देश की विदेश नीति और भारतवर्ष की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बहुत बड़ी भूल
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री व विधायक नयना देवी विधानसभा क्षेत्र राम लाल ठाकुर ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हुए 20 भारतीय सेना के जांबाजों की शहादत को नमन करते हुए कहा कि यह देश के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है। राम लाल ठाकुर ने कहा अगर प्रथम द्रष्टा देखा जाए तो यह देश की विदेश नीति और भारतवर्ष की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बहुत बड़ी भूल है। राम लाल ठाकुर ने केंद्र की सरकार पर कई सवाल खड़े करते हुए पूछा कि इस तरह की झड़पें कैसे हो जाती हैं राम लाल ठाकुर ने बताया दरअसल भारत और चीन के बीच अब तक सीमांकन पूरी तरह से नहीं हुआ है और यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ़ ऐक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी तय की गई है लेकिन गलवान समेत कुछ 15 ऐसे बिंदु हैं, जहां एलएसी को लेकर सहमति नहीं है। इन विवादित इलाक़ों में दोनों देशों के सैनिक पेट्रोलिंग करते रहे हैं और इस पेट्रोलिंग के तय प्रोटोकॉल भी हैं। राम लाल ठाकुर ने प्रश्न उठाते हुए पूछा कि जब सियाचिन में तैनात रहे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी ने जब कहा था कि पिछले कुछ सालों में देखने में आया है कि दोनों देशों के सैनिक पीछे हटने के बजाए, आपस में भिड़ रह हैं तो देश के विदेश मंत्री रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री कहां पर सोए रहे, तो रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी की बातों की बातों पर केंद्र सरकार ने गौर क्यों नही किया, जबकि वह वहां रहे थे और उनको भारत-चीन सीमा विवादों पर गहरी जानकारी थी। राम लाल ठाकुर ने कहा कि हिन्द-चीन सीमा में पहले भी धक्का-मुक्की के कई विडियो सामने आते रहे लेकिन इन वीडियो को देखने के बाद केंद्र सरकार हरकत में क्यों नही आई। राम लाल ठाकुर ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री विदेशी यात्राएं सिर्फ अपने ऐशो आराम के लिये ही करते रहे और देश के लोगो को यह बोल के बरगलाते रहे कि मैं देश की विदेश नीति और कूटनीति को सुदृढ़ कर रहा हूं। राम लाल ठाकुर ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच चीनी शहर वुहान में 27 और 28 अप्रैल 2018 को एक 'अनौपचारिक बैठक' हुई थी तो उसमें किन विषयों पर बात चीत हुई थी, यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। राम लाल ठाकुर ने यह भी कहा कि इससे पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय तत्कालीन विदेश मंत्री स्वर्गीय श्री मति सुषमा स्वराज की बैठक भी सीमा विवाद को लेकर हो चुकी थी। इसके अलावा अभी पिछले वर्ष 11 अक्टूबर 2019 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे और तामिलनाडु के महाबलिपुरम में जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक बैठक हुई थी तो इस बात-चित को पी. एम. ओ. और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत-चीन की सीमाओं की सुरक्षा हेतू बहुत सफल बात-चित करार दिया था और इस बात -चित को डोकलाम के बाद दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव को ख़त्म करने के तौर पर भी देखा गया था। राम लाल ठाकुर ने कहा कि दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव से भारत हमेशा ही चिंतित रहा है और हाल के दिनों पाकिस्तान में, नेपाल में और मालदीव में चीन के प्रभाव बढ़ने के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं और हमारे देश के प्रधानमंत्री मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पिछले चार सालों में चार बार चीन दौरा भी कर चुके है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि इससे पहले भी भारत चीन युद्ध सिर्फ सीमाओं के विवाद को लेकर हुआ था जब चीनी सेना ने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख में और मैकमोहन रेखा के पार एक साथ हमले शुरू किये थे और इतना कुछ होने के वावजूद भी हमारे देश के प्रधानमंत्री जी को यह क्यों समझ नहीं आया कि चीन एक धोखे बाज देश है, और बेवहज ही देश के बीस जांबाजों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी।
