•   Sunday Jun 13
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IIT Mandi to study packing of apples and kernels this year june 2021 13
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आईआईटी मंडी इस साल सेब और गुठलीदार फलों की पैकिंग पर करेगी अध्ययन

आईआईटी मंडी इस सीजन में सेब और अन्य गुठलीदार फलों की पैकिंग को लेकर अध्ययन करेंगे। अगले सीजन में फलों की आधुनिक तकनीक का ट्रायल आरंभ कर दिया जाएगा। पैकिंग क्षमता कितनी होनी चाहिए, इसे लेकर भी अध्ययन होगा।  आईआईटी से आधुनिक पैकिंग तकनीक मिलने के बाद प्रदेश सरकार पैकिंग सामग्री का कंपनियों से बातचीत करके उत्पादन कराएगी।  बागवानों और किसानों को आधुनिक पैकिंग तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आईआईटी मंडी को 18.50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है। पैकिंग तकनीक मिलने से विपणन के समय होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।  

Now packing of fruits and vegetables will be done with new technology in Himachal june 13 2021
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हिमाचल में अब नई तकनीक से होगी फल सब्ज़ियों की पैकिंग, पढ़िए पूरा मामला

प्रदेश में अब फल सब्ज़ियों की पैकिंग के लिए नई तकनीक का प्रयोग किया जाएग। पुरानी पैकिंग टेक्नोलॉजी बदलने से अब फल और सब्जियों की बर्बादी रुकेगी। इससे किसानों और बागवानों की आमदनी भी बढ़ेगी। आईआईटी मंडी द्वारा आधुनिक पैकिंग टेक्नोलॉजी प्रदेश के बागवानों और किसानों की मिलेगी। अभी तक प्रदेश में फलों और सब्जियों के विपणन के समय करीब तीस फीसदी फसलें बर्बाद होती हैं। नई तकनीक से किसान और बागवान इस आर्थिक नुकसान से बच सकेंगे। जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार ने आईआईटी मंडी को फलों और सब्जियों की पैकिंग के लिए नई तकनीक विकसित करने को 18.50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट सौंप दिया है। आईआईटी के छात्र इस साल फलों के विपणन के समय पेश आने वाली दिक्कतों का अध्ययन करेंगे। पैकिंग के दौरान आने वाली समस्याओं का पता लगाया जाएगा। वर्तमान में फलों और सब्जियों की पैकिंग क्षमता से होने वाले नुकसान का सही आकलन भी किया जाना है। प्रदेश से बाहर ऑफ सीजन में सब्जियों को चालीस किलो की बोरियों में भरकर किसान बेचते रहे हैं। अब किसान सेब कार्टन में भी फूल गोभी भर कर मंडियों में पहुंचा रहे हैं। किसानों को पैकिंग की आधुनिक तकनीक मिलने से नुकसान कम होगा और दाम अच्छे मिलेंगे।   

Government buses will run on 1004 routes on the first day june 13 2021
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हिमाचल प्रदेश में 14 जून से चलेगी बसें, पहले दिन 1004 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें

शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में बसें चलाने को मजूरी मिल गई है। हिमाचल प्रदेश में सोमवार से करीब 1004 रूटों पर हिमाचल पथ परिवहन निगम बसें चलाने की तैयारी है। इसके बाद सवारियों का रिस्पांस देखकर एचआरटीसी बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए चालकों-परिचालकों से रविवार तक डिपो या अड्डा में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। निजी ऑपरेटरों की सहमति नहीं बनी तो एचआरटीसी बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रदेश में चलाए जाने वाले रूटों के हिसाब से चालकों-परिचालकों की रोटेशन में ड्यूटियां लगाई जाएंगी। सोमवार सुबह से 24 घंटे निगम की बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। बसों में सवारियों की ऑक्यूपेंसी जांचने के लिए इंस्पेक्टर फील्ड में सेवाएं देंगे। 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ हिमाचल में बसें चलेंगी। बसों में मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। सवारियों के पास सैनिटाइजर होना जरूरी है। तीन वाली सीट पर दो और 2 वाली सीट पर एक सवारी बैठेगी। 

former chief minister virbhadra singh again corona positive june 11 2021
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दोबारा हुए कोरोना पॉजिटिव

आईजीएमसी में दाखिल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दोबारा कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। आईजीएमसी के कॉलेज प्राचार्य डॉ. रजनीश पठानिया ने इस बात की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि उन्हें अब अस्पताल के मेक शिफ्ट वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। हालांकि इसको लेकर अभी डॉक्टर परामर्श कर रहे है। बता दें कि पहले भी कोरोना संक्रमित होने के बाद वे चंडीगढ़ इलाज करवाने गए थे। चंडीगढ़ से लौटने के बाद पूर्व सीएम आईजीएमसी में दाखिल हैं। यहां पर कार्डियोलॉजी विभाग मैं उन्हें दाखिल किया गया है। जहां पर चिकित्सक उन पर निगरानी बनाए हुए हैं। 

Tourism business is back on track in Himachal Pradesh june 11 2021
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हिमाचल प्रदेश में फिर पटरी पर लौटा रहा पर्यटन कारोबार

हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा अब गिरने लगा है। वंही हिमाचल में कोरोना कर्फ्यू में ढील के बाद अब इसका असर प्रदेश के पर्यटन विभाग में भी दिखने लगा है। सूबे के पर्यटक शहरों शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। पिछले एक हफ्ते के दौरान अकेले राजधानी शिमला में ही 2500 से ज्यादा पर्यटकों ने दस्तक दी। कर्फ्यू में सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक ढील और वाहनों से घूमने वालों से पुलिस की ज्यादा रोक-टोक न होने की वजह से अब होटल, टैक्सी व ढाबा संचालकों के पुराने दिन लौटने शुरू हो गए हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने की वजह से न सिर्फ व्यवसायिक संस्थानों में रौनक बढ़ गई है, बल्कि सभी की आमदनी में भी इजाफा होने लगा है। बरहाल प्रदेश में आज होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में रियायतें बढ़ने की संभावना के साथ ही अब राहत की उम्मीद भी जग गई है।  

Decision will be taken on college examinations in cabinet meeting today june 11 2021
In Education

हिमाचल : कैबिनेट की बैठक में कॉलेज की परीक्षाओं पर आज होगा फैसला

हिमाचल प्रदेश में डिग्री कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर आज कैबिनेट की बइठल में फैसला होगा। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने कॉलेज के प्रिंसिपल, शिक्षकों, विवि प्रबंधन, छात्रों और अभिभावकों के साथ वीडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं को लेकर चर्चा की थी। इस दौरान अधिकांश लोगों ने फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने पर सहमति दर्ज की थी। इसी बाबत 25 जून के बाद फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने की संभावना बढ़ गई है। उधर, फर्स्ट ईयर में दाखिलों के लिए बारहवीं के विद्यार्थियों को अभी इंतजार करना होगा। सीबीएसई की ओर से अंक निर्धारण का फार्मूला अभी तैयार नहीं किया गया है। सीबीएसई का फार्मूला तय होने के बाद प्रदेश सरकार उसमें कुछ संशोधन कर अपना नया फार्मूला तय करेगी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद ही दाखिलों की प्रक्रिया शुरू होगी।  

91 thousand new cases of corona were reported in the country, 3402 people lost their lives in the last 24 hours
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देश में कोरोना के 91 हज़ार नए मामले आए सामने, बीते 24 घंटे में 3402 लोगों ने गवाई जान

भारत में कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार कमी आ रही है, लेकिन मौत के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले 24 घंटे में देशभर में कोविड-19 की वजह से एक बार फिर 3402 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि इस दौरान 91 हजार 226 नए केस सामने आए हैं। इससे पहले गुरुवार यानी 10 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार देशभर में 94 हजार नए मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 6148 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके बाद भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ 92 लाख 73 हजार 338 हो गई है, जबकि 3 लाख 63 हजार 97 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वंही स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पिछले 24 घंटे में 1.33 लाख से ज्यादा लोग ठीक हुए है।  इसके बाद भारत में कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 2 करोड़ 77 लाख 78 हजार 894 हो गई है। इसके साथ ही देशभर में एक्टिव मामलों  में लगातार गिरावट आई है और 11 लाख 31 हजार 347 लोगों का इलाज चल रहा है। 

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महंगाई ने कमर तोड़ी, जनता का तेल निकाल रही सरकार : मुकेश

In Politics
Inflation broke the back, the government is extracting oil from the public: Mukesh june 7 2021

बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। ऐसे में विपक्ष भी महंगाई के मुद्दे को भुनाकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने खुद मोर्चा संभाला हुआ है। कोरोना काल में सड़क पर उतर सरकार को घेरना मुमकिन नहीं है सो अग्निहोत्री ने मीडिया बयानों और सोशल मीडिया को विरोध का मंच बनाया है और वे लगातार सरकार पर हमलावर है।  नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहाेत्री ने कहा कि महंगाई ने तमाम रिकार्ड तोड़ डाले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सात साल पहले केंद्र की सत्ता में आने के समय महंगाई नियंत्रित करने का वादा किया था। पेट्रोल-डीजल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत वीडियो क्लिप हैं। हालांकि उस वक्त कच्चे तेल के रेट उफान पर थे। पर आज तो कच्चा तेल 32-33 रुपये है। बावजूद इसके जनता को राहत देने की बजाय सरकार जनता का ही तेल निकालने में लगी है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भारी भरकम इक्साइज़ ड्यूटी ने पेट्रोल की दरों में आग लगा रखी है। बीते साल केंद्र ने इस से चार लाख करोड़ के आसपास की कमाई की, जो इससे पिछले साल के मुकाबले 77 फीसदी अधिक बताई जाती है। इसलिए कच्चे तेल के दाम कम होने के बावजूद उपभोक्ता को फायदा नहीं दिया गया। एक साल पेट्रोल का रेट 25 रुपये बढ़ा है। अग्निहोत्री ने कहा कि तेल का रेट निर्धारण करने के लिए कच्चे तेल का रेट में  तेल शुद्ध करने की लागत, इक्साइज़ डयूटी, डीलर मुनाफ़ा, सेंट्रल इक्साइज़ व राज्यों का टैक्स जोड़ा जाता है। वर्तमान में केंद्र सरकार करीब 33-34 रुपये प्रति लीटर सेंट्रल इक्साइज़ ले रही है। तेल शुद्ध करने के दाम तो अढ़ाई रुपये के आसपास है, डीलर की कमीशन पेट्रोल पर पौने चार और ड़ीजल पर अढ़ाई रुपये बताई जाती है। बाक़ी राज्य के टैक्स है। अग्निहोत्री का कहना है कि हिमाचल सरकार पेट्रोल पर 15 रुपये 50 पैसे और डीजल पर 9 रुपये टैक्स लगा रही है। इसलिए पेट्रोल 90 और डीजल 82 रुपये प्रति लीटर के आसपास चल रहा है। केंद्र और राज्य दोनों आम जनता पर महंगाई का बोझ डाल रहे है। अग्निहोत्री का कहना है कि कोरोना के इस मुश्किल समय में आम आदमी को रहत देने की आवश्यकता है, पर महंगाई आफत बन चुकी है। रोजगार रहे नहीं और बढ़ती महंगाई से जीवन यापन मुश्किल हो गया है। न सिर्फ पेट्रोल डीजल बल्कि खाद्य तेल, दालें और आटे तक के दाम आसमान छू  रहे है। झूठे थे वादे, प्रदर्शन करने वाले मौन क्यों ? नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभाओं में चिल्ला -चिल्ला कर नारे देते थे  "सस्ता पेट्रोल-डीजल चाहिए कि नहीं चाहिए, बहुत हुई महंगाई की मार, और भी बहुत कुछ। पर वो सब झूठ था और सत्ता मिलने के बाद मोदी ने आम जनता को कोई रहता नहीं दी। आज आम आदमी त्रस्त ही। जो भाजपाई सड़कों पर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करते थे, अब मौन क्यों है ?

आर्ट ऑफ लिविंग - याेग भारती ने किए काेराेना मरीजाें के हाैसले बुलंद

In Health
Art of Living - Yog Bharti raises the status of corona  patients june 7 2021

आयुष विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग व योग भारती की सहभागिता से कोविड-19 रोगियों के लिए आयुष के माध्यम से कल्याणकारी कार्यक्रम स्वास्थ्य परिवार, कल्याण व आयुष मंत्री डॉ. राजीव सहजल द्वारा संपूर्ण प्रदेश के लिए आरंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कोविड-19 से संक्रमित रोगियों को आयुष पद्धतियों के समग्र स्वास्थ्य जीवन शैली दृष्टिकोण के माध्यम से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है। आयुष विभाग के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में रोगियों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए मंत्री स्वयं लाइव योग सत्रों में वर्चुअल माध्यम से जुड़कर संक्रमितों से संवाद स्थापित कर उनका कुशल क्षेम जान रहे हैं तथा उन्हें आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाकर स्वास्थ्य जीवन शैली जीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष मंत्री राजीव सहजल अपने इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के माध्यम से कोविड-19 के विरुद्ध इस युद्ध में जुटे आयुष चिकित्सा प्रदाताओं का उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर रहे हैं एवं आयुष चिकित्सा प्रदाताओं के साथ स्वयं कोविड संक्रमित के घर जाकर हाल-चाल जान रहे हैं तथा उनका हौंसला बढ़ा रहे हैं।   मंत्री व्यक्तिगत तौर पर संक्रमित रोगियों के घर जाकर कोविड केयर किट का वितरण कर रहे हैं, जिसमें संक्रमितों को अन्य सामग्रियों के साथ-साथ आयुष काढ़ा, चवनप्राश तथा कबाशीर कुडिनीर आयुष दवा प्रदान की जा रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आयुष घरद्वार कार्यक्रम का दृष्टिकोण आयुष के सिद्धांतों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रिकवरी दर को बढ़ाना, रोगियों के जीवन स्तर में सुधार करना तथा अस्पताल में भर्ती की जरूरत दर को घटाना है। इसके साथ-साथ कोविड-19 से मृत्यु दर को कम करना तथा संक्रमण दर को भी कम करना है तथा कोविड-19 के गंभीर दुष्प्रभावों को रोकने व शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर बीमारी से उभरने के बाद बेहतर पुनर्वास सुनिश्चित करना है। कोविड-19 महामारी के इस दौर में मानव सेवा में आयुष चिकित्सा पद्धति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बताया गया कि अपने दृष्टिकोण के अनुरूप आयुष विभाग द्वारा मई माह में लगभग एक हजार वर्चुअल समूह बनाकर 20 हजार से ज्यादा कोविड-19 रोगियों को इस कार्यक्रम के माध्यम से सेवाएं प्रदान की है। आयुष विभाग का यह महत्वाकांक्षी तथा जन कल्याणकारी कार्यक्रम प्रदेश में पिछले कुछ समय से लगातार घट रही कोविड संक्रमण दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मरीजाें काे सोशल मीडिया से जोड़ा गया  आयुष विभाग  से मिली जानकारी के मुताबिक आयुष चिकित्सा अधिकारियों तथा आयुष स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया में जिसमें व्हाट्सएप, जूम इत्यादि पर वर्चुअल समूह बनाए गए हैं तथा गृह एकांतवास, समर्पित कोविड केयर सेंटर, समर्पित कोविड स्वास्थ्य केंद्र आदि में रह रहे रोगियों को पूरे प्रदेश में इससे जोड़ा गया है। आर्ट ऑफ लिविंग तथा योग भारती के लगभग 300 प्रशिक्षकों की सहायता से इन वर्चुअल समूहों में लाइव सेशन अथवा ऑडियो विजुअल उपकरणों के माध्यम से योग, प्राणायाम, स्वास्थ्य क्रियाओं व अभ्यास, ध्यान, योग व निद्रा आदि का अभ्यास रोगियों को करवाया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत तनाव को कम करने, मन को शांत रखने तथा भय को कम करने के तरीके से रोगियों को अवगत करवाया जा रहा है। रोगी कोविड संक्रमण के पश्चात क्या करें, क्या न करें इस संबंध में भी जानकारी प्रदान की जा रही है। आयुष चिकित्सकों तथा आयुष स्वास्थ्य प्रदाताओं द्वारा रोगियों के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल की जा रही है तथा आवश्यक होने पर शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ आहार-विहार संबंधित दिशा-निर्देश भी रोगियों को दिए जा रहे हैं ताकि वे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पा सके। आयुष सिद्धांतों के अनुरूप खुशहाल व समग्र स्वास्थ्य जीवन शैली अपनाकर सुखी स्वस्थ जीवन जीने व आयुष चिकित्सा पद्धति एवं घरेलू उपचारों को अपनाकर प्रकृति से जुड़े रहने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। काेराेना पाॅजिटिव मरीज उत्साह के साथ जुड़ रहे कोविड संक्रमण से जूझ रहे रोगी भरपूर उत्साह के साथ इस कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं तथा विभिन्न जानकारियों से लाभ अर्जित कर अपने रोग के प्रति सचेत हो कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। कोविड के विरुद्ध इस लड़ाई में आयुष विभाग संपूर्ण तत्परता और निरंतरता के साथ मानव सेवा में जुड़ा रहेगा। आयुर्वेद विभाग में तैनात चिकित्सक व अन्य कर्मचारी सक्रिय तौर पर अपनी सेवाएं समर्पित कोविड केयर केन्द्रों एवं कोविड केयर स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा होम आईसोलेशन में रह रहे रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण तथा स्वास्थ्य स्थिति को जांचा जा रहा है। सैंपल लेने तथा एक्टिव केस फाइंडिंग में आयुर्वेद चिकित्सक कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त गत वर्ष के दौरान विभिन्न बैरियर पर कोविड जांच के लिए आयुर्वेद विभाग का स्टाफ तैनात किया गया था वहीं काॅन्टैक्ट ट्रैसिंग टीम ने भी आयुर्वेद के अधिकारी व कर्मचारी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। आयुर्वेद विभाग द्वारा राजकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय पपरोला जिला कांगड़ा को समर्पित कोविड स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है, जिसमें कोविड रोगियों के लिए 100 बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त शिमला स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अस्पताल को समर्पित कोविड स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है, जिसमें 50 बिस्तरों की उपलब्धता है, जिसे शत-प्रतिशत रूप से आयुर्वेद विभाग के स्टाफ द्वारा संचालित किया जा रहा है।

हिमाचल : कैबिनेट की बैठक में कॉलेज की परीक्षाओं पर आज होगा फैसला

In Education
Decision will be taken on college examinations in cabinet meeting today june 11 2021

हिमाचल प्रदेश में डिग्री कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर आज कैबिनेट की बइठल में फैसला होगा। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने कॉलेज के प्रिंसिपल, शिक्षकों, विवि प्रबंधन, छात्रों और अभिभावकों के साथ वीडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं को लेकर चर्चा की थी। इस दौरान अधिकांश लोगों ने फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने पर सहमति दर्ज की थी। इसी बाबत 25 जून के बाद फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने की संभावना बढ़ गई है। उधर, फर्स्ट ईयर में दाखिलों के लिए बारहवीं के विद्यार्थियों को अभी इंतजार करना होगा। सीबीएसई की ओर से अंक निर्धारण का फार्मूला अभी तैयार नहीं किया गया है। सीबीएसई का फार्मूला तय होने के बाद प्रदेश सरकार उसमें कुछ संशोधन कर अपना नया फार्मूला तय करेगी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद ही दाखिलों की प्रक्रिया शुरू होगी।  

UAE में खेले जाएंगे आईपीएल सीजन 14 के बाकी बचे मुकाबले, बीसीसीआई ने किया एलान

In Sports
The remaining matches of IPL season 14 will be played in UAE, BCCI announced MAY 29 2021

इंडियन प्रीमियर लीग के 14वें सीजन पर लगा सवालिया निशान हट गया है। बीसीसीआई ने आईपीएल 2021 के बाकी बचे मैचों को यूएई में करवाने का फैसला किया है। शनिवार को हुई बीसीसीआई की मीटिंग में आईपीएल को इंडिया के यूएई शिफ्ट करने पर सहमति बनी है। पिछले कई दिनों से ही आईपीएल के 14वें सीजन के इंडिया से यूएई शिफ्ट होने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब तक बीसीसीआई इस बात पर कुछ भी बोलने से बच रहा था। शनिवार को आईपीएल 2021 के फ्यूचर को लेकर बीसीसीआई ने एक मीटिंग बुलाई थी और पिछले साल की सफलता को देखते हुए यूएई को आईपीएल 2021 के बाकी बचे 31 मैचों की मेजबानी के लिए चुना गया।  बता दें कि आईपीएल के 14वें सीजन का आगाज 9 अप्रैल से मुंबई और चेन्नई में हुआ था। करीब 25 दिन तक बीसीसीआई टूर्नामेंट को सफलतापूर्वक आयोजित करवाने में कामयाब रहा। लेकिन जैसे ही टीमें अहमदाबाद और दिल्ली पहुंची तभी एक साथ कई खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद बीसीसीआई ने दो मैचों को टालने के बाद आखिरकार तीन मई को 14वें सीजन को स्थगित करने का फैसला किया था। गौरतलब है कि 14वें सीजन में लीग राउंड और प्लेऑफ के कुल 60 मुकाबले खेले जाने हैं। टूर्नामेंट के स्थगित होने तक 29 मैचों का आयोजन हुआ था। अब बाकी बचे 31 मैच यूएई में खेले जाएंगे।   

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत पर बनने वाली फिल्म के प्रतिबंध की याचिका की खारिज

In Entertainment
Delhi-High-Court-dismisses-plea-for-ban-on-film-on-Sushant-Singh-Rajput-june-10-2021

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन फिल्म इंडस्ट्री और उनके फैंस के लिए एक बड़ा झटका था, जिससे आज भी लोग उबर नहीं पाए हैं। इसी बाबत अभिनेता की जिंदगी पर फिल्म बनाई जा रही है, जिसका नाम 'न्याय: द जस्टिस' है। लेकिन ये फिल्म रिलीज़ होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। बता दें कि सुशांत के पिता केके सिंह ने बेटे के ऊपर बन रही फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिका में अभिनेता के पिता ने किसी को भी फिल्म में उनके बेटे का नाम अथवा इससे मिलते जुलते नाम के इस्तेमाल को रोकने का आग्रह किया गया था। अब इस पर फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘न्याय: द जस्टिस’ की रिलीज पर रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता की उस याचिका पर फैसला सुनाया गया, जिसमें उन्होंने सुशांत की लाइफ पर बनने वाली चार फिल्मों के निर्माण और रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। इन फिल्मों में 'न्याय: द जस्टिस', 'सुसाइड ऑर मर्डर: ए स्टार वाज लॉस्ट', 'शशांक' और एक अनाम फिल्म शामिल है। सुबह 10:30 बजे जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया। 11 जुनव को रिलीज़ होगी फिल्म  फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर लाल ने कहा कि फिल्म का हर स्तर पर प्रचार किया गया है और वह इसे वापस लेने के संबंध में कोई आश्वासन नहीं दे पाएंगे। बता दें, फिल्म 'न्याय: द जस्टिस' की रिलीज डेट 11 जून है। कोर्ट का फैसला आने के बाद फिल्म रिलीज की जा सकती है। दिलीप गुलाटी के निर्देशन में बनी फिल्म 'न्याय: द जस्टिस' की शूटिंग हाल ही में पूरी हुई है। फिल्म में टीवी एक्टर जुबैर खान सुशांत सिंह राजपूत से प्रेरित किरदार की भूमिका में दिखाई देंगे, जबकि श्रेया शुक्ला रिया चक्रवर्ती की भूमिका में होंगी। तो वहीं शक्ति कपूर इस फिल्म में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के चीफ राकेश अस्थाना का किरदार निभाएंगे।  गौरतलब है कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित घर में मृत पाए गए थे। जिसके बाद इस मामले की सीबीआई, ईडी और एनसीबी की जांच जारी है। सुशांत केस में उनकी कथित गर्लफ्रेंड और एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को जेल भी जाना पड़ा था। अभी भी इस केस की जांच चल रही है और आए दिन कोई न कोई खुलासे होते रहते हैं।

आईआईटी मंडी इस साल सेब और गुठलीदार फलों की पैकिंग पर करेगी अध्ययन

In News
IIT Mandi to study packing of apples and kernels this year june 2021 13

आईआईटी मंडी इस सीजन में सेब और अन्य गुठलीदार फलों की पैकिंग को लेकर अध्ययन करेंगे। अगले सीजन में फलों की आधुनिक तकनीक का ट्रायल आरंभ कर दिया जाएगा। पैकिंग क्षमता कितनी होनी चाहिए, इसे लेकर भी अध्ययन होगा।  आईआईटी से आधुनिक पैकिंग तकनीक मिलने के बाद प्रदेश सरकार पैकिंग सामग्री का कंपनियों से बातचीत करके उत्पादन कराएगी।  बागवानों और किसानों को आधुनिक पैकिंग तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आईआईटी मंडी को 18.50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है। पैकिंग तकनीक मिलने से विपणन के समय होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।  

ऐलोपैथी बनाम आयुर्वेद की जंग के बाद कोरोना वैक्सीन लगवाएंगे बाबा रामदेव, डॉक्टरों को बताया देवदूत

In National News
ऐलोपैथी बनाम आयुर्वेद की जंग के बाद कोरोना वैक्सीन लगवाएंगे बाबा रामदेव, डॉक्टरों को बताया देवदूत

बाबा रामदेव ने डॉक्टरों को देवदूत भी बताया है। ऐलोपैथी बनाम आयुर्वेद की जंग के बीच बाबा रामदेव इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है।  योग गुरु ने कहा था कि उन्हें कोरोना वैक्सीन की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि उनके पास योग और आयुर्वेद का संरक्षण है। गुरुवार को अपने पहले के बयानों से पलटी मारते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि बाबा रामदेव ने वैक्सीन को लेकर अपना मन बदल लिया है। पहले उन्होंने कहा था कि योग से उनका शरीर कोरोना से लड़ने में सक्षम बन गया है। लेकिन अब उन्होंने वैक्सीन लगवाने की सहमति दे दी है। वे कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने डॉक्टरों को देवदूत भी बताया।  बाबा रामदेव ने कोरोना संक्रमण पर एलोपैथ की दवाइयों के साइड इफेक्ट को लेकर विवादित बयान दिया था, जिस पर बहस शुरू हो गई थी। मेडिकल सेक्टर के लोग बाबा रामदेव से नाराज हो गए थे। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21 जून से सभी को मुफ्त कोरोना वैक्सीन लगेगी तो स्वामी रामदे ने कहा कि यह एक स्वागत योग्य कदम है, सभी को कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए। 

दक्षिण अफ्रीका में HIV पॉजिटिव महिला में 216 दिन तक रहा वायरस, 32 बार हुआ म्यूटेशन, जानिए पूरा मामला

In International News
Virus remained for 216 days in HIV positive woman in South Africa, mutation happened 32 times june 6 2021

कोरोना वायरस की भीषण तबाही को पूरी दुनिया ने देख लिया। अभी भी यह खतरनाक वायरस कई देशों में चौंकाने वाले कारनामे कर रहा है। ऐसा ही एक मामला दक्षिण अफ्रीका से सामने आया है जहां एक HIV पॉजिटिव महिला के अंदर कोरोना वायरस 216 दिन तक रहा और इस दौरान वायरस में 30 बार म्यूटेशन हुआ। डरबन स्थित क्वाजूलू-नेटल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसका खुलासा किया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि 36 वर्षीय महिला के शरीर में 13 म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन में देखे गए। यह वही प्रोटीन है, जो कोरोना वायरस को प्रतिरोधक तंत्र के हमले से बचाता है। हालांकि यह महिला में मौजूद म्यूटेशन का प्रसार अन्य लोगों में भी हुआ या नहीं इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, लॉस एंजेलिस टाइम्स से बातचीत में स्टडी के लेखक टूलियो डि ओलिवीरा ने बताया है कि अगर ऐसे और मामले मिलते हैं तो इससे आशंका नजर आएगी कि HIV इन्फेक्शन नए वेरिएंट का सोर्स हो सकता है। बताया गया कि सबसे पहले महिला को लक्षण दिखाई दिया तो उसका टेस्ट कराया गया और वह पॉजिटिव निकली। शुरुआती इलाज के बाद भी महिला में हल्के-फुल्के लक्षण थे, लेकिन वायरस उसके अंदर ही मौजूद रहा।  फिर वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 13 बार म्यूटेशन हुआ, इसी स्पाइक प्रोटीन को पहचानकर ही ज्यादातर वैक्सीन वायरस पर असर कर सकती है। इस महिला का मामला तब पता चला जब महिला 300 HIV पॉजिटिव लोगों पर की गई स्टडी में शामिल हुईं। ऐसे मरीजों में वायरस लंबे वक्त तक रहता है जिससे उसे म्यूटेट होने का मौका मिलता है। टूलियो डि ओलिवीरा ने बताया कि इलाज के बाद भी वायरस महिला के अंदर मौजूद था।  शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि यह खोज महामारी की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण है। एचआईवी प्रभावित देशों में ऐसे मरीजों में वायरस को फैलने से रोकने के लिए इस मुहिम में तेजी आएगी। बता दें कि अफ्रीका देशों में कोरोना संक्रमण ने भी कहर बरपाया है। दक्षिण अफ्रीका कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि दक्षिण अफ्रीका में अब कोरोना का प्रसार कम हुआ है। 

साहित्य में सिमटा विभाजन का दर्द

In Kavya Rath
The-pain-of-partition-broken-in-literature-india-1947-may-24-2021

हिंदुस्तान की स्वतंत्रता को करीब 74 वर्ष बीत चुके है और इतना ही वक्त बीत चुका है देश के बंटवारे को। बंटवारे की टीस वक़्त के साथ धुंधली ज़रूर हो सकती हैं, मगर इसे दबा पाना मुमकिन नहीं। देश की हवा में मिट्टी की खुशबू के साथ एक गंध भी उठती है, उन सभी शवों की जिन्हें कोई जलाने, दफ़नाने वाला भी नहीं मिला था। अंग्रेज़ों की कूटनीति ने हमारे मुल्क़ को दो हिस्सों में बाँट कर रख दिया। बंटवारे की त्रासदी में कितने ही लोग बेघर हुए और कितने ही परिवारों के चिराग बुझ गए। उस दर्द की कल्पना भी कर पाना भी मुश्किल है। मगर इसे बेहद करीब से छुआ जा सकता है, उस समय का दर्द बयां करते कुछ साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ कर। अमृता प्रीतम ने 'पिंजर' में उकेरा है विभाजन का दर्द जहां बेहतरीन लेखन और स्वतंत्रता की बात हो, वहां अमृता प्रीतम का नाम आना भी लाज़मी है। विद्रोही समझ वाली अमृता, न केवल महिलाओं के लिए बोला करती थी, बल्क़ि बेहतरीन, स्वतंत्र समझ का उदाहरण भी थी। अमृता के कई उपन्यासों में विभाजन का दर्द दिखाई देता है, जिनमें से एक है 'पिंजर '। यूँ तो विभाजन पर कई उपन्यास लिखे गए हैं, परन्तु आज तक लिखे गए सभी उपन्यासों में पिंजर का अपना विशिष्ठ स्थान है। 1947 में हुए विभाजन का दर्द, अमृता ने अपने इस उपन्यास के ज़रिये 1950 के आसपास लिखा। अमृता के इस उपन्यास का अहम किरदार है 'पुरो' जो एक हिन्दू परिवार में जन्म लेती है, परन्तु पारिवारिक रंजिश के चलते, एक मुस्लमान शेख द्वारा, ज़बरदस्ती विवाह सम्बन्ध में बांधी जाती है। इस उपन्यास में अमृता बात करती हैं एक ऐसे गांव की जहां मुसलमानों की आबादी हिन्दू आबादी से कहीं ज़्यादा है और दंगों के चलते सभी हिन्दू एक हवेली में छुप गए, जो भी हिन्दू बाहर आता वह मार दिया जाता था। अमृता लिखती हैं एक रात जब हिन्दू मिलिट्री के ट्रक गाँव में आए तो लोगों ने हवेली में आग लगा दी। मिलिट्री ने आग बुझा कर लोगों को बाहर निकाला। आधे जले हुए तीन आदमी भी निकाले गए, जिनके शरीर से चर्बी बह रही थी, जिनका मांस जलकर हड्डियों से अलग-अलग लटक गया था। कोहनियों और घुटनों पर से जिनका पिंजर बाहर निकल आया था। लोगों के लारियों में बैठते-बैठते उन तीनों ने जान निकाल दी। उन तीनों की लाशों को वही फेंककर लारियाँ चल दीं। उनके घर वाले चीखते-चिल्लाते रह गए, पर मिलिट्री के पास उन्हें जलाने-फूंकने का समय नहीं था। इस सिक्के के दूसरे पहलू पर भी रोशनी डालते हुए अमृता लिखती हैं कि कुछ शहरों में सीमाएं बना दी गई थी जिनकी एक ओर हिन्दू और दूसरी ओर सभी मुसलमान थे। दूसरी ओर से मुसलमान मरते कटते चले आ रहे थे, कुछ वहीँ मार दिए गए और कुछ रास्ते में मारे गए। मोहन राकेश ने सुनाई बिछड़े अपनों की दास्ताँ  साहित्यकार मोहन राकेश अपने उपन्यास 'मलबे का मालिक' में भी ऐसा ही कुछ दर्द बयां करते नज़र आए जिसमें कहानी के मुख्य किरदार 'गनी मियां' दंगों के समय पाकिस्तान चले जाते हैं और उनके बेटे बहु और दो पोतियां यहीं हिंदुस्तान में रह जाते हैं। विभाजन के 7 साल बाद, जब दोनों देशों में आवाजाही के साधन खुलते हैं, तो हॉकी का मैच देखने के बहाने गनी मियां अमृतसर (भारत) आते हैं, इस आस में कि अपने पुराने घर परिवार को फिर देख सकेंगे, परन्तु यहां आ कर उन्हें पता चलता है कि उनके परिवार की 7 साल पहले ही हत्या हो चुकी है।   पियूष मिश्रा ने 'हुस्ना' (नाटक) में किया अधूरी मोहब्बत का ज़िक्र  बंटवारे के समय हुई ऐसी कई घटनाओं का, कई परिवारों का दर्द साहित्य आज भी ज़िंदा रखे हुए है।  पियूष मिश्रा ने एक नाटक किआ है, 'हुस्ना'। पियूष मिश्रा ने न केवल इसे लिखा, बल्क़ि मंच पर बखूबी इसे निभाया भी। इस नाटक में दो मुल्क़ों के बंटवारे में कभी न बँट पाने वाली मोहब्बत की कहानी है। इसमें हिंदुस्तान में रहने वाले प्रेमी का खत है, जो की उसकी विभाजन के बाद सेपाकिस्तान में रह रही प्रेमिका के नाम है। खत को गाने के रूप में पेश किया गया है जिसके बोल हैं, "लाहौर के उस जिले के दो परांगना में पहुंचे , रेशमी गली के दूजे कूचे के चौथे मकां में पहुंचे, और कहते हैं जिसको दूजा मुल्क़ उस पाकिस्तान में पहुंचे," गाने की इन पंक्तियों में लेखक खुद के पाकिस्तान में होने की कल्पना करते हैं व कहते हैं   "मुझे लगता है में लाहौर के पहले जिले के दुसरे राज्य में हूँ।" इसी गाने में पियूष मिश्रा ने दोनों मुल्क़ों की समानताओं की ओर इशारा करते हुए यह भी लिखा की "पत्ते क्या झड़ते हैं पाकिस्तान में, वैसे ही जैसे झड़ते हैं यहाँ ओ हुस्ना, होता क्या उजाला वहां वैसा ही, जैसा होता है हिन्दोस्तान में हाँ ओ हुस्ना।" जॉन ऐलिया का फ़ारेहा के नाम संदेश  सवाल है जो दर्द इधर हिन्दुस्तान में है क्या वही दर्द वहां दूसरी ओर भी उठता है? इसे समझने के लिए पाकिस्तानी लेखकों की रचनाओं पर भी रोशनी डालना ज़रूरी है। पाकिस्तान के मशहूर लेखक जॉन ऐलिया की ही बात करें तो, जॉन का जन्म 1931 में अमरोहा (भारत) में हुआ और विभाजन के समय वह पाकिस्तान चले गए। जॉन की कई ग़ज़लें उनकी बचपन की मोहब्बत 'फ़ारेहा' के नाम हैं। फ़ारेहा हिंदुस्तान में रहा करती थीं और कहा जाता है विभाजन के बाद जॉन का फ़ारेहा से मिलना कभी नहीं हुआ। मगर जॉन की लिखी एक ग़ज़ल 'फ़ारेहा' में उनका दर्द पढ़ा जा सकता है। " सारी बातें भूल जाना फ़ारेहा, था सब कुछ वो इक फ़साना फ़ारेहा,   हाँ मोहब्बत एक धोखा ही तो थी, अब कभी धोखा न खाना फ़ारेहा " इन पंक्तियों में जॉन अपनी बचपन की मोहब्बत फ़ारेहा से, सब कुछ भूल जाने को कहते हैं, क्योंकि वह जानते हैं के दो मुल्क़ों के बीच खिंच चुकी इस लकीर को मिटा पाना, और इस मोहब्बत को अनजाम देना भी अब मुमकिन नही। विभाजन से किसी का घर टूटा तो किसी का दिल, किसी के अपने बिछड़े तो किसी के अपने ही पराए हो गए। इस नुकसान की भरपाई तो अब की नहीं जा सकती, पर इस बात को नकारा भी नहीं जा सकता कि नुकसान दोनों ओर बराबर रहा होगा।

हिमाचल की युवतियों को भारतीय सेना में भर्ती होने का मिलेगा मौका, जानिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन

In Job
girls will get a chance to join the army june 2021

सेना में युवतियों के जनरल ड्यूटी महिला सैन्य पुलिस के लिए एक बार फिर से खुली भर्ती का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय थल सेना ने कुल 100 पदों के लिए भर्ती की अधिसूचना जारी कर दी है। भर्ती निदेशक मंडी कर्नल एम राजराजन ने कहा हिमाचल प्रदेश की युवतियों के 100 पद भरे जाएंगे। अभ्यर्थी सेना की वेबसाइट पर छह जून से 29 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करने के पश्चात सेना की वेबसाइट में अपनी प्रोफाइल पेज के डैशबोर्ड पर जाकर हिस्ट्री आफ एप्लीकेशन में अपनी एप्लीकेशन सबमिट हुई या नहीं हुई है, अवश्य देखकर सुनिश्चित कर लें और उसका प्रिंट निकालकर अपने पास रखें। भर्ती की तिथि व स्थान के बारे एडमिट कार्ड के माध्यम से सूचित किया जाएगा। थल सेना ने आधिकारिक अधिसूचना देकर हिमाचल प्रदेश की युवतियों को सेना में भर्ती होने का मौका दिया है। सेना में भर्ती के लिए 17 से 21 वर्ष की आयु वर्ग की युवतियां भाग ले सकती हैं। अभ्यर्थी को 10वीं कक्षा में उत्तीर्ण होने के साथ हर विषय में 33 प्रतिशत अंक और सभी विषयों को मिलाकर 45 प्रतिशत अंकों का होना अनिवार्य है।

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