प्रदेश में डिप्रेशन की वजह से लॉकडाउन में 121 आत्महत्याएं दर्ज
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री व श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम लाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर गम्भीर सवाल उठाए हैं।
राम लाल ठाकुर ने कहा 23 मार्च, 2020 को कोविड -19 जैसी महामारी को लेकर प्रदेश में लॉकडाउन लगा दिया था, लेकिन प्रदेश सरकार को बताना चाहिए कि इस दौरान अन्य बीमारियों से हिमाचल प्रदेश कितनी मौतें 8 जून, 2020 तक हुई है, जिनको अस्पतालों में उचित इलाज नहीं मिल पाया है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार को वह आंकड़े भी लोंगो के सामने रखने चाहिए जिनका रूटीन इलाज चल रहा था और कोरोना लॉक डाउन के चलते अन्य बीमारियों के इलाज से वंचित होकर अब वह इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। राम लाल ठाकुर ने उन परिवारों के प्रति भी गहरी संवेदना प्रकट की जिनकी मृत्यु किसी अन्य बीमारी से लॉक डाउन के समय मे उचित इलाज नहीं मिल पाने से हुई है, और प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन लोंगो की डिटेल्स को भी सार्वजनिक किया जाए जिनकी मृत्यु लॉक डाउन के समय मे हुई है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि लॉक डाउन के दौरान प्रदेश में आत्महत्या के मामलों में भारी बढ़ौतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में डिप्रेशन की वजह से इस दौरान 121 आत्महत्याएं दर्ज की जा चुकी है और जो कि गम्भीर चिंता का विषय है। राम लाल ठाकुर ने इस तरह से आत्महत्यायों का होना या तो इन युवाओं का नौकरी से हाथ धोना या पैसो का अभाव आना या अकेला पन महसूस करना कारण है और ज्यादातर लोग आत्महत्या करने वाले युवा ही थे।
राम लाल ठाकुर ने कहा जब समस्या इतनी गंभीर तो इस बारे में प्रदेश सरकार का उदासीनता पूर्वक रवैया कई प्रश्नों को जन्म देता है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि आत्महत्या करने के जो सरकारी आंकड़े आये है वह भयाभह करने वाले हैं, उन्होंने कहा कि सरकारी आकड़ो के अनुसार प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई महीने में ही 121 हिमाचलियों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा पिछले एक साल में दर्ज हुए आत्महत्या के मामलों का करीब आधा है। इन आंकड़ों में गौर करने वाली बात यह है कि जनवरी से मई महीने तक कुल दर्ज हुए 237 मामलों में अकेले 121 सिर्फ अप्रैल और मई महीने के हैं।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि यह सारी की सारी परिस्तितियां तब पैदा हुई जब बिना किसी योजना के एकदम से लॉक डाउन जैसा कदम उठाया गया। सिर्फ कोरोना के डर के कारण देश और प्रदेश की सरकारों ने राजनैतिक आधार पर लॉक डाउन का फैसला ले लिया न तो प्रदेश सरकार ने इस मसले पर विपक्ष से सलाह मशवरा किया और न ही चिकिसको और वैज्ञानिकों से कोरोना के कारण लॉक डाउन से विपरीत पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के लिए योजना बनाई और न ही उस बारे में कोई अध्ययन किया गया।
