•   Saturday Sep 26
In Scoop

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Tenders up to ₹5 lakh in Himachal to be processed offline; restoration work to be expedited in disaster-affected areas.
In Himachal

हिमाचल में 5 लाख तक के टेंडर होंगे ऑफलाइन, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तेज होंगे बहाली के काम

हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में 5 लाख रुपये तक के रिस्टोरेशन कार्यों के टेंडर अब ऑफलाइन किए जा सकेंगे। राज्य सरकार ने इन कार्यों के लिए सचिवालय से दोबारा मंजूरी लेने की जरूरत को खत्म करते हुए प्रक्रिया आसान कर दी है।  नई व्यवस्था के तहत जिला उपायुक्तों की रिपोर्ट पर SDRF/NDRF के तहत स्वीकृत 5 लाख रुपये तक के कार्यों के टेंडर अधिशासी अभियंता स्तर पर ही ऑफलाइन किए जा सकेंगे। इससे आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, डंगों और अन्य छोटे बुनियादी ढांचे की जल्द मरम्मत शुरू हो सकेगी।  दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार नेटवर्क की समस्या के कारण ठेकेदार ऑनलाइन टेंडर नहीं भर पाते थे। सिंगल बिड या नो-बिड की स्थिति में दोबारा टेंडर प्रक्रिया करनी पड़ती थी। इसके चलते चंबा, मंडी, कुल्लू और शिमला समेत कई क्षेत्रों में रिस्टोरेशन के काम अटके हुए थे।  ऑफलाइन प्रक्रिया से 2 से 3 दिन में काम अवार्ड होने की उम्मीद है। इससे सड़क की रिटेनिंग वॉल, कलवर्ट और अन्य छोटे मरम्मत कार्य तेजी से शुरू किए जा सकेंगे। स्थानीय ठेकेदारों को भी फायदा होगा, खासकर उन लोगों को जिनके पास डिजिटल सिग्नेचर या ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के लिए जरूरी संसाधन नहीं हैं।  यह छूट आपदा प्रभावित घोषित क्षेत्रों और 2025-26 मानसून आपदा से जुड़े रिस्टोरेशन कार्यों के लिए दी गई है। उद्देश्य बारिश और आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क संपर्क को जल्द बहाल करना और सर्दी शुरू होने से पहले जरूरी काम पूरा करना है।  हालांकि, 5 लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया जारी रहेगी। ऑफलाइन किए गए टेंडर का रिकॉर्ड और तुलनात्मक विवरण भी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, ताकि प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। 

Rain alert in Himachal: Heavy rain warning for Sirmaur; Shimla and Solan also advised to stay alert.
In News

हिमाचल में बारिश का अलर्ट: सिरमौर में भारी बारिश की चेतावनी, शिमला-सोलन भी रहें सतर्क

हिमाचल प्रदेश में 26 सितंबर से मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 26 से 29 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। सबसे ज्यादा असर 27 और 28 सितंबर को देखने को मिल सकता है।  सिरमौर में 27 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 26 सितंबर को भी जिले में भारी बारिश की चेतावनी है। शिमला और सोलन में 27 व 28 सितंबर को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मंडी में भी 27 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।  इस दौरान कई क्षेत्रों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है। 27 सितंबर को कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।  मौसम विभाग ने बारिश के दौरान फिसलन भरी सड़कों, अचानक बढ़ते जलस्तर और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। खासकर सिरमौर, सोलन, शिमला और मंडी के पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी रहेगी।  बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे प्रदेश में मौसम ठंडा होने लगेगा।  वहीं, हिमाचल में मानसून अब विदाई के चरण में है। इसके बावजूद पश्चिमी विक्षोभ और बदलती मौसम प्रणाली के कारण सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल रहा है। 

High Court approves HPTDC headquarters shift; green light for transfer from Shimla to Dharamshala.
In Politics

HPTDC मुख्यालय शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट की मुहर, शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर को हरी झंडी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के कॉरपोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही मुख्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के सरकार के फैसले का रास्ता साफ हो गया है।  मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। याचिकाएं सेवानिवृत्त HPTDC कर्मचारियों दाबे राम और मुकेश भारद्वाज ने दायर की थीं। दोनों ने शिमला स्थित कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला के होटल कश्मीर हाउस में स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी थी।  सरकार और HPTDC की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2025 में धर्मशाला-कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया था। इसके बाद HPTDC के निदेशक मंडल ने निगम के अपने भवन में कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने का फैसला किया।  इससे पहले शिमला में होटल हॉलिडे होम के पास नया कॉरपोरेट कार्यालय बनाने की योजना थी, लेकिन भवन निर्माण की योजना को नगर निगम से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद धर्मशाला में कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा।  हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालय का स्थान तय करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत निर्णय है। अदालत सरकार के ऐसे नीतिगत फैसले के गुण-दोष की तुलना कर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।  अदालत ने यह भी कहा कि दोनों याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उनका HPTDC के साथ सेवा संबंध समाप्त हो चुका है। इसलिए वे सेवारत कर्मचारियों से जुड़े इस मुद्दे पर याचिका दायर करने के लिए उचित आधार नहीं रखते। दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता द्वारा जमा 50-50 हजार रुपये की राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के बीच बराबर बांटने के निर्देश दिए।  हालांकि HPTDC की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल हेड ऑफिस का पता रिट्ज एनेक्सी, शिमला ही दर्ज है, इसलिए वास्तविक प्रशासनिक शिफ्टिंग की स्थिति को सरकार/निगम के आगामी आदेशों के संदर्भ में देखना होगा।

Congress meeting in Shimla: 'Himachal Jodo Yatra' to be held from Bharmour to Sirmaur; strategy to be formulated.
In Politics

शिमला में कांग्रेस की बैठक : भरमौर से सिरमौर तक निकलेगी 'हिमाचल जोड़ो यात्रा' , SIR पर बनेगी रणनीति

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को शिमला स्थित राजीव भवन में होगी। प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की मौजूदगी में होने वाली बैठक में संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी रणनीति पर मंथन किया जाएगा।  बैठक में भरमौर से सिरमौर तक प्रस्तावित ‘हिमाचल जोड़ो यात्रा’ की रूपरेखा और तारीख तय करने पर चर्चा होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में प्रस्तावित इस यात्रा का उद्देश्य पूरे प्रदेश में संगठन को सक्रिय करना और लोगों तक पहुंच बढ़ाना बताया गया है। यात्रा के दौरान SIR समेत अन्य मुद्दे भी उठाए जाने की तैयारी है।  इसके अलावा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर भी चर्चा होगी। पार्टी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है और इसी मुद्दे पर शुक्रवार को शिमला में निर्वाचन विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, रजनी पाटिल समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल होने वाले था I PCC बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों और जिला कांग्रेस अध्यक्षों के पिछले तीन महीने के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी। संगठन को बूथ, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक मजबूत करने तथा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने पर भी चर्चा होगी। 26 सितंबर को मीडिया विभाग और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अग्रणी संगठनों व विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। 

Meeting between Rajni Patil and Sukhu sparks political buzz; focus on coordination between the government and the organization; major Congress brainstorming session in Shimla today.
In Politics

रजनी पाटिल-सुक्खू की मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल, सरकार और संगठन के तालमेल पर मंथन; आज शिमला में कांग्रेस का बड़ा मंथन

हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल तीन दिवसीय हिमाचल दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से शिमला में मुलाकात की। बैठक में राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि मुलाकात में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  इसके बाद शिमला के राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस की अहम बैठक होनी है। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार समेत प्रदेश पदाधिकारी और जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में पिछले तीन महीनों के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा की जाएगी और जिलों व ब्लॉकों में संगठन की सक्रियता का फीडबैक लिया जाएगा।  बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। पार्टी भरमौर से सिरमौर तक 'हिमाचल जोड़ो यात्रा' की रणनीति पर भी मंथन करेगी।  वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस ने शिमला के कुसुम्पटी स्थित चुनाव विभाग कार्यालय के बाहर SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी रखा है। इसमें रजनी पाटिल, मुख्यमंत्री सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल होने हैं।  यानी आज शिमला में कांग्रेस के लिए दिन संगठन की समीक्षा, सरकार-संगठन के तालमेल और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति के लिहाज से अहम है।

India shines at the Asian Games! Women's kabaddi team reaches the final; four daughters of Himachal deliver a stellar performance.
In Sports

एशियन गेम्स में भारत का जलवा! महिला कबड्डी टीम फाइनल में, हिमाचल की 4 बेटियों का दमदार प्रदर्शन

भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। टीम अब 26 सितंबर को स्वर्ण पदक के लिए मैदान में उतरेगी।  इस जीत में हिमाचल प्रदेश की बेटियों की मौजूदगी खास रही। सिरमौर की पुष्पा राणा भारतीय टीम की कप्तान हैं, जबकि रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर भी 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं। चारों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में टीम के अभियान में अहम भूमिका निभाई है।  भारत ने ग्रुप चरण में भी शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने बांग्लादेश को 42-21, ईरान को 37-23 और जापान को 50-25 से हराकर ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और बिना कोई मैच गंवाए सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद नेपाल को हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया।  अब भारत के सामने 26 सितंबर को स्वर्ण पदक का मुकाबला होगा। फाइनल में उसका सामना ईरान और चीनी ताइपे के बीच दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। भारतीय टीम मौजूदा एशियन गेम्स में अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने के लक्ष्य के साथ उतरी है।  हिमाचल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सिरमौर के शिलाई क्षेत्र से दो लगातार भारतीय महिला कबड्डी कप्तान सामने आई हैं—पहले रितु नेगी और अब पुष्पा राणा। 

New dress code for CBSE schools! Uniforms to change from the 2027-28 academic session; students to sport a 'green theme'.
In Education

CBSE स्कूलों में अब नया ड्रेस कोड! 2027-28 से बदलेगी यूनिफार्म, ग्रीन थीम में नज़र आएंगे बच्चे

शिमला: हिमाचल प्रदेश के करीब 155 सरकारी CBSE स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई यूनिफॉर्म लागू होगी। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए लाइट ग्रीन, फॉरेस्ट ग्रीन और चारकोल ग्रे रंगों पर आधारित ड्रेस कोड तय किया है। बालवाटिका से पांचवीं तक के बच्चों के लिए अलग ड्रेस निर्धारित की गई है, जबकि छठी से 12वीं तक छात्राओं के लिए स्कर्ट की जगह सलवार-दुपट्टा या ग्रे पतलून का विकल्प रहेगा। छात्रों के लिए लाइट ग्रीन शर्ट और चारकोल ग्रे पतलून रखी गई है। सभी कक्षाओं के लिए स्पोर्ट्स ड्रेस भी एक समान होगी। ठंडे क्षेत्रों में मौसम के अनुसार अतिरिक्त गर्म कपड़े पहनने की अनुमति रहेगी। वहीं शिक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड तय किया गया है। महिला शिक्षिकाओं के लिए हल्का लाइलैक और पुरुष शिक्षकों के लिए हल्की नीली शर्ट-पैंट निर्धारित की गई है। यह ड्रेस कोड 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। स्कूल भवनों को भी ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंग की थीम में रंगने की योजना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी CBSE स्कूलों को एक समान पहचान देना और ड्रेस में एकरूपता लाना है।

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HPTDC मुख्यालय शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट की मुहर, शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर को हरी झंडी

In Politics
High Court approves HPTDC headquarters shift; green light for transfer from Shimla to Dharamshala.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के कॉरपोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही मुख्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के सरकार के फैसले का रास्ता साफ हो गया है।  मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। याचिकाएं सेवानिवृत्त HPTDC कर्मचारियों दाबे राम और मुकेश भारद्वाज ने दायर की थीं। दोनों ने शिमला स्थित कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला के होटल कश्मीर हाउस में स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी थी।  सरकार और HPTDC की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2025 में धर्मशाला-कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया था। इसके बाद HPTDC के निदेशक मंडल ने निगम के अपने भवन में कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने का फैसला किया।  इससे पहले शिमला में होटल हॉलिडे होम के पास नया कॉरपोरेट कार्यालय बनाने की योजना थी, लेकिन भवन निर्माण की योजना को नगर निगम से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद धर्मशाला में कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा।  हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालय का स्थान तय करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत निर्णय है। अदालत सरकार के ऐसे नीतिगत फैसले के गुण-दोष की तुलना कर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।  अदालत ने यह भी कहा कि दोनों याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उनका HPTDC के साथ सेवा संबंध समाप्त हो चुका है। इसलिए वे सेवारत कर्मचारियों से जुड़े इस मुद्दे पर याचिका दायर करने के लिए उचित आधार नहीं रखते। दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता द्वारा जमा 50-50 हजार रुपये की राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के बीच बराबर बांटने के निर्देश दिए।  हालांकि HPTDC की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल हेड ऑफिस का पता रिट्ज एनेक्सी, शिमला ही दर्ज है, इसलिए वास्तविक प्रशासनिक शिफ्टिंग की स्थिति को सरकार/निगम के आगामी आदेशों के संदर्भ में देखना होगा।

बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 8 महीने में 237 सैंपल फेल

In Health
Serious questions raised over medicine quality in Badi; 237 samples failed in 8 months.

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों में बद्दी और आसपास के फार्मा उद्योगों से जुड़े 237 दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। इनमें बुखार, हार्ट समेत अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में लगातार हिमाचल में निर्मित दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे न उतरने के मामले सामने आते रहे हैं। हालिया ड्रग अलर्ट में भी हिमाचल की कई दवाएं फेल हुई हैं।  बद्दी की फार्मा कंपनियों से जुड़े मामलों में पहले भी हार्ट संबंधी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2024 के एक ड्रग अलर्ट में बद्दी की एक कंपनी की Calcium Gluconate दवा, जिसका इस्तेमाल कैल्शियम की कमी और कुछ आपात स्थितियों में किया जाता है, गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी था I वहीं, 2025 में बद्दी की एक फार्मा यूनिट को बार-बार सैंपल फेल होने और Good Manufacturing Practices (GMP) में कमियों के चलते कुछ दवाओं का उत्पादन रोकने के निर्देश दिए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कंपनियों के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं, उनके खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने या उत्पादन रोकने की कार्रवाई के बावजूद क्या वास्तव में प्रोडक्शन पूरी तरह बंद हो रहा है? इसी को लेकर विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, हर फेल सैंपल का मतलब यह नहीं होता कि पूरी कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। किसी विशेष बैच या दवा के निर्धारित गुणवत्ता पैरामीटर में कमी मिलने पर संबंधित बैच पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में कंपनियों को नोटिस, बाजार से बैच वापस लेने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।  बद्दी  देश  के प्रमुख फार्मा हब में शामिल है, इसलिए यहां दवाओं के गुणवत्ता मानकों को लेकर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों की सुरक्षा और ड्रग रेगुलेशन की प्रभावशीलता से सीधे जुड़ जाती हैं। हाल के वर्षों में अधिकारियों ने कुछ इकाइयों के खिलाफ उत्पादन रोकने और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की है। 

CBSE स्कूलों में अब नया ड्रेस कोड! 2027-28 से बदलेगी यूनिफार्म, ग्रीन थीम में नज़र आएंगे बच्चे

In Education
New dress code for CBSE schools! Uniforms to change from the 2027-28 academic session; students to sport a 'green theme'.

शिमला: हिमाचल प्रदेश के करीब 155 सरकारी CBSE स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई यूनिफॉर्म लागू होगी। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए लाइट ग्रीन, फॉरेस्ट ग्रीन और चारकोल ग्रे रंगों पर आधारित ड्रेस कोड तय किया है। बालवाटिका से पांचवीं तक के बच्चों के लिए अलग ड्रेस निर्धारित की गई है, जबकि छठी से 12वीं तक छात्राओं के लिए स्कर्ट की जगह सलवार-दुपट्टा या ग्रे पतलून का विकल्प रहेगा। छात्रों के लिए लाइट ग्रीन शर्ट और चारकोल ग्रे पतलून रखी गई है। सभी कक्षाओं के लिए स्पोर्ट्स ड्रेस भी एक समान होगी। ठंडे क्षेत्रों में मौसम के अनुसार अतिरिक्त गर्म कपड़े पहनने की अनुमति रहेगी। वहीं शिक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड तय किया गया है। महिला शिक्षिकाओं के लिए हल्का लाइलैक और पुरुष शिक्षकों के लिए हल्की नीली शर्ट-पैंट निर्धारित की गई है। यह ड्रेस कोड 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। स्कूल भवनों को भी ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंग की थीम में रंगने की योजना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी CBSE स्कूलों को एक समान पहचान देना और ड्रेस में एकरूपता लाना है।

एशियन गेम्स में भारत का जलवा! महिला कबड्डी टीम फाइनल में, हिमाचल की 4 बेटियों का दमदार प्रदर्शन

In Sports
India shines at the Asian Games! Women's kabaddi team reaches the final; four daughters of Himachal deliver a stellar performance.

भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। टीम अब 26 सितंबर को स्वर्ण पदक के लिए मैदान में उतरेगी।  इस जीत में हिमाचल प्रदेश की बेटियों की मौजूदगी खास रही। सिरमौर की पुष्पा राणा भारतीय टीम की कप्तान हैं, जबकि रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर भी 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं। चारों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में टीम के अभियान में अहम भूमिका निभाई है।  भारत ने ग्रुप चरण में भी शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने बांग्लादेश को 42-21, ईरान को 37-23 और जापान को 50-25 से हराकर ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और बिना कोई मैच गंवाए सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद नेपाल को हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया।  अब भारत के सामने 26 सितंबर को स्वर्ण पदक का मुकाबला होगा। फाइनल में उसका सामना ईरान और चीनी ताइपे के बीच दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। भारतीय टीम मौजूदा एशियन गेम्स में अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने के लक्ष्य के साथ उतरी है।  हिमाचल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सिरमौर के शिलाई क्षेत्र से दो लगातार भारतीय महिला कबड्डी कप्तान सामने आई हैं—पहले रितु नेगी और अब पुष्पा राणा। 

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हिमाचल में बारिश का अलर्ट: सिरमौर में भारी बारिश की चेतावनी, शिमला-सोलन भी रहें सतर्क

In News
Rain alert in Himachal: Heavy rain warning for Sirmaur; Shimla and Solan also advised to stay alert.

हिमाचल प्रदेश में 26 सितंबर से मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 26 से 29 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। सबसे ज्यादा असर 27 और 28 सितंबर को देखने को मिल सकता है।  सिरमौर में 27 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 26 सितंबर को भी जिले में भारी बारिश की चेतावनी है। शिमला और सोलन में 27 व 28 सितंबर को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मंडी में भी 27 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।  इस दौरान कई क्षेत्रों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है। 27 सितंबर को कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।  मौसम विभाग ने बारिश के दौरान फिसलन भरी सड़कों, अचानक बढ़ते जलस्तर और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। खासकर सिरमौर, सोलन, शिमला और मंडी के पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी रहेगी।  बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे प्रदेश में मौसम ठंडा होने लगेगा।  वहीं, हिमाचल में मानसून अब विदाई के चरण में है। इसके बावजूद पश्चिमी विक्षोभ और बदलती मौसम प्रणाली के कारण सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल रहा है। 

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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