•   Wednesday Jul 01
In Scoop

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A case has been filed in the country's apex consumer court against the forced collection of 'milk' and 'fuel' cesses in electricity bills.
In Himachal

बिजली बिल में 'मिल्क' और 'फ्यूल' सेस की जबरन वसूली के खिलाफ देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता अदालत में केस दर्ज

हिमाचल प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं पर हर महीने थोपे जा रहे "मिल्क सेस" (दूध उपकर) और "फ्यूल सेस" (ईंधन उपकर) के खिलाफ अब देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता अदालत में कानूनी जंग छिड़ गई है। ज्वालामुखी के मुखर उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता अभिषेक पाधा ने प्रदेश सरकार की इस मनमानी और अवैध वसूली को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के मुख्य आयुक्त के समक्ष चुनौती देते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। याचिका में साफ तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEBL) को कटघरे में खड़ा करते हुए इस पूरी वसूली को उपभोक्ता कानून के तहत एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और 'डार्क पैटर्न' (ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का छुपा हुआ तरीका) करार दिया गया है। शिकायतकर्ता अभिषेक पाधा ने कानूनी तथ्यों के साथ यह मुद्दा उठाया है कि जब एक आम नागरिक बिजली का कनेक्शन लेता है, तो उसका विद्युत बोर्ड के साथ सीधा समझौता सिर्फ और सिर्फ उसके द्वारा खर्च की गई बिजली की यूनिट्स (kWh) और तयशुदा रेगुलेटरी चार्जेस चुकाने का होता है। बिजली के इस मीटर बिल का दूध (मिल्क सेस) या सरकार की अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं से कोई लेना-देना नहीं हो सकता। सरकार अपनी राजनीतिक योजनाओं का वित्तीय बोझ चुपके से बिजली बिलों के रास्ते जनता की जेब पर डाल रही है, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है। सबसे गंभीर बात यह है कि यदि कोई जागरूक उपभोक्ता इस फालतू टैक्स को देने से मना करे और सिर्फ अपनी जलाई हुई बिजली का बिल भरना चाहे, तो बिजली बोर्ड उसका कनेक्शन काटने की धमकी देता है। आवश्यक बिजली सेवा को काटने का यह डर दिखाकर जनता से पैसे ऐंठना सीधे तौर पर ब्लैकमेलिंग और उपभोक्ता अधिकारों का खुला हनन है। दिल्ली की इस केंद्रीय अदालत (CCPA) में दायर याचिका में केंद्र सरकार के 'डार्क पैटर्न प्रिवेंशन गाइडलाइंस, 2023' का हवाला दिया गया है, जिसके तहत मूल सेवा की आड़ में पीछे से कोई अन्य हिडन चार्ज (छुपा हुआ खर्च) जोड़ना कानूनन अपराध है। अभिषेक पाधा ने अदालत से मांग की है कि हिमाचल के उपभोक्ताओं के बिलों से इन दोनों सेस को तुरंत हटाया जाए और बिजली बोर्ड को केवल वास्तविक खपत के आधार पर पारदर्शी बिल बनाने के निर्देश दिए जाएं। इसके अलावा, याचिका में सरकार द्वारा अब तक इस मद में जनता की जेब से वसूले गए करोड़ों रुपयों की उच्च स्तरीय जांच करवाने और वह सारा पैसा उपभोक्ताओं को भविष्य के बिलों में वापस (रिफंड) करने की भी जोरदार गुहार लगाई गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत से यह भी अंतरिम राहत मांगी गई है कि जब तक इस केस का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक सेस न चुकाने पर किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

NCC cadets from Dhaliara College depart for a 10-day annual training camp.
In Himachal

ढलियारा कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स 10 दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के लिए रवाना

राजकीय महाविद्यालय ढलियारा के एनसीसी कैडेट्स 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक ऊना के जेएनवी पेखुबेला में आयोजित 10 दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (ATC-245) में भाग लेने के लिए रवाना हुए। रवानगी के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुशील भारद्वाज ने सभी कैडेट्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा की भावना और नेतृत्व क्षमता का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दल एसोसिएट एनसीसी अधिकारी (ANO) लेफ्टिनेंट डॉ. कपिल सूद के नेतृत्व में शिविर के लिए रवाना हुआ है। डॉ. सूद ने कैडेट्स को शिविर के दौरान अनुशासन का पालन करने, प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और नई गतिविधियों से सीख लेकर अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि शिविर में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के एनसीसी कैडेट्स भाग ले रहे हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में सैन्य ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण (PT), हथियार संचालन, नेतृत्व विकास, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद प्रतियोगिताएं और विभिन्न विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेट्स में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी, टीमवर्क और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक मजबूत किया जाएगा। महाविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागी कैडेट्स के सफल प्रशिक्षण और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

Admission schedule released for the 4-year integrated B.Ed. course; offline counseling to be held on July 3 and 4.
In Himachal

B.Ed. 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स में दाखिले का शेड्यूल जारी, 3 और 4 जुलाई को होगी ऑफलाइन काउंसलिंग

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के डिपार्टमेंट ऑफ टीचर्स एजुकेशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बी.एड. (ITEP) कोर्स में प्रवेश हेतु ऑफलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के अनुसार काउंसलिंग 3 और 4 जुलाई को आयोजित की जाएगी। 3 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (मिडिल) की 50 सीटों के लिए काउंसलिंग होगी। वहीं, 4 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों के लिए तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (मिडिल) और बी.कॉम.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50-50 सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (NCET)-2026 की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि और समय पर सभी मूल प्रमाण पत्रों के साथ उनकी स्वप्रमाणित प्रतियां लेकर काउंसलिंग में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीट आवंटन की पुष्टि होने के बाद प्रथम सेमेस्टर की फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी। बी.ए.-बी.एड. और बी.कॉम.-बी.एड. के लिए पहली किस्त 25,700 रुपये तथा बी.एससी.-बी.एड. के लिए 28,700 रुपये निर्धारित किए गए हैं। फीस जमा करने के लिए अभ्यर्थियों को अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करना होगा।

New VB-G RAM-G scheme implemented in place of MNREGA, now employment will be available for 125 days instead of 100
In Breaking News

मनरेगा की जगह नई VB-G RAM-G योजना लागू, 100 नहीं अब 125 दिन मिलेगा रोजगार

हिमाचल प्रदेश में आज, 1 जुलाई से केंद्र सरकार की नई VB-G RAM-G (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) योजना लागू हो गई है। यह योजना मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पूरी प्रणाली को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का गारंटीड रोजगार मिलेगा। योजना में कार्यों की स्वीकृति, श्रमिकों की उपस्थिति (Attendance), मॉनिटरिंग और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दावा किया गया है। हालांकि, योजना को लेकर हिमाचल सरकार ने केंद्र के समक्ष कई आपत्तियां भी दर्ज करवाई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियां इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन सकती हैं। इसके अलावा, नई योजना के तहत मजदूरी दर और मानव-दिवस (Man-days) के आवंटन को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है। विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण हिमाचल में इस योजना का 90:10 (केंद्र:राज्य) फंडिंग पैटर्न लागू रहेगा, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के खजाने पर हर साल लगभग ₹160 से ₹164 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि योजना लागू न करने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाले ग्रामीण विकास फंड पर भी असर पड़ सकता था। योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञ अतिरिक्त वित्तीय बोझ, तकनीकी चुनौतियों और इसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

Now, straight from Gaggal to Noida! IndiGo has launched daily flights to Jewar International Airport.
In Himachal

अब गगल से सीधे नोएडा! इंडिगो ने शुरू की जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए डेली फ्लाइट

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित गगल एयरपोर्ट से बुधवार से इंडिगो एयरलाइंस ने नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए नियमित सीधी हवाई सेवा शुरू कर दी है। इस नई उड़ान के शुरू होने के साथ ही हिमाचल प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बीच हवाई संपर्क पहले से अधिक मजबूत हो गया है। हाल ही में परिचालन शुरू करने वाले जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उड़ान नेटवर्क में अब गगल एयरपोर्ट भी शामिल हो गया है, जिससे यात्रियों को राजधानी क्षेत्र तक पहुंचने का एक नया और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। इंडिगो की यह उड़ान प्रतिदिन संचालित होगी। विमान सुबह 9:55 बजे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरकर 11:40 बजे गगल पहुंचेगा। इसके बाद दोपहर 12:00 बजे गगल से रवाना होकर 1:40 बजे वापस जेवर पहुंचेगा। यानी दोनों शहरों के बीच की दूरी अब महज 1 घंटा 40 मिनट में तय की जा सकेगी। फिलहाल इस रूट का किराया लगभग 7,000 से 8,000 रुपये के बीच रखा गया है और टिकटों की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट व अन्य अधिकृत प्लेटफॉर्म पर शुरू हो चुकी है। इस नई सेवा के शुरू होने के बाद गगल एयरपोर्ट से अब इंडिगो की 5, स्पाइसजेट की 3 और एलायंस एयर की 1 नियमित उड़ान संचालित होंगी। इससे यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक उड़ानों का विकल्प मिलेगा और पर्यटन, व्यापार तथा धार्मिक यात्रा को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सिविल हवाई अड्डा गगल के निदेशक अमित सकलानी ने इस नई हवाई सेवा को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि गगल एयरपोर्ट का जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधा जुड़ना प्रदेश के विकास और हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।

Monsoon impact begins in Himachal; landslide in Shimla, road closed.
In News

हिमाचल में मानसून का असर शुरू, शिमला में पहाड़ी दरकी, सड़क बंद

हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी शिमला में पहली बड़ी भू-स्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश के कुछ ही समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे शिमला-चक्कर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यातायात ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों, कार्यालय आने-जाने वालों और यात्रियों को घंटों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग से डायवर्ट किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। मानसून की शुरुआत के साथ ही शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

A crucial meeting regarding teacher recruitment in CBSE schools in Himachal will be held today.
In Himachal

हिमाचल के CBSE स्कूलों में टीचर भर्ती पर आज होगी अहम बैठक

हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई में कन्वर्ट किए गए सरकारी स्कूलों में मेरिट के आधार पर शिक्षकों और प्रिंसिपलों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस के बीच आज बड़ा फैसला सामने आ सकता है। इस मुद्दे पर विचार करने के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी की पहली बैठक बुधवार को सचिवालय में आयोजित होगी। बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर अब तक हुई प्रक्रिया और सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर विस्तृत प्रस्तुति देंगे। इसके बाद कैबिनेट सब कमेटी पूरे मामले की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें मंत्रिमंडल को सौंपेगी। सरकार की ओर से गठित इस समिति में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और टीसीपी मंत्री राजेश धर्मानी भी सदस्य हैं, जबकि शिक्षा सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। गौरतलब है कि मेरिट के आधार पर चयनित कई प्रिंसिपलों और इन-सर्विस शिक्षकों को अभी तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है। सरकार ने इस मामले में निर्णय लेने के लिए समिति को 10 दिनों का समय दिया है, लेकिन अब तक नियुक्तियों पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। इसी वजह से सीबीएसई में परिवर्तित स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की 30 जून की समय-सीमा भी पूरी नहीं हो सकी। इस पूरे मामले पर प्रदेशभर के शिक्षकों, अभ्यर्थियों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं। इससे पहले कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आई थी। कुछ मंत्रियों ने विधायकों से मिले फीडबैक के आधार पर मेरिट प्रणाली पर आपत्ति जताई थी, जबकि मुख्यमंत्री और शिक्षा सचिव शुरू से ही मेरिट के आधार पर नियुक्तियों के पक्ष में रहे हैं। अब देखना होगा कि कैबिनेट सब कमेटी की पहली बैठक में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या लंबे समय से इंतजार कर रहे चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिलती है।

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वित्तीय दबाव में हिमाचल: जून में 700 करोड़ का नया कर्ज लेने की तैयारी

In Politics
Himachal under financial strain: Plans to raise a new loan of ₹700 crore in June.

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।

एमएमएमसीएच में राष्ट्रीय एंडोस्कोपी कार्यशाला, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने दिखाई लाइव सर्जरी

In Health

एमएमएमसीएच, कुमारहट्टी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के सहयोग से गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी पर एक दिवसीय द्वितीय सेंसिटाइजेशन स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को महार्षि मार्कण्डेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष तरसेम गर्ग और सचिव विशाल गर्ग का संरक्षण प्राप्त रहा। मुख्य अतिथि एमएमयू के कुलपति डॉ. रवि चंद शर्मा तथा सह-अध्यक्ष के रूप में रजिस्ट्रार अजय कुमार सिंगल उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ. मनप्रीत सिंह नंदा, उप-प्राचार्य डॉ. जसदीप सिंह संधू, एमएमसीओएन की प्राचार्य डॉ. हरप्रीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किरण कुमार सिंघल और एनएएसी समन्वयक डॉ. जय गोपाल वोहरा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की स्थानीय संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका गुप्ता तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पियूष वोहरा रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण ऑपरेशन थियेटर से प्रसारित लाइव सर्जरी रही, जिसमें राष्ट्रीय एंडोस्कोपिक सर्जरी प्रशिक्षक डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, ग्रेड-4 एंडोमेट्रियोसिस में ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी तथा फेलोपियन ट्यूब रिकैनालाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग, सर्जरी के विभिन्न चरणों और महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णयों की भी जानकारी दी। कार्यशाला में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने भाग लिया तथा एंडोस्कोपिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

LEET-2026 का परिणाम घोषित, शिमला के अमन ने किया टॉप

In Education
LEET-2026 results declared; Aman from Shimla tops the exam.

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आयोजित लेटरल एंट्री एंट्रेंस टेस्ट (LEET)-2026 का बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिया है। 14 जून को आयोजित इस परीक्षा में प्रदेशभर के 1,963 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परिणाम जारी होते ही विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल है और अब उनकी नजरें आगामी काउंसलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी हैं। तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव Ashok Pathak ने बताया कि इस वर्ष शिमला के अमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। अमन ने 400 में से 370 अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया। वहीं, चंबा के मोहित कपूर 285 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि मंडी की नंदिनी ने 246 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है, जहां अभ्यर्थी अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं। परिणाम जारी होने के बाद सफल उम्मीदवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया का अगला चरण जल्द शुरू किया जाएगा। बोर्ड सचिव ने बताया कि काउंसलिंग और सीट आवंटन से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र जारी किया जाएगा। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं और अपडेट के लिए नियमित रूप से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। LEET-2026 के परिणामों के साथ अब प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग डिप्लोमा संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुल गया है। सफल अभ्यर्थी आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से अपनी पसंद के संस्थानों और शाखाओं में दाखिला प्राप्त कर सकेंगे।                  

आयरलैंड की हार भुलाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ जीत से करना होगा आगाज़

In Sports
India will look to put the loss against Ireland behind them and kick off with a win against England.

आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला बुधवार को इंग्लैंड के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस सीरीज में जीत दर्ज कर पिछली हार को भुलाना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज काफी अहम होगी। आयरलैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ वह कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। इस बीच भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले ही टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जाना चाहिए। आयरलैंड दौरे पर वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम भी हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में नहीं रही है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह रेड बॉल क्रिकेट था, लेकिन अपने घर में मिली हार के बाद इंग्लैंड भी वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैचों के बाद तीन वनडे मुकाबले भी खेले जाएंगे। दोनों टीमों में कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण मौजूद है, जिससे इस दौरे के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें पहले मुकाबले पर हैं कि क्या टीम इंडिया जीत के साथ सीरीज का आगाज़ करती है और क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलता है।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हिमाचल में मानसून का असर शुरू, शिमला में पहाड़ी दरकी, सड़क बंद

In News
Monsoon impact begins in Himachal; landslide in Shimla, road closed.

हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी शिमला में पहली बड़ी भू-स्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश के कुछ ही समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे शिमला-चक्कर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यातायात ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों, कार्यालय आने-जाने वालों और यात्रियों को घंटों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग से डायवर्ट किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। मानसून की शुरुआत के साथ ही शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा में हुई प्रथम पूजा, 3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा

In National News
First prayer performed at the holy cave of Baba Amarnath; 57-day Amarnath Yatra to begin on July 3.

श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ से पहले सोमवार, 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा में विराजमान हिमलिंग की पारंपरिक प्रथम पूजा संपन्न हुई। इसी के साथ वार्षिक अमरनाथ यात्रा की धार्मिक और औपचारिक शुरुआत हो गई। प्रथम पूजा में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा, श्राइन बोर्ड और श्री बाबा अमरनाथ न्यास के पदाधिकारी, संत-महात्मा तथा गुफा के पुजारी शामिल हुए। इस दौरान यात्रा के सफल, सुरक्षित और मंगलमय संचालन की कामना की गई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पवित्र गुफा में प्रथम पूजा करने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों की शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के लिए प्रशासन, श्राइन बोर्ड, सेना, पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय समुदाय, सेवा प्रदाता और स्वयंसेवक पूरी तरह तैयार हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार यात्रा अनुभव देने के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होने वाली प्रथम पूजा को अमरनाथ यात्रा का आधिकारिक धार्मिक शुभारंभ माना जाता है। इस वर्ष 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी। श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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