डॉक्टरों की कमी से 13 पंचायतों का केंद्र बिंदु अस्पताल बेहाल
जिला परिषद वार्ड दाड़लाघाट की 13 पंचायतों का केंद्र बिंदु है। दाड़लाघाट और इस वार्ड के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं हेतु तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं और दाड़लाघाट में एक ईएसआई अस्पताल है, लेकिन इन स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों के इलाज के लिए खास सुविधाएं नहीं है। जबकि दाड़लाघाट इन पंचायतों का केन्द्र बिन्दु है और यहाँ पर ईएसआई में केवल एक ही डॉक्टर है। वह चाहे दिन को सेवा दे या रात्रि को मरीजों को देखे। जबकि इस ईएसआई में दिन में मरीजों की ओपीडी भी सैंकड़ों में रहती है जिस कारण एक डॉक्टर को दिन रात ड्यूटी देने में भारी परेशानियां झेलनी पड़ती है। यदि रात को कोई बीमार हो जाए तो उसे अर्की या शिमला जाना पड़ता है, जिस कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और आजकल तो कोविड-19 के चलते ज्यादा ही परेशानी झेलनी पड़ती है। यहाँ पर जो 108 सेवा की एम्बुलेंस थी वह भी कहीँ दूसरी जगह मंगवा ली गई है जिस कारण रात्रि में आने वाले मरीजों की मुश्किलें और भी बढ़ जाती है।
गौर रहे कि इस जिला परिषद वार्ड के तहत दो बड़े सीमेंट उद्योग भी है जिस कारण यहाँ दिन रात कोई न कोई दुर्घटना घटती रहती है। लेकिन ईएसआई दाड़लाघाट में एक ही डॉक्टर होने के कारण लोगों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। इन उद्योगों में अपने अपने अस्पताल भी है लेकिन यहाँ रात्रि को आने वाले मरीजों के लिए कोई भी सुविधा नहीं है, जबकि इन उद्योगों के उच्च अधिकारी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की दुहाई देते नहीं थकते। हकीकत में स्थानीय लोगों को कोई भी स्वाथ्य सुविधा नहीं मिल रही है।
दाड़लाघाट के ओमप्रकाश महाजन ने बताया की गत दिनों मेरी भाभी के पेट में दर्द लगी तो उन्होंने कम्पनी के अस्तपाल में ले गए, लेकिन उन्हें वहाँ कोई भी मेडिकल सुविधा नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जब वह ईएसआई दाड़लाघाट गए तो वहां पर तैनात डॉक्टर ने उन्हें उपचार दिया। उन्होंने बताया कि यहाँ पर केवल एक ही डॉक्टर है, इसलिए ही वह पहले यहाँ नहीं आए थे। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में कम से कम 4 डॉक्टर होने चाहिए।
जिला परिषद वार्ड दाड़लाघाट के लोगों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है की दाड़लाघाट में बने नए भवन का शीघ्र उद्धघाटन किया जाए व इस अस्पताल में कम से कम पांच डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, ताकि स्थानीय लोगों को इलाज की अच्छी सुविधा मिल सके।
29 पंचायतों के साथ लगते इस क्षेत्र में करीब 30 हजार से अधिक की आबादी:-
29 पंचायतों का केन्द्र बिंदु व दो सीमेंट के बड़े उद्योग की आबादी वाले इस क्षेत्र में पीड़ितों को इलाज के अभाव में इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे समय के साथ उनका धन तो बर्बाद होता ही है। अक्सर वक्त पर इलाज न मिल पाने से जान भी चली जाती है। 29 पंचायतों के साथ लगते इस क्षेत्र में करीब 30 हजार से अधिक की आबादी के लिए ईएसआई अस्तपाल है। इसमे तैनात एक मात्र चिकित्सक के कंधों पर लंबे समय से इतनी बड़ी आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था हांकी जा रही है। अगर वास्तव में चल रहे जो ईएसआई अस्पताल दाड़लाघाट के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन यहां 150-200 के बीच ओपीडी रहती है। इनमें से 50 फीसदी से कम मरीजों का ही यहां इलाज हो पाता है। इससे ज्यादा लोगों को इलाज के लिए अर्की, शिमला या सोलन जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों की मानें तो दाड़लाघाट में सीएचसी की बिल्डिंग काफी समय पहले ही बनकर तैयार हो गई, लेकिन संसाधन और स्टाफ अब तक नहीं जुटाया जा सका है। लिहाजा लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। 30 बेड वाले इस स्वास्थ्य केंद्र से जिला परिषद वार्ड दाड़ला और धुंधन की 29 पंचायतों की लगभग 30 हजार से अधिक की आबादी के अलावा बिलासपुर सदर और शिमला ग्रामीण की साथ लगती कुछ पंचायतों के लोग भी लाभान्वित होंगे।
जब इस बारे ईएसआई के निदेशक शिमला डॉ एनके लट्ठ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस बारे सरकार को लिख दिया गया है, यहां जल्द ही डॉक्टर की तैनाती कर दी जाएगी।
