सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब बच्चा गोद लेने पर भी मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, मां को पूरे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी। कोर्ट ने उस कानूनी प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें सिर्फ तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मैटरनिटी लीव की अनुमति थी, लेकिन अब ऐसी कोई शर्त नहीं है। मौजूदा समय में यह नियम है कि बच्चा गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव तभी मिलेगी जब गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एक बायोलॉजिकल मां की तरह ही गोद लिए गए बच्चे की मां को भी मैटरनिटी लीव मिलने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि मैटरनिटी का अधिकार और बच्चे की देखभाल की जरूरत उम्र पर निर्भर नहीं करती। कोर्ट ने तीन महीने की उम्र सीमा को हटाते हुए कहा कि ये भेदभाव करता है। कोर्ट ने माना कि बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ इमोशनल तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है। इसके अलावा कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पिताओं की भूमिका पर भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो पितृत्व अवकाश पर भी एक ठोस नीति बनाने पर विचार करे। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी अहम है। इसलिए इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में लाना चाहिए
सोलन जिले के नालागढ़ में दिनदहाड़े फायरिंग की घटना सामने आई है। वार्ड नंबर-2 में एक युवक गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान वार्ड नंबर-2 निवासी आमिर खान के रूप में हुई है। यह घटना दोपहर करीब 12 बजे के आसपास हुई। जानकारी के अनुसार, एक अज्ञात युवक ने आमिर खान पर अचानक गोली चला दी। गोली आमिर खान के दाहिने हाथ में लगी, जबकि उसके कुछ छर्रे पेट में भी घुस गए। गोली गलने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
घटना के तुरंत बाद, आमिर ख़ान को उसके परिजन इलाज के लिए नालागढ़ अस्पताल ले गए। वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उसे PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया। अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गोली लगने का एक केस आया था। घायल की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे तुरंत PGI चंडीगढ़ भेजा गया है।
आरडीजी बंद होने के बाद हिमाचल सरकार भारी आर्थिक संकट से घिरी हुई है। इसी बीच बजट सत्र के दूसरे चरण से एक दिन पहले हिमाचल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सभी कैबिनेट रैंक को खत्म कर दिए है। इसके साथ ही 20 फीसदी वेतन/भत्ते भी 30 सितंबर 2026 तक स्थगित किए गए हैं। अब बोर्ड, निगम और आयोगों के चेयरमैन, वाइस-चेयरमैन, सलाहकारों को मिलने वाली कैबिनेट रैंक सुविधा तुरंत प्रभाव से नहीं मिलेंगी। सरकार ने सभी विभागों के सचिवों को आदेश दिया है कि वो इस फैसले को तुरंत लागू करें। सरकार ने खर्च कम करने और आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में आगे बढ़ने के मद्देनजर यह निर्णय लिया है।
हिमाचल प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार ने विभिन्न बोर्डों, निगमों और सरकारी पदों पर अब तक छह से अधिक व्यक्तियों को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया है। इन कैबिनेट रैंक धारकों पर सरकार सालाना लाखों रुपये खर्च कर रही है। ये नियुक्तियां मुख्य रूप से राजनीतिक नियुक्तियां हैं जो निगमों/बोर्डों के सुचारू संचालन के लिए की गई हैं। वेतन के साथ इन्हें भत्ते, घर, गाड़ी जैसी दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं। अब केंद्र ने आरडीजी पर कैंची चला दी है। इसके बाद सरकार को केंद्र से मिलने वाली मदद बंद हो गई है। इससे सरकार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और सरकार अपने आर्थिक संसाधन जुटाने का प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए। सरकार 21 मार्च को अपना बजट भी पेश करने जा रही है जिसके लिए कल से सत्र की शुरुआत होगी।
खाड़ी देश के 'पर्शियन गल्फ' में फंसे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कैप्टन रमन कपूर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अमेरिका-इजरायल और इरान युद्ध के कारण 20 हजार नाविकों में दहशत का माहौल है। इनमें करीब 2000 भारतीय नाविक हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण 500 से 700 समुद्री जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कैप्टन रमन ने कहा कि किसी भी शिप पर कभी भी अटैक हो रहा है। स्पेशियली उन शिप पर, जिनका कोई भी लिंक अमेरिका और इजरायल के साथ है, अगर वो मूवमेंट शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि इरान चाहता है कि पर्शियन गल्फ से (भारत और चीन को छोड़कर) अन्य देशों को कोई भी ऑयल टैंकर बाहर न जाए।
कैप्टन रमन ने कहा कि उनका शिप पर्शियन गल्फ में फंसा हुआ है। वह कुछ दिन पहले ही ईराक से कार्गो लोड करके आए हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो बाहर जा सकते हैं और न ही रह सकते हैं। उनके पास शिप में अलर्ट रहने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। एयरपोर्ट और समुद्री रास्ते बंद हैं। कैप्टन कपूर ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन जहाजों को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे सभी जहाज समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं और नाविक लगातार तनाव में हैं, जो लगातार अपने परिवारों से संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। अनिश्चित हालात के बीच नाविकों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र कल यानी 18 मार्च से शुरू हो रहा है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने आज विधानसभा सचिवालय की तैयारियों की जानकारी दी। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू 21 मार्च को अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगे। वे विधानसभा में पेश होने वाले वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियों में जुटे हैं। सोमवार को भी सीएम ने सचिवालय में वित्त और योजना विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें बजट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। यह बजट हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और प्रभावी कदम साबित होगा। बजट तैयार करते समय समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है।
वहीं बजट सत्र के लिए बीजेपी विधायक दल की बैठक आज शाम सात बजे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में होगी। बैठक में बजट सत्र के दौरान आरडीजी कटौती सहित कई मसलों पर प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सदन के भीतर किस तरह से इसका जवाब दिया जाना है, इसकी पूरी रणनीति बीजेपी बैठक में तैयार करेगी। विधानसभा के बजट सत्र में हंगामेदार स्थिति बनने की संभावना है। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार भी सदन में तथ्यों के साथ जवाब देने की रणनीति बना रही है। जाहिर है राज्य पर एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। इस बीच केंद्र ने लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की RDG भी बंद कर दी है। इससे पहले राज्य की लोन लेने की सीमा GDP के मुकाबले 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है। ऐसे में सीएम सुक्खू के सामने बजट भाषण में नई घोषणाएं शामिल करने और चुनावी घोषणा पत्र के वादे पूरे करने की घोषणा बड़ी चुनौती रहने वाली है।
हिमाचल प्रदेश के मध्य और उच्च पर्वतीय आठ जिलों में मंगलवार को भी बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में मौसम साफ रहने की संभावना है। 18-19 मार्च को कुल्लू, कांगड़ा व चंबा में भारी बारिश-बर्फबारी, जबकि चंबा, शिमला व सोलन में अंधड़ के साथ ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 22 तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।
वहीं प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली में बीती रात ताजा बर्फबारी हुई। मनाली शहर में 2 (इंच), मनाली की ऊंचे पहाड़ों पर 5, अटल टनल रोहतांग में 8, रोहतांग दर्रा और शिंकुला में डेढ़ फीट से ज्यादा फ्रेश स्नोफॉल हुआ। बर्फबारी के बाद पहाड़ों पर सड़कें जोखिमभरी हो गई है। बर्फ जमने के बाद गाड़ियां फिसलने से हादसे हो रहे हैं। इसे देखते हुए टूरिस्ट समेत लोकल लोगों को सावधानी से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। राज्य में बीते तीन दिन से हो रही बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहाड़ों पर इससे मार्च में जनवरी जैसी ठंड लौट आई है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 7.2 डिग्री सेल्सियस नीचे और न्यूनतम तापमान नॉर्मल से 0.6 डिग्री नीचे लुढ़क चुका है। 3 शहरों का न्यूनतम तापमान माइनस में और चंबा का अधिकतम तापमान में 16 डिग्री की गिरावट के बाद 11.2 डिग्री सेल्सियस रह गया है। राज्य का औसत अधिकतम तापमान भी सामान्य से 7.2 डिग्री नीचे चला गया है।
मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के चार जिलें चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में आज भी आंधी व तूफान का यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चलने का पूर्वानुमान है। इस दौरान अन्य जिलों के मध्यम ऊंचाई वाले भागों में हल्की बारिश व ऊंचे पहाड़ों पर हिमपात हो सकता है। IMD के अनुसार- प्रदेश में बारिश और बर्फबारी का दौर अगले छह दिन तक जारी रहेगा। अधिक ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश की संभावना है। विभाग के मुताबिक 18 से 20 मार्च के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में फिर से भारी बारिश और बर्फबारी होगी। इस दौरान कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि का कहर भी देखने को मिलेगा। 21 और 22 मार्च को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन हल्की बारिश और बर्फबारी जारी रहेगी।
हिमाचल में रविवार को 64 नई पंचायतों का गठन किया गया। इसके साथ ही हिमाचल में अब पंचायतों की संख्या 3,773 हो गई है। पहले प्रदेश में 3,577 पंचायतें थी। सरकार ने 196 नई पंचायतें बनाई हैं। हिमाचल में अब 3,773 पंचायतों में चुनाव होगा। प्रदेश सरकार का दावा है कि अब नई पंचायतें नहीं बनेंगी। प्रदेश में 46 पंचायतों का अस्तित्व खत्म हुआ है। इन्हें नगर पंचायतों में मिलाया गया। नई पंचायतों के गठन के साथ ही रविवार को उपायुक्तों को वार्डों के पुनर्सीमांकन के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
उपायुक्तों को 3 दिन के भीतर पुनर्सीमांकन का कार्य खत्म करने के निर्देश दिए गए है। इसका बाद रोस्टर पर काम होगा। 25 मार्च तक उपायुक्तों को अपने अपने जिले के रोस्टर जारी करने है। इसमें जिला परिषद, पंचायत समिति, पंचायत प्रधान और वार्ड सदस्यों के पदों के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। रोस्टर जारी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से पंचायत चुनाव की तैयारियां और तेज हो जाएंगी। हालांकि, विभाग की ओर से पंचायत चुनावों से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज 31 मार्च से पहले राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिए जाएं। इसके बाद आयोग चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
प्रदेश में पंचायतों की संख्या 3773 हुई है। पहले प्रदेश सरकार ने 4 पंचायतें, फिर 39 पंचायतें गठित की। अब सरकार 64 नई पंचायतों को गठित किया है। हालांकि विभाग की ओर से इन पंचायतों के गठन को लेकर जनता से आपत्ति और सुझाव मांगे गए थे। कुछ आपत्तियां आई, इनका निपटारा किया गया। 64 नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। हिमाचल में अब 3,773 पंचायतों की संख्या हो गई है। अब इन पंचायतों में ही चुनाव होना है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए।
होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है।
क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।
भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।
आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।
आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।
पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।
आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।
आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।
पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।
एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में आज मैच होने वाला है। भारत-पाकिस्तान के बीच मैच का मुकाबला हमेशा से रोमांचक रहा है। इसे देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता था। लेकिन इस बार इस मैच को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोग भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर गुस्से में है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस मैच का जोरो से बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी इस मैच पर कड़ा विरोध जताया है। अब तो भाजपा के कई सहयोगी भी इस मैच के विरोध में हैं। हालांकि क्रिकेट फैंस इसे लेकर अलग बंटे हुए हैं। इस मैच का कहीं विरोध किया जा रहा है, तो कहीं टीम इंडिया की जीत के लिए पूजा भी हो रही है।
नई खेल नीति के मुताबिक
सरकार की नई खेल नीति के मुताबिक भारत ने फैसला किया है भारत पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय मैच नहीं खेलेगा पर बहुपक्षीय टूर्नामेंट जैसे कि एशिया कप या ICC प्रतियोगिता में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।
विरोध की वजह
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला इंटरनेशनल मैच है। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय मरे थे और कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे पकिस्तान का हाथ है। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर किया। इसी वजह से भारत के लोगों में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी और गुस्सा है।
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने किया प्रदर्शन
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या मैच से कमाया जाने वाला मुनाफ़ा पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों की जान से ज्यादा कीमती है। अहमदाबाद में AIMIM ने भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ प्रदर्शन किया।
AAP कार्यकर्ताओं ने किया बहिष्कार
चंडीगढ़ में AAP कार्यकर्ताओं ने भी 'BCCI शर्म करो' के नारे लगाए
शिंदे शिवसेना नेता ने किया विरोध
शिंदे शिवसेना के नेता संजय निरूपम ने इस मैच के विरोध में कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को क्षति पहुंचाने वाली नीति अपनाई है, पाकिस्तान ने आतंकियों को पाला पोषा है और इन आतंकियों ने भारत के निर्दोष लोगों पर हमले किए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए।
शिवसेना उद्धव गुट ने मैच के विरोध में तोड़ डाले टीवी
पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने किया बहिष्कार
पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि वे भारत-पाकिस्तान मैच के साथ पूरे एशिया कप का बहिष्कार कर रहे हैं हूं। उन्होंने कहा कि पुलवामा, पहलगाम, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों को भुलाया नहीं जा सकता।
पीड़ित परिवारों ने जाहिर किया गुस्सा
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि यह मैच नहीं होना चाहिए था। यह बहुत ही शर्मनाक है। अभी हाल में पहलगाम हमला हुआ और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। तो इसके बाद यह मैच नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा यह भी कहा कि इन्हें परवाह नहीं कि कोई मर गया।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही देवताओं की भूमि है जहाँ प्रत्येक पर्वत, प्रत्येक घाटी और प्रत्येक गाँव में देवताओं की समृद्ध परंपराएँ आज भी जीवंत हैं। बता दें कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से श्री चालदा महासू सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो चुके है। इतिहास में देवता पहली बार हिमाचल पहुंच रहे है। हिमालयी लोक संस्कृति में महासू देवता न्याय, आस्था और परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। चालदा महासू देवता जिन्हें न्याय का देवता कहा जाता है, जो एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते है। वे भगवान शिव के अंश माने जाते है। चालदा महासू महाराज पालकी में बैठकर पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते है, लोगों की समस्याएं सुनते है, न्याय करते है और अपराधियों को दंड देते है।
विशेषकर जौनसार बावर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला जिले में चालदा महाराज को लेकर लोगों में असीम आस्था है। चालदा महासू को छत्रधारी भी कहा जाता है। चालदा महासू की यात्रा जौनसार बावर, और सिरमौर में एक पर्व के जैसे मनाई जाती है। उनकी वार्षिक प्रवास यात्रा बरवांश कहलाती है जिसमें विशेष पूजा का आयोजन होता है। यात्रा में फाड़का (तांबे का बर्तन) छत्र और पालकी आगे चलती है जिसके पीछे भक्त चलते हैं।
कौन है चालदा महासू देवता:
चालदा महासू चार महासू भाइयों में सबसे छोटे भाई है अन्य तीन भाई बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) भी भगवान शिव के ही रूप माने गए हैं। इनमें बासिक महासू सबसे बड़े हैं, जबकि बौठा महासू, पबासिक महासू दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। बौठा महासू का मंदिर हनोल में, बासिक महासू का मैंद्रथ में और पबासिक महासू का मंदिर बंगाण क्षेत्र के ठडियार व देवती-देववन में है। जबकि, चालदा महासू हमेशा जौनसार-बावर, बंगाण, फतह-पर्वत व हिमाचल क्षेत्र के प्रवास पर रहते हैं।
इनकी पालकी को क्षेत्रीय लोग पूजा-अर्चना के लिए नियमित अंतराल पर एक जगह से दूसरी जगह प्रवास पर ले जाते हैं। देवता के प्रवास पर रहने से कई क्षेत्रों में दशकों बाद चालदा महासू के दर्शन नसीब हो पाते हैं। कुछ इलाकों में तो देवता के दर्शन की चाह में पीढ़ियां गुजर जाती हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, और जुब्बल तक महासू देवता को इष्ट देव (कुल देवता) के रूप में पूजा जाता है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मंदिर को न्यायालय के रूप में मान्यता मिली हुई है।
कहां स्थित है चारों महासू का मुख्य मंदिर:
उत्तराखंड के हनोल में चारों महासू भाइयों का मुख्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मुख्य रूप से बूठिया महासू (बौठा महासू) की पूजा होती है। मैंद्रथ नामक स्थान पर बासिक महासू की पूजा होती है। टोंस नदी के दायें तट पर बंगाण क्षेत्र में स्थित ठडियार (उत्तरकाशी) गांव में पबासिक महासू पूजे जाते हैं। सबसे छोटे भाई चालदा महासू भ्रमणप्रिय देवता हैं, जो कि 12 वर्ष तक उत्तरकाशी और 12 वर्ष तक देहरादून जिले में भ्रमण करते हैं। इनकी एक-एक वर्ष तक अलग-अलग स्थानों पर पूजा होती है, जिनमें हाजा, बिशोई, कोटी कनासर, मशक, उदपाल्टा, मौना आदि पूजा स्थल प्रमुख हैं। महासू के मुख्य धाम हनोल मंदिर में सुबह-शाम नौबत बजती है और दीया-बत्ती की जाती है।
कुछ सप्ताह पहले पहुंच जाता है बकरा:
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चालदा महासू का बकरा कुछ सप्ताह पूर्व ही उस स्थान पर पहुंच जाता जाता है जिस स्थान पर महाराज की अगली देव यात्रा होती है। यह बकरा देवता की इच्छा और संकेत का प्रतीक होता है। हैरानी की बात यह है की ये बकरा बिना किसी मानवीय निर्देश के अपनी यात्रा पूरी करता है और सही स्थान पर पहुंच जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए।
होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब बच्चा गोद लेने पर भी मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, मां को पूरे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी। कोर्ट ने उस कानूनी प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें सिर्फ तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मैटरनिटी लीव की अनुमति थी, लेकिन अब ऐसी कोई शर्त नहीं है। मौजूदा समय में यह नियम है कि बच्चा गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव तभी मिलेगी जब गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एक बायोलॉजिकल मां की तरह ही गोद लिए गए बच्चे की मां को भी मैटरनिटी लीव मिलने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि मैटरनिटी का अधिकार और बच्चे की देखभाल की जरूरत उम्र पर निर्भर नहीं करती। कोर्ट ने तीन महीने की उम्र सीमा को हटाते हुए कहा कि ये भेदभाव करता है। कोर्ट ने माना कि बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ इमोशनल तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है। इसके अलावा कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पिताओं की भूमिका पर भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो पितृत्व अवकाश पर भी एक ठोस नीति बनाने पर विचार करे। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी अहम है। इसलिए इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में लाना चाहिए
खाड़ी देश के 'पर्शियन गल्फ' में फंसे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कैप्टन रमन कपूर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अमेरिका-इजरायल और इरान युद्ध के कारण 20 हजार नाविकों में दहशत का माहौल है। इनमें करीब 2000 भारतीय नाविक हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण 500 से 700 समुद्री जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कैप्टन रमन ने कहा कि किसी भी शिप पर कभी भी अटैक हो रहा है। स्पेशियली उन शिप पर, जिनका कोई भी लिंक अमेरिका और इजरायल के साथ है, अगर वो मूवमेंट शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि इरान चाहता है कि पर्शियन गल्फ से (भारत और चीन को छोड़कर) अन्य देशों को कोई भी ऑयल टैंकर बाहर न जाए।
कैप्टन रमन ने कहा कि उनका शिप पर्शियन गल्फ में फंसा हुआ है। वह कुछ दिन पहले ही ईराक से कार्गो लोड करके आए हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो बाहर जा सकते हैं और न ही रह सकते हैं। उनके पास शिप में अलर्ट रहने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। एयरपोर्ट और समुद्री रास्ते बंद हैं। कैप्टन कपूर ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन जहाजों को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे सभी जहाज समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं और नाविक लगातार तनाव में हैं, जो लगातार अपने परिवारों से संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। अनिश्चित हालात के बीच नाविकों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण दुनिया से कटा रहता है।
कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है।
प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम
यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच में एक मूर्ति बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था।
दांत और बाल आज भी संरक्षित
इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।
गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया।
सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में
गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।