'बाड़िया रे मेले खे मत आऐ मेरी जान'
हिमाचल प्रदेश का सुप्रसिद्ध लोकगीत "बाड़िया रे मेले खे आया मेरी जान", इस बार यह नहीं गाया जा सकेगा। असल में इस बार बाड़ा देव पांच पांडव मंदिर समिति सरयांज बाड़ीधार ने निर्णय लिया है कि इस बार लॉकडाउन के चलते देव मिलन कार्यक्रम नही होगा।
बाड़ादेव पांच पांडव मंदिर समिति सरयांज बाड़ीधार के अध्यक्ष जीत वर्मा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार मेले के आयोजन के लिए एसडीएम अर्की से अनुमति मांगी थी परन्तु एसडीएम अर्की ने लॉकडाउन में प्रदेश सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत मंदिर न खोलने के जारी दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए इस अनुमति को निरस्त कर दिया है। जिसके बाद बाड़ादेव पांच पांडव मंदिर समिति सरयांज बाड़ीधार ने यह निर्णय लिया कि इस बार लॉकडाउन के चलते वह मेले का आयोजन नही करेंगे।
गौरतलब है सोलन जिला की अर्की तहसील में आषाढ़ मास की सक्रांति को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय मेले में लोगो की भारी आस्था है और दूर दूर से लोग यहाँ पर देव मिलन देखने के लियी आते है। पौराणिक कथा के अनुसार पाण्डव अज्ञात वास में शिवजी को ढूंढते हुए हिमाचल आए क्योंकि हिमालय शिव का स्थान है। पौराणिक ग्रन्थों में एसा वर्णन है और यहां की पर्वत मालाएं शिवालिक अर्थात शिव की जटाएं कही जाती हैं। जैसे ही पांडवो को पता चला कि बाड़ीधार पर्वत पर शिवजी की धुनी है वैसे ही शिवजी के दर्शन की इच्छा लेकर पाण्डव यहाँ आए। यहाँ पहुंचा कर पांडवो को शिवजी की धुनी तो मिली पर शिवजी नहीं मिले। पांडव यहाँ पर लगातार दो दिन तथा तीन रात जागते रहे पर शिवजी नहीं मिले। जिसके बाद देवज्ञा से उन्हें वहीं प्रतिष्ठित हो जाने का आदेश हुआ और आकाशवाणी हुई की आज से ये पाण्डवों में सबसे ज्येष्ठ युधिष्ठर के नाम से जाना जाएगा और यह स्थान बाड़ी की धार के नाम से विख्यात होगा। बाकी पाण्डवों को अन्य स्थान मिले और वो उन स्थानों पर जाकर बस गए जहाँ पर आज भी उन्हें पूजा जाता है।
हर वर्ष इस स्थान पर आषाढ़ मास की सक्रांति को सभी पांडव व बूढी देवी इस स्थान पर अपने ज्येष्ठ भ्राता (युधिष्ठर) बाड़ादेव से मिलने के लिए आते है जिसे देव मिलन कहा जाता है। इस देव मिलन को देखने के लिए प्रदेशभर से हजारो की तादात में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते थे परन्तु इस बार इस स्थान पर न तो मेले का आयोजन होगा और न ही देवमिलन होगा। बाड़ादेव को लोग ग्राम देवता के रूप में पूजते है और जब यहाँ पर मेले का आयोजन होता है उस समय अपनी फसल का कुछ अंश देवता को अर्पित करते है। इस वर्ष इस स्थान पर मेला नही होगा वहीँ मंदिर समिति ने लोगो से आग्रह किया है कि यदि वह अपनी मन्नत या चढ़ावा चढ़ाना चाहते है तो वह मंदिर समिति के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा कर सकते है। उन्होंने बताया कि समिति का बैंक अकाउंट यूको बैंक की सरयांज शाखा में है।
