बाबा भलकू की जयंती पर भलकू समिति चायल ने दी श्रद्धांजलि
हर साल की तरह इस साल भी चायल में बाबा भलकू राम की जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हालांकि कोरोना के चलते इस बार कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया गया, पर भलकू समिति चायल ने ये दिन उत्साह से मनाया। समिति के अध्यक्ष बी आर मेहता और उपाध्यक्ष रूप सिंह ने बाबा को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। समिति अध्यक्ष ने कहा की बाबा भलकू के समाज को दिए योगदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
कौन थे बाबा भलकू
कहते हैं कि जब अंग्रेज इंजीनियर बड़ोग को सुरंग का दूसरा मुहाना नहीं मिला, तो उसने खुदकुशी कर ली थी। रेलवे में श्रमिक बाबा भलकू ने ही अपनी लाठी से इस पहाड़ी के नीचे प्रस्तावित सुरंग का दूसरा मुहाना निकाला। इसकी लंबाई एक किलोमीटर 143 मीटर और 61 सेंटीमीटर है।
बाबा भलखू जिला सोलन के पर्यटन क्षेत्र चायल के पास स्थित झाजा गांव के रहने वाले थे। आज भी उनका पुराना मकान इस गांव में स्थित है। पर्यटक दूर दूर से इस घर को देखने आते हैं। अनपढ़ होने के बावजूद भी कालका शिमला रेलवे लाइन व सुरंग निर्माण में उनका अहम योगदान रहा।
