स्थानीय लोगों ने पेश की एकता की मिसाल
मन मे यदि समाज सेवा का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी किसी के हौंसले को कम नही कर सकती है। ऐसा ही जज्बा लेकर चले मांजू-पलोग-राहु जन कल्याण समिति के सदस्यों ने लगभग तीन पंचायतों ( ग्राम पँचायत प्लानिया, पलोग व रोहांज- जलाना) के सैकड़ो ग्रामीणों को अर्की मुख्यालय तक पहुंचने के लिए जन सहयोग से लगभग दो किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण किसी भी सरकारी संस्था के सहयोग के बिना स्वयं ही कर दिया। ज्ञात रहे कि बथालगं-जावड़ा-पलोग सम्पर्क सड़क मार्ग जो कि अर्की मुख्यालय से जुड़ने के लिए लगभग पांच वर्षों से लंबित था, वह सम्पर्क सड़क मार्ग अब जन कल्याण समिति के सभी सदस्यों व पलोग पँचायत के पंचायत प्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से अर्की मुख्यालय के लिए जाने वाले रौड़ी-मांजू-अर्की सड़क मार्ग से जुड़ गया है।
ज्ञात रहे कि शिमला-मंडी राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित गांव बथालगं से पलोग के लिए वाया जावड़ा ग्राम होते हुए लगभग आठ किलोमीटर सड़क बनी थी। इस सम्पर्क सड़क का निर्माण कार्य अगस्त 2001 में शुरू हुआ था तथा वर्ष 2007 में इस सड़क मार्ग पर बस सेवा भी आरम्भ हो गई थी। एवम यह सड़क लोक निर्माण विभाग द्वारा पलोग गांव तक बनाई गई थी। वर्ष 2015 में ग्रामीणों ने लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर राहु गांव से होते हुए इस सड़क को रौड़ी- मांजू - अर्की सड़क मार्ग से जोड़ने की कोशिश भी की परंतु कुछ लोगों की निजी भूमि इस सम्पर्क सड़क मार्ग में आने के चलते आम सहमति न होने के कारण यह सड़क रौड़ी-मांजू -अर्की सड़क से जुड़ नही पाई और इस सम्पर्क सड़क का कार्य अधर में लटक गया जिसके चलते लगभग ग्यारह गांवों के सैंकड़ो ग्रामीणों को अर्की मुख्यालय तक पहुंचने के लिये पलोग से वाया बथालगं होते हुए लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी। इस कारण ग्रामीणों को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ रही थी।
हालांकि समय समय पर बहुत से बुद्धिजीवियों ने इस सड़क को जोड़ने के लिये भरसक प्रयास भी किये पर हर बार मायूसी ही हाथ लग रही थी। अंत मे मांजू-पलोग-राहु जन कल्याण समिति के सभी सदस्यों ने मिलकर इस इस सम्पर्क सड़क निर्माण कार्य को पूरा करने बारे में मुहिम छेड़ी। इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाने के लिए समिति के उपाध्यक्ष मेहरचंद कौशल ने व्यक्तिगत तौर पर उन लोगों के घर घर जाकर मनाने की जिम्मेवारी ली जिनकी जमीन इस सड़क मार्ग में आ रही थी। अंत मे उनके अथक प्रयासों व समिति के सभी सदस्यों के सामूहिक प्रयासों के चलते ग्रामीणों ने इस सड़क मार्ग को रौड़ी- मांजू अर्की सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी। अब इस सम्पर्क सड़क का निर्माण होने से धरैल, पन्जैहली, जावड़ा, दोची, घ्याना, घ्यान्टू, घाट, चरिंडी, शीलडु, बागी व पलोग गांव के लोग लाभान्वित होंगे। समिति द्वारा इस सड़क मार्ग को बनाने के लिए समाजसेवी गोपाल सिंह कौशल को अध्यक्ष बना कर एक उप समिति का गठन किया गया है।
कौशल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सड़क को बनाने के लिए समिति ने किसी भी सरकारी संस्था से कोई भी सहायता नहीं ली है। समिति के द्वारा स्थानीय गांवों के लोगों से ही धनराशि एकत्रित की गई और उस धनराशि से इस सड़क का निर्माण किया गया है। इस सड़क के बनने से जहां लोगों को अब अर्की मुख्यालय तक पहुंचने में अब समय भी कम लगेगा वहीं अब लोगों को कुनिहार बाजार तक पहुंचने के लिए भी वाया मांजू दूरी काफी कम हो जाएगी।
उपाध्यक्ष मेहर चंद कौशल व स्थानीय लोगो का कहना है कि इस सम्पर्क सड़क मार्ग के निर्माण से अर्की मुख्यालय के लिये आवागमन हेतु लगभग 20 किलोमीटर व शिमला मुख्यालय के लिए 13 किलोमीटर की दूरी कम हुई है। इस सड़क मार्ग के निर्माण से लोगो मे उत्सव का माहौल है।
पलोग पँचायत के प्रधान योगेश चौहान ने समिति के सभी सदस्यों एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सामूहिक प्रयासों से बनाई गई इस सड़क पर खुशी प्रकट करते हुए सभी का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि पलोग पंचायत के लगभग नौ गांवों के ग्रामीणों को मांजू स्थित पँचायत मुख्यालय तक पहुंचने के लिए वाया खनलग होते हुए लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। अब इस सड़क के बनने से ये दूरी आधे से भी कम हो जाएगी।
जन कल्याण समिति के प्रधान जिया लाल शर्मा व महासचिव कृष्ण चंद शर्मा का कहना है की वे शीघ्र ही सम्पर्क सड़क निर्माण हेतु भूमि देने वाले लोगों से एनओसी लेकर सरकार व स्थानीय प्रशासन को सौंपेंगे ताकि लोकनिर्माण विभाग इस सड़क मार्ग का रखरखाव करे।
