हंसराज की मौत को लेकर पूर्व विधायक ने दिया धरना
कूह लेंगड़ी- बल्ह चुरानी के स्वर्गीय हंसराज के परिजनों सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के चंगर सेक्टर स्थित आवास पर उन्हें कोई डेढ़ माह पूर्व स्वारघाट में कोरोना वायरस के चलते क्वारन्टाईन के दौरान हुई हंस राज की संदिग्ध मौत पर जिला प्रशासन द्वारा दोषी डाक्टर व अन्यों के विरुद्ध कार्रवाई न किए जाने बारे पूरा विवरण देते हुए उनसे न्याय दिलवाने का आग्रह किया। बाद में बंबर ठाकुर के नेतृत्व में सभी ग्रामीणों ने उनके आवास से लेकर जिलाधीश कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली और जिलाधीश कार्यालय के बाहर जोरदार नारों के बीच धरना दिया।
बंबर ठाकुर ने धरने पर बैठे ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि 10 मई को जब हंस राज को जिला प्रशासन द्वारा स्वारघाट में क्वारन्टाईन किया गया था तो वहाँ हंसराज के बाथ रूम में गिर कर घायल होने की बात कही गई ,जो वहाँ बेहोश पड़ा रहा, जहां अधिकारियों और डाक्टरों को सूचना मिलने के बावजूद भी उसे कोई आधे घंटे बाद दूर से ही देखा गया। बाद में डाक्टर ने उसे मिर्गी का दौरा पड़ने की बात कही और उसे बिना किसी जांच अथवा हाथ लगाए ही डाक्टर चला गया। उन्होने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अपने सिर पर हाथ रख कर हंस राज भारी पीड़ा से कहराता और तड़पता रहा, किन्तु उसकी किसी ने कोई सुध नहीं ली। उनका कहना था कि हंस राज के सिर पर गहरा जख्म था, जिससे खून बह रहा था, जिसे भी बंद तक करने को जिला प्रशासन के संबन्धित अधिकारियों व डाक्टरों ने कोई कदम नहीं उठाए। बंबर ठाकुर ने कहा कि यदि हंस राज की प्राकृतिक कारणों से मौत हुई होती तो उसे सरकार की नीति के अनुसार आज तक कोई भी आर्थिक अनुदान क्यूँ नहीं दिया गया है।
हंस राज के भाई देशराज ने बताया कि हंसराज बरमाना से मध्य प्रदेश के द्तिया के लिए सवारी लेकर गया था और वहाँ से लौट कर घर आ रहा था जब उसे स्वारघाट में कवारन्टाईन किया गया था और वह किसी भी तरह से किसी भी रोग से ग्रस्त नहीं था। देश राज ने कहा कि उनके भारी आग्रहों के बाद डाक्टर शाम 4 बजे देखने के लिए आए और उन्होने बिना किसी उपचार के उसे बिलासपुर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। उन्होने कहा कि जब उसे बिलासपुर अस्पताल में लाया जाना था तो सुरक्षा कर्मियों और एंबुलेंस कर्मियों ने उसे हाथ तक नहीं लगाया और उन्हें ही एम्बुलेंसे में डालने के आदेश दिए गए। यहाँ शाम को 6 बजे एस एच ओ के साथ चार पुलिस कर्मी आए और उन्होने हंस राज को खड़े होने को कहा लेकिन व खड़ा नहीं हो पाया था और उनके द्वारा उसे घसीटते हुए कमरे से बाहर ले जाया गया। उन्होने कहा कि उनके द्वारा बार-बार मांगने के बावजूद आज तक उन्हें हंस राज की मृत्य का प्रमाण पत्र तक नहीं दिया गया है।
हाई कोर्ट के जज से करवाई जाए निष्पक्ष जांच
बंबर ठाकुर ने सरकार से मांग की है कि हंस राज की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए हाई कोर्ट के जज से निष्पक्ष जांच करवाने के आदेश दिए जाएँ।
बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी
बाद में धरना स्थल पर एस डी एम रामेश्वर ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि हंस राज की बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी जिस पर बंबर ठाकुर ने कहा कि आज तक प्रशासन ने सरकार के आदेशों के अनुसार परिजनों को 4 लाख की राशि से क्यूँ वंचित रखा है और क्वारन्टाईन के दौरान मौत होने पर आर्थिक सहायता क्यूँ नहीं दी जा रही है। बाद में बंबर ठाकुर के नेतृत्व में इस संदर्भ में ए डी एम विनय धीमान से एक प्रतिनिधि मण्डल मिला, जिन्होने इस संदर्भ में उपायुक्त से बातचीत करके उपयुक्त कार्यवाही करने की बात कहीं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उचित कार्यवाही नहीं की जाती धरना निरंतर जारी रहेगा।
