मुद्रा योजना मात्र युवाओं को ठगने भर का विकल्प : रामलाल ठाकुर
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व उधोग मन्त्री व विधायक श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र राम लाल ठाकुर ने केन्द्र सरकार का मुद्रा योजना का कच्चा चिट्ठा खोल के रख दिया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्रा योजना मात्र युवाओं को ठगने भर का विकल्प है और बेरोजगार लोंगो को मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने जैसा है।
राम लाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार को भी मुद्रा लोन योजना पर अपनी स्थिति स्प्ष्ट करने को कहा है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि अगर हम मुद्रा योजना के आकड़ो व तथ्यों का अध्धयन करें तो यह योजना सिर्फ युवाओं को ठगने और देश मे एक बड़े वित्तिय घोटाले की ओर इशारा करती है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि एक तरफ सरकार बैंकों की हालात सुधारने के लिए डूब चुके कर्ज की वसूली में लगी है तो दूसरी तरफ सरकार की मुद्रा योजना के तहत दिए गए लोन में से अब तक करीब 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का एनपीए हो चुका है। इतना ही नहीं जिन्हें लोन मिला है उनमें से मुश्किल से 1 फीसदी लोगों को 5 लाख रुपये से ज्यादा दिए गए।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि खुद के पैरों पर खड़ा होने के मकसद से मोदी सरकार ने करीब 5 साल पहले सरकार ने मुद्रा योजना की शुरुआत की थी जिसके तहत 10 हजार रु से लेकर 10 लाख रु तक के लोन दिए जाने थे। ये लोन दिए भी गए, लेकिन इस लोन में से अब तक 18 हजार करोड़ रु से अधिक का एनपीए हो चुका है। यानी इस लोन के वापस चुकाने की संभावना नहीं है। तो यब बहुत बड़ी वित्तिय गड़बड़ी सामने आ रही है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि हालांकि वित्त मंत्रालय इस 18 हजार करोड़ रु के एनपीए को लेकर खुद को असहज नहीं बता रहा है। उन्होंने प्रश्न खड़ा किया तो क्यों नही देश किसानों के लोन भी माफ किए जाते है वह भी तो रोजगार ही चलाते है। तो क्यों एक लूट जो बड़े प्रबंधकीय तरीके से की जा उसकी छानबीन नहीं कि जा रही है।यह सिर्फ बेरोजगारी के आकड़ो को झुठलाने के लिए ही किया जा रहा है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि 8 अप्रैल 2015 को इस मुद्रा योजना को लॉन्च करने के बाद 7 लाख 34 हजार करोड़ रु के करीब का लोन अब तक दिया जा चुका है। अब तक इसमें से 2.5 फीसदी से ज्यादा लोन एनपीए हो चुका है, यानी कुल 18 हजार करोड़ के करीब रु का लोन एनपीए हो गया है। इसका मतलब ये हुआ कि अब इस रकम की वसूली की संभावना नहीं है। लेकिन इसका दूरगामी परिणाम अब यह हो चुका है कि बैंक अब मुद्रा लोन देने में युवाओं को आनाकानी करने लगेंगे। तो अब तो इस योजना की बुनियाद ही डगमगा चुकी है।
राम लाल ठाकुर ने इस योजना के अन्य आंकड़े खोलते हुए कहा कि मामला सिर्फ एनपीए का नहीं है। मुद्रा लोन को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं उसका एक कड़वा सच भी है। मुद्रा योजना के तहत अब तक 14 करोड़ 88 लाख लोगों से ज्यादा को लोन दिया जा चुका है। ये लोन तीन अलग अलग कैटेगरी शिशु, किशोर और तरुण के तहत दिए जाते हैं। शिशु के तहत 50 हजार रु तक, किशोर के तहत 5 लाख रु तक और तरुण के तहत 5 लाख से 10 लाख रु तक के लोन दिए जाते हैं। जो किसी कारोबार को शुरू करने के लिए किशोर कैटेगेरी का लोन यानी 5 से 10 लाख रु तक का लोन सबसे कारगर माना जाता है। लेकिन अब तक इस कैटेगीर में लोन पाने वालों की संख्या सिर्फ 1.3 फीसदी है। यानी 12 करोड़ 78 लाख लोगों में से सिर्फ 17 लाख 57 हजार लोगों को ही मोटी रकम का लोन मिला है।
अगर कारोबारी साल 2018-19 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 6 करोड़ 97 लाख लोगों को लोन मिला। इनमें से 91 फीसदी लोग तो वो हैं जिन्हें 50 हजार रु से कम का ही लोन मिला है। जबकि 5 लाख रु तक के लोन पाने वालों की संख्या 6.7 फीसदी है। जबकि 5 लाख रु से ज्यादा पाने वालों की संख्या सिर्फ 1.3 फीसदी है। यानी मुद्रा योजना के तहत लोन पाने वालों की संख्या के आधार पर ये मान लेना कि उतने लोगों को रोजगार मिल गया शायद गलता ही होगा। इतना ही नहीं सरकारी दबाव में भले ही बैंक मुद्रा लोन बांट रहे हों लेकिन आगे चलकर ये बैंकों की सेहत के लिए चिंता बन रहा है क्योंकि छोटे लोन में बैंकों को फायदा कम खर्च ज्यादा होता है। तो इस मसले पर भी इस सरकार को जबाब देना चाहिए।
