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               <title>First Verdict Media - Astrology</title>
               <link>https://www.firstverdict.com</link>
               <lastBuildDate><![CDATA[Fri, 01 May 2026 08:49:18 +0530]]></lastBuildDate>
            <language>en</language>	<image>
            	<title>First Verdict Media - Astrology</title>
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            <description>First Verdict Media provides the latest information from and in-depth coverage of India and the world. Find breaking news, India news, Himachal news, top stories, elections, politics, business, cricket, movies, lifestyle, health, videos, photos and more.</description>
            
           <item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/a-festival-in-which-arghya-is-offered-even-to-the-setting-sun-know-why-chhath-festival-is-celebrated]]></guid>
                       <title><![CDATA[एक ऐसा पर्व जिसमें डूबते सूरज को भी अर्घ्य दिया जाता है अर्ध्य, जानिए छठ पर्व क्यों मनाया जाता है ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/a-festival-in-which-arghya-is-offered-even-to-the-setting-sun-know-why-chhath-festival-is-celebrated]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 27 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;


छठ पर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाने की परंपरा है। यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य तथा चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह त्योहार संपन्न होता है। छठ पर्व 25 अक्टूबर से ही शुरू हो चुका है और आज इसका तीसरा दिन है। बीते कल खरना से ही व्रत रखने वाले लोगों का 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू हो चुका है। कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन होगा। यह खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश तथा नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाने वाला पर्व है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय विदेशों में भी इसे मनाते हैं।&nbsp;&nbsp;

छठ पूजा में मूर्तिपूजा नहीं बल्कि सूर्य तथा जल की पूजा की जाती है यानि प्रकृति की पूजा। छठ को शुद्धता तथा पवित्रता का महापर्व कहा जाता है। क्यों कि इसमें शुद्धता का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखा जाता है। इस पर्व में पूरी श्रद्धा से मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ियों से शुद्ध घी से मिटटी या पीतल के बर्तन में प्रसाद बनाया जाता है। इस व्रत में चार दिनों तक बहुत ही कठोर नियम का पालन करना पड़ता है। इस वजह से इसे भक्ति और कठोर तप अद्भुत संगम कहा गया है। छठ महापर्व में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके व छठी मां के प्रति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। इस पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। सूर्य देवता को जीवन, ऊर्जा तथा स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है और वहीं छठी मां को संतान की रक्षा का प्रतीक।

छठ पहला दिन
इस दिन व्रती सिर्फ एक समय ही शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। चावल, चना दाल एवं कद्दू की सब्जी का प्रसाद बनाया जाता है। छठ मां&nbsp; और सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके बाद परिवार के सदस्य इसे ग्रहण करते हैं।&nbsp;

दूसरा दिन खरना
खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद दूध और गुड़ व चावल की खीर, रोटी तथा फल का प्रसाद छठी मां को अर्पित करते हैं। इसके बाद यह प्रसाद व्रतियों द्वारा ग्रहण किया जाता है। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद से ही 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।&nbsp;

तीसरा दिन&nbsp;
खरना के बाद से ही इस दिन भर निर्जला उपवास पर रहते हैं व्रती। सूर्य डूबने से पहले व्रती स्नान कर स्वच्छ बिल्कुल नए कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में घी से बना ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर डूबता हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए आराधना करते हैं। व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं।&nbsp;

चौथा दिन&nbsp;
सुबह सूर्य देव के उगने से पहले व्रती स्नान कर फिर से बिल्कुल नए स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर उगते हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए उपासना करते हैं। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं। खरना के बाद से ही करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास के बाद इस दिन इस पर्व का समापन हो जाता है।&nbsp;

&nbsp;

इसे मनाने के पीछे पौराणिक कथाएं&nbsp;&nbsp;

द्वापर युग में माना जाता है कि पांडव के कठिन वक्त में द्रौपदी ने छठ व्रत कर सूर्य देव से अपने परिवार के लिए प्रार्थना की थी। वहीं, दूसरी तरफ कर्ण रोज स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे और साथ ही सूर्य उपासना करने वाले इन्हें प्रथम साधक कहा जाता है। तब से इसे मनाया जाने लगा।&nbsp;

त्रेता युग में श्रीराम जब अयोध्या लौटे उसके बाद छठ व्रत शुरु हुई। रावण का वध करने पर माना जाता है कि श्रीराम को ब्रह्महत्या का पाप लग गया था। इससे मुक्ति पाने के लिए कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन श्रीराम व मां सीता ने छह दिनों तक सूर्य देव की पूजा की। तब से इसे छठ पर्व के रूप में मनाया जाने लगा।

मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक़, सृष्टि की रचना के वक्त देवी प्रकृति छह भागों में विभाजित हुए। छठा अंश सबसे बेहद शक्तिशाली माने गए, जिसे छठी मां कहा गया। इन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><br />
<span style="font-size:18px;">छठ पर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाने की परंपरा है। यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य तथा चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह त्योहार संपन्न होता है। छठ पर्व 25 अक्टूबर से ही शुरू हो चुका है और आज इसका तीसरा दिन है। बीते कल खरना से ही व्रत रखने वाले लोगों का 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू हो चुका है। कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन होगा। यह खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश तथा नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाने वाला पर्व है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय विदेशों में भी इसे मनाते हैं।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">छठ पूजा में मूर्तिपूजा नहीं बल्कि सूर्य तथा जल की पूजा की जाती है यानि प्रकृति की पूजा। छठ को शुद्धता तथा पवित्रता का महापर्व कहा जाता है। क्यों कि इसमें शुद्धता का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखा जाता है। इस पर्व में पूरी श्रद्धा से मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ियों से शुद्ध घी से मिटटी या पीतल के बर्तन में प्रसाद बनाया जाता है। इस व्रत में चार दिनों तक बहुत ही कठोर नियम का पालन करना पड़ता है। इस वजह से इसे भक्ति और कठोर तप अद्भुत संगम कहा गया है। छठ महापर्व में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके व छठी मां के प्रति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। इस पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। सूर्य देवता को जीवन, ऊर्जा तथा स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है और वहीं छठी मां को संतान की रक्षा का प्रतीक।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>छठ पहला दिन</strong><br />
इस दिन व्रती सिर्फ एक समय ही शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। चावल, चना दाल एवं कद्दू की सब्जी का प्रसाद बनाया जाता है। छठ मां&nbsp; और सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके बाद परिवार के सदस्य इसे ग्रहण करते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दूसरा दिन खरना</strong><br />
खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद दूध और गुड़ व चावल की खीर, रोटी तथा फल का प्रसाद छठी मां को अर्पित करते हैं। इसके बाद यह प्रसाद व्रतियों द्वारा ग्रहण किया जाता है। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद से ही 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>तीसरा दिन&nbsp;</strong><br />
खरना के बाद से ही इस दिन भर निर्जला उपवास पर रहते हैं व्रती। सूर्य डूबने से पहले व्रती स्नान कर स्वच्छ बिल्कुल नए कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में घी से बना ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर डूबता हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए आराधना करते हैं। व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>चौथा दिन</strong>&nbsp;<br />
सुबह सूर्य देव के उगने से पहले व्रती स्नान कर फिर से बिल्कुल नए स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर उगते हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए उपासना करते हैं। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं। खरना के बाद से ही करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास के बाद इस दिन इस पर्व का समापन हो जाता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इसे मनाने के पीछे पौराणिक कथाएं&nbsp;&nbsp;</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">द्वापर युग में माना जाता है कि पांडव के कठिन वक्त में द्रौपदी ने छठ व्रत कर सूर्य देव से अपने परिवार के लिए प्रार्थना की थी। वहीं, दूसरी तरफ कर्ण रोज स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे और साथ ही सूर्य उपासना करने वाले इन्हें प्रथम साधक कहा जाता है। तब से इसे मनाया जाने लगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">त्रेता युग में श्रीराम जब अयोध्या लौटे उसके बाद छठ व्रत शुरु हुई। रावण का वध करने पर माना जाता है कि श्रीराम को ब्रह्महत्या का पाप लग गया था। इससे मुक्ति पाने के लिए कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन श्रीराम व मां सीता ने छह दिनों तक सूर्य देव की पूजा की। तब से इसे छठ पर्व के रूप में मनाया जाने लगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक़, सृष्टि की रचना के वक्त देवी प्रकृति छह भागों में विभाजित हुए। छठा अंश सबसे बेहद शक्तिशाली माने गए, जिसे छठी मां कहा गया। इन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है।</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[A festival in which Arghya is offered even to the setting sun, know why Chhath festival is celebrated.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/even-today-is-amavasya-so-when-is-govardhan-puja-know-the-date-and-puja-time]]></guid>
                       <title><![CDATA[आज भी अमावस्या, तो गोवर्धन पूजा कब ? जानें डेट व पूजा मुहूर्त]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/even-today-is-amavasya-so-when-is-govardhan-puja-know-the-date-and-puja-time]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 21 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा&nbsp;होती है। गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। चूकि इस बार अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक है। इसके बाद ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरु होगी। इसीलिए पंचांग के अनुसार, आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक अमावस्या तिथि के चलते गोवर्धन पूजा आज नहीं बल्कि कल 22 अक्टूबर को की जाएगी।&nbsp;&nbsp;

पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:49 बजे तक है। इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ प्रीति का भी संयोग रहेगा। इस दिन ग्रहों के राजा यानि सूर्य तुला राशि में रहेंगे और साथ ही यहां चंद्रमा भी गोचर करेंगे। इस वजह से यह समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ रहेगा।

पूजा विधि
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह उठकर घर को साफ कर लें। गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बना कर, इसपर रोली व अक्षत रख लें। अब फूल, जल, घी, गुड़, दूध व खीर-पूरी का भोग लगाएं। इसके बाद वहां दीप जलाएं। अब गोवर्धन पर्वत के चारों ओर परिक्रमा करें और आखिर में आरती करें।&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा&nbsp;होती</span><span style="font-size:18px;"> है। गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। चूकि इस बार अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक है। इसके बाद ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरु होगी। इसीलिए पंचांग के अनुसार, आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक अमावस्या तिथि के चलते गोवर्धन पूजा आज नहीं बल्कि कल 22 अक्टूबर को की जाएगी।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong><br />
पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:49 बजे तक है। इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ प्रीति का भी संयोग रहेगा। इस दिन ग्रहों के राजा यानि सूर्य तुला राशि में रहेंगे और साथ ही यहां चंद्रमा भी गोचर करेंगे। इस वजह से यह समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ रहेगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा विधि</strong><br />
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह उठकर घर को साफ कर लें। गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बना कर, इसपर रोली व अक्षत रख लें। अब फूल, जल, घी, गुड़, दूध व खीर-पूरी का भोग लगाएं। इसके बाद वहां दीप जलाएं। अब गोवर्धन पर्वत के चारों ओर परिक्रमा करें और आखिर में आरती करें।&nbsp;</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Even today is Amavasya, so when is Govardhan Puja? Know the date and puja time]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-diwali-celebrated-know-the-reason-behind-it]]></guid>
                       <title><![CDATA[क्यों मनाई जाती है दिवाली, जानिए इसके पीछे क्या है वजह ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-diwali-celebrated-know-the-reason-behind-it]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 17 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

देशभर में दीपावली को बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। हर साल यह कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस बार दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक है।&nbsp;

इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है और भाई दूज के दिन यह समाप्त हो जाता है। लक्ष्मी-गणेश के आगमन के लिए लोग इस दिन अपने घरों को सजाते हैं और दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाते हैं। लोग इस पर्व पर उपहार स्वरूप एक दूसरे को मिठाईयां भी बांटतें हैं।&nbsp; &nbsp;

इस त्योहार को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं
वाल्मीकि रामायण व रामचरितमानस के अनुसार, त्रेता में जब भगवान राम रावण का वध कर, चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके जब अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या वासियों ने उनका स्वागत दीप प्रज्वलित कर किया था। माना जाता है कि तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में इसे मनाया जाने लगा।&nbsp;

दूसरी प्रचलित कथा यह है कि सतयुग में जब देवताओं ने दानवों के संग समुद्र मंथन किया, तब इससे अमृत कलश लिए भगवान धनवंतरि प्रकट हुए। जिस दिन भगवान धनवंतरि अमृत कलश लिए प्रकट हुए उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। मान्यता है कि तभी से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाने की परंपरा चल पड़ी।

इसी दिन सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर किले से अपने साथ 52 कैदियों को जहांगीर की कैद से छुड़वाया था। इसी के उपलक्ष्य में सिख समुदाय के लोग में इस दिन को बंदी छोड़ दिवस यानी आजादी के दिन के रूप में मनाते हैं।&nbsp;

जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के मोक्ष प्राप्ति के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। जैन ग्रंथों के अनुसार, भगवान महावीर को इसी दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">देशभर में दीपावली को बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। हर साल यह कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस बार दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है और भाई दूज के दिन यह समाप्त हो जाता है। लक्ष्मी-गणेश के आगमन के लिए लोग इस दिन अपने घरों को सजाते हैं और दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाते हैं। लोग इस पर्व पर उपहार स्वरूप एक दूसरे को मिठाईयां भी बांटतें हैं।&nbsp; &nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इस त्योहार को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं</strong><br />
वाल्मीकि रामायण व रामचरितमानस के अनुसार, त्रेता में जब भगवान राम रावण का वध कर, चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके जब अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या वासियों ने उनका स्वागत दीप प्रज्वलित कर किया था। माना जाता है कि तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में इसे मनाया जाने लगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">दूसरी प्रचलित कथा यह है कि सतयुग में जब देवताओं ने दानवों के संग समुद्र मंथन किया, तब इससे अमृत कलश लिए भगवान धनवंतरि प्रकट हुए। जिस दिन भगवान धनवंतरि अमृत कलश लिए प्रकट हुए उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। मान्यता है कि तभी से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाने की परंपरा चल पड़ी।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इसी दिन सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर किले से अपने साथ 52 कैदियों को जहांगीर की कैद से छुड़वाया था। इसी के उपलक्ष्य में सिख समुदाय के लोग में इस दिन को बंदी छोड़ दिवस यानी आजादी के दिन के रूप में मनाते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">जैन धर्म में दिवाली भगवान महावीर के मोक्ष प्राप्ति के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। जैन ग्रंथों के अनुसार, </span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">भगवान महावीर</span><span style="font-size:18px;"> को इसी दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41759.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Why is Diwali celebrated, know the reason behind it]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/do-not-do-these-things-by-mistake-on-diwali-on-the-day-of-kartik-amavasya]]></guid>
                       <title><![CDATA[कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली पर भूलकर न करें ये कार्य]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/do-not-do-these-things-by-mistake-on-diwali-on-the-day-of-kartik-amavasya]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 17 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

दीपावली हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाने की परंपरा है। इस बार दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक है।&nbsp;

भारत को त्योहारों का देश माना जाता है। यहां हर साल कई त्योहार मनाए जाते हैं। देशभर में दीपावली बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है और भाई दूज के दिन यह समाप्त हो जाता है। लक्ष्मी-गणेश के आगमन के लिए लोग इस दिन अपने घरों को सजाते हैं और दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाते हैं। लोग इस पर्व पर उपहार स्वरूप एक दूसरे को मिठाईयां भी बांटतें हैं।&nbsp;

इस दिन ये कार्य बिल्कुल न करें
दीपावली अमावस्या के दिन कुछ चीजों को करने से मनाही होती है। माना जाता है कि अमावस्या पर नकारात्मक शक्तियां प्रबल रहती हैं। अमावस्या के दिन बाल काटना, नाखून काटना तथा गृह प्रवेश आदि नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज व मांस-मदिरा आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी भी सुनसान जगह जाने से भी बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन इन कार्यों को करने से जीवन में कई समस्याएं आ सकती हैं। दिवाली की देर रात तक घर का मुख्य दरवाजा खुला रखें, बंद न रखें। कहा जाता है कि दिवाली की रात में मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं।&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">दीपावली हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाने की परंपरा है। इस बार दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">भारत को त्योहारों का देश माना जाता है। यहां हर साल कई त्योहार मनाए जाते हैं। देशभर में दीपावली बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है और भाई दूज के दिन यह समाप्त हो जाता है। लक्ष्मी-गणेश के आगमन के लिए लोग इस दिन अपने घरों को सजाते हैं और दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाते हैं। लोग इस पर्व पर उपहार स्वरूप एक दूसरे को मिठाईयां भी बांटतें हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इस दिन ये कार्य बिल्कुल न करें</strong><br />
दीपावली अमावस्या के दिन कुछ चीजों को करने से मनाही होती है। माना जाता है कि अमावस्या पर नकारात्मक शक्तियां प्रबल रहती हैं। अमावस्या के दिन बाल काटना, नाखून काटना तथा गृह प्रवेश आदि नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज व मांस-मदिरा आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन किसी भी सुनसान जगह जाने से भी बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन इन कार्यों को करने से जीवन में कई समस्याएं आ सकती हैं। दिवाली की देर रात तक घर का मुख्य दरवाजा खुला रखें, बंद न रखें। कहा जाता है कि दिवाली की रात में मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं।&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41757.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Do not do these things by mistake on Diwali on the day of Kartik Amavasya]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/20th-or-21st-october-know-the-date-of-diwali-and-auspicious-time-of-worship]]></guid>
                       <title><![CDATA[20 या 21 अक्टूबर? जानिए दीपावली की तारीख व पूजा का शुभ मुहूर्त  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/20th-or-21st-october-know-the-date-of-diwali-and-auspicious-time-of-worship]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 16 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दीपावली हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस दिन लोग माता लक्ष्मी, भगवान गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इससे घर परिवार में खुशहाली आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन लोग अपने घरों में दीए जलाते हैं। मान्यता है कि रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर पूरे गांव को दीपों से सजाया गया था। तब से इस दिन को अच्छाई की जीत तथा प्रकाश के उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है।

दिवाली&nbsp;&nbsp;
हर वर्ष दीपावली कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे समाप्त होगी। इसीलिए दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। 20 अक्टूबर को दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक रहेगा।&nbsp; &nbsp;

छोटी दिवाली&nbsp;
19 अक्तूबर को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। छोटी दिवाली पर शाम को घर के बाहर मुख्य द्वार पर यम देव के लिए चार मुखी दीपक जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।&nbsp;

इस बार की दिवाली बेहद खास
ज्योतिष के अनुसार, इस बार की दिवाली बहुत ही खास रहेगी। इस दिवाली पर 100 साल के बाद एक विशेष योग बनने जा रहा है जो कि बहुत ही दुर्लभ और शक्तिशाली होगा। इसकी वजह से 3 राशियां कर्क, वृश्चिक व तुला के जीवन में बहुत ही बड़े बदलाव होंगे। इस योग से जीवन में अपार धन, प्रतिष्ठा व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। दीपावली हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस दिन लोग माता लक्ष्मी, भगवान गणेश व कुबेर की पूजा करते हैं। इससे घर परिवार में खुशहाली आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन लोग अपने घरों में दीए जलाते हैं। मान्यता है कि रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर पूरे गांव को दीपों से सजाया गया था। तब से इस दिन को अच्छाई की जीत तथा प्रकाश के उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। इस त्योहार की शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दिवाली&nbsp;&nbsp;</strong><br />
हर वर्ष दीपावली कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे समाप्त होगी। इसीलिए दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी। 20 अक्टूबर को दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक रहेगा।&nbsp; &nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>छोटी दिवाली&nbsp;</strong><br />
19 अक्तूबर को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। छोटी दिवाली पर शाम को घर के बाहर मुख्य द्वार पर यम देव के लिए चार मुखी दीपक जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इस बार की दिवाली बेहद खास</strong><br />
ज्योतिष के अनुसार, इस बार की दिवाली बहुत ही खास रहेगी। इस दिवाली पर 100 साल के बाद एक विशेष योग बनने जा रहा है जो कि बहुत ही दुर्लभ और शक्तिशाली होगा। इसकी वजह से 3 राशियां कर्क, वृश्चिक व तुला के जीवन में बहुत ही बड़े बदलाव होंगे। इस योग से जीवन में अपार धन, प्रतिष्ठा व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/images241746.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[20th or 21st October? Know the date of Diwali and auspicious time of worship]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/this-diwali-a-rare-rajyoga-will-be-formed-after-100-years-the-luck-of-these-people-will-open]]></guid>
                       <title><![CDATA[इस दिवाली पर 100 साल बाद बनेगा दुर्लभ राजयोग, इन लोगों की खुलेगी किस्मत ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/this-diwali-a-rare-rajyoga-will-be-formed-after-100-years-the-luck-of-these-people-will-open]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 14 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

हर वर्ष दीपावली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार दीपावली अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे समाप्त होगी। इसीलिए दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाया जायेगा। धनतेरस से ही इस त्योहार की शुरुआत हो जाती है। दीपावली हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। 20 अक्टूबर को लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक रहेगा।&nbsp;&nbsp;

ज्योतिष के अनुसार, इस बार की जो दिवाली का त्यौहार है वह बहुत ही खास रहेगा। इस दिवाली पर एक विशेष योग बनने जा रहा है जो कि बहुत ही दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। आपको बता दें कि यह योग 100 साल के बाद बनने जा रहा है। इस योग की वजह से 3 राशियों के जीवन में बहुत ही बड़े बदलाव होंगे। इस योग से जीवन में अपार धन, प्रतिष्ठा व सुख-समृद्धि आती है।&nbsp;

&nbsp;

दिवाली पर हंस महापुरुष राजयोग के बनने से इन राशियों को मिलेगा फायदा&nbsp;

1. कर्क
कर्क राशि वालों के लग्न भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने जा रहा है। यह योग करियर व आर्थिक रूप से बहुत ही शुभ रहेगा। रुके हुए काम भी पूर्ण होंगे। परिवार से मदद मिलेगा। मानसिक तनाव कम तथा सेहत में सुधार होगा।&nbsp;

2. वृश्चिक
वृश्चिक राशि वालों के नवम भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने वाला है। प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपके काम की सराहना होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। करियर में उन्नति होगी। धन लाभ के योग बनेंगें।&nbsp;

3. तुला
तुला राशि वालों के दशम भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने जा रहा है। यह योग तुला राशि वालों के लिए वरदान साबित होगा। करियर में उन्नति होगी और प्रमोशन या वेतन वृद्धि के संजोग बनेंगें। व्यापार करने वालो को भी होगा फायदा।

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हर वर्ष दीपावली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार दीपावली अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे समाप्त होगी। इसीलिए दिवाली 20 अक्टूबर सोमवार को मनाया जायेगा। धनतेरस से ही इस त्योहार की शुरुआत हो जाती है। दीपावली हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। 20 अक्टूबर को लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:08 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक रहेगा।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ज्योतिष के अनुसार, इस बार की जो दिवाली का त्यौहार है वह बहुत ही खास रहेगा। इस दिवाली पर एक विशेष योग बनने जा रहा है जो कि बहुत ही दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। आपको बता दें कि यह योग 100 साल के बाद बनने जा रहा है। इस योग की वजह से 3 राशियों के जीवन में बहुत ही बड़े बदलाव होंगे। इस योग से जीवन में अपार धन, प्रतिष्ठा व सुख-समृद्धि आती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;">दिवाली पर हंस महापुरुष राजयोग के बनने से इन राशियों को मिलेगा फायदा&nbsp;</span></strong></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>1. कर्क</strong><br />
कर्क राशि वालों के लग्न भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने जा रहा है। यह योग करियर व आर्थिक रूप से बहुत ही शुभ रहेगा। रुके हुए काम भी पूर्ण होंगे। परिवार से मदद मिलेगा। मानसिक तनाव कम तथा सेहत में सुधार होगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>2. वृश्चिक</strong><br />
वृश्चिक राशि वालों के नवम भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने वाला है। प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपके काम की सराहना होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। करियर में उन्नति होगी। धन लाभ के योग बनेंगें।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>3. तुला</strong><br />
तुला राशि वालों के दशम भाव में हंस महापुरुष राजयोग बनने जा रहा है। यह योग तुला राशि वालों के लिए वरदान साबित होगा। करियर में उन्नति होगी और प्रमोशन या वेतन वृद्धि के संजोग बनेंगें। व्यापार करने वालो को भी होगा फायदा।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41731.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[This Diwali, a rare Rajyoga will be formed after 100 years, the luck of these people will open.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/when-is-dhanteras-18th-or-19th-october-know-the-date-and-auspicious-time-of-puja]]></guid>
                       <title><![CDATA[18 या 19 अक्टूबर, धनतेरस कब है? जानें पूजा की डेट व शुभ मुहूर्त ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/when-is-dhanteras-18th-or-19th-october-know-the-date-and-auspicious-time-of-puja]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 13 Oct 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस बार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर 12:20 बजे से होगी और 19 अक्टूबर को दोपहर 1:53 बजे तक रहेगी। इसीलिए इस वर्ष धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर व धनवंतरी जी की पूजा की जाती है। मान्यता यह है कि इनकी पूजा से घर परिवार में सुख-संपन्नता बनी रहती है और खुशहाली आती है। इस दिन नई वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा है क्यों कि कहा जाता है इस अवसर पर नई वस्तुओं की खरीदारी करने से धन-दौलत में बढ़ोतरी होती है। इस दिन सोना-चांदी के अलावा बर्तन तथा झाडू आदि भी खरीदने की परंपरा है। धनतेरस के साथ ही दीपावली पर्व की भी शुरुआत हो जाती है।&nbsp;

पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस को शाम में माता लक्ष्मी, भगवान धनवंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर को शाम 7:11 बजे से रात 9:22 बजे तक है।&nbsp;

कुछ चीजें भूलकर न खरीदें&nbsp;
मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से धन-दौलत बढ़ता है पर कुछ चीजें ऐसी भी है जिसे भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए। जैसे कि&nbsp;लोहे की वस्तुएं न खरीदें। लोहे से बनी वस्तुएं खरीदना अशुभ माना जाता है। क्यों कि लोहा को शनि का कारक माना जाता है और यह अशुभ होता है। इस दिन को शीशे का सामान भी न खरीदें। शीशा को अस्थिरता का प्रतीक माना गया है। साथ ही इस शुभ दिन पर चाकू, कैंची, पिन, सुई या किसी भी तरह की नुकीली चीजें खरीदने से बचना चाहिए क्यों कि इसे अशुभ माना गया है।&nbsp;

क्यों मनाया जाता है&nbsp;
जब देवताओं तथा असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब उस मंथन से बहुत सी कीमती चीजें निकली थीं और साथ ही माँ लक्ष्मी भी प्रकट हुईं थी। अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत के कलश लेकर प्रकट हुए। इस अमृत के लिए देवताओं-असुरों के बीच लंबा संघर्ष चला। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र में प्रकट हुए थे। तभी से इस तिथि को धनतेरस के रूप में मनाने और भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी व कुबेर देव की पूजा की जाने की परंपरा चली आ रही है।

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस बार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर 12:20 बजे से होगी और 19 अक्टूबर को दोपहर 1:53 बजे तक रहेगी। इसीलिए इस वर्ष धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर व धनवंतरी जी की पूजा की जाती है। मान्यता यह है कि इनकी पूजा से घर परिवार में सुख-संपन्नता बनी रहती है और खुशहाली आती है। इस दिन नई वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा है क्यों कि कहा जाता है इस अवसर पर नई वस्तुओं की खरीदारी करने से धन-दौलत में बढ़ोतरी होती है। इस दिन सोना-चांदी के अलावा बर्तन तथा झाडू आदि भी खरीदने की परंपरा है। धनतेरस के साथ ही दीपावली पर्व की भी शुरुआत हो जाती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong><br />
धनतेरस को शाम में माता लक्ष्मी, भगवान धनवंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर को शाम 7:11 बजे से रात 9:22 बजे तक है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>कुछ चीजें भूलकर न खरीदें&nbsp;</strong><br />
मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से धन-दौलत बढ़ता है पर कुछ चीजें ऐसी भी है जिसे भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए। जैसे कि&nbsp;लोहे की वस्तुएं न खरीदें। लोहे से बनी वस्तुएं खरीदना अशुभ माना जाता है। क्यों कि लोहा को शनि का कारक माना जाता है और यह अशुभ होता है। इस दिन को शीशे का सामान भी न खरीदें। शीशा को अस्थिरता का प्रतीक माना गया है। साथ ही इस शुभ दिन पर चाकू, कैंची, पिन, सुई या किसी भी तरह की नुकीली चीजें खरीदने से बचना चाहिए क्यों कि इसे अशुभ माना गया है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>क्यों मनाया जाता है&nbsp;</strong><br />
जब देवताओं तथा असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब उस मंथन से बहुत सी कीमती चीजें निकली थीं और साथ ही माँ लक्ष्मी भी प्रकट हुईं थी। अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत के कलश लेकर प्रकट हुए। इस अमृत के लिए देवताओं-असुरों के बीच लंबा संघर्ष चला। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र में प्रकट हुए थे। तभी से इस तिथि को धनतेरस के रूप में मनाने और भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी व कुबेर देव की पूजा की जाने की परंपरा चली आ रही है।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41715.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[When is Dhanteras, 18th or 19th October? Know the date and auspicious time of puja]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/himachal/motherbrahmacharinibestowspatienceandrestraintsheisworshippedontheseconddayofnavratri]]></guid>
                       <title><![CDATA[माँ ब्रह्मचारिणी से मिलता हैं धैर्य और संयम, नवरात्रों के दूसरे दिन होती है उपासना]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/himachal/motherbrahmacharinibestowspatienceandrestraintsheisworshippedontheseconddayofnavratri]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 22 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जिन्होंने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थीं। इसी तप के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी (तप का आचरण करने वाली) नाम से जाना जाता है। उनकी कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ निश्चय से किसी भी कठिन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।&nbsp;

ऐसी मान्यता है की पूर्वजन्म में, माँ दुर्गा ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। नारद मुनि के कहने पर, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने का संकल्प लिया और घोर तपस्या करने का निश्चय किया। उन्होंने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। शुरुआत में, उन्होंने हजारों वर्षों तक फल-फूल खाए, फिर सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक का सेवन किया। इसके बाद, उन्होंने कई वर्षों तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या की और सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया। पत्तों को भी त्यागने के कारण उनका एक नाम &#39;अपर्णा&#39; भी पड़ गया।&nbsp;

इस कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर क्षीण हो गया, लेकिन उनका मनोबल अटल रहा। सभी देवताओं, ऋषियों और मुनियों ने उनकी तपस्या की सराहना की और उन्हें बताया कि उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी और उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त होंगे। नवरात्रि के दूसरे दिन, माँ पार्वती के इसी रूप, यानी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह पूजा भक्त को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, स्थिरता, त्याग और संयम सिखाती है।&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जिन्होंने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थीं। इसी तप के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी (तप का आचरण करने वाली) नाम से जाना जाता है। उनकी कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ निश्चय से किसी भी कठिन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ऐसी मान्यता है की पूर्वजन्म में, माँ दुर्गा ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। नारद मुनि के कहने पर, उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने का संकल्प लिया और घोर तपस्या करने का निश्चय किया। उन्होंने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। शुरुआत में, उन्होंने हजारों वर्षों तक फल-फूल खाए, फिर सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक का सेवन किया। इसके बाद, उन्होंने कई वर्षों तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या की और सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया। पत्तों को भी त्यागने के कारण उनका एक नाम &#39;अपर्णा&#39; भी पड़ गया।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर क्षीण हो गया, लेकिन उनका मनोबल अटल रहा। सभी देवताओं, ऋषियों और मुनियों ने उनकी तपस्या की सराहना की और उन्हें बताया कि उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी और उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त होंगे। नवरात्रि के दूसरे दिन, माँ पार्वती के इसी रूप, यानी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह पूजा भक्त को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, स्थिरता, त्याग और संयम सिखाती है।&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41533.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Mother_Brahmacharini_bestows_patience_and_restraint_she_is_worshipped_on_the_second_day_of_Navratri.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/news/national-news/which-offerings-to-the-9-forms-of-maa-durga-during-navratri-and-what-is-its-significance]]></guid>
                       <title><![CDATA[नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को कौन सा भोग लगाएं और क्या हैं इसके महत्व ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/news/national-news/which-offerings-to-the-9-forms-of-maa-durga-during-navratri-and-what-is-its-significance]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 22 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज सोमवार 22 सितंबर से हो गई है। नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा की 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी के अलग अलग स्वरूप के लिए अलग-अलग भोग चढ़ाने की परंपरा है। नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के साथ उनके प्रिय भोग के बारे में जान लेते हैं।&nbsp;

माता शैलपुत्री (पहला दिन)&nbsp;

पहले दिन&nbsp;गाय के घी से बना भोग मां शैलपुत्री को चढ़ाएं। इससे परिवार में सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही इससे रोग से मुक्ति मिलती है और सभी तरह के कष्टों से भी निजात मिलता है।&nbsp;

माता ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) 

दूसरा दिन&nbsp;मिश्री और शक्कर से बना भोग माता ब्रह्मचारिणी को बहुत प्रिय होता है। खीर का भोग चढ़ा सकते हैं। इससे परिवार में प्रेम बना रहता है। साथ ही इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।&nbsp;

माता चंद्रघंटा (तीसरा दिन)

दूध से बना भोग चढ़ाएं इस तीसरे दिन। मां चंद्रघंटा को यह बहुत पसंद है। इससे घर में सुख-शांति आती है और खुशहाली बनी रहती है।&nbsp;

माता कूष्माण्डा (चौथा दिन) 

चौथे दिन माता कूष्माण्डा को मालपुआ का भोग बनाकर चढ़ाएं। इससे बुद्धि- ज्ञान बढ़ता है। धन की प्राप्ति होती है और समृद्धि बनी रहती है।&nbsp;

माता स्कंदमाता (पांचवां दिन)&nbsp;

केला का भोग लगाएं इस दिन। इससे स्कंदमाता प्रसन्न होती हैं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रही है। मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।&nbsp;

माता कात्यायनी (छठा दिन)&nbsp;

छठे दिन माता कात्यायनी को शहद से बना पकवान चढ़ाएं। इससे त्वचा में निखार आता है और स्वास्थ्य में लाभ होता है। परिवार में प्रेम व मिठास बनी रहती है।&nbsp;

माता कालरात्रि (सातवां दिन)&nbsp;

मां कालरात्रि को गुड़ से बना भोग लगाएं इस दिन। इससे जीवन में कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।&nbsp;

माता महागौरी (आठवां दिन)&nbsp;

माता महागौरी को नारियल या इससे बना भोग चढ़ा सकते हैं इस दिन। उन्हें ये बहुत प्रिय है। इससे घर परिवार में खुशहाली और सुख-शांति बनी रहती है।&nbsp;

माता सिद्धिदात्री (नौवां दिन)&nbsp;

माता सिद्धिदात्री को नौवें दिन खीर, चना और हलवा-पूरी का भोग चढ़ाएं। इससे माना जाता है कि मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इससे जीवन में ज्ञान की वृद्धि होती है और आंतरिक शक्ति मिलती है। परिवार में खुशियां आती है।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

नवरात्रि का महत्व&nbsp;
नवरात्रि का जो पर्व है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए 9 दिनों तक युद्ध किया था। महिषासुर का वध करके देवी ने धर्म की रक्षा की थी। इसीलिए नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। नवरात्रि में व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि नवरात्र की प्रतिपदा सोमवार या रविवार को हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ माना जाता है।&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज सोमवार 22 सितंबर से हो गई है। नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा की 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी के अलग अलग स्वरूप के लिए अलग-अलग भोग चढ़ाने की परंपरा है। नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के साथ उनके प्रिय भोग के बारे में जान लेते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता शैलपुत्री (पहला दिन)</strong>&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">पहले दिन&nbsp;गाय के घी से बना भोग मां शैलपुत्री को </span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">चढ़ाएं</span><span style="font-size:18px;">। इससे परिवार में सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही इससे रोग से मुक्ति मिलती है और सभी तरह के कष्टों से भी निजात मिलता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) </strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">दूसरा दिन&nbsp;मिश्री और शक्कर से बना भोग माता ब्रह्मचारिणी को बहुत प्रिय होता है। खीर का भोग चढ़ा सकते हैं। इससे परिवार में प्रेम बना रहता है। साथ ही इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता चंद्रघंटा (तीसरा दिन)</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">दूध से बना भोग चढ़ाएं इस तीसरे दिन। मां चंद्रघंटा को यह बहुत पसंद है। इससे घर में सुख-शांति आती है और खुशहाली बनी रहती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता कूष्माण्डा (चौथा दिन)</strong> </span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">चौथे दिन माता कूष्माण्डा को मालपुआ का भोग बनाकर चढ़ाएं। इससे बुद्धि- ज्ञान बढ़ता है। धन की प्राप्ति होती है और समृद्धि बनी रहती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता स्कंदमाता (पांचवां दिन)</strong>&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">केला का <span style="text-align: justify;">भोग</span> लगाएं इस दिन। इससे स्कंदमाता प्रसन्न होती हैं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रही है। मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता कात्यायनी (छठा दिन)</strong>&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">छठे दिन माता कात्यायनी को शहद से बना पकवान चढ़ाएं। इससे त्वचा में निखार आता है और स्वास्थ्य में लाभ होता है। परिवार में प्रेम व मिठास बनी रहती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता कालरात्रि (सातवां दिन)</strong>&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">मां कालरात्रि को गुड़ से बना भोग लगाएं इस दिन। इससे जीवन में कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता महागौरी (आठवां दिन)&nbsp;</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">माता महागौरी को नारियल या इससे <span style="text-align: justify;">बना</span> भोग चढ़ा सकते हैं इस दिन। उन्हें ये बहुत प्रिय है। इससे घर परिवार में खुशहाली और सुख-शांति बनी रहती है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>माता सिद्धिदात्री (नौवां दिन)</strong>&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">माता सिद्धिदात्री को नौवें दिन खीर, चना और हलवा-पूरी का भोग चढ़ाएं। इससे माना जाता है कि मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इससे जीवन में ज्ञान की वृद्धि होती है और आंतरिक शक्ति मिलती है। परिवार में खुशियां आती है।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवरात्रि का महत्व&nbsp;</strong><br />
नवरात्रि का जो पर्व है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए 9 दिनों तक युद्ध किया था। महिषासुर का वध करके देवी ने धर्म की रक्षा की थी। इसीलिए नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। नवरात्रि में व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि नवरात्र की प्रतिपदा सोमवार या रविवार को हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ माना जाता है।&nbsp;</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41532.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Which offerings to the 9 forms of Maa Durga during Navratri and what is its significance?]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/last-solar-eclipse-today-know-what-time-it-will-start-what-will-be-the-impact-on-navratri-and-shraddha-activities]]></guid>
                       <title><![CDATA[आज अंतिम सूर्य ग्रहण, जानें कितने बजे शुरू होगा, नवरात्रि व श्राद्ध कार्य पर क्या असर होंगें ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/last-solar-eclipse-today-know-what-time-it-will-start-what-will-be-the-impact-on-navratri-and-shraddha-activities]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 21 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण आज रविवार को लगने जा रहा है। ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य को करना मना होता है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है और हर साल लगता है। आपको बता दें कि इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी है। अमावस्या के दिन लोग स्नान-दान करते हैं और साथ ही अपने पितरों के लिए श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ दोष मिट जाता है और साथ ही जीवन में खुशियां बनी रहती है। लेकिन इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध किस तरह से किया जाएगा, इसके बारे में लोगों के मन में बहुत सी आशंकाएं है।

सूर्य ग्रहण का समय
भारत में सूर्य ग्रहण आज 21 सितंबर को रात 11 बजे शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे तक चलेगा। यह ग्रहण 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा।

इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल क्या&nbsp;मान्य होगा&nbsp;
शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के समय कोई भी मांगलिक शुभ कार्य नहीं किया जाता है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिया जाता है। लेकिन 21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इस कारण से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।&nbsp;

नवरात्रि व श्राद्ध कार्य नहीं होंगे बाधित
ज्योतिष के मुताबिक, जिस जगह पर सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देता है, वहां पर सूतक की मान्यताएं जो है वह लागू नहीं होती हैं। देश के किसी भी हिस्से में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इस कारण से सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा। इस वजह से नवरात्रि और श्राद्ध कार्य बिना किसी रुकावट के ही बेझिझक किए जा सकेंगें।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण आज रविवार को लगने जा रहा है। ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य को करना मना होता है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है और हर साल लगता है। आपको बता दें कि इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी है। अमावस्या के दिन लोग स्नान-दान करते हैं और साथ ही अपने पितरों के लिए श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ दोष मिट जाता है और साथ ही जीवन में खुशियां बनी रहती है। लेकिन इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध किस तरह से किया जाएगा, इसके बारे में लोगों के मन में बहुत सी आशंकाएं है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सूर्य ग्रहण का समय</strong><br />
भारत में सूर्य ग्रहण आज 21 सितंबर को रात 11 बजे शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे तक चलेगा। यह ग्रहण 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल </strong></span><strong style="font-size: 18px; text-align: justify;">क्या&nbsp;</strong><span style="font-size:18px;"><strong>मान्य होगा&nbsp;</strong><br />
शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के समय कोई भी मांगलिक शुभ कार्य नहीं किया जाता है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिया जाता है। लेकिन 21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इस कारण से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवरात्रि व श्राद्ध कार्य नहीं होंगे बाधित</strong><br />
ज्योतिष के मुताबिक, जिस जगह पर सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देता है, वहां पर सूतक की मान्यताएं जो है वह लागू नहीं होती हैं। देश के किसी भी हिस्से में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इस कारण से सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा। इस वजह से नवरात्रि और श्राद्ध कार्य बिना किसी रुकावट के ही बेझिझक किए जा सकेंगें।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41519.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Last solar eclipse today, know what time it will start, what will be the impact on Navratri and Shraddha activities]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-barley-sown-on-the-first-day-of-shardiya-navratri-know-what-is-its-importance]]></guid>
                       <title><![CDATA[शारदीय नवरात्र के पहले दिन क्यों बोए जाते हैं जौ? जानिए इसके क्या है महत्व  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-barley-sown-on-the-first-day-of-shardiya-navratri-know-what-is-its-importance]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 19 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार 22 सितंबर से होने वाली है और 2 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन समाप्त होगी। नवरात्रि के दिनों में देवी दुर्गा की 9 रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। साथ ही शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन घटस्थापना भी की जाती है। घटस्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा होती है और जौ को कलश में भी स्थापित किया जाता है। इस दौरान लोग मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं। अंत में दशमी के दिन रावण दहन होता है।&nbsp;ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में जौ बोने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि तो आती ही है और साथ ही घर का भंडार भी हमेशा भरा रहता है।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

कलश स्थापना की शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन ही कलश स्थापना की जाती है, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं।&nbsp;

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- 22 सितंबर 2025 को&nbsp; सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे तक है।&nbsp;

&nbsp;

नवरात्रि का महत्व&nbsp;

नवरात्रि का जो पर्व है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए 9 दिनों तक युद्ध किया था। महिषासुर का वध करके देवी ने धर्म की रक्षा की थी। इसीलिए नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। नवरात्रि में व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि नवरात्र की प्रतिपदा सोमवार या रविवार को हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ माना जाता है।&nbsp;

&nbsp;

जौ बोने का महत्व&nbsp;

ऐसी मान्यता है कि जब पृथ्वी पर असुरों और दैत्यों का अत्याचार बढ़ने पर मां दुर्गा ने असुरों का संहार किया। इस दौरान पृथ्वी पर अकाल की जैसी स्थिति हो गई थी। तब उस दौरान सबसे पहले पृथ्वी पर जौ उगे थे। इसी वजह से सनातन में नवरात्र के समय जौ बोने को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे लेकर एक दूसरी मान्यता भी है। ऐसा कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी, तब सबसे पहले जौ उगी थी।&nbsp;

&nbsp;

ऐसा कहा जाता है कि यदि जौ का रंग सफेद या हरा हो जाए, इससे जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। वहीं यदि जौ अंकुरित हो जाए, तो&nbsp; इससे घर में खुशियों आती है।&nbsp; &nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार 22 सितंबर से होने वाली है और 2 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन समाप्त होगी। नवरात्रि के दिनों में देवी दुर्गा की 9 रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। साथ ही शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन घटस्थापना भी की जाती है। घटस्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा होती है और जौ को कलश में भी स्थापित किया जाता है। इस दौरान लोग मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं। अंत में दशमी के दिन रावण दहन होता है।&nbsp;ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में जौ बोने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि तो आती ही है और साथ ही घर का भंडार भी हमेशा भरा रहता है।&nbsp;&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>कलश स्थापना की शुभ मुहूर्त</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">नवरात्रि के पहले दिन ही कलश स्थापना की जाती है, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- 22 सितंबर 2025 को&nbsp; सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे तक है।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवरात्रि का महत्व&nbsp;</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">नवरात्रि का जो पर्व है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए 9 दिनों तक युद्ध किया था। महिषासुर का वध करके देवी ने धर्म की रक्षा की थी। इसीलिए नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। नवरात्रि में व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि नवरात्र की प्रतिपदा सोमवार या रविवार को हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ माना जाता है।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जौ बोने का महत्व&nbsp;</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ऐसी मान्यता है कि जब पृथ्वी पर असुरों और दैत्यों का अत्याचार बढ़ने पर मां दुर्गा ने असुरों का संहार किया। इस दौरान पृथ्वी पर अकाल की जैसी स्थिति हो गई थी। तब उस दौरान सबसे पहले पृथ्वी पर जौ उगे थे। इसी वजह से सनातन में नवरात्र के समय जौ बोने को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे लेकर एक दूसरी मान्यता भी है। ऐसा कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी, तब सबसे पहले जौ उगी थी।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ऐसा कहा जाता है कि यदि जौ का रंग सफेद या हरा हो जाए, इससे जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। वहीं यदि जौ अंकुरित हो जाए, तो&nbsp; इससे घर में खुशियों आती है।&nbsp; &nbsp;</span></div>

<div>&nbsp;</div>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41506.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Why is barley sown on the first day of Shardiya Navratri? Know what is its importance]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/the-last-solar-eclipse-will-take-place-on-september-21-will-the-eclipse-disrupt-navratri-and-shraddha-functions]]></guid>
                       <title><![CDATA[21 सितंबर को लगेगा अंतिम सूर्य ग्रहण, ग्रहण से नवरात्रि व श्राद्ध कार्य होंगे बाधित ? ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/the-last-solar-eclipse-will-take-place-on-september-21-will-the-eclipse-disrupt-navratri-and-shraddha-functions]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 19 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल का दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण रविवार, 21 सितंबर को आश्विन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। इसे शुभ नहीं माना जाता है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है और यह हर वर्ष लगता है। आपको बता दें कि इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी है। अमावस्या के दिन लोग स्नान-दान करते हैं और साथ ही अपने पितरों के लिए श्राद्ध व तर्पण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ दोष मिटता है और साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध किस तरह से किया जाएगा, इसके बारे में लोगों के मन में बहुत सी दुविधा है।

&nbsp;

सूर्य ग्रहण का समय

भारत में 21 सितंबर को रात 11 बजे शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा।

&nbsp;

भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण

21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण इस बार भारत में नहीं दिखने वाला है। चूकि भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखेगा, इस वजह से इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का जो सूतक काल है वो 12 घंटे पहले से लग जाता है।

&nbsp;

नवरात्रि व श्राद्ध कार्य नहीं होंगे बाधित

ज्योतिष के मुताबिक, जिस जगह पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, वहीं पर सूतक की मान्यताएं जो है लागू होती हैं। देश के किसी भी हिस्से में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इस कारण से सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा। इस वजह से नवरात्रि और श्राद्ध कार्य बिना किसी बाधा के ही बेझिझक किए जा सकते हैं।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल का दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण रविवार, 21 सितंबर को आश्विन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। इसे शुभ नहीं माना जाता है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है और यह हर वर्ष लगता है। आपको बता दें कि इस दिन सर्वपितृ अमावस्या भी है। अमावस्या के दिन लोग स्नान-दान करते हैं और साथ ही अपने पितरों के लिए श्राद्ध व तर्पण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ दोष मिटता है और साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध किस तरह से किया जाएगा, इसके बारे में लोगों के मन में बहुत सी दुविधा है।</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सूर्य ग्रहण का समय</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">भारत में 21 सितंबर को रात 11 बजे शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा।</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण इस बार भारत में नहीं दिखने वाला है। चूकि भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखेगा, इस वजह से इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का जो सूतक काल है वो 12 घंटे पहले से लग जाता है।</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवरात्रि व श्राद्ध कार्य नहीं होंगे बाधित</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ज्योतिष के मुताबिक, जिस जगह पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, वहीं पर सूतक की मान्यताएं जो है लागू होती हैं। देश के किसी भी हिस्से में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इस कारण से सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं होगा। इस वजह से नवरात्रि और श्राद्ध कार्य बिना किसी बाधा के ही बेझिझक किए जा सकते हैं।&nbsp;&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41501.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[The last solar eclipse will take place on September 21, will the eclipse disrupt Navratri and Shraddha functions?]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/1st-or-2nd-october-when-is-dussehra-this-time-know-the-auspicious-time-and-date-of-ravana-dahan]]></guid>
                       <title><![CDATA[1 या 2 अक्टूूबर? इस बार दशहरा कब, जानें रावण दहन का शुभ मुहूर्त व डेट ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/1st-or-2nd-october-when-is-dussehra-this-time-know-the-auspicious-time-and-date-of-ravana-dahan]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Wed, 17 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल का दहशरा पर्व 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि के अंत में मनाया जाता है। यह भारत का बहुत बड़ा हिंदू त्योहार है और इसे अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर विजय हुए थे। चूकी इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी इस वजह से विजयादशमी या दशहरा कहा जाता है। इस दिन लोग रावण पर भगवान राम की जीत का उत्सव मनाते हैं और साथ ही रावण के पुतले जलाकर रावण दहन के आयोजन बहुत ही धूम-धाम से मनाते हैं। इस दिन मेले व रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि इस त्योहार को मां दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय का भी प्रतीक मना जाता है।

&nbsp;


&nbsp;

शुभ मुहूर्त

दशमी - 1 अक्टूबर शाम 7:01 बजे से 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे पर ख़त्म होगी।&nbsp;इस वजह से&nbsp;इस साल&nbsp;दहशरा पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा।


&nbsp;

रावण दहन का समय

रावण दहन प्रदोष काल में होता है। सूर्यास्त शाम 6:06 बजे के बाद प्रदोष काल में रावण दहन होगा।&nbsp;

इस दिन रवि योग और सुकर्मा योग के साथ धृति योग भी बन रहे हैं। ये योग बहुत ही शुभ और मंगलकारी होते हैं।&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल का दहशरा पर्व 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि के अंत में मनाया जाता है। यह भारत का बहुत बड़ा हिंदू त्योहार है और इसे अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर विजय हुए थे। चूकी इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी इस वजह से विजयादशमी या दशहरा कहा जाता है। इस दिन लोग रावण पर भगवान राम की जीत का उत्सव मनाते हैं और साथ ही रावण के पुतले जलाकर रावण दहन के आयोजन बहुत ही धूम-धाम से मनाते हैं। इस दिन मेले व रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि इस त्योहार को मां दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय का भी प्रतीक मना जाता है।</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">
<p>&nbsp;</p>

<div><span style="font-size:18px;"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></span></div>

<div><span style="font-size:18px;">दशमी - 1 अक्टूबर शाम 7:01 बजे से 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे पर ख़त्म होगी।&nbsp;</span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">इस वजह से&nbsp;</span><span style="font-size:18px;">इस साल&nbsp;दहशरा पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा</span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">।</span></div>
</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>रावण दहन का समय</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">रावण दहन प्रदोष काल में होता है। सूर्यास्त शाम 6:06 बजे के बाद प्रदोष काल में रावण दहन होगा।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस दिन रवि योग और सुकर्मा योग के साथ धृति योग भी बन रहे हैं। ये योग बहुत ही शुभ और मंगलकारी होते हैं।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div>&nbsp;</div>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41498.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[1st or 2nd October? When is Dussehra this time, know the auspicious time and date of Ravana Dahan]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/20th-or-21st-september-when-is-sarvapitri-amavasya-know-the-date-and-auspicious-time]]></guid>
                       <title><![CDATA[20 या 21 सितंबर? सर्वपितृ अमावस्या कब, जानें डेट व शुभ मुहूर्त ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/20th-or-21st-september-when-is-sarvapitri-amavasya-know-the-date-and-auspicious-time]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 11 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

&nbsp;

पितृ पक्ष के अंतिम दिन को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, आश्विन माह की अमावस्या इस बार 21 सितंबर को 12:16 am बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को 1:23 am बजे ख़त्म होगी। इस वजह से इस साल सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर को ही मनाई जाएगी। सर्वपितृ अमावस्या के बारें में ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए कार्य से सबसे अधिक फल मिलता है। इसी वजह से इस दिन को विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।&nbsp;

इस साल पितृपक्ष 7-21 सितंबर तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध के 2 तरह के होते हैं। पहला श्राद्ध वो जो हर वर्ष व्यक्ति की मृत्यु कि तिथि पर किया जाता है और दूसरा वो जो पितृ पक्ष में किया जाता है।

&nbsp;

यह दिन उन लोगों के लिए ज्यादा ही महत्वपूर्ण होता है, जो किसी वजह से अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण नहीं कर सके हैं।&nbsp;वे अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण करते हैं।&nbsp;मान्यता है कि इस समय पितर धरती पर आते हैं। इसीलिए इस दिन पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार इन कार्यों के करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख -समृद्धि बनी रहती है। वैसे इस दिन लोग स्नान-दान करते हैं और पितरों के लिए ब्राह्मणों को भोजन भी कराते हैं।&nbsp;

सर्व पितृ अमावस्या पर किनका श्राद्ध&nbsp;
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर ही तर्पण होता है। लेकिन जिनकों पितरों के मृत्यु तिथि का पता नहीं हो तब वे अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या पर तर्पण करते हैं।

पितृ दोष से मुक्ति के लिए सर्वपितृ अमावस्या का उपाय
ऐसी मान्यता है कि पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर दान जरूर करना चाहिए और साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।

तर्पण और पिंडदान के शुभ मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त-&nbsp; सुबह 11:50 am बजे से दोपहर 12:38 pm बजे तक
रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:38 pm बजे से 1:27 pm बजे तक

इस दिन करें ये शुभ कार्य
सुबह सबेरे स्नान करके पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें
विधि विधान से पिंडदान और तर्पण करें
गाय, कुत्ते, कौवे और देवताओं के लिए भोजन जरूर निकालें
ब्राह्मणों को भोजन कराएं&nbsp;

महत्वपूर्ण क्यों&nbsp;
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए श्राद्ध से सभी पितरों की आत्मा तृप्त हो जाती है और उन्हें मोक्ष भी मिल जाता है। इसी वजह से इसे &ldquo;सर्वपितृ अमावस्या&rdquo; कहा गया है।&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">पितृ पक्ष के अंतिम दिन को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, आश्विन माह की अमावस्या इस बार 21 सितंबर को 12:16 am बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को 1:23 am बजे ख़त्म होगी। इस वजह से इस साल सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर को ही मनाई जाएगी। सर्वपितृ अमावस्या के बारें में ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए कार्य से सबसे अधिक फल मिलता है। इसी वजह से इस दिन को विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल पितृपक्ष 7-21 सितंबर तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध के 2 तरह के होते हैं। पहला श्राद्ध वो जो हर वर्ष व्यक्ति की मृत्यु कि तिथि पर किया जाता है और दूसरा वो जो पितृ पक्ष में किया जाता है।</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">यह दिन उन लोगों के लिए ज्यादा ही महत्वपूर्ण होता है, जो किसी वजह से अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण नहीं कर सके हैं।&nbsp;वे अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण करते हैं।&nbsp;मान्यता है कि इस समय पितर धरती पर आते हैं। इसीलिए इस दिन पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार इन कार्यों के करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख -समृद्धि बनी रहती है। वैसे इस दिन लोग स्नान-दान करते हैं और पितरों के लिए ब्राह्मणों को भोजन भी कराते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सर्व पितृ अमावस्या पर किनका श्राद्ध&nbsp;</strong><br />
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर ही तर्पण होता है। लेकिन जिनकों पितरों के मृत्यु तिथि का पता नहीं हो तब वे अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या पर तर्पण करते हैं।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">पितृ दोष से मुक्ति के लिए सर्वपितृ अमावस्या का उपाय<br />
ऐसी मान्यता है कि पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर दान जरूर करना चाहिए और साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>तर्पण और पिंडदान के शुभ मुहूर्त</strong><br />
कुतुप मुहूर्त-&nbsp; सुबह 11:50 am बजे से दोपहर 12:38 pm बजे तक<br />
रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12:38 pm बजे से 1:27 pm बजे तक</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>इस दिन करें ये शुभ कार्य</strong><br />
सुबह सबेरे स्नान करके पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें<br />
विधि विधान से पिंडदान और तर्पण करें<br />
गाय, कुत्ते, कौवे और देवताओं के लिए भोजन जरूर निकालें<br />
ब्राह्मणों को भोजन कराएं&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>महत्वपूर्ण क्यों&nbsp;</strong><br />
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए श्राद्ध से सभी पितरों की आत्मा तृप्त हो जाती है और उन्हें मोक्ष भी मिल जाता है। इसी वजह से इसे &ldquo;सर्वपितृ अमावस्या&rdquo; कहा गया है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41434.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[20th or 21st September? When is Sarvapitri Amavasya, know the date and auspicious time]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/apart-from-ujjain-temple-the-doors-of-these-big-temples-also-open-during-lunar-eclipse]]></guid>
                       <title><![CDATA[चंद्र ग्रहण में उज्जैन मंदिर के अलावा इन बड़े मंदिरों के भी खुले होते हैं कपाट ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/apart-from-ujjain-temple-the-doors-of-these-big-temples-also-open-during-lunar-eclipse]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 07 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

चंद्र ग्रहण आज 7 सितंबर रात 9.58 बजे शुरू होने वाला है और रात 1.26 बजे समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही दोपहर 12.57 बजे शुरू हो गया है। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण के समय सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। सूतक काल लगते ही मंदिरों को बंद कर दिया जाता है और ग्रहण समाप्त होते ही भगवान के दर्शन की अनुमति दे दी जाती है। लेकिन आपको बता दें कि देश में कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो ग्रहण के समय भी खुले होते हैं। साथ ही वहां नियमित रूप भगवान के दर्शन भी किये जाते हैं। इसीलिए आज 7 सितंबर को चंद्रग्रहण के समय भी इन मंदिरों में दर्शन किये जाते रहेगें।&nbsp;

&nbsp;

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर

ग्रहण के समय भी उज्जैन का महाकाल मंदिर खुला होता है। इस दौरान भी महाकाल के दर्शन किये जा सकते हैं। ग्रहण के समय पूजा और आरती के समय में ही केवल बदलाव किये जाते हैं। इसकी सूचना पहले ही दे दी जाती है।&nbsp;

&nbsp;


&nbsp;

बिहार के गयाजी का विष्णुपद मंदिर

गयाजी में विष्णुपद मंदिर भी चंद्र ग्रहण के समय पर खुला रहता है। ग्रहण के समय यहां पिंडदान करने को शुभ कार्य माना जाता है।


&nbsp;

बीकानेर का लक्ष्मीनाथ मंदिर

राजस्थान के बीकानेर में स्थति लक्ष्मीनाथ मंदिर के भी&nbsp;कपाट&nbsp; चंद्र ग्रहण के दौरान बंद नहीं होते हैं।&nbsp;

&nbsp;

केरल का श्री कृष्ण मंदिर

केरल के कोट्टायम स्थित थिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर के भी&nbsp;कपाट चंद्र ग्रहण के समय पर खुला रहता है।&nbsp;चंद्र ग्रहण के समय पर&nbsp;भी&nbsp;भगवान के दर्शन भी किये जाते हैं&nbsp;।

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">चंद्र ग्रहण आज 7 सितंबर रात 9.58 बजे शुरू होने वाला है और रात 1.26 बजे समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही दोपहर 12.57 बजे शुरू हो गया है। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण के समय सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। सूतक काल लगते ही मंदिरों को बंद कर दिया जाता है और ग्रहण समाप्त होते ही भगवान के दर्शन की अनुमति दे दी जाती है। लेकिन आपको बता दें कि देश में कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो ग्रहण के समय भी खुले होते हैं। साथ ही वहां नियमित रूप भगवान के दर्शन भी किये जाते हैं। इसीलिए आज 7 सितंबर को चंद्रग्रहण के समय भी इन मंदिरों में दर्शन किये जाते रहेगें।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">ग्रहण के समय भी उज्जैन का महाकाल मंदिर खुला होता है। इस दौरान भी महाकाल के दर्शन किये जा सकते हैं। ग्रहण के समय पूजा और आरती के समय में ही केवल बदलाव किये जाते हैं। इसकी सूचना पहले ही दे दी जाती है।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>बिहार के गयाजी का विष्णुपद मंदिर</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">गयाजी में विष्णुपद मंदिर भी चंद्र ग्रहण के समय पर खुला रहता है। ग्रहण के समय यहां पिंडदान करने को शुभ कार्य माना जाता है।</span></div>
</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>बीकानेर का लक्ष्मीनाथ मंदिर</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">राजस्थान के बीकानेर में स्थति लक्ष्मीनाथ मंदिर के <span style="text-align: justify;">भी&nbsp;</span>कपाट&nbsp; चंद्र ग्रहण के दौरान बंद नहीं होते हैं।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>केरल का श्री कृष्ण मंदिर</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">केरल के कोट्टायम स्थित थिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर के <span style="text-align: justify;">भी&nbsp;</span>कपाट <span style="text-align: justify;">चंद्र ग्रहण के समय पर खुला रहता है</span>।&nbsp;<span style="text-align: justify;">चंद्र ग्रहण के समय पर&nbsp;भी&nbsp;भगवान के दर्शन भी किये जाते हैं&nbsp;।</span></span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div>&nbsp;</div>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41409.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[ Apart from Ujjain temple, the doors of these big temples also open during lunar eclipse.]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/lunar-eclipse-will-take-place-in-the-country-today-sutak-period-will-start-after-some-time]]></guid>
                       <title><![CDATA[देश में आज लगेगा चंद्र ग्रहण, थोड़ी देर में शुरू होगा सूतक काल]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/lunar-eclipse-will-take-place-in-the-country-today-sutak-period-will-start-after-some-time]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 07 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

चंद्र ग्रहण आज 7 सितंबर रात 9.58 बजे शुरू होने वाला है और रात 1.26 बजे समाप्त हो जायेगा। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही अभी दोपहर 12.57 बजे शुरू हो जाएगा। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। इस साल 2025 का यह दूसरा आखिरी चंद्र ग्रहण है, जो आज 7 सितंबर को लगने वाला है। सबसे ख़ास बात यह है इस चंद्र ग्रहण की कि ये पितृपक्ष के दिन ही शुरू हो रहा है,जो कि एक बहुत ही दुर्लभ संयोग है।&nbsp;

ग्रहण काल में भूल से भी न करें यह काम&nbsp;
सनातन में ग्रहण काल के समय सोना, खाना और पीना नहीं करना चाहिए। खाने की चीजों में तुलसी डाल कर रखना चाहिए। इससे खाना अशुद्ध या विषाक्त नहीं होता है, ऐसा माना जाता है।&nbsp;

122 साल बाद चंद्र ग्रहण पर पितृ पक्ष का संयोग
आज इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और आज से ही पितृ पक्ष भी शुरू है। ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्र ग्रहण पर पितृ पक्ष का यह&nbsp; संयोग पूरे 122 साल बाद बना है। वहीं, चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान करने जैसे सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर लें।&nbsp;

आज रात लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल अभी दोपहर 12.57 बजे शुरू होने जा रहा है। आपको बता दें कि सूतक में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने तक कोई धार्मिक कार्य नहीं होगा। इसलिए जो भी पूजा अर्चना है और पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध, पिंडदान वो पहले ही कर लेनी चाहिए।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;

ये भी पढ़ें&nbsp;

लगेगा सदी का सबसे दुर्लभ चंद्र ग्रहण, 100 साल बाद ऐसा संयोग, भूलकर भी ये न करें

7 या 8 सितम्बर, जानें कब से शुरू होगा पितृपक्ष

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">चंद्र ग्रहण आज 7 सितंबर रात 9.58 बजे शुरू होने वाला है और रात 1.26 बजे समाप्त हो जायेगा। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही अभी दोपहर 12.57 बजे शुरू हो जाएगा। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। इस साल 2025 का यह दूसरा आखिरी चंद्र ग्रहण है, जो आज 7 सितंबर को लगने वाला है। सबसे ख़ास बात यह है इस चंद्र ग्रहण की कि ये पितृपक्ष के दिन ही शुरू हो रहा है,जो कि एक बहुत ही दुर्लभ संयोग है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>ग्रहण काल में भूल से भी न करें यह काम&nbsp;</strong><br />
सनातन में ग्रहण काल के समय सोना, खाना और पीना नहीं करना चाहिए। खाने की चीजों में तुलसी डाल कर रखना चाहिए। इससे खाना अशुद्ध या विषाक्त नहीं होता है, ऐसा माना जाता है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>122 साल बाद चंद्र ग्रहण पर पितृ पक्ष का संयोग</strong><br />
आज इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है और आज से ही पितृ पक्ष भी शुरू है। ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्र ग्रहण पर पितृ पक्ष का यह&nbsp; संयोग पूरे 122 साल बाद बना है। वहीं, चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान करने जैसे सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर लें।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">आज रात लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल अभी दोपहर 12.57 बजे शुरू होने जा रहा है। आपको बता दें कि सूतक में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने तक कोई धार्मिक कार्य नहीं होगा। इसलिए जो भी पूजा अर्चना है और पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध, पिंडदान वो पहले ही कर लेनी चाहिए।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p>&nbsp;</p>

<p>&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><strong><span style="font-size:18px;">ये भी पढ़ें&nbsp;</span></strong></p>

<p><strong><a href="https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/the-rarest-lunar-eclipse-of-the-century-will-happen-such-a-coincidence-will-happen-after-100-years-do-not-do-this-even-by-mistake"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:18px;">लगेगा सदी का सबसे दुर्लभ चंद्र ग्रहण, 100 साल बाद ऐसा संयोग, भूलकर भी ये न करें</span></span></a></strong></p>

<p style="text-align: justify;"><a href="https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/7th-or-8th-september-know-when-pitru-paksha-will-start"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:18px;"><strong>7 या 8 सितम्बर, जानें कब से शुरू होगा पितृपक्ष</strong></span></span></a></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41407.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Lunar eclipse will take place in the country today, Sutak period will start after some time]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/7th-or-8th-september-know-when-pitru-paksha-will-start]]></guid>
                       <title><![CDATA[7 या 8 सितम्बर, जानें कब से शुरू होगा पितृपक्ष ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/7th-or-8th-september-know-when-pitru-paksha-will-start]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Fri, 05 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस वर्ष पितृपक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। पितृपक्ष में पितरों को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा, श्राद्ध अनुष्ठान व तर्पण किये जाते हैं। ताकि पितरों को मुक्ति मिल सके। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है। यह पितृ भोजन कहलाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज तृप्त होते हैं और अपने वंशजों आशीर्वाद देते हैं और साथ ही कुल की उन्नति होती है। इस कर्म को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान माना जाता है।

पितृपक्ष का पहला श्राद्ध - 08 सितंबर 2025 को है, द्वितीया श्राद्ध - 09 सितंबर 2025, तृतीया श्राद्ध - 10 सितंबर, चतुर्थी श्राद्ध - 10 सितंबर, पंचमी श्राद्ध - 12 सितंबर, षष्ठी श्राद्ध - 12 सितंबर, सप्तमी श्राद्ध - 13 सितंबर, अष्टमी श्राद्ध - 14 सितंबर, नवमी श्राद्ध - 15 सितंबर, दशमी श्राद्ध - 16 सितंबर, एकादशी श्राद्ध - 17 सितंबर 2025 को है।&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस वर्ष पितृपक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। पितृपक्ष में पितरों को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा, श्राद्ध अनुष्ठान व तर्पण किये जाते हैं। ताकि पितरों को मुक्ति मिल सके। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा है। यह पितृ भोजन कहलाता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज तृप्त होते हैं और अपने वंशजों आशीर्वाद देते हैं और साथ ही कुल की उन्नति होती है। इस कर्म को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान माना जाता है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">पितृपक्ष का पहला श्राद्ध - 08 सितंबर 2025 को है, द्वितीया श्राद्ध - 09 सितंबर 2025, तृतीया श्राद्ध - 10 सितंबर, चतुर्थी श्राद्ध - 10 सितंबर, पंचमी श्राद्ध - 12 सितंबर, षष्ठी श्राद्ध - 12 सितंबर, सप्तमी श्राद्ध - 13 सितंबर, अष्टमी श्राद्ध - 14 सितंबर, नवमी श्राद्ध - 15 सितंबर, दशमी श्राद्ध - 16 सितंबर, एकादशी श्राद्ध - 17 सितंबर 2025 को है।&nbsp;</span></p>

<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41401.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[ 7th or 8th September, know when Pitru Paksha will start]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/the-rarest-lunar-eclipse-of-the-century-will-happen-such-a-coincidence-will-happen-after-100-years-do-not-do-this-even-by-mistake]]></guid>
                       <title><![CDATA[लगेगा सदी का सबसे दुर्लभ चंद्र ग्रहण, 100 साल बाद ऐसा संयोग, भूलकर भी ये न करें]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/the-rarest-lunar-eclipse-of-the-century-will-happen-such-a-coincidence-will-happen-after-100-years-do-not-do-this-even-by-mistake]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 02 Sep 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[इस वर्ष का दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण रविवार, 7 सितंबर को लगने वाला है। यह ग्रहण पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाला है इस वजह से इस ग्रहण को बहुत शक्तिशाली बताया जा रहा है। इस ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि ऐसा संयोग 100 साल में 1 बार ही होता है। विज्ञानं के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसमें सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है। ग्रहण के समय चंद्रमा&nbsp; लाल जैसा दिखता है जिसे ब्लड मून कहा जाता है।&nbsp;

शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण लगता है तो उस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट को भी बंद रखा जाता है। जब ग्रहण समाप्त हो जाता है तब मंदिर की शुद्धि कर विशेष पूजा की जाती है। शास्त्रों में ऐसा ज़िक्र है कि ग्रहण के वक्त नकारात्मक ऊर्जा ज्यादा सक्रिय हो रहती है और इसी वजह से लोग इस वक्त पर भगवान का ध्यान और प्रार्थना करते हैं।&nbsp;

ग्रहण का समय&nbsp;
आपको बता दें कि ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले&nbsp; सूतक काल लग जाता है। 7 सितंबर को रात 9:58 बजे से 8 सितंबर 1:26 बजे तक ग्रहण काल चलेगा। वहीं रात 11:00 बजे से 12:22 बजे के बीच ब्लड मून का समय रहेगा।&nbsp;

ग्रहण के समय भोजन न करें&nbsp;
शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि ग्रहण के समय सूक्ष्म जीवाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं और इससे भोजन अशुद्ध यानि विषाक्त हो जाता है। इसलिए इस ग्रहण के समय कुछ भी खाने से बचना चाहिए। साथ ही अगर भोजन पक चुका है और ग्रहण लग गया है तो पके हुए भोजन में तुलसी पत्ते को डालकर भोजन को सुरक्षित रखा जाता है, सनातन में ऐसी परंपरा है।

गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान देना चाहिए&nbsp;
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर के भीतर ही रहना चाहिए और चंद्र ग्रहण को बिकुल नहीं देखना चाहिए। इस समय कोई भी नूकीली चीजें जैसे कि कैंची व चाकू आदि का इस्तेमाल न करें। इस समय सोना भी नहीं चाहिए। ऐसी मांन्यताएँ हैं कि अगर गर्भवती महिलाएं इन चीजों का विशेष ध्यान नहीं रखती हैं तो इसका सीधा प्रभाव होने वाले बच्चे पर पड़ता है।

ग्रहण खत्म होने के बाद ये करें
घर और कपड़ों की साफ़ सफाई कर लेना चाहिए। उसके बाद गंगाजल मिले पानी से नहाकर साफ कपड़े पहन लेना चाहिए। साथ ही भगवान को भी याद करें।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p>इस वर्ष का दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण रविवार, 7 सितंबर को लगने वाला है। यह ग्रहण पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाला है इस वजह से इस ग्रहण को बहुत शक्तिशाली बताया जा रहा है। इस ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि ऐसा संयोग 100 साल में 1 बार ही होता है। विज्ञानं के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसमें सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है। ग्रहण के समय चंद्रमा&nbsp; लाल जैसा दिखता है जिसे ब्लड मून कहा जाता है।&nbsp;</p>

<p><strong>शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का महत्व</strong><br />
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण लगता है तो उस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट को भी बंद रखा जाता है। जब ग्रहण समाप्त हो जाता है तब मंदिर की शुद्धि कर विशेष पूजा की जाती है। शास्त्रों में ऐसा ज़िक्र है कि ग्रहण के वक्त नकारात्मक ऊर्जा ज्यादा सक्रिय हो रहती है और इसी वजह से लोग इस वक्त पर भगवान का ध्यान और प्रार्थना करते हैं।&nbsp;</p>

<p><strong>ग्रहण का समय&nbsp;</strong><br />
आपको बता दें कि ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले&nbsp; सूतक काल लग जाता है। 7 सितंबर को रात 9:58 बजे से 8 सितंबर 1:26 बजे तक ग्रहण काल चलेगा। वहीं रात 11:00 बजे से 12:22 बजे के बीच ब्लड मून का समय रहेगा।&nbsp;</p>

<p><strong>ग्रहण के समय भोजन न करें&nbsp;</strong><br />
शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि ग्रहण के समय सूक्ष्म जीवाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं और इससे भोजन अशुद्ध यानि विषाक्त हो जाता है। इसलिए इस ग्रहण के समय कुछ भी खाने से बचना चाहिए। साथ ही अगर भोजन पक चुका है और ग्रहण लग गया है तो पके हुए भोजन में तुलसी पत्ते को डालकर भोजन को सुरक्षित रखा जाता है, सनातन में ऐसी परंपरा है।</p>

<p><strong>गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान देना चाहिए&nbsp;</strong><br />
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर के भीतर ही रहना चाहिए और चंद्र ग्रहण को बिकुल नहीं देखना चाहिए। इस समय कोई भी नूकीली चीजें जैसे कि कैंची व चाकू आदि का इस्तेमाल न करें। इस समय सोना भी नहीं चाहिए। ऐसी मांन्यताएँ हैं कि अगर गर्भवती महिलाएं इन चीजों का विशेष ध्यान नहीं रखती हैं तो इसका सीधा प्रभाव होने वाले बच्चे पर पड़ता है।</p>

<p><strong>ग्रहण खत्म होने के बाद ये करें</strong><br />
घर और कपड़ों की साफ़ सफाई कर लेना चाहिए। उसके बाद गंगाजल मिले पानी से नहाकर साफ कपड़े पहन लेना चाहिए। साथ ही भगवान को भी याद करें।</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41373.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[The rarest lunar eclipse of the century will happen, such a coincidence will happen after 100 years, do not do this even by mistake]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-ganesh-utsav-celebrated-only-for-10-days-know-the-reason]]></guid>
                       <title><![CDATA[10 दिनों तक ही क्यों मनाया जाता है गणेश उत्सव, जानिए वजह  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/why-is-ganesh-utsav-celebrated-only-for-10-days-know-the-reason]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Thu, 28 Aug 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो चतुर्थी भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर, अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। यह पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों, दुकानों आदि में गणपति जी (बप्पा) की प्रतिमा स्थापित करते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन कर दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 10 दिनों तक पूजा करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी&nbsp; 27 अगस्त से शुरू हो चुका है और 6 सितंबर को समाप्त हो जायेगा।

&nbsp;

यह उत्सव 10 दिनों तक ही क्यों मनाया जाता है

गणेश चतुर्थी पर्व 10 दिनों तक चलता है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो महाभारत से जुड़ी है। इसके अनुसार, वेदव्यास जी ने जब भगवान गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने का आग्रह किया तो गणेश जी ने एक शर्त रखी कि वे इसे लिखने के दौरान एक बार भी नहीं रुकेंगे। यदि रुके, तब वे लिखना बंद कर देंगे। वेदव्यास सहमत हो गए और गणेश जी लगातार बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत लिखते रहे। तभी से गणेश चतुर्थी उत्सव को 10 दिनों तक मनाए जानें की परंपरा बनीं हुई है।&nbsp;

&nbsp;

विसर्जन का&nbsp;संदेश

गणपति जी की प्रतिमा का विसर्जन जीवन की नश्वरता और प्रकृति से एकात्मता का संदेश देता है। मिट्टी की बनी गणेश मूर्ति का जल में विलीन हो जाना यह दिखाता है कि सभी लोग प्रकृति से उत्पन्न हुए हैं और एक दिन वापस प्रकृति में ही विलीन हो जाना है। यह भाव लोगों को विनम्र बनाता है और अहंकार से परे होकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">गणेश चतुर्थी हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो चतुर्थी भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर, अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। यह पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों, दुकानों आदि में गणपति जी (बप्पा) की प्रतिमा स्थापित करते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन कर दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 10 दिनों तक पूजा करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी&nbsp; 27 अगस्त से शुरू हो चुका है और 6 सितंबर को समाप्त हो जायेगा।</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>यह उत्सव 10 दिनों तक ही क्यों मनाया जाता है</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">गणेश चतुर्थी पर्व 10 दिनों तक चलता है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो महाभारत से जुड़ी है। इसके अनुसार, वेदव्यास जी ने जब भगवान गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने का आग्रह किया तो गणेश जी ने एक शर्त रखी कि वे इसे लिखने के दौरान एक बार भी नहीं रुकेंगे। यदि रुके, तब वे लिखना बंद कर देंगे। वेदव्यास सहमत हो गए और गणेश जी लगातार बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत लिखते रहे। तभी से गणेश चतुर्थी उत्सव को 10 दिनों तक मनाए जानें की परंपरा बनीं हुई है।&nbsp;</span></div>

<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>विसर्जन का&nbsp;संदेश</strong></span></div>

<div style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">गणपति जी की प्रतिमा का विसर्जन जीवन की नश्वरता और प्रकृति से एकात्मता का संदेश देता है। मिट्टी की बनी गणेश मूर्ति का जल में विलीन हो जाना यह दिखाता है कि सभी लोग प्रकृति से उत्पन्न हुए हैं और एक दिन वापस प्रकृति में ही विलीन हो जाना है। यह भाव लोगों को विनम्र बनाता है और अहंकार से परे होकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।</span></div>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41317.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Why is Ganesh Utsav celebrated only for 10 days, know the reason]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/lifestyle/astrology/first-blessing/news/national-news/do-not-see-the-moon-even-by-mistake-on-ganesh-chaturthi-what-will-happen-if-you-see-it]]></guid>
                       <title><![CDATA[गणेश चतुर्थी पर गलती से भी चांद ना देखें, देख लिया तो क्या होगा? ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/lifestyle/astrology/first-blessing/news/national-news/do-not-see-the-moon-even-by-mistake-on-ganesh-chaturthi-what-will-happen-if-you-see-it]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Wed, 27 Aug 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

इस साल गणेश चतुर्थी आज बुधवार, 27 अगस्त को मनाई जा रही है। इस दिन लोग अपने घरों में गणपत्ति बप्पा लायेंगें और उनकी उपासना करेंगें। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और यह 27 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर, 2025 तक रहेगा। गणेश चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे शुरू और 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे समाप्त हो जाएगी। पंचांग के मुताबिक, गणेश जी की पूजा के लिए शुभ समय आज सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 1:40 बजे तक है।&nbsp;

चंद्रमा के दर्शन क्यों हैं वर्जित&nbsp;
गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखना बिलकुल मना है। आपको बता दें कि ऐसा पौराणिक कथाओं में बताया गया है। एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश के पेट और सूंड का मजाक उड़ाया था, जिसकी वजह से भगवान गणेश को गुस्सा आया और चंद्र देव को श्राप दिया कि जो कोई भी गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखेगा, उसे मिथ्या दोष (झूठा आरोप) का सामना करना पड़ेगा और साथ ही कलंकित भी होना पड़ेगा।&nbsp;

लोक कथाओं के मुताबिक, यह प्रथा को भगवान कृष्ण से भी जुड़ी हुई है, जिन पर मणि चोरी करने का गलत आरोप लगा था। नारद मुनि ने कहा था कि कृष्ण जी ने गलती से गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लिया था। इसके बाद उन पर यह झूठा आरोप लग गया था। इसलिए झूठे आरोपों से बचने के लिए लोग इस दिन चंद्रमा को देखने से बचते हैं।&nbsp;

कब ना देखें चंद्रमा
26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे से रात 8:29 बजे तक और 27 अगस्त को सुबह 9:28 बजे से रात 8:57 बजे तक चंद्रमा को ना देखें। इस समय के दौरान चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए।&nbsp;

चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लेने पर ये करें उपाय&nbsp;
अगर अनजाने में चंद्रमा को देख भी लिया, तो लोक कथाओं के अनुसार पारंपरिक उपाय के तौर पर यदि स्यमंतक मणि की कहानी सुन लिया जाए या पढ़ लिया जाए तो इसके गलत प्रभाव से बचा जा सकता है।&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस साल गणेश चतुर्थी आज बुधवार, 27 अगस्त को मनाई जा रही है। इस दिन लोग अपने घरों में गणपत्ति बप्पा लायेंगें और उनकी उपासना करेंगें। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और यह 27 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर, 2025 तक रहेगा। गणेश चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे शुरू और 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे समाप्त हो जाएगी। पंचांग के मुताबिक, गणेश जी की पूजा के लिए शुभ समय आज सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 1:40 बजे तक है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>चंद्रमा के दर्शन क्यों हैं वर्जित</strong>&nbsp;<br />
गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखना बिलकुल मना है। आपको बता दें कि ऐसा पौराणिक कथाओं में बताया गया है। एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश के पेट और सूंड का मजाक उड़ाया था, जिसकी वजह से भगवान गणेश को गुस्सा आया और चंद्र देव को श्राप दिया कि जो कोई भी गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखेगा, उसे मिथ्या दोष (झूठा आरोप) का सामना करना पड़ेगा और साथ ही कलंकित भी होना पड़ेगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">लोक कथाओं के मुताबिक, यह प्रथा को भगवान कृष्ण से भी जुड़ी हुई है, जिन पर मणि चोरी करने का गलत आरोप लगा था। नारद मुनि ने कहा था कि कृष्ण जी ने गलती से गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लिया था। इसके बाद उन पर यह झूठा आरोप लग गया था। इसलिए झूठे आरोपों से बचने के लिए लोग इस दिन चंद्रमा को देखने से बचते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>कब ना देखें चंद्रमा</strong><br />
26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे से रात 8:29 बजे तक और 27 अगस्त को सुबह 9:28 बजे से रात 8:57 बजे तक चंद्रमा को ना देखें। इस समय के दौरान चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लेने पर ये करें उपाय&nbsp;</strong><br />
अगर अनजाने में चंद्रमा को देख भी लिया, तो लोक कथाओं के अनुसार पारंपरिक उपाय के तौर पर यदि स्यमंतक मणि की कहानी सुन लिया जाए या पढ़ लिया जाए तो इसके गलत प्रभाव से बचा जा सकता है।&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41305.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Do not see the moon even by mistake on Ganesh Chaturthi, what will happen if you see it?]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/religious/ganesh-chaturthi-2025-know-the-auspicious-time-for-establishment-and-worship]]></guid>
                       <title><![CDATA[गणेश चतुर्थी 2025, जानें स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/national-news/religious/ganesh-chaturthi-2025-know-the-auspicious-time-for-establishment-and-worship]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 26 Aug 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[इस वर्ष गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। वहीं अनंत चतुर्दशी वाले दिन गणेश जी का विसर्जन होगा। यह पर्व पूरे भारत वर्ष में बड़े ही उत्साह और धूम धाम से मनाया जाता है। आपको बता दें कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश जी का जन्म हुआ था। इसीलिए भगवान गणेश के जन्म दिन को ही गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी को एक उत्सव के रूप में 10 दिनों तक मनाया जाता है जो गणेश चतुर्थी से प्रारम्भ होकर अनंत चतुर्दशी के दिन ख़त्म होता है। इस चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा पुरे विधि-विधान से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसीलिए मध्याह्न काल को भगवान गणेश की पूजा के लिए उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने घरों, दुकानों और मंदिरों में बप्पा को (गणपति जी कि प्रतिमा) अपने घर लाते हैं और 10 दिनों तक इनकी पूजा करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदा कर देते हैं।

स्थापना शुभ मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11:05 am से लेकर दोपहर 1:40 pm तक का शुभ मुहूर्त रहेगा।&nbsp;

पूजा का शुभ मुहूर्त
27 अगस्त को सुबह 11:05 am से लेकर दोपहर 1:40 pm तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस बार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 1:54 pm पर और इसका समापन 27 अगस्त की दोपहर 3:44 pm पर हो रहा है। इसीलिए इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। 27 अगस्त को सूर्योदय से पहले स्नान करके गणेश जी का व्रत रखें ।&nbsp;

चतुर्थी पर कई दुर्लभ संयोग&nbsp;
इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि और रवि के साथ इंद्र-ब्रह्म योग का संयोग भी बना रहेगा। वहीं कर्क में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग भी रहेगा और साथ ही बुधवार का महासंयोग तिथि की महत्ता को भी कई गुना बढ़ा रहा है।

पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करके पूजा स्थल की साफ सफाई करलें। उसके बाद गणेश जी की विधि विधान के साथ पूजा करें।&nbsp; पूजा के लिए शुभ मुहूर्त के समय ईशान कोण में चौकी को स्थापित करके पीला या लाल रंग का कपड़ा चौकी पर बिछा दें और फिर भगवान गणेश को चौकी पर स्थापित कर दें। अब रोज गणेश जी की उपासना करें। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश को विदा कर दें।&nbsp;

गणेश चतुर्थी भोग
लड्डू और मोदक - पुराणों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि गणेश जी को लड्डू और मोदक बहुत ही पसंद होते हैं। इसीलिए आप बेसन या बूंदी से बने लड्डू या मोदक का भी भोग लगा सकते हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से घर परिवार में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी हमारे सभी विघ्नों को हर लेते हैं और इस तरह सभी बिगड़े काम भी बनने लगते हैं।&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस वर्ष गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। वहीं अनंत चतुर्दशी वाले दिन गणेश जी का विसर्जन होगा। यह पर्व पूरे भारत वर्ष में बड़े ही उत्साह और धूम धाम से मनाया जाता है। आपको बता दें कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश जी का जन्म हुआ था। इसीलिए भगवान गणेश के जन्म दिन को ही गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी को एक उत्सव के रूप में 10 दिनों तक मनाया जाता है जो गणेश चतुर्थी से प्रारम्भ होकर अनंत चतुर्दशी के दिन ख़त्म होता है। इस चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा पुरे विधि-विधान से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसीलिए मध्याह्न काल को भगवान गणेश की पूजा के लिए उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने घरों, दुकानों और मंदिरों में बप्पा को (गणपति जी कि प्रतिमा) अपने घर लाते हैं और 10 दिनों तक इनकी पूजा करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदा कर देते हैं।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>स्थापना शुभ मुहूर्त</strong><br />
ज्योतिषियों के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना के लिए 27 अगस्त को सुबह 11:05 am से लेकर दोपहर 1:40 pm तक का शुभ मुहूर्त रहेगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा का शुभ मुहूर्त</strong><br />
27 अगस्त को सुबह 11:05 am से लेकर दोपहर 1:40 pm तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस बार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 1:54 pm पर और इसका समापन 27 अगस्त की दोपहर 3:44 pm पर हो रहा है। इसीलिए इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। 27 अगस्त को सूर्योदय से पहले स्नान करके गणेश जी का व्रत रखें ।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>चतुर्थी पर कई दुर्लभ संयोग&nbsp;</strong><br />
इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि और रवि के साथ इंद्र-ब्रह्म योग का संयोग भी बना रहेगा। वहीं कर्क में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग भी रहेगा और साथ ही बुधवार का महासंयोग तिथि की महत्ता को भी कई गुना बढ़ा रहा है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा विधि</strong><br />
सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करके पूजा स्थल की साफ सफाई करलें। उसके बाद गणेश जी की विधि विधान के साथ पूजा करें।&nbsp; पूजा के लिए शुभ मुहूर्त के समय ईशान कोण में चौकी को स्थापित करके पीला या लाल रंग का कपड़ा चौकी पर बिछा दें और फिर भगवान गणेश को चौकी पर स्थापित कर दें। अब रोज गणेश जी की उपासना करें। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश को विदा कर दें।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>गणेश चतुर्थी भोग</strong><br />
लड्डू और मोदक - पुराणों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि गणेश जी को लड्डू और मोदक बहुत ही पसंद होते हैं। इसीलिए आप बेसन या बूंदी से बने लड्डू या मोदक का भी भोग लगा सकते हैं।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>गणेश चतुर्थी का महत्व</strong><br />
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से घर परिवार में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी हमारे सभी विघ्नों को हर लेते हैं और इस तरह सभी बिगड़े काम भी बनने लगते हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41297.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2025, know the auspicious time for establishment and worship]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/news/national-news/himachal/religious/hartalika-teej-2025-date-auspicious-time-and-worship-method-significance]]></guid>
                       <title><![CDATA[26 या 27 अगस्त, जानें कब है हरतालिका तीज, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/news/national-news/himachal/religious/hartalika-teej-2025-date-auspicious-time-and-worship-method-significance]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Mon, 25 Aug 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

Hartalika Teej 2025: इस वर्ष&nbsp;हरतालिका तीज 26 अगस्त को मनाया जायेगा। वैसे पुरे वर्ष में तीन तरह के तीज मनाये जाते हैं, जिसमें सावन में हरियाली तीज और मानसून में कजरी तीज व हरतालिका। हरतालिका तीज हिंदू सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है।&nbsp; सामान्यतः हरतालिका तीज अगस्त और सितंबर महीने में पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि मां पार्वती ने भी भगवान शंकर को पाने के लिए यह व्रत रखा था।&nbsp;

इस त्योहार के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन की समृद्धि और खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रख कर बड़ी श्रद्धा से देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। व्रत के दौरान रात भर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। अगले दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं।

&nbsp;

हरतालिका तीज की कथा
इस कथा के अनुसार, माता पार्वती ने शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया और युवा होने पर उन्होंने अपने पिता से शिव से विवाह करने की बात की लेकन उनके पिता नहीं माने।&nbsp; तब पार्वती ने भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन गंगा की रेत और गाद से शिवलिंग बनाकर शिव की तपस्या करनी शुरू कर दी। इससे भगवान शिव प्रभावित होकर मां पार्वती को विवाह का वचन दिया। मां पार्वती और भगवान शिव का&nbsp; विवाह हो गया। तभी से उस दिन को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाने लगा।&nbsp;

Hartalika Teej 2025: शुभ मुहूर्त&nbsp;&nbsp;
हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त 25 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी और 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर इसका समापन होगा ।&nbsp;

Hartalika Teej 2025: पूजन मुहूर्त
हरतालिका तीज की पूजा सुबह किया जाता है। इसीलिए पूजा करने की शुभ मुहूर्त 26 अगस्त सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर इसका समापन होगा।&nbsp;&nbsp;

&nbsp;

Hartalika Teej 2025: पूजन विधि&nbsp;
हरतालिका तीज पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन महिलाओं लो 16 श्रृंगार करना चाहिए। पूजा स्थल को फल-फूलों से सजाएं। एक चौकी लें और उस पर शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर दें। उनके आगे एक दीपक जलाएं।&nbsp; इसके बाद सुहाग की सारी वस्तुएं रखकर माता पार्वती को दान करें। उन्हें फल, फूल और मिठाई का भोग लगा कर उनकी पूजा करें। इसके बाद तीज की कथा सुनें और गरीबों में अपने अनुसार कुछ दान जरूर करें। रात में जागकर भगवान शिव और माता पार्वती का भजन-कीर्तन करें। सुबह फिर से नहा धोकर भोग लगाकर पूजा अर्चना करने के बाद अपना व्रत खोलें।&nbsp;

&nbsp;

&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">Hartalika Teej 2025: इस वर्ष&nbsp;<span style="text-align: justify;">हरतालिका तीज</span> 26 अगस्त को मनाया जायेगा। वैसे पुरे वर्ष में तीन तरह के तीज मनाये जाते हैं, जिसमें सावन में हरियाली तीज और मानसून में कजरी तीज व हरतालिका। हरतालिका तीज हिंदू सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है।&nbsp; सामान्यतः हरतालिका तीज अगस्त और सितंबर महीने में पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि मां पार्वती ने भी भगवान शंकर को पाने के लिए यह व्रत रखा था।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">इस त्योहार के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन की समृद्धि और खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रख कर बड़ी श्रद्धा से देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। व्रत के दौरान रात भर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। अगले दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>हरतालिका तीज की कथा</strong><br />
इस कथा के अनुसार, माता पार्वती ने शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया और युवा होने पर उन्होंने अपने पिता से शिव से विवाह करने की बात की लेकन उनके पिता नहीं माने।&nbsp; तब पार्वती ने भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन गंगा की रेत और गाद से शिवलिंग बनाकर शिव की तपस्या करनी शुरू कर दी। इससे भगवान शिव प्रभावित होकर मां पार्वती को विवाह का वचन दिया। मां पार्वती और भगवान शिव का&nbsp; विवाह हो गया। तभी से उस दिन को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाने लगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>Hartalika Teej 2025: शुभ मुहूर्त&nbsp;&nbsp;</strong><br />
हरतालिका तीज का शुभ मुहूर्त 25 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी और 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर इसका समापन होगा ।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>Hartalika Teej 2025: पूजन मुहूर्त</strong><br />
हरतालिका तीज की पूजा सुबह किया जाता है। इसीलिए पूजा करने की शुभ मुहूर्त 26 अगस्त सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर इसका समापन होगा।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>Hartalika Teej 2025: पूजन विधि&nbsp;</strong><br />
हरतालिका तीज पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन महिलाओं लो 16 श्रृंगार करना चाहिए। पूजा स्थल को फल-फूलों से सजाएं। एक चौकी लें और उस पर शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर दें। उनके आगे एक दीपक जलाएं।&nbsp; इसके बाद सुहाग की सारी वस्तुएं रखकर माता पार्वती को दान करें। उन्हें फल, फूल और मिठाई का भोग लगा कर उनकी पूजा करें। इसके बाद तीज की कथा सुनें और गरीबों में अपने अनुसार कुछ दान जरूर करें। रात में जागकर भगवान शिव और माता पार्वती का भजन-कीर्तन करें। सुबह फिर से नहा धोकर भोग लगाकर पूजा अर्चना करने के बाद अपना व्रत खोलें।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41286.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[hartalika-teej-2025-know-date-puja-ki-vidhi-muhurat-and-worship-method-significance]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/15th-or-16th-august-know-which-day-is-janmashtami-and-auspicious-time-for-puja]]></guid>
                       <title><![CDATA[15 या 16 अगस्त, जानें किस दिन है जन्माष्टमी और पूजा का शुभ मुहूर्त ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/first-blessing/news/15th-or-16th-august-know-which-day-is-janmashtami-and-auspicious-time-for-puja]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 12 Aug 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[देश में हर जगह जन्माष्टमी को बड़े ही हर्षोउल्लाष के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था। इस दिन को भगवान कृष्ण के बाल्यावस्था को याद और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग पूरी भक्ति से व्रत रख कर भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और साथ ही इस दिन झांकियां, भजन-कीर्तन और रासलीला भी प्रस्तुत की जाती हैं।&nbsp;

जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम
माना जाता है कि श्री हरि के 8वें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में होने के कारण जन्माष्टमी का यह त्यौहार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग पर मनाया जाता है। इस साल अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का जो संयोग है वो दो अलग-अलग दिनों में पड़ रहा है, जिसके चलते इसबार दो दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इसीलिए इस बार जन्माष्टमी को लेकर लोगों में काफी भ्रम हो रहा है कि किस दिन को जन्माष्टमी मनाया जाए ।&nbsp;

शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, कृष्ण जन्माष्टमी 15 अगस्त अष्टमी को रात 11 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी वहीं इसका समापन 16 अगस्त रात 9 बजकर 34 मिनट पर होगा।&nbsp;

पूजा विधि
इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं। व्रत के दौरान कोई भी अनाज ग्रहन नहीं किया जाता है। पारण के समय साधारणतः फल या सिंघाड़े के आटे से बने पकवान खाए जाने की परंपरा है।&nbsp;&nbsp;

एक सुंदर सी पालने को सजाकर उसमें बाल गोपाल को विराजमान करें। दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल को मिलाकर पंचामृत बनायें और उससे बाल गोपाल को स्नान कराएं। इसके बाद नए वस्त्र पहनाकर उनका शृंगार करें। फल, मिठाई, खीर, माखन-मिश्री और पंचामृत से भोग लगाएं। मंत्रों का जाप करते हुए विधि-विधान से उनकी पूजा करें और आरती कर पूजा का समापन करें। मध्यरात्रि पूजा और आरती करने के बाद प्रसाद ग्रहन करके व्रत खोल लें। इस पर्व पर ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य भी करें।

जन्माष्टमी का महत्व&nbsp;
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का ही केवल त्यौहार नहीं है, बल्कि यह उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का भी है। द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण ने अवतार लिया, तब उन्होंने&nbsp; धर्म की स्थापना की। उनके द्वारा अर्जुन को महाभारत के युद्धभूमि में सुनाए गए गीता के उपदेश, आज भी उतना ही प्रासंगिक हैं जितना तब था।

गीता का मूल संदेश&nbsp;
श्रीमद्भगवद्गीता में जीवन के हर कठिनाईयों और परेशानियों से निपटने का मार्गदर्शन दिया गया है। यदि गीता के संदेशों को जीवन में उतार लिया जाए, तो हम किसी भी प्रकार की कठिनाई, निराशा और असफलता से प्रभावित नहीं होंगे। गीता में बताया गया है कि हमें सिर्फ अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। इससे हम चिंता मुक्त बने रहेगें।&nbsp;&nbsp;
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">देश में हर जगह जन्माष्टमी को बड़े ही हर्षोउल्लाष के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे हुआ था। इस दिन को भगवान कृष्ण के बाल्यावस्था को याद और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग पूरी भक्ति से व्रत रख कर भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और साथ ही इस दिन झांकियां, भजन-कीर्तन और रासलीला भी प्रस्तुत की जाती हैं।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम</strong><br />
माना जाता है कि श्री हरि के 8वें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में होने के कारण जन्माष्टमी का यह त्यौहार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग पर मनाया जाता है। इस साल अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का जो संयोग है वो दो अलग-अलग दिनों में पड़ रहा है, जिसके चलते इसबार दो दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इसीलिए इस बार जन्माष्टमी को लेकर लोगों में काफी भ्रम हो रहा है कि किस दिन को जन्माष्टमी मनाया जाए ।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>शुभ मुहूर्त</strong><br />
पंचांग के मुताबिक, कृष्ण जन्माष्टमी 15 अगस्त अष्टमी को रात 11 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी वहीं इसका समापन 16 अगस्त रात 9 बजकर 34 मिनट पर होगा।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>पूजा विधि</strong><br />
इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं। व्रत के दौरान कोई भी अनाज ग्रहन नहीं किया जाता है। पारण के समय साधारणतः फल या सिंघाड़े के आटे से बने पकवान खाए जाने की परंपरा है।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">एक सुंदर सी पालने को सजाकर उसमें बाल गोपाल को विराजमान करें। दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल को मिलाकर पंचामृत बनायें और उससे बाल गोपाल को स्नान कराएं। इसके बाद नए वस्त्र पहनाकर उनका शृंगार करें। फल, मिठाई, खीर, माखन-मिश्री और पंचामृत से भोग लगाएं। मंत्रों का जाप करते हुए विधि-विधान से उनकी पूजा करें और आरती कर पूजा का समापन करें। मध्यरात्रि पूजा और आरती करने के बाद प्रसाद ग्रहन करके व्रत खोल लें। इस पर्व पर ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य भी करें।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जन्माष्टमी का महत्व</strong>&nbsp;<br />
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का ही केवल त्यौहार नहीं है, बल्कि यह उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का भी है। द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण ने अवतार लिया, तब उन्होंने&nbsp; धर्म की स्थापना की। उनके द्वारा अर्जुन को महाभारत के युद्धभूमि में सुनाए गए गीता के उपदेश, आज भी उतना ही प्रासंगिक हैं जितना तब था।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>गीता का मूल संदेश&nbsp;</strong><br />
श्रीमद्भगवद्गीता में जीवन के हर कठिनाईयों और परेशानियों से निपटने का मार्गदर्शन दिया गया है। यदि गीता के संदेशों को जीवन में उतार लिया जाए, तो हम किसी भी प्रकार की कठिनाई, निराशा और असफलता से प्रभावित नहीं होंगे। गीता में बताया गया है कि हमें सिर्फ अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। इससे हम चिंता मुक्त बने रहेगें।&nbsp;&nbsp;</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall41166.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[15th or 16th August, know which day is Janmashtami and auspicious time for Puja]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/entertainment/religious/patal-bhuvaneshwar-temple-a-wonderful-confluence-of-mystery-faith-and-spirituality]]></guid>
                       <title><![CDATA[पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/entertainment/religious/patal-bhuvaneshwar-temple-a-wonderful-confluence-of-mystery-faith-and-spirituality]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Tue, 27 May 2025 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[&nbsp;

क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।

यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।

कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?

यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?</strong></span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall40460.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/national-news/mahakali-rests-in-this-temple-every-night-maa-haat-kalika-is-the-goddess-of-kumaon-regiment]]></guid>
                       <title><![CDATA[इस मंदिर में हर रात महाकाली करती हैं विश्राम]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/national-news/mahakali-rests-in-this-temple-every-night-maa-haat-kalika-is-the-goddess-of-kumaon-regiment]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sat, 27 Jan 2024 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[कुमाऊं रेजीमेंट की देवी है मां &#39;हाट कालिका&#39;

देवभूमि उत्तराखंड को देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसी उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां कहा जाता है कि हर रात महाकाली विश्राम करने के लिए पहुंचती हैं। मंदिर से जाने के बाद हर सुबह उनके रात्रि विश्राम के प्रमाण मिलते हैं। ये स्थान है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील महाकाली का हाट कालिका मंदिर है।&nbsp;
&nbsp; बताते हैं कि इसी मंदिर के स्थान पर माता ने काली रूप धारण कर जब शत्रुओं का नाश किया था तो यहां मां का गुस्सा शांत करने के लिए भगवान शिव उनके पांव के नीचे लेट गए थे। कहा जाता है इस स्थान पर कई वर्षों तक माता की तेज ज्वाला निकलती देखी गई है। कई वर्षों बाद आदि गुरु शंकराचार्य ने माता की ज्वाला को शांत किया और यहां माता के शांत स्वरूप की स्थापना की। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। हाट कालिका मंदिर में हर रोज शाम आरती के बाद माता को भोग लगाया जाता है, जिसके उपरांत माता की शयन आरती गाई जाती है और माता का बिस्तर लगाया जाता है। फिर माता के मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। कहा जाता है कि माता रात्रि विश्राम के लिए मंदिर में पहुंचती हैं और सुबह जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो बिस्तर में कुछ इस तरह का आभास होता है कि जैसे किसी ने इसमें रात्रि विश्राम किया हो।

एक पुकार पर मां ने सेना के सैकड़ों जवानों की बचाई थी जान&nbsp;
मां हाट कालिका देश की सबसे पुरानी सेना कुमाऊं रेजीमेंट की देवी भी हैं। कहते हंै कि देवी ने सैनिक की एक पुकार पर सेना के सैकड़ों जवानों की जान बचाई थी, जिसके बाद अब हर जंग में जाने से पहले कुमाऊं रेजिमेंट के जवान इस देवी की पूजा करते हैं। लोग बताते हैं कि एक बार सेना की कुमाऊं रेजिमेंट के जवान पानी के जहाज से कहीं कूच कर रहे थे। जहाज में अचानक तकनीकी खराबी आ गई और जहाज डूबने लगा। तब उन जवानों में से एक पिथौरागढ़ निवासी जवान ने मां कालिका की स्तुति की। कुछ ही देर बार डूबता जहाज ऊपर आने लगा और खुद धीर-धीरे किनारे लग गया। इस घटना के बाद कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने मंदिर में दो बड़ी घंटियां चढ़ाईं और मंदिर का गेट बनवाया। इस चमत्कार के बाद कुमाऊं रेजिमेंट युद्ध में जाने से पहले और ट्रेनिंग में जाने से पहले काली माता का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ते। कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों की आस्था मंदिर के साथ ऐसी है कि कहा जाता है कि बस महाकाली का नाम लेते ही लड़ाई के मैदान में जवानों की शक्ति दोगुनी हो जाती है। जवानों का कहना है कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे उनकी ओर से कोई और लड़ाई कर रहा है और दुश्मनों का खात्मा कर रहा है।

हर मुराद होती है पूरी&nbsp;&nbsp;
उत्तराखंड के लोगों की आस्था का केंंद्र महाकाली मंदिर अनेक रहस्यमयी कथाओं को अपने आप में समेटे हुए है। कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्धापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के श्रद्धा पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं महान विपदाओं का हरण हो जाता है व अतुल ऐश्वर्य एवं संपत्ति की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि मां हाल कालिका मंदिर में आने वाले भक्त की हर मुराद पूरी होती है।&nbsp;&nbsp;

कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने स्थापित की थी महाकाली की मूर्ति&nbsp;
कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तान के साथ छिड़ी 1971 की लड़ाई के बाद गंगोलीहाट के कनारागांव निवासी सूबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में सैन्य टुकड़ी ने इस मंदिर में महाकाली की मूर्ति की स्थापना की थी। कालिका के मंदिर में शक्ति पूजा का विधान है। सेना की ओर से स्थापित यह मूर्ति मंदिर की पहली मूर्ति थी। इसके बाद साल 1994 में कुमाऊं रेजीमेंट ने ही मंदिर में महाकाली की बड़ी मूर्ति चढ़ाई है।&nbsp;

गण, आंण व बांण की सेना भी चलती है साथ&nbsp;
कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्धापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं महान विपदाएं दूर हो जाती हैं। वर्ष भर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाकाली के संदर्भ में एक प्रसिद्ध किवदंती है कि कालिका का जब रात में डोला चलता है तो इस डोले के साथ कालिका के गण, आंण व बांण की सेना भी चलती है। स्कंदपुराण के मानस खंड में यहां स्थिति देवी का विस्तार से वर्णन मिलता है।

आदि गुरु शंकराचार्य हुए थे जड़वत&nbsp;&nbsp;
आदि शक्ति महाकाली का यह मंदिर ऐतिहासिक, पौराणिक मान्यताओं सहित अद्भुत चमत्कारी किवदंतियों व गाथाओं को अपने आप में समेटे हुए है। कहा जाता है कि महिषासुर व चंड-मुंड सहित भयंकर शुंभ-निशुंभ आदि राक्षसों का वध करने के बाद भी महाकाली का यह रौद्र रूप शांत नहीं हुआ और इस रूप ने महा विकराल धधकती महाभयानक ज्वाला का रूप धारण कर तांडव मचा दिया था। महाकाली ने महाकाल का भयंकर रूप धारण कर देवदार के वृक्ष में चढ़कर जगन्नाथ व भुवनेश्वर नाथ को आवाज लगानी शुरू कर दी। कहते हैं यह आवाज जिस किसी के कान में पड़ती थी, वह व्यक्ति सुबह तक यमलोक पहुंच चुका होता था।
&nbsp; &nbsp; &nbsp;छठी शताब्दी में आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जब अपने भारत भ्रमण के दौरान जागेश्वर आये तो शिव प्रेरणा से उनके मन में यहां आने की इच्छा जागृत हुई, लेकिन जब वे यहां पहुंचे तो नरबलि की बात सुनकर उद्वेलित शंकराचार्य ने इस दैवीय स्थल की सत्ता को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और शक्ति के दर्शन करने से भी वे विमुख हो गए।&nbsp; शंकराचार्य के मन में विचार आया कि देवी इस तरह का तांडव नहीं मचा सकती, यह किसी आसुरी शक्ति का काम है। लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से वो गंगोलीहाट के लिए रवाना हो गए। जगद्गुरु जब मंदिर के 20 मीटर पास में पहुंचे तो वह जड़वत हो गए और लाख चाहने के बाद भी उनके कदम आगे नहीं बढ़ पाए। शंकराचार्य को देवी शक्ति का आभास हो गया और वो देवी से क्षमा याचना करते हुए पुरातन मंदिर तक पहुंचे। पूजा अर्चना के बाद मंत्र शक्ति के बल पर महाकाली के रौद्र रूप को शांत कर शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया और गंगोली क्षेत्र में सुख शांति व्याप्त हो गई।&nbsp;&nbsp;

आराध्य स्थल ही है माता का साक्षात यंत्र
सरयू एवं रामगंगा के मध्य गंगावली की सुनहरी घाटी में स्थित भगवती के इस आराध्य स्थल की बनावट त्रिभुजाकार बताई जाती है और यही त्रिभुज तंत्र शास्त्र के अनुसार माता का साक्षात यंत्र है। यहां धनहीन धन की इच्छा से, पुत्रहीन पुत्र की इच्छा से, संपत्ति हीन संपत्ति की इच्छा से सांसारिक मायाजाल से विरक्त लोग मुक्ति की इच्छा से आते हैं व अपनी मनोकामना पूर्ण पाते हैं।

चमत्कारिक है मंदिर निर्माण की कथा&nbsp;&nbsp;
इस मंदिर के निर्माण की कथा भी बड़ी चमत्कारिक रही है। माना जाता है कि महामाया की प्रेरणा से प्रयाग में होने वाले कुंभ मेले में से नागा पंथ के महात्मा जंगम बाबा को स्वप्न में कई बार इस शक्ति पीठ के दर्शन होते थे। उन्होंने रूद्र दंत पंत के साथ यहां आकर भगवती के लिए मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया। परंतु उनके आगे मंदिर निर्माण के लिये पत्थरों की समस्या आन पड़ी। इसी चिंता में एक रात्रि वे अपने शिष्यों के साथ अपनी धूनी के पास बैठकर विचार कर रहे थे। कोई रास्ता नजर न आने पर थके व निढाल बाबा सोचते-सोचते शिष्यों सहित गहरी निद्रा में सो गये तथा स्वप्न में उन्हें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती रूपी तीन कन्याओं के दर्शन हुए वे दिव्य मुस्कान के साथ बाबा को स्वप्न में ही अपने साथ उस स्थान पर ले गयीं, जहां पत्थरों का खजाना था। यह स्थान महाकाली मंदिर के निकट देवदार वृक्षों के बीच घना वन था। इस स्वप्न को देखते ही बाबा की नींद भंग हुई उन्होंने सभी शिष्यों को जगाया स्वप्न का वर्णन कर रातों-रात चीड़ की लकड़ी की मशालें तैयार कीं तथा पूरा शिष्य समुदाय उस स्थान की ओर चल पड़ा, जिसे बाबा ने स्वप्न में देखा था। वहां पहुंचकर रात्रि में ही खुदाई का कार्य आरंभ किया गया। थोड़ी ही खुदान के बाद यहां संगमरमर से भी बेहतर पत्थरों की खान निकल आयी। कहते हैं कि पूरा मंदिर, भोग भवन, शिव मंदिर, धर्मशाला वं मंदिर परिसर का व प्रवेश द्वारों का निर्माण होने के बाद पत्थर की खान स्वत: ही समाप्त हो गई। आश्चर्य की बात तो यह है इस खान में नौ फिट से भी लंबे तराशे हुए पत्थर मिले।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:24px;">कुमाऊं रेजीमेंट की देवी है मां &#39;हाट कालिका&#39;</span></span></strong></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">देवभूमि उत्तराखंड को देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसी उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां कहा जाता है कि हर रात महाकाली विश्राम करने के लिए पहुंचती </span><span style="font-size: 18px; text-align: justify;">हैं।</span><span style="font-size:18px;"> मंदिर से जाने के बाद हर सुबह उनके रात्रि विश्राम के प्रमाण मिलते हैं। <span style="color:#FF0000;"><strong>ये स्थान है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद की गंगोलीहाट तहसील महाकाली का हाट कालिका मंदिर है।&nbsp;</strong></span><br />
&nbsp; बताते हैं कि इसी मंदिर के स्थान पर माता ने काली रूप धारण कर जब शत्रुओं का नाश किया था तो यहां मां का गुस्सा शांत करने के लिए भगवान शिव उनके पांव के नीचे लेट गए थे। कहा जाता है इस स्थान पर कई वर्षों तक माता की तेज ज्वाला निकलती देखी गई है। कई वर्षों बाद आदि गुरु शंकराचार्य ने माता की ज्वाला को शांत किया और यहां माता के शांत स्वरूप की स्थापना की। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। हाट कालिका मंदिर में हर रोज शाम आरती के बाद माता को भोग लगाया जाता है, जिसके उपरांत माता की शयन आरती गाई जाती है और माता का बिस्तर लगाया जाता है। फिर माता के मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। कहा जाता है कि माता रात्रि विश्राम के लिए मंदिर में पहुंचती हैं और सुबह जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो बिस्तर में कुछ इस तरह का आभास होता है कि जैसे किसी ने इसमें रात्रि विश्राम किया हो।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">एक पुकार पर मां ने सेना के सैकड़ों जवानों की बचाई थी जान</span></span>&nbsp;<br />
मां हाट कालिका देश की सबसे पुरानी सेना कुमाऊं रेजीमेंट की देवी भी हैं। कहते हंै कि देवी ने सैनिक की एक पुकार पर सेना के सैकड़ों जवानों की जान बचाई थी, जिसके बाद अब हर जंग में जाने से पहले कुमाऊं रेजिमेंट के जवान इस देवी की पूजा करते हैं। लोग बताते हैं कि एक बार सेना की कुमाऊं रेजिमेंट के जवान पानी के जहाज से कहीं कूच कर रहे थे। जहाज में अचानक तकनीकी खराबी आ गई और जहाज डूबने लगा। तब उन जवानों में से एक पिथौरागढ़ निवासी जवान ने मां कालिका की स्तुति की। कुछ ही देर बार डूबता जहाज ऊपर आने लगा और खुद धीर-धीरे किनारे लग गया। इस घटना के बाद कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने मंदिर में दो बड़ी घंटियां चढ़ाईं और मंदिर का गेट बनवाया। इस चमत्कार के बाद कुमाऊं रेजिमेंट युद्ध में जाने से पहले और ट्रेनिंग में जाने से पहले काली माता का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ते। कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों की आस्था मंदिर के साथ ऐसी है कि कहा जाता है कि बस महाकाली का नाम लेते ही लड़ाई के मैदान में जवानों की शक्ति दोगुनी हो जाती है। जवानों का कहना है कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे उनकी ओर से कोई और लड़ाई कर रहा है और दुश्मनों का खात्मा कर रहा है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">हर मुराद होती है पूरी&nbsp;&nbsp;</span></span><br />
उत्तराखंड के लोगों की आस्था का केंंद्र महाकाली मंदिर अनेक रहस्यमयी कथाओं को अपने आप में समेटे हुए है। कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्धापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के श्रद्धा पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं महान विपदाओं का हरण हो जाता है व अतुल ऐश्वर्य एवं संपत्ति की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि मां हाल कालिका मंदिर में आने वाले भक्त की हर मुराद पूरी होती है।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने स्थापित की थी महाकाली की मूर्ति&nbsp;</span></span><br />
कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तान के साथ छिड़ी 1971 की लड़ाई के बाद गंगोलीहाट के कनारागांव निवासी सूबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में सैन्य टुकड़ी ने इस मंदिर में महाकाली की मूर्ति की स्थापना की थी। कालिका के मंदिर में शक्ति पूजा का विधान है। सेना की ओर से स्थापित यह मूर्ति मंदिर की पहली मूर्ति थी। इसके बाद साल 1994 में कुमाऊं रेजीमेंट ने ही मंदिर में महाकाली की बड़ी मूर्ति चढ़ाई है।&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">गण, आंण व बांण की सेना भी चलती है साथ&nbsp;</span></span><br />
कहा जाता है कि जो भी भक्तजन श्रद्धापूर्वक महाकाली के चरणों में आराधना के पुष्प अर्पित करता है उसके रोग, शोक, दरिद्रता एवं महान विपदाएं दूर हो जाती हैं। वर्ष भर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाकाली के संदर्भ में एक प्रसिद्ध किवदंती है कि कालिका का जब रात में डोला चलता है तो इस डोले के साथ कालिका के गण, आंण व बांण की सेना भी चलती है। स्कंदपुराण के मानस खंड में यहां स्थिति देवी का विस्तार से वर्णन मिलता है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">आदि गुरु शंकराचार्य हुए थे जड़वत&nbsp;&nbsp;</span></span><br />
आदि शक्ति महाकाली का यह मंदिर ऐतिहासिक, पौराणिक मान्यताओं सहित अद्भुत चमत्कारी किवदंतियों व गाथाओं को अपने आप में समेटे हुए है। कहा जाता है कि महिषासुर व चंड-मुंड सहित भयंकर शुंभ-निशुंभ आदि राक्षसों का वध करने के बाद भी महाकाली का यह रौद्र रूप शांत नहीं हुआ और इस रूप ने महा विकराल धधकती महाभयानक ज्वाला का रूप धारण कर तांडव मचा दिया था। महाकाली ने महाकाल का भयंकर रूप धारण कर देवदार के वृक्ष में चढ़कर जगन्नाथ व भुवनेश्वर नाथ को आवाज लगानी शुरू कर दी। कहते हैं यह आवाज जिस किसी के कान में पड़ती थी, वह व्यक्ति सुबह तक यमलोक पहुंच चुका होता था।<br />
&nbsp; &nbsp; &nbsp;छठी शताब्दी में आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जब अपने भारत भ्रमण के दौरान जागेश्वर आये तो शिव प्रेरणा से उनके मन में यहां आने की इच्छा जागृत हुई, लेकिन जब वे यहां पहुंचे तो नरबलि की बात सुनकर उद्वेलित शंकराचार्य ने इस दैवीय स्थल की सत्ता को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और शक्ति के दर्शन करने से भी वे विमुख हो गए।&nbsp; शंकराचार्य के मन में विचार आया कि देवी इस तरह का तांडव नहीं मचा सकती, यह किसी आसुरी शक्ति का काम है। लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से वो गंगोलीहाट के लिए रवाना हो गए। जगद्गुरु जब मंदिर के 20 मीटर पास में पहुंचे तो वह जड़वत हो गए और लाख चाहने के बाद भी उनके कदम आगे नहीं बढ़ पाए। शंकराचार्य को देवी शक्ति का आभास हो गया और वो देवी से क्षमा याचना करते हुए पुरातन मंदिर तक पहुंचे। पूजा अर्चना के बाद मंत्र शक्ति के बल पर महाकाली के रौद्र रूप को शांत कर शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया और गंगोली क्षेत्र में सुख शांति व्याप्त हो गई।&nbsp;&nbsp;</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">आराध्य स्थल ही है माता का साक्षात यंत्र</span></span><br />
सरयू एवं रामगंगा के मध्य गंगावली की सुनहरी घाटी में स्थित भगवती के इस आराध्य स्थल की बनावट त्रिभुजाकार बताई जाती है और यही त्रिभुज तंत्र शास्त्र के अनुसार माता का साक्षात यंत्र है। यहां धनहीन धन की इच्छा से, पुत्रहीन पुत्र की इच्छा से, संपत्ति हीन संपत्ति की इच्छा से सांसारिक मायाजाल से विरक्त लोग मुक्ति की इच्छा से आते हैं व अपनी मनोकामना पूर्ण पाते हैं।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">चमत्कारिक है मंदिर निर्माण की कथा&nbsp;&nbsp;</span></span><br />
इस मंदिर के निर्माण की कथा भी बड़ी चमत्कारिक रही है। माना जाता है कि महामाया की प्रेरणा से प्रयाग में होने वाले कुंभ मेले में से नागा पंथ के महात्मा जंगम बाबा को स्वप्न में कई बार इस शक्ति पीठ के दर्शन होते थे। उन्होंने रूद्र दंत पंत के साथ यहां आकर भगवती के लिए मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया। परंतु उनके आगे मंदिर निर्माण के लिये पत्थरों की समस्या आन पड़ी। इसी चिंता में एक रात्रि वे अपने शिष्यों के साथ अपनी धूनी के पास बैठकर विचार कर रहे थे। कोई रास्ता नजर न आने पर थके व निढाल बाबा सोचते-सोचते शिष्यों सहित गहरी निद्रा में सो गये तथा स्वप्न में उन्हें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती रूपी तीन कन्याओं के दर्शन हुए वे दिव्य मुस्कान के साथ बाबा को स्वप्न में ही अपने साथ उस स्थान पर ले गयीं, जहां पत्थरों का खजाना था। यह स्थान महाकाली मंदिर के निकट देवदार वृक्षों के बीच घना वन था। इस स्वप्न को देखते ही बाबा की नींद भंग हुई उन्होंने सभी शिष्यों को जगाया स्वप्न का वर्णन कर रातों-रात चीड़ की लकड़ी की मशालें तैयार कीं तथा पूरा शिष्य समुदाय उस स्थान की ओर चल पड़ा, जिसे बाबा ने स्वप्न में देखा था। वहां पहुंचकर रात्रि में ही खुदाई का कार्य आरंभ किया गया। थोड़ी ही खुदान के बाद यहां संगमरमर से भी बेहतर पत्थरों की खान निकल आयी। कहते हैं कि पूरा मंदिर, भोग भवन, शिव मंदिर, धर्मशाला वं मंदिर परिसर का व प्रवेश द्वारों का निर्माण होने के बाद पत्थर की खान स्वत: ही समाप्त हो गई। आश्चर्य की बात तो यह है इस खान में नौ फिट से भी लंबे तराशे हुए पत्थर मिले।</span></p>
]]></content:encoded>
                <media:content url="https://www.firstverdict.com/resource/images/news/imagesmall34840.jpg" type="image/jpeg" expression="full" width="299" height="242">
                <media:description type="plain"><![CDATA[ Mahakali rests in this temple every night. Maa 'Haat Kalika' is the goddess of Kumaon Regiment. 123]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/indora-chief-minister-laid-the-foundation-stone-of-268-crore-pepsi-plant-in-kandrori]]></guid>
                       <title><![CDATA[इंदौरा : मुख्यमंत्री ने कंदरोड़ी में 268 करोड़ के पेप्सी प्लांट का किया शिलान्यास]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/indora-chief-minister-laid-the-foundation-stone-of-268-crore-pepsi-plant-in-kandrori]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Wed, 20 Dec 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[-प्लांट से इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में आएगा आशातीत बदलाव: हर्षवर्धन चौहान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज जिला कांगड़ा के इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कंदरोड़ी में 268 करोड़ की लागत से बनने वाले वरुण बेवरेजेस लिमिटेड के पेप्सी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में इतने बड़े निवेश से लगने वाला यह पहला उद्योग है। इससे क्षेत्र में विकास को नई रफ्तार और आर्थिकी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस उद्योग के माध्यम से दो हजार से अधिक युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने इंदौरा के औद्योगिक क्षेत्र में बेहतर सड़क सुविधा प्रदान करने के लिए पर्याप्त बजट प्रदान करने का आश्वासन दिया।
&nbsp; &nbsp;सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पूरे देश में निवेश के लिए एक उपयुक्त स्थल है। राज्य सरकार निवेशकों को अपने उद्योग स्थापित करने के लिए अनेक सुविधाएं प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश पर 75 हजार करोड़ का कर्ज है और 10 हजार करोड़ रुपये की सरकारी कर्मचारियों की देनदारियां बकाया है। प्रदेश कभी भी कर्ज के सहारे नहीं चल सकता है, इसीलिए राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार दिन-रात प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के प्रत्येक निवासी पर एक लाख रुपए से अधिक का ऋण है, इसके बावजूद आगामी चार वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाएगा।
&nbsp; &nbsp;उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पिछले एक वर्ष में 20 प्रतिशत तक सुधार आया है और राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में राज्य की उद्योग नीति में भी बदलाव करने जा रही है, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कांगड़ा जिला में कई बड़े उद्योग लगाए जाएंगे।
&nbsp; वहीं, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि आज का दिन कांगड़ा जिला के लिए महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह प्लांट इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में आशातीत बदलाव लाएगा। इस प्लांट को स्थापित करने के लिए सभी औपचारिकताएं तीन माह में पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में हिमाचल प्रदेश में 10 हजार करोड़ का निवेश आया है। वर्तमान राज्य सरकार कांगड़ा जिला के विकास पर विशेष ध्यान केन्द्रित कर रही है तथा जिला को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां आ सकें। युवाओं को रोज़गार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

विधायक मलेंद्र राजन ने सीएम का जताया आभार
विधायक मलेंद्र राजन ने इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में पेप्सी के मेगा प्लांट लगाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे तथा कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इंदौरा विधानसभा क्षेत्र आर्थिक रूप से सम्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के मलोट में उद्योगों की स्थापना के लिए 102 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे, जिससे यहां औद्योगिक निवेश आरंभ हुआ। उन्होंने कहा कि इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में किन्नू, संतरा आदि का अत्याधिक उत्पादन होता है तथा प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के बागवानों को भी लाभ मिलेगा।

प्लांट से क्षेत्र में आएगी आर्थिक उन्नति :&nbsp; रविकांत
वरुण बेवरेजिज लिमिटेड के चेयरमैन रविकांत जयपुरिया ने कहा कि यह पेप्सी प्लांट लगभग एक वर्ष में बनकर तैयार होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक उन्नति आएगी। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए भी कंपनी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योग की स्थापना में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">-प्लांट से इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में आएगा आशातीत बदलाव: हर्षवर्धन चौहान</span></span></strong></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;">मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज जिला कांगड़ा के इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कंदरोड़ी में 268 करोड़ की लागत से बनने वाले वरुण बेवरेजेस लिमिटेड के पेप्सी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में इतने बड़े निवेश से लगने वाला यह पहला उद्योग है। इससे क्षेत्र में विकास को नई रफ्तार और आर्थिकी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस उद्योग के माध्यम से दो हजार से अधिक युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने इंदौरा के औद्योगिक क्षेत्र में बेहतर सड़क सुविधा प्रदान करने के लिए पर्याप्त बजट प्रदान करने का आश्वासन दिया।<br />
&nbsp; &nbsp;सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पूरे देश में निवेश के लिए एक उपयुक्त स्थल है। राज्य सरकार निवेशकों को अपने उद्योग स्थापित करने के लिए अनेक सुविधाएं प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश पर 75 हजार करोड़ का कर्ज है और 10 हजार करोड़ रुपये की सरकारी कर्मचारियों की देनदारियां बकाया है। प्रदेश कभी भी कर्ज के सहारे नहीं चल सकता है, इसीलिए राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार दिन-रात प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के प्रत्येक निवासी पर एक लाख रुपए से अधिक का ऋण है, इसके बावजूद आगामी चार वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाएगा।<br />
&nbsp; &nbsp;उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पिछले एक वर्ष में 20 प्रतिशत तक सुधार आया है और राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में राज्य की उद्योग नीति में भी बदलाव करने जा रही है, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कांगड़ा जिला में कई बड़े उद्योग लगाए जाएंगे।<br />
&nbsp; वहीं, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि आज का दिन कांगड़ा जिला के लिए महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह प्लांट इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में आशातीत बदलाव लाएगा। इस प्लांट को स्थापित करने के लिए सभी औपचारिकताएं तीन माह में पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में हिमाचल प्रदेश में 10 हजार करोड़ का निवेश आया है। वर्तमान राज्य सरकार कांगड़ा जिला के विकास पर विशेष ध्यान केन्द्रित कर रही है तथा जिला को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए प्रयास कर रही है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां आ सकें। युवाओं को रोज़गार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">विधायक मलेंद्र राजन ने सीएम का जताया आभार</span></span><br />
विधायक मलेंद्र राजन ने इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में पेप्सी के मेगा प्लांट लगाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे तथा कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इंदौरा विधानसभा क्षेत्र आर्थिक रूप से सम्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के मलोट में उद्योगों की स्थापना के लिए 102 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे, जिससे यहां औद्योगिक निवेश आरंभ हुआ। उन्होंने कहा कि इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में किन्नू, संतरा आदि का अत्याधिक उत्पादन होता है तथा प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के बागवानों को भी लाभ मिलेगा।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><span style="color:#FF0000;"><span style="font-size:22px;">प्लांट से क्षेत्र में आएगी आर्थिक उन्नति :&nbsp; रविकांत</span></span><br />
वरुण बेवरेजिज लिमिटेड के चेयरमैन रविकांत जयपुरिया ने कहा कि यह पेप्सी प्लांट लगभग एक वर्ष में बनकर तैयार होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक उन्नति आएगी। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए भी कंपनी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने उद्योग की स्थापना में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया।</span></p>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Indora: Chief Minister laid the foundation stone of 268 crore Pepsi plant in Kandrori.]]></media:description>
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                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-pisces]]></guid>
                       <title><![CDATA[जानिए मीन राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा ये साल  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-pisces]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 01 Jan 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[जनवरी : इस माह आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। धन संचय में कठिनाई होगी वही आपकी वाणी में थोड़ा रूखापन आ सकता है। इस समय की गई यात्राएं लाभदायक होगी।


फरवरी : ये माह आपके लिए जबरदस्त सफलता लेकर के आने वाला है। इस माह आपको कार्यस्थल पर सम्मानित भी किया जा सकता है। यह माह स्त्री जातकों के लिए शानदार रहने वाला है वही कारोबारी जातकों को नए लोगों से मिलकर काम को आगे बढ़ाने का मौका मिलने वाला है। इस माह आप अपने परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर भी जा सकते है


मार्च : इस समय नौकरी की तलाश में जुटे जातकों को अच्छी नौकरी मिलेगी। सरकारी कार्य से जुड़े जातकों को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विदेश जाने का सपना पूरा हो सकता है। इस माह आपको अपने पिता का सहयोग प्राप्त होगा। अगर आपको मधुमेह या रक्त विकार है तो आपको सेहत का ध्यान रखना होगा।


अप्रैल : जनसंचार से जुड़े जातकों को फायदा होने वाला है। सिनेमा जगत में काम कर रहे जातक इस समय प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। आमदनी से अधिक खर्चा होगा और आपका मन खिन्न रहने वाला है।


मई : आमदनी से अधिक खर्चा होगा और आपका मन खिन्न रहने वाला है। इस समय महिला जातक अपनी मां के साथ कहीं बाहर घूमने जा सकती है। इस समय व्यापार से जुड़े जातकों को सलाह दी जाती है कि वो आर्थिक लेनदेन में सावधानी रखे। सरकार के साथ जुड़कर काम कर रहे जातक अब उच्च अधिकारियो का सहयोग प्राप्त करेंगे। कार्य स्थल पर महिला सहकर्मी मददगार सिद्ध होगी।&nbsp;&nbsp;


जून : इस माह कई समय से अटका आपका प्रेम प्रस्ताव मंजूर किया जा सकता है। छात्रों का मन इस समय पढाई में कम लगने वाला है। इस माह मीडिया,लेखन,प्रकाशन से जुड़े जातक बेहद अच्छा काम करेंगे और उन्हें सराहना भी प्राप्ति होगी। अगर आप सरकारी नौकरी करते है तो आपको इस माह सम्मानित भी किया जा सकता है। इस समय नौकरी बदलने का विचार मन में आ सकता है लेकिन समय ठीक नहीं है इसलिए जो नौकरी चल रही है वही चलने दें।


जुलाई : शेयर मार्केट में अच्छा मुनाफा होने वाला है। इस समय आप अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल होंगे। इस समय आपको क्रोध और अहंकार से बचना होगा। इस माह आपकी बहन से आपको मदद मिलेगी और आपका कोई अटका काम पूरा होगा। किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है।


अगस्त : पारिवारिक सुख की प्राप्ति होने वाली है। इस समय नौकरी कर रहे जातकों को अच्छी नौकरी का ऑफर आ सकता है और आप जॉब बदल सकते है। इस समय विदेश यात्रा सहायक सिद्ध होगी। इस समय आपके व्यापार में वृद्धि होगी।


सितम्बर : अगर आप साझेदारी में काम कर रहे हैं तो आपके और आपके पार्टनर के बीच मतभेद सामने आ सकते हैं। आपको वाणी का इस्तेमाल सोच समझकर करना होगा। कार्य स्थल पर आपको लड़ाई और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है।


अक्टूबर : इस माह आपके दुर्घटना के योग दिखाई पड़ रहे है। आपको अपने व्यक्तिगत जीवन में थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। आपके और आपके जीवनसाथी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है वही संतान पक्ष से भी चिंता बनी रहेगी। इस माह शेयर मार्केट में सोच समझकर निवेश करने की सलाह आपको दी जाती है


नवम्बर : इस माह सरकारी नौकरी कर रहे जातकों को बेहद शुभ परिणाम प्राप्त होने वाले हैं। इस समय प्रेमी जोड़े विवाह करने का निर्णय ले सकते है। इस माह सरकार के साथ काम कर रहे जातकों को बेहद शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते है। आपकी वाणी के प्रभाव से आपके कार्य सिद्ध होंगे और वाणी की मधुरता सबको प्रभावित करेगी।


दिसम्बर : आपको आपके कार्य स्थल पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस माह आपका उत्साह चरम पर रहने वाला है। व्यापारी वर्ग को इस माह समुद्री यात्राए करने का मौका मिलने वाला है। काम के सिलसिले में की गई यात्राओं से धन और प्रसिद्धि दोनों प्राप्त होगा। जो अपने कारोबार को विदेश तक ले जाना चाहते है उनको सफलता मिलने वाली है।
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]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जनवरी : </strong>इस माह आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। धन संचय में कठिनाई होगी वही आपकी वाणी में थोड़ा रूखापन आ सकता है। इस समय की गई यात्राएं लाभदायक होगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>फरवरी :</strong> ये माह आपके लिए जबरदस्त सफलता लेकर के आने वाला है। इस माह आपको कार्यस्थल पर सम्मानित भी किया जा सकता है। यह माह स्त्री जातकों के लिए शानदार रहने वाला है वही कारोबारी जातकों को नए लोगों से मिलकर काम को आगे बढ़ाने का मौका मिलने वाला है। इस माह आप अपने परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर भी जा सकते है</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मार्च : </strong>इस समय नौकरी की तलाश में जुटे जातकों को अच्छी नौकरी मिलेगी। सरकारी कार्य से जुड़े जातकों को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विदेश जाने का सपना पूरा हो सकता है। इस माह आपको अपने पिता का सहयोग प्राप्त होगा। अगर आपको मधुमेह या रक्त विकार है तो आपको सेहत का ध्यान रखना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अप्रैल :</strong> जनसंचार से जुड़े जातकों को फायदा होने वाला है। सिनेमा जगत में काम कर रहे जातक इस समय प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। आमदनी से अधिक खर्चा होगा और आपका मन खिन्न रहने वाला है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मई : </strong>आमदनी से अधिक खर्चा होगा और आपका मन खिन्न रहने वाला है। इस समय महिला जातक अपनी मां के साथ कहीं बाहर घूमने जा सकती है। इस समय व्यापार से जुड़े जातकों को सलाह दी जाती है कि वो आर्थिक लेनदेन में सावधानी रखे। सरकार के साथ जुड़कर काम कर रहे जातक अब उच्च अधिकारियो का सहयोग प्राप्त करेंगे। कार्य स्थल पर महिला सहकर्मी मददगार सिद्ध होगी।&nbsp;&nbsp;</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जून : </strong>इस माह कई समय से अटका आपका प्रेम प्रस्ताव मंजूर किया जा सकता है। छात्रों का मन इस समय पढाई में कम लगने वाला है। इस माह मीडिया,लेखन,प्रकाशन से जुड़े जातक बेहद अच्छा काम करेंगे और उन्हें सराहना भी प्राप्ति होगी। अगर आप सरकारी नौकरी करते है तो आपको इस माह सम्मानित भी किया जा सकता है। इस समय नौकरी बदलने का विचार मन में आ सकता है लेकिन समय ठीक नहीं है इसलिए जो नौकरी चल रही है वही चलने दें।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जुलाई : </strong>शेयर मार्केट में अच्छा मुनाफा होने वाला है। इस समय आप अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल होंगे। इस समय आपको क्रोध और अहंकार से बचना होगा। इस माह आपकी बहन से आपको मदद मिलेगी और आपका कोई अटका काम पूरा होगा। किसी कोर्ट केस का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अगस्त :</strong> पारिवारिक सुख की प्राप्ति होने वाली है। इस समय नौकरी कर रहे जातकों को अच्छी नौकरी का ऑफर आ सकता है और आप जॉब बदल सकते है। इस समय विदेश यात्रा सहायक सिद्ध होगी। इस समय आपके व्यापार में वृद्धि होगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सितम्बर :</strong> अगर आप साझेदारी में काम कर रहे हैं तो आपके और आपके पार्टनर के बीच मतभेद सामने आ सकते हैं। आपको वाणी का इस्तेमाल सोच समझकर करना होगा। कार्य स्थल पर आपको लड़ाई और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अक्टूबर :</strong> इस माह आपके दुर्घटना के योग दिखाई पड़ रहे है। आपको अपने व्यक्तिगत जीवन में थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। आपके और आपके जीवनसाथी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है वही संतान पक्ष से भी चिंता बनी रहेगी। इस माह शेयर मार्केट में सोच समझकर निवेश करने की सलाह आपको दी जाती है</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवम्बर :</strong> इस माह सरकारी नौकरी कर रहे जातकों को बेहद शुभ परिणाम प्राप्त होने वाले हैं। इस समय प्रेमी जोड़े विवाह करने का निर्णय ले सकते है। इस माह सरकार के साथ काम कर रहे जातकों को बेहद शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते है। आपकी वाणी के प्रभाव से आपके कार्य सिद्ध होंगे और वाणी की मधुरता सबको प्रभावित करेगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दिसम्बर : </strong>आपको आपके कार्य स्थल पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस माह आपका उत्साह चरम पर रहने वाला है। व्यापारी वर्ग को इस माह समुद्री यात्राए करने का मौका मिलने वाला है। काम के सिलसिले में की गई यात्राओं से धन और प्रसिद्धि दोनों प्राप्त होगा। जो अपने कारोबार को विदेश तक ले जाना चाहते है उनको सफलता मिलने वाली है।<br />
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Know how this year will be for the people of Pisces]]></media:description>
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                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-aquarius]]></guid>
                       <title><![CDATA[जानिए कुंभ राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा ये साल  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-aquarius]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 01 Jan 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[जनवरी : इस समय आपको अति उत्साह में कोई गलत काम नहीं करना है। आपको यात्राओं से लाभ मिलेगा। कार्य स्थल पर आपकी जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है। परिवार में कोई मांगलिक कार्य हो सकता है।


फरवरी : यह समय जीवन के किसी नए प्रेमी के आगमन का भी संकेत दे रहा है। इस माह आपको आपके परिवार से कोई बड़ी मदद मिल सकती है। ये माह बड़े निवेश के रास्ते खोलेगा।


मार्च : शिक्षा ग्रहण कर रहे जातक अध्ययन में अपना समय अच्छे से दे पाएंगे वहीं शेयर बाजार में काम कर रहे जातकों को मुनाफा होगा। इस समय कारोबारी वर्ग से जुड़े लोगों को विदेश जाने का मौका मिल सकता है। इस माह आपको किसी समुद्री यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा।


अप्रैल : इस माह आपको अपने वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होगी। जो जातक विवाह की प्रतीक्षा कर रहे है उन्हें इस माह खुशखबरी मिल सकती है। आप इस माह पारिवारिक सुख सुविधा पर धन खर्च करेंगे। इस माह आपको अपनी मां की ओर से कोई नया काम शुरू करने के लिए मदद मिल सकती है। इस माह स्त्री जातकों को भाइयों का सहयोग मिलेगा जिससे आपका मन प्रसन्न होगा।


मई : आपके काम की कार्यस्थल पर सराहना होगी। इस माह आप अपनी मां की सेहत को लेकर थोड़ा सा परेशान हो सकते हैं। इस माह किसी भी प्रकार के विवाद से दूर ही रहे तो अच्छा है। किसी सिद्ध पुरुष से मुलाकात हो सकती है।


जून : आपको स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना होगा। इस समय मौसमी बीमारी से आपका सामना हो सकता है। जो हृदय रोगी है उन्हें नियमित चेकअप करवाने की सलाह दी जाती है। आप अपनी वाणी से किसी का कोई नुकसान न करें।


जुलाई : आपको वैवाहिक जीवन में कुछ कठिनाई आ सकती है। इस समय अगर आप साझेदारी में काम करने की सोच रहे है तो समय अनुचित है। इस समय आपको अपने व्यापार में कुछ कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।


अगस्त : आप अपने पिता की सेहत को लेकर परेशान रह सकते हैं। इस माह मीडिया,लेखन और जनसंचार से जुड़े जातक प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। जो लोग अपनी खुद की कोई किताब लिखना चाह रहे है उनके लिए अब अनुकूल समय है। शेयर मार्केट से जुड़े जातकों को सलाह दी जाती है कि वो अधिक धन के निवेश से खुद को बचाएं। इस माह आप वाहन थोड़ा सावधानी से चलाए।

सितम्बर : इस माह किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन न करें। आप अगर विवाहित है तो ससुराल पक्ष से तनाव संभव है। शिक्षक वर्ग के लिए ये माह बेहद अच्छा रहने वाला है। सरकार के साथ जो काम कर रहे है उन्हें लापरवाही से बचना होगा।


अक्टूबर : अनावश्यक कार्य में धन खर्च होता हुआ दिखाई दे रहा है हालांकि आपकी नौकरी में उन्नति होगी और अब आपके शत्रु भी खत्म होंगे। कार्यस्थल पर आप किसी पर अधिक यकीन नहीं करे तो ही अच्छा है। उच्च शिक्षा के लिए आप विदेश जा सकते हैं।


नवंबर : इस माह में कुंभ राशि के जातक यात्राओं से लाभ अर्जित करने वाले होंगे। आपको कोई बड़ा प्रोजेक्ट लीड करने के लिए कहा जा सकता है जिसमें आप पूरी तरह सफल होंगे। इस माह आपके उच्च अधिकारी आपसे पूरी तरह प्रसन्न रहने वाले है।


दिसम्बर : आपको परिवार की किसी महिला से बड़ा लाभ मिलेगा। काफी समय से अगर आप किसी वाहन को खरीदना चाहते थे तो वो सपना इस माह आपका पूरा हो सकता है। इस माह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातक सफलता मिलने से उत्साहित होंगे।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जनवरी : </strong>इस समय आपको अति उत्साह में कोई गलत काम नहीं करना है। आपको यात्राओं से लाभ मिलेगा। कार्य स्थल पर आपकी जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है। परिवार में कोई मांगलिक कार्य हो सकता है।</span></p>

<hr />
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>फरवरी :</strong> यह समय जीवन के किसी नए प्रेमी के आगमन का भी संकेत दे रहा है। इस माह आपको आपके परिवार से कोई बड़ी मदद मिल सकती है। ये माह बड़े निवेश के रास्ते खोलेगा।</span></p>

<hr />
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मार्च :</strong> शिक्षा ग्रहण कर रहे जातक अध्ययन में अपना समय अच्छे से दे पाएंगे वहीं शेयर बाजार में काम कर रहे जातकों को मुनाफा होगा। इस समय कारोबारी वर्ग से जुड़े लोगों को विदेश जाने का मौका मिल सकता है। इस माह आपको किसी समुद्री यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अप्रैल : </strong>इस माह आपको अपने वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होगी। जो जातक विवाह की प्रतीक्षा कर रहे है उन्हें इस माह खुशखबरी मिल सकती है। आप इस माह पारिवारिक सुख सुविधा पर धन खर्च करेंगे। इस माह आपको अपनी मां की ओर से कोई नया काम शुरू करने के लिए मदद मिल सकती है। इस माह स्त्री जातकों को भाइयों का सहयोग मिलेगा जिससे आपका मन प्रसन्न होगा।</span></p>

<hr />
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मई : </strong>आपके काम की कार्यस्थल पर सराहना होगी। इस माह आप अपनी मां की सेहत को लेकर थोड़ा सा परेशान हो सकते हैं। इस माह किसी भी प्रकार के विवाद से दूर ही रहे तो अच्छा है। किसी सिद्ध पुरुष से मुलाकात हो सकती है।</span></p>

<hr />
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जून : </strong>आपको स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना होगा। इस समय मौसमी बीमारी से आपका सामना हो सकता है। जो हृदय रोगी है उन्हें नियमित चेकअप करवाने की सलाह दी जाती है। आप अपनी वाणी से किसी का कोई नुकसान न करें।</span></p>

<hr />
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जुलाई : </strong>आपको वैवाहिक जीवन में कुछ कठिनाई आ सकती है। इस समय अगर आप साझेदारी में काम करने की सोच रहे है तो समय अनुचित है। इस समय आपको अपने व्यापार में कुछ कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अगस्त : </strong>आप अपने पिता की सेहत को लेकर परेशान रह सकते हैं। इस माह मीडिया,लेखन और जनसंचार से जुड़े जातक प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे। जो लोग अपनी खुद की कोई किताब लिखना चाह रहे है उनके लिए अब अनुकूल समय है। शेयर मार्केट से जुड़े जातकों को सलाह दी जाती है कि वो अधिक धन के निवेश से खुद को बचाएं। इस माह आप वाहन थोड़ा सावधानी से चलाए।</span></p>

<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सितम्बर :</strong> इस माह किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन न करें। आप अगर विवाहित है तो ससुराल पक्ष से तनाव संभव है। शिक्षक वर्ग के लिए ये माह बेहद अच्छा रहने वाला है। सरकार के साथ जो काम कर रहे है उन्हें लापरवाही से बचना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अक्टूबर : </strong>अनावश्यक कार्य में धन खर्च होता हुआ दिखाई दे रहा है हालांकि आपकी नौकरी में उन्नति होगी और अब आपके शत्रु भी खत्म होंगे। कार्यस्थल पर आप किसी पर अधिक यकीन नहीं करे तो ही अच्छा है। उच्च शिक्षा के लिए आप विदेश जा सकते हैं।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवंबर : </strong>इस माह में कुंभ राशि के जातक यात्राओं से लाभ अर्जित करने वाले होंगे। आपको कोई बड़ा प्रोजेक्ट लीड करने के लिए कहा जा सकता है जिसमें आप पूरी तरह सफल होंगे। इस माह आपके उच्च अधिकारी आपसे पूरी तरह प्रसन्न रहने वाले है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दिसम्बर :</strong> आपको परिवार की किसी महिला से बड़ा लाभ मिलेगा। काफी समय से अगर आप किसी वाहन को खरीदना चाहते थे तो वो सपना इस माह आपका पूरा हो सकता है। इस माह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातक सफलता मिलने से उत्साहित होंगे।</span></p>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Know how this year will be for the people of Aquarius]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-capricorn]]></guid>
                       <title><![CDATA[जानिए मकर राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा ये साल  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-the-people-of-capricorn]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 01 Jan 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[जनवरी&nbsp;: आपके भाग्य में वृद्धि के योग है। इस समय साल की शुरुआत में ही किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। इस माह आप एक से अधिक कार्यों को एक साथ सम्पादित करने में सक्षम होंगे वही आपको काम के सिलसिले में कुछ यात्रा भी करनी होगी।


फरवरी : स्वास्थ्य से जुड़े अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे वही रुके हुए कामों में थोड़ी गति भी आएगी। नौकरी में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिलने वाला है। ऐसा भी हो सकता है कि आपको एक अच्छी नौकरी का प्रस्ताव आ जाए।


मार्च : इस समय आपको कार्य स्थल पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है जिसे आप बखूबी निभाने में सक्षम होंगे। इस माह आप किसी भवन या वाहन को खरीदने में रूचि दिखा सकते है। आपके परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन भी हो सकता है।


अप्रैल : इस समय आप अपने पिता की सेहत को लेकर भी थोड़ा परेशान रहने वाले है। इस समय जो जातक हृदय रोग से पीड़ित है उन्हें अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा। विदेश जाने का मौका मिल सकता है।


मई : इस समय आपको अपने जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखना होगा। अपने और अपने प्रेमी के बीच किसी गलतफहमी को पैदा नहीं होने दे वरना भविष्य में रिश्ता खत्म हो सकता है। इस माह जो छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाह रहे है उनका सपना पूरा हो सकता है। इस माह स्त्री जातकों को काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ सकता है।


जून : सरकारी लाभ प्राप्त होने के योग दिखाई दे रहे है। इस माह थोड़ा धन संचय में कठिनाई आ सकती है। इस माह आपको अपनी वाणी में कटुता से बचना होगा। व्यापारी वर्ग को नए आर्डर मिलेंगे और काम बढ़िया चलेगा।


जुलाई : पिता का सहयोग प्राप्त होगा। इस माह आपकी लम्बी दूरी की यात्राओं के योग दिखाई दे रहे है। इस माह भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।&nbsp; वही आपके कार्यस्थल पर आपको पदोन्नति भी मिल सकती है। इस माह आप अगर किसी कंपनी में निवेश करना चाह रहे है तो बढ़िया समय होगा।


अगस्त : आपको हड्डियों और नसों से जुडी कोई बीमारी हो सकती है। इस माह आपका साहस और पराक्रम बढ़ा हुआ रहेगा। इस समय आपके स्वभाव में अहंकार की अधिकता हो सकती है। इस माह आप वाहन सावधानी से चलाए। इस माह शोध कार्य में जुड़े जातक अच्छे परिणाम प्राप्त करेंगे।&nbsp;&nbsp;


सितम्बर : आपको सरकार से कोई बड़ा आर्डर मिल सकता है। इस समय विवाहित जातकों के घर में नए सदस्य का आगमन हो सकता है। इस माह आपकी पत्नी की ओर से आपको कोई अच्छा तोहफा मिल सकता है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को कुछ कठिनाई और बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इस माह मौसमी बीमारी से खुद को बचाकर रखना होगा।


अक्टूबर : ये माह आपके लिए कार्य स्थल पर बढ़िया सफलता लेकर आने वाला है। इस समय आपको किसी विदेश यात्रा पर जाने का भी मौका मिलेगा। इस समय उच्च शिक्षा के लिए आपको कहीं से मदद भी मिल सकती है।


नवंबर : आपको वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपको बड़े सरकारी काम मिलेंगे वही कार्य स्थल पर आपके सहकर्मी मददगार साबित होंगे। इस समय किसी बड़े भवन की प्राप्ति के संकेत दिखाई दे रहे है। इस माह आपको शेयर मार्किट से भी अच्छा मुनाफा होने के योग दिखाई दे रहे है।


दिसम्बर : आपके परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन किया जा सकता है। आपको इस समय किसी संस्था के द्वारा सम्मानित किया जा सकता है। जो जातक विदेश जाकर कारोबार बढ़ाने की सोच रहे है उनका काम होगा। इस समय आपकी किसी महिला सहकर्मी के साथ निकटता बढ़ सकती है।
]]></description>
                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जनवरी&nbsp;: </strong>आपके भाग्य में वृद्धि के योग है। इस समय साल की शुरुआत में ही किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। इस माह आप एक से अधिक कार्यों को एक साथ सम्पादित करने में सक्षम होंगे वही आपको काम के सिलसिले में कुछ यात्रा भी करनी होगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>फरवरी : </strong>स्वास्थ्य से जुड़े अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे वही रुके हुए कामों में थोड़ी गति भी आएगी। नौकरी में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिलने वाला है। ऐसा भी हो सकता है कि आपको एक अच्छी नौकरी का प्रस्ताव आ जाए।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मार्च :</strong> इस समय आपको कार्य स्थल पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है जिसे आप बखूबी निभाने में सक्षम होंगे। इस माह आप किसी भवन या वाहन को खरीदने में रूचि दिखा सकते है। आपके परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन भी हो सकता है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अप्रैल :</strong> इस समय आप अपने पिता की सेहत को लेकर भी थोड़ा परेशान रहने वाले है। इस समय जो जातक हृदय रोग से पीड़ित है उन्हें अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा। विदेश जाने का मौका मिल सकता है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मई : </strong>इस समय आपको अपने जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखना होगा। अपने और अपने प्रेमी के बीच किसी गलतफहमी को पैदा नहीं होने दे वरना भविष्य में रिश्ता खत्म हो सकता है। इस माह जो छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाह रहे है उनका सपना पूरा हो सकता है। इस माह स्त्री जातकों को काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ सकता है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जून :</strong> सरकारी लाभ प्राप्त होने के योग दिखाई दे रहे है। इस माह थोड़ा धन संचय में कठिनाई आ सकती है। इस माह आपको अपनी वाणी में कटुता से बचना होगा। व्यापारी वर्ग को नए आर्डर मिलेंगे और काम बढ़िया चलेगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जुलाई : </strong>पिता का सहयोग प्राप्त होगा। इस माह आपकी लम्बी दूरी की यात्राओं के योग दिखाई दे रहे है। इस माह भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।&nbsp; वही आपके कार्यस्थल पर आपको पदोन्नति भी मिल सकती है। इस माह आप अगर किसी कंपनी में निवेश करना चाह रहे है तो बढ़िया समय होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अगस्त :</strong> आपको हड्डियों और नसों से जुडी कोई बीमारी हो सकती है। इस माह आपका साहस और पराक्रम बढ़ा हुआ रहेगा। इस समय आपके स्वभाव में अहंकार की अधिकता हो सकती है। इस माह आप वाहन सावधानी से चलाए। इस माह शोध कार्य में जुड़े जातक अच्छे परिणाम प्राप्त करेंगे।&nbsp;&nbsp;</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सितम्बर : </strong>आपको सरकार से कोई बड़ा आर्डर मिल सकता है। इस समय विवाहित जातकों के घर में नए सदस्य का आगमन हो सकता है। इस माह आपकी पत्नी की ओर से आपको कोई अच्छा तोहफा मिल सकता है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को कुछ कठिनाई और बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इस माह मौसमी बीमारी से खुद को बचाकर रखना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अक्टूबर : </strong>ये माह आपके लिए कार्य स्थल पर बढ़िया सफलता लेकर आने वाला है। इस समय आपको किसी विदेश यात्रा पर जाने का भी मौका मिलेगा। इस समय उच्च शिक्षा के लिए आपको कहीं से मदद भी मिल सकती है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवंबर : </strong>आपको वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपको बड़े सरकारी काम मिलेंगे वही कार्य स्थल पर आपके सहकर्मी मददगार साबित होंगे। इस समय किसी बड़े भवन की प्राप्ति के संकेत दिखाई दे रहे है। इस माह आपको शेयर मार्किट से भी अच्छा मुनाफा होने के योग दिखाई दे रहे है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दिसम्बर : </strong>आपके परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन किया जा सकता है। आपको इस समय किसी संस्था के द्वारा सम्मानित किया जा सकता है। जो जातक विदेश जाकर कारोबार बढ़ाने की सोच रहे है उनका काम होगा। इस समय आपकी किसी महिला सहकर्मी के साथ निकटता बढ़ सकती है।</span></p>
]]></content:encoded>
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                <media:description type="plain"><![CDATA[Know how this year will be for the people of Capricorn]]></media:description>
                </media:content>   
                </item><item>
                       <guid isPermaLink="true"><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-scorpio-people]]></guid>
                       <title><![CDATA[जानिए वृश्चिक राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा ये साल  ]]></title>
                       <link><![CDATA[https://www.firstverdict.com/astrology/know-how-this-year-will-be-for-scorpio-people]]></link>
                       <pubDate><![CDATA[Sun, 01 Jan 2023 00:00:00 +0530]]></pubDate>
                       <description><![CDATA[जनवरी : आपके दांपत्य जीवन में कुछ तनाव बना रह सकता है। इस समय आपको अपनी पत्नी की भावनाओं की कद्र करनी होगी। भाइयों का सहयोग और यात्राओं से लाभ होगा। शोध कर्म में जुटे हुए छात्रों को नए आविष्कार के लिए प्रेरित भी करेगा।


फरवरी : नौकरी बदलने का विचार मन में जा सकता है। इस समय आपको उन्नति नहीं मिलने से तनाव बना रह सकता है। शेयर मार्केट से जुड़े जातक धन संचय करने में सफल होंगे वही सरकारी सेवा से जुड़े लोगों को थोड़ी मेहनत अधिक करनी होगी।


मार्च : इस समय आपको अपने धन संचय पर काम करना होगा क्योंकि पारिवारिक खर्च के कारण थोड़ी जेब ढीली हो सकती है। किसी महिला मित्र से थोड़ी अनबन हो सकती है। इस समय आपके घर में नए मेहमान का आगमन हो सकता है। विद्यार्थी वर्ग को इस समय अच्छी सफलता मिलने के योग दिखाई पड़ रहे है।


अप्रैल : मन्त्र सिद्धि में लगे हुए जातकों को देवताओं की कृपा प्राप्त होगी। धार्मिक यात्रा का योग दिखाई पड़ रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि इस समय आप किसी दार्शनिक से जुड़कर जीवन को एक अलग नज़रिये से देखने लग जाए। कार्य स्थल पर अब चीजें आपके अनुकूल होगी वही उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की बाट जोह रहे जातकों को अब सफलता मिलती हुई दिखाई पड़ रही है। हालांकि अपने स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना होगा।


मई :&nbsp;आपको अटके कामों में गति आने की संभावना बन रही है। अपने काफी समय से जो काम सोचा हुआ था वो काम अब किसी महिला की मदद से होगा। इस समय आपको जितना हो सके अपने पिता और गुरुओं की सेवा करनी होगी। इस समय जो स्टार्टअप विदेशी फंडिंग की योजना बना रहे है उन्हें सफलता मिलेगी।


जून : आप अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताने वाले हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आप अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमने चले जाए। इस समय संतान की उपलब्धि पर गर्व हो सकता है। आपको कार्य स्थल पर थोड़ी कठिनाई महसूस हो सकती है।


जुलाई : जुलाई माह आपके करियर के लिए बेहद ही अच्छा रहेगा। आपको ना सिर्फ तरक्की मिलेगी बल्कि आपको नई जिम्मेदारी मिलेगी। परिवार में बेवजह कोई विवाद हो सकता है। आपको हर छोटी बात पर अधिक सोचना बंद करना होगा।


अगस्त : इस समय इंजीनियरिंग कर रहे जातकों को किसी आविष्कार के लिए सम्मानित भी किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को इस समय कोई अच्छी खबर मिल सकती है। इस समय काम के सिलसिले में की गई यात्राएं सफल होगी। इस माह आपको वाहन सुख की प्राप्ति हो सकती है।


सितम्बर : जो छात्र शोध कार्य में लगे है उन्हें सफलता मिलेगी। इस समय फाइनेंस से जुड़े जातकों के काम को सराहना प्राप्त होगी। अगर आप खिलाड़ी है तो इस समय आपको सम्मानित किया जा सकता है। इस माह आप किसी धार्मिक यात्रा के लिए भी प्रस्थान कर सकते है।


अक्टूबर: इस माह आपके प्रेम संबंधों में खटास आ सकती है। आपको अपने जीवनसाथी की भावनाओं का ख्याल रखकर चलना होगा। इस माह विदेशी यात्रा से लाभ होने की उम्मीद है। अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए आप विदेश जायेंगे और आपकी मन मुताबिक सफलता भी मिलेगी।


नवंबर : ये माह आपके लिए स्वास्थ्य के लिहाज से थोड़ा बेहतर रहने वाला है। आपको समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा।&nbsp; समय पर आप एक अलग प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहने वाले है पर आपको थोड़ा अहंकार से बचना होगा।


दिसम्बर : आपको धन से जुड़े अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। किसी बड़े सरकारी पद पर नियुक्त किया जा सकता है। स्त्री जातकों के लिए यह माह बेहद शुभ रहने वाला है। इस माह बड़ी नौकरी मिलने के योग भी बन रहे है।
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                       <content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जनवरी : </strong>आपके दांपत्य जीवन में कुछ तनाव बना रह सकता है। इस समय आपको अपनी पत्नी की भावनाओं की कद्र करनी होगी। भाइयों का सहयोग और यात्राओं से लाभ होगा। शोध कर्म में जुटे हुए छात्रों को नए आविष्कार के लिए प्रेरित भी करेगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>फरवरी :</strong> नौकरी बदलने का विचार मन में जा सकता है। इस समय आपको उन्नति नहीं मिलने से तनाव बना रह सकता है। शेयर मार्केट से जुड़े जातक धन संचय करने में सफल होंगे वही सरकारी सेवा से जुड़े लोगों को थोड़ी मेहनत अधिक करनी होगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मार्च :</strong> इस समय आपको अपने धन संचय पर काम करना होगा क्योंकि पारिवारिक खर्च के कारण थोड़ी जेब ढीली हो सकती है। किसी महिला मित्र से थोड़ी अनबन हो सकती है। इस समय आपके घर में नए मेहमान का आगमन हो सकता है। विद्यार्थी वर्ग को इस समय अच्छी सफलता मिलने के योग दिखाई पड़ रहे है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अप्रैल :</strong> मन्त्र सिद्धि में लगे हुए जातकों को देवताओं की कृपा प्राप्त होगी। धार्मिक यात्रा का योग दिखाई पड़ रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि इस समय आप किसी दार्शनिक से जुड़कर जीवन को एक अलग नज़रिये से देखने लग जाए। कार्य स्थल पर अब चीजें आपके अनुकूल होगी वही उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की बाट जोह रहे जातकों को अब सफलता मिलती हुई दिखाई पड़ रही है। हालांकि अपने स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>मई :&nbsp;</strong>आपको अटके कामों में गति आने की संभावना बन रही है। अपने काफी समय से जो काम सोचा हुआ था वो काम अब किसी महिला की मदद से होगा। इस समय आपको जितना हो सके अपने पिता और गुरुओं की सेवा करनी होगी। इस समय जो स्टार्टअप विदेशी फंडिंग की योजना बना रहे है उन्हें सफलता मिलेगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जून : </strong>आप अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताने वाले हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आप अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कहीं बाहर घूमने चले जाए। इस समय संतान की उपलब्धि पर गर्व हो सकता है। आपको कार्य स्थल पर थोड़ी कठिनाई महसूस हो सकती है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>जुलाई : </strong>जुलाई माह आपके करियर के लिए बेहद ही अच्छा रहेगा। आपको ना सिर्फ तरक्की मिलेगी बल्कि आपको नई जिम्मेदारी मिलेगी। परिवार में बेवजह कोई विवाद हो सकता है। आपको हर छोटी बात पर अधिक सोचना बंद करना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अगस्त : </strong>इस समय इंजीनियरिंग कर रहे जातकों को किसी आविष्कार के लिए सम्मानित भी किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को इस समय कोई अच्छी खबर मिल सकती है। इस समय काम के सिलसिले में की गई यात्राएं सफल होगी। इस माह आपको वाहन सुख की प्राप्ति हो सकती है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>सितम्बर : </strong>जो छात्र शोध कार्य में लगे है उन्हें सफलता मिलेगी। इस समय फाइनेंस से जुड़े जातकों के काम को सराहना प्राप्त होगी। अगर आप खिलाड़ी है तो इस समय आपको सम्मानित किया जा सकता है। इस माह आप किसी धार्मिक यात्रा के लिए भी प्रस्थान कर सकते है।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>अक्टूबर: </strong>इस माह आपके प्रेम संबंधों में खटास आ सकती है। आपको अपने जीवनसाथी की भावनाओं का ख्याल रखकर चलना होगा। इस माह विदेशी यात्रा से लाभ होने की उम्मीद है। अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए आप विदेश जायेंगे और आपकी मन मुताबिक सफलता भी मिलेगी।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>नवंबर :</strong> ये माह आपके लिए स्वास्थ्य के लिहाज से थोड़ा बेहतर रहने वाला है। आपको समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा।&nbsp; समय पर आप एक अलग प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहने वाले है पर आपको थोड़ा अहंकार से बचना होगा।</span></p>

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<p style="text-align: justify;"><span style="font-size:18px;"><strong>दिसम्बर :</strong> आपको धन से जुड़े अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। किसी बड़े सरकारी पद पर नियुक्त किया जा सकता है। स्त्री जातकों के लिए यह माह बेहद शुभ रहने वाला है। इस माह बड़ी नौकरी मिलने के योग भी बन रहे है।</span></p>
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