हिमाचल के पर्यटन स्टेक होल्डर्स पैकेज में कुछ रिलीफ न मिलने से निराश
हिमाचल प्रदेश का पर्यटन उद्योग जो कि अपना मेजर टूरिस्ट सीजन खो चुका है वो केवल सरकार की मदत की उम्मीद कर रहा था। हिमाचल में पर्यटन को पटरी पर आने के लिए कम से कम 12 से 18 महीने का समय लग सकता है इतना लंबा समय बिना कमाई के पर्यटन उधमियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।हिमाचल में पर्यटन इकाइयों का 60% के करीब रेवेन्यू अप्रैल ,मई तथा जून में ही एकत्रित होता है जिससे सारे वर्ष के फिक्स्ड खर्चे चलते है। इस वर्तमान सिथिति में पर्यटन कारोबार को पटरी पर आने के लिए एक वर्ष से पहले कोई उम्मीद नही की जा सकती।
पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद थी कि हिमाचल पर्यटन उद्योग के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की जाएगी ताकि पर्यटन उद्योग को जिंदा रखा जा सके। परन्तु जो 20 लाख करोड़ की राहत पैकेज की घोषणा की गई उसमे पर्यटन के नाम पर कुछ भी नही दिया गया जिसके कारण पर्यटन से जुड़े कारोबारी बहुत आहत हुंए है। आज समूचे हिमाचल की associations के मेम्बेर्स सोचने पर मजबूर हो गए है कि आने वाले समय में वह किस तरह सस्टेन करेंग।
उन्होंने हिमाचल सरकार को डिमांड चार्जर्स हटा कर होटल कारोबारियों को कुछ राहत देने के लिए आभार व्यक्त किया है। परंतु अन्य मुद्दे जैसे प्रॉपर्टी टैक्स, गरबाजे फी, पानी व बिजली की डोमेस्टक टैरिफ चार्ज करने sewerage सेस इत्यादि में सरकार ने कोई छूट नही दी है, जबकि सारे होटलों का कारोबार ही पूर्ण रूप से बंद पड़ा है। ऐसे वक्त में उनसे ये चार्जेज चार्ज करना न्यायसंगत नही है। इसी तरह पर्यटन उद्यमियों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध करवाने की आवश्यकता थी ताकि टूरिज्म यूनिट्स अपने फिक्स्ड खर्चो का बोझ उठा सके तथा स्टाफ को बनाए रखने के लिए कुछ स्टाफ अल्लोवंस देने की आवशकता थी परंतु ऐसी कोई भी राहत सरकार द्वारा नही दी गई।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जब तक पर्यटन उद्योग अपने पैरों पर खड़ा नही होता पर्यटन इकाइयों से जुड़े कर्मचारी जो अपने गांव जा चुके है उन्हें मनरेगा के अंतर्गत उनके गाँव में ही रोजगार दिया जाए तथा जो कर्मचारी शहरों में रहते ह। ऊन्हे अर्बन एम्प्लॉयमेंट स्कीम के अंतर्गत रोजगार दिया जाए ताकि covid 19 के चलते उनकी भी रोजी रोटी चल सक। लगभग 50 करोड़ रुपये के करीब प्रति माह कर्मचारियों को वेतन के रूप में दिया जाता थ। वह दे पाने में पर्यटन से जुड़े ऊधमयों के लिए नामुमकिन है क्यूंकि Covid 19 की महामारी के चलते सभी पर्यटन इकाइयों का काम बंद पड़ा है। यदि उधमियों को कोई राहत न मिली तो उन्हें मजबूरन स्टाफ की छंटनी करने पर विचार करना पड़ सकता है।
आल हिमाचल अस्सोशशन्स ऑफ हॉस्पिटेलिटी एंड टूरिज्म फेडरेशन ने सरकार से आग्रह करेगी कि उनके द्वारा दी गई माँगों पर पुनः विचार किया जाए ताकि हिमाचल के पर्यटन उद्योग को बचाया जा सके, जो कि हिमाचल की कुल जीडीपी का 7% का हिस्सा प्रदान करती है। उन्होंने आशा जताई है कि सरकार हिमाचल के पर्यटन उद्योग के लिए एक एक विशेष पैकेज की शीघ्र घोषणा करेग।
