सोशल मीडिया पर चर्चित निजी स्कूल के छात्र मौत मामले को लेकर अब पूर्व सैनिक लीग खुंडिया ने तहसीलदार खुंडिया को ज्ञापन सौंप स्कूल प्रशासन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा की देहरा के उक्त निजी स्कूल के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिसकी तारीख का ऐलान भी जल्द कर दिया जाएगा । पूर्व सैनिक लीग के पदाधिकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच सुनिश्चित की जाए। बता दें यह मामला खुंडिया थाना के अंतर्गत का है जहां ठम्बा निवासी 14 वर्षीय कबीर राणा ने घर पर अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी। वहीं युवक के पिता ने स्कूल पर बच्चे के साथ होस्टल में प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जिस पर पुलिस मामले की गम्भीरता से जांच कर रही है। बहरहाल मामले में सत्यता क्या है वो तो पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्राथमिक स्थिति में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस बीच स्कूल प्रबंधन ने पुलिस की जांच में पूर्ण सहयोग करने की बात कही है।
पुलिस थाना डाडा सीबा के अंतर्गत ग्राम पंचायत भनेड़ के गांव मलोट में सांप के काटने से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान संदेश कुमारी (58) के रूप में हुई है, जो आंगनबाड़ी केंद्र में हेल्पर के पद पर कार्यरत थीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह संदेश कुमारी अपने घर पर थीं, तभी उन्हें पैर में किसी जहरीले जीव के काटने का एहसास हुआ। जांच करने पर उनके पैर पर सांप के काटने के निशान मिले। कुछ ही देर में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें चक्कर आने के साथ उल्टियां भी होने लगीं। परिजन उन्हें तुरंत उपचार के लिए होशियारपुर के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। हालांकि, पीजीआई पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। डाडा सीबा के डीएसपी राजकुमार ने बताया कि मृतका के शव को सिविल अस्पताल देहरा लाया गया, जहां सोमवार को पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली है। इस दुखद घटना पर ग्राम पंचायत भनेड़ की प्रधान शशि ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संदेश कुमारी के असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की, ताकि इस कठिन समय में परिवार को कुछ राहत मिल सके।
नक्की खड्ड पर 21.63 करोड़ से बनेगा बॉक्स गर्डर पुल, क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई गति : बिक्रम ठाकुर
पूर्व उद्योग मंत्री एवं जसवां-परागपुर के विधायक बिक्रम ठाकुर ने नाबार्ड के अंतर्गत विधायक प्राथमिकता योजना में जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति मिलने पर क्षेत्रवासियों को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि कोलोहा–प्रागपुर, ढलियारा, डाडासीबा और संसारपुर टैरेस मार्ग पर नक्की खड्ड के ऊपर 210 मीटर लंबे बॉक्स गर्डर पुल के निर्माण के लिए 21.63 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पुल लंबे समय से लोगों की प्रमुख मांग रहा है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि बरसात के दौरान नक्की खड्ड में जलस्तर बढ़ने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई बार मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता था, जिससे स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और मरीजों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि पुल बनने के बाद हजारों लोगों को पूरे वर्ष सुरक्षित और सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का विधायक प्राथमिकता सूची में प्रथम स्थान पर चयन होना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की इस आवश्यकता को गंभीरता से केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया और उसे प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति मिली। उनके अनुसार यह परियोजना केवल एक पुल का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। विधायक ने इस परियोजना के लिए बजट स्वीकृत करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों को गति मिल रही है। अंत में बिक्रम ठाकुर ने जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी नागरिकों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए विश्वास जताया कि पुल के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी और लोगों का जीवन अधिक सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक बनेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (HGCTA) की स्थानीय इकाई, राजकीय महाविद्यालय ढलियारा ने केंद्रीय कार्यकारिणी के राज्यव्यापी आह्वान के अनुरूप सोमवार को महाविद्यालय परिसर में गेट मीटिंग का आयोजन किया। दोपहर 12:30 बजे आयोजित इस बैठक में महाविद्यालय के 30 शिक्षकों ने भाग लिया। बैठक के दौरान शिक्षकों ने विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की समयबद्ध बैठकें आयोजित करने तथा करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने की मांग उठाई। शिक्षकों का कहना है कि इन लंबित मामलों के कारण शिक्षकों के पदोन्नति एवं सेवा संबंधी हित प्रभावित हो रहे हैं। अपनी मांगों के समर्थन में शिक्षकों ने सोमवार से काले बैज पहनकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यह विरोध प्रदर्शन 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा। शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
खंडियां क्षेत्र में एक 15 वर्षीय स्कूली छात्र का घर के कमरे में फंदे से लटका हुआ शव बरामद हुआ है। खुंडियां पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। मौके से पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इस कारण पुलिस सभी संभावित बिंदुओं को ध्यान में रखकर मामले की तफ्तीश कर रही है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार छात्र देहरा स्थित एक निजी स्कूल में 10वीं में पढ़ता था। स्कूल में दो दिन की छुट्टियों के चलते वह अपने माता-पिता के साथ घर आया हुआ था। शनिवार शाम को जब परिवार के सदस्य उसे कमरे में बुलाने गए, तो वह वहां डबल बेड की चादर के सहारे फंदे से लटका हुआ पाया गया ।परिजनों ने तुरंत उसे उतारा और इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल खुंडियां ले गए, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते खुंडियां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों व अन्य लोगों के बयान कलमबद्ध किए। पर उधर, सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आरपी जसवाल ने कहा कि शव कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला है। मामले में सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों से पूछताछ के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं एसपी देहरा संदीप धवल ने कहा की छात्र के पिता ने कहा कि 14 वर्षीय छात्र ने होस्टल में प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड कर लिया है। मामले में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सड़कों पर घूम रहे घायल और बीमार बेसहारा गौवंश के उपचार के लिए द रिपब्लिक ट्रस्ट, मझीण ने पहल शुरू की है। ट्रस्ट की टीम ने नादौन और ज्वालामुखी क्षेत्र में अभियान चलाकर कई गंभीर रूप से घायल और बीमार गौवंश की पहचान की है। इनमें कई पशु सड़क दुर्घटनाओं या अन्य बीमारियों के कारण गंभीर हालत में मिले। ट्रस्ट के स्वयंसेवकों ने बताया कि भारी-भरकम गौवंश का सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट गन की आवश्यकता होती है, लेकिन स्थानीय पशु चिकित्सालयों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस समस्या को लेकर ट्रस्ट ने 27 जून को उपायुक्त हमीरपुर और 4 जुलाई को एसडीएम नादौन से मुलाकात की। एसडीएम नादौन ने ट्रस्ट को जानकारी दी कि अगले दो सप्ताह के भीतर पशु चिकित्सालय नादौन को ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट गन उपलब्ध करा दी जाएगी। इस बीच एसडीएम, बीडीओ और पशु चिकित्सक डॉ. संदीप पाटिल के सहयोग से गलू क्षेत्र में एक घायल बैल का सफल रेस्क्यू किया गया। ट्रस्ट के स्वयंसेवकों मनोहर लाल गांधी, रविंद्र, रघुवीर और मोहिंदर पटवारी ने बताया कि अभी तक केवल नादौन क्षेत्र में 10 से 12 घायल बेसहारा गौवंश की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि संस्था को प्रदेश के अन्य जिलों से भी रेस्क्यू के लिए लगातार फोन आ रहे हैं। ट्रस्ट ने समाजसेवियों और दानदाताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि पर्याप्त सहयोग मिलने पर पूरे हिमाचल में बेसहारा और पीड़ित गौवंश के संरक्षण एवं उपचार के लिए अभियान चलाया जाएगा।
शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के जलविद्युत संसाधनों पर राज्य का अधिकार मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए अधिकारियों को एसजेवीएन लिमिटेड को पूर्व में आवंटित तीन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इनमें 382 मेगावाट सुन्नी परियोजना, 210 मेगावाट लुहरी चरण-1 परियोजना और 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना शामिल हैं। ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम लाभ हिमाचल की जनता को मिलना चाहिए और राज्य सरकार इसी उद्देश्य के साथ ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जलविद्युत प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार अपने प्राकृतिक संसाधनों से हिमाचल का उचित हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एसजेवीएन द्वारा विकसित की जा रही 500 मेगावाट दुगार जलविद्युत परियोजना की शर्तों पर भी दोबारा बातचीत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है, ऐसे में संशोधित परियोजना के अनुरूप प्रदेश को अधिकतम लाभ दिलाना सरकार की प्राथमिकता होगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों से लंबित गतिरोध समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (ऊर्जा) राकेश कंवर, ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति, एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश के जलविद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई और राज्य हित में आवश्यक निर्णय लेने पर सहमति बनी।
निरमंड उपमंडल प्रशासन ने खराब मौसम और यात्रा मार्ग की जोखिमपूर्ण स्थिति को देखते हुए श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। उपमंडलाधिकारी (नागरिक) निरमंड जगदीप सिंह राठौर द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163(1) के तहत श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग पर निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। आदेश के तहत अब यात्रा मार्ग पर किसी भी प्रकार की ट्रैकिंग, धार्मिक यात्रा अथवा श्रद्धालुओं को ले जाने की गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यह आदेश सभी ट्रैकर्स, श्रद्धालुओं, टूर ऑपरेटरों और ट्रैकिंग एजेंसियों पर समान रूप से लागू होगा। प्रशासन ने लोगों से अपनी और अन्य यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रतिबंधित मार्ग पर प्रवेश न करने की अपील की है। एसडीएम जगदीप सिंह राठौर ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नूरपुर, 2 जुलाई: पुलिस जिला नूरपुर में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (एसआई) देवा नंद को विभाग द्वारा इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नूरपुर में गरिमामयी पिपिंग समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके कंधों पर इंस्पेक्टर रैंक के स्टार लगाकर उन्हें आधिकारिक रूप से पदोन्नति प्रदान की। समारोह में पुलिस अधीक्षक नूरपुर, उप-मंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) ज्वाली तथा एसपी कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति रही। पदोन्नति के साथ ही इंस्पेक्टर देवा नंद को पुलिस थाना फतेहपुर का थाना प्रभारी (एसएचओ) नियुक्त किया गया है और उन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। इंस्पेक्टर देवा नंद ने 11 मई 1992 को पुलिस विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी। 34 वर्षों से अधिक के सेवाकाल में उन्होंने पुलिस विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण इकाइयों में अपनी सेवाएं दी हैं। वे प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) चंडीगढ़ में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने द्वितीय हिमाचल प्रदेश सशस्त्र पुलिस वाहिनी (2nd HPAP) सकोह के साथ-साथ जिला चंबा, कांगड़ा और बिलासपुर के विभिन्न पुलिस थानों में भी अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। मार्च 2026 में उन्होंने पुलिस थाना नूरपुर में अतिरिक्त थाना प्रभारी (एडिशनल एसएचओ) का कार्यभार संभाला था। अब विभाग ने उनके लंबे अनुभव, उत्कृष्ट सेवाओं और कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत कर थाना फतेहपुर की कमान सौंपी है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक नूरपुर, एसडीपीओ ज्वाली तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इंस्पेक्टर देवा नंद को पदोन्नति एवं नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।
डाडा सीबा, 2 जुलाई: बाबा कांशी राम राजकीय महाविद्यालय, डाडा सीबा में गुरुवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रजनी संख्यान ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में प्राचार्या प्रो. रजनी संख्यान ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का महाविद्यालय परिवार में स्वागत करते हुए उन्हें अनुशासन, नियमित अध्ययन तथा महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य निर्धारित कर समर्पण एवं मेहनत के साथ अध्ययन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के विभिन्न संकाय सदस्यों ने विद्यार्थियों को संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं और अपने-अपने विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। सहायक प्राध्यापक जतिंदर कुमार, सहायक प्राध्यापक दविंदर सिंह, डॉ. राम पाल, सहायक प्राध्यापक खेम चंद, सहायक प्राध्यापक शीतल, सहायक प्राध्यापक पलक सिंह तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष अंजना कुमारी ने विद्यार्थियों को विभागों, पाठ्यक्रमों, अध्ययन पद्धति, पुस्तकालय सुविधाओं तथा महाविद्यालय में उपलब्ध अन्य आवश्यक सेवाओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराना, उन्हें संस्थान की कार्यप्रणाली की जानकारी देना तथा उनके भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और नई शैक्षणिक यात्रा के प्रति उत्साह का संचार करना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे अपने लिए अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया।
डमटाल, 2 जुलाई: इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मलेंद्र राजन ने बुधवार को ग्राम पंचायत डमटाल में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की टीम के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण की रोकथाम, हरित क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान अधिक से अधिक पौधारोपण करने, लगाए गए पौधों के संरक्षण को सुनिश्चित बनाने तथा वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों पर बल दिया गया। विधायक मलेंद्र राजन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है और इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाए। साथ ही ऐसे स्थानों की पहचान कर विशेष प्रबंधन किया जाए, जहां मिट्टी और धूल के कण अधिक मात्रा में उड़ते हैं, ताकि धूल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि आमजन की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। बैठक में एनजीटी की टीम तथा वन विभाग के अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के संबंध में अपने सुझाव साझा किए। अधिकारियों ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर पौधारोपण अभियान में सक्रिय सहयोग देने और अपने आसपास स्वच्छ एवं हरित वातावरण बनाए रखने का आग्रह किया। इस अवसर पर बीडीओ सुदर्शन सिंह, आरओ अब्दुल हामिद, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र मनकोटिया, ग्राम पंचायत डमटाल की प्रधान नीलम कुमारी, उपप्रधान सनी गोयल, वार्ड सदस्य राजेश कुमार, जगदीश, सतपाल, सुलिंदर और प्रदीप शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
नूरपुर पुलिस की CIA टीम ने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कंडवाल मुख्य प्रवेश द्वार से 10.18 ग्राम चिट्टा/हेरॉइन बरामद की है। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत CIA नूरपुर की टीम कंडवाल मुख्य प्रवेश द्वार पर मौजूद थी। नाकाबंदी के दौरान टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए पंजाब के एक युवक को जांच के लिए रोका। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 10.18 ग्राम हेरॉइन (चिट्टा) बरामद किया गया। पुलिस ने बरामद मादक पदार्थ और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल (अपाचे, नंबर: PB 06 BA 1636) को अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपी की पहचान राजा, पुत्र जमाल सिंह, निवासी सराय मोहल्ला, गली नंबर 47, गांधी चौक, पठानकोट (पंजाब), उम्र 26 वर्ष के रूप में हुई है। मामले में आरोपी के विरुद्ध पुलिस थाना नूरपुर में मुकदमा संख्या 173/2026 धारा 21, 25 मादक पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के अंतर्गत दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और आगामी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नूरपुर पुलिस द्वारा मामले की आगामी गहन जांच की जा रही है ताकि इसके अगले संपर्कों का पता लगाया जा सके।
राजकीय डिग्री कॉलेज इंदौरा में गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नए विद्यार्थियों को कॉलेज के शैक्षणिक वातावरण, नियमों, उपलब्ध सुविधाओं तथा विभिन्न छात्र सहायता सेवाओं से परिचित कराना था, ताकि वे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ कर सकें। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नमेश ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें कॉलेज में उपलब्ध शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने अपने-अपने विभागों का परिचय दिया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत पाठ्यक्रम, विषय चयन प्रक्रिया, उपस्थिति नियम, परीक्षा प्रणाली, छात्रवृत्ति योजनाओं, पुस्तकालय, एनएसएस, एनसीसी, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अनुशासन, नियमित उपस्थिति तथा शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के महत्व से भी अवगत कराया गया। आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने प्रवेश, पढ़ाई और कॉलेज जीवन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने कॉलेज में अपनी शैक्षणिक यात्रा को लेकर उत्साह और आत्मविश्वास व्यक्त किया।
हाँ, आपने सही पकड़ा। अखबार की खबर के अनुसार कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने की थी, जबकि कैबिनेट बैठक, जिसमें नीति को मंजूरी दी गई, उसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की। यदि आप उसी खबर के अनुरूप लिखना चाहते हैं, तो विवरण इस प्रकार होना चाहिए: Title: मल्टी टास्क वर्कर नीति को मिली मंजूरी, जल्द शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया Description: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) नीति को मंजूरी दे दी है। नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और मल्टी टास्क वर्कर भर्ती से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के साथ-साथ कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की गई। नई नीति लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों में सफाई, रखरखाव और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए मानव संसाधन की कमी दूर होने की उम्मीद है। इससे शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत मिलेगी और वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह नीति विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी। गौरतलब है कि पहले आयोजित भर्ती प्रक्रिया में करीब 9 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा के लिए इसे रोक दिया गया था। अब नीति को मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और कृषि महत्व वाले आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) पंजीकरण प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पाद अब GI टैग से सम्मानित हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (HIMCOSTE) के माध्यम से यह पंजीकरण प्राप्त किया गया है, जिससे प्रदेश की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। GI टैग प्राप्त करने वाले नए उत्पादों में स्पीति का सी-बकथॉर्न (छरमा), सलूणी सफेद मक्का, चंबा मेटल आर्ट, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपूबड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं। ये सभी उत्पाद अपनी विशिष्ट गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण शैली और भौगोलिक विशेषताओं के कारण लंबे समय से प्रदेश की पहचान रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पिछले साढ़े तीन वर्षों में राज्य सरकार द्वारा हिमाचल की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की मौलिकता और विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी, बाजार में उनकी मांग और मूल्य में वृद्धि होगी तथा स्थानीय कारीगरों, किसानों और उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि GI पंजीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी पहचान भी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार पांगी का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर का प्लेक्ट्रेंथस शहद और सिरमौर के अदरक को भी GI टैग दिलाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल की पारंपरिक धरोहर और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित कर प्रदेश के किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है।
हिमाचल प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं पर हर महीने थोपे जा रहे "मिल्क सेस" (दूध उपकर) और "फ्यूल सेस" (ईंधन उपकर) के खिलाफ अब देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता अदालत में कानूनी जंग छिड़ गई है। ज्वालामुखी के मुखर उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता अभिषेक पाधा ने प्रदेश सरकार की इस मनमानी और अवैध वसूली को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के मुख्य आयुक्त के समक्ष चुनौती देते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। याचिका में साफ तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEBL) को कटघरे में खड़ा करते हुए इस पूरी वसूली को उपभोक्ता कानून के तहत एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और 'डार्क पैटर्न' (ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का छुपा हुआ तरीका) करार दिया गया है। शिकायतकर्ता अभिषेक पाधा ने कानूनी तथ्यों के साथ यह मुद्दा उठाया है कि जब एक आम नागरिक बिजली का कनेक्शन लेता है, तो उसका विद्युत बोर्ड के साथ सीधा समझौता सिर्फ और सिर्फ उसके द्वारा खर्च की गई बिजली की यूनिट्स (kWh) और तयशुदा रेगुलेटरी चार्जेस चुकाने का होता है। बिजली के इस मीटर बिल का दूध (मिल्क सेस) या सरकार की अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं से कोई लेना-देना नहीं हो सकता। सरकार अपनी राजनीतिक योजनाओं का वित्तीय बोझ चुपके से बिजली बिलों के रास्ते जनता की जेब पर डाल रही है, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है। सबसे गंभीर बात यह है कि यदि कोई जागरूक उपभोक्ता इस फालतू टैक्स को देने से मना करे और सिर्फ अपनी जलाई हुई बिजली का बिल भरना चाहे, तो बिजली बोर्ड उसका कनेक्शन काटने की धमकी देता है। आवश्यक बिजली सेवा को काटने का यह डर दिखाकर जनता से पैसे ऐंठना सीधे तौर पर ब्लैकमेलिंग और उपभोक्ता अधिकारों का खुला हनन है। दिल्ली की इस केंद्रीय अदालत (CCPA) में दायर याचिका में केंद्र सरकार के 'डार्क पैटर्न प्रिवेंशन गाइडलाइंस, 2023' का हवाला दिया गया है, जिसके तहत मूल सेवा की आड़ में पीछे से कोई अन्य हिडन चार्ज (छुपा हुआ खर्च) जोड़ना कानूनन अपराध है। अभिषेक पाधा ने अदालत से मांग की है कि हिमाचल के उपभोक्ताओं के बिलों से इन दोनों सेस को तुरंत हटाया जाए और बिजली बोर्ड को केवल वास्तविक खपत के आधार पर पारदर्शी बिल बनाने के निर्देश दिए जाएं। इसके अलावा, याचिका में सरकार द्वारा अब तक इस मद में जनता की जेब से वसूले गए करोड़ों रुपयों की उच्च स्तरीय जांच करवाने और वह सारा पैसा उपभोक्ताओं को भविष्य के बिलों में वापस (रिफंड) करने की भी जोरदार गुहार लगाई गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत से यह भी अंतरिम राहत मांगी गई है कि जब तक इस केस का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक सेस न चुकाने पर किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
राजकीय महाविद्यालय ढलियारा के एनसीसी कैडेट्स 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक ऊना के जेएनवी पेखुबेला में आयोजित 10 दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (ATC-245) में भाग लेने के लिए रवाना हुए। रवानगी के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुशील भारद्वाज ने सभी कैडेट्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा की भावना और नेतृत्व क्षमता का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दल एसोसिएट एनसीसी अधिकारी (ANO) लेफ्टिनेंट डॉ. कपिल सूद के नेतृत्व में शिविर के लिए रवाना हुआ है। डॉ. सूद ने कैडेट्स को शिविर के दौरान अनुशासन का पालन करने, प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और नई गतिविधियों से सीख लेकर अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि शिविर में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के एनसीसी कैडेट्स भाग ले रहे हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में सैन्य ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण (PT), हथियार संचालन, नेतृत्व विकास, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद प्रतियोगिताएं और विभिन्न विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेट्स में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी, टीमवर्क और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक मजबूत किया जाएगा। महाविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागी कैडेट्स के सफल प्रशिक्षण और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के डिपार्टमेंट ऑफ टीचर्स एजुकेशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बी.एड. (ITEP) कोर्स में प्रवेश हेतु ऑफलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के अनुसार काउंसलिंग 3 और 4 जुलाई को आयोजित की जाएगी। 3 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (मिडिल) की 50 सीटों के लिए काउंसलिंग होगी। वहीं, 4 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों के लिए तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (मिडिल) और बी.कॉम.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50-50 सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (NCET)-2026 की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि और समय पर सभी मूल प्रमाण पत्रों के साथ उनकी स्वप्रमाणित प्रतियां लेकर काउंसलिंग में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीट आवंटन की पुष्टि होने के बाद प्रथम सेमेस्टर की फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी। बी.ए.-बी.एड. और बी.कॉम.-बी.एड. के लिए पहली किस्त 25,700 रुपये तथा बी.एससी.-बी.एड. के लिए 28,700 रुपये निर्धारित किए गए हैं। फीस जमा करने के लिए अभ्यर्थियों को अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करना होगा।
हिमाचल प्रदेश में आज, 1 जुलाई से केंद्र सरकार की नई VB-G RAM-G (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) योजना लागू हो गई है। यह योजना मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पूरी प्रणाली को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का गारंटीड रोजगार मिलेगा। योजना में कार्यों की स्वीकृति, श्रमिकों की उपस्थिति (Attendance), मॉनिटरिंग और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दावा किया गया है। हालांकि, योजना को लेकर हिमाचल सरकार ने केंद्र के समक्ष कई आपत्तियां भी दर्ज करवाई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियां इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन सकती हैं। इसके अलावा, नई योजना के तहत मजदूरी दर और मानव-दिवस (Man-days) के आवंटन को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है। विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण हिमाचल में इस योजना का 90:10 (केंद्र:राज्य) फंडिंग पैटर्न लागू रहेगा, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के खजाने पर हर साल लगभग ₹160 से ₹164 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि योजना लागू न करने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाले ग्रामीण विकास फंड पर भी असर पड़ सकता था। योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञ अतिरिक्त वित्तीय बोझ, तकनीकी चुनौतियों और इसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित गगल एयरपोर्ट से बुधवार से इंडिगो एयरलाइंस ने नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए नियमित सीधी हवाई सेवा शुरू कर दी है। इस नई उड़ान के शुरू होने के साथ ही हिमाचल प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बीच हवाई संपर्क पहले से अधिक मजबूत हो गया है। हाल ही में परिचालन शुरू करने वाले जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उड़ान नेटवर्क में अब गगल एयरपोर्ट भी शामिल हो गया है, जिससे यात्रियों को राजधानी क्षेत्र तक पहुंचने का एक नया और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। इंडिगो की यह उड़ान प्रतिदिन संचालित होगी। विमान सुबह 9:55 बजे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरकर 11:40 बजे गगल पहुंचेगा। इसके बाद दोपहर 12:00 बजे गगल से रवाना होकर 1:40 बजे वापस जेवर पहुंचेगा। यानी दोनों शहरों के बीच की दूरी अब महज 1 घंटा 40 मिनट में तय की जा सकेगी। फिलहाल इस रूट का किराया लगभग 7,000 से 8,000 रुपये के बीच रखा गया है और टिकटों की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट व अन्य अधिकृत प्लेटफॉर्म पर शुरू हो चुकी है। इस नई सेवा के शुरू होने के बाद गगल एयरपोर्ट से अब इंडिगो की 5, स्पाइसजेट की 3 और एलायंस एयर की 1 नियमित उड़ान संचालित होंगी। इससे यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक उड़ानों का विकल्प मिलेगा और पर्यटन, व्यापार तथा धार्मिक यात्रा को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सिविल हवाई अड्डा गगल के निदेशक अमित सकलानी ने इस नई हवाई सेवा को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि गगल एयरपोर्ट का जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधा जुड़ना प्रदेश के विकास और हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी शिमला में पहली बड़ी भू-स्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश के कुछ ही समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे शिमला-चक्कर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यातायात ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों, कार्यालय आने-जाने वालों और यात्रियों को घंटों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग से डायवर्ट किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। मानसून की शुरुआत के साथ ही शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष मानसून अपनी सामान्य तिथि 25 जून के मुकाबले करीब 5 दिन की देरी से प्रदेश पहुंचा है। फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा मंडी तक पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में इसके पूरे प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरी तरह से किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और मंडी के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है, जबकि कांगड़ा और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। स्थिति को देखते हुए 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान तेज बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़क अवरोध और निचले इलाकों में जलभराव जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। वहीं 5 और 6 जुलाई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान गोहर में सबसे अधिक 55 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मंडी में 45.6 मिमी, बरठीं में 42.6 मिमी, रायपुर मैदान में 41 मिमी, सुंदरनगर में 31.4 मिमी और कांगड़ा में 30.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं मैदानी जिला ऊना राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा टालने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
मंजू शर्मा मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु को निलंबित कर दिया है। इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों के बाद गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। फिलहाल डॉ. अनु को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, शिमला में अटैच किया गया है। गौरतलब है कि मृतक महिला मंजू शर्मा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पिछले दो दिनों से कुल्लू के ढालपुर में युवाओं द्वारा लगातार धरना-प्रदर्शन और अनशन किया जा रहा था। मंगलवार शाम कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को डॉ. अनु के निलंबन की जानकारी दी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले को प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया था, जिसके बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को निलंबित किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मामले में दर्ज अन्य शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी अन्य की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मृतका मंजू शर्मा के भाई दिनेश शर्मा ने बहन को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरकर समर्थन देने वाले हजारों लोगों का आभार व्यक्त किया। वहीं समाजसेवी बलदेव ठाकुर ने कहा कि दो दिनों तक चले आंदोलन के बाद यह कार्रवाई हुई है और उन्हें उम्मीद है कि मामले में शामिल अन्य स्टाफ नर्सों के खिलाफ भी जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के अगले चरण में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने रविवार को सोलन में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ मौजूद रहीं। राज्यपाल ने जिला प्रशासन और शूलिनी मेला समिति को मेले के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि शूलिनी मेला केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। समारोह के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने राज्यपाल को सम्मानित किया। राज्यपाल ने सोलन रेडक्रॉस सोसायटी के नव-नामित आजीवन सदस्यों को बैज प्रदान किए और मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने शूलिनी मेले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन किया तथा स्थानीय कलाकारों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। इससे पहले राज्यपाल ने सोलन के ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह में विधायक विनोद सुल्तानपुरी, उपायुक्त मनमोहन शर्मा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, रेडक्रॉस प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
HRTC के बेड़े में शामिल हुईं 150 नई इलेक्ट्रिक बसें, अब ग्रामीण रूटों पर भी मिलेगा प्रदूषण मुक्त सफर
हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए अच्छी खबर है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में 150 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं, जिन्हें प्रदेश के 9 अलग-अलग डिपो में आवंटित कर दिया गया है। इन बसों के संचालन से अब ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भी आधुनिक, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। निगम प्रबंधन के अनुसार सबसे अधिक 35-35 इलेक्ट्रिक बसें ऊना और हमीरपुर डिपो को दी गई हैं। इसके अलावा बिलासपुर को 20, नालागढ़ और नाहन को 15-15, देहरा और पालमपुर को 10-10 तथा धर्मशाला और तारादेवी (शिमला) को 5-5 बसें आवंटित की गई हैं। कुछ अन्य डिपो को भी आवश्यकता के अनुसार 1-2 बसें दी गई हैं। डिपो में पहुंचने के बाद इन बसों की प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) की जाएगी। तकनीकी जांच पूरी होते ही इन्हें विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। नई बसों के शामिल होने से निगम में बसों की कमी दूर होगी और कई नए रूटों पर भी बस सेवा शुरू की जा सकेगी। गौरतलब है कि HRTC ने कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का ऑर्डर दिया है, जिनमें से 150 बसें प्रदेश पहुंच चुकी हैं। शेष 147 इलेक्ट्रिक बसें भी जल्द ही हिमाचल पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही निगम डीजल बसों की खरीद प्रक्रिया भी जारी रखे हुए है।
ब्लॉक देहरा में रविवार को आयोजित पल्स पोलियो अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 6,085 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई गई। यह जानकारी खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. हरिंदर पाल सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश आज पोलियो बूथ तक नहीं पहुंच सके या दवा पीने से छूट गए हैं, उनके लिए 29 और 30 जून को विशेष घर-घर अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रत्येक घर तक पहुंचकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगी। अभियान को सफल बनाने के लिए 136 टीमें गठित की गई हैं, जो सोमवार और मंगलवार को पूरे ब्लॉक में घर-घर जाकर बच्चों की पहचान करेंगी। वहीं अभियान की निगरानी और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए 14 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं, जो लगातार फील्ड का दौरा कर रहे हैं। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिंदर पाल सिंह ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य ब्लॉक के हर बच्चे को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करना है। सभी अभिभावक स्वास्थ्य विभाग की घर-घर आने वाली टीमों का सहयोग करें ताकि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
नूरपुर पुलिस जिला के अंतर्गत (CIA-I) की टीम ने नशे के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने बौड चौक, जसूर के पास एक एचआरटीसी (HRTC) बस में सवार एक युवती से 1 किलो 6 ग्राम चरस बरामद करने में सफलता प्राप्त की है। 28 जून को CIA नूरपुर की टीम गनोह, जसूर और नूरपुर क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, गश्त और मादक पदार्थों की चेकिंग हेतु तैनात थी। इसी दौरान पुलिस टीम को पुख्ता गुप्त सूचना मिली कि पालमपुर की रहने वाली एक युवती एचआरटीसी बस (संख्या HP 38 C 9974) में भारी मात्रा में चरस लेकर आ रही है। नाके के दौरान उक्त एचआरटीसी बस को रोका गया। तलाशी लेने पर बस में सवार कुमारी गुनगुन (उम्र 19 वर्ष), सुपुत्री शशि कुमार, निवासी गांव खिल्डू, डाकघर बिंद्राबन, तहसील पालमपुर, जिला कांगड़ा के बैग से 1 किलोग्राम 06 ग्राम चरस (सकल वजन) बरामद की गई। पुलिस ने मौके पर ही सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए चरस को जब्त कर लिया और सैंपल सील कर दिए। इस संदर्भ में आरोपी युवती के खिलाफ थाना नूरपुर में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 व 29 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। नूरपुर पुलिस के अनुसार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नशे की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे आगे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस इस ड्रग नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को खंगालने में जुटी है।
प्रदेश कांग्रेस सचिव एवं कांग्रेस नेता सुरिंदर मनकोटिया ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित VB-G RAM-G व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में मनरेगा के तहत राज्य सरकार द्वारा दी जा रही ₹320 की दिहाड़ी नई व्यवस्था लागू होने पर घटकर ₹247 रह जाएगी। मनकोटिया ने कहा कि भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के बजाय घटाई जा रही है। उन्होंने इसे गरीब विरोधी फैसला बताते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों, छोटे किसानों, महिलाओं और गांवों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जबकि मनरेगा में ऐसी जिम्मेदारी नहीं थी। इससे रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था कमजोर होगी, गरीब परिवारों को समय पर काम नहीं मिलेगा, मजदूरी सम्मानजनक नहीं रहेगी और भुगतान में भी देरी की आशंका बढ़ जाएगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि डिजिटल निगरानी और नई जटिल प्रक्रियाओं के कारण दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होंगी। इसके अलावा पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता और कार्यों के चयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा पंचायतों के अधिकार सीमित हो जाएंगे। सुरिंदर मनकोटिया ने कहा कि नई व्यवस्था से मजदूरी दर, भुगतान प्रणाली, राज्यों की जिम्मेदारी और रोजगार की वास्तविक उपलब्धता पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और मनरेगा मजदूरों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के बड़सर विधानसभा क्षेत्र की निवासी आँचल शर्मा ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) द्वारा आयोजित M.Sc. न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी प्रवेश परीक्षा-2026 में पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, क्षेत्र और पूरे हिमाचल में खुशी की लहर है। AIIMS M.Sc. न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी प्रवेश परीक्षा देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इस परीक्षा का आयोजन AIIMS द्वारा विभिन्न स्नातकोत्तर पैरामेडिकल और मेडिकल साइंस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। वर्ष 2026 में यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा में जैव विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, भौतिकी और संबंधित विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं तथा मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को AIIMS संस्थानों में प्रवेश दिया जाता है। आँचल शर्मा ने इस अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में देशभर के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को पीछे छोड़ते हुए ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। उनकी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन का यह परिणाम प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी चिकित्सा विज्ञान का एक विशेष क्षेत्र है, जिसमें रेडियोधर्मी पदार्थों की सहायता से कैंसर, हृदय रोग सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार में सहायता प्रदान की जाती है। इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और आँचल की यह उपलब्धि भविष्य में उन्हें चिकित्सा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
बिलासपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक और करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. प्रेमलाल गौतम को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और दीर्घकालीन योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। डॉ. गौतम कृषि आनुवंशिकी और पौध प्रजनन के क्षेत्र के देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने गेहूं, सोयाबीन, फॉक्सटेल मिलेट, राइस बीन, अमरनाथ और बकव्हीट समेत 12 से अधिक उन्नत फसल किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके शोध और नवाचारों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई है। डॉ. गौतम को मिला यह सम्मान न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच बढ़ते टकराव के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर संकट गहरा गया है। कर्मचारियों और सरकार के बीच मंगलवार को हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 24 जून की मध्यरात्रि से ‘काम छोड़ो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस आंदोलन के चलते प्रदेशभर में एचआरटीसी बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अगले छह माह तक एचआरटीसी कर्मचारियों के हड़ताल करने पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन एक आवश्यक सेवा है और इसके बाधित होने से लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे पारंपरिक हड़ताल नहीं कर रहे हैं, बल्कि ‘काम छोड़ो आंदोलन’ के तहत ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन बसों का संचालन नहीं करेंगे। यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों और वित्तीय समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एचआरटीसी की करीब 2800 बसें प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं देती हैं। ऐसे में यदि आंदोलन जारी रहता है तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम और संभावित समाधान पर टिकी हैं।
देहरा के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक पाधा ने जिला प्रशासन कांगड़ा को एक महत्वपूर्ण जनहित सुझाव देते हुए उपायुक्त कांगड़ा को पत्र भेजा है। उन्होंने जिला मुख्यालय धर्मशाला में आयोजित होने वाली मासिक प्रशासनिक समीक्षा बैठकों की अग्रिम सूचना सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। अभिषेक पाधा ने कहा कि जिला मुख्यालय धर्मशाला में प्रत्येक माह आयोजित होने वाली समीक्षा बैठकों में जिले के सभी एसडीएम एवं तहसीलदारों को भाग लेने के लिए बुलाया जाता है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यों की समीक्षा के लिए ये बैठकें अत्यंत आवश्यक एवं सराहनीय हैं, लेकिन इनकी पूर्व जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंचने के कारण लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिला भौगोलिक दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। ऐसे में ज्वालामुखी, नूरपुर, बैजनाथ, जयसिंहपुर तथा अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से लोग अपने राजस्व, भूमि एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए उपमंडल और तहसील कार्यालयों में पहुंचते हैं। लेकिन अधिकारियों के मासिक बैठक में होने के कारण उन्हें बिना काम करवाए वापस लौटना पड़ता है। पाधा के अनुसार इससे आम जनता का बहुमूल्य समय, वाहन का ईंधन, आर्थिक संसाधन और श्रम व्यर्थ होता है। साथ ही बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास भी प्रभावित होता है। उन्होंने उपायुक्त कांगड़ा से आग्रह किया है कि मासिक बैठकों का कार्यक्रम कम से कम दो से तीन दिन पूर्व स्थानीय समाचार पत्रों, आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों तथा जिला प्रशासन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सार्वजनिक किया जाए। इससे आम नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार कार्यालय आने की योजना बना सकेंगे और अनावश्यक परेशानियों से बच सकेंगे।
दयानंद आदर्श विद्यालय में 23 जून को कक्षा 6वीं एवं 7वीं के विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का संचालन एवं समन्वयन गतिविधि प्रभारी रोहिणी सूद के निर्देशन में किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ विद्यालय प्रधानाचार्या एवं अतिथियों की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विज्ञान से संबंधित विभिन्न आकर्षक मॉडल, परियोजनाएँ एवं प्रयोग प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी में पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, रोबोटिक्स तथा दैनिक जीवन में विज्ञान के उपयोग जैसे विषयों पर आधारित मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों ने अपने मॉडलों की कार्यप्रणाली को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया, जिससे उनकी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता एवं नवाचार क्षमता का परिचय मिला। अभिभावकों ने भी प्रदर्शनी में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विद्यार्थियों के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रदर्शित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, परिश्रम एवं प्रतिभा की सराहना करते हुए विद्यालय के इस प्रयास को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। विद्यालय की प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व महामंत्री एवं नगर परिषद ज्वालामुखी के नवनियुक्त पार्षद नीरज शर्मा ने कहा कि विधायक संजय रतन के निर्देशानुसार अगले एक माह में ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के 102 बूथों पर ‘एक बूथ-10 यूथ जोड़ो’ अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े मेहनती और समर्पित युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि युवा कांग्रेस की टीम प्रत्येक बूथ पर पहुंचकर सक्रिय युवाओं की पहचान करेगी और उन्हें संगठन में जिम्मेदारियां देने के लिए सूची तैयार करेगी। नीरज शर्मा ने कहा कि विधायक संजय रतन ने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क जैसी सुविधाओं के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। साथ ही उन्होंने भाजपा पर विकास कार्यों को लेकर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ता इसका मजबूती से जवाब देंगे।
9 HP बटालियन एनसीसी डलहौजी के निर्देशों के अनुसार इंदौरा के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज इंदौरा में 12वां इंटरनेशनल योगा डे बड़े जोश और एनसीसी कैडेट्स, स्टूडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स की एक्टिव भागीदारी के साथ मनाया गया। यह प्रोग्राम एनसीसी के तहत फिजिकल फिटनेस, मेंटल हेल्थ और हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने में योग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया था। इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मलेंदर राजन इस इवेंट में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। सेलिब्रेशन की शुरुआत वेलकम एड्रेस से हुई, जिसके बाद कॉमन योगा प्रोटोकॉल हुआ। एनसीसी कैडेट्स ने अलग-अलग योग आसन, प्राणायाम और मेडिटेशन एक्सरसाइज में जोश के साथ हिस्सा लिया। योग सेशन में मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने के लिए योग को जीवनशैली के तौर पर अपनाने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए विधायक मलेंदर राजन ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी में योग के महत्व पर ज़ोर दिया और युवाओं में हेल्थ, डिसिप्लिन और फिटनेस के बारे में जागरूकता फैलाने के एनसीसी के प्रयासों की तारीफ़ की। उन्होंने स्टूडेंट्स और कैडेट्स को उनके ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए रेगुलर योग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में वरिष्ठ नागरिक मंच देहरा ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देहरा में योग शिविर का आयोजन किया। शिविर में प्रधान जगदीश चन्द आजाद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भूपेश उप्पल, सचिव ओंकार सिंह सिपहिया, कोषाध्य कैप्टन दिलबाग, उपाध्यक्ष नीलकंठ दत्ता के अतिरिक्त सुनील वैद, मोहिंद धीमान, सुभाष गुलेरिया, विनोद शर्मा, कैप्टन देवी राम, रमेश शर्मा, राज कुमार जम्वाल तथा वीरबल ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आजाद ने योग के महत्व तथा अच्छी जीवन शैली पर बल दिया। कार्यक्रम के उपरांत वरिष्ठ नागरिकों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देहरा द्वारा आयोजित योग शिविर में भी भाग लिया।
हिमाचल प्रदेश एनसीसी की छठी स्वतंत्र कंपनी ऊना के कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल रविंद्र सिंह के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ढालियारा स्कूल में एक भव्य कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में गवर्नमेंट कॉलेज ढलियारा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बॉयज परागपुर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बॉयज गरली व स्थानीय विद्यालय के एनसीसी कैडेट ने भाग लिया। इस भव्य कार्यक्रम में योग के व्यायाम, आसन,प्राणायाम का अभ्यास कैडेट्स ने किया व योग के दैनिक जीवन में महत्व को समझा। इस विशेष कार्यक्रम में प्रागपुर स्कूल के एनसीसी अधिकारी विवेक शर्मा, गरली स्कूल के दीपक धीमान, एनसीसी इंस्ट्रक्टर जितेंद्र कुमार व सोनू कुमार स्थानीय स्कूल के डीपी महोदय उपस्थित रहे।
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आयोजित लेटरल एंट्री एंट्रेंस टेस्ट (LEET)-2026 का बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिया है। 14 जून को आयोजित इस परीक्षा में प्रदेशभर के 1,963 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परिणाम जारी होते ही विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल है और अब उनकी नजरें आगामी काउंसलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी हैं। तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव Ashok Pathak ने बताया कि इस वर्ष शिमला के अमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। अमन ने 400 में से 370 अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया। वहीं, चंबा के मोहित कपूर 285 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि मंडी की नंदिनी ने 246 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है, जहां अभ्यर्थी अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं। परिणाम जारी होने के बाद सफल उम्मीदवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया का अगला चरण जल्द शुरू किया जाएगा। बोर्ड सचिव ने बताया कि काउंसलिंग और सीट आवंटन से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र जारी किया जाएगा। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं और अपडेट के लिए नियमित रूप से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। LEET-2026 के परिणामों के साथ अब प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग डिप्लोमा संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुल गया है। सफल अभ्यर्थी आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से अपनी पसंद के संस्थानों और शाखाओं में दाखिला प्राप्त कर सकेंगे।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने Re-NEET 2026 परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। सरकार के निर्णय के तहत 21 जून को आयोजित होने वाली Re-NEET परीक्षा के अभ्यर्थियों को हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की साधारण बसों में परीक्षा केंद्र तक आने-जाने के लिए नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की यात्रा को सुगम, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के परीक्षा में शामिल हो सकें। HRTC द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह सुविधा केवल निगम की साधारण बसों में ही लागू होगी। लग्जरी, डीलक्स और अन्य विशेष श्रेणी की बसों में यह छूट मान्य नहीं होगी। मुफ्त यात्रा का लाभ उठाने के लिए अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अपना Re-NEET 2026 एडमिट कार्ड दिखाना होगा। यही दस्तावेज पहचान पत्र, निवास स्थान और परीक्षा केंद्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा अभ्यर्थी के निवास स्थान से परीक्षा केंद्र तक एक बार जाने और परीक्षा के बाद एक बार वापस लौटने के लिए ही मान्य होगी। विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था 20 जून से 22 जून तक प्रभावी रहेगी। किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए बस परिचालकों को एडमिट कार्ड पर यात्रा संबंधी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मुफ्त यात्रा करने वाले छात्रों का रिकॉर्ड तैयार कर HRTC मुख्यालय को भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri के निर्देशों के बाद HRTC प्रबंधन ने सभी क्षेत्रीय और यूनिट अधिकारियों को इस सुविधा के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आर्थिक एवं मानसिक राहत मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने Re-NEET 2026 में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छात्र पूरे आत्मविश्वास और शांत मन से परीक्षा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी सुविधा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी।
पुलिस जिला नूरपुर की सीआईए टीम द्वारा दिनांक 19 जून को प्रातः रियाली पुल के समीप नियमित नाकाबंदी एवं गश्त के दौरान लकड़ी से लदे कई संदिग्ध वाहनों को जांच हेतु रोका गया। सूचना प्राप्त होने पर पुलिस थाना फतेहपुर तथा पुलिस पोस्ट रे के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संयुक्त रूप से वाहनों की जांच की। जांच के दौरान कुल छह पिकअप वाहन तथा एक कैंटर विभिन्न प्रजातियों की लकड़ी एवं ईंधन लकड़ी से लदे पाए गए। वाहन चालकों से लकड़ी के परिवहन संबंधी वैध परमिट, लाइसेंस एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, किन्तु वे कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस संबंध में पुलिस थाना फतेहपुर में मामला दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच में लकड़ी के अवैध परिवहन की आशंका पाए जाने पर संबंधित सातों वाहनों तथा लकड़ी को कब्जे में लेकर आगामी जांच एवं कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम "एंटी चिट्टा एवं ड्रग-फ्री हिमाचल अभियान" के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से आज नगर परिषद नूरपुर की नशा निवारण समिति (NNC) की बैठक नगर परिषद कार्यालय नूरपुर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक नूरपुर कुलभूषण वर्मा ने की। बैठक में एसडीएम नूरपुर, एसडीपीओ नूरपुर, थाना प्रभारी नूरपुर, नगर परिषद नूरपुर के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद के नवनिर्वाचित पार्षदों एवं अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान उपस्थित सदस्यों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे एंटी चिट्टा एवं ड्रग-फ्री हिमाचल अभियान के उद्देश्यों एवं कार्ययोजना की जानकारी दी गई। युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति, विशेषकर चिट्टा (हेरोइन) एवं अन्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके प्रभावी नियंत्रण हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों एवं वार्ड स्तर पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, नशे के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, युवाओं को जागरूक करने, समुदाय आधारित सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा पुलिस, प्रशासन एवं स्थानीय निकायों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, एसडीएम नूरपुर, एसडीपीओ नूरपुर एवं थाना प्रभारी नूरपुर ने नगर परिषद के सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा नशे के विरुद्ध जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। सभी पार्षदों ने नशा मुक्त नूरपुर एवं नशा मुक्त हिमाचल के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों को नशे के विरुद्ध सामूहिक रूप से कार्य करने तथा समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ भी दिलाई गई। अंत में यह संकल्प लिया गया कि एंटी चिट्टा एवं ड्रग-फ्री हिमाचल अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए जागरूकता, जनभागीदारी एवं समन्वित प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।
ज्वालामुखी क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ समिति के अध्यक्ष विद्या सागर शर्मा के आकस्मिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर से समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों तथा स्थानीय लोगों में गहरा दुःख व्याप्त है। श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि विद्या सागर शर्मा एक सरल, मिलनसार और समाज सेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समिति के माध्यम से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में समिति ने अनेक धार्मिक एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया। समिति के सदस्यों ने कहा कि विद्या सागर शर्मा का निधन समाज और धार्मिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई करना कठिन होगा। उनके आदर्श और समाज सेवा के कार्य सदैव लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।
भारतीय मजदूर संघ के तत्वावधान में भारतीय डाक कर्मचारी संघ ग्रुप ‘सी’, भारतीय डाक कर्मचारी संघ पोस्टमैन एवं एमटीएस तथा भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ, देहरा मंडल द्वारा 21 जून 2026 को होटल पोंग व्यू, देहरा में संयुक्त सीडब्ल्यूसी (CWC) बैठक एवं प्रथम अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के सभी डाक मंडलों से कर्मचारी प्रतिनिधि और संगठन के पदाधिकारी भाग लेंगे। अधिवेशन के दौरान डाक कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों, कर्मचारियों की समस्याओं, विभागीय नीतियों तथा संगठनात्मक विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। बैठक में डाक मंडल देहरा की भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ इकाई तथा भारतीय डाक कर्मचारी संघ पोस्टमैन एवं एमटीएस इकाई की नई कार्यकारिणियों का गठन भी किया जाएगा। इसके माध्यम से संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने तथा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। अधिवेशन में 20 जुलाई 2026 से देशभर में प्रस्तावित डाक कर्मचारियों के जन आंदोलन के प्रमुख बिंदुओं, मांगों और कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन की रूपरेखा और उसकी सफलता के लिए आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजकों ने प्रदेश के सभी डाक मंडलों के कर्मचारियों और पदाधिकारियों से अधिवेशन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है, ताकि संगठन को और अधिक सशक्त बनाया जा सके तथा कर्मचारियों की आवाज को मजबूती मिल सके।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में अनेक ऐसे देवस्थल हैं, जिनका महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्थानीय इतिहास, संस्कृति और लोकविश्वास का भी अभिन्न हिस्सा हैं। मंडी जिले की करसोग घाटी में स्थित देवता श्री मूल माँहूनाग जी का मंदिर भी ऐसा ही एक पवित्र स्थल है, जो सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। करसोग की बखारी कोठी में समुद्र तल से लगभग 6200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य, लोक परंपराओं और देव संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मूल माँहूनाग जी को महाभारत के महान योद्धा और दानवीर सूर्यपुत्र कर्ण का अवतार माना जाता है। स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद कर्ण ने लोककल्याण के लिए देव रूप धारण किया और हिमालय की इन पर्वत श्रृंखलाओं को अपना निवास बनाया। समय के साथ वे माँहूनाग देवता के रूप में पूजे जाने लगे। आज भी करसोग क्षेत्र में कर्ण और माँहूनाग को एक ही दिव्य शक्ति का स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि देवता को दान, धर्म, पराक्रम और न्याय का प्रतीक माना जाता है। मूल माँहूनाग जी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथाओं में सुकेत रियासत के राजा श्याम सेन की कथा प्रमुख है। कहा जाता है कि मुगल शासनकाल में राजा श्याम सेन को बंदी बना लिया गया था। संकट की इस घड़ी में राजा ने माँहूनाग देवता का स्मरण किया। लोकविश्वास के अनुसार देव कृपा से राजा को मुक्ति मिली और वे सकुशल अपने राज्य लौट सके। इस घटना के बाद सुकेत राजपरिवार की माँहूनाग देवता के प्रति आस्था और अधिक गहरी हो गई तथा देवता को रियासत का रक्षक माना जाने लगा। मंदिर की एक विशेष पहचान यहां स्थित पवित्र धूना भी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह धूना सदियों से निरंतर प्रज्वलित है और कभी पूर्ण रूप से शांत नहीं हुआ। श्रद्धालु इसे देव कृपा और दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले भक्त इस धूने के दर्शन कर विशेष आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव करते हैं। माँहूनाग देवता की महिमा केवल करसोग तक सीमित नहीं है। सुंदरनगर क्षेत्र में भी देवता की विशेष मान्यता है और वहां स्थित मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। समय-समय पर आयोजित देव यात्राएं और धार्मिक आयोजन इस आस्था को और अधिक सशक्त बनाते हैं। देवता की पालकी जब विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करती है, तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मूल माँहूनाग जी का जिला स्तरीय मेला करसोग की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मेला प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की एक से पांच प्रविष्टि तक आयोजित किया जाता है। मेले की शुरुआत देवता जी की भव्य जलेब से होती है, जिसमें ढोल, नगाड़े, रणसिंघा और करनाल की गूंज के बीच देवता की शोभायात्रा निकाली जाती है। हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर करसोग पहुंचते हैं और देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि हिमाचली लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोकसंगीत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। स्थानीय समाज में माँहूनाग देवता को न्यायप्रिय देवता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। लोगों का विश्वास है कि यदि किसी व्यक्ति को कहीं न्याय नहीं मिलता, तो वह देवता के दरबार में अपनी प्रार्थना रख सकता है। इसी विश्वास को दर्शाती एक प्रसिद्ध स्थानीय कहावत आज भी सुनने को मिलती है— "सीने गोष्ठुए आग"। इसका अर्थ है कि माँहूनाग देवता सब कुछ देखते और सुनते हैं। न्याय भले देर से मिले, लेकिन सत्य और निष्पक्षता के साथ अवश्य मिलता है। ग्रामीण जीवन में भी देवता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसान खेतों में बीज बोने से पहले देवता का आशीर्वाद लेते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय या अन्य शुभ कार्यों से पूर्व भी देवता की अनुमति और कृपा को आवश्यक माना जाता है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, "देवता बिना इजाजत कुछ नहीं और देवता की मर्जी से सब संभव है।" यह कथन आज भी क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। माँहूनाग देवता से जुड़ा एक और रोचक पक्ष उनकी समृद्ध देव परंपरा है। लोकमान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु वर्षों से सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं देवता को अर्पित करते रहे हैं। यही कारण है कि माँहूनाग देवता को हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित और समृद्ध देवस्थलों में गिना जाता है। कुछ लोग उन्हें प्रतीकात्मक रूप से "देवताओं का बैंकर" भी कहते हैं, हालांकि यह लोक परंपरा और जनविश्वास का हिस्सा है। आज मूल माँहूनाग मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिमाचल की जीवंत देव संस्कृति, लोक इतिहास और सामाजिक मूल्यों का प्रतीक बन चुका है। दानवीर कर्ण की परंपरा से जुड़ी यह आस्था लोगों को सत्य, न्याय, परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। करसोग की शांत वादियों में स्थित यह देवस्थल आज भी हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ता है। मूल माँहूनाग जी की यह गाथा केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की उस अनूठी देव संस्कृति की कहानी है, जो सदियों से लोगों के जीवन, विश्वास और सामाजिक व्यवस्था का आधार बनी हुई है।
दिनांक 17.06.2026 को पुलिस थाना चिरगांव की टीम को गश्त के दौरान चमराड़ा क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती किए जाने संबंधी गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने स्थानीय स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान सेब के पौधों के बीच अवैध रूप से उगाए गए 1,570 अफीम के पौधे (पॉड सहित) बरामद किए गए। बरामद पौधों में से कुछ पौधों को नमूने के रूप में कब्जे में लेकर सील किया गया, जबकि शेष पौधों को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इस संबंध में अभियोग संख्या 56/2026, दिनांक 17.06.2026, अधीन धारा 18 एनडीपीएस अधिनियम, पुलिस थाना चिरगांव, जिला शिमला में मामला दर्ज किया गया है। उक्त मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम को चमराड़ा क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती किए जाने संबंधी एक अन्य गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने पुनः स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान सेब के बगीचे में खसरा नंबर 702 की भूमि पर अवैध रूप से उगाए गए 2,021 अफीम के पौधे (पॉड सहित) बरामद किए गए। बरामद पौधों में से कुछ पौधों को नमूने के रूप में कब्जे में लेकर सील किया गया, जबकि शेष पौधों को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इस संबंध में अभियोग संख्या 57/2026, दिनांक 17.06.2026, अधीन धारा 18 एनडीपीएस अधिनियम, पुलिस थाना चिरगांव, जिला शिमला में मामला दर्ज किया गया है। दोनों मामलों में कुल 3,591 अफीम के पौधे बरामद किए गए हैं। आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है तथा मामलों की आगामी जांच पुलिस थाना चिरगांव द्वारा की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को जल्द ही दुनिया के सात अजूबों की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिलेगी। नगर निगम शिमला शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों रिज मैदान और मालरोड पर विश्व के सात प्रसिद्ध अजूबों की प्रतिकृतियां स्थापित करने जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर की पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और लोगों को आकर्षक सेल्फी पॉइंट उपलब्ध कराना है। नगर निगम के अनुसार इन अजूबों की प्रतिकृतियां दिल्ली स्थित एक कंपनी द्वारा तैयार की जा रही हैं। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इन्हें शिमला लाया जाएगा। निगम प्रशासन ने इन्हें स्थापित करने के लिए रिज मैदान और मालरोड पर उपयुक्त स्थान भी चिन्हित कर लिए हैं। रानी झांसी पार्क और रोटरी टाउनहॉल के समीप इन संरचनाओं के लिए विशेष रैंप और मजबूत नींव तैयार की जा रही है। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि इसी महीने के भीतर दुनिया के सातों अजूबों को स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल शिमला की पर्यटन पहचान को और मजबूत करेगी तथा पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगी। इससे स्थानीय कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इस बीच महापौर ने मंगलवार को छोटा शिमला बाजार का दौरा कर स्थानीय व्यापारियों की समस्याएं भी सुनीं। कारोबारियों ने मंदिर के समीप स्थित बंद नाली से फैल रही बदबू की शिकायत की। शिकायत मिलने के तुरंत बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए और टैंकर मंगवाकर नाली की सफाई करवाई, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली। शिमला में प्रस्तावित यह नई परियोजना शहर के पर्यटन ढांचे को और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के लिए बहुप्रतीक्षित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए लंबे समय से लंबित वित्तीय मुद्दों को उठाया। बैठक के दौरान लगभग आठ वर्षों से लागत वहन को लेकर अटकी हुई 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति बनी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसे उत्तर भारत की महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जाता है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक से संबंधित लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वहन करेंगे। इससे हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी हद तक कम होगा और राज्य को परियोजना से मिलने वाले लाभों को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए लगातार केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप यह सकारात्मक पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये वहन करने पर सहमति व्यक्त की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए वित्तीय बोझ कम करने के लिए लगातार प्रयास किए। राज्य सरकार का मानना है कि बड़े विकासात्मक प्रोजेक्ट्स में हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा करना और राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव को कम करना आवश्यक है। किशाऊ बांध परियोजना के पूर्ण होने के बाद हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली की हिस्सेदारी प्राप्त होगी। मौजूदा बिजली दरों के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा यह परियोजना क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा दीर्घकालिक विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों पर सहमति बनाई गई। राज्य सरकार ने इसे हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उम्मीद जताई है कि परियोजना के क्रियान्वयन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र और राजस्व में दीर्घकालिक लाभ देखने को मिलेंगे।
हिलटॉप दुर्गा मंदिर डमटाल के जनरल हाउस की बैठक मंगलवार को वन विश्राम गृह भदरोया में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विधायक मलेंद्र राजन ने की। बैठक के प्रारंभ में मंदिर अधिकारियों ने मंदिर की आय-व्यय तथा विभिन्न गतिविधियों का विस्तृत ब्यौरा विधायक को प्रस्तुत किया। इसके बाद मंदिर से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विधायक ने निर्देश दिए कि मंदिर में चल रहे तथा प्रस्तावित सभी विकास कार्य पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ किए जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस धार्मिक स्थल के विकास में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने मंदिर के समस्त स्टाफ की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए। इसके अतिरिक्त विधायक ने मंदिर में प्रसाद व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित एवं बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर की आय एवं निधि का उपयोग केवल मंदिर के सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र के विकास कार्यों पर ही किया जाएगा। मंदिर की राशि किसी अन्य बाहरी कार्य में खर्च नहीं की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में वर्ष में कम से कम एक बार भव्य जागरण अथवा भंडारे के आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई, ताकि श्रद्धालुओं की सहभागिता बढ़े और धार्मिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके। बैठक में डीएफओ संदीप कोहली, एसीएफ निशांत पाराशर, आरओ इंदौरा अब्दुल हमीद सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं मंदिर समिति के सदस्य उपस्थित रहे।


















































