•   Wednesday Sep 22
In Scoop

Those who do not get vaccinated in public places will not get entry from October 2
In corona update

जम्मू-कश्मीर: सार्वजनिक स्थलों पर नहीं मिलेगी टीका न लगवाने वालों को 2 अक्तूबर से एंट्री

देश में लगातार बड़ी संख्या में जानलेवा कोरोना वायरस के नए मामले सामने आ रहे है। इस समस्या को लेकर काफी सख्तियां बरतने की तैयारियां चल रही है। वैक्सीनशन के चलते काफी लोगों को टीका लग गया है। वहीँ दूसरी और लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहें हैं। पहली खुराक न लेने वालों को सरकारी कार्यालयों, शॉपिंग माल, रेस्टोरेंट, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर 2 अक्तूबर से आने नहीं दिया जाएगा। कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं। जम्मू के आधिकारिक ने ट्वीट करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले लोगों को कोविड टीके की पहली खुराक लेना अनिवार्य है।

Due to heavy rains again in the state, there was a lot of damage, life became disturbed
In News

प्रदेश में फिर भारी बारिश के चलते हुआ काफी नुकसान, जन-जीवन हुआ अस्तव्यस्त

हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग के अलर्ट के बीच भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ है। जिला सिरमौर की नाहन तहसील के एक गांव में सोमवार देर रात बादल फटने से पानी के तेज बहाव में जमीन बह गई हैं। भारी बारिश के चलते फसलें भी तबाह हो गई हैं। मनाली के पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी से घाटी के मौसम में ठंडक बढ़ गई है। कुल्लू के बुरुआ गांव में नाले में बाढ़ आने से सेब के बगीचों को भारी नुकसान हुआ है। वंही प्रदेश के कई क्षेत्रों में सोमवार रात से लगातार बारिश जारी है। प्रदेश में  भूस्खलन से छोटी-बड़ी दर्जनों सड़कें बंद हो गई हैं। खराब मौसम की वजह से सूबे में पानी और बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने मंगलवार को प्रदेश के मध्य पर्वतीय जिलों शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, चंबा सहित कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वंही प्रदेश में 26 सितंबर तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।  

Shimla: 4-year-old girl raped in Theog, accused arrested
In News

शिमला : ठियोग में 4 साल की बच्ची से किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

ठियोग उपमंडल की क्यारटू पंचायत में एक 4 साल की बच्ची के साथ दुराचार का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बच्ची के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक 30 वर्षीय युवक ने यह दुष्कर्म किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार क्यारटू पंचायत में बच्ची के माता-पिता जो नेपाली मूल के हैं मेहनत मजदूरी का काम करते हैं और उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले 30 वर्षीय युवक जोकि छपरा बिहार का बताया जा रहा है ने इस दुष्कर्म को अंजाम दिया है। बच्ची की माता की शिकायत के अनुसार ठियोग थाना में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि बच्ची अपने आंगन में खेल रही थी, उसी दौरान पड़ोस का युवक उसे बहला-फुसलाकर ले गया और इस घटना को अंजाम दिया। जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची का मेडिकल करवाया गया और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। डीएसपी ठियोग लखबीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसे मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

Ramesh Chauhan, president of Himachal Pradesh Police Welfare Association
In karamchari lehar

हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ने सीएम जयराम ठाकुर को सौंपा ज्ञापन

हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गागल में  प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला। हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ने टीजीटी कैडर से मुख्याध्यापक की पदोन्नति लिस्ट अति शीघ्र जारी करने, विज्ञान अध्यापकों का प्रायोगिक भत्ता 150 रूपये से बढ़ाकर 1000 रुपए करने, अनुबंध कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान करना, उच्च न्यायालय के एलपीए 54 के फैसले 2008 में अनुबंध टीजीटी अध्यापकों को नियुक्ति की तिथि से नियमित करना आदि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन पत्र सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कोषाध्यक्ष लवलीन कुमार, कार्यालय सचिव अशोक वालिया मीडिया प्रभारी सुनील कुमार प्रदेश प्रवक्ता देशराज राजपूत, हंसराज चौधरी, रणजीत सिंह ठाकुर, परमानन्द शर्मा, बालक राम, भूप सिंह सैनी, किशोर लाल, नरेश कुमार, अनील सेन, रोशन लाल, प्रवीण कुमार, कृष्ण यादव, रमेश कुमार, योगेश कुमार,अनील ठाकुर आदि उपस्थित रहे।

Torrential rain broke 14 year record
In News

कोलकाता: मूसलाधार बारिश ने तोड़ा 14 साल का रिकॉर्ड

कोलकाता: कोलकाता में सोमवार को इतनी बारिश हुई जितनी पिछले 14 साल में सितंबर के महीने में नहीं हुई थी। बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण से शुरू हुई भारी बारिश ने रविवार रात से कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों को काफी प्रभावित किया। सोमवार को शहर के बड़े हिस्से में पानी भर गया, जिस वजह से सर्कुलर रेल संचालन को निलंबित कर दिया गया व कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को अलग कर दिया गया। सड़क यातायात में बाधित हो गया। हालांकि, नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों ने कहा कि उड़ान सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। कई जिले जलमग्न हो गए, एक हजार से अधिक लोगों के साथ 577 राहत शिविर बनाए गए हैं और कुल 1 लाख 41 हज़ार लोगों को निकाला गया है। इस स्थिति में आपदा से निपटने के लिए हर जिला अधिकारी को आपातकालीन राशि दी गई है और नियंत्रण कक्ष 24 घंटे तैयार किया जा रहा है। क्षतिग्रस्त क्षेत्रों को 6,000 कैनवस दिए गए हैं। गौरतलब है कि दीवारों और बिजली के करंट की चपेट में आने से 14 लोगों की मौत हो गई। साथ ही महीने की 14 से 18 तारीख के बीच इनमें से 6 की दीवार की चपेट में आने से मौत हो गई और आठ की डूबने से मौत हो गई। बाढ़ के कारण 3 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। बता दें कि अब तक 47 ब्लॉक और आठ नगर पालिकाएं जलमग्न हो चुकी हैं। कुल 13 लाख 14 हजार 328 लोग पानी में कैद हैं। नबन्ना आपदा प्रबंधन कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार 1 लाख घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. कोलकाता में पिछले 14 सालों में सितंबर की सबसे भारी बारिश इस साल हो रही है।

Corona vaccine dose given to 81 crore people in the country so far
In corona update

देश में अबतक 81 करोड़ लोगों को दी गई कोरोना वैक्सीन की डोज़

देश में अबतक 81 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज़ दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 20 सितंबर तक देशभर में 81 करोड़ 85 लाख 13 हजार कोरोना वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं। बीते दिन 96.46 लाख टीके लगाए गए। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद  के अनुसार, अबतक करीब 55.48 करोड़ कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं। बीते दिन 12 लाख कोरोना सैंपल टेस्ट किए गए, जिसका पॉजिटिविटी रेट 3 फीसदी से कम है। 

Decrease in corona cases, 26 thousand new cases were reported in 24 hours, 252 infected died
In corona update

कोरोना मामलों में आई कमी, 24 घंटे में 26 हजार नए केस आए सामने, 252 संक्रमितों की मौत

कोरोना मामलों में एक बार फिर कमी देखी गई है। पांच दिनों बाद 30 हजार से कम कोरोना मामले सामने आए हैं। मंगलवार सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ताजा आंकड़ा जारी किया गया। मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 26,115 नए कोरोना केस आए और 252 कोरोना संक्रमितों की जान चली गई। वहीं 34,469 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं यानी कि 8,606 एक्टिव केस कम हो गए। कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अबतक कुल तीन करोड़ 35 लाख 4 हजार लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें से 4 लाख 45 हजार 385 लोगों की मौत हो चुकी है।  अच्छी बात ये है कि अबतक 3 करोड़ 27 लाख 49 हजार लोग ठीक भी हुए हैं। देश में कोरोना एक्टिव केस की संख्या चार लाख से कम है। कुल 3 लाख 9 हजार 575 लोग अभी भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, जिनका इलाज चल रहा है। देश में कोरोना से मृत्यु दर 1.33 फीसदी है जबकि रिकवरी रेट 97.72 फीसदी है। एक्टिव केस 0.95 फीसदी हैं। कोरोना एक्टिव केस मामले में दुनिया में भारत अब 8वें स्थान पर है। कुल संक्रमितों की संख्या के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। जबकि अमेरिका, ब्राजील के बाद सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है। 

Featured Videos

Video

Latest

अभी 6 राज्यों में भाजपा सरकार, 2022 लेगा असल इम्तिहान

In Politics

2022 में देश के सात राज्यों में चुनाव होने है। ये राज्य है गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात। चुनावी अखाड़े में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए राजनीतिक दलों ने अभी से कमर कस ली है। कहां किन राज्यों में किस पार्टी से हाथ मिलाना है, किन पुराने दुश्मनों को दोस्त बनाना है और किसे आखिरी वक्त पर झटका देना है, इन सारे मुद्दों पर पर्दे के पीछे खेल शुरू हो गया है। फिलहाल इन 7 में से 6 राज्यों में भाजपा की सरकार है। स्पष्ट है कि ये दबदबा कायम रखने के लिए बीजेपी हर संभव प्रयास करेगी। या यूँ कहे कि प्रयास और परिश्रम दोनों शुरू हो चुके है। दिलचस्प बात ये है कि हालहीं में इनमें से दो राज्यों में तो पार्टी मुख्यमंत्री बदल चुकी है। लग रहा है मानों एंटी इंकम्बैंसी ख़त्म करने के लिए चेहरे बदलने की रणनीति पर पार्टी आगे बढ़ने का मन बना चुकी है।  हिमाचल प्रदेश : उपचुनाव पर टिकी सबकी नज़र हिमाचल में भी 2022 में विधानसभा चुनाव होने है। बीते 2017 के विधानसभा चुनाव में  जनता ने भाजपा को जीतवा दिया लेकिन सीएम फेस प्रो प्रेमकुमार धूमल को हराकर नेतर्त्व परिवर्तन की राह प्रशस्त कर दी। इसके पश्चात मुख्यमंत्री के तौर पर एंट्री हुई जयराम ठाकुर की। अब तक के अपने कार्यकाल में जयराम ठाकुर हर चुनौती का पूरी ताकत से सामना करते आए है। पहले मंत्रिमंडल और फिर धीरे धीरे संगठन पर भी मुख्यमंत्री ने नियंत्रण बना लिया। जो धूमल समर्थक मंत्री बनने का सपना देख रहे थे वो या तो कम में सेटलमेंट को राज़ी गए, या साइडलाइन कर दिए गए। कुछ समय पहले तक सब ठीक लग रहा था परन्तु अब प्रदेश में लगातार बढ़ रही धूमल की सक्रियता और केंद्र की सियासत में बढ़ रहे धूमल पुत्र अनुराग ठाकुर के कद ने समीकरण कुछ बदले जरूर है। भाजपाइयों  की निष्ठा दो तबकों में बंटती नज़र आ रही है। पर ख़ास बात ये है कि विधानसभा चुनाव से पहले हिमाचल में उपचुनाव होने है, जिस पर सबकी नज़र है।    उत्तर प्रदेश : यहाँ लगातार दूसरी बार कोई सीएम नहीं बना देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में आगामी फरवरी-मार्च में चुनाव संभावित है। 403 सीट वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में साल 2017 के चुनाव में बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की थी। तब बीजेपी को 312 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि तब सत्तारूढ़ सपा और कांग्रेस में गठबंधन हुआ था पर जनता ने उस गठबंधन को तारे दिखा दिए थे। चुनाव के बाद भाजपा से योगी आदित्यनाथ के अलावा दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य भी सीएम पद के दावेदार थे, लेकिन आलाकमान का आशीर्वाद मिला योगी आदित्यनाथ को। अब योगी के चेहरे पर ही भाजपा फिर मैदान में है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी की कमान सौंपी गई है। इनके आलावा राज्य में सात सह प्रभारी नियुक्त किए गए है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर भी शामिल है। उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में कोई भी मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री नहीं चुना गया है। हालाँकि योगी लगातार दावा कर रहे है की वो ही दूसरी बार मुख्यमंत्री चुने जाएंगे। पर उनकी राह आसान नहीं होनी। उत्तर प्रदेश में कई ऐसे कारण है जो योगी की मुश्किल बढ़ा सकते है, पहला है पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर। हालांकि बाहरी तौर पर योगी आदित्यनाथ इन्हें साधने में कामयाब जरूर दिख रहे है पर जगजाहिर है की कुछ माह पूर्व तक उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन तक के कयास लग रहे थे। ब्राह्मण समुदाय की तथाकथित नाराज़गी भी उत्तर प्रदेश में एक प्रभावी फैक्टर हो सकता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुजन समाज पार्टी ने भी चुनाव अभियान की शुरुआत में  ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए 'प्रबुद्ध वर्ग के सम्मान में विचार गोष्ठी' नामक आयोजन किया है। वहीं अन्य पार्टियां भी पीछे नहीं है। समाजवादी पार्टी अभी से मुस्लिम -यादव वोट को एकजुट रखने का प्रयास करती दिख रही है और यदि ऐसा हो पाया तो भाजपा की चुनौती जरूर बढ़ेगी। हालांकि ओवैसी अगर मुस्लिम वोट में सेंध लगा पाए तो भाजपा को इसका लाभ होना लाज़मी होगा। ऐसे में मुस्लिम वोट बंटता है या एकजुट रहेगा, इस पर सभी विश्लेषकों की नज़र रहेगी। किसान आंदोलन भी भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। किसान वर्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 60 से अधिक सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। भाजपा अभी से किसान और जाट वोट को साधने को प्रयासरत दिख रही है। बहरहाल दिल्ली की गद्दी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। ऐसे में भाजपा उत्तर प्रदेश में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी।   गोवा : चुनाव सिर पर हैं और पार्टी सचेत गोवा में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। छोटा राज्य होने के बावजूद गोवा में राजनीतिक उठापटक ज्यादा होती है। गोवा में बीजेपी के मौजूदा मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ-साथ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे भी 2022 के सीएम पद के दावेदार के तौर पर अपने आपको पेश कर रहे हैं। कोरोना प्रबंधन को लेकर दोनों ही नेताओं के बीच खींचतान की खबरें भी आई थी। विश्वजीत राणे पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह राणे के पुत्र हैं और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी यहां बहुमत से दूर हो गई थी, लेकिन नंबर गेम के जरिए वो सरकार बनाने में सफल रही। बहरहाल गोवा में चुनाव सिर पर हैं और पार्टी सचेत। पिछले दिनों बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सियासी अनुमान लेने के लिए गोवा का दौरा भी किया था। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया था। प्रमोद सावंत के कोरोना प्रबंधन को लेकर खूब सवाल उठे थे। गोवा के अस्पतालों से जैसी तस्वीरें सामने आईं वैसी बीजेपी शासित किसी दूसरे राज्य में नहीं दिखीं। माहिर मानते है कि पार्टी आलाकमान सुनिश्चित करना चाहेगा कि इसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में न भुगतना पड़े। पंजाब : थोड़ी ही सही मौजूदगी तो हो पंजाब में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है। पिछली बार यहां बीजेपी गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस को 77 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी रही थी। बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन को सिर्फ 15 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन टूट गया है। पंजाब में लंबे समय से अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका में रहने के चलते भाजपा अपना राज्य में विस्तार नहीं कर पाई है। अब जबकि अगले साल राज्य में चुनाव होने हैं तो अकाली दल से अलग होने के बाद उसके सामने अपने अस्तित्व का संकट खड़ा है। कोई भी नेता विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता है कि भावी पंजाब विधानसभा में उनकी उपस्थिति कितनी होगी? पंजाब में भाजपा अब हरियाणा की तर्ज पर खुद को मजबूत करने की तैयारी में हैं, हालांकि इस काम में उसे बहुत लम्बा समय लगेगा। कोई बड़ा प्रयोग भी पंजाब में भाजपा की नैया पार करवाता नहीं दिख रहा। फिलवक्त पंजाब में भाजपा की और से गजेंद्र सिंह शेखावत को चुनाव प्रभारी बनने का मौका मिला है। यहां तीन सह प्रभारी भी बनाए गए हैं। इनमें हरदीप सिंह पुरी, मीनाक्षी लेखी और विनोद चावड़ा का नाम शामिल है। भाजपा की कोशिश शायद ये ही रहेगी कि थोड़ी ही सही विधानसभा में उनकी मौजूदगी तो रहे। उत्तराखंड : प्रदेश इसी साल में देख चूका है तीन सीएम उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले दूसरी बार प्रचंड बहुमत पाकर सत्ता में वापसी का दावा करने वाली बीजेपी के भीतर शह मात का खेल शुरू हो गया है। पार्टी दो धड़ों में विभाजित नज़र आ रही है। एक धड़ा जो कांग्रेस से आये लोगों का है तो दूसरा पुराना भाजपाइयों का। ऐसे में आपसी कलह फिर सामने आ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष हर महीने उत्तराखंड का दौरा कर रहे हैं, मगर स्थिति नियंत्रण में आती नहीं दिख रही है। गौरतलब है की उत्तराखंड में बीजेपी ने कुछ ही महीने के भीतर दो बार मुख्यमंत्री को बदला है। सबसे पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर उनकी जगह तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया। बीजेपी को लगा था कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में पार्टी अपना जनाधार खो देगी इसलिए नए सीएम के तौर पर तीरथ सिंह को सामने लाया गया था। पर तीरथ सिंह रावत मुश्किल से चार महीने ही कुर्सी पर रह पाए थे कि एक बार फिर केंद्रीय नेतृत्व के फरमान ने उनकी सीएम की कुर्सी ले ली। कारण चाहे संवैधानिक संकट बताया गया हो पर शायद पार्टी को लगा हो कि तीरथ सिंह को सीएम बनाने का फैसला गलत था। इसके बाद मार्च में कुर्सी संभालने वाले तीरथ जुलाई की शुरुआत में ही अपना पद खो बैठे। आलाकमान ने उनकी जगह पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड की कमान सौंप दी। मगर पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भी भाजपा में अंतर्कलह कम होती नहीं दिखाई दे रही। धामी के लिए पार्टी को सत्ता में लाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। गुजरात : पटेल वोट और एंटी इंकम्बेंसी, दोनों साधने की कवायद  बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले ना सिर्फ सरकार का कप्तान बदला बल्कि पूरी टीम ही बदल डाली। गुजरात में बीजेपी ने फिर राजनीतिक प्रयोग की इबारत लिखते हुए मंत्रिमंडल के सिर्फ चेहरे ही नहीं बदले गए बल्कि जातिगत और क्षेत्रीय बैलेंस का भी बखूबी ख्याल रखा। पटेल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि कैबिनेट में भी पटेल समुदाय को खूब जगह दी गई है। पटेल वोट का असर पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव में खूब देख चुकी है जहाँ कांग्रेस ने उसे कड़ी टक्कर दी थी। वहीँ कंप्लीट मेक ओवर करके पार्टी शायद संभावित सत्ता विरोधी लहर को भी समाप्त करना चाहती है। पार्टी का ये प्रयोग निकाय चुनाव में सफल भी रहा था। बेशक भाजपा पटेल समुदाय को तवज्जो देकर उनका दिल जीतना चाहती हो लेकिन बड़ा सवाल ये भी है कि कहीं ऐसा कर भाजपा अन्य की नाराज़गी तो मोल नहीं ले रही ? दूसरा, मुख्यमंत्री सहित जिन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है कहीं उनकी नाराज़गी पार्टी को भारी तो नहीं पड़ेगी ? बहरहाल गुजरात खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गढ़ है, सियासत के चाणक्य अमित शाह का गृह राज्य है, और शायद ये ही कारण है कि भाजपा ने इतना बड़ा प्रयोग करने का जोखिम उठाया है। भाजपा के लिए मोदी है तो मुमकिन है।   मणिपुर : यहाँ भी मिशन रिपीट आसान नहीं मणिपुर विधानसभा की 60 सीटों के लिए 2022 में चुनाव होने है। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को मणिपुर का प्रभारी बनाया है। मणिपुर में भाजपा की सरकार है और एन बिरेन मुख्यमंत्री है । 2017 के चुनाव में भाजपा को 21 कांग्रेस को 19, एनपीपी को चार सीटें और एनपीएफ को 4 सीटें मिली थी। एनपीपी के सभी चार विधायकों ने भाजपा का समर्थन किया। बीरेन ने बारी-बारी से उन सभी को कैबिनेट मंत्री भी बनाया। हालांकि, नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार विधायक जिन्होंने बीरेन को समर्थन दिया था, वे इस बात से खुश नहीं है क्योंकि उनमें से सिर्फ दो को मंत्री बनाया गया था। बाद के घटनाक्रम में, एनपीपी के सभी चार विधायकों को हटा दिया गया और दो को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। परन्तु अब एनपीपी गठबंधन के मूड में नहीं दिख रहा। एनपीपी का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री एल जयंतकुमार ने कहा है कि किसी भी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं होगा। इसके अलावा हाल ही में मणिपुर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गोविंददास कोंथौजैम भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं जो भाजपा के लिए अच्छी खबर है।  

हिमाचल में बनी 9 दवाओं के सैंपल फेल

In Health
himachal medicine sample fail

हिमाचल प्रदेश में बनी कोरोना पॉजिटिव मरीजों के उपचार में सहायक एक दवा समेत नौ दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं। इनमें सात दवाएं सोलन और दो सिरमौर में बनी हैं। वहीं, प्रदेश की नौ समेत देश में बनी कुल 37 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन के अगस्त के ड्रग अलर्ट में ये दवाएं मानकों पर सही नहीं पाई गई हैं। इन दवाओं में अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली दवा, सूखी खांसी, अल्सर, कोलेस्ट्रोल, एलर्जी, सूजन, तनाव दूर करने की दवा शामिल है। अगस्त में कुल 1245 दवाओं के सैंपल लिए थे, जिनमें 1207 सैंपल मानकों पर खरे उतरे, जबकि 37 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं l सोलन जिले के आंजी स्थित मैक्स रिलीफ हेल्थ केयर में कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल में दी जाने वाली दवा फैवीमैक्स के दो सैंपल, कालाअंब स्थित डिजिटल विजन कंपनी के सूखी खांसी की दवा कपसेट सीरप, बरोटीवाला क्षेत्र की एक्टीनोवा कंपनी में अल्सर की दवा रेनीटीडाईन, बद्दी के थाना क्षेत्र में गल्फा लैबोरेटरी कंपनी की कोलेस्ट्रोल की दवा एटोरवेस्टाटिन टैबलेट, मानपुरा औद्योगिक क्षेत्र की अल्ट्रा ड्रग कंपनी में एलर्जी की दवा डोवल सेट एम, झाड़माजरी स्थित विनस बायोसाइंसेस में तैयार होने वाली सूजन दूर करने की दवा वेटनेकॉन, कालाअंब के खैरी स्थित पुष्कर फार्मा कंपनी की गाय व भैंस का दूध उतारने की दवा ओक्सीटोसिन और परवाणू की क्लीविस लाइफ साइंस कंपनी की तनाव दूर करने की दवा बुफिटिप-150 ईआर के सैंपल फेल हुए हैं। ड्रग कंट्रोलर नवनीत मरवाह ने बताया कि सैंपल फेल होने वाले उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए हैं। बाजार से स्टॉक हटाने के लिए निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।  

कैबिनेट बैठक में 22 सितम्बर से स्कूलों को खोलने पर हो सकता है फैसला

In Education
Cabinet meeting may decide on opening of schools from September 22

प्रदेश सरकार अब 5वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को खोलने की तैयारी कर रही है।  20 या 21 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में इस संदर्भ में फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने 21 सितंबर तक प्रदेश में स्कूल बंद रखे हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल प्रिंसिपलों को अगले सप्ताह से विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुलने की संभावना को देखते हुए तैयारियां पूरी रखने के लिए कहा है। स्कूल प्रिंसिपलों को विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से माइक्रो प्लान बनाने के लिए भी कहा गया है। कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने पर 2 अगस्त से दसवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को खोला गया था। पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को शिक्षकों से परामर्श लेने के लिए स्कूलों में आने की मंजूरी दी थी, लेकिन इसी बीच दोबारा संक्रमण के मामलों में तेजी आई। 10 अगस्त को सरकार ने स्कूलों को विद्यार्थियों के लिए 22 अगस्त तक बंद रखने का फैसला लिया। इस तारीख को बढ़ाकर फिर 30 अगस्त कर दिया। इसके बाद 5 सितंबर और फिर 21 सितंबर तक विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में आने पर रोक लगाई गई है। कयास लगाया जा रहा है की कोरोना संक्रमण के मामलो में कमी को देखते हुए, सरकार स्कूलों को पुनः खोलने का फैसला ले सकती है।

पैरालिंपिक खेलों में भारत का नाम विश्व पटल पर हुआ रोशन : अविनाश राय खन्ना

In Sports
India's name has been illuminated on the world stage in Paralympic Games: Avinash Rai Khanna

भाजपा प्रदेश प्रभारी एवं भारतिय पैरालिंपिक संघ के चीफ पैट्रन अविनाश राय खन्ना ने दिल्ली में पैरालिंपिक के खिलाड़ियों का स्वागत किया उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलिंपिक के बाद टोक्यो में हुए पैरालिंपिक खेलों का समापन हो गया है। जिस तरह ओलिंपिक खेलों में भारत ने दमदार प्रदर्शन किया था। उससे कहीं ज्यादा भारत के पैरा एथलीटों ने पैरालिंपिक खेलों में प्रदर्शन किया है, क्योंकि पैरालिंपिक खेलों के इतिहास में भारत ने इन पैरालिपंकि खेलों से पहले इतने पदक नहीं जीते थे, जबकि इस बार के खेलों में पैरालिंपिक के इतिहास में मिले कुल पदकों से भी ज्यादा पदक जीत लिए हैं। उन्होंने कहा की भारत को इस बार पैरालिंपिक खेलों में 19 पदक मिले जिससे देश का नाम विश्व पटल पर रोशन हुआ। भले ही पैरालिंपिक खिलाड़ी किसी न किसी रूप से दिव्यांग थे, लेकिन उनके हौसले के आगे हर चट्टान चकनाचूर हो गई है।  उन्होंने कहा कि भारत टोक्यो पैरालिंपिक में पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक के साथ कुल 19 पदकों जीतने में सफल हुआ है। यह पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। 2016 के रियो पैरालिंपिक खेलों में भारत ने चार पदक जीते थे, लेकिन इसके करीब पांच गुने पदक भारतीय खिलाड़ियों ने जीते हैं। टोक्यो पैरालिंपिक खेलों में भारत के दो एथलीट ऐसे रहे हैं, जिन्होंने दो-दो पदक अपने नाम किए हैं। इनमें शूटर अवनि लेखरा है, जिन्होंने निशानेबाजी की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में गोल्ड और ब्रांज मेडल जीता है, जबकि पुरुष निशानेबाज सिंघराज अधाना ने भी दो पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें एक सिल्वर मेडल और एक ब्रांज मेडल शामिल है। अवनि के अलावा सुमित अंतिल, मनीष नरवाल, प्रमोद भगत और कृष्णा नगर ने गोल्ड मेडल जीता है। पैरा एथलीट निषाद कुमार जो कि हिमाचल से है उन्होंने पुरुषों के हाई जंप के मुकाबले में रजत पदक जीता।

पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक का 23 सितंबर को होगा डिजिटल रिलीज़

In Entertainment
PM Narendra Modi's biopic to have a digital release on September 23

विवेक आनंद ओबेरॉय अभिनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक 'पीएम नरेंद्र मोदी' का डिजिटल रिलीज होने जा रहा है। 'पीएम नरेंद्र मोदी' 23 सितंबर से एमएक्स प्लेयर पर रिलीज होगी। फिल्म के बारे में बात करते हुए, विवेक ने कहा, "मैं अपने प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं और यह एक सम्मान की बात है कि मुझे सिनेमा के माध्यम से दुनिया को उनकी कहानी बताने का मौका दिया गया।" उन्होंने आगे कहा, "यह मोदी जी की यात्रा को उनके मामूली मूल से गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी ऐतिहासिक जीत और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके नामांकन के बारे में बताता है। मुझे बहुत खुशी है कि इस प्रेरणादायक कहानी की रिलीज के साथ अब व्यापक पहुंच होगी।" बता दें कि प्रधानमंत्री के जीवन पर आधारित बायोपिक 'पीएम नरेंद्र मोदी' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। विवेक आनंद ओबेरॉय के अलावा, इस फिल्म में मनोज जोशी, बरखा बिष्ट, जरीना वहाब और बोमन ईरानी सहित एक प्रतिभाशाली स्टार कास्ट भी प्रमुख भूमिकाओं में है। ओमंग कुमार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विवेक आनंद ओबेरॉय मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म महत्वपूर्ण वास्तविक जीवन की घटनाओं के पेचीदा उपक्रमों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के परिवर्तन का अनुसरण करती है। 

प्रदेश में फिर भारी बारिश के चलते हुआ काफी नुकसान, जन-जीवन हुआ अस्तव्यस्त

In News
Due to heavy rains again in the state, there was a lot of damage, life became disturbed

हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग के अलर्ट के बीच भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ है। जिला सिरमौर की नाहन तहसील के एक गांव में सोमवार देर रात बादल फटने से पानी के तेज बहाव में जमीन बह गई हैं। भारी बारिश के चलते फसलें भी तबाह हो गई हैं। मनाली के पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी से घाटी के मौसम में ठंडक बढ़ गई है। कुल्लू के बुरुआ गांव में नाले में बाढ़ आने से सेब के बगीचों को भारी नुकसान हुआ है। वंही प्रदेश के कई क्षेत्रों में सोमवार रात से लगातार बारिश जारी है। प्रदेश में  भूस्खलन से छोटी-बड़ी दर्जनों सड़कें बंद हो गई हैं। खराब मौसम की वजह से सूबे में पानी और बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने मंगलवार को प्रदेश के मध्य पर्वतीय जिलों शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, चंबा सहित कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वंही प्रदेश में 26 सितंबर तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।  

आईफोन 13 सीरीज़ खरदीने पर देना होगा टैक्स

In National News
Tax will have to be paid on the purchase of iPhone 13 series

एप्पल ने हाल ही में अपनी नई आईफ़ोन13 सीरीज को लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत 69,900 रुपये है। बता दें कि अमेरिका के  मुकाबले भारत में इनकी कीमत ज़्यादा है। जहां अमेरिका में आईफ़ोन13 की कीमत 51,310 रुपये है, वहीं भारत में इसी मॉडल के लिए 79,900 रुपये चुकाने होंगे। इसका कारण है कि आईफ़ोन 12 की तरह आईफ़ोन13 भी भारत में मैन्यूफैक्चर नहीं होंगे। इन सीरीज़ के लिए स्मार्टफोन्स को इंपोर्ट किया जाएगा। यानि इंडियंस को इस स्मार्टफोन पर 22.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी देनी पड़ेगी। भारत में ग्राहक को आईफोन 13 मिनी खरीद पर कस्टम टैक्स के रूप में करीब 10,880 रुपये देने पड़ेंगे। यही नहीं कस्टमर्स को आईफोन13 खरीदने पर GST भी अदा करना होगा। अभी आईफोन 13 पर GST लगभग 10,662 रुपये है।  इस तरह अगर आईफोन 13 प्रोमैक्स खरीदना हैं तो 40,034 रुपये टैक्स, आईफोन 13मिनी पर 21,543 टैक्स, आईफोन13 पर 24,625 टैक्स व आईफोन 13 प्रो पर 36,952 रुपये टैक्स देना होगा।

अफगानिस्तान: तालिबानी सरकार का आज होगा ऐलान, मुल्ला बरादर को मिलेगी कमान

In International News
अफगानिस्तान: तालिबानी सरकार का आज होगा ऐलान,  मुल्ला बरादर  को मिलेगी कमान

तालिबान सूत्रों ने बताया कि दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के चेयरमैन मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को सरकार का प्रमुख बनाने की सार्वजनिक घोषणा जल्द ही होगी। मुल्ला बरादर के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब व शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई की भी सरकार में अहम भूमिका होगी। तालिबान के सूचना व संस्कृति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती इनामुल्लाह सामंगानी ने कहा कि सभी शीर्ष नेता काबुल पहुंच चुके हैं और नई सरकार का एलान करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। सरकार के गठन को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है, और अब मंत्रिमंडल को लेकर कुछ आवश्यक बातचीत हो रही है। अमेरिकी सेना के जाने के बाद संकट में घिरे अफगानिस्तान में शनिवार को तालिबान सरकार का एलान होगा। तालिबान का सह-संस्थापक मुल्ला बरादर इस सरकार का नेतृत्व करेगा। हालांकि नई सरकार का गठन शुक्रवार को होना था, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नई सरकार के गठन की घोषणा शनिवार को होगी। 

पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं

In Kavya Rath
I know I will call you soil, in which I have gone a hundred times

भारत का एक ऐसा कवि जिसे स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि की ख्याति प्राप्त हुई। ऐसा कवि जिसकी कविताओं में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति। एक ऐसा कवि जो साहित्य का वह सशक्त हस्ताक्षर हैं जिसकी कलम में दिनकर यानी सूर्य के समान चमक थी। हम बात कर रहे है रामधारी सिंह दिनकर की। उनकी ही लिखी कविता 'परिचय' की इन पंक्तियों से बेहतर भला उनका परिचय क्या हो सकता है ' मुझे क्या गर्व हो अपनी विभा का,चिता का धूलिकण हूँ , शार हूँ मैं ,पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चूका सौ बार हूँ मैं ' 23 सितम्बर को राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती होती है। पूरा देश अपने राष्ट्रकवि को याद करता है, नमन करता है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' वो कवि है जिनकी रचनाओं  में ओज, शौर्य, प्रेम और सौंदर्य सब एक साथ आकार पाते हैं। वे आंदोलित भी करते हैं और आह्लादित भी। वे 'परशुराम की प्रतीक्षा' भी लिखते है और 'उर्वशी' भी। दिनकर द्वंद्वात्मक ऐक्य के कवि हैं।  उन्हें समय को साधने वाला कवि गया। पर दिनकर ‘राष्ट्रकवि’ ही नहीं 'जनकवि' भी थे। वे उन चंद कवियों में शुमार रहे है जिनके द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ आज भी आम जनमानस द्वारा पढ़ी और दोहराई जाती है। दिनकर वो कवि थे जिन्होंने देश के क्रांतिकारी आंदोलन को अपनी कविता से स्वर दिया। दिनकर वो कवि थे जिनके द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ 'सिंहासन खाली करो की जनता आती है' आज भी देश के जान आंदोलनों की आवाज है। रामधारी सिंह दिनकर जितने सुगढ़ कवि थे, उतने ही सचेत गद्य लेखक भी रहे। आज़ादी के बाद वे पंडित नेहरू और सत्ता के क़रीब भी रहे, कांग्रेस ने उन्हे राज्यसभा भी भेजा लेकिन राष्ट्रकवि का दायित्व उन्होंने हमेशा निभाया। दिनकर सारी उम्र सियासत से लोहा लेते रहे। उन्होंने कभी किसी नेता की जय-जयकार नहीं की, हमेशा उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि रहा। एक वाकिया ऐसा ही है जब लालकिले की सीढ़ियों से उतरते हुए नेहरू लड़खड़ा गए..तभी दिनकर ने उनको सहारा दिया।  इसपर नेहरू ने कहा- शुक्रिया.., दिनकर तुरंत बोले-''जब-जब राजनीति लड़खड़ाएगी, तब-तब साहित्य उसे सहारा देगा।'' उनके ये तेवर ताउम्र बरकरार रहे। 11 वर्षों की नौकरी में 23 बार हुआ था स्थानांतरण राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की राष्ट्रभक्ति ब्रिटिश हुकूमत को रास नहीं आती थी। 11 वर्षों की नौकरी में उनका 23 बार स्थानांतरण किया गया, पर उन्होंने अंग्रेजी अत्याचार के विरूद्ध लिखना नहीं छोड़ा। 23 सितंबर,1908 को बेगूसराय के सिमरिया गांव में जन्मे रामधारी सिंह दिनकर जब दो वर्ष के थे तब उनके पिता रवि सिंह का देहांत हो गया था। मां मनरूप देवी ने ही उनका पालन-पोषण किया। पटना कॉलेज से हिन्दी में स्नातक की डिग्री लेने के बाद 1928 में साइमन कमीशन के भारत आगमन के विरोध में गांधी मैदान में हुए आंदोलन में वे शामिल हो गए। इसके उपरांत वर्ष 1934 में उन्होंने पटना निबंधन कार्यालय में सब रजिस्ट्रार के पद पर सरकारी नौकरी शुरू कर दी।1945 तक उन्होंने यह नौकरी की। फिर 1945 में उन्हें प्रचार निदेशालय में उप निदेशक बना दिया गया। 1947 में देश की आजादी मिलने तक उन्होंने नौकरी की। इस बीच दिनकर ने जब वर्ष 1935 में जब 'रेणुका' नामक कविता संग्रह की रचना की तो उनका तबादला पटना निबंधन कार्यालय से बाढ़ कार्यालय कर दिया गया। फिर वर्ष 1938 आया और उनका कविता संग्रह 'हुंकार' प्रकाशित हुआ, तब फिर उनपर ब्रिटिश सरकार विरोधी होने के आरोप लगे और उनका तबादला नरकटियागंज कर दिया गया। जब-जब उनकी कोई नई पुस्तक प्रकाशित होती, उनका तबादला भी साथ-साथ होता रहता। पर दिनकर की कलम की धार कम नहीं हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होते ही ब्रिटिश हुकूमत की आँखों में दिनकर और ज्यादा अखरने लगे और  उन्हें नौकरी छोड़ने को बाध्य किया जाने लगा। तब ब्रिटिश हुकूमत ने उनका तबादला 1945 में प्रचार विभाग में उप निदेशक के पद पर कर दिया। ब्रिटिश हुकूमत को उनसे शिकायत रहती थी कि उनकी रचनाओं से क्रांतिकारी आंदोलन को हवा मिलती थी, और ये सच भी था।   'उर्वशी' के लिए मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार दिनकर ने  'रेणुका', 'हुंकार', 'रसवंती', 'द्वंद्व गीत', 'कुरुक्षेत्र', 'धूपछांह', 'समधनी', 'बापू' आदि महत्वपूर्ण कविता संग्रहों की रचना की थी। दिनकर को उनकी रचना 'उर्वशी' के लिए 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1959 में भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण सम्मान एवं 1959 में ही 'संस्कृति के चार अध्याय' पुस्तक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ये उनकी तठस्तता ही थी कि उनको सत्ता का विरोध करने के बावजूद साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मविभूषण आदि तमाम बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया।   "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है " सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है   जनता ? हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वही जाड़े-पाले की कसक सदा सहनेवाली जब अँग-अँग में लगे साँप हो चूस रहे तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहनेवाली जनता ? हाँ, लम्बी-बडी जीभ की वही कसम "जनता,सचमुच ही, बडी वेदना सहती है।" "सो ठीक, मगर, आखिर, इस पर जनमत क्या है ?" 'है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है ?" मानो,जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में अथवा कोई दूधमुँही जिसे बहलाने के जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में लेकिन होता भूडोल, बवण्डर उठते हैं जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है हुँकारों से महलों की नींव उखड़ जाती साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ ? वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुड़ता है अब्दों, शताब्दियों, सहस्त्राब्द का अन्धकार बीता; गवाक्ष अम्बर के दहके जाते हैं यह और नहीं कोई, जनता के स्वप्न अजय चीरते तिमिर का वक्ष उमड़ते जाते हैं सब से विराट जनतन्त्र जगत का आ पहुँचा तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तय करो अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो आरती लिए तू किसे ढूँढ़ता है मूरख मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में ? देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं धूसरता सोने से शृँगार सजाती है दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो सिंहासन खाली करो कि जनता आती है "कलम, आज उनकी जय बोल " जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगल रही सौ लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल कलम, आज उनकी जय बोल " कृष्ण की चेतावनी " वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान् हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये। ‘दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है। हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है, मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल। अमरत्व फूलता है मुझमें, संहार झूलता है मुझमें। ‘उदयाचल मेरा दीप्त भाल, भूमंडल वक्षस्थल विशाल, भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं, मैनाक-मेरु पग मेरे हैं। दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर, सब हैं मेरे मुख के अन्दर। ‘दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख, मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख, चर-अचर जीव, जग, क्षर-अक्षर, नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर। शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र, शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र। ‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश, शत कोटि जिष्णु, जलपति, धनेश, शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल, शत कोटि दण्डधर लोकपाल। जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें, हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें। ‘भूलोक, अतल, पाताल देख, गत और अनागत काल देख, यह देख जगत का आदि-सृजन, यह देख, महाभारत का रण, मृतकों से पटी हुई भू है, पहचान, इसमें कहाँ तू है। ‘अम्बर में कुन्तल-जाल देख, पद के नीचे पाताल देख, मुट्ठी में तीनों काल देख, मेरा स्वरूप विकराल देख। सब जन्म मुझी से पाते हैं, फिर लौट मुझी में आते हैं। ‘जिह्वा से कढ़ती ज्वाल सघन, साँसों में पाता जन्म पवन, पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर, हँसने लगती है सृष्टि उधर! मैं जभी मूँदता हूँ लोचन, छा जाता चारों ओर मरण। ‘बाँधने मुझे तो आया है, जंजीर बड़ी क्या लाया है? यदि मुझे बाँधना चाहे मन, पहले तो बाँध अनन्त गगन। सूने को साध न सकता है, वह मुझे बाँध कब सकता है? ‘हित-वचन नहीं तूने माना, मैत्री का मूल्य न पहचाना, तो ले, मैं भी अब जाता हूँ, अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ। याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा। ‘टकरायेंगे नक्षत्र-निकर, बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर, फण शेषनाग का डोलेगा, विकराल काल मुँह खोलेगा। दुर्योधन! रण ऐसा होगा। फिर कभी नहीं जैसा होगा। ‘भाई पर भाई टूटेंगे, विष-बाण बूँद-से छूटेंगे, वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे, सौभाग्य मनुज के फूटेंगे। आखिर तू भूशायी होगा, हिंसा का पर, दायी होगा।’ थी सभा सन्न, सब लोग डरे, चुप थे या थे बेहोश पड़े। केवल दो नर ना अघाते थे, धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे। कर जोड़ खड़े प्रमुदित, निर्भय, दोनों पुकारते थे ‘जय-जय’! ” परशुराम की प्रतीक्षा ” गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो ? शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ? उनका, जिनमें कारुण्य असीम तरल था, तारुण्य-ताप था नहीं, न रंच गरल था; सस्ती सुकीर्ति पा कर जो फूल गये थे, निर्वीर्य कल्पनाओं में भूल गये थे; गीता में जो त्रिपिटक-निकाय पढ़ते हैं, तलवार गला कर जो तकली गढ़ते हैं; शीतल करते हैं अनल प्रबुद्ध प्रजा का, शेरों को सिखलाते हैं धर्म अजा का; सारी वसुन्धरा में गुरु-पद पाने को, प्यासी धरती के लिए अमृत लाने को जो सन्त लोग सीधे पाताल चले थे, (अच्छे हैं अबः; पहले भी बहुत भले थे।) हम उसी धर्म की लाश यहाँ ढोते हैं, शोणित से सन्तों का कलंक धोते हैं। ” हमारे कृषक ” जेठ हो कि हो पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है बैलों के ये बंधू वर्ष भर क्या जाने कैसे जीते हैं बंधी जीभ, आँखें विषम गम खा शायद आँसू पीते हैं पर शिशु का क्या, सीख न पाया अभी जो आँसू पीना चूस-चूस सूखा स्तन माँ का, सो जाता रो-विलप नगीना विवश देखती माँ आँचल से नन्ही तड़प उड़ जाती अपना रक्त पिला देती यदि फटती आज वज्र की छाती कब्र-कब्र में अबोध बालकों की भूखी हड्डी रोती है दूध-दूध की कदम-कदम पर सारी रात होती है दूध-दूध औ वत्स मंदिरों में बहरे पाषान यहाँ है दूध-दूध तारे बोलो इन बच्चों के भगवान कहाँ हैं दूध-दूध गंगा तू ही अपनी पानी को दूध बना दे दूध-दूध उफ कोई है तो इन भूखे मुर्दों को जरा मना दे दूध-दूध दुनिया सोती है लाऊँ दूध कहाँ किस घर से दूध-दूध हे देव गगन के कुछ बूँदें टपका अम्बर से हटो व्योम के, मेघ पंथ से स्वर्ग लूटने हम आते हैं दूध-दूध हे वत्स! तुम्हारा दूध खोजने हम जाते हैं ” समर शेष है ” ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो , किसने कहा, युद्ध की वेला चली गयी, शांति से बोलो? किसने कहा, और मत वेधो ह्रदय वह्रि के शर से, भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से? कुंकुम? लेपूं किसे? सुनाऊँ किसको कोमल गान? तड़प रहा आँखों के आगे भूखा हिन्दुस्तान । फूलों के रंगीन लहर पर ओ उतरनेवाले ! ओ रेशमी नगर के वासी! ओ छवि के मतवाले! सकल देश में हालाहल है, दिल्ली में हाला है, दिल्ली में रौशनी, शेष भारत में अंधियाला है । मखमल के पर्दों के बाहर, फूलों के उस पार, ज्यों का त्यों है खड़ा, आज भी मरघट-सा संसार । वह संसार जहाँ तक पहुँची अब तक नहीं किरण है जहाँ क्षितिज है शून्य, अभी तक अंबर तिमिर वरण है देख जहाँ का दृश्य आज भी अन्त:स्थल हिलता है माँ को लज्ज वसन और शिशु को न क्षीर मिलता है। पूज रहा है जहाँ चकित हो जन-जन देख अकाज सात वर्ष हो गये राह में, अटका कहाँ स्वराज? अटका कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली! तू क्या कहती है? तू रानी बन गयी वेदना जनता क्यों सहती है? सबके भाग्य दबा रखे हैं किसने अपने कर में? उतरी थी जो विभा, हुई बंदिनी बता किस घर में । समर शेष है, यह प्रकाश बंदीगृह से छूटेगा और नहीं तो तुझ पर पापिनी! महावज्र टूटेगा । समर शेष है, उस स्वराज को सत्य बनाना होगा जिसका है ये न्यास उसे सत्वर पहुँचाना होगा धारा के मग में अनेक जो पर्वत खडे हुए हैं गंगा का पथ रोक इन्द्र के गज जो अडे हुए हैं। कह दो उनसे झुके अगर तो जग मे यश पाएंगे अड़े रहे अगर तो ऐरावत पत्तों से बह जाऐंगे। समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो, शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो, पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोडेंगे, समतल पीटे बिना समर कि भूमि नहीं छोड़ेंगे। समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर, खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता की काली जंजीर। समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं, गांधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं, समर शेष है, अहंकार इनका हरना बाकी है, वृक को दंतहीन, अहि को निर्विष करना बाकी है। समर शेष है, शपथ धर्म की लाना है वह काल, विचरें अभय देश में गाँधी और जवाहर लाल, तिमिर पुत्र ये दस्यु कहीं कोई दुष्काण्ड रचें ना, सावधान हो खडी देश भर में गाँधी की सेना, बलि देकर भी बलि! स्नेह का यह मृदु व्रत साधो रे, मंदिर औ’ मस्जिद दोनों पर एक तार बाँधो रे। समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।

हिमाचल प्रदेश : खेल विभाग में कनिष्ठ कोच के भरे जाएंगे सौ पद

In Job
Himachal Pradesh: Hundred posts of junior coach will be filled in sports department

प्रदेश में खेल विभाग में कनिष्ठ कोच के सौ पद भरे जाएंगे। राज्य लोकसेवा आयोग के परामर्श से खेल विभाग ने वीरवार को राजपत्र में कनिष्ठ कोच के भर्ती एवं पदोन्नति नियम अधिसूचित कर दिए हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण से जुड़े संस्थान से कोचिंग में एक वर्ष का डिप्लोमा अनिवार्य किया गया है। आवेदन करने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक रखी गई है। 85 अंकों की लिखित परीक्षा होगी जबकि 15 अंकों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर होगा। प्रदेश से दसवीं या बारहवीं कक्षा पास करने वाले 18 से 45 वर्ष की आयु वाले आवेदन करने के लिए पात्र होंगे। खेल विभाग में काफी समय बाद कनिष्ठ कोच के पद भरने की प्रक्रिया शुरू हुई है। राजपत्र में अधिसूचित भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार राज्य और राष्ट्र स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भर्ती में अधिमान दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की रूढ़ियों, रीतियों और बोलियों का ज्ञान होना आवेदकों के लिए जरूरी होगा। हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में कनिष्ठ कोच को संविदा के आधार पर प्रारंभ में एक वर्ष के लिए लगाया जाएगा। इसे आगे बढ़ाया जाएगा। नियुक्त होने वाले कनिष्ठ कोच को 13900 रुपये वेतन दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की ओर से लिखित परीक्षा ली जाएगी। भर्ती में सरकार की ओर से समय-समय पर अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछडे़ वर्गों और व्यक्तियों के अन्य प्रवर्गों के लिए सेवा में आरक्षण दिया जाएगा।

Sign up for the latest of First Verdict

Get the latest news, articles, exclusive insights and much more right in your inbox!