लघु उद्योग भारती ने एम एस एम ई की नई परिभाषा का किया स्वागत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इकॉनोमिक पैकेज में एम एस एम ई की परिभाषा में संशोधन की घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की 1 जून की 2020 की बैठक में उसे पुनः संशोधित किया गया है जो जुलाई 2020 में लागू होगी। लघु उद्योग भारती इस बात की सराहना की है कि बहुत लंबे अरसे से विचाराधीन विषय को लागू किया गया। लघु उद्योग भारती हिमाचल प्रदेश के महामंत्री विकास सेठ ने बताया की, बड़ा संतोष का विषय है कि सरकार ने हमारी मांग पर निवेश को पूर्ववत रखते हुए, वार्षिक बिक्री को जोड़ा है। इसके अतिरिक्त सरकार से यह मांग करते हैं की कुछ बिंदुओं को इस अधिसूचना में जोड़ा जाए।
सर्वप्रथम एमएसएमई के कहलाने के लिए भारतीय स्वामित्व की शर्त होना आवश्यक हो। सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों को मेक इन इंडिया के तहत बढ़ाने के लिए जरूरी है कि परिभाषा में यह निश्चित किया जाए कि सेवा क्षेत्र और व्यापार को अलग से परिभाषित किया जाए, एवं भारत सरकार के एमएसएमई विभाग की वर्ष 2018 -19 की रिपोर्ट के अनुसार देश में सूक्ष्म उद्योग 89% लघु उद्योग 10.5% और मध्यम .5% हैं। इसलिए बैंकों द्वारा कर्ज के आवंटन में एवं सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों के द्वारा खरीदी में आरक्षण सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योगों की संख्या के अनुसार विभाजित होना चाहिए। लघु उद्योग भारती बहुत आशान्वित है कि सरकार हमारे द्वारा दिए गए सुझावों को गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए अधिसूचना में जुड़ेगीं, जिससे प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी भारत में एमएसएमई के योगदान को देखा जा सकेगा।
