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बिलासपुर गोलीकांड में बड़ा खुलासा पंजाब से गिरफ्तार मास्टरमाइंड ही निकला 'चिट्टे' का मुख्या सुप्लायर !
बिलासपुर पुलिस ने नशा तस्करी और गोलीकांड से जुड़े मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने चिट्टे के मुख्य सप्लायर और कई संगीन मामलों में वांछित मलकीयत सिंह उर्फ मल्ली (38) को पंजाब के रोपड़ से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के अनुसार यही आरोपी जून 2024 में बिलासपुर में हुए चर्चित गोलीकांड में शूटर को हायर करवाने वाला मुख्य व्यक्ति था। मामले की शुरुआत 21 अगस्त को हुई, जब बिलासपुर पुलिस की स्पेशल डिटेक्शन टीम ने फोरलेन पर बाइक सवार अमन और अरुण को रोका। तलाशी के दौरान दोनों के कब्जे से 14.50 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नशे की सप्लाई के स्रोत की जांच शुरू की। जांच में चिट्टे की सप्लाई का मुख्य स्रोत पंजाब के रोपड़ जिले के आनंदपुर साहिब क्षेत्र के मिस्सेवाल निवासी मलकीयत सिंह उर्फ मल्ली तक पहुंचा। इसके बाद बिलासपुर पुलिस की टीम ने पंजाब में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक मल्ली केवल नशा सप्लाई करने वाला आरोपी नहीं है। जांच में सामने आया कि 20 जून 2024 को बिलासपुर में परिधि गृह और जिला न्यायालय के पास सौरभ पटियाल उर्फ फांदी पर हुए जानलेवा हमले के लिए शूटर सन्नी गिल को मलकीयत सिंह ने ही हायर करवाया था! पुलिस के अनुसार आरोपी बिलासपुर और मंडी क्षेत्र में चिट्टे की सप्लाई कर रहा था। उसके खिलाफ हिमाचल और पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। बिलासपुर पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर चिट्टे के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि मल्ली से नशा कौन लेता था और आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाता था। एसपी बिलासपुर अभिषेक धीमान ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नदियों में जमा मलबे से बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उठाया ड्रेजिंग का मुद्दा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हिमाचल की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप! यौन उत्पीड़न के बाद पति और बच्चों समेत पूरे परिवार को दी धमकी, तीन पर FIR
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र से एक विवाहिता के साथ कथित यौन उत्पीड़न और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। 28 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में एक व्यक्ति पर जबरदस्ती करने और बाद में उसके विरोध करने पर महिला, उसके पति तथा दो छोटे बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौपाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी दिला राम शर्मा और उसके दो बेटों संतोष तथा नारायण दत्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल में एक ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों दिया जा रहा अलग-अलग डा? हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाहीI सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है.
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में बीपीएल श्रेणी के तहत चयनित लोगों को जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों की अब दोबारा जांच की जाएगी. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) रामपुर बुशहर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आदेश के अनुसार 50 हजार और 75 हजार तक की वार्षिक आय दर्शाने वाले उन सभी आय प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन किया जाएगा, जो बीपीएल श्रेणी में चयनित व्यक्तियों को जारी किए गए हैं.पुनः सत्यापन के दौरान संबंधित तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रत्येक मामले में जांच करेंगे. यह जांच संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी, ग्राम पंचायत प्रधान और संबंधित वार्ड सदस्य की समिति के साथ परामर्श कर की जाएगी. जांच में संबंधित व्यक्ति और परिवार की वास्तविक आय, आर्थिक स्थिति और आय प्रमाण पत्र जारी करने के आधार की पड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के अनुरूप है या नहीं.प्रत्येक आय प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि जांच के बाद प्रमाण पत्र सही पाया गया है अथवा नहीं. एसडीएम कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. मामले को अति आवश्यक और समयबद्ध बताया गया है.
दिल्ली में हिमाचल का शक्ति प्रदर्शन! CM सुक्खू, मंत्री और बड़े अफसर एक साथ, कई मुद्दों पर होगी बात
हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनकी कैबिनेट के कुछ मंत्री और बड़े अफसर इस समय दिल्ली में हैं. सीएम सुक्खू के अलावा तीन कैबिनेट मंत्री दिल्ली दौरे पर हैं. सीएम के साथ राज्य के टॉप ब्यूरोक्रेट्स भी राजधानी में डेरा डाले हुए हैं. मुख्य सचिव केके पंत के अलावा अन्य बड़े अफसर सीएम के साथ हैं. दिल्ली में हिमाचल को लेकर कुछ बड़े घटनाक्रम देखने को मिलेंगे. सीएम सुक्खू केंद्रीय नेताओं से मिलेंगे और साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है. सीएम दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान एवं कृषि और पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार भी दिल्ली में हैं. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर दिल्ली में साक्षरता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. वहीं, सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू आज यानी मंगलवार (8 सितंबर) सुबह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात करेंगे. मीटिंग का एजेंडा कुल्लू-मनाली एवं मंडी में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर तय है. हिमाचल प्रदेश का एक कंसर्न मानसून सीजन में आपदा से प्रभावित लोगों को वन भूमि का आवंटन सुनिश्चित करना भी है. सीएम सुक्खू ने इस मामले में ऐलान किया है कि आपदा प्रभावितों को जरूरत के अनुसार वन भूमि दी जाएगी. इसके लिए केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है. मंगलवार शाम को ही सीएम सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात तय है. निर्मला सीतारमण के साथ मीटिंग में सीएम एवं मुख्य सचिव सहित अन्य अफसर भी रहेंगे. इस दौरान हिमाचल प्रदेश के वित्तीय मसलों पर चर्चा होगी. साथ ही हिमाचल प्रदेश प्राईड ऑफ हिल्स नाम से शुरू किए गए फंड में केंद्र से और अधिक रकम प्रदान किए जाने की मांग करेगा. इस दौरान हिमाचल प्रदेश पिछले सीजन में पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित किए गए पैकेज को लेकर भी अपना पक्ष रखेगा. सीएम सुक्खू का दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का संभावित कार्यक्रम है. विभिन्न केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान राज्य के मुख्य सचिव केके पंत, दिल्ली में सीएम के ऊर्जा सलाहकार रामसुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, शिक्षा सचिव और सीएम के सचिव का कार्यभार देख रहे आईएएस राकेश कंवर आदि मौजूद रहेंगे.
हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन
हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। किन्नौर जिले और इसके तीन ब्लॉकों में कांग्रेस संगठन को अब नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया है। राजस्व मंत्री और किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी का कहना है कि इन कमेटियों के गठन से पहले उनकी राय नहीं ली गई थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी माना है कि कार्यकारिणियों के गठन में कुछ विसंगतियां थीं। इन्हें दूर करने के बाद नई कार्यकारिणियों की घोषणा की जाएगी। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है। दरअसल, किन्नौर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष के तौर पर निगम भंडारी की नियुक्ति के बाद से ही विवाद चल रहा था। जगत नेगी ने इस नियुक्ति पर खुलकर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इतने अहम फैसले से पहले उनसे राय नहीं ली गई। नेगी ने यह भी सवाल उठाया था कि चुनाव हार चुके नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों दी जा रही हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर भाजपा के कथित 'स्लीपर सेल' सक्रिय होने तक का आरोप लगाया था। जगत नेगी और किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी के बीच मतभेद पिछले कुछ समय से सार्वजनिक रहे हैं। विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस की हिमाचल प्रभारी रजनी पाटिल ने भी दोनों नेताओं के बीच समझौते की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थीं। विवाद के बीच निगम भंडारी ने दिल्ली जाकर कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी। इसके बाद रिकांगपिओ में उनके पदभार ग्रहण कार्यक्रम में भी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। कमेटियां भंग होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कार्यकारिणियों में किसे जिम्मेदारी दी जाती है। जगत नेगी पहले ही संगठनात्मक नियुक्तियों में अपनी राय को महत्व देने की मांग कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने किन्नौर में नेताओं के बीच संतुलन बनाते हुए नई टीम तैयार करने की चुनौती होगी। नई नियुक्तियों से यह भी साफ होगा कि पार्टी हाईकमान किन्नौर में किस तरह की रणनीति अपनाता है और आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को कितना मजबूत करने की कोशिश करता है।
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