हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग ने साहसिक खेलों को लेकर तैयार की नीति
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा साहसिक खेलों को लेकर तैयार की गई नई नियमावली से प्रदेश के पैराग्लाइडिंग पाॅयलट और अन्य साहसिक खेलों से.जुड़े युवा असंतुश्ट है और इन्होंने अपनी आपत्तियों को लेकर खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर से मनाली में मुलाकात की। हिमाचल पैराग्लाइडिंग एसोशिएशन के बैनर तले आयोजित इस बैठक में प्रदेश भर से आए प्रोफैशनल खिलाड़ियों ने भाग लिया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई इस बातचीत में.सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद भी जगी है।
वहीं मामले का पूरा विवरण देते हुए एसोशिएशन के उपाध्यक्ष विशाल जस्सल, महासचिव अतुल खजुरिया तथा.सचिव मनोज शर्मा ने बताया कि नई नियमावली में किए गए बदलाव से हिमाचल में साहसिक खेलों में काम करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि.जम्मू-कष्मीर और उत्तराखंड आदि स्थान अब खुले हैं तो लोग हिमाचल में क्यों आएंगे। हिमाचल में पर्यटकों को आकर्शित करने के लिए अन्य राज्यो के मुकाबले अतिरिक्त सुविधाएं देनी होंगी ताकि पर्यटन व्यवसाय में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिल सके तथा सरकार के राजस्व में भी इजाफा हो सके। उन्होंने बताया कि बिलासपुर चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व षिमला आदि स्थानों से नजदीक हैं वहां के लोग इस आनंद से वंचित हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि पैरा ग्लाइडिंग में एसआईवी कोर्स के लिए पौंग डैम का निर्धारण किया जा रहा है जोकि एक प्रकार से पूर्णतया अधिक खर्च व एक.कृत्रिम स्थान का निर्माण किया जाएगा। जिसका खर्चा बहुत अधिक है। वहां पर इस खेल के लिए प्रषिक्षण के लिए लिए पहले एक विंच का खरीदना जरूरी है व इससे प्रषिक्षण के लिए पहले पांच दिन का प्रषिक्षण लेना पड़ेगा फिर वह उड़ान भरने के लायक बन सकेगा। इससे उड़ान भरने के लिए पावर बोट का होना भी जरूरी है व सुरक्षा की दृश्टि से अन्य सुविधाओं का होना भी जरूरी है। इससे उड़ान भरने का खर्चा एक्पसर्ट के मुताबिक करीब 35 सौ रूपए प्रति व्यक्ति, प्रति उड़ान पड़ेगा जिससे इसका वित्तिय बोझ सरकार व प्रषिक्षुओं पर बहुत अधिक पड़ेगा जो कि एक बहुत ही मंहगा कार्य हो जाएगा। जबकि बिलासपुर में यही प्रषिक्षण का खर्चा पौंग डैम की तुलना में न के बराबर है।
बिलासपुर में बंदला से उड़ान भरने के लिए टैक्सी का खर्चा प्रति व्यक्ति, प्रति उड़ान सौ रूपए है व अगर सरकारी बस का प्रयोग करते हैं तो एक बार में उपर जाने का खर्चा महज बीस रूपए हैं। दिन में यहां सरकारी बस पहले चार चक्कर लगाती थी लेकिन कोरोना काल के दौरान सिर्फ एक आध चक्कर ही लग पाता है। इन उत्साही पाॅयलटों ने बताया कि बिलासपुर में सदर विधायक सुभाष ठाकुर ही कर कमलों से ही एशिया स्तर की प्रतियोगिता सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। बिलासपुर एक मात्र ऐसा स्थान हैं जहां पर नभ, स्थल और जल की खेलों का आयोजन एक समय में हो सकता है जबकि एसआईवी कोर्स के लिए पूरे देश में यह पहला स्थान है।
उन्होंने मांग की है कि इस एसआईवी कोर्स को करवाने के लिए बिलासपुर को अधिकृत करवाने के लिए बिलासपुर को अधिकृत करें जिससे पर्यटन के क्षेत्र में भी इस क्षेत्र को लाभ हो व यहां पर टैंडम फ्लाइट का कार्य भी बढ़ेगा, जिससे राज्य सरकार को आय होगी व एक नए स्थान का पर्यटन के क्षेत्र में बनने से राज्य सरकार का नाम होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राजपत्र में दिए गए रूलों को भी सभी एसोसिएशन के सीनियर पायलट को साथ लेकर नियमों का निर्माण किया जाए और टैंडम फ्लाइट के पायलट व एजेंसी की जो फीस निर्धारित करने का विचार है, उस पर एक बार फिर पुनः अवलोकन किया जाए व बिलासपुर में यह कार्य षुरू होने के स्तर पर है, जिसे एसोसिएशन अपने स्तर पर उसकी मार्केंटिंग व स्थान का निर्माण कर रही है, में फीस का निर्धारण नाम मात्र के लिए किया जाए। खेल मंत्री ने सभी पायलटों की बात को गौर से सुना और सकारात्मक हल निकालने का आश्वासन दिया।
इस बैठक में कुल्लु से रोषन लाल, पूर्ण चंद ठाकुर, शिव राम, बुद्धि राम, संजय ठाकुर, कमल ठाकुर, कांगड़ा से ज्योति ठाकुर, सुरेष ठाकुर, कमल चंद, प्रकाश चंद, संतोष शिमला से पवन कुमार नेगी, मंडी से निर्मल और संजय शामिल थे।
