आशा वर्करस कार्यकर्ता संघ ने उठाई आशा वर्करस को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग
आशा वर्करस कार्यकर्ता संघ हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों द्वारा भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में डिप्टी सीईओ बी.बी.एन.डी.ए. के माध्यम से एक ज्ञापन देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भेजा, जिसमें आशा वर्करस को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग रखी गई। आशा वर्करस संघ ब्लॉक नालागढ़ की प्रधान मंजीत कौर व सचिव दया ठाकुर ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पूरे देश में लगभग 10 लाख 25 हजार आशा कार्यकर्ता है। जो ग्रामीण एंव शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य संबधी जानकारी, टीकाकरण, स्वच्छता, जच्चा-बच्चा देखभाल, संस्थागत प्रसव आदि के अलावा राज्य सरकार इनसे कई अन्य कार्य भी संचालित करवाती है। इसके बदले इन्हें कोई मानधन अथवा कोई वेतन नहीं दिया जाता। बल्कि अल्प प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी नहीं किया जाता है। समाज का कुपोषण दूर करते-2 परिवार सहित आशा कार्यकर्ता कुपोषण का शिकार हो रही है जबकि यह कार्य सभी सरकारी कर्मचारी करते हैं जिन्हें सरकार वेतन के साथ-साथ अन्य सभी सुविधाएं भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि गत 11 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री द्वारा बीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए आशा कार्यकर्ताओं से वार्तालाप किया गया था और प्रोत्साहन राशि को दुगना करने को एलान भी किया गया था लेकिन मंत्रालय से मात्र एक हजार की बढ़ौतरी की गई।
वही भामसं के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मेला राम चंदेल व कार्यकारिणी सदस्य राजु भारद्वाज का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और इनका न्युनतम वेतन 18 हजार प्रति माह किया जाए। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं को समाजिक पैंशन योजना के अंर्तगत ई.पी.एफ. एवं ई.एस.आई. योजना भी लागू हो व सेवानृवत होने पर 5 लाख रूपया दिया जाए। इसके अलाव कोविड 19 अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की मृत्यु अथवा अपाहित होने पर दुर्घटना बीमा योजना के अंर्तगत 50 लाख की अनुगृह राशि प्रदान की जाए। इसके अलाव उम्र का बंधन हटाते योग्यताधारी आशा कार्यकर्ताओं को ए.एन.एम. के पद पर पदोन्नत किया जाए।
इस मौके पर सचिव दया ठाकुर, संतोष, सुनीता, अनीता, गुरचरणी, ममता, संदीप, बलविंद्र कोैर, सीमा, रानी व अन्य आशा वर्कर कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
