कुनिहार : खंडित प्रतिमाओं का पूजन नहीं करना चाहिए-श्री शशांक कृष्ण कौशल
रंजीत सिंह। कुनिहार
ग्राम पंचायत पट्टा बरावरी के प्राचीन श्री दुर्गा माता मंदिर में समस्त ग्रामवासियों के सौजन्य से इस वर्ष "श्रीमद्देवी भागवत कथा" का आयोजन किया गया है, जिसमें पधारे श्रद्धेय श्री शशांक कृष्ण कौशलजी ने कथा के तीसरे दिवस विशाल जनसमूह को संबाेधित करते हुए बताया कि देवी के वर्ष में चार नवरात्रे आते हैं, जिसमें 2 प्रगट व 2 गुप्त हैं। शरद ऋतु व वसंत ऋतु देवी की प्रिय ऋतु हैं। इस काल में देवी की उपासना से अवश्य मनइच्छित फल की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 2 से 10 वर्ष की ही कन्या के पूजन का विधान है। एक वर्ष की कन्या का पूजन इसलिए नहीं किया जाता। क्योंकि "परमज्ञा तु भोगानां गन्धादीनां च बालिका" उसे रस और गंध का अनुभव नहीं होता और 10 वर्ष तक कि बालिका कन्या कहलाती है।
देवी की उपासना मूर्ति, यंत्र अथवा शालिग्राम में करनी चाहिए पर घर में और गांव में खंडित ग्रन्थ और मूर्ति आदि की पूजा कदापि नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से पुण्य की हानि होती है। उन्होंने सीताजी के काली रूप धारण करने की अद्भुत लीला सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। उनके साथ पधारी संगीत मंडली ने "मैं तेरे बिन रह नहीं सकदा मां" "उच्चेयां पहाड़ां लाया डेरा" और "मेरे मन में बसी हो बसी रहना" जैसे भजन गाकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर कथा समिति के प्रधान श्रीराम कौशल, डीडी कश्यप, सुखराम, राम चंद शर्मा, अजीत, भूपेंद्र व अन्य मौजूद रहे।
