•   Monday Jun 17
In Scoop

Reading ⇾
Heat breaks all records till now in Himachal, heat waves in eight districts
In Himachal

हिमाचल में गर्मी ने अब तक के तोड़े सारे रिकॉर्ड, आठ जिलों में चली लू

हिमाचल प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते रोज़ प्रदेश के आठ जिलों ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, मंडी और सिरमौर में लू चली। नौ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। लगातार बढ़ रही गर्मी ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। न्यूनतम पारा चढ़ने से रात को भी राहत नहीं मिल रही है। 17 जून तक प्रदेश में लू चलने के आसार हैं। 18 जून से प्रदेश में प्री मानसून की बौछारें पड़ने से कुछ राहत मिलने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में 18 से 21 जून तक बारिश के आसार हैं। जून के अंत तक प्रदेश में मानसून के प्रवेश करने का पूर्वानुमान है। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में शनिवार को चटक धूप खिली। मैदानी जिलों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी सूरज की तपिश बढ़ी है। प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थल इन दिनों सैलानियों से गुलजार हो गए हैं। मैदानी राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत लेने के लिए सैलानी पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री चल रहा है। मैदानी राज्यों में पारा 40 से 45 डिग्री के बीच पहुंच गया है। राजधानी शिमला, मनाली, डलहौजी, कसौली और धर्मशाला के अधिकांश होटलों में इन दिनों सैलानियों की ऑक्यूपेंसी फुल चल रही है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने रविवार और सोमवार को भी अधिकांश क्षेत्रों में लू चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। 

Minister Atishi's big claim - Conspiracy to cut water pipeline in Delhi
In News

मंत्री आतिशी का बड़ा दावा- दिल्ली में पानी की पाइपलाइन काटने की हो रही साजिश

दिल्ली में लोगों को इस समय दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। तपती दिल्ली में पेयजल संकट परेशान कर रहा है। कई इलाके पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। इस बीच दिल्ली की जलमंत्री आतिशी का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी की परेशानी बढ़ाने के लिए पाइपलाइन काटने की साजिश हो रही है। इस षड्यंत्र के कारण साउथ दिल्ली में आज 25% पानी की कमी हुई है। आतिशी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है। उन्होंने दिल्ली में मुख्य वाटर पाइपलाइन को सुरक्षा देने का आग्रह किया है। जल संकट के बीच जल मंत्री आतिशी ने शनिवार को अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर समस्या दूर करने का आदेश दिया। साथ ही, जरूरत के आधार पर पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा जलापूर्ति बेहतर बनाने के लिए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू से फोन पर बातचीत भी की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बैठक के बाद आतिशी ने बताया कि दिल्ली में जलसंकट की स्थिति बढ़ रही है। हरियाणा से पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उत्पादन 70 एमजीडी तक घट गया है। 932 एमजीडी उत्पादन ही हो रहा है। वजीराबाद बैराज का जलस्तर सामान्य से 6 फीट घटकर 668.5 फीट पर पहुंच गया है। मुनक नहर से मिलने वाला पानी भी घटकर 902 क्यूसेक पहुंच गया है। कच्चा पानी मिलने में आई दिक्कत के बाद जल शोधन संयंत्र पर असर पड़ा है। इस समस्या से निपटने के लिए पश्चिमी दिल्ली के कई हिस्सों में बोरवेल को यूजीआर से जोड़ा गया है। साथ ही, जलबोर्ड ने दिल्ली में टैंकरों के फेरे बढ़ाकर प्रतिदिन 10 हजार कर दिया है। जल बोर्ड करीब 10 एमजीडी पानी टैंकरों से सप्लाई कर रहा है। आतिशी ने अपील की कि हिमाचल से मिलने वाले पानी पर जब तक अपर यमुना रिवर बोर्ड का निर्देश नहीं आ जाता तब तक हरियाणा दिल्ली को कुछ अतिरिक्त पानी दे। दिल्ली के लोग भी पानी बर्बाद न करें। यदि कहीं लीकेज दिखे तो तुरंत सोशल मीडिया पर खबर दें। इस पर तुरंत संज्ञान लेंगे। आतिशी ने बताया कि वजीराबाद बैराज और मुनक नहर से मिलने वाले पानी की मात्रा कम होने से दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से कम उत्पादन हो रहा है। सामान्य रूप से रोजाना इन प्लांट से 1005 एमजीडी पानी का उत्पादन होता है। जल संकट से राहत दिलाने की मांग को लेकर आप विधायकों ने शनिवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को पत्र लिखा है। विधायकों ने मांग रखी है कि दिल्ली को जल संकट से उबारने के लिए दिल्ली सरकार हर प्रयास कर रही है, लेकिन यमुना में पानी की उपलब्धता कम होने से दिल्ली की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। यह पूरा मामला हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच का है। अगर सीआर पाटिल इंटर स्टेट कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी उठा लें तो दिल्ली को जल संकट से उबारा जा सकता है। विधायकों ने मंत्री से रविवार को मिलने का समय भी मांगा। विधायक दिलीप पांडे ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सीआर पाटिल इस मामले में दखल देकर दिल्ली को जल्द राहत दिलाएंगे। आज दिल्ली के आप विधायक केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मिलने पहुंचे। हालांकि उनसे मुलाकात नहीं हुई है। आप विधायकों ने बताया कि हमने उनके आवास, कार्यालय और अन्य सभी माध्यमों से पत्र दे दिया है।

Avahadevi to Ayodhya becomes the longest route in the country, crown snatched from Delhi-Leh bus
In Himachal

अवाहदेवी से अयोध्या बना देश का सबसे लंबा रूट, दिल्ली-लेह बस से छिना ताज

एचआरटीसी का दिल्ली-लेह रूट अब देश का सबसे लंबा बस रूट नहीं रहा। एचआरटीसी केलांग डिपो से अब यह दर्जा छिन गया है। हमीरपुर डिपो की अवाहदेवी-अयोध्या रूट पर चलने वाली बस सेवा अब सबसे लंबे रूट में शुमार हो गई है। हालांकि, 15,000 से 17,000 फुट की ऊंचाई पर चलने के कारण दिल्ली-लेह बस को सबसे ऊंचे रूट का दर्जा बरकरार रहेगा। करीब 16 साल तक हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम की दिल्ली-लेह सेवा को भारत में सबसे लंबे रूट का दर्जा प्राप्त था। अब यह खिताब हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर डिपो को मिल गया है। मार्च 2024 में अवाहदेवी (हमीरपुर) से अयोध्या बस सेवा शुरू की गई थी। इस रूट की एक तरफ की दूरी 1205 किलोमीटर है। इस सफर को 24 घंटों में पूरा किया जा रहा है। इसमें दो चालक बदले जाते हैं। अवाहदेवी से अयोध्या जाने के लिए प्रति व्यक्ति 1,577 रुपये किराया लिया जा रहा है। वहीं, दिल्ली-लेह बस रूट की दूरी 981 किलोमीटर है। यानी अवाहदेवी-अयोध्या रूट से 224 किलोमीटर कम है। पहले यह दूरी 1072 किलोमीटर थी, लेकिन अटल टनल के बाद यह 1026 और अब फोरलेन बनने से इसकी दूरी घटकर 981 किलोमीटर रह गई। दिल्ली-लेह रूट पर खूबसूरत वादियों का आनंद लेने का अलग ही रोमांच है। यह रूट अवाहदेवी-अयोध्या की तुलना में अधिक खतरनाक भी है। इस रूट पर करीब 33 घंटे लग जाते हैं। एकतरफा यात्रा का किराया 1657 रुपये है। इस पूरे सफर में तीन चालक और दो परिचालक बदले जाते हैं। देश के सबसे लंबे और सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित दर्रों से गुजरने वाली एचआरटीसी की रोमांचकारी दिल्ली-लेह बस सेवा की पहचान बरकरार रहेगी। सबसे लंबा रूट भले ही न रहा हो, लेकिन सबसे ऊंचे रूट का दर्जा अभी भी बरकरार है। 

Himachal CM Sukhu leaves for Delhi, will brainstorm with the high command regarding the candidates.
In News

हिमाचल CM सुक्खू दिल्ली रवाना, प्रत्याशियों को लेकर हाईकमान से करेंगे मंथन

विधानसभा क्षेत्र नालागढ़, देहरा और हमीरपुर में होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस का टिकट किसे दिया जाए, इसे लेकर हाईकमान से चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शुक्रवार को दिल्ली जाएंगे। देहरा, हमीरपुर और नालागढ़ में दस जुलाई को विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान होना है। नालागढ़ से हरदीप बावा का नाम लगभग तय माना जा रहा है। देहरा और हमीरपुर से प्रत्याशी तय करने के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों के पैनल बनाए गए हैं। शुक्रवार को हाईकमान से चर्चा के बाद कांग्रेस के तीनों प्रत्याशियों की सूची दो-तीन दिनों में जारी हो सकती है। उधर, शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शिमला से बाहर होने के कारण आम जनता से नहीं मिल पाएंगे। मुख्यमंत्री ने हर सप्ताह के शुक्रवार को जनता दरबार लगाने का फैसला लिया हुआ है। मुख्यमंत्री के गृह जिला हमीरपुर की सीट से टिकट दावेदारों की संख्या सबसे अधिक है। यहां से पूर्व विधायक अनिता वर्मा, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया, पूर्व प्रत्याशी डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा, राजीव राणा और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू के बीच मुकाबला चल रहा है। विगत विधानसभा चुनाव में डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने यहां से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा था। देहरा से पूर्व प्रत्याशी डॉ. राजेश शर्मा और नरदेव कंवर के नाम को लेकर चर्चा हो रही है। अन्य दावेदारों को भी यहां तलाशा जा रहा है। नालागढ़ से पूर्व प्रत्याशी हरदीप बावा को टिकट मिल सकता है। यहां कांग्रेस के पास बहुत अधिक विकल्प नहीं है। उधर, पार्टी प्रत्याशी तय करने से पहले तीनों विधानसभा क्षेत्रों के ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, जिला पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की जाएगी। दिल्ली से लौटकर मुख्यमंत्री सुक्खू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से बैठक करने के बाद हाईकमान को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। इसके बाद ही प्रत्याशियों को लेकर अंतिम फैसला होगा।

J&K: DGP said, Pakistan is spoiling the environment with hired terrorists, local supporters will also regret
In News

J&K : डीजीपी बोले, पाकिस्तान भाड़े के आतंकियों से बिगाड़ रहा माहौल, स्थानीय समर्थक भी पछताएंगे

जम्मू संभाग में चार दिन में चार आतंकी हमलों के बाद पुलिस महानिदेशक आरआर स्वैन ने कहा है कि पाकिस्तान भाड़े के आतंकियों के जरिए प्रदेश के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षाबल दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दृढ़ संकल्प है। वह माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के आधार शिविर के आध्यात्मिक केंद्र में रियासी जिले में सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। डीजीपी ने बैठक के बाद वीरवार को संवादादाताओं के साथ बातचीत में आतंकवादियों का समर्थन करने वाले स्थानीय लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोग अपने फैसले पर पछताएंगे। उन्होंने कहा, इन लोगों के पास परिवार, जमीन और नौकरियां हैं, जबकि पाकिस्तानी आतंकियों के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। दुश्मनों के एजेंट स्थानीय लोग पैसे और नशीले पदार्थों के लिए ऐसा विदेशी आतंकियों की मदद कर रहे हैं। उनकी पहचान की जाएगी और उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। हम उन्हें चेतावनी देना चाहते हैं कि (विदेशी) आतंकवादी मारे जाएंगे... लेकिन जो लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, उन्हें पछताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी आतंकवादियों के पास कोई नहीं है, चाहे उनके बच्चे हों या नहीं। हमें नहीं पता कि वे जेलों से उठाकर किसे यहां भेज रहे हैं।   डीजीपी ने कहा कि सुरक्षा बल शांति बनाए रखने और जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित और वचनबद्ध हैं। डीजीपी ने कहा, आतंकवाद ने 1995 में जम्मू क्षेत्र खासकर डोडा और रामबन में अपने पैर पसारे, लेकिन 2005 तक यह पूरी तरह से खत्म हो गया। अगर हम इसी तरह की चुनौती का सामना करते हैं, तो निश्चिंत रहें कि उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए उन्हें एक-एक करके मारने के लिए प्रतिबद्ध और वचनबद्ध हैं। वैष्णो देवी व अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा प्रबंध बढ़ाने के निर्देश  दिए। अधिकारियों से कहा गया कि वह इन दोनों महत्वपूर्ण यात्राओं को लेकर पूरी तरह से सतर्क रहें। ताकि श्रद्धालु भय मुक्त होकर लगातार अपनी यात्रा करते रहें। इसके साथ ही मां वैष्णो देवी भवन से लेकर धर्मनगरी कटड़ा सहित आसपास के क्षेत्र में और ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के आदेश दिए हैं।

Bodies of 45 Indians being brought from Kuwait to Kerala, ambulance deployed at Kochi Airport
In News

कुवैत से केरल लाए जा रहे 45 भारतीयों के श*व, कोच्चि एयरपोर्ट पर एंबुलेंस तैनात

कुवैत अग्निकांड में मारे गए भारतीयों का श*व स्वदेश लाया गया है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को कुवैत में आग लगने की घटना में मारे गए 45 भारतीयों के श*वों को लेकर वायुसेना का एक विशेष विमान कोच्चि पहुंचा। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी विमान में सवार थे, जिन्होंने तेजी से वापसी सुनिश्चित करने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय किया। भारत ने कुवैत में विदेशी श्रमिकों के आवास वाली एक इमारत में लगी भीषण आग में मारे गए भारतीयों के श*वों को वापस लाने के लिए बीती रात एक सैन्य परिवहन विमान वहां भेजा गया था।  इससे पहले कुवैत के अधिकारियों की ओर से जानकारी दी गई कि अग्निकांड में मारे गए 45 भारतीयों के श*वों की पहचान कर ली गई। आग में कम से कम 49 प्रवासी श्रमिकों की मौ* त हो गई और 50 अन्य लोग घाय*ल हो गए। वायुसेना का विमान सबसे पहले कोच्चि में उतरा क्योंकि अधिकांश पीड़ित केरल के हैं। उसके बाद विमान के दिल्ली आने की उम्मीद है क्योंकि कुछ मृत*क उत्तर भारतीय राज्यों से भी हैं। कोच्चि एयरपोर्ट पर एंबुलेंस तैनात किया गया था। कुवैत के अग्निशमन बल की ओर से कहा गया कि भीषण आग विद्युत ‘शॉर्ट सर्किट’ की वजह से लगी थी। केंद्र सरकार ने विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को आग में झुलसे भारतीयों की सहायता की निगरानी करने और मारे गए लोगों के श*वों को शीघ्र स्वदेश लाए जाने के लिए कुवैत भेजा था। विदेश मंत्रालय ने बुधवार रात एक बयान जारी किया था और कहा था कि कुवैत के मंगाफ क्षेत्र में एक आवासीय इमारत में आग लगने की एक दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद घटना में मारे गए लोगों में से करीब 40 के बारे में माना जा रहा है कि वे भारतीय थे।  कुवैत अग्निकांड में जान गंवाने वालों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये लुलु समूह देगा। कुवैत में मरने वालों में तीन उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। सरकार ने दूतावास से संपर्क किया। कुवैत में आग की घटना में तमिलनाडु के सात लोगों की मौ*त हुई है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने राहत की घोषणा की है। 

Will Congress follow the tradition of Gagret in Nalagarh also?
In Siyasatnama

क्या नालागढ़ में भी गगरेट की परिपाटी पर चलेगी कांग्रेस ?

** क्या लखविंदर की होगी घर वापसी ? **या हारे हुए बावा पर फिर दांव खेलेगी कांग्रेस ..... जो गगरेट में हुआ क्या वो नालागढ़ में भी होगा ? क्या कालिया की तरह ही लखविंदर की भी होगी घर वापसी ? क्या गगरेट की रणनीति पर नालागढ़ में सियासी व्यूह रचेगी कांग्रेस ? ये तमाम सवाल उठना लाज़मी है क्योंकि अब नालागढ़ में उपचुनाव होने वाला है। जो निर्दलीय थे उनकी घर वापसी हो गई है और जो भाजपाई है उनकी घर वापसी हो सकती है और जो अब अपने घर में बैठे है उनका क्या होगा कोई पता नहीं ..बस कुछ इसी तरह घूम रही है नालागढ़ की सियासत।  हाल ही में 6 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में से 4 सीटें कांग्रेस ने जीती है और राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि कांग्रेस की इस जीत का बड़ा कारण सही टिकट आवंटन रहा है। गहन चिंतन-मंथन के बाद कांग्रेस ने प्रत्याशियों कि घोषणा की थी। बागियों के भाजपा में जाने से कई भाजपाई ऐसे थे जो कांग्रेस में आना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने टिकट दिया केवल 2 सीटों पर, सुजानपुर और गगरेट। अब सुजानपुर में जो भाजपा से कांग्रेस में आए वो कभी कांग्रेसी थे ही नहीं, लेकिन राकेश कालिया की तो घर वापसी हुई है। राकेश कालिया तो पहले भी कांग्रेस से विधायक रहे है। वैसे गगरेट में कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा भी नहीं था तो कालिया की घर वापसी कांग्रेस के मुनाफ़े का सौदा ही रही।   अब नालागढ़ में भी समीकरण कुछ ऐसे ही बनते दिख रहे है। निर्दलीय केएल ठाकुर की 15 महीने बाद ही घर वापसी हो गई है और  2022 में कांग्रेस से भाजपा में गए लखविंदर राणा भी अब घर वापसी की उम्मीद में ही होंगे। राणा तो अपना दर्द खुले मंच से  बयान भी कर चुके है कि अगर दल न बदला होता तो आज विधायक भी होते और सरकार में अहम पद भी मिलता। अब लखविंदर की घर वापसी होती है या नहीं ये तो वही जाने मगर कांग्रेस इस बारे सोच विचार ज़रूर कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि लखविंदर पहले भी 2 दफा नालागढ़ सीट कांग्रेस की झोली में डाल चुके है।  2011 के उपचुनाव और 2017 के आम चुनावो में लखविंदर कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुनाव जीते थे। जबकि पिछली दफा कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हरदीप सिंह बावा 2 चुनाव हार चुके है 2017 में एक बार निर्दलीय और 2022 में दूसरी दफा कांग्रेस टिकट पर भी बावा को हार ही नसीब हुई है।    अब हारे हुए मोहरों पर कांग्रेस फिर दांव खेलेगी ऐसा तो मुश्किल ही लगता है। अब नज़रे टिकी है लखविंदर राणा पर। लखविंदर अगर घर वापसी करते है और पार्टी उन्हें टिकट देती है तो नालागढ़ का ये चुनाव बेहद रोचक होना तय मानिए..ठीक उसी तरह जिस तरह गगरेट में चुनाव ग्रेट बना था।

Featured Videos

Video

Latest

तीन निर्दलीय विधायकों पर बड़ा फैसला

In Politics
independent mla resignation accepted

**विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों के इस्तीफे किए स्वीकार    हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने तीन निर्दलीय विधायकों होशियार सिंह, केएल ठाकुर और आशीष शर्मा के इस्तीफे स्वीकार कर दिए हैं। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी जानकारी दी। पठानिया ने कहा कि होशियार सिंह, केएल ठाकुर और आशीष शर्मा से ने 22 मार्च को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।    23 मार्च को तीनों भाजपा में शामिल हो गए थे। इस संबंध में दल-बदल विरोधी कानून तहत जगत नेगी की याचिका मिली थी और विधानसभा ने भी अपनी ओर से जांच की। जांच के बाद अब तीनों के इस्तीफे स्वीकार कर दिए हैं और आज से तीनों विधानसभा के सदस्य नहीं रहे। पठानिया ने कहा कि हालांकि, दल-बदल विरोधी कानून के तहत मिली याचिका की अंतिम सुनवाई अभी होनी है। उधर, निर्दलियों के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद खाली हुई देहरा, नालागढ़ और हमीरपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का रास्ता भी साफ हो गया है।  

मोदी की स्वास्थ्य गारंटी : आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े 56.67 करोड़ लोग

In Health
guarantee: 56.67 crore people connected to Ayushman Bharat Digital Mission

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है। क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।    भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।        

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का किया दौरा

In Education
 Representatives from University of Canterbury, New Zealand visit Shoolini University for academic cooperation and international education

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का दौरा किया। प्रोफेसर ब्रेट बर्क्विस्ट, सहायक कुलपति, एंगेजमेंट, और डॉ. ग्राहम वाइज, अंतर्राष्ट्रीय विकास निदेशक, कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड ने छात्रों और संकाय के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहलों पर चर्चा करने के लिए शूलिनी का दौरा किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के एजेंडे में संयुक्त अनुसंधान सहयोग, व्यवसाय विज्ञान, खाद्य विज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए मार्ग कार्यक्रम, साथ ही उत्पाद निर्माण, ऑनलाइन कार्यक्रम और औद्योगिक भागीदारी पर चर्चा शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय उपनिदेशक डॉ. रोज़ी धांता ने कहा, "न्यूज़ीलैंड को अपने नए गंतव्य के रूप में देखने से हमारे छात्रों के लिए ढेर सारे अवसर खुलते हैं।" डॉ. रोज़ी ने आगे कहा कि यह पहल हमारे छात्रों के लिए उपलब्ध विकल्पों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे वे सक्षम होंगे। अपनी आगे की पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में से चयन करना। कैंटरबरी विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोग उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान के अवसर प्रदान करने, एक वैश्विक शिक्षण वातावरण की सुविधा प्रदान करने के हमारे प्रयास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।

जेम्स एंडरसन 700 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले फास्ट बॉलर बने

In Sports
James Anderson became the world's first fast bowler to take 700 wickets.

** धर्मशाला में खेले जा रहे भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच में बना रिकॉर्ड ** इससे पहले दो स्पिन गेंदबाजों मुरलीधरन और शेन वार्न ने लिए हैं 700 से अधिक विकेट हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्टेडियम में खेले जा रहे भारत-इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखला के अंतिम एवं 5वें मैच में एक नया रिकॉर्ड बना है। मैच के तीसरे दिन इंग्लैंड के फास्ट बॉलर जेम्स एंडरसन 700 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले तेज गेंदबाज बन गए हैं। 700 विकेट लेने वाले वे इग्लैंड के भी पहले गेंदबाज हैं।    एंडरसन से पहले भी दो गेंदबाजों ने यह आंकड़ा छुआ है, लेकिन वे दोनों  स्पिनर हैं। इससे पहले श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन और आस्टे्रलिया के शेन वार्न ने क्रमश: 800 और 700 विकेट का आंकड़ा छुआ है।    बता दें कि भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने पहला मैच नहीं खेला था। इसके बाद के तीन मैच खेले हैं। अब धर्मशाला में चल रहे पांचवें मैच में खेल रहे हैं। दूसेर मैच में उन्होंने पांच विकेट लिए थे। तीसरे मैच में वे सिर्फ एक विकेट ले सके, जबकि रांची में खेले चौथे मैच में एंडरसन ने दो विकेट लिए थे।  

स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक, नीम करोली बाबा के आश्रम में सब नतमस्तक

In First Blessing
NEEM-KARORI-BABA

  नीम करोली बाबा के आश्रम में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शान्ति भारत में कई ऐसे पावन तीर्थ हैं, जहां पर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जाने मात्र से व्यक्ति के समस्त मनोरथ पूरे हो जाते हैं। ऐसा ही एक पावन तीर्थ देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में है, जिसे लोग 'कैंची धाम' के नाम से जानते हैं। कैंची धाम के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर दूर कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। यहां पर हर मन्नत पूर्णतया फलदायी होती है। यही कारण है कि देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा के भक्तों में एक आम आदमी से लेकर अरबपति-खरबपति तक शामिल हैं। बाबा के इस पावन धाम में होने वाले नित-नये चमत्कारों को सुनकर दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी बड़ी विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं।  कुछ माह पूर्व स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के यहां पहुंचते ही इस धाम को देखने और बाबा के दर्शन करने वालों की होड़ सी लग गई। 1964 में बाबा ने की थी आश्रम की स्थापना  नीम करोली बाबा या नीब करोली बाबा की गणना बीसवीं शताब्दी के सबसे महान संतों में की जाती है। इनका जन्म स्थान ग्राम अकबरपुर जिला फ़िरोज़ाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। कैंची, नैनीताल, भुवाली से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। बाबा नीम करौरी 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया। इस धाम को कैंची मंदिर, नीम करौली धाम और नीम करौली आश्रम के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी में बसा एक छोटा सा आश्रम है नीम करोली बाबा आश्रम। मंदिर के आंगन और चारों ओर से साफ सुथरे कमरों में रसीली हरियाली के साथ, आश्रम एक शांत और एकांत विश्राम के लिए एकदम सही जगह प्रस्तुत करता है। यहाँ कोई टेलीफोन लाइनें नहीं हैं, इसलिए किसी को बाहरी दुनिया से परेशान नहीं किया जा सकता है। श्री हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले नीम करोरी बाबा के इस पावन धाम पर पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन हर साल 15 जून को यहां पर एक विशाल मेले व भंडारे का आयोजन होता है। यहां इस दिन इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। कई चमत्कारों के किस्से सुन खींचे आते है भक्त  मान्यता है कि बाबा नीम करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे। बाबा नीब करौरी के इस पावन धाम को लेकर तमाम तरह के चमत्कार जुड़े हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया। ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुंचवाया। ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के दुनियाभर में 108 आश्रम  बाबा नीब करौरी को कैंची धाम बहुत प्रिय था। अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं। यहां बाबा नीब करौरी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। बाबा नीब करौरी महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है। स्टीव जॉब्स को आश्रम से मिला एप्पल के लोगो का आईडिया ! भारत की धरती सदा से ही अध्यात्म के खोजियों को अपनी ओर खींचती रही है। दुनिया की कई बड़ी हस्तियों में भारत भूमि पर ही अपना सच्चा आध्यात्मिक गुरु पाया है। एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 से 1976 के बीच भारत भ्रमण पर निकले। वह पर्यटन के मकसद से भारत नहीं आए थे, बल्कि आध्यात्मिक खोज में यहां आए थे। उन्हें एक सच्चे गुरु की तलाश थी।स्टीव पहले हरिद्वार पहुंचे और इसके बाद वह कैंची धाम तक पहुंच गए। यहां पहुंचकर उन्हें पता लगा कि बाबा समाधि ले चुके हैं। कहते है कि स्टीव को एप्पल के लोगो का आइडिया बाबा के आश्रम से ही मिला था। नीम करौली बाबा को कथित तौर पर सेब बहुत पसंद थे और यही वजह थी कि स्टीव ने अपनी कंपनी के लोगों के लिए कटे हुए एप्पल को चुना। हालांकि इस कहानी की सत्यता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शांति, शीर्ष पर पहुंचा फेसबुक  बाबा से जुड़ा एक किस्सा फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने 27 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताया था, तब पीएम मोदी फेसबुक के मुख्यालय में गए थे। इस दौरान जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की बात बताई। उन्होंने कहा कि जब वे इस संशय में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत में नीम करोली बाबा के स्थान पर  जाने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान वह नीम करोली बाबा के मंदिर में भी गए थे। जुकरबर्ग आए तो यहां एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहां दो दिन रुके थे। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली। बाबा की तस्वीर को देख जूलिया ने अपनाया हिन्दू धर्म  हॉलिवुड की मशहूर अदाकारा जूलिया रॉबर्ट्स ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था। वह फिल्म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं थीं। जूलिया रॉबर्ट्स ने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि वह नीम करौली बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर डाला। जूलिया इन दिनों हिन्दू धर्म का पालन कर रही हैं।    

मूवी RRR के नाटू-नाटू सॉन्ग ने जीता ऑस्कर अवॉर्ड

In Entertainment
Movie-RRR-Natu-Natu-Song-won-Oscar-Award

एसएस राजामौली की चर्चित मूवी ररर के नाटू-नाटू गाने को ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। भारत के लिए ये ऐतिहासिक पल है। फिल्ममेकर नाटू नाटू ने ओरिजनल सॉन्ग कैटेगिरी में अवॉर्ड जीता है। एमएम कीरावणी अवॉर्ड लेते हुए बेहद एक्साइटेड नजर आए। उनकी स्पीच भी चर्चा में बनी हुई है। इस जीत के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है। मेकर्स ने RRR मूवी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर जीत की खुशी जताई है। उन्होंने लिखा- 'हम धन्य हैं कि आरआरआर सॉन्ग नाटू-नाटू के साथ बेस्ट सॉन्ग कैटेगरी में भारत का पहला ऑस्कर लाने वाली पहली फीचर फिल्म है। कोई भी शब्द इस अलौकिक पल को बयां नहीं कर सकते। धन्यवाद। जय हिंद। 'वहीं 'नाटू नाटू' के ऑस्कर जीतने पर फिल्म के लीड एक्टर जूनियर एनटीआर ने भी रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा- 'मेरे पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। ये सिर्फ आरआरआर की जीत नहीं है बल्कि एक देश के तौर पर भारत की जीत है। ये तो अभी शुरुआत है कि भारतीय सिनेमा कितनी दूर जा सकता है। एमएम कीरावनी और चंद्रबोस को बधाई।'

मंत्री आतिशी का बड़ा दावा- दिल्ली में पानी की पाइपलाइन काटने की हो रही साजिश

In News
Minister Atishi's big claim - Conspiracy to cut water pipeline in Delhi

दिल्ली में लोगों को इस समय दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। तपती दिल्ली में पेयजल संकट परेशान कर रहा है। कई इलाके पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। इस बीच दिल्ली की जलमंत्री आतिशी का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पानी की परेशानी बढ़ाने के लिए पाइपलाइन काटने की साजिश हो रही है। इस षड्यंत्र के कारण साउथ दिल्ली में आज 25% पानी की कमी हुई है। आतिशी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है। उन्होंने दिल्ली में मुख्य वाटर पाइपलाइन को सुरक्षा देने का आग्रह किया है। जल संकट के बीच जल मंत्री आतिशी ने शनिवार को अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर समस्या दूर करने का आदेश दिया। साथ ही, जरूरत के आधार पर पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा जलापूर्ति बेहतर बनाने के लिए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू से फोन पर बातचीत भी की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बैठक के बाद आतिशी ने बताया कि दिल्ली में जलसंकट की स्थिति बढ़ रही है। हरियाणा से पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उत्पादन 70 एमजीडी तक घट गया है। 932 एमजीडी उत्पादन ही हो रहा है। वजीराबाद बैराज का जलस्तर सामान्य से 6 फीट घटकर 668.5 फीट पर पहुंच गया है। मुनक नहर से मिलने वाला पानी भी घटकर 902 क्यूसेक पहुंच गया है। कच्चा पानी मिलने में आई दिक्कत के बाद जल शोधन संयंत्र पर असर पड़ा है। इस समस्या से निपटने के लिए पश्चिमी दिल्ली के कई हिस्सों में बोरवेल को यूजीआर से जोड़ा गया है। साथ ही, जलबोर्ड ने दिल्ली में टैंकरों के फेरे बढ़ाकर प्रतिदिन 10 हजार कर दिया है। जल बोर्ड करीब 10 एमजीडी पानी टैंकरों से सप्लाई कर रहा है। आतिशी ने अपील की कि हिमाचल से मिलने वाले पानी पर जब तक अपर यमुना रिवर बोर्ड का निर्देश नहीं आ जाता तब तक हरियाणा दिल्ली को कुछ अतिरिक्त पानी दे। दिल्ली के लोग भी पानी बर्बाद न करें। यदि कहीं लीकेज दिखे तो तुरंत सोशल मीडिया पर खबर दें। इस पर तुरंत संज्ञान लेंगे। आतिशी ने बताया कि वजीराबाद बैराज और मुनक नहर से मिलने वाले पानी की मात्रा कम होने से दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से कम उत्पादन हो रहा है। सामान्य रूप से रोजाना इन प्लांट से 1005 एमजीडी पानी का उत्पादन होता है। जल संकट से राहत दिलाने की मांग को लेकर आप विधायकों ने शनिवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को पत्र लिखा है। विधायकों ने मांग रखी है कि दिल्ली को जल संकट से उबारने के लिए दिल्ली सरकार हर प्रयास कर रही है, लेकिन यमुना में पानी की उपलब्धता कम होने से दिल्ली की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। यह पूरा मामला हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच का है। अगर सीआर पाटिल इंटर स्टेट कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी उठा लें तो दिल्ली को जल संकट से उबारा जा सकता है। विधायकों ने मंत्री से रविवार को मिलने का समय भी मांगा। विधायक दिलीप पांडे ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सीआर पाटिल इस मामले में दखल देकर दिल्ली को जल्द राहत दिलाएंगे। आज दिल्ली के आप विधायक केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मिलने पहुंचे। हालांकि उनसे मुलाकात नहीं हुई है। आप विधायकों ने बताया कि हमने उनके आवास, कार्यालय और अन्य सभी माध्यमों से पत्र दे दिया है।

3 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस ,लोकसभा चुनावो की तारीखों का होगा ऐलान

In National News
 Chief Election Commissioner's press conference at 3 pm, Lok Sabha election dates will be announced

2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा आज होगी। दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 3 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।तारीखों की घोषणा के साथ देश में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी, जो चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक रहती है। लोकसभा के साथ 4 राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनाव की तारीखें भी आज तय होंगी। लोकसभा की 543 सीटों पर 7 फेज में वोटिंग हो सकती है। 15 से 18 अप्रैल के बीच पहले फेज के लिए, और  आखिरी फेज में 19 मई को वोटिंग हो सकती है। 23 मई को रिजल्ट संभव है।चुनाव आयोग ने लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के लिए 3.4 लाख केंद्रीय बलों की मांग की है। आयोग 97 करोड़ मतदाताओं के लिए देशभर में करीब 12.5 लाख मतदान केंद्र बना सकता है। 2024 में 97 करोड़ वोटर्स, 2 करोड़ नए मतदाता जुड़े 2024 लोकसभा में 97 करोड़ लोग वोटिंग कर सकेंगे। चुनाव आयोग ने 8 फरवरी को सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के वोटर्स से जुड़ी समरी रिवीजन 2024 रिपोर्ट जारी की थी। आयोग ने बताया कि वोटिंग लिस्ट में 18 से 29 साल की उम्र वाले 2 करोड़ नए वोटर्स को जोड़ा गया है। 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या में 6% की बढ़ोतरी हुई है। चुनाव आयोग ने कहा- दुनिया में सबसे ज्यादा 96.88 करोड़ वोटर्स लोकसभा चुनावों में वोटिंग के लिए रजिस्टर्ड हैं। साथ ही जेंडर रेशो भी 2023 में 940 से बढ़कर 2024 में 948 हो गया है।आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान बच्चों से पोस्टर और पर्चे बांटने और नारेबाजी करने जैसे काम भी ना करवाने का निर्देश दिया है।

भूकंप से अफगानिस्तान से दिल्ली तक हिली धरती, 6.1 रही तीव्रता

In International News
Earth shook from Afghanistan to Delhi due to earthquake, intensity was 6.1

** हिंदुकुश में जमीन से 220 किमी नीचे था केंद्र ** फिलहाल किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं  अफगानिस्तान के हिंदुकुश में आज दोपहर बाद 2:20 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इसकी वजह से पाकिस्तान के इस्लामाबाद, रावलपिंडी और भारत में जम्मू-कश्मीर से दिल्ली तक धरती हिल गई।     नेशनल सेंटर फॉर सीसमोलॉजी के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई। इसका केंद्र हिंदुकुश में जमीन से करीब 220 किलोमीटर नीचे था। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में महसूस किए गए। दो माह पूर्व नेपाल में आया था 6.4 तीव्रता का भूकंप गत वर्ष 4 नवंबर को रात 11:32 बजे नेपाल में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 157 लोगों की मौत हुई थी। तब दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी झटके महसूस किए गए थे। हालांकि भारत में किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था।  

शिव कुमार बटालवी : वो शायर जिसे मरने की बहुत जल्दी थी

In Kavya Rath
शिव कुमार बटालवी : वो शायर जिसे मरने की बहुत जल्दी थी

*अमृता प्रीतम ने बटालवी को कहा था 'बिरह का सुल्तान'    ' बिरहा बिरहा आखीए, बिरहा तू सुल्तान। जिस तन बिरहा ना उपजे, सो तन जाण मसान ...' प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम के शब्दों में वो ‘बिरह का सुल्तान’ था। पंजाब का एक ऐसा शायर जिसके जैसा न कोई था, न है और न कोई और होगा। वो हिंदुस्तान में भी खूब छाया और पाकिस्तान ने भी उसे जमकर चाहा. वो था  पंजाब का पहला सुपरस्टार शायर शिव कुमार बटालवी। वो शायर जिसने शराब में डूबकर वो रच दिया जिसे होश वाले शायद कभी न उकेर पाते। वो शायर जो मरने की बहुत जल्दी में था।       'असां तां जोबन रुत्ते मरनां, जोबन रूत्ते जो भी मरदा फूल बने या तारा, जोबन रुत्ते आशिक़ मरदे या कोई करमा वाला'.. बटालवी का  कहना था कि जवानी में जो मरता है वो या तो फूल बनता है या तारा। जवानी में या तो आशिक मरते हैं या वो जो बहुत करमों वाले होते हैं। जैसा वो कहते थे वैसा हुआ भी, महज 35 की उम्र में बटालवी दुनिया को अलविदा कह गए। पर जाने से पहले इतना खूबसूरत लिख गए कि शायरी का हर ज़िक्र उनके बगैर अधूरा है।   शिव कुमार बटालवी 23 जुलाई 1936 को पंजाब के सियालकोट में पैदा हुए, जो बंटवारे के बाद से पाकिस्तान में है। उनके पिता एक तहसीलदार थे पर न जाने कैसे शिव शायर हो गए। आजादी के बाद जब देश का बंटवारा हुआ तो बटालवी का परिवार पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत में पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला में आ गया। उस वक़्त शिव कुमार बटालवी की उम्र महज़ दस साल थी।  नका कुछ बचपन और किशोरावस्था यहीं गुजरी। बटालवी ने इन दिनों में गांव की मिट्टी, खेतों की फसलों, त्योहारों और मेलों को भरपूर जिया, जो बाद में उनकी कविताओं में खुशबू बनकर महका। उन्होंने अपने नाम में भी बटालवी जोड़ा, जो बटाला गांव के प्रति उनका उन्मुक्त लगाव दर्शाता है। बटालवी  जिंदगी के सफर में  बटाला, कादियां, बैजनाथ होते हुए नाभा पहुंचे लेकिन अपने नाम में बटालवी जोड़ खुद को ताउम्र के लिए बटाला से जोड़े रखा। कुछ बड़े होने के बाद उन्हें गांव से बाहर पढ़ने भेजा गया। वो खुद तो गांव से आ गए मगर उनका दिल गांव की मिटटी पर ही अटका रहा। कहते है उनका गांव छूट जाना उन पर पहला प्रहार था, जिसका गहरा जख्म उन्हें सदैव पीड़ा देता रहा।     गांव से निकलकर आगे की पढ़ाई के लिए शिव कादियां के एस. एन. कॉलेज के कला विभाग गए। पर दूसरे साल ही उन्होंने उसे बीच में छोड़ दिया। उसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ के एक स्कूल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई हेतु भेजा गया। पर पिछली बार की तरह ही उन्होंने उसे भी बीच में छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने नाभा के सरकारी कॉलेज में अध्ययन किया। उनका बार-बार बीच में ही अभ्यास छोड़ देना, उनके भीतर पल रही अराजकता और अनिश्चितता का बीजारोपण था। पिता शिव को कुछ बनता हुआ देखना चाहते थे। जो पिता शिव के लिए चाहते थे वो शिव ने अपने लिए कभी नहीं चाहा, इसीलिए पिता - पुत्र में कभी नहीं बनी।    बटालवी की छोटी सी जीवन यात्रा तमाम उतार चढ़ाव समेटे हुए है, किसी खूबसूरत चलचित्र की तरह जिसमें स्टारडम है, विरह का तड़का है और जिसका अंत तमाम वेदना समेटे हुए है। शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें ‘बिरह का सुल्तान’ नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। कहते है उन्हें मेले में एक लड़की से मोहब्बत हो गयी थी। मेले के बाद जब लड़की नज़रों से ओझल हुई तो उसे ढूंढने के लिए एक गीत लिख डाला। गीत क्या मानो इश्तहार लिखा हो; ‘इक कुड़ी जिहदा नाम मुहब्बत ग़ुम है’ ओ साद मुरादी, सोहनी फब्बत गुम है, गुम है, गुम है ओ सूरत ओस दी, परियां वर्गी सीरत दी ओ मरियम लगदी हस्ती है तां फूल झडदे ने तुरदी है तां ग़ज़ल है लगदी... ये वहीँ गीत है जो फिल्म उड़ता पंजाब में इस्तेमाल हुआ और इस नए दौर में भी युवाओं की जुबा पर इस कदर चढ़ा कि मानो हर कोई बटालवी की  महबूबा को ढूंढ़ते के लिए गा रहा हो। कहते है बटालवी का ये लड़कपन का प्यार अधूरा रहा क्यों कि एक बीमारी के चलते उस लड़की की मौत हो गयी। खैर ज़िंदगी बढ़ने का नाम है सो बटालवी भी अवसाद से निकलकर आगे बढ़ने लगे। फिर एक लड़की मिली और फिर शिव को उनसे मोहब्बत हो गई। पर इस मर्तबा भी अंजाम विरह ही था। दरअसल, जिसे शिव दिल ओ जान से मोहब्बत करते थे उसने किसी और का घर बसाया और शादी करके विदेश चली गयी। एक बार फिर शिव तनहा हुए और विरह के समुन्दर में गोते खाने लगे।  तब शराब और अवसाद में डूबे शिव ने जो लिखा वो कालजयी हो गया ........... माए नी माए मैं इक शिकरा यार बनाया चूरी कुट्टाँ ताँ ओह खाओंदा नाहीं वे असाँ दिल दा मास खवाया इक उड़ारी ऐसी मारी इक उड़ारी ऐसी मारी ओह मुड़ वतनीं ना आया, ओ माये नी! मैं इक शिकरा यार बना शिकरा पक्षी दूर से अपने शिकार को देखकर सीधे उसका मांस नोंच कर फिर उड़ जाता है। शिव ने अपनी उस बेवफा प्रेमिका को शिकरा कहा। हालांकि वो लड़की कौन थी इसे लेकर तरह तरह की बातें प्रचलित है । पर  इसके बारे में आधिकारिक रुप से आज तक कोई जानकारी नहीं है और ना वो ख़ुद ही कभी लोगों के सामने आई। शिव की उस बेवफा प्रेमिका के बारे में एक किस्सा अमृता प्रीतम ने भी बयां किया है।   शिव एक दिन अमृता प्रीतम के घर पहुंचे और उन्हें बताया कि जो लड़की उनसे इतनी प्यार भरी बातें किया करती थी वो उन्हें छोड़कर चली गयी है। उसने विदेश जाकर शादी कर ली है। अमृता प्रीतम ने उन्हें जिंदगी की हकीकत और फ़साने का अंतर समझाने का प्रत्यन किया पर शिव का मासूम  दिल टूट चूका था। कहते है शिव उसके बाद ताउम्र उसी लड़की के ग़म में लिखते रहे। सिर्फ 24 साल की उम्र में शिव कुमार बटालवी की कविताओं का पहला संकलन "पीड़ां दा परागा" प्रकाशित हुआ, जो उन दिनों काफी चर्चित रहा। उसी दौर में शिव ने लिखा ........ अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा तेरे चुम्मण पिछली संग वरगा है किरणा दे विच नशा जिहा किसे चिम्मे सप्प दे दंग वरगा      आखिरकार, 1967 में बटालवी ने अरुणा से शादी कर ली और उनके साथ दो बेटियां हुई। शिव शादी के बाद चंडीगढ़ चले गये। वहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत रहे। पर कहते है बटालवी उस लड़की को नहीं भूल नहीं सके और उसकी याद में लिखते गए।   की पुछ दे ओ हाल फ़कीरां दा साडा नदियों बिछड़े नीरां दा साडा हंज दी जूने आयां दा साडा दिल जलया दिलगीरां दा धीरे-धीरे, बटालवी शराब की दुसाध्य लत के चलते 7 मई 1973 को लीवर सिरोसिस के परिणामस्वरूप जग को अलविदा कह गए। कहते है कि जीवन के अंतिम दौर में उनकी माली हालत भी ठीक नहीं थी और अपने ससुर के घर उन्होंने अंतिम सांस ली। पर बटालवी जैसे शायर तो पुरानी शराब की तरह होते है, दौर भले बदले  पर नशा वक्त के साथ गाढ़ा होता जाता है। ‘लूणा’ के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार : ऐसा नहीं है कि शिव कुमार बटालवी सिर्फ विरह के शायर थे। बटालवी का नाम साहित्य के गलियारों में बड़े अदब के साथ लिया जाता है। ऐसा हो भी क्यों ना  इस दुनिया को अलविदा कहने  से पहले वे  ‘लूणा’ जैसा महाकाव्य लिख गए। इसी के लिए उन्हें सबसे कम उम्र में यानी महज 31 वर्ष की उम्र में साहित्य अकादमी पुरूस्कार भी मिला। ये सम्मान प्राप्त करने वाले वे सबसे कम उम्र के साहित्यकार है। ‘लूणा’ को पंजाबी साहित्य में ‘मास्टरपीस’ का दर्ज़ा प्राप्त है और साहित्य जगत में इसकी आभा बरक़रार है। कहा जाता था कि कविता हिंदी में है और शायरी उर्दू में। पर शिव ने जब पंजाबी में अपनी जादूगरी दिखाई तो उस दौर के तमाम हिंदी और उर्दू के बड़े बड़े शायर कवि हैरान रह गए।   नायाब गायकों ने गाये बटालवी के गीत : बटालवी की नज्मों को सबसे पहले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी थी। उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान ने उनकी कविता 'मायें नी मायें मेरे गीतां दे नैणां विच' को गाया था । जगजीत सिंह ने उनका एक गीत 'मैंनू तेरा शबाब ले बैठा' गाया तो दुनिया को पता चला की शब्दों की जादूगरी क्या होती है। नुसरत साहब और जगजीत सिंह - चित्रा सिंह के अलावा रबी शेरगिल, हंस राज हंस, दीदार सिंह परदेसी सहित एक से बढ़कर एक नायाब गायकों ने बटालवी की कविताएं गाई। उनकी लिखी रचनाओं को गाकर न जाने कितने गायक शौहरत पा गए। बटालवी आज भी हर दिल अजीज है। बटालवी और विरह जुदा नहीं । बटालवी तो आखिर बटालवी है।

धर्मशाला: अब विदेशों में भी मिलेंगे नगरोटा के युवाओं को रोजगार के अवसर : आरएस बाली

In Job
Dharamshala: Now the youth of Nagrota will get employment opportunities in foreign countries also: RS Bali

29 व 30 जनवरी को होगा रोजगार मेले का आयोजन दुबई के लिए 100 से ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड के लिए होगा साक्षात्कार होटल प्रबंधन में शेफ, कैटरिंग, हाउस कीपर, सर्विस-स्टाफ के लिए इंटरव्यू पर्यटन निगम के अध्यक्ष कैबिनेट रैंक आरएस बाली ने कहा कि अब विदेशों में भी नगरोटा के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बाबत दुबई की कुछ कंपनियों के साथ हिमाचल सरकार ने करार किया है। उन्होंने कहा कि नगरोटा के आईपीएच के विश्राम गृह में 29 तथा 30 जनवरी को नगरोटा विस क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा, इसमें दुबई की विभिन्न कंपनियों के लिए 100 से ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड के पदों के लिए भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही होटल प्रबंधन में शैफ, कैटरिंग, हाउस कीपर, सर्विस स्टाफ के पदों के लिए भी भर्ती की जाएगी।           आरएस बाली ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले रोजगार संघर्ष यात्रा भी नगरोटा बगबां से ही आरंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि नगरोटा विस क्षेत्र में वर्ष में दो बार रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को घर द्वार पर रोजगार के अवसर मिल सकें। पर्यटन निगम के अध्यक्ष आरएस बाली ने कहा कि नगरोटा विस क्षेत्र में विकास पुरूष स्व जीएस बाली के जन्म दिन पर जुलाई माह में पहला दो दिवसीय रोजगार मेला आयोजित किया गया था जिसमें आयोजित रोजगार मेले के पहले दिन 670 युवाओं को नामी गिरामी कंपनियों में रोजगार के लिए चयनित किया गया। दूसरे दिन रोजगार मेले में 450 युवाओं का चयन किया था।      रोजगार मेले के समन्वयक अमित कुमार ने बताया कि पर्यटन निगम के अध्यक्ष कैबिनेट रैंक आरएस बाली तथा सरकार के अथक प्रयासों से दुबई की कंपनियों के साथ रोजगार के लिए करार किया गया है उसी के आधार पर 29 तथा 30 जनवरी को नगरोटा में दुबई की विभिन्न कंपनियों के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए इंटरव्यू लिए जाएंगे इसमें 24 से 35 आयु वर्ग के युवा भाग ले सकते हैं, दस जमा दो उत्तीर्ण होना जरूरी है। न्यूनतम उंचाई पांच फुट सात इंच तथा वजन साठ किलो होना चाहिए। इस के लिए सैलरी 50 हजार से लेकर 70 हजार प्रतिमाह होगी तथा सिलेक्टिड अभ्यर्थियों को 15 दिन बिलासपुर तथा 15 दिन बाराणसी में प्रशिक्षण दिया जाएगा इसके साथ ही स्किल डिवल्पमेंट के तहत वीजा तथा हवाई टिकट भी सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। इसके साथ ही होटल प्रबंधन में भी विभिन्न पदों के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे।

शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

In Banka Himachal
शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस के महासचिव एवं सिस्को संस्था के अध्यक्ष महेश सिंह ठाकुर को जवाहर बाल मंच का राज्य मुख्य संयोजक नियुक्त किया गया है। चीफ स्टेट कॉडिनेटर बनाए जाने पर महेश सिंह ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष  मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी,प्रदेश के सीएम सुखविन्दर सिंह सूक्खु , राष्ट्रीय प्रभारी केसी वेणुगोपाल,जवाहर बाल मंच के राष्टीय अध्यक्ष जी.वी. हरि. सहित अन्य नेताओं के प्रति आभार जताया है।  महेश ठाकुर ने कहा कि जवाहर बाल मंच का मुख्य उद्देश्य 7 वर्षों से लेकर 17 वर्ष के आयु के लड़के लड़कियां तक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार को पहुंचना।  उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मौजूदा सरकार के द्वारा देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रहा है देश के युवाओं को भटकाया जा रहा है जो की देश के लिए एक बहुत बड़ा चिन्ता का विषय है कांग्रेस पार्टी ने इस विषय को गंभीरता से लिया और राहुल गांधी के निर्देश पर डॉ जीवी हरी के अध्यक्षता में देशभर में जवाहर बाल मंच के द्वारा युवाओं के बीच में नेहरू जी के विचारों को पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा वर्ष 2024 के चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत हासिल कर केंद्र से भाजपा को हटाने का काम करेगी। इसमें हिमाचल प्रदेश राज्य की भी प्रमुख भुमिका रहेगी।  उन्होंने कहा कि पूरे देश में महंगाई के कारण आमलोगों का जीना मुश्किल हो गया है। गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर इस महंगाई का व्यापक असर पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।  

राम लहर के सहारे चुनावी भवसागर पार करने की कवायद

In Loksabha Chunav 2024
BJP-MOVING-ON-WITH-RAM-MANDIR-ACHEIVEMENT

  2024 के चुनावी भवसागर को पार करने के लिए भाजपा राम नाम की नौका पर सवार दिख रही है। भाजपा के सियासी उदय में राम नाम सदा साहरा रहा है। राम नाम लेकर ही भारतीय जनता पार्टी फर्श से अर्श तक पहुंच गई। 1984 में भाजपा ने अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था और महज 2 सीटों पर सिमट गई थी। वहीँ भाजपा आज देश की 300 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर राज करती है। अब लोकसभा चुनाव दस्तक दे चुके है और इस बीच अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठता के चलते देश में राम लहर चली है और माहिर मान रहे है  भाजपा को इसका सियासी लाभ होना तय है।      यूँ तो भाजपा 1986 में लालकृष्ण आडवाणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही हिन्दुत्त्व और राममंदिर के मुद्दे पर आक्रमक हो गई थी लेकिन औपचारिक तौर पर पार्टी ने राममंदिर बनाने का संकल्प लिया 1989 में हुई पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में। इन 35 सालों में भगवा दल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी के अतीत का संघर्ष लंबा है, जिसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जनसंघ से लेकर अटल बिहारी वाजपाई और लालकृष्ण आडवाणी का संघर्ष रहा है। शून्य से शिखर तक पहुंचने वाली भाजपा का सियासी सफर काफी कठिनाइयों वाला रहा है, लेकिन हर बार भाजपा के लिए राम नाम एक सहारा बना है।          जाहिर है मौजूदा वक्त में भी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठता आयोजन ने देश का सियासी माहौल भी प्रभावित किया है। देश राम रंग में सराबोर हैं और राजनैतिक चश्मे से देखे तो भाजपा भी इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। दरअसल, ये गलत भी नहीं है क्यों कि राजनैतिक फ्रंट पर राम मंदिर निर्माण के संघर्ष की अगुआई भी भाजपा ने ही की है, सो श्रेय लेना राजनैतिक लिहाज से गलत भी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा 'हिंदू नवजागरण काल' को एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश करेगी और राम मंदिर इसका प्रतीक बनेगा। अब इसका कितना लाभ चुनाव में भाजपा को मिलेगा ये तो नतीजे तय करेंगे, पर निसंदेह राम मंदिर के जरिये बीजेपी ने देश के 80 प्रतिशत मतदाताओं को प्रभावित जरूर किया है।   दो वादे पुरे, समान नागरिक सहिंता शेष भाजपा के तीन बड़े लक्ष्य रहे है, धारा 370  हटाना, राम मंदिर बनाना और समान नागरिक सहिंता लागू करना। ये कहना गलत नहीं होगा कि इन्हीं तीन वादों की बिसात पर भाजपा का काडर मजबूत हुआ। पार्टी ने हमेशा  इन तीन विषयों पर खुलकर अपना पक्ष भी रखा और अपना वादा भी दोहराया। इनमें से भाजपा दो वादे पुरे कर चुकी है, कश्मीर से धारा 370  हटाई जा चुकी है और अब राम मंदिर का निर्माण भी हो गया है। अब सिर्फ समान नागरिक सहिंता लागू करने का भाजपा का वादा अधूरा है और पार्टी इसे लागू करने की प्रतिबद्धता दोहरा रही है।   400 सीट जीतने का लक्ष्य  भाजपा को उम्मीद है कि राम लहर के बीच वो आगामी चुनाव में 400 सीट का लक्ष्य हासिल करेगी। पार्टी राम मंदिर के अलावा लाभार्थी वोट और महिला आरक्षण की बिसात पर ऐतिहासिक बहुमत हासिल करना चाहती है। हालहीं में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हिंदुत्व एजेंडा का लाभ मिला है जिसके बाद पार्टी का जोश हाई है।    

क्या नालागढ़ में भी गगरेट की परिपाटी पर चलेगी कांग्रेस ?

In Siyasatnama
Will Congress follow the tradition of Gagret in Nalagarh also?

** क्या लखविंदर की होगी घर वापसी ? **या हारे हुए बावा पर फिर दांव खेलेगी कांग्रेस ..... जो गगरेट में हुआ क्या वो नालागढ़ में भी होगा ? क्या कालिया की तरह ही लखविंदर की भी होगी घर वापसी ? क्या गगरेट की रणनीति पर नालागढ़ में सियासी व्यूह रचेगी कांग्रेस ? ये तमाम सवाल उठना लाज़मी है क्योंकि अब नालागढ़ में उपचुनाव होने वाला है। जो निर्दलीय थे उनकी घर वापसी हो गई है और जो भाजपाई है उनकी घर वापसी हो सकती है और जो अब अपने घर में बैठे है उनका क्या होगा कोई पता नहीं ..बस कुछ इसी तरह घूम रही है नालागढ़ की सियासत।  हाल ही में 6 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में से 4 सीटें कांग्रेस ने जीती है और राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि कांग्रेस की इस जीत का बड़ा कारण सही टिकट आवंटन रहा है। गहन चिंतन-मंथन के बाद कांग्रेस ने प्रत्याशियों कि घोषणा की थी। बागियों के भाजपा में जाने से कई भाजपाई ऐसे थे जो कांग्रेस में आना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने टिकट दिया केवल 2 सीटों पर, सुजानपुर और गगरेट। अब सुजानपुर में जो भाजपा से कांग्रेस में आए वो कभी कांग्रेसी थे ही नहीं, लेकिन राकेश कालिया की तो घर वापसी हुई है। राकेश कालिया तो पहले भी कांग्रेस से विधायक रहे है। वैसे गगरेट में कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा भी नहीं था तो कालिया की घर वापसी कांग्रेस के मुनाफ़े का सौदा ही रही।   अब नालागढ़ में भी समीकरण कुछ ऐसे ही बनते दिख रहे है। निर्दलीय केएल ठाकुर की 15 महीने बाद ही घर वापसी हो गई है और  2022 में कांग्रेस से भाजपा में गए लखविंदर राणा भी अब घर वापसी की उम्मीद में ही होंगे। राणा तो अपना दर्द खुले मंच से  बयान भी कर चुके है कि अगर दल न बदला होता तो आज विधायक भी होते और सरकार में अहम पद भी मिलता। अब लखविंदर की घर वापसी होती है या नहीं ये तो वही जाने मगर कांग्रेस इस बारे सोच विचार ज़रूर कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि लखविंदर पहले भी 2 दफा नालागढ़ सीट कांग्रेस की झोली में डाल चुके है।  2011 के उपचुनाव और 2017 के आम चुनावो में लखविंदर कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुनाव जीते थे। जबकि पिछली दफा कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हरदीप सिंह बावा 2 चुनाव हार चुके है 2017 में एक बार निर्दलीय और 2022 में दूसरी दफा कांग्रेस टिकट पर भी बावा को हार ही नसीब हुई है।    अब हारे हुए मोहरों पर कांग्रेस फिर दांव खेलेगी ऐसा तो मुश्किल ही लगता है। अब नज़रे टिकी है लखविंदर राणा पर। लखविंदर अगर घर वापसी करते है और पार्टी उन्हें टिकट देती है तो नालागढ़ का ये चुनाव बेहद रोचक होना तय मानिए..ठीक उसी तरह जिस तरह गगरेट में चुनाव ग्रेट बना था।

Sign up for the latest of First Verdict

Get the latest news, articles, exclusive insights and much more right in your inbox!