पुलिस जिला नूरपुर की पीओ (Proclaimed Offender) सेल ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी प्रदीप कुमार उर्फ दीपा (45) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी गांव कुल्हण, तहसील एवं जिला कठुआ (जम्मू-कश्मीर) का रहने वाला है और उसके खिलाफ पुलिस थाना इंदौरा में वर्ष 2010 में दर्ज मुकदमा संख्या 109/10 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 के अंतर्गत मामला दर्ज था। न्यायालय में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण माननीय जेएमएफसी कोर्ट इंदौरा ने उसे उद्घोषित अपराधी घोषित किया था। नूरपुर पुलिस की पीओ सेल टीम ने 12 जून 2026 को विशेष अभियान के तहत उसे 3 पुली चिनौर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार इसकी सूचना आरोपी की पत्नी को दी गई तथा आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए उसे पुलिस थाना इंदौरा के सुपुर्द कर दिया गया है। नूरपुर पुलिस ने कहा है कि फरार आरोपियों और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा आम जनता से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की गई है।
पीएम श्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, पांगणा की पूर्व छात्रा साक्षी ठाकुर का केंद्र सरकार द्वारा सीबीएसई विद्यालयों के लिए नियुक्त गणित अध्यापकों में चयन हुआ है। विशेष बात यह है कि साक्षी अब उसी विद्यालय में गणित अध्यापिका के रूप में अपनी सेवाएं देंगी, जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार, क्षेत्रवासियों और उनके परिजनों में खुशी की लहर है।
साक्षी ठाकुर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों और शिक्षकों को दिया है। साक्षी ने कहा, “आज जो भी उपलब्धि मुझे प्राप्त हुई है, उसमें मेरे परिवार और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। विद्यालय में बिताए गए वर्षों ने मुझे अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व सिखाया। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उसी विद्यालय में पढ़ाने का अवसर मिला है, जहां से मैंने शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने छात्रों से आत्मविश्वास बनाए रखने और चुनौतियों का डटकर सामना करने की सलाह दी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने साक्षी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। उनकी सफलता वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। विद्यालय को विश्वास है कि साक्षी के अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को गणित विषय में नई दिशा मिलेगी तथा विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में और वृद्धि होगी।
एमएमएमसीएच, कुमारहट्टी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के सहयोग से गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी पर एक दिवसीय द्वितीय सेंसिटाइजेशन स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को महार्षि मार्कण्डेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष तरसेम गर्ग और सचिव विशाल गर्ग का संरक्षण प्राप्त रहा। मुख्य अतिथि एमएमयू के कुलपति डॉ. रवि चंद शर्मा तथा सह-अध्यक्ष के रूप में रजिस्ट्रार अजय कुमार सिंगल उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ. मनप्रीत सिंह नंदा, उप-प्राचार्य डॉ. जसदीप सिंह संधू, एमएमसीओएन की प्राचार्य डॉ. हरप्रीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किरण कुमार सिंघल और एनएएसी समन्वयक डॉ. जय गोपाल वोहरा भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की स्थानीय संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका गुप्ता तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पियूष वोहरा रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण ऑपरेशन थियेटर से प्रसारित लाइव सर्जरी रही, जिसमें राष्ट्रीय एंडोस्कोपिक सर्जरी प्रशिक्षक डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, ग्रेड-4 एंडोमेट्रियोसिस में ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी तथा फेलोपियन ट्यूब रिकैनालाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग, सर्जरी के विभिन्न चरणों और महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णयों की भी जानकारी दी। कार्यशाला में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने भाग लिया तथा एंडोस्कोपिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
हिमाचल प्रदेश के चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए नगर पंचायत अंब के चुनावों में बड़े स्तर पर धांधली और जोड़-तोड़ करने की कोशिश का सनसनीखेज आरोप लगाया है। नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान विधायक बबलू ने दावा किया कि भाजपा ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के महत्वपूर्ण पदों पर जबरन कब्जा जमाने के लिए अपनी पूरी ताकत और सत्ता बल का दुरुपयोग किया, लेकिन कांग्रेस समर्थित पार्षदों की चट्टानी एकजुटता के आगे विपक्ष की सारी रणनीतियां पूरी तरह नाकाम साबित हुईं। उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद अनुराग ठाकुर को आड़े हाथों लेते हुए एक गंभीर आरोप लगाया कि खुद सांसद विजयी पार्षदों को प्रभावित करने और उन्हें उनके घरों से साथ ले जाने का प्रयास कर रहे थे ताकि लोकतांत्रिक तरीके से आए चुनावी नतीजों को बदला जा सके, लेकिन लगातार बनाए गए अनुचित दबाव के बावजूद पार्षदों ने मुख्यमंत्री और कांग्रेस संगठन की नीतियों के प्रति अपनी अटूट निष्ठा साबित की।
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए इन चुनावों के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष अनुसूया रानी और उपाध्यक्ष सुरेश अरोड़ा ने अन्य कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ विधायक सुदर्शन सिंह बबलू से शिष्टाचार मुलाकात की, जहां विधायक ने सभी विजयी प्रतिनिधियों को सम्मानित कर उनकी एकजुटता की जमकर सराहना की। इस दौरान राजनीतिक माहौल को गरमाते हुए विधायक बबलू ने हुंकार भरी कि भाजपा भली-भांति जानती थी कि सभी पार्षद कांग्रेस की विचारधारा से मजबूती से जुड़े हैं, फिर भी उन्हें डराने या प्रभावित करने का असफल प्रयास किया गया। इस बड़ी राजनीतिक जीत से उत्साहित कांग्रेस विधायक ने यह भी दावा कर दिया है कि आगामी पंचायत समिति चुनावों में भी बीडीसी, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के सभी प्रमुख पदों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ही शानदार जीत का परचम लहराएंगे।
हिमाचल प्रदेश को निवेश का पसंदीदा केंद्र बनाने और पड़ोसी राज्यों से मिल रही प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए सुक्खू सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार अपनी आगामी 'नई ग्रीन औद्योगिक नीति' के तहत उद्योगों को विभिन्न करों और शुल्कों में बड़ी राहत देने की तैयारी में है। इस नीति के मसौदे में उद्योगों को राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) में छूट, बिजली शुल्क में राहत, कच्चे माल पर प्रवेश कर में कमी और परिवहन शुल्क को कम करने जैसे कई बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। दरअसल, पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और उत्पादन पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है; इसी परिचालन लागत को कम करने के लिए उद्योग विभाग एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रहा है ताकि मौजूदा निवेशकों को बनाए रखने के साथ-साथ नए उद्योगों को आकर्षित किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने वाली इस अनूठी नीति के तहत हरित तकनीकों और सौर ऊर्जा को अपनाने वाली इकाइयों को सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय लाभ और विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। उद्योग विभाग फिलहाल इस नीति के अंतिम ड्राफ्ट पर विभिन्न विभागों से सुझाव ले रहा है, जिसे कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद आगामी अगस्त महीने में राज्य में लागू किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की पुरानी औद्योगिक नीति की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो चुकी है, जिसे सरकार ने फिलहाल अस्थायी तौर पर विस्तार दिया है। सरकार को पूरा भरोसा है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने वाली यह नई नीति हिमाचल प्रदेश को एक टिकाऊ और बेहद आकर्षक औद्योगिक गंतव्य के रूप में स्थापित करेगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दरअसल, विगत 4 जून को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायक के वोट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही अटकलें थी की प्रदेश सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है, और अब अपेक्षा अनुसार हाईकोर्ट के इस फैसले को सुक्खू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। आगामी 15 जून को इसे लेकर सुनवाई होनी है।
आपको बता दें प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ एक पार्षद का अंतर है। मसलन परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषद, तथा अर्की नगर पंचायत में भाजपा के पास सिर्फ एक पार्षद अधिक है। इन सभी हलकों में कांग्रेस के विधायक है और ऐसे में यदि विधायक का वोट मान्य होता है तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का फैसला सम्भवतः टॉस से होगा। ये ही कारण है कि सुक्खू सरकार ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे वैश्विक संघर्ष की भीषण आग ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक परिवार का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझा दिया है। ओमान तट के समीप एक तेल टैंकर (ऑयल शिप) पर हुए मिसाइल हमले में मर्चेंट नेवी के होनहार डैक कैडेट आदित्य शर्मा की दर्दनाक मौत हो गई। महज सात महीने पहले, 25 नवंबर 2025 को अपनी पहली नौकरी पर निकले आदित्य को मई में छुट्टी नहीं मिल सकी थी। उन्होंने पिछले रविवार को ही फोन पर अपने पिता राजेश कुमार शर्मा से आखरी बार बात करते हुए वादा किया था, "पापा, मई में नहीं आ सका तो क्या हुआ, जुलाई में छुट्टी लेकर पक्का घर आऊंगा।" बुधवार रात जैसे ही पिता जालंधर स्थित अपने घर पहुंचे, उन्हें बेटे की इस असमय मौत की खबर मिली, जिसने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी पीड़ित परिवार से फोन पर बात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की भेंट चढ़े हमीरपुर के इस लाडले की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है|
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दरअसल, विगत 4 जून को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायक के वोट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही अटकलें थी की प्रदेश सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है, और अब अपेक्षा अनुसार हाईकोर्ट के इस फैसले को सुक्खू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। आगामी 15 जून को इसे लेकर सुनवाई होनी है।
आपको बता दें प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ एक पार्षद का अंतर है। मसलन परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषद, तथा अर्की नगर पंचायत में भाजपा के पास सिर्फ एक पार्षद अधिक है। इन सभी हलकों में कांग्रेस के विधायक है और ऐसे में यदि विधायक का वोट मान्य होता है तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का फैसला सम्भवतः टॉस से होगा। ये ही कारण है कि सुक्खू सरकार ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
एमएमएमसीएच, कुमारहट्टी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के सहयोग से गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी पर एक दिवसीय द्वितीय सेंसिटाइजेशन स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को महार्षि मार्कण्डेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष तरसेम गर्ग और सचिव विशाल गर्ग का संरक्षण प्राप्त रहा। मुख्य अतिथि एमएमयू के कुलपति डॉ. रवि चंद शर्मा तथा सह-अध्यक्ष के रूप में रजिस्ट्रार अजय कुमार सिंगल उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ. मनप्रीत सिंह नंदा, उप-प्राचार्य डॉ. जसदीप सिंह संधू, एमएमसीओएन की प्राचार्य डॉ. हरप्रीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किरण कुमार सिंघल और एनएएसी समन्वयक डॉ. जय गोपाल वोहरा भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की स्थानीय संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका गुप्ता तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पियूष वोहरा रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण ऑपरेशन थियेटर से प्रसारित लाइव सर्जरी रही, जिसमें राष्ट्रीय एंडोस्कोपिक सर्जरी प्रशिक्षक डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, ग्रेड-4 एंडोमेट्रियोसिस में ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी तथा फेलोपियन ट्यूब रिकैनालाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग, सर्जरी के विभिन्न चरणों और महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णयों की भी जानकारी दी। कार्यशाला में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने भाग लिया तथा एंडोस्कोपिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पीएम श्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, पांगणा की पूर्व छात्रा साक्षी ठाकुर का केंद्र सरकार द्वारा सीबीएसई विद्यालयों के लिए नियुक्त गणित अध्यापकों में चयन हुआ है। विशेष बात यह है कि साक्षी अब उसी विद्यालय में गणित अध्यापिका के रूप में अपनी सेवाएं देंगी, जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार, क्षेत्रवासियों और उनके परिजनों में खुशी की लहर है।
साक्षी ठाकुर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों और शिक्षकों को दिया है। साक्षी ने कहा, “आज जो भी उपलब्धि मुझे प्राप्त हुई है, उसमें मेरे परिवार और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। विद्यालय में बिताए गए वर्षों ने मुझे अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व सिखाया। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उसी विद्यालय में पढ़ाने का अवसर मिला है, जहां से मैंने शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने छात्रों से आत्मविश्वास बनाए रखने और चुनौतियों का डटकर सामना करने की सलाह दी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने साक्षी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। उनकी सफलता वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। विद्यालय को विश्वास है कि साक्षी के अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को गणित विषय में नई दिशा मिलेगी तथा विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में और वृद्धि होगी।
भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला कल यानी 13 जून को धर्मशाला के खूबसूरत हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (HPCA) स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला एक डे-नाइट (दिन-रात) मैच है, जो दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगा। इस सीरीज में भारतीय टीम की कमान युवा बल्लेबाज शुभमन गिल संभाल रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान की टीम राशिद खान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरेगी। क्रिकेट फैंस इस रोमांचक मैच को टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स और डीडी स्पोर्ट्स पर लाइव देख सकते हैं, जबकि इसकी डिजिटल स्ट्रीमिंग 'जियोहॉटस्टार' (JioHotstar) पर की जाएगी।
यह मुकाबला इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि साल 2023 के वनडे विश्व कप के बाद धर्मशाला के इस मैदान पर कोई अंतर्राष्ट्रीय वनडे मैच आयोजित होने जा रहा है। खेल प्रेमियों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि बीसीसीआई (BCCI) ने पहले इस मैच को 14 जून को कराने का फैसला किया था, लेकिन बाद में तारीखों में बदलाव कर इसे 13 जून (शनिवार) को तय किया गया।
चूंकि यह मैच पहाड़ों के बीच बसे खूबसूरत स्टेडियम में हो रहा है, इसलिए मौसम की भूमिका भी अहम होगी। जून के महीने में दोपहर के समय यहां अच्छी खासी धूप और गर्मी रहेगी, लेकिन शाम होते-होते तापमान गिरकर 10 से 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस ठंडी शाम में फ्लडलाइट्स के नीचे मैच का दूसरा हिस्सा खेला जाएगा। भारतीय टीम हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में बड़ी जीत दर्ज कर चुकी है, जिससे टीम के हौसले बुलंद हैं। वहीं अफगानिस्तान की टीम भी अपने बेहतरीन स्पिन आक्रमण के दम पर भारतीय सरजमीं पर बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी।
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।
घटस्थापना की सामग्री
हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।
कलश स्थापना की विधि
पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए।
होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने 3 मई को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी है। पेपर लीक के आरोपों और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी से यह फैसला लिया गया। मामले की जांच अब CBI करेगी।
NTA के मुताबिक छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा और पुराने परीक्षा केंद्र ही बनाए रखे जाएंगे। री-एग्जाम के लिए नए एडमिट कार्ड जारी होंगे, वहीं परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी।
जांच में सामने आया है कि पेपर छपने से पहले ही सवाल नकल गैंग तक पहुंच गए थे। राजस्थान SOG ने जयपुर समेत कई जगहों पर कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। दावा है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू परीक्षा में आए।
बताया जा रहा है कि करीब 23 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था। नई परीक्षा तारीखों का ऐलान जल्द किया जाएगा।
खाड़ी देश के 'पर्शियन गल्फ' में फंसे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कैप्टन रमन कपूर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अमेरिका-इजरायल और इरान युद्ध के कारण 20 हजार नाविकों में दहशत का माहौल है। इनमें करीब 2000 भारतीय नाविक हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण 500 से 700 समुद्री जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कैप्टन रमन ने कहा कि किसी भी शिप पर कभी भी अटैक हो रहा है। स्पेशियली उन शिप पर, जिनका कोई भी लिंक अमेरिका और इजरायल के साथ है, अगर वो मूवमेंट शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि इरान चाहता है कि पर्शियन गल्फ से (भारत और चीन को छोड़कर) अन्य देशों को कोई भी ऑयल टैंकर बाहर न जाए।
कैप्टन रमन ने कहा कि उनका शिप पर्शियन गल्फ में फंसा हुआ है। वह कुछ दिन पहले ही ईराक से कार्गो लोड करके आए हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो बाहर जा सकते हैं और न ही रह सकते हैं। उनके पास शिप में अलर्ट रहने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। एयरपोर्ट और समुद्री रास्ते बंद हैं। कैप्टन कपूर ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन जहाजों को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे सभी जहाज समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं और नाविक लगातार तनाव में हैं, जो लगातार अपने परिवारों से संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। अनिश्चित हालात के बीच नाविकों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण दुनिया से कटा रहता है।
कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है।
प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम
यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच में एक मूर्ति बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था।
दांत और बाल आज भी संरक्षित
इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।
गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया।
सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में
गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।