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'भांग उगाओ, लॉटरी खेलो और पैसे कमाओ लेकिन सरकार से नौकरी मत मांगो', सदन में विपक्ष ने सुक्खू सरकार को घेरा
हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
'दुबई चले जाते हैं, लेकिन हमीरपुर जाने को तैयार नहीं डॉक्टर', मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी पर CM सुक्खू का जवाब
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है. विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.
हिमाचल प्रदेश: लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान को लेकर पेंशनरों का शिमला में धरना, जानें क्या है मांगें
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।
स्मार्ट मिटर लगाने पहुंची बिजली बोर्ड की टीम से विवाद, महिला ने JE को जड़ा थप्पड़ , मौके पर मचा हंगामा
हमीरपुर जिले के उझाण पटेरा गांव में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब बिजली बोर्ड की टीम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलने पहुंची। स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बिजली बोर्ड कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान एक महिला ने बिजली बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही। जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड की टीम गांव में पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों के एक वर्ग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहसबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के दौरान एक महिला और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के बीच तीखी कहासुनी हुई। इसी बीच महिला ने जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद बिजली बोर्ड कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। र्ड के जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर हंगामा हो गया और कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ता मीटर बदलने की प्रक्रिया और बिजली बिल को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी है। उझाण पटेरा गांव में हुई घटना ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
डमी दाखिलों को लेकर सख्त हुआ शिक्षा बोर्ड, नियमो कीअनदेखी करने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई
धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।
हिमाचल में महिला पटवारी रिश्वत लेते गिरफ्तार:लैंड वैल्यू सर्टिफिकेट बनाने के लिए 1 लाख मांगे, विजिलेंस ने जाल बिछाकर पकड़ा
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी में विजिलेंस ने एक महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. बरोटीवाला पटवार सर्कल में तैनात महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि महिला पटवारी लैंड वेल्यू प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत मांग रही है.इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दे दी. बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से महिला पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया, शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल की और शिकायत को सही पाए जाने पर जाल बिछाया. विजिलेंस थाना बद्दी की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ लिया. टीम ने कथित रिश्वत की राशि को भी कब्जे में ले लिया है. विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है. जांच में रिश्वत मांगने के कारणों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. विजिलेंस के आईजी बिमल गुप्ता ने बताया कि आरोपी महिला से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं. विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. वही तहसीलदार सतेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
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