छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने, चश्मा और एपरन का प्रयोग जरूर करें : डाॅ. विनोद शर्मा
उप-निदेशक बागवानी डाॅ. विनोद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि देश के उतरी भागों मुख्यत उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में टिड्डी दल का भयंकर प्रकोप देखा गया है जिसके चलते किसानों को भारी मात्रा में नुकसान का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने बताया कि टिड्डी दल फसलों पर दिन के समय पर हमला करता है और रात को टिड्डी दल विश्राम करता है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल को रात में आराम नहीं करने देना चाहिए जिसके लिए किसानों को इससे प्रभावित इलाकों में रात के समय ही कीटनाशकों का छिडकाव करना चाहिए जिसमें मैलाथियान 50 प्रतिशत ई.सी. 3.7 एम.एल/लीटर पानी, मैलाथियान 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 7.4 ग्राम/लीटर पानी, क्लोरोपाईरोफास 20 प्रतिशत ई.सी. 2.4 एम.एल./लीटर पानी, क्लोरोपाइराॅस 50 प्रतिशत ई.सी. 1.0 एम.एल./लीटर पानी शामिल है। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि छिडकाव करते समय मास्क, दस्ताने, चश्मा और एपरन का प्रयोग जरूर करें।
उन्होंने बताया कि इस छिडकाव को फसल काटने के 12 से 15 दिन पहले करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन टिड्डी दलों का ब्रीडिंग समय जून-जुलाई से अक्तूबर-नवम्बर तक होता है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल खाली पडे खेतों में अण्डें देते हैं जिन्हें नष्ट करने के लिए खेतों में गहरी नालियां खोद कर पानी से भर दें ताकि इससे इसकी संख्या को बढने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि एक टिड्डी दल दिन भर में 100-150 किलोमीटर तक उड़ सकती है और 20-25 मिनट में ही पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। उन्होंने बताया कि इसके हमले से बचने के लिए किसान थालियां या टीन आदि का शोर करके भी टिड्डी दल को भगाते है ताकि टिड्डी दल के हमले से फसलो को बचाया जा सके।
