कोरोना ने फीके किए राखी से गुग्गा नवमी तक के त्यौहार
हर वर्ष की भांति ही क्षेत्र में रक्षाबंधन से लेकर गुग्गा नवमी तक गुग्गा जाहर की छड़ी अपने स्थल से लोगो के घरों में एक रात का वास करने निकल पड़ती है परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी की वजह से रक्षाबंधन के दिन गुग्गा की छड़ी का सिर्फ हार सिंगार व पूजा ही की गयी व अपने स्थान पर ही रखा गया।
फांजी गांवों के गुग्गा छड़ी के पुजारी दीपराम शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन से लेकर गुग्गा नवमी तक छड़ी लोगो के घर द्वार जाकर अपना आशीर्वाद लोगो को देती थी कई लोगो की मनोकामनाये पूर्ण होने पर लोग गुग्गा छड़ी को अपने घर मे रात भर ठहराते हैं जिसे गुगे का डेरा भी कहा जाता है। रात भर गुग्गे के गीत गाकर दूसरे दिन नंगे पाव ही दूसरे घर की ओर प्रस्थान किया जाता है व इस दौरान जहां भी प्रस्थान करने जाना होता है सभी गुग्गा कथा वाचक नंगे पाव ही चलते है।
स्थानीय निवासी परसराम, मुकेश, सुरेंद्र, बबलू, सुभाष आदि का कहना है कि जब से उन लोगो ने होश संभाला है तब से इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते आ रहे है व इन नो दिनों तक न कोई दिहाड़ी लगाते है, न ही कोई भी वाचक कार्यालय जाता है तथा घर भी गुग्गा नवमी को ही जाते है परन्तु इस बार कोरोना महामारी के चलते सभी डेरे जात्रा स्थगित कर दी है और गुग्गा मंडली लोगो की इस महामारी में मंगल कामना करते है।
