित किया जाए और नई भर्तियों को जल्द से जल्द भरा जाए। संघ ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के बेरोजगारों ने सरकार बनाने में अपनी एहम भुमिका निभाई है। क्योंकि बेरोजगार दवका पूर्व सरकार से तंग आ चुका था और उनको उम्मीद थी कि कांग्रेस सरकार आते ही बेरोजगार युवाओं के साथ न्याय करेगी, लेकिन वर्तमान सरकार ने तो पूर्व सरकार की तरह राह पकड़ रखी है संघ के पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री से और&nbsp; शिक्षा मंत्री&nbsp; से अनुरोध किया है कि हिमाचल प्रदेश के जितने भी सरकारी स्कूलों में कर्मचारी हैं उनको निर्देश करें कि वह अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में डालें अन्यथा उनको किसी भी तरह का सरकारी लाभ नहीं दिया जाएगा। संघ ने कहा है कि जब सरकार सरकारी नौकरी वाले टीचरों को इतनी बड़ी सैलरी दे रही है तो क्यूं ना सरकार ऐक्शन ले कि वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाए। खुद सरकारी नौकरी पर लगे हैं और खुद के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाए जा रहे हैं। जब मुख्यमंत्री जी इतने बड़े पैमाने पर फैसले ले रहे हैं तो फिर ऐसा फैसला लेने में देरी क्यूं । संघ ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में सभी कर्मचारियों पर सरकार को निर्देश करना चाहिए। क्योंकि सरकार कर्मचारियों की हर एक बात को पुरा करने पर बचनबद्ध है। संघ ने कहा है कि इस बात को सभी एजुकेशन संगठनों को सरकार से उठाना चाहिए। कि सरकारी स्कूलों को बंद ना करे। बल्कि टीचर भर्ती करें। संघ के पदाधिकारी ने कहा है कि चार-पांच साल पहले सरकारी स्कूलों में अच्छी एनरोलमेंट थी लेकिन जैसे-जैसे स्कूलों में टीचरों की संख्या कम होती गई वैसे-वैसे स्कूलों में पढ़ाने के लिए कोई भी टीचर नहीं रहा तो मजबूरी में लोगों को प्राइवेट स्कूलों का रुख करना पड़ा, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों के पास इतनी बड़ी इनकम नहीं है कि वह भारी भरकम फीस प्राइवेट स्कूलों में भरकर अपने बच्चों को शिक्षा दें।&nbsp;

हिमाचल प्रदेश के अभी भी ऐसे कई स्कूल हैं जहां पर अभिभावक अपने पैसे देकर और उन सरकारी स्कूलों में अपनी तरफ से टीचर रखकर बच्चों को शिक्षा ग्रहण करवा रहे हैं। संघ ने कहा है कि कोविड के टाइम भारी मात्रा में प्राइवेट स्कूलों से बच्चे निकाल कर सरकारी स्कूलों में डाले गए थे। लेकिन जब अभिभावकों को इस बात का पता चला कि सरकारी स्कूलों में तो टीचर ही नहीं है तो 2 साल के बाद फिर बच्चों को दोबारा से अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों में डालना पड़ा। बेरोजगार कलाध्यापक संघ ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री और समस्त मंत्रीयों विधायकों से निवेदन किया&nbsp;है कि ऐसा कदम ना उठाएं जिससे कांग्रेस सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़े, लेकिन जैसा इलेक्शन के समय प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने बेरोजगारों से वादा किया था उस वादे के मुताबिक मुख्यमंत्री और सरकार फैसले लें। संघ ने कहा है कि मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश के सरकारी मिडिल स्कूलों में 100 की लगी शर्त को हटाने का कई बार विश्वास दे चुके हैं। लेकिन अभी तक 100 बच्चों की कंडीशन को समाप्त नहीं किया गया है। संघ मुख्यमंत्री से अनुरोध करता है कि इसकी अधिसूचना जारी करें और कला अध्यापकों की 1600 पोस्टें प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में खाली चल रही है उन्हें जल्द से जल्द भरे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">बेरोजगार कला अध्यापक संघ ने कड़ा ऐतराज करते हुए कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार उन गरीब बच्चों और गरीब अभिभावकों के साथ भदा मजाक कर रही है, जिस सरकार ने बेरोजगारों को बड़े-बड़े सपने दिखाए थे कि हम सत्ता में आते ही ऐसे काम करेंगे जो पूर्व सरकार ने नहीं किए थे। लेकिन उसके विपरीत सरकार कर रही है। संघ के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा है कि सरकार स्कूलों को बंद कर रही है और कुछ मर्ज कर रही है। संघ के पदाधिकारी ने कहा है कि स्कूल में बच्चे ना होने का कारण टीचरों की भर्ती न होना है । हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग 17000 से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। और जिन स्कूलों में टीचर नहीं थे उसमें अभिभावक बहुत बार अपना विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं और कई जिलों में उपयुक्त के मध्य और एसडीएम के मध्य से मांग पत्र दे चुके हैं। और मंत्री विधायकों के द्वारा भी अपने मांग पत्र दे चुके हैं। एसएमसी कमेटीयां भी टीचर भर्ती को लेकर धरना-प्रदर्शन और चका जाम तक कर चुकी हैं। तथा टीचर रखने को लेकर कई स्कूलों के बच्चे अपना विरोध कर चुके हैं और स्कूल में टीचर ना होने पर सोशल मीडिया प्रींट मिडिया में भी कभी बार दिखाया गया है, लेकिन सरकार ने उन स्कूलों में टीचर&nbsp; रखने के बजाय स्कूलों को बंद करने तथा मर्ज करने का फैसला लिया है। जो निंदनीय है राज्य कार्यकारिणी संघ के अध्यक्ष बलवंत, उपाध्यक्ष जगदीश ठाकुर, महासचिव विजय चौहान, सहसचिव पाल सिंह, कोषाध्यक्ष शक्ति प्रसाद , संगठनमंत्री संतोष नांटा मुख्य सलाहकार सुखराम मिडिया प्रभारी अशोक कुमार और सीमा कुमारी और समस्त सदस्यों तथा जिला के समस्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों ने माननीय मुख्यमंत्री, माननीय शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्कूल बंद करने की बजाय स्कूलों में टीचर तथा अन्य स्टाफ रखने पर बल दें। न कि स्कूलों को बंद करने का निर्णय लें संघ ने कहा है कि सरकार को 2 साल का कार्यकाल खत्म होने पर है लेकिन रोजगार देने की बजाय बेरोजगारों को मानसिक तनाव में डाला जा रहा है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp;संघ ने कहा है कि अभी तक जो भी रिजल्ट घोषित नहीं हुए हैं उनको जल्द से जल्द घोषित किया जाए और नई भर्तियों को जल्द से जल्द भरा जाए। संघ ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के बेरोजगारों ने सरकार बनाने में अपनी एहम भुमिका निभाई है। क्योंकि बेरोजगार दवका पूर्व सरकार से तंग आ चुका था और उनको उम्मीद थी कि कांग्रेस सरकार आते ही बेरोजगार युवाओं के साथ न्याय करेगी, लेकिन वर्तमान सरकार ने तो पूर्व सरकार की तरह राह पकड़ रखी है संघ के पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री से और&nbsp; शिक्षा मंत्री&nbsp; से अनुरोध किया है कि हिमाचल प्रदेश के जितने भी सरकारी स्कूलों में कर्मचारी हैं उनको निर्देश करें कि वह अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में डालें अन्यथा उनको किसी भी तरह का सरकारी लाभ नहीं दिया जाएगा। संघ ने कहा है कि जब सरकार सरकारी नौकरी वाले टीचरों को इतनी बड़ी सैलरी दे रही है तो क्यूं ना सरकार ऐक्शन ले कि वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाए। खुद सरकारी नौकरी पर लगे हैं और खुद के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाए जा रहे हैं। जब मुख्यमंत्री जी इतने बड़े पैमाने पर फैसले ले रहे हैं तो फिर ऐसा फैसला लेने में देरी क्यूं । संघ ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में सभी कर्मचारियों पर सरकार को निर्देश करना चाहिए। क्योंकि सरकार कर्मचारियों की हर एक बात को पुरा करने पर बचनबद्ध है। संघ ने कहा है कि इस बात को सभी एजुकेशन संगठनों को सरकार से उठाना चाहिए। कि सरकारी स्कूलों को बंद ना करे। बल्कि टीचर भर्ती करें। संघ के पदाधिकारी ने कहा है कि चार-पांच साल पहले सरकारी स्कूलों में अच्छी एनरोलमेंट थी लेकिन जैसे-जैसे स्कूलों में टीचरों की संख्या कम होती गई वैसे-वैसे स्कूलों में पढ़ाने के लिए कोई भी टीचर नहीं रहा तो मजबूरी में लोगों को प्राइवेट स्कूलों का रुख करना पड़ा, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों के पास इतनी बड़ी इनकम नहीं है कि वह भारी भरकम फीस प्राइवेट स्कूलों में भरकर अपने बच्चों को शिक्षा दें।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हिमाचल प्रदेश के अभी भी ऐसे कई स्कूल हैं जहां पर अभिभावक अपने पैसे देकर और उन सरकारी स्कूलों में अपनी तरफ से टीचर रखकर बच्चों को शिक्षा ग्रहण करवा रहे हैं। संघ ने कहा है कि कोविड के टाइम भारी मात्रा में प्राइवेट स्कूलों से बच्चे निकाल कर सरकारी स्कूलों में डाले गए थे। लेकिन जब अभिभावकों को इस बात का पता चला कि सरकारी स्कूलों में तो टीचर ही नहीं है तो 2 साल के बाद फिर बच्चों को दोबारा से अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों में डालना पड़ा। बेरोजगार कलाध्यापक संघ ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री और समस्त मंत्रीयों विधायकों से निवेदन किया&nbsp;है कि ऐसा कदम ना उठाएं जिससे कांग्रेस सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़े, लेकिन जैसा इलेक्शन के समय प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने बेरोजगारों से वादा किया था उस वादे के मुताबिक मुख्यमंत्री और सरकार फैसले लें। संघ ने कहा है कि मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश के सरकारी मिडिल स्कूलों में 100 की लगी शर्त को हटाने का कई बार विश्वास दे चुके हैं। लेकिन अभी तक 100 बच्चों की कंडीशन को समाप्त नहीं किया गया है। संघ मुख्यमंत्री से अनुरोध करता है कि इसकी अधिसूचना जारी करें और कला अध्यापकों की 1600 पोस्टें प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में खाली चल रही है उन्हें जल्द से जल्द भरे।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37134.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Himachal: Unemployed Art Teachers Association expressed objection over closure of schools.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/himachal/no-solution-found-in-meeting-with-revenue-minister-patwari-kanungo-strike-will-continue]]></guid>
                       <title><![CDATA[राजस्व मंत्री के साथ हुई बैठक में नहीं निकला कोई हल,जारी रखेंगे पटवारी-कानूनगो हड़ताल ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/himachal/no-solution-found-in-meeting-with-revenue-minister-patwari-kanungo-strike-will-continue]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 29 Jul 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[
पटवारियों और कानूनगो के हड़ताल पर होने से प्रदेश में लोगों के 1.30 लाख से ज्यादा ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं, मगर आज भी ये मसला हल नहीं हो पाया। दरअसल आज हिमाचल के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और पटवारी-कानूनगो के बीच सचिवालय में हड़ताल से सम्भंदित एक महत्वपूर्ण बैठक हुई मगर इस बैठक में दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। पटवारी-कानूनगो जिला से बाहर ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं है, जबकि सरकार ने इसी मंशा से इन्हें स्टेट कैडर बनाया है। मीटिंग में सहमति नहीं बनने के बाद हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी संघ ने अपना विरोध जारी रखने का ऐलान कर दिया है। इनकी हड़ताल से प्रदेश के लोग परेशान हैं। पटवारी-कानूनगो राज्य कैडर बनाए जाने के विरोध में 15 दिनों से ऑनलाइन काम नहीं कर रहे। इन्होंने सरकारी ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप से भी एग्जिट कर रखा है। यही नहीं एडिशनल चार्ज वाले&nbsp; पटवारी-कानूनगो सर्किल दफ्तर की चाबियां भी ये लोग संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को सौंप चुके हैं।&nbsp; इनकी हड़ताल के कारण बोनाफाइड सर्टिफिकेट, चरित्र प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, ओबीसी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, कृषि प्रमाण पत्र, बेरोजगारी प्रमाण पत्र, भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र और पीएम किसान सम्मान निधि योजना की ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे काम 15 दिन से नहीं हो पा रहे। बीते 6 दिन से एडिशनल चार्ज वाले दफ्तरों में भी काम ठप हो गया है। इससे लोगों के राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण काम नहीं हो पा रहे हैं।वहीं इस मसले पर राजस्व मंत्री जगत नेगी का कहना है&nbsp; कि सरकार ने जनहित को देखते हुए इन्हें स्टेट कैडर बनाया है और&nbsp; पटवारी-कानूनगो इसके विरोध की सही वजह नहीं बता पा रहे है। ऐसे में अब नियमों के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">पटवारियों और कानूनगो के हड़ताल पर होने से प्रदेश में लोगों के 1.30 लाख से ज्यादा ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं, मगर आज भी ये मसला हल नहीं हो पाया। दरअसल आज हिमाचल के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और पटवारी-कानूनगो के बीच सचिवालय में हड़ताल से सम्भंदित एक महत्वपूर्ण बैठक हुई मगर इस बैठक में दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। पटवारी-कानूनगो जिला से बाहर ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं है, जबकि सरकार ने इसी मंशा से इन्हें स्टेट कैडर बनाया है। मीटिंग में सहमति नहीं बनने के बाद हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी संघ ने अपना विरोध जारी रखने का ऐलान कर दिया है। इनकी हड़ताल से प्रदेश के लोग परेशान हैं। पटवारी-कानूनगो राज्य कैडर बनाए जाने के विरोध में 15 दिनों से ऑनलाइन काम नहीं कर रहे। इन्होंने सरकारी ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप से भी एग्जिट कर रखा है। यही नहीं एडिशनल चार्ज वाले&nbsp; पटवारी-कानूनगो सर्किल दफ्तर की चाबियां भी ये लोग संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को सौंप चुके हैं।&nbsp; इनकी हड़ताल के कारण बोनाफाइड सर्टिफिकेट, चरित्र प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, ओबीसी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, कृषि प्रमाण पत्र, बेरोजगारी प्रमाण पत्र, भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र और पीएम किसान सम्मान निधि योजना की ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे काम 15 दिन से नहीं हो पा रहे। बीते 6 दिन से एडिशनल चार्ज वाले दफ्तरों में भी काम ठप हो गया है। इससे लोगों के राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण काम नहीं हो पा रहे हैं।वहीं इस मसले पर राजस्व मंत्री जगत नेगी का कहना है&nbsp; कि सरकार ने जनहित को देखते हुए इन्हें स्टेट कैडर बनाया है और&nbsp; पटवारी-कानूनगो इसके विरोध की सही वजह नहीं बता पा रहे है। ऐसे में अब नियमों के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall37132.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[No solution found in meeting with Revenue Minister, Patwari-Kanungo strike will continue]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/news/karamchari-lehar/news-update/job/himachal/result-of-selected-fire-warriors-from-kangra-and-chamba-districts-declared]]></guid>
                       <title><![CDATA[कांगड़ा और चंबा जिला से चयनित अग्निवीरों का परिणाम घोषित]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/news/karamchari-lehar/news-update/job/himachal/result-of-selected-fire-warriors-from-kangra-and-chamba-districts-declared]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sat, 16 Sep 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[सेना भर्ती कार्यालय, पालमपुर के भर्ती निदेशक कर्नल मनिष शर्मा (सेना मेडल) ने प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि अग्निवीर जनरल ड्यूटी,&nbsp; अग्निवीर तकनीकी और अग्निवीर ट्रेड्समैन ऑनलाइन लिखित परीक्षा व शारीरिक परीक्षा का फाईनल परिणाम घोषित कर दिया गया हैं। चयनित उम्मीदवार अपना परिणाम भारतीय सेना के अधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर देख सकते हैं। कांगड़ा और चंबा जिला के सभी चयनित उम्मीदवारो&nbsp; से अनुरोध हैं कि दिनांक 21 सितम्बर 2023 को सुबह 08:00 बजे सेना भर्ती कार्यालय, पालमपुर मे दस्तावेज (Documents) सम्बंधित अगामी कार्यवाही हेतू अनिवार्य रुप से उपस्थित हो।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size:18px;">सेना भर्ती कार्यालय, पालमपुर के भर्ती निदेशक कर्नल मनिष शर्मा (सेना मेडल) ने प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि अग्निवीर जनरल ड्यूटी,&nbsp; अग्निवीर तकनीकी और अग्निवीर ट्रेड्समैन ऑनलाइन लिखित परीक्षा व शारीरिक परीक्षा का फाईनल परिणाम घोषित कर दिया गया हैं। चयनित उम्मीदवार अपना परिणाम भारतीय सेना के अधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर देख सकते हैं। कांगड़ा और चंबा जिला के सभी चयनित उम्मीदवारो&nbsp; से अनुरोध हैं कि दिनांक 21 सितम्बर 2023 को सुबह 08:00 बजे सेना भर्ती कार्यालय, पालमपुर मे दस्तावेज (Documents) सम्बंधित अगामी कार्यवाही हेतू अनिवार्य रुप से उपस्थित हो।</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall32122.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/solan-counseling-for-dependents-of-ex-servicemen-on-september-22]]></guid>
                       <title><![CDATA[सोलन: भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए काउंसलिंग 22 सितम्बर को]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/solan-counseling-for-dependents-of-ex-servicemen-on-september-22]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sat, 16 Sep 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[उप निदेशक शिक्षा प्रारम्भिक सोलन द्वारा 22 सितम्बर, 2023 को भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक नाॅन मेडिकल तथा मेडिकल विषय में उन उम्मीदवारों के लिए अनुबंध आधार पर पद भरे जाने के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी जिन्होंने सम्बन्धित विषय में अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह जानकारी उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा सोलन संजीव ठाकुर ने दी।&nbsp;
संजीव ठाकुर ने कहा कि यह काउंसलिंग 22 सितम्बर, 2023 को उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा के चम्बाघाट स्थित कार्यालय में प्रातः 10.30 बजे से आरम्भ होगी।&nbsp;
उन्होंने कहा कि काउंसलिंग भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए टीजीटी नाॅन मेडिकल के कुल 19 पदों के लिए तथा टीजीटी मेडिकल के कुल 20 पदों के लिए आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीजीटी नाॅन मेडिकल के 19 पदों में 08 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनारक्षित वर्ग के लिए, 04 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अन्य पिछड़ा वर्ग से सम्बन्धित उम्मीदवारों के लिए, 06 पद इसी श्रेणी के अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तथा 01 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग से सम्बन्धित उम्मीदवारों के लिए है।&nbsp;
संजीव ठाकुर ने कहा कि टीजीटी मेडिकल के कुल 20 पदों में से 13 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनारक्षित वर्ग के लिए, 02 पद इसी श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए, 04 पद इसी श्रेणी के अनुसूचित जाति वर्ग के लिए तथा 01 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए है।&nbsp;
उप निदेशक ने कहा कि इन पदों के लिए टीजीटी नाॅन मेडिकल के अनारक्षित अभ्यार्थियों की बी.एड अगस्त 2003 उत्तीर्ण बैच तक, अन्य पिछड़ा वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2005 उत्तीर्ण बैच तक, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2018 उत्तीर्ण बैच तक तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2021 उत्तीर्ण बैच तक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीजीटी मेडिकल के अनारक्षित अभ्यर्थियों की बी.एड दिसम्बर, 2007 उत्तीर्ण बैच तक, अन्य पिछड़ा वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2010 उत्तीर्ण बैच तक, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2017 उत्तीर्ण बैच तक तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग की बी.एड अद्यतन उत्तीर्ण बैच तक होनी चाहिए।&nbsp;
उन्होंने कहा कि अभ्यार्थियों को काउंसलिंग के समय 10वीं, 12वीं, बी.एड प्रमाणपत्र, टीजीटी (टैट), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, हिमाचली प्रमाणपत्र, नवीनतम पासपोर्ट फोटोग्राफ, रोज़गार कार्यालय का पंजीकृत पत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, सैनिक कल्याण के सम्बन्धित उप निदेशक द्वारा जारी भूतपूर्व सैनिक के वार्ड का प्रमाणपत्र, डिस्चार्ज बुक (आर्मी) की छायाप्रति लाना अनिवार्य है।&nbsp;
उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को काउंसलिंग पत्र प्राप्त नहीं हुए है वह अपना नाम व बायोडाटा कार्यालय की वेबसाइटwww.ddeesolan.in&nbsp; से प्राप्त कर सकते हैं।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size:18px;">उप निदेशक शिक्षा प्रारम्भिक सोलन द्वारा 22 सितम्बर, 2023 को भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक नाॅन मेडिकल तथा मेडिकल विषय में उन उम्मीदवारों के लिए अनुबंध आधार पर पद भरे जाने के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी जिन्होंने सम्बन्धित विषय में अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह जानकारी उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा सोलन संजीव ठाकुर ने दी।&nbsp;<br />
संजीव ठाकुर ने कहा कि यह काउंसलिंग 22 सितम्बर, 2023 को उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा के चम्बाघाट स्थित कार्यालय में प्रातः 10.30 बजे से आरम्भ होगी।&nbsp;<br />
उन्होंने कहा कि काउंसलिंग भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए टीजीटी नाॅन मेडिकल के कुल 19 पदों के लिए तथा टीजीटी मेडिकल के कुल 20 पदों के लिए आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीजीटी नाॅन मेडिकल के 19 पदों में 08 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनारक्षित वर्ग के लिए, 04 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अन्य पिछड़ा वर्ग से सम्बन्धित उम्मीदवारों के लिए, 06 पद इसी श्रेणी के अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तथा 01 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग से सम्बन्धित उम्मीदवारों के लिए है।&nbsp;<br />
संजीव ठाकुर ने कहा कि टीजीटी मेडिकल के कुल 20 पदों में से 13 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनारक्षित वर्ग के लिए, 02 पद इसी श्रेणी के अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए, 04 पद इसी श्रेणी के अनुसूचित जाति वर्ग के लिए तथा 01 पद भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए है।&nbsp;<br />
उप निदेशक ने कहा कि इन पदों के लिए टीजीटी नाॅन मेडिकल के अनारक्षित अभ्यार्थियों की बी.एड अगस्त 2003 उत्तीर्ण बैच तक, अन्य पिछड़ा वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2005 उत्तीर्ण बैच तक, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2018 उत्तीर्ण बैच तक तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2021 उत्तीर्ण बैच तक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीजीटी मेडिकल के अनारक्षित अभ्यर्थियों की बी.एड दिसम्बर, 2007 उत्तीर्ण बैच तक, अन्य पिछड़ा वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2010 उत्तीर्ण बैच तक, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.एड दिसम्बर, 2017 उत्तीर्ण बैच तक तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग की बी.एड अद्यतन उत्तीर्ण बैच तक होनी चाहिए।&nbsp;<br />
उन्होंने कहा कि अभ्यार्थियों को काउंसलिंग के समय 10वीं, 12वीं, बी.एड प्रमाणपत्र, टीजीटी (टैट), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र, हिमाचली प्रमाणपत्र, नवीनतम पासपोर्ट फोटोग्राफ, रोज़गार कार्यालय का पंजीकृत पत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, सैनिक कल्याण के सम्बन्धित उप निदेशक द्वारा जारी भूतपूर्व सैनिक के वार्ड का प्रमाणपत्र, डिस्चार्ज बुक (आर्मी) की छायाप्रति लाना अनिवार्य है।&nbsp;<br />
उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को काउंसलिंग पत्र प्राप्त नहीं हुए है वह अपना नाम व बायोडाटा कार्यालय की वेबसाइटwww.ddeesolan.in&nbsp; से प्राप्त कर सकते हैं।</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[सोलन: भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए काउंसलिंग 22 सितम्बर को]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/dharamshala-ops-gratitude-rally]]></guid>
                       <title><![CDATA[कर्मचारी बोले 'आप पेंशन पुरुष', सीएम बोले 'साथ देते रहना']]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/dharamshala-ops-gratitude-rally]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 29 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

प्रदर्शन और आभार कार्यक्रम तो बहुत हुए मगर इस तरह पहले कभी सरकार का आभार व्यक्त करने को कर्मचारियों का हुजूम नहीं उमड़ा। लाखों की संख्या में कर्मचारी सीएम सुक्खू का दिल की गहराईयों से आभार करने को पहुंचे और धर्मशाला का पुलिस ग्राउंड जय सुक्खू के नारो से गूँज उठा। ऐसा स्वागत या स्नेह, सरकार को कर्मचारियों से शायद ही पहले कभी मिला हो, और हो भी क्यों न सीएम सुक्खू के नेतृत्व की इस कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों की उस मांग को पूरा किया है जिसके लिए प्रदेश के लाखों कर्मचारी सालों तक नेताओं की दरों पर दस्तक देते रहे। सीएम सुक्खू ने कर्मचारियों के इस अनंत संघर्ष पर पूर्ण विराम लगाया है, जिसके लिए कर्मचारियों ने सीएम सुक्खू को सर माथे लगा लिया। कभी उन्हें नायक बताया तो कभी पेंशन पुरुष। आभार के जवाब में सीएम सुक्खू भी कह गए कि मैं आपका सेनापति हूँ और आप मेरी सेना हो। 11 दिसंबर को कर्मचारियों के आशीर्वाद से कांग्रेस सरकार बनी और आगे भी ऐसे ही हमारा साथ देते रहना।&nbsp;&nbsp;

&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;

&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; कर्मचारियों की ये मांग कोई आम मांग नहीं थी। ये वो मसला था जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों का भविष्य जुड़ा था, वो कर्मचारी जो एनपीएस के अंतर्गत आते थे और जिन्हें शायद सेवानिवृत होने के बाद अपने बुढ़ापे में किसी और का सहारा लेना पड़ता। एनपीएस के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के ऐसे कई मामले सामने आए है, जब इन कर्मचारियों को सेवानिवृत होने के बाद नाम मात्र पेंशन मिली। पूरे जीवन सरकार की सेवा करने के बाद ये कर्मचारी बुढ़ापे में इतने लाचार हो गए की जीवन व्यापन कठिन हो गया। इसी के बाद से पुरानी पेंशन बहाली के लिए महासंघर्ष का आरम्भ हुआ। न जाने कितनी ही हड़तालें, प्रदर्शन, अनशन इन कर्मचारियों ने किये मगर एक लम्बे समय तक इनकी नहीं सुनी गई। अपने बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए संघर्षरत इन कर्मचारियों पर एफआईआर भी हुई, इन पर वाटर कैनन्स भी दागी गई और इनकी आवाज़ दबाने की कोशीश भी की गई, मगर संघर्ष थमने के बजाए और उग्र होता गया। आखिर जिस सरकार ने कर्मचारियों की नहीं सुनी वो सरकार सत्ता से बाहर हुई और सीएम सुक्खू के नेतृत्व की कांग्रेस सरकार कर्मचारियों के लिए मसीहा बन गई। वादे अनुसार पहली कैबिनेट की बैठक में ही पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया गया। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों में केसा उत्साह है ये एक बार फिर धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में देखने को मिल गया।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<div dir="auto" style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small; text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div dir="auto" style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small; text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">प्रदर्शन और आभार कार्यक्रम तो बहुत हुए मगर इस तरह पहले कभी सरकार का आभार व्यक्त करने को कर्मचारियों का हुजूम नहीं उमड़ा। लाखों की संख्या में कर्मचारी सीएम सुक्खू का दिल की गहराईयों से आभार करने को पहुंचे और धर्मशाला का पुलिस ग्राउंड जय सुक्खू के नारो से गूँज उठा। ऐसा स्वागत या स्नेह, सरकार को कर्मचारियों से शायद ही पहले कभी मिला हो, और हो भी क्यों न सीएम सुक्खू के नेतृत्व की इस कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों की उस मांग को पूरा किया है जिसके लिए प्रदेश के लाखों कर्मचारी सालों तक नेताओं की दरों पर दस्तक देते रहे। सीएम सुक्खू ने कर्मचारियों के इस अनंत संघर्ष पर पूर्ण विराम लगाया है, जिसके लिए कर्मचारियों ने सीएम सुक्खू को सर माथे लगा लिया। कभी उन्हें नायक बताया तो कभी पेंशन पुरुष। आभार के जवाब में सीएम सुक्खू भी कह गए कि मैं आपका सेनापति हूँ और आप मेरी सेना हो। 11 दिसंबर को कर्मचारियों के आशीर्वाद से कांग्रेस सरकार बनी और आगे भी ऐसे ही हमारा साथ देते रहना।&nbsp;&nbsp;</span></div>

<div dir="auto" style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small; text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</span></div>

<div dir="auto" style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small; text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; कर्मचारियों की ये मांग कोई आम मांग नहीं थी। ये वो मसला था जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों का भविष्य जुड़ा था, वो कर्मचारी जो एनपीएस के अंतर्गत आते थे और जिन्हें शायद सेवानिवृत होने के बाद अपने बुढ़ापे में किसी और का सहारा लेना पड़ता। एनपीएस के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के ऐसे कई मामले सामने आए है, जब इन कर्मचारियों को सेवानिवृत होने के बाद नाम मात्र पेंशन मिली। पूरे जीवन सरकार की सेवा करने के बाद ये कर्मचारी बुढ़ापे में इतने लाचार हो गए की जीवन व्यापन कठिन हो गया। इसी के बाद से पुरानी पेंशन बहाली के लिए महासंघर्ष का आरम्भ हुआ। न जाने कितनी ही हड़तालें, प्रदर्शन, अनशन इन कर्मचारियों ने किये मगर एक लम्बे समय तक इनकी नहीं सुनी गई। अपने बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए संघर्षरत इन कर्मचारियों पर एफआईआर भी हुई, इन पर वाटर कैनन्स भी दागी गई और इनकी आवाज़ दबाने की कोशीश भी की गई, मगर संघर्ष थमने के बजाए और उग्र होता गया। आखिर जिस सरकार ने कर्मचारियों की नहीं सुनी वो सरकार सत्ता से बाहर हुई और सीएम सुक्खू के नेतृत्व की कांग्रेस सरकार कर्मचारियों के लिए मसीहा बन गई। वादे अनुसार पहली कैबिनेट की बैठक में ही पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया गया। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों में केसा उत्साह है ये एक बार फिर धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में देखने को मिल गया।</span></div>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall29515.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[कर्मचारी बोले 'आप पेंशन पुरुष', सीएम बोले 'साथ देते रहना']]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/bed-has-to-be-recognized-so-why-doesnt-the-government-stop-jbt-training]]></guid>
                       <title><![CDATA[बीएड को मान्यता देनी है, तो जेबीटी ट्रेनिंग बंद क्यों नहीं करते सरकार !]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/bed-has-to-be-recognized-so-why-doesnt-the-government-stop-jbt-training]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 15 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[कई रैलियां, विरोध प्रदर्शन, और दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद अब प्रदेश के जेबीटी प्रशिक्षु थक चुके है। पढ़ाई करने के साथ साथ इन प्रशिक्षुओं द्वारा सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचना भी अनिवार्य हो गया है। प्रदेश का युवा आए दिन सड़कों पर उतरने को मजबूर है। &nbsp;मगर अब जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को शामिल करने के विरोध में जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ अब आर पार की लड़ाई के मूड में है। इन प्रशिक्षुओं को उम्मीद दी थी कि नई सरकार इनके लिए कुछ सोचेगी मगर नई सरकार ने भी इन्हें निराश किया है। आज इनके पास सड़कों पर उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। &nbsp;
&nbsp;

रोज़गार के लिए संघर्ष करते इन प्रशिक्षुओं ने बीते &nbsp;दिनों शिमला शिक्षा निदेशालय पहुंच कर सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अपना विरोध भी जाहिर किया है और आगे भी विरोध करने की बात कही है। प्रदेश सरकार एनसीईटी की 2018 की गाइडलाइन का हवाला देकर बैचवाइज जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को शामिल कर रही है, जिससे जेबीटी की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। बेरोजगार जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया बीएड को जेबीटी भर्ती में शामिल करने के मामले को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने एनसीटीई की अधिसूचना को खारिज कर दिया है, जिसके बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन हिमाचल सरकार ने पुराने आर एंड पी रूल के आधार पर ही एनसीटीई की अधिसूचना जारी कर बैचवाइज जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को भर्ती के लिए शामिल किया है, जबकि इसके लिए नए आर एंड पी रूल बनाएं जाने थे।

जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ का कहना है कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने दावा किया था कि इस मामले में वे जेबीटी के साथ खड़े होंगे मगर कांग्रेस के विचार सत्ता में आने के बाद बदल गए। जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया कि वे कई बार शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मामले को लेकर मिले, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिले हैं। सरकार ने अगर जेबीटी भर्ती में बीएड को मान्यता देनी है, तो जेबीटी ट्रेनिंग को बंद क्यों नहीं करती। जेबीटी अभ्यर्थियों &nbsp;के पास संघर्ष करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इस पूरे मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से हस्तक्षेप करने की भी मांग की जा रही है। प्रदेशाध्यक्ष मोहित ठाकुर ने कहा कि इससे पहले भी जेबीटी बैचवाइज भर्ती में जम्मू-कश्मीर से ईटीटी के नकली डिप्लोमा कर नौकरी लगे हैं, जो केस भी हाई कोर्ट में लंबित पड़ा है। भविष्य में भी अगर जेबीटी के जगह पर बीएड लग जाते हैं, तो जेबीटी छात्रों के साथ यह अन्याय होगा।

आरएंडपी रूल्स से न हो छेड़छाड़ :
जेबीटी प्रशिक्षुओं का मानना है कि बीएड डिग्रीधारकों को जेबीटी के लिए पात्र करने से उनके प्रशिक्षण का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। प्रशिक्षण हासिल कर चुके हजारों बेरोजगारों के साथ वर्तमान में प्रशिक्षण हासिल कर रहे प्रशिक्षुओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इन प्रशिक्षुओं की मांग है की बीएड वालों को जेबीटी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो जेबीटी को समय पर इनके प्रशिक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रदेश में 40 हजार युवाओं ने जेबीटी और डीएलएड डिप्लोमा किया हुआ है। भर्ती में देरी की वजह से उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिली है। यदि बीएड भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माने जाते हैं, तो उनका नंबर ही नहीं आएगा। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव होने से जिला के डाइट संस्थान व निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके साथ ही बीएड अभ्यर्थी भी जेबीटी पदों में आएंगे, तो उनका नंबर कई सालों बाद आएगा। ऐसे में मांग की जा रही है कि आरएंडपी रूल्स से कतई छेड़छाड़ न की जाए।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">कई रैलियां, विरोध प्रदर्शन, और दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद अब प्रदेश के जेबीटी प्रशिक्षु थक चुके है। पढ़ाई करने के साथ साथ इन प्रशिक्षुओं द्वारा सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचना भी अनिवार्य हो गया है। प्रदेश का युवा आए दिन सड़कों पर उतरने को मजबूर है। &nbsp;मगर अब जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को शामिल करने के विरोध में जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ अब आर पार की लड़ाई के मूड में है। इन प्रशिक्षुओं को उम्मीद दी थी कि नई सरकार इनके लिए कुछ सोचेगी मगर नई सरकार ने भी इन्हें निराश किया है। आज इनके पास सड़कों पर उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। &nbsp;</span></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">रोज़गार के लिए संघर्ष करते इन प्रशिक्षुओं ने बीते &nbsp;दिनों शिमला शिक्षा निदेशालय पहुंच कर सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अपना विरोध भी जाहिर किया है और आगे भी विरोध करने की बात कही है। प्रदेश सरकार एनसीईटी की 2018 की गाइडलाइन का हवाला देकर बैचवाइज जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को शामिल कर रही है, जिससे जेबीटी की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। बेरोजगार जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया बीएड को जेबीटी भर्ती में शामिल करने के मामले को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने एनसीटीई की अधिसूचना को खारिज कर दिया है, जिसके बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन हिमाचल सरकार ने पुराने आर एंड पी रूल के आधार पर ही एनसीटीई की अधिसूचना जारी कर बैचवाइज जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को भर्ती के लिए शामिल किया है, जबकि इसके लिए नए आर एंड पी रूल बनाएं जाने थे।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ का कहना है कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने दावा किया था कि इस मामले में वे जेबीटी के साथ खड़े होंगे मगर कांग्रेस के विचार सत्ता में आने के बाद बदल गए। जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया कि वे कई बार शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मामले को लेकर मिले, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिले हैं। सरकार ने अगर जेबीटी भर्ती में बीएड को मान्यता देनी है, तो जेबीटी ट्रेनिंग को बंद क्यों नहीं करती। जेबीटी अभ्यर्थियों &nbsp;के पास संघर्ष करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इस पूरे मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से हस्तक्षेप करने की भी मांग की जा रही है। प्रदेशाध्यक्ष मोहित ठाकुर ने कहा कि इससे पहले भी जेबीटी बैचवाइज भर्ती में जम्मू-कश्मीर से ईटीटी के नकली डिप्लोमा कर नौकरी लगे हैं, जो केस भी हाई कोर्ट में लंबित पड़ा है। भविष्य में भी अगर जेबीटी के जगह पर बीएड लग जाते हैं, तो जेबीटी छात्रों के साथ यह अन्याय होगा।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color:#4B0082;"><strong><span style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">आरएंडपी रूल्स से न हो छेड़छाड़ :</span></strong></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">जेबीटी प्रशिक्षुओं का मानना है कि बीएड डिग्रीधारकों को जेबीटी के लिए पात्र करने से उनके प्रशिक्षण का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। प्रशिक्षण हासिल कर चुके हजारों बेरोजगारों के साथ वर्तमान में प्रशिक्षण हासिल कर रहे प्रशिक्षुओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इन प्रशिक्षुओं की मांग है की बीएड वालों को जेबीटी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो जेबीटी को समय पर इनके प्रशिक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रदेश में 40 हजार युवाओं ने जेबीटी और डीएलएड डिप्लोमा किया हुआ है। भर्ती में देरी की वजह से उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिली है। यदि बीएड भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माने जाते हैं, तो उनका नंबर ही नहीं आएगा। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव होने से जिला के डाइट संस्थान व निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके साथ ही बीएड अभ्यर्थी भी जेबीटी पदों में आएंगे, तो उनका नंबर कई सालों बाद आएगा। ऐसे में मांग की जा रही है कि आरएंडपी रूल्स से कतई छेड़छाड़ न की जाए।</span></span></p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[B.ED -has -to- be- recognized, so- why- doesn't the- government- stop- JBT- training!]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/nhm-employees-waiting-for-regularization]]></guid>
                       <title><![CDATA[नियमितीकरण के इंतजार में एनएचएम कर्मचारी]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/nhm-employees-waiting-for-regularization]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 15 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[प्रदेश में अभी नई सरकार को आए कुछ महीने ही हुए है मगर अभी से प्रदेश के कर्मचारियों ने सरकार के आगे अपनी मांगो का भंडार लगा दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि पिछली सरकार जो न कर पाई वो नई सरकार कर दिखाएगी। आशावान कर्मचारियों की लम्बी फेहरिस्त में एनएचएम कर्मचारी भी शामिल है। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार एनएचएम कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य समितियों के तहत 24 वर्ष से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी सरकार द्वारा इन कर्मचारियों के लिए नियमितिकरण की कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है।

एनएचएम कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए जल्द से जल्द मणिपुर की तर्ज पर पॉलिसी का निर्माण किया जाए। हाल ही में एनएचएम कर्मचारियों का एक &nbsp;प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक सुदेश मोक्टा से मिला। इस दौरान उन्होंने मांग उठाई है कि कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए पॉलिसी का निर्माण किया जाए। गौरतलब है कि कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए बन रही पॉलिसी की फाइल एमडी एनएचएम के कार्यालय पहुंच चुकी है। ऐसे में कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि जल्द से जल्द उनके लिए मणिपुर की तर्ज पर पॉलिसी तैयार की जाए।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 वर्षों से तैनात करीब 1700 कर्मचारियों को अभी तक नियमित नहीं किया गया है। इनके नियमितीकरण के लिए पॉलिसी नहीं बनाई गई है। ऐसे में कर्मचारी पिछले कई सालों से राज्य सरकार से मांग उठा रहे हैं कि इनके नियमितीकरण के लिए पॉलिसी तैयार की जाए। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार ने यह मांग उठाई है। दरअसल यह कर्मचारी केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चलाई जाने वाली विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं और प्रदेश के सभी लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने का काम करते हैं। सतीश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत रहे इन कर्मचारियों में से लगभग चार कर्मचारियों की नौकरी के दौरान मौत हो चुकी है तथा लगभग 56 लोग बिना किसी बेनेफिट लिए रिटायर हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। किसी सरकार ने न तो आज तक इन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया और न ही इन्हें रेगुलर स्केल का लाभ दिया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह मांगें भी उठाईं
प्रतिनिधिमंडल ने मांग उठाई है कि एनएचएम से रिटायर होने वाले कर्मचारियेां को ग्रेच्यूटी भी प्रदान की जाए। साथ ही एनएचएम मेें करीब 250 के करीब कर्मचारी ऐसे हैं, जिन कर्मचारियों का ईपीएफ नहीं कट रहा है। उन्होंने मांग उठाई है कि एनएचएम के तहत कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों का ईपीएफ काटा जाए। वही मिशन निदेशक ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगो पर विचार किया जाएगा।


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]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">प्रदेश में अभी नई सरकार को आए कुछ महीने ही हुए है मगर अभी से प्रदेश के कर्मचारियों ने सरकार के आगे अपनी मांगो का भंडार लगा दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि पिछली सरकार जो न कर पाई वो नई सरकार कर दिखाएगी। आशावान कर्मचारियों की लम्बी फेहरिस्त में एनएचएम कर्मचारी भी शामिल है। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार एनएचएम कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य समितियों के तहत 24 वर्ष से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी सरकार द्वारा इन कर्मचारियों के लिए नियमितिकरण की कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">एनएचएम कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए जल्द से जल्द मणिपुर की तर्ज पर पॉलिसी का निर्माण किया जाए। हाल ही में एनएचएम कर्मचारियों का एक &nbsp;प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक सुदेश मोक्टा से मिला। इस दौरान उन्होंने मांग उठाई है कि कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए पॉलिसी का निर्माण किया जाए। गौरतलब है कि कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए बन रही पॉलिसी की फाइल एमडी एनएचएम के कार्यालय पहुंच चुकी है। ऐसे में कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि जल्द से जल्द उनके लिए मणिपुर की तर्ज पर पॉलिसी तैयार की जाए।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 वर्षों से तैनात करीब 1700 कर्मचारियों को अभी तक नियमित नहीं किया गया है। इनके नियमितीकरण के लिए पॉलिसी नहीं बनाई गई है। ऐसे में कर्मचारी पिछले कई सालों से राज्य सरकार से मांग उठा रहे हैं कि इनके नियमितीकरण के लिए पॉलिसी तैयार की जाए। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार ने यह मांग उठाई है। दरअसल यह कर्मचारी केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चलाई जाने वाली विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं और प्रदेश के सभी लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने का काम करते हैं। सतीश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत रहे इन कर्मचारियों में से लगभग चार कर्मचारियों की नौकरी के दौरान मौत हो चुकी है तथा लगभग 56 लोग बिना किसी बेनेफिट लिए रिटायर हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। किसी सरकार ने न तो आज तक इन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया और न ही इन्हें रेगुलर स्केल का लाभ दिया जा रहा है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color:#4B0082;"><strong><span style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">प्रतिनिधिमंडल ने यह मांगें भी उठाईं</span></strong></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">प्रतिनिधिमंडल ने मांग उठाई है कि एनएचएम से रिटायर होने वाले कर्मचारियेां को ग्रेच्यूटी भी प्रदान की जाए। साथ ही एनएचएम मेें करीब 250 के करीब कर्मचारी ऐसे हैं, जिन कर्मचारियों का ईपीएफ नहीं कट रहा है। उन्होंने मांग उठाई है कि एनएचएम के तहत कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों का ईपीएफ काटा जाए। वही मिशन निदेशक ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगो पर विचार किया जाएगा।</span></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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&nbsp;</p>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[NHM -employees- waiting- for- regularization]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/art-teacher-yearning-for-job-despite-training]]></guid>
                       <title><![CDATA[प्रशिक्षण के बावजूद भी नौकरी के लिए तरस रहे कला अध्यापक]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/art-teacher-yearning-for-job-despite-training]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 15 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश के कला अध्यापक सरकार से खासे नाराज चल रहे है। इन अध्यापकों को प्रशिक्षण लेने के बाद भी आज तक नियुक्ति नहीं मिल पाई है। हिमाचल प्रदेश बेरोजगार कला अध्यापक संघ का कहना है कि सरकार से बार -बार गुहार लगाने के बाद भी उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। संघ के अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा है कि वे सरकार द्वारा करवाए गए आर्ट्स एंड क्राफ्ट का डिप्लोमा करके नौकरी की आस लगाकर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अच्छी शिक्षा की गुणवत्ता देने की बात करती है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षकों से वंचित रख रही है। संघ ने कहा है कि 15 हजार बेरोजगार कला अध्यापकों ने कांग्रेस सरकार को तन-मन से परिवार सहित सरकार बनाने में सहयोग किया है और अब वे सरकार से नौकरी की आशा लेकर बैठे हैं।

प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के करीब 10 हजार पद खाली चल रहे हैं। इन पदों में से कला अध्यापकों के 881 और पीईटी शिक्षकों के 947 पद खाली चल रहे हैं। इन पदों को भरने के लिए स्कूलों में 100 बच्चों की संख्या की शर्त आफत बनी हुई है। दरअसल 100 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले माध्यमिक स्कूलों में कला अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार ऐसे में स्कूलों में कला अध्यापक का पद भरा जाना अनिवार्य नहीं है। यानि जिन माध्यमिक स्कूलों में छात्र संख्या 100 से कम है, उन स्कूलों में स्वीकृत कला अध्यापकों के 881 रिक्त पदों को होल्ड में रखा गया है। छात्र संख्या बढऩे पर इन पदों को दोबारा बहाल कर अध्यापकों की नियुक्तियां की जाएंगी।
ऐसे में प्रदेश सरकार से कई बार इस शर्त को हटाने की मांग की जा चुकी है।

&nbsp;हिमाचल प्रदेश बेरोजगार कला अध्यापक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि जल्द उनके लिए रोजगार का प्रावधान किया जाए। बेरोजगार कला अध्यापक संघ के समस्त सदस्यों ने कहा है कि जब से उन्होंने कला अध्यापक का डिप्लोमा किया है तब से डिप्रेशन में हैं। नौकरी की आस में उम्र भी 50 से 55 के बीच हो चुकी है। मिडल स्कूलों में लगाई गई 100 बच्चों की कंडीशन जो 2012 में आरटी एक्ट के तहत लगाई गई थी, उसे हटाने की भी मांग की गई है। संघ ने कहा है कला एक ऐसा विषय है जो किसी भी बच्चे को कलम चलाना सिखाता है और आगे उसके भविष्य को बनाता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में 100 बच्चों की शर्त को समाप्त किया जाए।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">हिमाचल प्रदेश के कला अध्यापक सरकार से खासे नाराज चल रहे है। इन अध्यापकों को प्रशिक्षण लेने के बाद भी आज तक नियुक्ति नहीं मिल पाई है। हिमाचल प्रदेश बेरोजगार कला अध्यापक संघ का कहना है कि सरकार से बार -बार गुहार लगाने के बाद भी उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। संघ के अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा है कि वे सरकार द्वारा करवाए गए आर्ट्स एंड क्राफ्ट का डिप्लोमा करके नौकरी की आस लगाकर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अच्छी शिक्षा की गुणवत्ता देने की बात करती है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षकों से वंचित रख रही है। संघ ने कहा है कि 15 हजार बेरोजगार कला अध्यापकों ने कांग्रेस सरकार को तन-मन से परिवार सहित सरकार बनाने में सहयोग किया है और अब वे सरकार से नौकरी की आशा लेकर बैठे हैं।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के करीब 10 हजार पद खाली चल रहे हैं। इन पदों में से कला अध्यापकों के 881 और पीईटी शिक्षकों के 947 पद खाली चल रहे हैं। इन पदों को भरने के लिए स्कूलों में 100 बच्चों की संख्या की शर्त आफत बनी हुई है। दरअसल 100 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले माध्यमिक स्कूलों में कला अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार ऐसे में स्कूलों में कला अध्यापक का पद भरा जाना अनिवार्य नहीं है। यानि जिन माध्यमिक स्कूलों में छात्र संख्या 100 से कम है, उन स्कूलों में स्वीकृत कला अध्यापकों के 881 रिक्त पदों को होल्ड में रखा गया है। छात्र संख्या बढऩे पर इन पदों को दोबारा बहाल कर अध्यापकों की नियुक्तियां की जाएंगी।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">ऐसे में प्रदेश सरकार से कई बार इस शर्त को हटाने की मांग की जा चुकी है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">&nbsp;हिमाचल प्रदेश बेरोजगार कला अध्यापक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि जल्द उनके लिए रोजगार का प्रावधान किया जाए। बेरोजगार कला अध्यापक संघ के समस्त सदस्यों ने कहा है कि जब से उन्होंने कला अध्यापक का डिप्लोमा किया है तब से डिप्रेशन में हैं। नौकरी की आस में उम्र भी 50 से 55 के बीच हो चुकी है। मिडल स्कूलों में लगाई गई 100 बच्चों की कंडीशन जो 2012 में आरटी एक्ट के तहत लगाई गई थी, उसे हटाने की भी मांग की गई है। संघ ने कहा है कला एक ऐसा विषय है जो किसी भी बच्चे को कलम चलाना सिखाता है और आगे उसके भविष्य को बनाता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में 100 बच्चों की शर्त को समाप्त किया जाए।</span></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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&nbsp;</p>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Art- teacher - yearning- for- job- despite- training]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/ntt-trainee-waiting-for-recruitment]]></guid>
                       <title><![CDATA[भर्ती के इंतज़ार में एनटीटी प्रशिक्षु]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/karamchari-lehar/ntt-trainee-waiting-for-recruitment]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 15 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[एक तरफ प्रदेश के सैकड़ो युवा एनटीटी भर्ती का इंतज़ार कर रहे है, &nbsp;वहीँ दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश में प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती न होने से केंद्र सरकार से मंजूर 47 करोड़ का बजट लैप्स हो गया है। केंद्र सरकार ने इन शिक्षकों को मानदेय देने के लिए यह बजट मंजूर किया था। सरकार 31 मार्च तक प्रदेश में 4,700 शिक्षक भर्ती नहीं कर सकी। नर्सरी टीचर ट्रेनिंग के एक और दो वर्ष के कोर्स को लेकर बीते तीन वर्ष से विवाद चल रहा है। पूर्व की भाजपा सरकार समय रहते इस मामले को नहीं सुलझा पाया थे। अब अगर प्रदेश की सुक्खू सरकार भी प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती नहीं कर सकी तो वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए मिला करीब 50 करोड़ का बजट भी लैप्स हो जाएगा। प्रदेश में करीब 58 हजार बच्चों ने नर्सरी और केजी कक्षा में दाखिले लिए हुए हैं। बीते तीन वर्षों से इन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चली हुई है।

पूर्व की भाजपा सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए नीति बनाने का फैसला लिया था। नीति बनने तक इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती करने को मंजूरी दी थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से मामला फंस गया। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने पर सुक्खू सरकार ने इन भर्तियों को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू किया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय शिक्षा सचिव के समक्ष भी नई दिल्ली में यह मामला उठाया है।

हिमाचल सरकार इस मसले को हल करने के लिए एक विकल्प सामने रखना चाह रही है। &nbsp;जिन अभ्यार्थियों ने एक साल का एनटीटी कोर्स मान्यता प्राप्त संस्थान से किया है, वह भर्ती के लिए पात्र हो सकेंगे। नियुक्ति के एक साल के भीतर उन्हें 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना होगा। &nbsp;ब्रिज कोर्स उत्तीर्ण करने के बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता पूरी मानी जाएगी। &nbsp;जिन अभ्यार्थियों के एनटीटी कोर्स मान्यता प्राप्त संस्थान से नहीं हुए हैं या नियामक आयोग ने संस्थानों की मान्यता को रद्द कर दिया है। &nbsp;उन संस्थानों के छात्र ब्रिज कोर्स के लिए भी पात्र नहीं माने जाएंगे। अगर ये विपकलप स्वीकार्य हुआ तो एनटीटी प्रशिक्षुओं को नौकरी मिल पाएगी अन्यथा नौकरी का इंतज़ार जारी रहेगा।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">एक तरफ प्रदेश के सैकड़ो युवा एनटीटी भर्ती का इंतज़ार कर रहे है, &nbsp;वहीँ दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश में प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती न होने से केंद्र सरकार से मंजूर 47 करोड़ का बजट लैप्स हो गया है। केंद्र सरकार ने इन शिक्षकों को मानदेय देने के लिए यह बजट मंजूर किया था। सरकार 31 मार्च तक प्रदेश में 4,700 शिक्षक भर्ती नहीं कर सकी। नर्सरी टीचर ट्रेनिंग के एक और दो वर्ष के कोर्स को लेकर बीते तीन वर्ष से विवाद चल रहा है। पूर्व की भाजपा सरकार समय रहते इस मामले को नहीं सुलझा पाया थे। अब अगर प्रदेश की सुक्खू सरकार भी प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती नहीं कर सकी तो वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए मिला करीब 50 करोड़ का बजट भी लैप्स हो जाएगा। प्रदेश में करीब 58 हजार बच्चों ने नर्सरी और केजी कक्षा में दाखिले लिए हुए हैं। बीते तीन वर्षों से इन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चली हुई है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">पूर्व की भाजपा सरकार ने शिक्षकों की भर्ती के लिए नीति बनाने का फैसला लिया था। नीति बनने तक इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती करने को मंजूरी दी थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने से मामला फंस गया। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने पर सुक्खू सरकार ने इन भर्तियों को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू किया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय शिक्षा सचिव के समक्ष भी नई दिल्ली में यह मामला उठाया है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">हिमाचल सरकार इस मसले को हल करने के लिए एक विकल्प सामने रखना चाह रही है। &nbsp;जिन अभ्यार्थियों ने एक साल का एनटीटी कोर्स मान्यता प्राप्त संस्थान से किया है, वह भर्ती के लिए पात्र हो सकेंगे। नियुक्ति के एक साल के भीतर उन्हें 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना होगा। &nbsp;ब्रिज कोर्स उत्तीर्ण करने के बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता पूरी मानी जाएगी। &nbsp;जिन अभ्यार्थियों के एनटीटी कोर्स मान्यता प्राप्त संस्थान से नहीं हुए हैं या नियामक आयोग ने संस्थानों की मान्यता को रद्द कर दिया है। &nbsp;उन संस्थानों के छात्र ब्रिज कोर्स के लिए भी पात्र नहीं माने जाएंगे। अगर ये विपकलप स्वीकार्य हुआ तो एनटीटी प्रशिक्षुओं को नौकरी मिल पाएगी अन्यथा नौकरी का इंतज़ार जारी रहेगा।</span></span></p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[NTT -Trainee- waiting -for- recruitment]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/hrtc-pensioner-struggling-for-pension-in-old-age]]></guid>
                       <title><![CDATA[बुढ़ापे में पेंशन के लिए भी संघर्षरत एचआरटीसी पेंशनर]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/hrtc-pensioner-struggling-for-pension-in-old-age]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 15 May 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[एचआरटीसी को हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। आज हिमाचल के लगभग हर कोने तक एचआरटीसी की बसें पहुँचती है जो हिमाचल की कठिन भौगौलिक परिस्थितयों के बावजूद भी जन-जन को मुख्यधारा से जोड़ती है। मगर हिमाचल के दूर दराज़ क्षेत्रों तक पहुँचने वाली इन बसों को सड़क तक पहुँचाने में जिन लोगों ने हम भूमिका निभाई आज वो ही सड़को पर उतरने को मजबूर हो गए है। हम बात कर रहे एचआरटीसी के 8000 सेवानिवृत कर्मचारियों की। पूरी उम्र सरकार के लिए जिन कर्मचारियों ने काम किया, आज बुढ़ापे में उन्हीं का साथ सरकारों ने छोड़ दिया। यह हालात है हर महीने अपनी पेंशन का इंतज़ार करने को मजबूर हुए एचआरटीसी के पेंशनरों का। हिमाचल पथ परिवहन के सेवानिवृत कर्मचारी अक्सर सरकार से गुहार लगाते हैं कि उन्हें समय पर उनकी पेंशन नहीं मिल रही। इन सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए ये एक या दो नहीं बल्कि हर महीने की कहानी बनकर रह गई है। अपना पूरा जीवन एचआरटीसी को समर्पित करने वाले ये कर्मचारी अब बुढ़ापे में अपने एक मात्र सहारे पेंशन को लेकर हर महीने परेशान रहते हैं। इन पेंशनर्स का कहना हैं कि समय पर पेंशन न &nbsp;मिलने के कारण इनके लिए जीवन यापन तक करना मुश्किल हो गया है। ये पेंशनर इस बुढ़ापे में अपनी दवाई का खर्चा भी नहीं उठा पा रहे हैं।

&nbsp;हालात ये है कि जब ये सेवानिवृत कर्मचारी अपनी मांगो के लिए सड़कों पर उतरे तो पिछली सरकार द्वारा इन पर एफआईआर दर्ज की गई। नई सरकार भी इनपर कुछ ख़ास मेहरबान नहीं दिखती, न तो इन पर दर्ज मामले वापस लिए गए और न ही इनके मसले हल किए गए। एचआरटीसी पेंशन कल्याण संगठन के अध्यक्ष सत्याप्रश शर्मा का कहना है कि फाइनेंसियल क्राइसिस के नाम पर हर बार उनकी पेंशन में विलम्ब कर दिया जाता है। जो पैसा आता है उससे पहले बाकि काम निपटाए जाते है, कर्मचारियों को वेतन दिया जाता &nbsp;है और फिर कहीं जाकर सेवानिवृत कर्मचारियों की बारी आती है। उन्होंने कहा कि ऐसा एक भी महीना नहीं गुज़रता जब इन्हें बिना एमडी ऑफिस के चक्कर काटे पेंशन मिल जाए।
समय पर पेंशन न मिलना तो महज़ एक समस्या है मगर इसके अलावा भी ये सेवानिवृत कर्मचारी कई परेशानियां झेल रहे है। सरकार ने अब तक उन्हें उनके एरिअर का भी भुगतान नहीं किया है। &nbsp;2015 से डीए का एरियर पेंडिंग है। रिवाइज्ड पे स्केल भी इन कर्मचारियों को सात महीने बाद मिला और बीते सात महीनों का जो एरियर बना वो भी पेंडिंग है। रिवाइज्ड ग्रेचुटी और रिवाइज्ड लीव एकाश्मेंट जैसे और भी कई भुगतान बाकी है।

रोडवेज बनाने की मांग :
सेवानिवृत कर्मचारियों का मानना है कि यदि सरकार चाहे तो उनकी समस्या हल हो सकती है। उनके पेंशन के भुगतान के लिए एक अलग ट्रस्ट बनाया जा सकता है जो ये सुनिश्चित करे कि सेवानिवृत कर्मचारियों को समय पर उनकी पेंशन मिले। साथ ही कर्मचारियों की ये भी मांग है की एचआरटीसी को रोडवेज बनाया जाए ताकि प्रदेश सरकार के बाकि कर्मचारियों की तरह ही इन्हें सभी लाभ मिल पाए। &nbsp;

सीएम की माता की पेंशन भी डिले !
एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संगठन का कहना है कि खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू &nbsp;के पिता एचआरटीसी में ड्राइवर रह चुके हैं, मगर इसके बावजूद भी एचआरटीसी पेंशनर्स के बारे में कोई सुध नहीं ले रहा। स्थिति इतनी खराब है कि मुख्यमंत्री की माता को मिलने वाली पेंशन भी समय पर नहीं आती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम की सेवा में जिन लोगों ने पूरी जिंदगी लगा दी, उन्हें अब पेंशन के लिए तरसना पड़ रहा है।

पेंशनरों की मुख्य मांगें :
- महीने के पहले हफ्ते में जारी हो पेंशन
- मेडिकल बिलों का समय पर भुगतान
- 5, 10 और 15 फीसदी पेंशन वृद्धि का लाभ
- 2015 से ग्रेच्युटी सहित अन्य भत्तों का भुगतान
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                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">एचआरटीसी को हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। आज हिमाचल के लगभग हर कोने तक एचआरटीसी की बसें पहुँचती है जो हिमाचल की कठिन भौगौलिक परिस्थितयों के बावजूद भी जन-जन को मुख्यधारा से जोड़ती है। मगर हिमाचल के दूर दराज़ क्षेत्रों तक पहुँचने वाली इन बसों को सड़क तक पहुँचाने में जिन लोगों ने हम भूमिका निभाई आज वो ही सड़को पर उतरने को मजबूर हो गए है। हम बात कर रहे एचआरटीसी के 8000 सेवानिवृत कर्मचारियों की। पूरी उम्र सरकार के लिए जिन कर्मचारियों ने काम किया, आज बुढ़ापे में उन्हीं का साथ सरकारों ने छोड़ दिया। यह हालात है हर महीने अपनी पेंशन का इंतज़ार करने को मजबूर हुए एचआरटीसी के पेंशनरों का। हिमाचल पथ परिवहन के सेवानिवृत कर्मचारी अक्सर सरकार से गुहार लगाते हैं कि उन्हें समय पर उनकी पेंशन नहीं मिल रही। इन सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए ये एक या दो नहीं बल्कि हर महीने की कहानी बनकर रह गई है। अपना पूरा जीवन एचआरटीसी को समर्पित करने वाले ये कर्मचारी अब बुढ़ापे में अपने एक मात्र सहारे पेंशन को लेकर हर महीने परेशान रहते हैं। इन पेंशनर्स का कहना हैं कि समय पर पेंशन न &nbsp;मिलने के कारण इनके लिए जीवन यापन तक करना मुश्किल हो गया है। ये पेंशनर इस बुढ़ापे में अपनी दवाई का खर्चा भी नहीं उठा पा रहे हैं।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">&nbsp;हालात ये है कि जब ये सेवानिवृत कर्मचारी अपनी मांगो के लिए सड़कों पर उतरे तो पिछली सरकार द्वारा इन पर एफआईआर दर्ज की गई। नई सरकार भी इनपर कुछ ख़ास मेहरबान नहीं दिखती, न तो इन पर दर्ज मामले वापस लिए गए और न ही इनके मसले हल किए गए। एचआरटीसी पेंशन कल्याण संगठन के अध्यक्ष सत्याप्रश शर्मा का कहना है कि फाइनेंसियल क्राइसिस के नाम पर हर बार उनकी पेंशन में विलम्ब कर दिया जाता है। जो पैसा आता है उससे पहले बाकि काम निपटाए जाते है, कर्मचारियों को वेतन दिया जाता &nbsp;है और फिर कहीं जाकर सेवानिवृत कर्मचारियों की बारी आती है। उन्होंने कहा कि ऐसा एक भी महीना नहीं गुज़रता जब इन्हें बिना एमडी ऑफिस के चक्कर काटे पेंशन मिल जाए।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">समय पर पेंशन न मिलना तो महज़ एक समस्या है मगर इसके अलावा भी ये सेवानिवृत कर्मचारी कई परेशानियां झेल रहे है। सरकार ने अब तक उन्हें उनके एरिअर का भी भुगतान नहीं किया है। &nbsp;2015 से डीए का एरियर पेंडिंग है। रिवाइज्ड पे स्केल भी इन कर्मचारियों को सात महीने बाद मिला और बीते सात महीनों का जो एरियर बना वो भी पेंडिंग है। रिवाइज्ड ग्रेचुटी और रिवाइज्ड लीव एकाश्मेंट जैसे और भी कई भुगतान बाकी है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<strong><span style="color:#4B0082;"><span style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">रोडवेज बनाने की मांग :</span></span></strong><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">सेवानिवृत कर्मचारियों का मानना है कि यदि सरकार चाहे तो उनकी समस्या हल हो सकती है। उनके पेंशन के भुगतान के लिए एक अलग ट्रस्ट बनाया जा सकता है जो ये सुनिश्चित करे कि सेवानिवृत कर्मचारियों को समय पर उनकी पेंशन मिले। साथ ही कर्मचारियों की ये भी मांग है की एचआरटीसी को रोडवेज बनाया जाए ताकि प्रदेश सरकार के बाकि कर्मचारियों की तरह ही इन्हें सभी लाभ मिल पाए। &nbsp;</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<strong><span style="color:#800080;"><span style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">सीएम की माता की पेंशन भी डिले !</span></span></strong><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संगठन का कहना है कि खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू &nbsp;के पिता एचआरटीसी में ड्राइवर रह चुके हैं, मगर इसके बावजूद भी एचआरटीसी पेंशनर्स के बारे में कोई सुध नहीं ले रहा। स्थिति इतनी खराब है कि मुख्यमंत्री की माता को मिलने वाली पेंशन भी समय पर नहीं आती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम की सेवा में जिन लोगों ने पूरी जिंदगी लगा दी, उन्हें अब पेंशन के लिए तरसना पड़ रहा है।</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
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<span style="color:#4B0082;"><strong><span style="font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">पेंशनरों की मुख्य मांगें :</span></strong></span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">- महीने के पहले हफ्ते में जारी हो पेंशन</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">- मेडिकल बिलों का समय पर भुगतान</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">- 5, 10 और 15 फीसदी पेंशन वृद्धि का लाभ</span><br style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: small;" />
<span style="color: rgb(34, 34, 34); font-family: Arial, Helvetica, sans-serif;">- 2015 से ग्रेच्युटी सहित अन्य भत्तों का भुगतान</span></span></p>
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