राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ ने केंद्र व राज्य सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों और मजदूरों की मांगे पूरी न होने पर पूरे देश में 24 से 30 जुलाई तक "सरकार जगाओ सप्ताह" मनाया जाएगा।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला सोलन के जिला अध्यक्ष जे के ठाकुर महासचिव राम लाल ठाकुर ने यह जानकारी देते हुए कहा कि जिला सोलन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ और भारतीय मजदूर संघ मिलकर 27 जुलाई को जिला स्तर पर मुख्यमंत्री को सोलन में उपायुक्त के माध्य्म से ज्ञापन सौपेंगे व इसी दिन खंड स्तर पर भी मुख्यमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन उपमंडल अधिकारी के माध्यम से भिजवाया जाएगा।
जिला अध्यक्ष जे के ठाकुर ने कहा कि 24 जुलाई से 30 जुलाई तक किए जाने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को कर्मचारी महासंघ व भारतीय मजदूर संघ के आला नेता रूपरेखा को अंतिम रूप दे रहा है। उन्होंने कहा कि इसका फैसला राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 21 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में लिया गया जिसमे राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिपिन डोगरा, महासचिब मंगत राम नेगी, हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एन आर ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर व महासचिब गोपाल झिलटा व राज्य पदाधिकारीयों व समस्त प्रदेश जिला अध्यक्षो ने बैठक में तय किया गया कि महासंघ राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय कर्मचारी संबंधित समस्याओं को भी राज्य सरकार से उठाएगा।
इन नेताओं ने आगे कहा कि हिमाचल सरकार पिछले अढ़ाई वर्षाे में कर्मचारी मांगों को लेकर उदासीन रही है। माना कि सरकार कोविड महामारी से निपट रही है और इसमें प्रदेश के कर्मचारियों ने सरकार का भरपूर सहयोग किया ओर आगे भी करेंगे पर कर्मचारियो कि पीड़ा को भी सरकार को समझना चाहिए आश्वाशन के बावजूद कर्मचारियो के साथ सयुंक्त सलाहकार समिति की बैठक अभी तक न करने से कर्मचारिओं में रोष है। तीसरे वर्ष की दहलीज पर पहुँची प्रदेश सरकार की तरफ से कोई ऐसी सार्थक पहल नहीं हुई है, जिसमें कर्मचारियों को राहत मिल सके। कांग्रेस सरकार ने तो पिछले 5 सालों में कर्मचारियों को पूरी तरह से ठगा, लेकिन अब भाजपा भी उसी राह पर चलना चाह रही है कर्मचारिओं के साथ जेसीसी बैठक न करना न ही कर्मचारी हित में है और न ही सरकार के हित मे कांग्रेस ने मुश्किल से एक बैठक जेसीसी की बुलाई थी, वह भी बेनतीजा रही।
भाजपा सरकार भी इसी तर्ज पर कर्मचारियों को बेवकूफ समझने की भारी भूल कर रही है। महासंघ के नेताओं ने कहा कि जिन मुख्य मांगों पर नाराजगी है वह वेतन आयोग की रिपोर्ट को पंजाब सरकार का इंतज़ार किए बगैर अविलंब लागू करना है। इसके अलावा पुरानी पेंशन की बहाली, फ्रीज डीए को बहाल करना, जेसीसी की बैठक जल्दी बुलाकर पहले से सरकार को सौपे गए 56 सूत्री मांग पर चर्चा और समाधान करना है।
जबकि कर्मचारी और श्रमिक विरोधी नीतियों को बर्खास्त करना, अंधाधुन्ध किए जा रहे निजीकरण और ठेका प्रणाली को समाप्त करना, प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को सुलझाना, रद्द श्रम कानूनों को बहाल करना, कर्मचारी-श्रमिकों की वेतन विसंगतियां दूर करने तथा उन्हें पूरा वेतन देना आदि शामिल है।
भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष नंद लाल शर्मा व प्रदेश सचिव देवी दत्त तंवर ने संयुक्त ब्यान में बताया कि 24 जुलाई को आशा, आंगनवाड़ी, मिड डे मील वर्कर, 108 एंबुलेंस सेवा कर्मी, 25 जुलाई को बिजली बोर्ड और परिवहन मांगों के संदर्भ में ज्ञापन देंगे। जबकि 26 जुलाई को सभी प्राइवेट उद्योगों के कामगार, 27 जुलाई को सरकारी कर्मचारी, 28 जुलाई को बैंक और बीमा कर्मी, 29 जुलाई को असंगठित क्षेत्रों के श्रमिक तथा 30 जुलाई को निजी क्षेत्र के कर्मचारी और मजदूर इन मांगों बारे सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे।
