कुनिहार : मन-इंद्रियों को वश में करके परमात्मा को प्राप्त करें-नागेश कपिल
रंजीत सिंह । कुनिहार
कुनिहार के प्राचीन शिव तांडव गुफा में शिवरात्रि के उपलक्ष्य पर शिव महापुराण कथा का आयोजन शिव तांडव गुफा समिति व शंभु परिवार के द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कथा के चतुर्थ दिवस में कथावाचक नागेश कपिल ने अपनी मधुर एवं अमृत मई वाणी से प्रवचन रूपी अमृत की ज्ञान गंगा प्रवाहित करते हुए सभी से आह्वान किया की एक साधक को चाहिए वह अपने को शरीर, इंद्रिय, मन व बुद्धि का स्वामी मानकर उनके वश में न हो, बल्कि इंद्रियों को पतन कारक तथा अनावश्यक उनके मनमानी विषयों में जाने से रोक करके उसमें रहे हुए राग द्वेष से उन्हें छुड़ा करके मन को वश में करें और बुद्धि को एक मात्र परमात्मा निष्ठ निश्चय आत्मा बना करके परमात्मा में स्थिर कर दें। ऐसा हो जाने पर तो मन इंद्रियों के द्वारा होने वाले सभी कार्य सहज ही भगवत कार्य बन ही जाएंगे, परंतु इसके पहले साधन काल में भी इस आदर्श के अनुसार साधना करने से चित को प्रसन्नता एवं निर्मलता प्राप्त हो जाती है।
उन्होंने अपने कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि संसार में कोई भी काम संपन्न करने के लिए मनुष्य को परमात्मा का सहारा और सहयोग चाहिए। नर और नारायण के संयुक्त प्रयासों से ही संसार का कारोबार चलता है और विकास होता है। मनुष्य और भगवान के बीच काम के बंटवारे का यही नियम है कि जिस काम की योग्यता मनुष्य में है, उसे मनुष्य को स्वयं ही करना चाहिए या किसी अन्य मनुष्य से करवाना चाहिए। भगवान को उसी काम के लिए कष्ट देना चाहिए, जो हम खुद ना कर सकें, जो हमारी सामर्थ्य से बाहर हो, मनुष्य जब अपनी भूमिका पूरी तरह निभा देता है, तो भगवान से यही उसकी मदद करता है। परमात्मा के रूप में सदा काम में लगे रहते हैं। यद्यपि इन तीनों लोकों में कुछ भी कर्तव्य नहीं है। वहीं, समिति के अध्यक्ष रामरतन तनवर ने बताया कि कथा के उपरांत हर रोज नारायण सेवा के रूप में भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।
