डाडासीबा : सरकारी आदेशों की उड़ाई जा रहीं धज्जियां, प्रतिबंध के बाद भी शब्द का हो रहा प्रयोग
अनुसूचित जाति से संबंधित एक शब्द लिखने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध के बाद भी जसवां-परागपुर के कई इलाकों मे सरकारी आदेशों की अवेहलना हो रही है। प्रदेश अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम वर्ष 2023-24 के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र के वर्क कोड सहित योजनाओं के लिए आवंटित धनराशि में प्रतिबंध उक्त जातीय शब्द का विभाग द्वारा बार-बार प्रयोग किया जाना असंवैधानिक व चिंताजनक है। जसवां परागपुर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग जन कल्याण सभा के अध्यक्ष अशोक मेहरा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर इस असंवैधानिक शब्द को हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों की योजनाओं एवं उप योजनाओं से हटाने का निवेदन किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार द्वारा वर्ष 2000 में उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार इस शब्द को पूर्णतय: प्रतिबंधित अथवा वर्जित किया गया है। इसके अतिरिक्त सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा देश के सभी मुख्य सचिवों को भेजे पत्रों में इस जातीय शब्द के प्रयोग करने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की बात कही है, लेकिन मंत्रालय अपने ही आदेशों की अवहेलना करते हुए विधानसभा क्षेत्र को सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं में इसके नाम से राशि आवंटित कर रहा है। इस कारण अनुसूचित जाति वर्ग में भारी रोष है।
जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र गांव सांडा में भी लोक निर्माण विभाग के बोर्ड पर प्रतिबंध शब्द बस्ती नाम अंकित है। जसवां परागपुर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग जनकल्याण सभा ने अनुरोध किया है कि इस शब्द को जहां पर भी अंकित किया गया है, वहां से तुरंत हटाया जाए व दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए।
उधर, इस संबंध में कोटला बेहड़ लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अरुण वशिष्ठ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अगर यह शब्द विभाग के बोर्ड पर अंकित है तो इसे शीघ्र हटाया जाएगा।
