प्रदेश में सुचारू रूप से नहीं चल रही कोई भी व्यवस्था : रामलाल ठाकुर
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री व श्री नयना देवी जी से विधायक राम लाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल रही है। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि हर वर्ष प्रदेश में बन रही दवाओं के सैम्पल क्यों फेल हो जाते हैं।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि अभी हाल ही में हिमाचल प्रदेश में बनी 6 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी मई माह के ड्रग अलर्ट का खुलासा हुआ है। इस बार देश भर से कुल 477 दवाओं के सैंपल जांच के लिए पहुंचे थे, जिसमें से 452 दवाओं के सैंपल स्टैंडर्ड पाए गए लेकिन 25 दवाएं सब-स्टैंडर्ड क्वालिटी की पाई गई है, जिसमे से छह दवाएं हिमचल प्रदेश में बनाई गई थी। अभी तक प्रदेश के ड्रग विभाग उन दवा उद्योगों को नोटिस नहीं भेज सका है जिनकी दवाओं की क्वालिटी मानकों पर खरी नही उतर पाई है। जिन दवा उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल पाए गए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी क्यों नही किए गए हैं और औषधि नियंत्रण एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में क्यों नही लाई जा रही है।
राम लाल ठाकुर ने कहा है कि जिस तरह से प्रदेश में निर्मित दवाओं का सब स्टैण्डर्ड पाया जाता है उससे प्रदेश का सर शर्म से झुकता है और दवा मानकों के साथ खिलवाड़ का मतलब सीधे तौर पर मानव जाति की जान को जोखिम में डालने के सिवा कुछ और नही है। इसमें प्रदेश के ड्रग विभाग को देखना चाहिए कि क्यों हिमाचल प्रदेश में बन रही दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतर पाती हैं? क्या इस मसले पर प्रदेश सरकार और उससे सम्बंधित विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है। क्या इस तरह से सब स्टैण्डर्ड दवाओं से प्रदेश कलंकित होता रहेगा और विभाग के अधिकारी मौन बैठे रहते है।
राम लाल ठाकुर ने आरोप लगाया कि जिस तरह से बार-बार प्रदेश में सब स्टैण्डर्ड दवाओं की बात सामने आती है तो लगता है कि मिलावटी या कम गुणवत्ता की दवाओं के लेकर कहीं न कहीं कोई बड़ा कोम्प्रोमाईज़ किया जाता है। क्यों नहीं प्रदेश के दवा नियन्त्रक इस दवाओं के मामले को गंभीरता से लेते है। क्यों प्रदेश की सरकार सब स्टेन्डर्ड दवाओं के मसले पर कड़े और कठोर नियम बनाती है।
