वरिष्ठ सर्जन डा. राजेश आहलुवालिया अपनी सरकारी सेवाओं से निवृत
चिकित्सा और चिकित्सक का नाम तभी सार्थक होता है जब वह मरीज की भगवान रूपी कल्पना की कसौटियों पर खरा उतरता है। चकित्सक को धरती पर भगवान की संज्ञा दी गई है और यही भगवान हमारे प्राणों की रक्षा भी करते हैं, किंतु ईमानदारी, कत्वर्यनिष्ठा और लगन से काम करने वाले ऐसे भगवान लंबे समय तक याद रखे जाते हैं। अपने अनुभव और दक्षता से बड़े अस्पतालों में होने वाले जटिल आपरेशनों को बड़ी सहजता से हिमाचल प्रदेश जैसी छोटे से राज्य में सफलता पूर्वक करने में माहिर वरिष्ठ सर्जन डा. राजेश आहलुवालिया अपनी सरकारी सेवाओं से निवृत हो गए। बिलासपुर जिला में पिछले चार सालों से अपनी सेवाएं दे रहे डा. आहलुवालिया के पास एमएस यानि चिकित्सा अधीक्षक का पदभार भी था, जिसमें अस्पताल की व्यवस्था संभालना उनका मुख्य कार्य है। बावजूद इसके वे मरीजों के स्वास्थ्य की जांच करना तथा असाध्य आपरेशनों को सफलता की कसौटी पर चढ़ाना इनकी दिनचर्या में शुमार रहा। यही कारण है कि डा. आहलुवालिया अपने स्टाफ के साथ-साथ जनता में लोकप्रिय रहे।
बात अगर प्लास्टिक सर्जरी, कैंसर व अन्य ऑपरेशन की करें तो निजी अस्पताल व अन्य राज्यों में इन ऑपरेशन के लिए लाखों रूपये में खर्च होते है। जिन असाध्य आपरेशनों के लिए मरीजों को यहां से रैफर किया जाता रहा है, उन्हें बिलासपुर में ही आपरेट कर ठीक करने का गौरव भी डाॅ. आहलुवालिया को हासिल है। इनकी ख्याति प्रदेश में इतनी है कि लोग बाहरी जिलों से भी बिलासपुर आते हैं। कार्य के लिए प्रति उनका अनुभव व लग्न अन्य चिकित्सकों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत है।
बता दें कि जब से देश में लाॅकडाउन शुरू हुआ था तो उससे पहले से ही डाॅ. आहलूवालिया अपने घर में नहीं गए थे। ताकि वह लोगों को इस कोरोना काल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान कर सकें। वहीं, खास बात यह है कि चिकित्सा अधीक्षक के पद होने के नाते यह सारा दस्तावेज कार्य सहित मरीजों की जांच अपने कार्यालय करते हैं। यहां पर अगर कोई भी मरीज आ जाता है तो वह उनको निराश नहीं भेजते है। जबकि सभी मरीजों को यहां पर देखने के साथ अपने कार्यालय की दस्तावेजी औपचारिकताओं को भी बखूबी पूर्ण करते हैं। डाॅ. राजेश आहलूवालिया को अपने कार्यकाल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने हेतू कई प्रमाण ईनाम भी प्राप्त कर चुके है।
चिकित्सा क्षेत्र में डाॅ. राजेश का सफरनामा
चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजेश आहलूवालिया ने 1992-95 शिमला आईजीएमसी से अपनी पीजी कंप्लीट की है। 1995-99 जिला अस्पताल हमीरपुर में अपनी सेवाएं दी है। उसके बाद 1999-2016 तक इन्होंने पालमपुर अस्पताल में 17 साल अपनी सेवाएं दी है। तत्पश्चात बिलासपुर अस्पताल में पहली बार चिकित्सा अधीक्षक का पद भरे जाने के पर इनका तबादला पालमपुर से बिलासपुर जिला में हुआ था। उसके बाद डाॅ. आहलूवालिया ने 30 मई 2016 को बिलासपुर में चिकित्सा अधीक्षक का पदभार संभाला था।
सैंकडों ऑपरेशन कर मरीजों को ठीक कर चुके हैं डाॅ. आहलूवालिया
चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजेश आहलूवालिया बिलासपुर कार्यकाल में सैंकड़ों ऑपरेशन कर चुके है। बिलासपुर में आने वाले नए सर्जन भी इनके अनुभव से काफी कुछ सीखते हैं। इनके द्वारा बिना चीरफाड़ से ऑपरेशन, पीते का ऑपरेशन, कैंसर व अन्य दर्जनों गंभीर बीमारियों के इन्होने सफल ऑपरेशन किया है। आधुनिक तकनीक से होने वाले आपरेशनों को भी डाॅ. आहलुवालिया ने सहजता से किया है।
