बिंदल के इस्तीफा देने से प्रदेश भाजपा के नेता यह न समझे कि उनकी जांच नहीं होगी : रामलाल ठाकुर
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व वर्तमान विधायक श्री नयना देवी जी राम लाल ठाकुर ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने जो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है उससे प्रदेश सरकार व प्रदेश भाजपा के नेता यह न समझे कि उनकी जांच नहीं होगी। राम लाल ठाकुर ने तो इस पूरे मामले की सी. बी. आई.से जांच करवाने की मांग की है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य घोटाले के तार सीधे सीधे प्रदेश सरकार व भाजपा नेताओं से जुड़े हुए है इस घोटाले की अभी तो यह पहली विकेट गिरी है बाकी विकटें बहुत जल्द गिरेंगी।
राम लाल ठाकुर ने यह भी कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है तब से इस सरकार ने प्रदेश के संविधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों को गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकारों को वर्ष 1997 से स्वास्थ्य विभाग से बड़ा प्यार रहा और फिर वर्ष 2008 में जब दोबारा प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी तो वर्तमान भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल की स्वास्थ्य विभाग के मंत्री थे और इनकी टोली में कुछ अधिकारी और कुछ भाजपा के नेता इस तरह से माफिया बन कर घोटालों को अंजाम देते रहे है। अभी जो ऑडियो वॉइस से 5 लाख रूपए के लेनदेन की बात हुई है उसका भी पूरा खुलासा होना बाकी है।
इसके साथ ही राम लाल ठाकुर ने कहा कि पिछले वर्ष कांगड़ा में जो स्वास्थ्य विभाग को लेकर पत्र बम्ब सामने आया था उसमे भाजपा के दो गुटों के बीच ही लाव लपेट करके मामला ठंडा डाल दिया था। लेकिन सरकारी तौर पर कोई जांच नहीं कि गई थी और उस पत्र बम्ब का ठीकरा एक पूर्व मंत्री की सर पर फोड़ दिया था। अगर उस समय ठीक से जांच हो जाती तो प्रदेश सरकार व भाजपा को यह दिन नहीं देखने पड़ते। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष उन दिनों से ही घोटाले की सुर्खियों में रहें है जब से व सोलन की मुनिसिपल कॉर्पोरेशन में थे। इनके राजनैतिक जीवन मे जिन जिन पदों पर रहे है उन सभी इनके द्वारा किए गए कार्यकलापों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि यह तो स्वास्थ्य विभाग का एक मसला है ऐसे और भी विभागों के मसले सामने आ रहे है। आयुर्वेदिक विभाग में दवाइयों की खरीद, अस्पतालों में स्वास्थ्य ईक्विपमेंटों की खरीद, आई. जी. एम. सी. के प्रधानाचार्य का इस्तीफा, पी. पी. ई. किटें, मास्क, सेनेटाइजर, ग्लव्स, दवाओं से लेकर अन्य विभाग भी संदेह के घेरे में है, जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पता था कि उनकी कोविड 19 को लेकर खरीद के सैम्पल फेल हो चुके है तो फिर से क्यों उन्ही चंद व्यवसायिक संस्थाओं को खरीद आर्डर दिए गए यह सब बातें सवालों के घेरे में है। इसके सचिव स्वास्थ्य विभाग, अतिरिक्त सचिव स्वास्थ्य विभाग और विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग भी कार्यप्रणाली की संदेह के घेरे में है, उनकी भी जांच अति आवश्यक है। इसके अलावा प्रदेश आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी बहुत प्रश्न चिन्ह लग चुके है। इन सभी विषयों पर प्रदेश सरकार को कड़े आदेश देकर सी. बी.आई. जांच करवानी चाहिए ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके।
