•   Monday Jan 24
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All vaccines are tested in CRI Kasauli
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सीआरआई कसौली में होती है सभी टीको की टेस्टिंग

केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली जीवन रक्षक दवाओं का उत्पादन कर मानव जीवन के कल्याण में अहम भूमिका निभा रहा है। न केवल भारत में बल्कि दुनिया में (सीआरआई) कसौली टीकों के क्षेत्र में अग्रणी है। एंटी रैबीज वैक्सीन का आविष्कार भी इसी संस्थान में किया गया था। देश की एकमात्र सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) 1940 में यहां स्थापित की गई थी। 1906 में सीआरआई ने देश में पहली बार सर्पदंश के इलाज के लिए सीरम और टायफायड बुखार के लिए वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया गया था। आज सीआरआई सरकारी क्षेत्र में जीएमपी (गुड मेन्यूफेक्चरिंग प्रेक्टिस) के तहत दवा उत्पादन करने वाला पहला संस्थान बन चुका है। संस्थान में करोड़ों की राशि से बना जीएमपी भवन तमाम उन आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप है। संस्थान में मुख्य रूप से एंटी सिरा, एंटी रैबीज वैक्सीन, डीटी वैक्सीन, टीटी वैक्सीन, डीपीटी ग्रुप ऑफ वैक्सीन, यलो फीवर वैक्सीन, जैपनीज एनसेफालिटिस वैक्सीन, डायग्नोस्टिक रीजेंट, एंटी डॉग बाइट व एंटी स्नेक बाइट वैक्सीन, एकेडी वैक्सीन, एंटी वेनम सीरम, टोकसाइड सीरम यहां के मुख्य उत्पादन हैं। वर्तमान में सभी तरह के टीकों की टेस्टिंग केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल), कसौली में होती है। देश में किसी भी वैक्सीन को बाजारों में उतारने से पहले देश की एकमात्र केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके लिए वैक्सीन की गुणवत्ता जांचने व परखने के लिए बैच सीडीएल में भेजे जाते हैं। सीडीएल कसौली अभी तक विभिन्न कंपनियों की कोरोना वैक्सीन डोज का परीक्षण करने के बाद जारी कर चुका है। इसमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन, माडरना वैक्सीन, जानसन एंड जानसन वैक्सीन, स्पुतनिक वी वैक्सीन, जायकोव-डी आदि वैक्सीन के डोज शामिल है। इसमें कोविशील्ड व कोवैक्सीन के ज्यादा डोज शामिल हैं। कोरोना काल में सीडीएल के कर्मचारियों व अधिकारियों की मेहनत का नतीजा है कि आज देश में एक अरब, 35 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज का सफल परीक्षण किया जा चुका है व उसका लाभ देश के लोगों को मिल रहा है।

Country's first API industry to be set up in Nalagarh
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नालागढ़ में लगेगा देश का पहला एपीआई उद्योग

औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के समीप पलासड़ा में प्रस्तावित बल्क ड्रग यूनिट में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआइ) यानी दवा उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल बनाने का उद्योग लगेगा। सितंबर 2022 तक ट्रायल आधार पर इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। मुंबई की किनवान कंपनी को उद्योग विभाग ने पलासड़ा में 350 बीघा भूमि आवंटित कर दी है। यहां उत्पादन शुरू होने के बाद बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) सहित देशभर के फार्मा उद्योगों को एंटीबायोटिक दवाओं का कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। वर्तमान में फार्मा उद्योग एपीआइ के लिए चीन पर निर्भर हैं और करीब 80 फीसद एपीआइ चीन से ही आपूर्ति हो रहा है। पलासड़ा में लगने वाले इस उद्योग की उत्पादन क्षमता 400 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। यह देश का पहला एपीआई उद्योग होगा। यहां 576.12 बीघा भूमि विभाग के नाम हो चुकी है और मौजूदा समय में चयनित भूमि की डिमार्केशन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र पलासड़ा में उद्योग लगाने के लिये कई कंपनियों ने इच्छा जाहिर की है, जिनमें से एक कंपनी को पलासड़ा में 342 बीघा भूमि प्रदान भी कर दी गई है। बद्दी एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है। पूरे प्रदेश में 750 फार्मा इकाइयां हैं, जिन्हें कच्चा माल दूसरे देशों से मंगवाना पड़ रहा है। अगर यहां पर दवा कंपनियों के लिए कच्चे माल का उद्योग खुल जाता है, तो एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी की दवा कंपनियों को फायदा होगा। देश की 30 फीसदी दवाओं का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में होता है। देश का यह पहला उद्योग होगा, जिसमें एंटीबायोटिक दवाइयों का सॉल्ट तैयार होगा और प्रदेश का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। अभी तक दवा उद्योग के लिए कच्चा माल चीन से आता था, लेकिन अब यहां पर एपीआई उद्योग खुलने से जहां बीबीएन के दवा निर्माताओं को सीधा लाभ होगा, वहीं देश के अन्य दवा निर्माता कंपनियों को भी बाहर से कच्चा माल नहीं मंगवाना पड़ेगा। नालागढ़ के पलासड़ा में बड़े-बड़े औद्योगिक घराने आने शुरू हो गए हैं। 850 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से दो हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। चीन पर निर्भरता खत्म होगी : गुप्ता बीबीएन में निवेशकों के रुझान को मद्देनजर रखते हुए विभाग ने नालागढ़ के प्लासड़ा में नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया है, जहां कई कंपनियों ने निवेश कर कारखाना स्थापित करने की इच्छा जाहिर की है। नालागढ़ के इस पहले औद्योगिक क्षेत्र में विकास रफ्तार पकड़ेगा और कई बड़े उद्योग स्थापित होंगे। नालागढ़ के पलासड़ा में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई) उद्योग स्थापित होने से दवा कंपनियों के लिए सबसे जयादा फायदा होगा। पूरे प्रदेश में 750 फार्मा इकाइयां हैं, जिन्हें कच्चा माल दूसरे देशों से मंगवाना पड़ता है। ऐसे में यदि (एपीआई) उद्योग स्थापित किया जाता है तो एंटीबायोटिक दवाओं का कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। वर्तमान में फार्मा उद्योग एपीआइ के लिए चीन पर निर्भर हैं और करीब 80 फीसद एपीआइ चीन से ही आपूर्ति हो रहा है।इसके अलावा आर्थिकी रूप से भी हमे काफी रिलीफ मिलेगा।  -विनोद गुप्ता ,अध्यक्ष फार्मास्युटिकल एसोसिएशन सोलन

Raw material shortage is a big challenge
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कच्चे माल की कमी बड़ी चुनौती

बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ न केवल प्रदेश बल्कि देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक हैं। हिमाचल में यदि उद्योगों की बात करें तो हज़ारों की संख्यां में कई छोटे-बड़े उद्योग हैं। प्रदेश में औद्योगिक निवेश 21 हजार करोड़ से भी ज्यादा है। राज्य सरकार के पास भी 250 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव विचाराधीन हैं, लेकिन कई कमियों के कारण औद्योगिक क्षेत्र का विकास तेजी से नहीं हो पा रहा है। कच्चे माल की कमी के चलते हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दाम दोगुना होने के बावजूद भी दवा निर्माताओं को कच्चा माल नहीं मिल रहा। प्रदेश में 750 दवा उद्योग हैं। अकेले बीबीएन में 350 दवा उद्योग हैं, लेकिन दवा उद्योगों  में कच्चे माल की कमी होने से इसका सीधा असर छोटे दवा उद्योगों पर पड़ता है।   यातायात बड़ी चुनौती  औद्योगिक क्षेत्र के विकास में रुकावट का सबसे बड़ा कारण है ट्रांसपोर्ट। किसी भी उद्योग के फलने फूलने के लिए सुगम यातायात बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। परिवहन के द्वारा ही कच्चा माल कारखानों तक पहुँच पाता है और कारखानों से उत्पाद ग्राहकों तक पहुँच पाते है। लेकिन खराब सड़कें और रेलवे का न होना उद्योगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है। आधारभूत ढांचे की कमी से प्रदेश में नए निवेशक नहीं आ पा रहे हैं। आधारभूत ढांचे की कमी के चलते कई बड़े उद्योग हिमाचल से पलायन कर चुके हैं। कुछ उद्योगों ने उत्तराखंड में अपनी यूनिट स्थापित कर दी हैं।   बिना रेलवे चल रहा कंटेनर डिपो  बद्दी के मलपुर में 92 बीघा भूमि पर कंटेनर डिपो तैयार तो हो गया, लेकिन बिना रेलवे की सुविधा से ही यह कंटेनर डिपो चल रहा है। इस कंटनेर डिपो के लिए केंद्र सरकार की ओर से 14.42 करोड़ रुपये मुहैया करवाए थे, लेकिन कंटेनर डिपो का असल लाभ तो तभी मिल पाएगा, जब यह क्षेत्र रेलवे से जुड़ेगा।

Country's first API industry to be set up in Himachal Pradesh
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हिमाचल प्रदेश में बनेगा देश का पहला एपीआई उद्योग

इस समय भारत दुनिया की नई फार्मेसी बनने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस समय भारत का फार्मा उद्योग करीब 42 अरब डॉलर का है। माना जा रहा है कि यह 2026 तक 65 अरब डॉलर और 2030 तक 130 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। निःसंदेह कोरोना संक्रमण की आपदा भारत के लिए फार्मा और कोरोना वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का अवसर लेकर आई है। फार्मा उद्योग की इस प्रतिस्पर्धा में हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन का बीबीएन क्षेत्र भी तेज़ी से भाग रहा है। बीबीएन की पहचान एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब के तौर पर की जाती है। कोरोना के समय में इस एरिया की अहमियत और भी बढ़ी है। बता दें कि कोरोना महामारी की पहली लहर में दुनिया जब वैक्सीन के लिए रिसर्च कर रही थी तब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई (DCGI) ने रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी (Sputnik-V) बनाने के लिए हिमाचल के बद्दी में स्थित पैनेशिया बायोटेक को मंजूरी दी। पैनेशिया बायोटेक पहली कंपनी है, जिसने स्पूतनिक-वी का निर्माण भारत में किया। स्पूतनिक-वी बनाने के लिए कुल 6 कंपनियों ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ एग्रीमेंट किया था, जिनमें पैनेशिया बायोटेक भी शामिल थी। वैश्विक महामारी कोविड-19 से उपजे संकट के इस दौर में जहां हिमाचल का फार्मा उद्योग देश व प्रदेश की दवा जरूरतों को प्राथमिकता से पूरा कर रहा है, वहीं कोरोना के उपचार से संबंधित आवश्यक दवाओं के उत्पादन में अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है। बता दें कि देश में बिकने वाली हर तीसरी दवा का निर्माण हिमाचल के फार्मा उद्योगों में हुआ है। इसके अलावा सालाना 15 हजार करोड़ से ज्यादा की दवाओं का निर्यात यह से किया जा रहा है। कोरोना काल में अमेरिका को भेजी गई यहां बनी दवा  दुनिया में जिस समय वैश्विक महामारी कोरोना का संकटपूर्ण दौर आया, सबसे पहले चर्चा में आने वाला शब्द हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन था। पहली लहर में उक्त दवा के लिए दुनिया की नजरें भारत पर थीं। दुनिया भर में जितनी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन तैयार होती है, उसका सत्तर फीसदी भारत में बनता है। देश में भी अधिकांश हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बीबीएन में बनती है। अमेरिका को भी यहीं से सप्लाई दी गई थी। हिमाचल में करीब 700 दवा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा ईयू से, इतने ही डब्ल्यूएचओ व जीएमपी से तथा अन्य इकाइयां यूएसएफडीए से मंजूर हैं। ऐसे में यदि बीबीएन में और अधिक फार्मा इकाइयों को लाइसेंस मिल जाए तो देश भर की दवाइयों की जरूरत अकेले बीबीएन पूरी कर सकता है। हिमाचल में मात्र चार से पांच फीसदी दवा निर्माताओं के पास क्लोरोक्वीन व एंटीबॉयोटिक एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट का लाइसेंस है। यदि प्रदेश के हर फार्मा उत्पादक को लाइसेंस मिल जाता है तो पूरे देश के लिए यह दवा यहां से उपलब्ध करवाई जा सकती है। सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी  उद्यमियों की सुविधा के लिए हिमाचल सरकार ने बद्दी में सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी ऑफिस खोला है। यदि कोई निवेशक पांच करोड़ रुपए तक की मशीनरी का प्लांट लगाता है तो उसे कहीं भटकने की जरूरत नहीं है। मंजूरी से संबंधित सभी औपचारिकताएं इसी कार्यालय से पूरी हो जाती हैं। इससे ऊपर की मशीनरी लागत वाली इकाइयां मुख्य कार्यालय शिमला से मंजूर होती हैं। प्लांट व मशीनरी पर पचास फीसदी उपदान यानी सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा सेंट्रल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की सुविधा है। उधमियों के लिए प्लांट व भूमि नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर उपलब्ध है।

There is no mention of computer teachers on the appointment of everyone
In karamchari lehar

सबकी नियुक्ति पर कंप्यूटर शिक्षकों का जिक्र तक नहीं

कंप्यूटर प्रोफेशनल एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व तकनीकी शिक्षा मंत्री राम लाल मारकंडा से उनकी मांगें पूरी करने की गुहार लगाई है। एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में वर्ष 2017 से लंबे पीजीटी आईपी के केस को शीघ्र निपटाने तथा पीजीटी आईपी विषय के नियुक्ति एवं पदोन्नति नियमों में से 5 वर्ष के शैक्षणिक अनुभव की शर्त को हटाने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीयूष सेवल ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में जहां लगभग हर विषय में सरकार द्वारा विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्तियां की जा रही है, वहीं कंप्यूटर अध्यापकों की नियुक्तियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। जबकि वर्तमान समय में कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी की महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लेक्चर कंप्यूटर साइंस विषय के चल रहे 850 से अधिक रिक्त पदों को भरने, हिमाचल प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर कंप्यूटर एप्लीकेशन के पदों को भरने व हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों में कंप्यूटर की शिक्षा को अनिवार्य रूप से पहली कक्षा से शुरू करने, हिमाचल प्रदेश में टीजीटी कंप्यूटर साइंस के पदों को सृजित करके उनकी नियुक्तियां करने तथा हिमाचल प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी के उद्योगों को स्थापित करने की मांग की गई है।

The doctors of the state are angry
In karamchari lehar

खफा खफा है प्रदेश के चिकित्सक

हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने पिछले डेढ़ साल से मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, उपनिदेशक के पदों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुलाने में हुई देरी पर कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ सुशील शर्मा ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारियों व इसके समकक्ष पदों के कम से कम 12 से 15 पद खाली हैं और सरकार ने इन पदों पर चिकित्सकों को उनकी नियमित पोस्टिंग से वंचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि खंड चिकित्सा अधिकारियों के लिए पिछले तीन वर्षों से कोई डीपीसी नहीं हुई है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में नियमित बीएमओ के लगभग 25-30 पद खाली पड़े हुए हैं। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने कहा कि सरकार ने चिकित्सकों के नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस को पंजाब की तर्ज पर 25 प्रतिशत से कम कर 20 प्रतिशत कर दिया है जो चिकित्सकों के साथ अन्याय है। एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ सुशील शर्मा ने सरकार से सवाल किया है कि जब नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस को पंजाब की तर्ज पर कम किया गया तो  बेसिक प्लस एनपीए की लिमिट को पंजाब की तर्ज पर क्यों नहीं रखा गया। सरकार ने एनपीए घटाने के साथ-साथ बेसिक प्लस एनपीए की लिमिट को कम करते हुए 218000 कर दिया जो पंजाब में 237600 है। डॉक्टर शर्मा ने कहा कि यह सरासर और सीधा प्रदेश के चिकित्सकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। संघ के सभी सदस्यों ने एकमत से सरकार से मांग की है कि चिकित्सकों का एनपीए बढ़ाया जाए और बेसिक प्लस एनपीए की लिमिट को भी बढ़ाया जाए।

Promotion of junior engineers not done for almost two decades
In karamchari lehar

करीब दो दशकों से नहीं हुई कनिष्ठ अभियंताओं की पदोन्नति

पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता पदोन्नति न मिलने से परेशान है। इनका कहना है कि करीब बीस सालों से इस विभाग में कनिष्ठ अभियंताओं की पदोन्नति रुकी हुई हैं और कनिष्ठ अभियंता बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। प्रदेश कनिष्ठ अभियंता संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि आगामी 31 जनवरी को एक कनिष्ठ अभियंता की सेवानिवृति है, जो पदोन्नति रहित है। प्रदेशाध्यक्ष राजीव कुमार शर्मा और प्रदेश महासचिव विजय धीमान ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार पदोन्नति के मामले में कनिष्ठ अभियंताओं से सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी में करीब दो दशकों से पदोन्नतियां नहीं हो रही है, जिससे यह वर्ग स्वयं को हताश और निराश महसूस कर रहे हैं। इंजीनियर राजीव कुमार ने कहा कि समाज शायद सोचता होगा कि इनके सेवा कार्यकाल में न जाने कौन सा अपराध हुआ है कि यह लोग कभी सहायक अभियंता ही नहीं बन पाए। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी में सहायक अभियंताओं के करीब 30 पद रिक्त चल रहे हैं लेकिन सरकार और विभाग के आलाधिकारी इस पर कोई गौर नहीं कर रहे हैं। बीस सालों से पदोन्नति की राह देख रहे कनिष्ठ अभियंताओं की मानसिक परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है लेकिन कोई उम्मीद की किरण दिख नहीं रही है। राजीव कुमार ने कहा कि यदि सरकार पदोन्नतियों का द्वार खोलती है तो नए युवाओं को नौकरी का अवसर मिलेगा और इन्हें भी पदोन्नति का अवसर मिल पाएगा। प्रदेश कनिष्ठ अभियंता संघ ने सरकार से मांग की वे जल्द इनकी पदोन्नति की मांग पर गौर करें ताकि कनिष्ठ अभियंता बिना पदोन्नति के सेवानिवृत न हो।

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उत्तराखंड : कांग्रेस अभी आउट ऑफ फॉर्म, लेकिन चुनाव के लिए तैयार - हरीश रावत

In Politics
उत्तराखंड : कांग्रेस अभी आउट ऑफ फॉर्म, लेकिन चुनाव के लिए तैयार - हरीश रावत

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के बारे में खुलकर बात ही। उन्होंने पार्टी का वर्णन करने के लिए एक क्रिकेट सादृश्य का इस्तेमाल करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इसका "फॉर्म डाउन" था लेकिन मुझे यकीन है कि पार्टी इसे फिर से हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि कभी बल्लेबाज भी आउट ऑफ फॉर्म में चले जाते हैं। लेकिन उत्तराखंड में हमारी बेंच स्ट्रेंथ इन फॉर्म है। रावत ने कहा कि "अच्छी बात ये है कि लोग कांग्रेस की ओर एक बार फिर वापस आ रहे हैं। हर पार्टी के इतिहास में एक समय होता है। जैसे वे कभी-कभी कहते हैं कि एक बल्लेबाज फॉर्म से बाहर हो जाता है, वैसे ही अभी हमारी पार्टी का फॉर्म भी थोड़ा नीचे है लेकिन आउट नहीं है, हम देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि कांग्रेस इसे फिर से हासिल कर लेगी। " वहीं उत्तराखंड विधानसभा चुनाव पर बात करते हुए रावत ने कहा राज्य में होने वाले चुनाव के लिए हमारी पार्टी पूरी तरह से तैयार है।

भारत : पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3 लाख 33 हजार मामले दर्ज

In Health
भारत : पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3 लाख 33 हजार मामले दर्ज

देश में कोरोना वायरस महामारी के मामले कल की तुलना में आज घटे हैं। देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के तीन लाख 33 हजार 533 नए केस सामने आए हैं और 525 लोगों की मौत हो गई। देश में दैनिक पॉजिटिविटी रेट अब 17.78 फीसदी है। बड़ी बात यह है कि देश में आज कल से 4 हजार 171 कम मामले आए हैं, कल कोरोना वायरस के 3 लाख 37 हजार 704 मामले आए थे। जानिए देश में कोरोना की ताजा स्थिति क्या है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 21 लाख 87 हजार 205 हो गई है। वहीं, इस महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4 लाख 89 हजार 409 हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, कल दो लाख 59 हजार 168 लोग ठीक हुए, जिसके बाद अभी तक 3 करोड़ 65 लाख 60 हजार 650 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। 

हिमाचल प्रदेश: नई शिक्षा नीति के तहत प्रौढ़ शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा अलग पाठ्यक्रम

In Education
Himachal Pradesh: Under the new education policy, a separate curriculum will be prepared for adult education

हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रमों में कई तरह के बदलाव देखने को मिले हैं। स्कूलों में टर्म प्रणाली शुरू हुई है। वहीं 2023 तक एससीआरटी चार पैटर्न में पाठ्यक्रम को तैयार कर रहा है। यह चार पैटर्न प्री प्राइमरी जिसमें प्री-कक्षाएं शामिल होंगी। हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति के तहत प्रौढ़ शिक्षा को शामिल किया जाएगा। इसके लिए अलग से पाठ्यक्रम बनेगा। चार पैटर्न में बनाए जा रहे इस पाठ्यक्रम को वर्ष 2023 तक तैयार किया जाएगा। इसके लिए एससीआरटी काम कर रही है। वहीं स्कूल एजूकेशन में पहली से 12वीं तक की कक्षाओं को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा टीचर एजूकेशन, जिसमें अध्यापकों को ट्रेनिंग करवाने से संबंधित कार्य होगा, जबकि चौथा पैटर्न अडल्ट शिक्षा पाठ्यक्रम होगा। एससीआरटी वर्ष 2023 तक पाठ्यक्रम तैयार कर देगी। प्रौढ़ शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार कर इस पंचायत स्तर पर शुरू किया जाएगा। इस दौरान उन लोगों शामिल किया जाएगा, जोकि अक्षर ज्ञान से पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। ऐसे लोगों को शिक्षित करने के लिए प्रौढ़ पाठ्यक्रम को तैयार कर उन्हें शिक्षित किया जाएगा। इस दौरान स्कूल के अध्यापकों सहित पंचायत प्रतिनिधि भी अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।

विजय हजारे ट्रॉफी जीत हिमाचल ने रचा इतिहास

In Sports
Himachal creates history by winning Vijay Hazare Trophy

विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में तमिलनाडु को 6 विकेट से हराकर हिमाचल प्रदेश ने इतिहास रच दिया है। हिमाचल की टीम पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया है। तमिलनाडु ने हिमाचल प्रदेश के सामने 315 रन का लक्ष्य रखा जिसके जवाब में हिमाचल ने 47 ओवर और तीन गेंदों में  299 बनाकर मैच अपने नाम किया। खराब रोशनी के कारण मैच 15 गेंदों पहले की खत्म किया गया और उस वक्त हिमाचल को जीत के लिए 288 रन की जरुरत थी, जबकि टीम का स्कोर 299 रन था जिसके चलते हिमाचल को विजेता घोषित किया गया। ओपनर शुभम अरोरा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 136 रन की पारी खेली। जबकि अमित कुमार ने शानदार 74 और कप्तान ऋषि धवन ने धुआंधार नाबाद 42 रन बनाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। शुभम अरोरा को उनकी पारी के लिए मैन ऑफ़ दी मैच चुना गया। मैच में तमिलनाडु ने पहले बल्लेबाजी करते हुए खराब शुरुआत की। हिमाचल ने 40 रन पर तमिलनाडु के चार विकेट गिरा दिए थे, लेकिन दिनेश कार्तिक और इंद्रजीत ने 202 रनों की साझेदारी कर अपनी टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाया। दिनेश कार्तिक ने 116 और बाबा इंद्रजीत ने 80  रन की पारी खेली। इसके बाद शाहरुख खान ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचाया और तमिलनाडु ने हिमाचल के सामने 315 रनों का लक्ष्य रखा। हिमाचल प्रदेश के लिए पंकज जयसवाल ने चार विकेट झटके। जबकि कप्तान ऋषि धवन ने तीन, विनय गलेतिया, सिद्धार्थ शर्मा और दिग्विजय रंगी ने एक-एक विकेट लिया।    

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को सांप ने काटा

In Entertainment
Bollywood actor Salman Khan was bitten by a snake

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को सांप ने काट लिया है। पनवेल स्थित फार्महाउस में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात सलमान खान को सांप ने काटा था। मिली जानकारी के अनुसार सलमान खान को बिना जहरवाले सांप ने काटा है ऐसे में दबंग खान पर इसका ज्यादा असर नहीं हुआ है। सांप के काटने के बाद सलमान खान को नवी मुम्बई के कामोठे इलाके के एमजीएम अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज के बाद सलमान खान रविवार सुबह 9 बजे वापस पनवेल स्थित फार्महाउस लौटे। सलमान खान की हालत अब खतरे से बहार बताई जा रही है। सलमान खान के फैंस इस खबर के बाद उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। फैंस के लिए हालांकि ये राहत की बात है कि सलमान की सेहत को कोई खतरा नहीं हैं। 

सीआरआई कसौली में होती है सभी टीको की टेस्टिंग

In News
All vaccines are tested in CRI Kasauli

केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली जीवन रक्षक दवाओं का उत्पादन कर मानव जीवन के कल्याण में अहम भूमिका निभा रहा है। न केवल भारत में बल्कि दुनिया में (सीआरआई) कसौली टीकों के क्षेत्र में अग्रणी है। एंटी रैबीज वैक्सीन का आविष्कार भी इसी संस्थान में किया गया था। देश की एकमात्र सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) 1940 में यहां स्थापित की गई थी। 1906 में सीआरआई ने देश में पहली बार सर्पदंश के इलाज के लिए सीरम और टायफायड बुखार के लिए वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया गया था। आज सीआरआई सरकारी क्षेत्र में जीएमपी (गुड मेन्यूफेक्चरिंग प्रेक्टिस) के तहत दवा उत्पादन करने वाला पहला संस्थान बन चुका है। संस्थान में करोड़ों की राशि से बना जीएमपी भवन तमाम उन आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप है। संस्थान में मुख्य रूप से एंटी सिरा, एंटी रैबीज वैक्सीन, डीटी वैक्सीन, टीटी वैक्सीन, डीपीटी ग्रुप ऑफ वैक्सीन, यलो फीवर वैक्सीन, जैपनीज एनसेफालिटिस वैक्सीन, डायग्नोस्टिक रीजेंट, एंटी डॉग बाइट व एंटी स्नेक बाइट वैक्सीन, एकेडी वैक्सीन, एंटी वेनम सीरम, टोकसाइड सीरम यहां के मुख्य उत्पादन हैं। वर्तमान में सभी तरह के टीकों की टेस्टिंग केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल), कसौली में होती है। देश में किसी भी वैक्सीन को बाजारों में उतारने से पहले देश की एकमात्र केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके लिए वैक्सीन की गुणवत्ता जांचने व परखने के लिए बैच सीडीएल में भेजे जाते हैं। सीडीएल कसौली अभी तक विभिन्न कंपनियों की कोरोना वैक्सीन डोज का परीक्षण करने के बाद जारी कर चुका है। इसमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन, माडरना वैक्सीन, जानसन एंड जानसन वैक्सीन, स्पुतनिक वी वैक्सीन, जायकोव-डी आदि वैक्सीन के डोज शामिल है। इसमें कोविशील्ड व कोवैक्सीन के ज्यादा डोज शामिल हैं। कोरोना काल में सीडीएल के कर्मचारियों व अधिकारियों की मेहनत का नतीजा है कि आज देश में एक अरब, 35 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज का सफल परीक्षण किया जा चुका है व उसका लाभ देश के लोगों को मिल रहा है।

उत्तराखंड : कांग्रेस अभी आउट ऑफ फॉर्म, लेकिन चुनाव के लिए तैयार - हरीश रावत

In National News
उत्तराखंड : कांग्रेस अभी आउट ऑफ फॉर्म, लेकिन चुनाव के लिए तैयार - हरीश रावत

कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की वर्तमान स्थिति के बारे में खुलकर बात ही। उन्होंने पार्टी का वर्णन करने के लिए एक क्रिकेट सादृश्य का इस्तेमाल करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इसका "फॉर्म डाउन" था लेकिन मुझे यकीन है कि पार्टी इसे फिर से हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि कभी बल्लेबाज भी आउट ऑफ फॉर्म में चले जाते हैं। लेकिन उत्तराखंड में हमारी बेंच स्ट्रेंथ इन फॉर्म है। रावत ने कहा कि "अच्छी बात ये है कि लोग कांग्रेस की ओर एक बार फिर वापस आ रहे हैं। हर पार्टी के इतिहास में एक समय होता है। जैसे वे कभी-कभी कहते हैं कि एक बल्लेबाज फॉर्म से बाहर हो जाता है, वैसे ही अभी हमारी पार्टी का फॉर्म भी थोड़ा नीचे है लेकिन आउट नहीं है, हम देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि कांग्रेस इसे फिर से हासिल कर लेगी। " वहीं उत्तराखंड विधानसभा चुनाव पर बात करते हुए रावत ने कहा राज्य में होने वाले चुनाव के लिए हमारी पार्टी पूरी तरह से तैयार है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन आज आएंगे भारत, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात | India News

In International News
Russian President Putin will come to India today, will meet PM Modi

भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दिल्ली आ रहे हैं। कोरोना संकट की वजह से पुतिन का ये भारत दौरा बेहद छोटा यानी महज कुछ घंटों का रखा गया है, लेकिन इसका असर ना सिर्फ दोनों देशों के सबंधों पर होगा बल्कि इससे चीन और पाकिस्तान जैसे भारत के पड़ोसी देशों को भी बड़ा संदेश जाएगा। रूसी राष्ट्रपति पुतिन दोपहर बाद दिल्ली पहुंचेंगे और महज़ 6-7 घण्टे के लिए भारत में होंगे। इस दौरान दोनों मुल्कों के बीच कई स्तर पर बातचीत होगी। पहले दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच टू प्लस टू वार्ता होगी और इसके बाद शाम 5.30 बजे दिल्ली के हैदराबाद हाउस में राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सुरक्षा कारणों की वजह से राष्ट्रपति पुतिन के भारत पहुंचने के समय का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति दोपहर दो बजे भारत पहुंचेंगे और रात 9.30 बजे अपने वतन वापस लौट जाएंगे।    Russian President Putin will come to India today, will meet PM Narendra Modi

पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं

In Kavya Rath
I know I will call you soil, in which I have gone a hundred times

भारत का एक ऐसा कवि जिसे स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि की ख्याति प्राप्त हुई। ऐसा कवि जिसकी कविताओं में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति। एक ऐसा कवि जो साहित्य का वह सशक्त हस्ताक्षर हैं जिसकी कलम में दिनकर यानी सूर्य के समान चमक थी। हम बात कर रहे है रामधारी सिंह दिनकर की। उनकी ही लिखी कविता 'परिचय' की इन पंक्तियों से बेहतर भला उनका परिचय क्या हो सकता है ' मुझे क्या गर्व हो अपनी विभा का,चिता का धूलिकण हूँ , शार हूँ मैं ,पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चूका सौ बार हूँ मैं ' 23 सितम्बर को राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती होती है। पूरा देश अपने राष्ट्रकवि को याद करता है, नमन करता है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' वो कवि है जिनकी रचनाओं  में ओज, शौर्य, प्रेम और सौंदर्य सब एक साथ आकार पाते हैं। वे आंदोलित भी करते हैं और आह्लादित भी। वे 'परशुराम की प्रतीक्षा' भी लिखते है और 'उर्वशी' भी। दिनकर द्वंद्वात्मक ऐक्य के कवि हैं।  उन्हें समय को साधने वाला कवि गया। पर दिनकर ‘राष्ट्रकवि’ ही नहीं 'जनकवि' भी थे। वे उन चंद कवियों में शुमार रहे है जिनके द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ आज भी आम जनमानस द्वारा पढ़ी और दोहराई जाती है। दिनकर वो कवि थे जिन्होंने देश के क्रांतिकारी आंदोलन को अपनी कविता से स्वर दिया। दिनकर वो कवि थे जिनके द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ 'सिंहासन खाली करो की जनता आती है' आज भी देश के जान आंदोलनों की आवाज है। रामधारी सिंह दिनकर जितने सुगढ़ कवि थे, उतने ही सचेत गद्य लेखक भी रहे। आज़ादी के बाद वे पंडित नेहरू और सत्ता के क़रीब भी रहे, कांग्रेस ने उन्हे राज्यसभा भी भेजा लेकिन राष्ट्रकवि का दायित्व उन्होंने हमेशा निभाया। दिनकर सारी उम्र सियासत से लोहा लेते रहे। उन्होंने कभी किसी नेता की जय-जयकार नहीं की, हमेशा उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि रहा। एक वाकिया ऐसा ही है जब लालकिले की सीढ़ियों से उतरते हुए नेहरू लड़खड़ा गए..तभी दिनकर ने उनको सहारा दिया।  इसपर नेहरू ने कहा- शुक्रिया.., दिनकर तुरंत बोले-''जब-जब राजनीति लड़खड़ाएगी, तब-तब साहित्य उसे सहारा देगा।'' उनके ये तेवर ताउम्र बरकरार रहे। 11 वर्षों की नौकरी में 23 बार हुआ था स्थानांतरण राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की राष्ट्रभक्ति ब्रिटिश हुकूमत को रास नहीं आती थी। 11 वर्षों की नौकरी में उनका 23 बार स्थानांतरण किया गया, पर उन्होंने अंग्रेजी अत्याचार के विरूद्ध लिखना नहीं छोड़ा। 23 सितंबर,1908 को बेगूसराय के सिमरिया गांव में जन्मे रामधारी सिंह दिनकर जब दो वर्ष के थे तब उनके पिता रवि सिंह का देहांत हो गया था। मां मनरूप देवी ने ही उनका पालन-पोषण किया। पटना कॉलेज से हिन्दी में स्नातक की डिग्री लेने के बाद 1928 में साइमन कमीशन के भारत आगमन के विरोध में गांधी मैदान में हुए आंदोलन में वे शामिल हो गए। इसके उपरांत वर्ष 1934 में उन्होंने पटना निबंधन कार्यालय में सब रजिस्ट्रार के पद पर सरकारी नौकरी शुरू कर दी।1945 तक उन्होंने यह नौकरी की। फिर 1945 में उन्हें प्रचार निदेशालय में उप निदेशक बना दिया गया। 1947 में देश की आजादी मिलने तक उन्होंने नौकरी की। इस बीच दिनकर ने जब वर्ष 1935 में जब 'रेणुका' नामक कविता संग्रह की रचना की तो उनका तबादला पटना निबंधन कार्यालय से बाढ़ कार्यालय कर दिया गया। फिर वर्ष 1938 आया और उनका कविता संग्रह 'हुंकार' प्रकाशित हुआ, तब फिर उनपर ब्रिटिश सरकार विरोधी होने के आरोप लगे और उनका तबादला नरकटियागंज कर दिया गया। जब-जब उनकी कोई नई पुस्तक प्रकाशित होती, उनका तबादला भी साथ-साथ होता रहता। पर दिनकर की कलम की धार कम नहीं हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होते ही ब्रिटिश हुकूमत की आँखों में दिनकर और ज्यादा अखरने लगे और  उन्हें नौकरी छोड़ने को बाध्य किया जाने लगा। तब ब्रिटिश हुकूमत ने उनका तबादला 1945 में प्रचार विभाग में उप निदेशक के पद पर कर दिया। ब्रिटिश हुकूमत को उनसे शिकायत रहती थी कि उनकी रचनाओं से क्रांतिकारी आंदोलन को हवा मिलती थी, और ये सच भी था।   'उर्वशी' के लिए मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार दिनकर ने  'रेणुका', 'हुंकार', 'रसवंती', 'द्वंद्व गीत', 'कुरुक्षेत्र', 'धूपछांह', 'समधनी', 'बापू' आदि महत्वपूर्ण कविता संग्रहों की रचना की थी। दिनकर को उनकी रचना 'उर्वशी' के लिए 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1959 में भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण सम्मान एवं 1959 में ही 'संस्कृति के चार अध्याय' पुस्तक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ये उनकी तठस्तता ही थी कि उनको सत्ता का विरोध करने के बावजूद साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मविभूषण आदि तमाम बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया।   "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है " सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है   जनता ? हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वही जाड़े-पाले की कसक सदा सहनेवाली जब अँग-अँग में लगे साँप हो चूस रहे तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहनेवाली जनता ? हाँ, लम्बी-बडी जीभ की वही कसम "जनता,सचमुच ही, बडी वेदना सहती है।" "सो ठीक, मगर, आखिर, इस पर जनमत क्या है ?" 'है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है ?" मानो,जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में अथवा कोई दूधमुँही जिसे बहलाने के जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में लेकिन होता भूडोल, बवण्डर उठते हैं जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है हुँकारों से महलों की नींव उखड़ जाती साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ ? वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुड़ता है अब्दों, शताब्दियों, सहस्त्राब्द का अन्धकार बीता; गवाक्ष अम्बर के दहके जाते हैं यह और नहीं कोई, जनता के स्वप्न अजय चीरते तिमिर का वक्ष उमड़ते जाते हैं सब से विराट जनतन्त्र जगत का आ पहुँचा तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तय करो अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो आरती लिए तू किसे ढूँढ़ता है मूरख मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में ? देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं धूसरता सोने से शृँगार सजाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है "कलम, आज उनकी जय बोल " जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगल रही सौ लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल कलम, आज उनकी जय बोल " कृष्ण की चेतावनी " वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान् हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये। ‘दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है। हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है, मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल। अमरत्व फूलता है मुझमें, संहार झूलता है मुझमें। ‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल, भूमंडल वक्षस्थल विशाल, भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं, मैनाक-मेरु पग मेरे हैं। दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर, सब हैं मेरे मुख के अन्दर। ‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख, मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख, चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर, नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर। शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र, शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र। ‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश, शत कोटि जिष्णु, जलपति, धनेश, शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल, शत कोटि दण्डधर लोकपाल। जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें, हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें। ‘भूलोक, अतल, पाताल देख, गत और अनागत काल देख, यह देख जगत का आदि-सृजन, यह देख, महाभारत का रण, मृतकों से पटी हुई भू है, पहचान, इसमें कहाँ तू है। ‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख, पद के नीचे पाताल देख, मुट्ठी में तीनों काल देख, मेरा स्वरूप विकराल देख। सब जन्म मुझी से पाते हैं, फिर लौट मुझी में आते हैं। ‘जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन, साँसों में पाता जन्म पवन, पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर, हँसने लगती है सृष्टि उधर! मैं जभी मूँदता हूँ लोचन, छा जाता चारों ओर मरण। ‘बाँधने मुझे तो आया है, जंजीर बड़ी क्या लाया है? यदि मुझे बाँधना चाहे मन, पहले तो बाँध अनन्त गगन। सूने को साध न सकता है, वह मुझे बाँध कब सकता है? ‘हित-वचन नहीं तूने माना, मैत्री का मूल्य न पहचाना, तो ले, मैं भी अब जाता हूँ, अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ। याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा। ‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर, बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर, फण शेषनाग का डोलेगा, विकराल काल मुँह खोलेगा। दुर्योधन! रण ऐसा होगा। फिर कभी नहीं जैसा होगा। ‘भाई पर भाई टूटेंगे, विष-बाण बूँद-से छूटेंगे, वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे, सौभाग्य मनुज के फूटेंगे। आखिर तू भूशायी होगा, हिंसा का पर, दायी होगा।’ थी सभा सन्न, सब लोग डरे, चुप थे या थे बेहोश पड़े। केवल दो नर ना अघाते थे, धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे। कर जोड़ खड़े प्रमुदित, निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’! ” परशुराम की प्रतीक्षा ” गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो ? शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ? उनका, जिनमें कारुण्य असीम तरल था, तारुण्य-ताप था नहीं, न रंच गरल था; सस्ती सुकीर्ति पा कर जो फूल गये थे, निर्वीर्य कल्पनाओं में भूल गये थे; गीता में जो त्रिपिटक-निकाय पढ़ते हैं, तलवार गला कर जो तकली गढ़ते हैं; शीतल करते हैं अनल प्रबुद्ध प्रजा का, शेरों को सिखलाते हैं धर्म अजा का; सारी वसुन्धरा में गुरु-पद पाने को, प्यासी धरती के लिए अमृत लाने को जो सन्त लोग सीधे पाताल चले थे, (अच्छे हैं अबः; पहले भी बहुत भले थे।) हम उसी धर्म की लाश यहाँ ढोते हैं, शोणित से सन्तों का कलंक धोते हैं। ” हमारे कृषक ” जेठ हो कि हो पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है बैलों के ये बंधू वर्ष भर क्या जाने कैसे जीते हैं बंधी जीभ, आँखें विषम गम खा शायद आँसू पीते हैं पर शिशु का क्या, सीख न पाया अभी जो आँसू पीना चूस-चूस सूखा स्तन माँ का, सो जाता रो-विलप नगीना विवश देखती माँ आँचल से नन्ही तड़प उड़ जाती अपना रक्त पिला देती यदि फटती आज वज्र की छाती कब्र-कब्र में अबोध बालकों की भूखी हड्डी रोती है दूध-दूध की कदम-कदम पर सारी रात होती है दूध-दूध औ वत्स मंदिरों में बहरे पाषान यहाँ है दूध-दूध तारे बोलो इन बच्चों के भगवान कहाँ हैं दूध-दूध गंगा तू ही अपनी पानी को दूध बना दे दूध-दूध उफ कोई है तो इन भूखे मुर्दों को जरा मना दे दूध-दूध दुनिया सोती है लाऊँ दूध कहाँ किस घर से दूध-दूध हे देव गगन के कुछ बूँदें टपका अम्बर से हटो व्योम के, मेघ पंथ से स्वर्ग लूटने हम आते हैं दूध-दूध हे वत्स! तुम्हारा दूध खोजने हम जाते हैं ” समर शेष है ” ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो , किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो? किसने कहा, और मत वेधो ह्रदय वह्रि के शर से, भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से? कुंकुम? लेपूं किसे? सुनाऊँ किसको कोमल गान? तड़प रहा आँखों के आगे भूखा हिन्दुस्तान । फूलों के रंगीन लहर पर ओ उतरनेवाले ! ओ रेशमी नगर के वासी! ओ छवि के मतवाले! सकल देश में हालाहल है, दिल्ली में हाला है, दिल्ली में रौशनी, शेष भारत में अंधियाला है । मखमल के पर्दों के बाहर, फूलों के उस पार, ज्यों का त्यों है खड़ा, आज भी मरघट-सा संसार । वह संसार जहाँ तक पहुँची अब तक नहीं किरण है जहाँ क्षितिज है शून्य, अभी तक अंबर तिमिर वरण है देख जहाँ का दृश्य आज भी अन्त:स्थल हिलता है माँ को लज्ज वसन और शिशु को न क्षीर मिलता है। पूज रहा है जहाँ चकित हो जन-जन देख अकाज सात वर्ष हो गये राह में, अटका कहाँ स्वराज? अटका कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली! तू क्या कहती है? तू रानी बन गयी वेदना जनता क्यों सहती है? सबके भाग्य दबा रखे हैं किसने अपने कर में? उतरी थी जो विभा, हुई बंदिनी बता किस घर में । समर शेष है, यह प्रकाश बंदीगृह से छूटेगा और नहीं तो तुझ पर पापिनी! महावज्र टूटेगा । समर शेष है, उस स्वराज को सत्य बनाना होगा जिसका है ये न्यास उसे सत्वर पहुँचाना होगा धारा के मग में अनेक जो पर्वत खडे हुए हैं गंगा का पथ रोक इन्द्र के गज जो अडे हुए हैं। कह दो उनसे झुके अगर तो जग मे यश पाएंगे अड़े रहे अगर तो ऐरावत पत्तों से बह जाऐंगे। समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो, शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो, पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोडेंगे, समतल पीटे बिना समर कि भूमि नहीं छोड़ेंगे। समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर, खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता की काली जंजीर। समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं, गांधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं, समर शेष है, अहंकार इनका हरना बाकी है, वृक को दंतहीन, अहि को निर्विष करना बाकी है। समर शेष है, शपथ धर्म की लाना है वह काल, विचरें अभय देश में गाँधी और जवाहर लाल, तिमिर पुत्र ये दस्यु कहीं कोई दुष्काण्ड रचें ना, सावधान हो खडी देश भर में गाँधी की सेना, बलि देकर भी बलि! स्नेह का यह मृदु व्रत साधो रे, मंदिर औ’ मस्जिद दोनों पर एक तार बाँधो रे। समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।

हिमाचल प्रदेश में 14 फरवरी से 23 फरवरी तक होंगी विभागीय परीक्षाएं, ऐसे करें आवेदन

In Job
Departmental examinations will be held in Himachal from February 14 to February 23, apply like this

हिमाचल प्रदेश विभागीय परीक्षा बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार के अधीन नियमित आधार पर सेवाएं प्रदान कर रहे पात्र अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए विभागीय परीक्षा का आयोजन 14 से 23 फरवरी, 2022 तक किया जाएगा। परीक्षाएं भारतीय प्रशासनिक सेवाएं, हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवाएं, तहसीलदार/नायब तहसीलदार, भारतीय वन सेवाएं/हिमाचल प्रदेश वन सेवाएं के अधिकारियों, अन्य सभी राजपत्रित अधिकारियों और पात्र अराजपत्रित अधिकारियों तकनीकी और गैर-तकनीकी, राज्य आबकारी एवं कराधान विभाग के आबकारी और कराधान निरीक्षक, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड निगम के अभियंता अधिकारियों, हिमाचल प्रदेश राज्य पर्यटन विभाग के सहायक अभियंता और राजस्व विभाग के पटवारियों के लिए विभागीय कानूनगो परीक्षा आयोजित की जा रही है। प्रवक्ता ने बताया कि केवल पेपर नम्बर-1 परीक्षा में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की सुविधा के लिए राजकीय महाविद्यालय संजौली, राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला और राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी में भी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। अन्य सभी विषयों की परीक्षाएं राजकीय महाविद्यालय संजौली शिमला में ही आयोजित की जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि जो उम्मीदवार विभागीय परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इच्छुक उम्मीदवार अपने आवेदन 1 दिसम्बर से 31 दिसम्बरतक जमा करवा सकते हैं। प्रार्थियों द्वारा किए गए आवेदन तभी मान्य होंगे जब उन्हें विभाग द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। विभागाध्यक्ष प्रार्थियों द्वारा किए गए आवेदनों को 10 जनवरी, 2022 तक अनुमोदित कर पाएंगे और इसके उपरान्त विभागाध्यक्ष की विंडो स्वतः ही बंद हो जाएगी। उन्होंने बताया कि आवेदन फाॅर्म हिपा की वेबसाइट www.hipashimla.nic.in से डाउनलोड किया जा सकता है

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