एबीवीपी की मांग के चलते हिमाचल में चार निजी विश्व विद्यालय के कोर्स हुए रद्द
शिक्षा के व्यापारीकरण को लेकर विद्यार्थी परिषद शुरू से ही आंदोलनरत रही है और विद्यार्थी परिषद के आंदोलन का परिणाम है जहां निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग द्वारा चार निजी विश्वविद्यालय के कोर्स रद्द होने का परिषद स्वागत करती है। कुछ लंबे समय से इन विश्वविद्यालय की प्रदेश के अंदर तानाशाही के चलते निजी विश्वविद्यालय ना नियामक आयोग को मान रहे थे और ना ही प्रदेश सरकार को विश्वविद्यालय के अंदर यूजीसी के नियमों के साथ-साथ अपने विधानसभा एक्ट की भी अवहेलना हो रही थी।
राहुल राणा ने कहा कि जहां मानव भारती के अंदर फर्जी डिग्रियां पकड़ी गई और गिरफ्तारी हुई जिस से प्रदेश शर्मसार हुआ।
साथी इंडस यूनिवर्सिटी में अपने चार रेगुलर कर्मचारियों को रेगुलर डिग्री दे दी थी और उनकी स्कॉलरशिप भी ली थी साथ में 13 मार्च 2020 को इंडस यूनिवर्सिटी ने प्रेस नोट जारी करके कहा कि उन्होंने यह डिग्रियां कॉरेस्पोंडेंस डिस्टेंस एजुकेशन और ऑनलाइन क्लासेज के रूप में दी हैं। बाद में 18 मार्च को नियामक आयोग ने इंडस विवि को फटकार लगाई और साफ किया कि इस प्रकार की अनुमति हिमाचल प्रदेश में किसी भी विश्वविद्यालय को नहीं है। बाद में 13 अप्रैल को इंडस विश्वविद्यालय अपने बयान से मुकर गई और नया प्रेस नोट जारी करके कहा कि अपने रेगुलर चार कर्मचारियों को वे 4 से 6 घंटे छूट देते थे ताकि वह अपनी पढ़ाई कर सकें इस प्रकार का प्रावधान ना यूजीसी के अंदर है न ही भारत के किसी एक्ट के अंदर जो सरासर गलत है। साथ ही इंडस बीवी के अंदर डिस्टेंस मॉड में पीएचडी भी चलाई गई और कुलपति ने भी एक समय पर तीन-तीन डिग्रियां हासिल की है जहां अरनी विश्वविद्यालय के अंदर कर्मचारियों को कई महीने से सैलरी नहीं दी है और मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी को छोड़कर भाग गई।
इन सब बातों से स्पष्ट होता है कि इन निजी विश्वविद्यालय के अंदर शिक्षा का व्यापारीकरण जोरों शोरों से चल रहा था और तीन विश्वविद्यालयों लूटपाट का अड्डा बना हुआ है। विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि इंडस विवि प्रेस के माध्यम से बयान जारी कर रही है कि वह 4 से 6 घंटे छूट देकर अपने रेगुलर कर्मचारियों से पढ़ाई करवाते थे जिसे वह स्टूडेंट कम एम्पलाई केटेगरी कह रहे हैं जो कि सरासर गलत है नियामक आयोग से मांग करती है की इस प्रकार के बेतुके बयानों पर रोक लगाया जाए और स्पष्ट किया जाए इस प्रकार के कोर्स चलाने की अनुमति पूरे भारत में और हिमाचल में किसी को नहीं है वरना रेगुलर डिग्री की क्रेडिबिलिटी खतरे में होगी।
विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि तीन निजी विश्वविद्यालयों के ऊपर और नकेल कसी जाए तथा इन निजी विश्वविद्यालय की पूर्ण रूप से इंस्पेक्शन के बाद ही इन्हें कोई कोर्स दिए जाएं ताकि छात्रों का भविष्य खराब ना हो साथ ही इन निजी विश्वविद्यालय पर जल्दी से जल्दी एडमिनिस्ट्रेटर लगाया जाए ताकि वर्तमान में बढ़ रहे छात्र अपनी पढ़ाई ठीक ढंग से कर सकें। साथ ही मांग करती है कि स्टूडेंट कम एम्पलाई कैटेगरी के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को जल्दी से जल्दी रोका जाए और जीने ऐसे अवैध डिग्रियां दी हैं उन्हें रद्द करके वि.वि को जुर्माना लगाया जाए।
