घरों व दुकानों के टैक्स बढ़ने पर शहर वासियों में रोष व्याप्त
नगर पंचायत अर्की द्वारा घरों व दुकानों का टैक्स बढ़ाने पर सभी शहरवासियों में रोष व्याप्त है। नगर पंचायत के इस तानाशाही व अराजकतापूर्ण टैक्स बढ़ोतरी के चलते "अर्की विकास मंच" व स्थानीय लोगो द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में नगर पंचायत द्वारा 300 प्रतिशत से 800 प्रतिशत किराया बढ़ाने पर नगर पंचायत की कार्यवाही पर आगामी रणनीति बनाने पर चर्चा की गई।
विकास मंच अर्की के अध्यक्ष राकेश भारद्वाज ने बताया कि नगर पंचायत द्वारा सभी स्थानीय लोगो को 300 प्रतिशत से 800 प्रतिशत तक किराए बढ़ाकर जमा करवाने के नोटिस जारी किये गए है जो कि सरेआम एक तानाशाहीपूर्ण निर्देश है। भारद्वाज ने कहा कि पंचायत के इस निर्णय से जिस व्यक्ति ने गत वर्ष 3000 रुपये का टैक्स जमा करवाया था उस व्यक्ति को इस वर्ष 11000 रुपये टैक्स जमा करवाने के नोटिस थमा दिए गए है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में लगभग 50 नगर पंचायतें है। किसी भी नगर पंचायत में इतना टैक्स नही है।
भारद्वाज ने कहा कि यह मापदण्ड नगर निगम का अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत अर्की ने मकानों की गलत पैमाइश के साथ ही खाली पड़ी जगहों की पैमाइश कर किराये के नोटिस थमा दिए है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नगर पंचायत द्वारा अंधाधुंध किराए की बढ़ौतरी लूट खसोट इसलिए कि गई है ताकि नगर पंचायत के अधिकारियों कर्मचारियो को वेतन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल मे लोगो को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन नगर पंचायत अर्की का 300 प्रतिशत से 800 प्रतिशत किराया बढ़ाना घृणास्पद कार्य है तथा अर्की विकास मंच व सभी निवासी किराया वृद्धि का जमकर विरोध करते है। साथ ही वह नगर पंचायत से मांग करते है कि जो वर्ष 18,19,20 पुराने किराए लिए गए थे। उसी तर्ज पर किराए के बिल दिए जाएं। एवम वर्ष 21 व 22 के लिए लोगो के साथ बैठ कर किराए बढ़ोतरी की चर्चा कर सहमति बनाए। यदि नगर पंचायत बढे हुए किराए के आदेशों को वापिस नही लेती है तो नगर पंचायत के सभी नागरिक व विकास मंच अर्की न्यायालय की शरण लेकर किराए पर स्टे लेने को बाध्य होगा।
