विधायक राम लाल ठाकुर ने केंद्र सरकार पर बोला हमला
हिमाचल प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व श्री नयना देवी जी के विधायक राम लाल ठाकुर ने कोविड 19 महामारी पर देर से संज्ञान लेने के मामले पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री अगर समय पर फैसला लेते तो यह दिन नहीं देखने पड़ते, जितना भयाभह रूप यह महामारी दिन प्रतिदिन लेती जा रही है। वह हमारी मानव सभ्यता के मिटने की और इशारा कर रही है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी देते हुए 12 फरवरी को देश के ऊपर कोविड 19 महामारी के बारे में चेताया था कि यह जल्द ही भारतवर्ष में पैर पसार रहा है और इससे एक तो महामारी फैलेगी दूसरे गंभीर आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। (इस चेतावनी की प्रतिलिपि भी आज मै आपको इस प्रेस नोट के साथ संलगित कर रहा हूं) तो देश के प्रधानमंत्री व उनके सिपहसालारों ने राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाया था और इस गम्भीर महामारी को लेकर अमेरिका और अन्य यूरोपियन देशों का मुंह ताकने लगे थे की कब वह इस महामारी से लड़ेंगे तो फिर उनकी देखा देखी में हम भी अपनी रणनीति बनाएंगे।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि इस महामारी को भांपने वाले हमारे डॉक्टरों व वैज्ञानिकों की भी नहीं सुनी गई क्योंकि हमारे डॉक्टरों, वैज्ञानिकों व राहुल गांधी के बोलने से देश के प्रधानमंत्री का अहम आड़े आ जाता था। राम लाल ठाकुर ने तथ्यों पर आधारित बात करते हुए कहा देश मे कार्यरत 126 एयरपोर्ट हैं जिनमे से केवल 34 एयरपोर्टों पर अंतराष्ट्रीय उड़ाने होती है अगर केवल उन 34 एयरपोर्टों को ही सील कर दिया होता या फिर उन अंतरास्ट्रीय एयरपोर्टों पर बाहर से आने वाले लोंगो को संस्थागत क्वारंटाइन कर दिया होता तो देश मे इतने गंभीर हालत नहीं होते और नही देश में लॉकडाउन होता, लेकिन देश के प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि तो केवल घंटी बजाने, थाली बजाने और मोमबत्ती या दिया जलाने वाली ही निकली। उन्होंने कहा मुझे अफसोस होता है कि लॉक डाउन बिना तैयारी के कर दिया गया देश मे जो गरीब मजदूरों का हाल हुआ उनकी जिम्मेदारी अब कोई नही ले रहा है।
राम लाल ठाकुर ने फिर से आकड़ो का प्रहार करते हुए कहा कि देश मे करीब 19000 हज़ार ट्रेनें है यदि यह व्यवस्थित रूप से चलाई होती तो करीब दो से ढाई करोड़ मज़दूरों को उनके स्थानों पर प्रतिदिन पहुँचाया जा सकता था और जिन मजदूरों ने अपने घरों में ट्रेनों से वापिसी करनी थी। इनकी संख्या करीब 10 करोड़ 40 लाख के करीब थी मात्र पांच सात दिनों में यह सारी व्यवस्था गरीब मज़दूरों को छोड़ने की हो सकती थी लेकिन देश के प्रधानमंत्री और उनके सिपहसालारों को तो महामारी को उत्सव में बदलने का प्रयास जो करना था और अब जब रेल यात्रा और हवाई यात्रएं देश मे खोली तो कोई यात्री जाने को तैयार नहीं, यह सब बिना किसी आधरभूत योजनाओं के की गई तैयारियां का परिणाम है और अब देश का हर नागरिक और आमजन इसके परिणाम भुगत रहा है, लेकिन जिम्मेदारी सरकार में कोई नहीं ले रहा है।
