पांच महीनों बाद बिमला को मिली छत
पिछले पांच महीनों से घर से बेघर बिमला देवी के घर के ताले बैंक ने खोल दिए है। रविवार को टीम बड़का भाऊ संजय शर्मा ने बिमला देवी के घर पर पंहुच कर उसके परिवार का दुखड़ा सुना और परिवार की आर्थिक मदद की। बिमला ने हाउस लोन को चुकता करने के लिए रिश्तेदारों से कर्ज लिया है। दुकान के लिए मुद्रा लोन का नो लाख 75 हजार ही अब बकाया है। बिमला देवी ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि उसके साथ हुई धोखाधड़ी की वजह से उसके साथ साथ उसके भाई कमलेश कुमार का परिवार भी सड़क पर आ गया है। उसने एक व्यक्ति से पांच लाख का कर्ज लिया था।जिसकी एवज में उस व्यक्ति ने भाई कमलेश के ट्रक का टोकन सिक्युरिटी के तौर पर रखा था। सारे पैसे व्याज सहित वापिस लौटने के बावजूद टोकन को हड़प लिया गया।दाड़लाघाट में कार्यरत बड़े ट्रांसपोर्टर छोटे और सीमांत ट्रांसपोर्टर्स के साथ जमीदारों जैसा व्यवहार कर उनकी गाड़ियों को हथिया लेते हैं। गोरखधन्धा पिछले 10 -15 सालों से सभी ट्रक ऑपरेटर सोसिटीयों मे चल रहा है। क्षेत्र में कार्यरत ट्रक कोऑपरेटिव सोसाइटीयों में सदस्यता सहित टोकन की खरीद फरोख्त की जाती है,जबकि कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के अंर्तगत सदस्यता को बेचने का कोई प्रावधान ही नहीं है उसने बताया कि उसके साथ हुई धोखाधड़ी के साक्ष्यों की सीडी दौरान तफ्तीश दाड़लाघाट थाने में दी थी जिसकी जांच होना बेहद महत्वपूर्ण है जिसकी जांच नही की गई है। टोकन हड़पने वाला व्यक्ति कहता है कि उसने टोकन 13 लाख में खरीदा है जो सरासर झूठ है दोनों के बैंक खातों की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। संजय शर्मा ने कहा कि दाड़लाघाट में सरकार के समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी गयी है जिससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज उनके हाथ लग गए है वो जल्द मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से मिलेगें।
