अब तक डोगरा हौजरी ने तैयार की 200 पीपीई कीटें और लगभग 1 लाख मास्क
जिला बिलासपुर में स्थापित छोटे-बड़े उद्योग जिला के आर्थिक विकास में अहम भूमिका का निर्वहन करते हैं। कोविड-19 कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के संक्रमण के कारण कफर्यू/लाॅकडाऊन के चलते जिला में कोविड-19 के दिशा निर्देशों में दी गई सभी हिदायतों की अनुपालना करते हुए औद्योगिक ईकाइयों को पुन चलाने की छूट प्रदान करने से राहत मिली है। इससे उद्यमियों के चेहरे से धीरे-धीरे निराशा के बादल छंटने लगे हैं और उनका उत्साह बढ़ने लगा है।
जिला के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित डोगरा हौजरी फैक्ट्री के ऋषभ डोगरा ने बताया कि जिला में कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा उन्हें फेस मास्क और पीपीई किट बनाने की अनुमति मिली थी। उन्होंने बताया कि डाक्टरों के सहयोग से 200 पीपीई किटें तैयार की गई जिन्हें की क्षेत्रीय अस्पताल में प्रयोग में लाया जा रहा है। इसके अतरिक्त अब तक 1 लाख से भी अधिक फेस मास्क तैयार किए जा चुके हैं जिन्हें कोठीपुरा में बन रहे एम्स और अन्य सामाजिक संस्थाओं को 6 रूपए प्रति मास्क की दर से दिया गया। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा अन्य जरूरतमंद लोगों को फेस मास्क निःशुल्क भी वितरित किए जा रहे है।
उन्होंने बताया कि हौजरी को चलाने के दौरान सरकार द्वारा जारी सभी दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। हौजरी द्वारा सभी कामगारों को नियमित वेतन दिया जा रहा है और केवल 33 प्रतिशत स्टाफ को ही काम पर लगाया गया है और कामगारों को फेस मास्क और सैनीटाईजर उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके साथ ही हौजरी में कार्यस्थल पर सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। फैक्ट्री और पूरे प्रांगण को दिन में 3 बार सेनेटाईज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हौजरी में 15 वर्कर कार्यरत हैं जिसमें 11 महिलाएं और 4 पुरूष कार्य कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि 4 महिलाएं तो ऐसी हैं जो की सिलाई का काम जानती थी और लाॅकडाऊन/कर्फयू में बंद होने के दौरान बेरोजगार थी। उन्हें कहीं भी काम नहीं मिल रहा था। उन्हें भी इस दौरान हौजरी से जोड़ा गया और रोजगार प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि केवल 30 प्रतिशत स्टाफ को ही कार्य करने के लिए बुलाया गया है और कार्य करने के लिए उचित दूरी पर मशीने लगाई गई है, जहां हर टेबल पर सेनेटाईजर उपलब्ध करवाया गया है और फेस मास्क दिए गए है। उन्होंने बताया कि कार्यरत स्टाफ के लिए दोपहर का भोजन करने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। उन्हें दो समूहों में बांटा गया है जिसमें बैठने हेतु उचित सामाजिक दूरी निर्धारित की गई है। स्वच्छ वातावरण को देखकर महिलाएं भी नियमित रूप से कार्य करने के लिए आ रही है और बंद होने के कारण हौजरी में जो कार्य लम्बित पड़ा था उसे पूरा करने में जुटी हुई हैं।
