शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि 12 अक्तूबर को दिल्ली में कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रदर्शन होगा। इसमें हिमाचल प्रदेश से मुख्यमंत्री सुक्खू के अलावा कैबिनेट मंत्री, कांग्रेस विधायक और पार्टी कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शनिवार को दिल्ली से शिमला लौटे। इस दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने दिल्ली में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता इसमें हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस हाल के दिनों में चुनाव प्रक्रिया और विपक्षी नेताओं की हिरासत के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। हिमाचल में भी मुख्यमंत्री सुक्खू की अगुवाई में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था। सुक्खू ने इससे पहले दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने निष्पक्ष चुनाव और मताधिकार की सुरक्षा को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया। शिमला लौटने के बाद मुख्यमंत्री से हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी सचिवालय में मुलाकात की और अपनी मांगें उनके सामने रखीं।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने CJP प्रदर्शन के दौरान युवाओं को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाकर लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। सीएम सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा। CJP प्रदर्शन के दौरान युवाओं को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। वहीं, मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया है।
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने जा रही है। बैठक के एजेंडे में करीब 150 प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें सरकारी नौकरियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी हैं, ऐसे में युवाओं की नजर कैबिनेट के संभावित फैसलों पर टिकी हुई है। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों के अलावा भर्तियों, नियुक्तियों और सरकारी सेवाओं से संबंधित मामलों पर भी निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही प्रदेश के विकास और प्रशासन से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। वहीं, कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों के मौजूद नहीं रहने की जानकारी सामने आई है। उनकी गैरमौजूदगी के कारण भी बैठक चर्चा में है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि करीब 150 एजेंडा आइटम में से किन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और सरकारी नौकरियों को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है।
बिलासपुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी सामने आई। आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इन मामलों पर आयोग को जवाब देना चाहिए। मामले को लेकर संबंधित लोगों ने अपनी आपत्तियां और मांगें सामने रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की। साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही गई।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हॉलीलॉज चर्चा में है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए उनकी सरकार और कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को सफल मान रहे हैं, जबकि प्रदेश में कई मुद्दों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है। उन्होंने हॉलीलॉज से जुड़े राजनीतिक प्रभाव और कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी चर्चाओं को भी मुद्दा बनाया। हॉलीलॉज लंबे समय से हिमाचल की राजनीति में एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र माना जाता रहा है। वीरभद्र सिंह के दौर से इसका प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में खास प्रभाव रहा है। जयराम ठाकुर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर हॉलीलॉज बनाम सुक्खू सरकार की सियासत चर्चा में आ गई है। वहीं, सुक्खू सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी नजर रहेगी।
हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर को लेकर कांग्रेस के भीतर फिर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू और रामपुर दौरे के दौरान कार्यक्रमों के पोस्टर और बैनर में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नजर नहीं आई। मंच से भी उनके नाम का उल्लेख नहीं होने पर पूर्व सांसद और वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी करीब साढ़े चार साल ही हुए हैं और उन्हें इतनी जल्दी भुला देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने हिमाचल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके योगदान को याद किया जाना चाहिए। वहीं, मामला तूल पकड़ने के बाद रोहड़ू के कांग्रेस विधायक एलएम ब्राक्टा ने भी माना कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की तस्वीर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाषण में रोहड़ू के विकास में वीरभद्र सिंह के योगदान का जिक्र किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि तस्वीर न लग पाना जानबूझकर नहीं हुआ। रामपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लाल चंद ने भी माना कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं लग पाई। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई अनदेखी नहीं बताया और कहा कि कांग्रेस आज भी वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके कार्यों को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू-रामपुर दौरे के दौरान करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के साथ एंटी-चिट्टा रैलियां भी आयोजित की गई थीं। लेकिन दौरे के बाद वीरभद्र सिंह की तस्वीर और नाम को लेकर उठा विवाद अब कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।
दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं को रोके जाने के विरोध में हिमाचल कांग्रेस ने बुधवार को शिमला स्थित लोकभवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। दरअसल, छह अक्तूबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता धरने पर बैठ गए। करीब आठ घंटे बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसी कार्रवाई के विरोध में शिमला में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि आवाज दबाने से सवाल खत्म नहीं होंगे और विपक्ष जनता की आवाज उठाता रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और असहमति की आवाज को बनाए रखने की मांग उठाई
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने दावा किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में हिमाचल की सत्ता में भाजपा की वापसी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बदलाव तय है। हमीरपुर के टिप्पर गांव में भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के दौरान श्रीकांत शर्मा ने पार्टी के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के 8,007 मतदान केंद्रों पर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। बैठक में आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों, सेवा कार्यों और पार्टी के भविष्य के रोडमैप पर भी चर्चा हुई। भाजपा नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। भाजपा की प्रदेश सह-प्रभारी दर्शना सिंह ने कांग्रेस और वाम दलों पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा इन दावों का जवाब तथ्यों के साथ देगी। वहीं, 2027 में सत्ता परिवर्तन को लेकर भाजपा नेता लगातार अपने स्तर पर दावे कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पहले ही भाजपा के सत्ता में लौटने के दावे को खारिज कर चुके हैं। इस तरह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हिमाचल में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और संगठनात्मक तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की 5 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई है। अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 7 अक्तूबर को कैबिनेट बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बैठक की अंतिम तारीख और एजेंडा आधिकारिक तौर पर अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। जानकारी के अनुसार, सितंबर में भी मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हो पाई थी। इससे पहले 11 सितंबर को प्रस्तावित बैठक भी स्थगित की गई थी। अब लंबित मामलों को अगली बैठक में शामिल किए जाने की तैयारी है। प्रस्तावित बैठक में कर्मचारियों से जुड़े मामलों, विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने और नई भर्तियों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग समेत कई विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने आने की संभावना है। इसके अलावा पहले से लंबित एजेंडे के साथ मुख्यमंत्री की ओर से हाल में की गई कुछ घोषणाओं से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। इनमें 100 नए सीबीएसई स्कूलों और शिक्षकों की नियुक्ति तथा करीब 600 जूनियर इंजीनियर पदों पर भर्ती से संबंधित मामले भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। फिलहाल सरकार की ओर से 7 अक्तूबर की बैठक की औपचारिक अधिसूचना का इंतजार है। बैठक होती है तो लंबे समय से लंबित भर्ती और कर्मचारी मामलों को लेकर कई अहम फैसले सामने आ सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में जमीन के बंदोबस्त की लंबी प्रक्रिया को अब छोटा करने की तैयारी है। प्रदेश सरकार बंदोबस्त के नियमों में बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जमीन की सीमाएं तय करने का काम करीब हर पांच साल में किया जाएगा, जबकि मौजूदा व्यवस्था में 40 साल की अवधि का प्रावधान है। इस संबंध में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में सचिवालय में बैठक हुई। बैठक में भूमि अभिलेख निदेशक समेत बंदोबस्त और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। सरकार ने नियमों में बदलाव के सुझाव तैयार करने के लिए एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी में बंदोबस्त का अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार के निर्देश के अनुसार कमेटी 10 दिन के भीतर अधिसूचित की जाएगी और उसे करीब एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। कमेटी मौजूदा नियमों का अध्ययन कर उन प्रावधानों में बदलाव सुझाएगी, जिनकी वजह से बंदोबस्त की प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहती है। कई जिलों में दशकों से नहीं हुआ बंदोबस्त प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से बंदोबस्त नहीं हो पाया है। चंबा में 1951, मंडी में 1959 और कांगड़ा में 1970 के बाद बंदोबस्त की प्रक्रिया नहीं हो सकी है। सरकार के अनुसार आधुनिक उपकरणों और कर्मचारियों की कमी भी इस लंबी प्रक्रिया का एक कारण है। डिजिटल रिकॉर्ड पर जोर नई व्यवस्था में जमीन की पैमाइश और सीमाएं तय करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसमें ड्रोन, रोवर, डीजीपीएस, लेजर डिस्टेंस मीटर, इलेक्ट्रॉनिक डेटा कलेक्टर और अन्य सर्वे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही जमीन के नक्शों और सीमाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर रहेगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार बंदोबस्त में लगने वाले वर्षों को कम करना सरकार का उद्देश्य है। इसके लिए नियमों के साथ-साथ तकनीक, सर्वेक्षण प्रक्रिया और कर्मचारियों की भूमिका में भी जरूरी बदलाव सुझाए जाएंगे।
मंडी। अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस देशभर में अभियान चलाएगी। प्रतिभा सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आने के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से लिए जा रहे फैसलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इसे ‘जनमत चोरी’ से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने CWC की बैठक में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा तथा कथित ‘वोट चोरी’ को रोकने के लिए देशभर में बड़ा अभियान चलाने का आह्वान किया है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और अभियान को आगे बढ़ाएगी। प्रतिभा सिंह ने SIR के तहत 13 लाख से अधिक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने का दावा भी किया। हालांकि, यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप प्रतिभा सिंह के बयान पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता I उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई। वहीं, हिमाचल में कांग्रेस पहले ही SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। 25 सितंबर को शिमला में निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। देशभर में SIR और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है।
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सोमवार को कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को साथ लेकर सड़क मार्ग से दिल्ली पहुंचे। शिमला में खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिसके बाद वे सड़क मार्ग से रवाना हुए। सुक्खू मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में शामिल होंगे। बैठक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान हिमाचल में प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर कांग्रेस हाईकमान से चर्चा की भी संभावना है। सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। वहीं, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी दिल्ली में हैं, जहां उनकी कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात प्रस्तावित है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के कॉरपोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही मुख्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के सरकार के फैसले का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। याचिकाएं सेवानिवृत्त HPTDC कर्मचारियों दाबे राम और मुकेश भारद्वाज ने दायर की थीं। दोनों ने शिमला स्थित कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला के होटल कश्मीर हाउस में स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी थी। सरकार और HPTDC की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2025 में धर्मशाला-कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया था। इसके बाद HPTDC के निदेशक मंडल ने निगम के अपने भवन में कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने का फैसला किया। इससे पहले शिमला में होटल हॉलिडे होम के पास नया कॉरपोरेट कार्यालय बनाने की योजना थी, लेकिन भवन निर्माण की योजना को नगर निगम से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद धर्मशाला में कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालय का स्थान तय करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत निर्णय है। अदालत सरकार के ऐसे नीतिगत फैसले के गुण-दोष की तुलना कर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उनका HPTDC के साथ सेवा संबंध समाप्त हो चुका है। इसलिए वे सेवारत कर्मचारियों से जुड़े इस मुद्दे पर याचिका दायर करने के लिए उचित आधार नहीं रखते। दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता द्वारा जमा 50-50 हजार रुपये की राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के बीच बराबर बांटने के निर्देश दिए। हालांकि HPTDC की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल हेड ऑफिस का पता रिट्ज एनेक्सी, शिमला ही दर्ज है, इसलिए वास्तविक प्रशासनिक शिफ्टिंग की स्थिति को सरकार/निगम के आगामी आदेशों के संदर्भ में देखना होगा।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को शिमला स्थित राजीव भवन में होगी। प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की मौजूदगी में होने वाली बैठक में संगठन के कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी रणनीति पर मंथन किया जाएगा। बैठक में भरमौर से सिरमौर तक प्रस्तावित ‘हिमाचल जोड़ो यात्रा’ की रूपरेखा और तारीख तय करने पर चर्चा होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में प्रस्तावित इस यात्रा का उद्देश्य पूरे प्रदेश में संगठन को सक्रिय करना और लोगों तक पहुंच बढ़ाना बताया गया है। यात्रा के दौरान SIR समेत अन्य मुद्दे भी उठाए जाने की तैयारी है। इसके अलावा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर भी चर्चा होगी। पार्टी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है और इसी मुद्दे पर शुक्रवार को शिमला में निर्वाचन विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, रजनी पाटिल समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल होने वाले था I PCC बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों और जिला कांग्रेस अध्यक्षों के पिछले तीन महीने के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी। संगठन को बूथ, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक मजबूत करने तथा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने पर भी चर्चा होगी। 26 सितंबर को मीडिया विभाग और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अग्रणी संगठनों व विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी।
हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल तीन दिवसीय हिमाचल दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से शिमला में मुलाकात की। बैठक में राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि मुलाकात में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके बाद शिमला के राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस की अहम बैठक होनी है। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार समेत प्रदेश पदाधिकारी और जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में पिछले तीन महीनों के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा की जाएगी और जिलों व ब्लॉकों में संगठन की सक्रियता का फीडबैक लिया जाएगा। बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। पार्टी भरमौर से सिरमौर तक 'हिमाचल जोड़ो यात्रा' की रणनीति पर भी मंथन करेगी। वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस ने शिमला के कुसुम्पटी स्थित चुनाव विभाग कार्यालय के बाहर SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी रखा है। इसमें रजनी पाटिल, मुख्यमंत्री सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल होने हैं। यानी आज शिमला में कांग्रेस के लिए दिन संगठन की समीक्षा, सरकार-संगठन के तालमेल और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति के लिहाज से अहम है।
पालमपुर: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालकर जमकर प्रदर्शन किया। महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान किए गए 1500 रुपये देने के वादे की याद दिलाई और सरकार से जवाब मांगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले महिलाओं से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। महिला मोर्चा ने कहा कि 1500 रुपये देने का वादा महिलाओं के सम्मान और आर्थिक मदद से जुड़ा था, लेकिन लंबे समय बाद भी महिलाएं इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया। रैली के दौरान भाजपा नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वादों को याद रखना चाहिए और जनता से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। भाजपा महिला मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने महिलाओं से किए वादों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनकी कैबिनेट के कुछ मंत्री और बड़े अफसर इस समय दिल्ली में हैं. सीएम सुक्खू के अलावा तीन कैबिनेट मंत्री दिल्ली दौरे पर हैं. सीएम के साथ राज्य के टॉप ब्यूरोक्रेट्स भी राजधानी में डेरा डाले हुए हैं. मुख्य सचिव केके पंत के अलावा अन्य बड़े अफसर सीएम के साथ हैं. दिल्ली में हिमाचल को लेकर कुछ बड़े घटनाक्रम देखने को मिलेंगे. सीएम सुक्खू केंद्रीय नेताओं से मिलेंगे और साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है. सीएम दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान एवं कृषि और पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार भी दिल्ली में हैं. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर दिल्ली में साक्षरता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. वहीं, सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू आज यानी मंगलवार (8 सितंबर) सुबह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात करेंगे. मीटिंग का एजेंडा कुल्लू-मनाली एवं मंडी में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर तय है. हिमाचल प्रदेश का एक कंसर्न मानसून सीजन में आपदा से प्रभावित लोगों को वन भूमि का आवंटन सुनिश्चित करना भी है. सीएम सुक्खू ने इस मामले में ऐलान किया है कि आपदा प्रभावितों को जरूरत के अनुसार वन भूमि दी जाएगी. इसके लिए केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है. मंगलवार शाम को ही सीएम सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात तय है. निर्मला सीतारमण के साथ मीटिंग में सीएम एवं मुख्य सचिव सहित अन्य अफसर भी रहेंगे. इस दौरान हिमाचल प्रदेश के वित्तीय मसलों पर चर्चा होगी. साथ ही हिमाचल प्रदेश प्राईड ऑफ हिल्स नाम से शुरू किए गए फंड में केंद्र से और अधिक रकम प्रदान किए जाने की मांग करेगा. इस दौरान हिमाचल प्रदेश पिछले सीजन में पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित किए गए पैकेज को लेकर भी अपना पक्ष रखेगा. सीएम सुक्खू का दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का संभावित कार्यक्रम है. विभिन्न केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान राज्य के मुख्य सचिव केके पंत, दिल्ली में सीएम के ऊर्जा सलाहकार रामसुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, शिक्षा सचिव और सीएम के सचिव का कार्यभार देख रहे आईएएस राकेश कंवर आदि मौजूद रहेंगे.
हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन
हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। किन्नौर जिले और इसके तीन ब्लॉकों में कांग्रेस संगठन को अब नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया है। राजस्व मंत्री और किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी का कहना है कि इन कमेटियों के गठन से पहले उनकी राय नहीं ली गई थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी माना है कि कार्यकारिणियों के गठन में कुछ विसंगतियां थीं। इन्हें दूर करने के बाद नई कार्यकारिणियों की घोषणा की जाएगी। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है। दरअसल, किन्नौर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष के तौर पर निगम भंडारी की नियुक्ति के बाद से ही विवाद चल रहा था। जगत नेगी ने इस नियुक्ति पर खुलकर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इतने अहम फैसले से पहले उनसे राय नहीं ली गई। नेगी ने यह भी सवाल उठाया था कि चुनाव हार चुके नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों दी जा रही हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर भाजपा के कथित 'स्लीपर सेल' सक्रिय होने तक का आरोप लगाया था। जगत नेगी और किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी के बीच मतभेद पिछले कुछ समय से सार्वजनिक रहे हैं। विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस की हिमाचल प्रभारी रजनी पाटिल ने भी दोनों नेताओं के बीच समझौते की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थीं। विवाद के बीच निगम भंडारी ने दिल्ली जाकर कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी। इसके बाद रिकांगपिओ में उनके पदभार ग्रहण कार्यक्रम में भी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। कमेटियां भंग होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कार्यकारिणियों में किसे जिम्मेदारी दी जाती है। जगत नेगी पहले ही संगठनात्मक नियुक्तियों में अपनी राय को महत्व देने की मांग कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने किन्नौर में नेताओं के बीच संतुलन बनाते हुए नई टीम तैयार करने की चुनौती होगी। नई नियुक्तियों से यह भी साफ होगा कि पार्टी हाईकमान किन्नौर में किस तरह की रणनीति अपनाता है और आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को कितना मजबूत करने की कोशिश करता है।
कंगना ने मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों से विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर कड़े सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि मंजूरी और पैसा मिलने के बावजूद कई काम जमीन पर क्यों नहीं उतर रहे। कंगना के इसी तेवर पर पलटवार करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सिर्फ आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बन जाते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक कामकाज में कलम की एक स्याही ही काफी होती है। उनके बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है। विक्रमादित्य सिंह ने कंगना की अधिकारियों के साथ बातचीत के तरीके पर भी सवाल उठाए। वहीं कंगना का फोकस मंडी संसदीय क्षेत्र में केंद्र की योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर है। बैठक के बाद संबंधित अधिकारियों ने इन परियोजनाओं की समीक्षा भी शुरू कर दी है। यानी मुद्दा विकास कार्यों की रफ्तार से शुरू हुआ, लेकिन अब मामला कंगना और विक्रमादित्य के बीच सियासी तकरार तक पहुंच गया है।
धर्मशाला: घनियारा में करीब 84 कनाल सरकारी जमीन को कथित तौर पर इंतकाल के जरिए निजी लोगों के नाम कर दिया गया। बाद में जमीन के टुकड़े कर इन्हें दूसरे लोगों को बेच दिया गया। मामले में अब 42 खरीदार और लाभार्थी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच के मुताबिक, करीब 3.24 हेक्टेयर जमीन मई 2019 में अलग-अलग इंतकाल के जरिए निजी नामों पर दर्ज की गई थी। इनमें 29 शुरुआती लाभार्थी और 13 बाद के खरीदार शामिल हैं। विजिलेंस को मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के संकेत मिले हैं। जमीन के रिकॉर्ड, इंतकाल और खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले की शिकायत फरवरी 2025 में विजिलेंस को मिली थी। इसके बाद जनवरी 2026 में FIR दर्ज की गई। अब जांच आगे बढ़ाते हुए 42 लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है। करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए। सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया। विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। 45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर जारी वित्तीय खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि RDG नहीं मिलने के बावजूद सरकार पेंशन एरियर का भुगतान धीरे-धीरे कर रही है और कर्मचारियों को ध्यान में रखकर भुगतान या कोई फैसला नहीं रोका जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति को कर्मचारियों और पेंशनरों को भी समझना होगा। उनका कहना है कि राज्य की राजस्व स्थिति पर दबाव है, लेकिन सरकार उपलब्ध संसाधनों से कर्मचारियों के बकाया हकों का भुगतान कर रही है। सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को केवल 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। मौजूदा सरकार RDG नहीं मिलने के बावजूद चरणबद्ध तरीके से एरियर चुका रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों का पूरा एरियर दिया जा चुका है। वहीं सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लंबित पेंशन एरियर का भुगतान किया गया है। ग्रुप-III कर्मचारियों को जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 तक के बकाया का करीब 55 से 57 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जबकि ग्रुप-IV कर्मचारियों को 20 हजार रुपये दिए गए हैं। ग्रुप-I और ग्रुप-II कर्मचारियों व अधिकारियों के जनवरी 2016 से देय एरियर का करीब 15 प्रतिशत भुगतान किया गया है। सुक्खू सरकार लगातार RDG बंद होने को प्रदेश की वित्तीय मुश्किलों की बड़ी वजह बता रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार RDG बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों को जुटाकर कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को आगे भी जारी रखा जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिति सुधरने के साथ कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों को उनका बकाया हक दिया जाएगा।
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है। विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।
हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है. विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत मंगलवार को संस्थानों को बंद करने, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के साथ हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार आमने-सामने नजर आए। करीब आधे घंटे तक सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही। भाजपा विधायकों ने सरकार से पिछले तीन वर्षों के दौरान बंद किए गए और नए खोले गए संस्थानों का विस्तृत ब्यौरा मांगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा और बिलासपुर के विधायक ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पूछा कि 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश में कितने संस्थान बंद, विलय या डिनोटिफाई किए गए हैं। विधायकों ने संस्थानों का विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार विवरण भी मांगा। इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि बंद किए गए संस्थानों में से कितने संस्थान दोबारा शुरू किए गए और उन्हें दोबारा खोलने के पीछे क्या कारण रहे। भाजपा विधायकों ने उन संस्थानों को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी, जिनके भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही जिन संस्थानों के भवन अभी तैयार नहीं हुए हैं, उनके निर्माण को लेकर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर भी जवाब मांगा गया। इसी मुद्दे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करेगी। जहां संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां उन्हें खोला जाएगा और आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत आधारित संस्थान खोलने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने की घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई। मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। संस्थानों को बंद करने का मामला एक बार फिर मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सरकार और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने हिमाचल कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट भेजी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में रजनी पाटिल ने कहा कि उनके नाम से प्रसारित की जा रही ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को हिमाचल प्रदेश की सरकार या संगठन के संबंध में किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं सौंपी है।उन्होंने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि राजनीतिक विषयों पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। बिना पुष्टि के प्रसारित खबरें न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस के भीतर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज थीं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पार्टी नेतृत्व ने रजनी पाटिल से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर फीडबैक मांगा था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। इन रिपोर्टों में मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन का भी जिक्र होने की बात कही गई थी। इन खबरों के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं और विपक्ष ने भी इन्हें लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, रजनी पाटिल के ताजा बयान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के पात्रता नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियां इस योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये मासिक सहायता राशि की पात्र नहीं रहेंगी। सरकार द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के बाद इस आयु वर्ग की हजारों युवतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। बताया जा रहा है कि योजना को अधिक लक्षित और वित्तीय रूप से व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से पात्रता मानदंडों में बदलाव किया गया है। पहले 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी पात्र युवतियों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा था, लेकिन अब लाभार्थियों की श्रेणी को सीमित कर दिया गया है। इसके चलते कई परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद हो जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का लाभ उन वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। हालांकि, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की तैयारी कर रही युवतियों के लिए यह राशि सहारा साबित हो रही थी। नए नियम लागू होने के बाद प्रभावित युवतियों और उनके परिवारों में निराशा देखी जा रही है, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य पात्र महिलाओं को योजना का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा।
शिमला। बहुप्रतीक्षित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्य का पक्ष रखेंगे। परियोजना से जुड़े बिजली उत्पादन, जल बंटवारे और वित्तीय भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। किशाऊ बांध परियोजना राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देश्यीय योजना है, जिसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब सहित सात राज्यों की हिस्सेदारी है। यमुना नदी पर प्रस्तावित यह बांध मुख्य रूप से पेयजल और सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया जा रहा है। परियोजना से हरियाणा और उत्तर प्रदेश को बड़े पैमाने पर पानी उपलब्ध होगा, जबकि बिजली उत्पादन भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि चूंकि परियोजना का प्रमुख लाभ जल आपूर्ति के रूप में अन्य राज्यों को मिलने वाला है, इसलिए केंद्र सरकार को इसके बिजली और जल दोनों घटकों की लागत का पूर्ण वित्तपोषण करना चाहिए। राज्य सरकार का यह भी आग्रह है कि परियोजना से होने वाले विद्युत उत्पादन का 100 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समान रूप से 50-50 प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाए। बैठक में हिमाचल प्रदेश पौंग और भाखड़ा बांध विस्थापितों के लंबित पुनर्वास मामलों को भी उठाएगा। इसके अलावा, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े बकाया भुगतान के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के साथ चल रहे विवाद के समाधान के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग भी रखी जाएगी। सूत्रों के अनुसार हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान ने परियोजना की विद्युत लागत में हिस्सा वहन करने की इच्छा जताई है। हालांकि इन राज्यों ने इसके बदले हिमाचल प्रदेश के हिस्से के जल में अतिरिक्त भागीदारी की मांग रखी है। दिल्ली और राजस्थान अपने प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय को लिखित रूप में भेज चुके हैं, जबकि हरियाणा ने अतिरिक्त जल उपलब्धता के मुद्दे के समाधान के बाद इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि 22 मई 2026 को केंद्रीय जल संसाधन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई थी। उस बैठक में हिमाचल प्रदेश के रेजिडेंट कमिश्नर और एचपीपीसीएल के अधिकारियों ने राज्य का पक्ष रखा था। अब गृह मंत्री स्तर पर होने वाली बैठक को परियोजना के भविष्य और राज्यों के बीच हितों के संतुलन के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। किशाऊ बांध परियोजना पर होने वाला फैसला न केवल हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा और जल अधिकारों को प्रभावित करेगा, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास की दिशा भी तय करेगा।
हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों—में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन चुनावों के दौरान विधायकों के मताधिकार पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों के विधायक फिलहाल नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में होने वाले चुनावों में मतदान कर सकेंगे।। मौजूदा स्थिति में प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषदों के साथ-साथ अर्की नगर पंचायत में भाजपा को केवल एक पार्षद की बढ़त हासिल है। वहीं, इन सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से इन निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के बीच मतों की संख्या बराबर होने की संभावना बन गई है, जिसके चलते चुनाव परिणाम टॉस के जरिए तय होने की नौबत भी आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह रही कि राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि विधायकों के मताधिकार का सीधा असर कई शहरी निकायों में सत्ता के संतुलन पर पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को छोड़कर राज्य के अन्य 11 जिलों में नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को आयोजित किया जाएगा। कांगड़ा जिले में यह कार्यक्रम 18 जून को होगा, जहां मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu स्वयं शपथ दिलाएंगे। मुख्यमंत्री 16 जून को दिल्ली में निर्धारित बैठक के चलते सोमवार के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। प्रदेश सरकार ने पहले सभी 3,754 ग्राम पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों के लिए एक साथ शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन बाद में कांगड़ा जिले के लिए अलग से 18 जून की तिथि निर्धारित की गई। शेष 11 जिलों में आयोजित होने वाले समारोहों में राज्य सरकार के मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। चंबा में विधानसभा अध्यक्ष Kuldeep Singh Pathania शपथ ग्रहण करवाएंगे, जबकि ऊना में उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri यह जिम्मेदारी निभाएंगे। सोलन में स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय मंत्री Dhani Ram Shandil, कुल्लू में कृषि एवं पशुपालन मंत्री Chandra Kumar तथा लाहुल-स्पीति में उप मुख्य सचेतक Keval Singh Pathania नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ दिलाएंगे। इसी तरह सिरमौर में उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री Harshwardhan Chauhan, किन्नौर में राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री Jagat Singh Negi और शिमला में शिक्षा मंत्री Rohit Thakur शपथ ग्रहण समारोह की अगुवाई करेंगे। शिमला जिले की 441 पंचायतों के प्रधान और उपप्रधान होटल Peterhoff में दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में शपथ लेंगे। मंडी में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Anirudh Singh, बिलासपुर में तकनीकी शिक्षा एवं नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री Rajesh Dharmani तथा हमीरपुर में आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री Yadvinder Goma शपथ दिलाएंगे। जिला स्तरीय समारोहों में सांसदों, विधायकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी प्रोटोकॉल के तहत आमंत्रित किया गया है। सभी नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। किस जिले में कौन दिलाएगा शपथ? जिला मुख्य अतिथि चंबा कुलदीप सिंह पठानिया ऊना मुकेश अग्निहोत्री सोलन डॉ. धनी राम शांडिल कुल्लू चंद्र कुमार लाहुल-स्पीति केवल सिंह पठानिया सिरमौर हर्षवर्धन चौहान किन्नौर जगत सिंह नेगी शिमला रोहित ठाकुर मंडी अनिरुद्ध सिंह बिलासपुर राजेश धर्माणी हमीरपुर यादविंदर गोमा
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दरअसल, विगत 4 जून को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायक के वोट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही अटकलें थी की प्रदेश सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है, और अब अपेक्षा अनुसार हाईकोर्ट के इस फैसले को सुक्खू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। आगामी 15 जून को इसे लेकर सुनवाई होनी है। आपको बता दें प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ एक पार्षद का अंतर है। मसलन परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषद, तथा अर्की नगर पंचायत में भाजपा के पास सिर्फ एक पार्षद अधिक है। इन सभी हलकों में कांग्रेस के विधायक है और ऐसे में यदि विधायक का वोट मान्य होता है तो अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का फैसला सम्भवतः टॉस से होगा। ये ही कारण है कि सुक्खू सरकार ने इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
हिमाचल प्रदेश के सबसे अहम राजनीतिक जिला कांगड़ा में शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की सियासत का पारा बढ़ा दिया है। सत्ता की दिशा तय करने वाले कांगड़ा में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा के लिए चिंता का कारण बनता दिख रहा है। पांच नगर परिषदों में से चार पर कांग्रेस ने मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि भाजपा केवल नगरोटा बगवां में बढ़त बनाए रखने में सफल रही है। सबसे ज्यादा चर्चा कांगड़ा नगर परिषद को लेकर हो रही है, जहां भाजपा बड़ी मुश्किल से क्लीन स्वीप होने से बच पाई है। वहीं सांसद राजीव भारद्वाज के गृह क्षेत्र नूरपुर में भी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। इसी तरह देहरा और ज्वालामुखी में भी भाजपा को खास सफलता नहीं मिली। इन नतीजों ने भाजपा संगठन के भीतर मंथन की जरूरत को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर कांगड़ा जैसे निर्णायक जिले में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है तो 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। अब सबकी निगाहें 31 मई को आने वाले नगर निगम चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। चार नगर निगमों में से दो पालमपुर और धर्मशाला कांगड़ा जिले में आते हैं। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यहां बेहतर प्रदर्शन कर पार्टी राजनीतिक संदेश देने में कामयाब होगी। ये चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े गए हैं, इसलिए इन्हें 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। यदि नगर निगम चुनावों में भी भाजपा के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, तो प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठना तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर भी नेतृत्व को लेकर तीखे सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल भाजपा के वरिष्ठ नेता जीत का दावा कर रहे हैं। अब इंतजार 31 मई का है, जब यह साफ होगा कि किसे राहत मिलेगी और किसे बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा।
हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस और होली लॉज का मजबूत गढ़ माने जाने वाले रामपुर में पहली बार भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने बहुमत हासिल किया है। इसे आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नगर परिषद रामपुर के 9 वार्डों में से 5 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार 4 वार्डों में ही जीत हासिल कर सके। हालांकि दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा, लेकिन भाजपा ने एक सीट की बढ़त के साथ परिषद पर कब्जा जमा लिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि रामपुर के बदलते राजनीतिक माहौल को भी दर्शाती है। जिस क्षेत्र में भाजपा कभी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाई, वहीं अब नगर परिषद में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। इस परिणाम को लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और होली लॉज के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार नंदलाल यहां बेहद कम अंतर से जीत दर्ज कर पाए थे। उस समय कांग्रेस ने रामपुर सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या रामपुर में कांग्रेस और होली लॉज की पकड़ कमजोर पड़ रही है, या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी दोबारा मजबूती से वापसी करेगी। फिलहाल नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिशा-निर्देशों पर धर्मशाला में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और जम्मू-कश्मीर के जिला अध्यक्ष भी भाग लेंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मुख्य रूप से शामिल होंगे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने बुधवार को शिमला स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रशिक्षण के दौरान जिला अध्यक्ष विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से संवाद भी करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिमला ग्रामीण और किन्नौर के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कार्यक्रम से पहले कर दी जाएगी, ताकि वे भी इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने आगे बताया कि कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हो चुका है और एक-दो दिनों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां भी कर दी जाएंगी। इसके बाद जिला कमेटियों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर विनय कुमार ने कहा कि ये चुनाव पार्टी के लिए सेमीफाइनल की तरह हैं, क्योंकि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी इन्हें गंभीरता से ले रही है। जिला परिषद के लिए उन्हीं उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पार्टी की विचारधारा से जुड़े हों। यदि किसी क्षेत्र में एक से अधिक दावेदार सामने आते हैं, तो उनके बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। साथ ही, आगामी नगर निगम चुनावों के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, जिसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए। होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं। कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, जो पंचायतें बेस ईयर 2010 से लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में फिर से आरक्षित नहीं किया जाएगा। कैबिनेट ने सोशल सिक्योरिटी पेंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ‘बेसहारा’ शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और लाभ लेने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार जिन महिलाओं को उनके पति ने छोड़ दिया है, जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनके पास आय का कोई अलग स्रोत नहीं है, उन्हें बेसहारा महिला माना जाएगा। सरकार ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के तहत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का भी फैसला किया है, जिससे राज्य के बच्चों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम का लाभ लेने के बावजूद शुरू न हो सके 15 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को रद्द करने की मंजूरी दी। साथ ही मंडी जिले के पंडोह में 10 मेगावाट का छोटा जलविद्युत परियोजना भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है, बशर्ते बोर्ड राज्य सरकार को अनुपयोगी जमीन वापस करेगा। इसके बदले राज्य को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 5 प्रतिशत बिजली अपने हिस्से के रूप में मिलेगी। कैबिनेट ने सिंगल विलेज और मल्टी विलेज जल योजनाओं के इन-विलेज इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्राम पंचायतों को सौंपने के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस पॉलिसी को मंजूरी दी। दूध उत्पादकों को संगठित करने के लिए कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के डेयरी किसानों को मिलाकर धगवार में रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड बनाने की स्वीकृति दी गई। धगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन और प्रबंधन के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। कैबिनेट ने चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर हेली-टैक्सी सेवा की उड़ानों को सप्ताह में तीन से बढ़ाकर 12 करने का फैसला किया। अब सप्ताह में छह दिन रोज़ दो उड़ानें संचालित होंगी और राज्य सरकार ऑपरेशन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग देगी। जल शक्ति विभाग में जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन केंद्र से फंड न मिलने के कारण राज्य के संसाधनों से जारी करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने तकनीकी शिक्षा विभाग के सरकारी इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में 60 जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भरने को मंजूरी दी। वहीं सहकारिता विभाग में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के दो और इंस्पेक्टर कोऑपरेटिव सोसाइटीज के 30 पद भरने की अनुमति दी गई। शिक्षा विभाग के स्पोर्ट्स हॉस्टलों में 16 कोचों की भर्ती को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही हमीरपुर जिले के खरड़ी स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल की क्षमता बढ़ाकर 100 बेड करने और इसका नाम स्टेट लेवल स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रखने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने ऊना जिले के गगरेट में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिस स्थापित करने, नूरपुर में पुलिस पोस्ट कोटला को पुलिस स्टेशन में अपग्रेड करने और टाहलीवाल में फायर पोस्ट को सब फायर स्टेशन में बदलने को भी मंजूरी दी। शिमला जिले की कोटखाई तहसील के मौजा कुफ्टू और सिरमौर जिले के पांवटा साहिब तहसील के मौजा हरिपुर टोहाना में जमीन केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए शिक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने का निर्णय भी लिया गया।मंत्रिमंडल ने लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों के लिए वर्ष 2016 में चयनित बचे सात उम्मीदवारों को पटवारी के रिक्त पदों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 में संशोधन कर हिमुडा को 80 वर्ष तक की भूमि लीज देने की अनुमति भी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत उन पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स की सेवाएं नियमित करने का निर्णय लिया गया है, जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक 11 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।
हिमाचल की 14वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज धर्मशाला के तपोवन में शुरू हो गया है। 5 दिसंबर तक चलने वाले सत्र के दौरान कई मुद्दों पर तपोवन में चर्चा होगी। इस सत्र में कुल आठ बैठकें होंगी। पहले दिन सदन में प्रश्नकाल में गतिरोध पैदा कर विपक्ष ने पंचायतों के चुनाव में देरी करने पर सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव लाया। इस पर हंगामा होने की आशंका थी पर सरकार ने चर्चा के लिए हामी भर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की सबसे बड़ी रक्षक कांग्रेस पार्टी है, महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कांग्रेस ने आरक्षण का प्रावधान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूं तो यह मामला अर्धन्यायिक रहा है। लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने आज संविधान दिवस होने की बात की है तो सरकार ने इसे मंजूर किया है। उन्होंने कहा कि कानून का यदि सही मायने में कोई संरक्षक है तो वह कांग्रेस पार्टी ही है। जो भी इस संबंध में कार्य हो रहा है वह कानून की परिधि में ही हो रहा है। कानून की परिभाषा को स्पष्ट करने का अधिकार न्यायालय के पास है और मामला कोर्ट में है। इससे पूर्व भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि सरकार सांविधानिक संस्थाओं का सम्मान करे। पंचायत चुनाव समय पर होने चाहिए। आज विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन में संविधान की प्रस्तावना भी सभी से पढ़वाई। चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि 1975 में आपातकाल लगाकर भी इसी तरह से चुनाव टाले गए थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक्ट लगाकर इसकी आड़ में चुनाव टाले जा रहे हैं। कोविड जैसा संकट होने के बावजूद भाजपा सरकार ने चुनाव करवाए। यह बहुत बड़ा संकट था। उससे बड़ा संकट आज की तिथि में नहीं है। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा विधायक रणधीर शर्मा की ओर से स्थगन प्रस्ताव लाने के बाद सीएम को सदन की अगली कार्यसूची के बारे में अवगत करवाने की बात की। इस पर जयराम ठाकुर ने विरोध किया। इस पर स्पीकर ने नियम 72 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा किया जा सकता है। इसके बाद सीएम ने कार्यसूची पढ़ी। सदन के पटल पर राष्ट्रपति और राज्यपाल से मंजूर विधेयक भी रखे गए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मंडी में सरकार के तीन साल पूरा होने पर जश्न नहीं, विजन बताएंगे।
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है, जब किसी अंतरराष्ट्रीय मेले के आयोजन के लिए सरकार की ओर से पंचायत स्तर तक लोगों से भगवान के नाम पर दान मांगा जा रहा है। जिस पर हिमाचल भाजपा प्रवक्ता ने सुक्खू सरकार पर यह कहते हुए निशाना साधा कि प्रदेश सरकार अब पंचायत स्तर तक भीख मांगना शुरू कर चुकी है। विनय गुप्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मेलों के आयोजन के लिए प्रदेश की सुक्खू सरकार अपने अधिकारियों से भीख मंगवा रही है। जिला पंचायत अधिकारी सिरमौर द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग कांग्रेस सरकार तथा जिला प्रशासन को जमकर कर कोस रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता विनय गुप्ता ने कहा कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय श्रीरेणुकाजी मेले के आयोजन के संबंध में जिला सिरमौर के पंचायत अधिकारी द्वारा जिले के खंड विकास अधिकारियों को पत्र लिखा गया है कि मेले के आयोजन के लिए पंचायतों से दान राशि एकत्रित की जाए। इसी तर्ज पर सभी खंड विकास अधिकारियों ने जिले की सभी पंचायतों को पत्र लिखकर श्रीरेणुकाजी मेले के आयोजन के लिए दान राशि देने का आदेश किया है। विनय गुप्ता ने कहा कि इससे मां श्रीरेणुकाजी और भगवान श्री परशुराम से जुड़ी आस्था को भी ठेस पहुंची है, और लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके गांव-गांव से भीख के जरिए पैसा इकट्ठा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष ही इस सरकार ने राज्य के अनेक धार्मिक मंदिरों से सरकारी योजनाओं को चलाने के लिए उपायुक्तों को पत्र लिखकर सरकार को पैसा देने का फरमान जारी किया था, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को भारी ठेस पहुंची थी।
देहरा विधानसभा उप चुनाव में BJP प्रत्याशी होशियार सिंह की याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। अदालत ने हिमाचल सरकार और कांगड़ा को ऑपरेटिव बैंक को नोटिस जारी किए है। अब अगली सुनवाई में प्रदेश सरकार और KCB बैंक प्रबंधन को याचिकाकर्ता द्वारा लगाए आरोपों का जवाब अदालत में देना होगा। देहरा विधानसभा उप चुनाव में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीती हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उप चुनाव में कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान KCB प्रबंधन ने 67 महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपए और हिमाचल सरकार ने देहरा विधानसभा की करीब 1000 महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना से तीन महीने की राशि अकाउंट में डाली है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकार ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया है। होशियार सिंह ने हाईकोर्ट से आचार संहिता के दौरान महिला मंडलों को पैसा बांटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पूर्व विधायक होशियार सिंह के अनुसार, महिला मंडलों और महिलाओं को बांटी राशि की सरकार ने जानकारी छिपाए रखी। विधानसभा में भी इसका जवाब नहीं दिया। आरटीआई में भी जवाब देने से इनकार कर दिया। आरटीआई में अपील करने पर उन्हें इसका जवाब मिल पाया। आरटीआई के तहत डॉक्यूमेंट मिलने के बाद अब हाईकोर्ट में पिटीशन डाली जा रही है। होशियार सिंह ने बताया कि यदि सरकार ने समय पर सूचना दी होती, तो उन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को भी इसकी शिकायत दे दी होती। मगर ECI में शिकायत 45 दिन के भीतर देना होती है। 45 दिन में सरकार द्वारा सूचना छिपाने की वजह से वह इसकी शिकायत ECI को नहीं कर पाए। बहरहाल अब होशियार सिंह की याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार और केसीसी बैंक को नोटिस जारी किये है। विधानसभा में भी गूंजा मामला देहरा विधानसभा उप चुनाव में कैश फॉर वोट का मामला विधानसभा में भी कई बार गूंज चुका है। इसी मानसून सत्र में भी बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा ने इससे जुड़ा सवाल पूछा था। मगर जवाब नहीं मिल पाया था। इस पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा किया और सदन के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा ने कहा कि जो जानकारी सदन में मांगी गई थी, वही सूचना उन्होंने आरटीआई के तहत ले ली है। अब तक यह मामला विधानसभा और सदन के बाहर गूंजता रहा है। इसी मामले में पूर्व विधायक होशियार सिंह ने हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को पहले ही शिकायत भेजकर सीएम की पत्नी एवं देहरा की MLA कमलेश ठाकुर को 6 साल के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग भी की है। इस्तीफा दिया, भाजपा में गए और उपचुनाव हार गए ! विदित रहे कि हिमाचल में बीते 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनाव हुआ। देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला। इसके बाद, होशियार सिंह समेत तीन निर्दलीय विधायक और 6 कांग्रेस विधायकों समेत भाजपा में शामिल हुए। तीनों निर्दलीय ने 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया। 23 मार्च को दिल्ली में इन्होंने BJP का दामन थाम लिया। इस वजह से देहरा में 10 जुलाई 2024 को उप चुनाव हुए। बीजेपी ने होशियार सिंह को टिकट दिया और कांग्रेस ने सीएम सुखविंदर सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर को प्रत्याशी बनाया। 10 जुलाई को वोटिंग और 14 जुलाई को नतीजे आए। इनमें कमलेश ठाकुर 9399 वोट के अंतर से चुनाव जीत गईं और होशियार सिंह चुनाव हार गए।
बिहार विधानसभा चुनाव में 6 नवंबर को पहले फेज का (121 सीट) तथा 11 नवंबर दूसरे फेज का (122 सीट) मतदान होना है। इस बीच गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर काफी खींचतान व बगावत देखने को मिल रही है। गठबंधन ने 243 सीटों पर 254 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। गठबंधन में RJD ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने 61, सीपीआई (एम) ने 20, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 6 तथा मुकेश सहनी की पार्टी ने 15 उम्मीदवार उतारे हैं। हालात ऐसी बन चुकी है कि NDA के खिलाफ चुनाव लड़ने की बातें कहने वाला महागठबंधन अब एक-दूसरे के खिलाफ ही उतर आए हैं। आपको बता दें कि 12 सीटों पर महागठबंधन के घटक दल-एक दूसरे के खिलाफ ही खड़े हो गए हैं। अब राजनीतिक गलियारे में इसकी चर्चा होनी शुरू हो गई है और कि कहां तो महागठबंधन NDA के खिलाफ चुनाव लड़ने की बातें कर रहा था पर अब ये एक-दूसरे के खिलाफ ही खड़े हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने महागठबंधन से किनारा कर लिया है। सीएम फेस भी तय नहीं NDA और महागठबंधन ने खुलकर सीएम फेस कि घोषणा नहीं की है। महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है। हालांकि NDA नेता कह चुके हैं कि चुनाव में एनडीए का नेतृत्व नीतीश कुमार ही करेंगे। इन 6 सीटों पर कांग्रेस-RJD आमने सामने सिकंदरा - उदय नारायण चौधरी RJD VS विनोद चौधरी कांग्रेस कहलगांव - रजनीश भारती RJD VS प्रवीण कुशवाहा कांग्रेस वैशाली - अजय कुशवाहा RJD VS संजीव कुमार कांग्रेस लालगंज - शिवानी शुक्ला RJD VS आदित्य कुमार कांग्रेस वारिसलीगंज- अनिता देवी RJD VS सतीश कुमार कांग्रेस सुल्तान गंज - चन्दन सिन्हा RJD VS ललन यादव कांग्रेस
ज्वाली में भाजपा की हालत निराली, एक फूल दो माली 2022 में अर्जुन ने सिर माथे लगाया था पार्टी का फैसला, पक्ष में जा सकता है ये फैक्टर नहीं चला था सीटिंग विधायक का टिकट काटने का दांव कांग्रेस में फिर नीरज पर रहेगी निगाह ज्वाली परंपरागत रूप से कांग्रेस के दबदबे वाली सीट रही है और यहाँ चौधरी चंद्र कुमार के परिवार का दबदबा रहा है। वर्तमान में खुद चौधरी चंद्र कुमार यहाँ से छठी बार विधायक है, जब उनके बेटे नीरज भारती दो बार विधायक रहे है। 2008 के परिसीमन के बाद ज्वाली निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आया। इससे पहले फतेहपुर और ज्वाली दोनों एक हुआ करते थे। फतेहपुर को ज्वाली से अलग किया गया और पहले का गुलेर विधानसभा क्षेत्र ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में चौधरी चंद्र कुमार बेशक मंत्री है लेकिन उनकी उम्र 80 पार है। ऐसे में संभवतः अगला चुनाव उनके बेटे नीरज भारती लड़ेंगे। यानी कांग्रेस में फेस लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं दिखता। पर भाजपा में स्थिति इतनी सहज नहीं है। दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव में यहाँ भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। तब भाजपा के अर्जुन ठाकुर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता चंद्र कुमार को 8213 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। पर इसके बावजूद 2022 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर संजय गुलेरिया पर दांव खेला। पर गुलेरिया मौके को भुना नहीं पाएं। दिलचस्प बात ये है कि टिकट काटने के बावजूद तब सीटिंग विधायक अर्जुन ठाकुर ने मुखालफत नहीं की, जबकि 2022 के चुनाव में प्रदेश की करीब एक तिहाई सीटों पर भाजपा के बागी खड़े थे। जानकार मानते है कि भविष्य में ये फैक्टर अर्जुन के पक्ष में जा सकता है। संजय गुलेरिया की बात करें तो वे गज़ पार यानी नगरोटा सूरियाँ से ताल्लुक़ रखते हैं। इसमें भी कोई संशय नहीं है कि लम्बे समय से संजय गुलेरिया की ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। इसी के चलते 2022 में उन्हें चेहरा बनाया गया था, पर उन्हें जीत नहीं मिली। लेकिन क्या भाजपा उन्हें एक और मौका देगी, ये बड़ा सवाल है। दरअसल अर्जुन ठाकुर क्षेत्र में प्रो एक्टिव दिख रहे है। कहा जा सकता है कि वे अभी से इलेक्शन मोड में है। 2022 में पार्टी के निर्णय को सिर माथे से लगाने का सिला भी उन्हें मिल सकता है। यानी अर्जुन की दावेदारी मजबूत होगी। फिलवक्त दो -दो मजबूत दावेदारों के चलते ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की हालत एक फूल दो माली जैसी है। जबकि कांग्रेस के लगभग स्थिति स्पष्ट सी है। ज्वाली विधानसभा क्षेत्र का परिणाम तो ख़ैर भविष्य के गर्भ में छिपा हैं लेकिन भाजपा के लिए पहली परीक्षा कैंडिडेट का चुनाव होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बीते सोमवार को भारत में तीन मिलावटी कफ सिरप के खिलाफ चेतावनी जारी की है। जिन कफ सिरप को लेकर चेतावनी जारी हुई है वे श्रीसन फार्मास्यूटिकल की कोल्ड्रिफ, रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स की रेस्पिफ्रेश टीआर तथा शेप फार्मा की रीलाइफ हैं। बताया जा रहा है कि इन तीनों कफ सिरप से जान के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। आपको बता दें कि कोल्ड्रिफ वही सिरप है, जिसकी वजह से हाल में मध्य प्रदेश में सितंबर से अभी तक 5 वर्ष से कम उम्र वाले करीब 25 बच्चों की जान चली गई है। सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल व एथिलीन ग्लाइकॉल शामिल थे जो किडनी कि लिए खतरनाक हैं। कोल्ड्रिफ में किडनी खराब करने वाला 48% जहरीले पदार्थ शामिल थे। इस कंपनी द्वारा नेशनल ड्रग सेफ्टी के कई नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था, फिर भी कई सालों तक यह अपना कारोबार चलाती रही। श्रीसन फार्मा का लाइसेंस रद्द कर कंपनी को किया बंद कोल्ड्रिफ सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम में श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा बनाई जाती थी। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने बीते कल सोमवार को इस फार्मा का लाइसेंस रद्द कर कंपनी पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया। मध्य प्रदेश पुलिस की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने कंपनी के मालिक रंगनाथन गोविंदन को 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार कर 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा दिया।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अपने पति की तुरंत रिहाई की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। गीतांजलि ने दावा किया है कि उनके पति पर लगे सारे आरोप गलत हैं और उनकी गिरफ्तारी भी अवैध है। सोनम वांगचुक 24 सितंबर को लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 सितंबर को गिरफ्तार किये गए थे। गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि उन्हें एक हफ्ता से सोनम की सेहत, उनकी हालत और साथ ही नजरबंदी के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अंगमो ने अपने पति वांगचुक की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ NSA लगाने को कोर्ट में चुनौती दी है। अंगमो ने कहा कि उन्हें अभी तक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी आर्डर की कॉपी भी नहीं मिली है। अंगमो PM मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू और गृह मंत्री अमित शाह समेत लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता तक को पत्र लिख चुकी हैं। बंदी प्रत्यक्षीकरण बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने का अधिकार हर नागरिक को होता है। अगर किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी ढंग से हिरासत में लिया गया है, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत अदालत उस व्यक्ति को तुरंत कोर्ट में पेश करने का आदेश दे सकती है। आदेश जारी होते ही पुलिस को पूरी जानकारी कोर्ट के सामने पेश करनी होती है। अंगमो ने लगाया आरोप अंगमो का आरोप लगाया है कि उनके पति वांगचुक को चुप कराने के लिए कई महीने से विच हंट किया जा रहा है। वांगचुक हमेशा से गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन करते आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति सोनम वांगचुक पाकिस्तान गए थे तो इसमें गलत क्या है। वांगचुक जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित मीटिंग में गए थे।
केंद्रीय कर्मचारियों को दशहरा-दिवाली पर बोनस का तोहफा देने का ऐलान हुआ है। वित्त मंत्रालय ने 2024-25 के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (एडहॉक बोनस) का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत पात्र कर्मचारियों को 30 दिन के वेतन के बराबर का अमाउंट बोनस के रूप में दिया जाएगा। आपको बता दें कि इसके लिए ग्रुप सी के सभी केंद्रीय कर्मचारी और साथ ही ग्रुप बी में आने वाले केंद्र के उन नॉन गजटेड कर्मचारियों को भी यह बोनस मिलेगा जो किसी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस योजना के तहत नहीं आते हैं। केंद्र ने इस निर्णय से केंद्रीय कर्मचारियों व सुरक्षा बलों के जवानों को त्यौहार के समय में आर्थिक रूप से बहुत राहत दी है। इन कर्मचारियों को मिलेगा इस बोनस का फायदा उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो 31 मार्च 2025 तक सेवा में रहे या फिर जिन्होंने लगातार 6 महीने तक काम किया हो। साथ ही जिन्होंने पिछले 3 सालों में निर्धारित दिनों तक काम किया है, उन्हें भी बोनस मिलेगा। जिसने पूरे साल काम नहीं किया है, तो वह जितने महीने काम किया है, उसके अनुसार उन्हें बोनस मिलेगा। ऐसे एड-हॉक कर्मचारी, जिनकी सर्विस में कोई बाधा दिक्कत नहीं है, वे भी इस बोनस के पात्र होंगे। एडहॉक बोनस का फायदा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और सशस्त्र बलों के सभी पात्र कर्मियों को भी मिलेगा। पूरे वर्ष सर्विस में रहने वाले कर्मचारियों को 6,908 रूपए का बोनस तथा कैजुअल कर्मचारियों के लिए बोनस 1,184 रूपए तय हुई है।
तमिलनाडु के करूर में एक्टर जोशेफ विजय की रैली में बीते कल 27 सितंबर की शाम को भगदड़ मच गई। भगदड़ में करीब 39 लोगों की जानें गई हैं, जबकि 95 लोग घायल हैं। हादसे के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से मामले की रिपोर्ट मांगी है। एक्टर जोशेफ विजय ने 2 फरवरी 2024 को तमिलगा वेत्री काजहाम (TVK) पार्टी बना कर 2026 में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। इसी वजह से वे प्रदेशभर में रैलियां कर रहे हैं। हाल में करूर में रैली की गई। जोशेफ विजय सत्तारूढ़ DMK के सबसे बड़े विरोधी के रूप में राजनीति में आना चाहते हैं। TVK के सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर बताया गया कि जोशेफ विजय दोपहर 12 बजे तक सभा स्थल पहुंचेंगे। इस वजह से लोग सुबह 11 बजे से ही जुटने लगे, पर विजय तय किये गए समय पर नहीं आए, बल्कि वे करीब शाम 7.30 बजे आए। भगदड़ मचने की वजह रैली में केवल 10 हजार लोगों की अनुमति मिली थी, पर 50 हजार लोगों की भीड़ इकठ्ठी हो गई। विजय की प्रचार बस इसी भीड़ के बीच से आई, इससे लोगो की भीड़ में दबाव बढ़ा, लोग एक दूसरे पर गिरने लगे। इसी दौरान वहां भगदड़ मची। विजय ने अपना भाषण बीच में ही रोक दिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। लेकिन तब तक स्थिति बेकाबू हो चुकी थी। भीड़ इतनी थी कि एम्बुलेंस व वॉलंटियर्स का गिरे हुए लोगों तक तुरंत पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया था। घायलों से नहीं मिले जोशेफ विजय बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद विजय घायलों से नहीं मिले और न उनके प्रति कोई संवेदना उन्होंने जताई। वे चार्टर्ड फ्लाइट से सीधे चेन्नई चले गए। केवल उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा- वे बहुत दर्द व दुःख महसूस कर रहे हैं। वह करूर में जान गंवाने वालों के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं तथा घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। पुलिस द्वारा TVK के जिला सचिव पर मामला दर्ज करूर पुलिस ने TVK के करूर वेस्ट डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी वीपी मथियाझागन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि प्रचार कार्यक्रम के दौरान मानदंडों के उल्लंघन के लिए बीएनएस की धारा 109, 110, 125B, 223 के तहत मामला दर्ज हुआ है। PMO ने 2 लाख रुपए देने की घोषणा PM नरेंद्र मोदी ने करूर हादसे में मारे गए मृतक के परिवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपए और वहीं घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। CM स्टालिन ने किया अस्पताल का दौरा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि पहले कभी भी एक राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम में हादसे में इतने लोग नहीं मारे गए। स्टालिन ने शनिवार देर रात को सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का दौरा किया। करूर में शनिवार के भगदड़ में घायल लोगों से मिलकर उनके बेहतर इलाज करने का उन्होंने आदेश दिया। मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10 लाख रूपए व घायलों को 1 लाख रूपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।
भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से पहले ही e-Sign सुविधा लॉन्च कर दी है। इससे वोटर लिस्ट से नाम हटाना मुश्किल होगा। ऑनलाइन वोटर डिलीशन और करेक्शन में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए यह फैसला लिया गया है। इसके लिए चुनाव आयोग ने ECINet पोर्टल तथा ऐप पर e-sign फीचर शुरू किया है। अब से सभी आवेदन के लिए आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर से OTP द्वारा वेरिफिकेशन जरूरी होगा। आपको बता दें कि हाल के दिनों में चुनाव आयोग पर कर्नाटक में हजारों वोटर डिलीट करने के आरोप लगे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। इसके बाद ही चुनाव आयोग द्वारा वेरिफिकेशन प्रक्रिया को सख्त करने का निर्णय लिया गया। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगें और साथ ही अधिकारी भी उन पर कार्रवाई कर सकेंगें। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। e-Sign सुविधा ई-साइन भारत सरकार द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के जरिए दी गई एक ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक साइन सेवा है। यह यूजर्स को आधार नंबर का इस्तेमाल करके किसी डॉक्यूमेंट पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर करने की इजाजत देती है। अब इसके जरिए ही वोटर आईडी को डिलीट या सुधार करने के लिए वेरिफिकेशन प्रोसेस के रूप में शुरू किया गया है। वोटर लिस्ट का मिसयूज तथा फर्जी आवेदन रोकने में मदद पहले केवल वोटर ID नंबर से मोबाइल नंबर लिंक करके फॉर्म को सबमिट जाता था। इससे कई बार गलत नंबर का भी उपयोग कर दिया जाता था। अब e-sign फीचर के अंतर्गत आधार नंबर डालना जरुरी होगा। इसके बाद आधार से लिंक मोबाइल पर OTP आएगा और फिर इस OTP को बताने के बाद ही फॉर्म सबमिट हो सकेगा। e-sign प्रोसेस हो जाने के बाद ही आवेदन करने वालों को फॉर्म जमा करने के लिए ECINet पोर्टल पर रि-डायरेक्ट कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि यह यह नियम Form 6 (न्यू रजिस्ट्रेशन), Form 7 (डिलीशन/ऑब्जेक्शन) तथा Form 8 (करेक्शन) पर लागू होगा। फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी होगा चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी मतदाता का नाम ऑनलाइन सीधे डिलीट नहीं किया जा सकता। इसके लिए पहले संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाना जरूरी है। मतदाता का नाम डिलीट किये जाने से पहले मतदाता को अपनी बात कहने का पूरा मौका दिया जाएगा।
फ्रांस, मोनाको, माल्टा, लक्जमबर्ग तथा बेल्जियम ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी है। कल सोमवार रात को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) के सदस्य देशों ने इजराइल-फिलिस्तीन विवाद के समाधान के लिए बैठक की और इसकी आधिकारिक घोषणा की। आपको बता दें कि इस बैठक की अध्यक्षता फ्रांस व सऊदी अरब कर रहे थे। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि फिलिस्तीनियों को राष्ट्र के तौर पर दर्जा देना, उनका अधिकार है, कोई उपहार नहीं। इसके बिना अशांति बनी रहेगी। वहीं इजराइल ने इस पर आपत्ति जताई है। UN में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि इजराइल इसका जवाब देगा। बेल्जियम ने शर्त के साथ मान्यता दी बेल्जियम ने फिलिस्तीन को देश के तौर पर मान्यता तो दी है पर इसके लिए उसने एक शर्त रखी है। बेल्जियम ने शर्त में यह कहा कि गाजा में हमास को सत्ता से हटा देने के बाद ही यह कानूनी रूप से लागू होगी। इससे पहले रविवार को ये 4 देशों- ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया तथा पुर्तगाल ने भी फिलिस्तीन को मान्यता दी थी। अभी तक लगभग 150 देश फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। चीन व रूस ने 1988 में फिलिस्तीन को मान्यता दी थी। अमेरिका ऐसा देश है जिसने फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी है। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि अब गाजा के शासन में हमास की कोई दखल अंदाज़ी नहीं होगी। अब्बास ने गाजा में जंग खत्म होते ही चुनाव कराने और 3 महीने के अंदर एक अंतरिम संविधान तैयार करने का वादा किया है। पश्चिमी देश फिलिस्तीन को मान्यता क्यों दे रहे जानकारी के अनुसार कई सालों से पश्चिमी देश ये कहता आया है कि जब हालात ठीक होंगे तब फिलिस्तीन को देश के रूप में मान्यता दे दी जाएगी। गाजा में करीब 2 साल से जारी जंग में भुखमरी व बर्बादी देखने को मिल रही है। इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर इजराइल के बारे में दुनिया की राय बदल रही है। इसी के चलते कई देशों ने फिलिस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने का फैसला किया।


















































