दाड़लाघाट : संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रदेश में शिक्षण संपर्क और प्रचार की स्तत श्रृंखला शुरू
संस्कृत भारती के प्रांत प्रचाररक्षक पन्ना लाल ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि संस्कृत भारती हिमाचल प्रदेश द्वारा संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु पूरे प्रदेश में शिक्षण संपर्क और प्रचार की स्तत श्रृंखला शुरू की है। संस्कृत भारती का काम हिमाचल प्रदेश में सन 1999 से आरंभ हुआ था उस समय दो-तीन लोगों ने इस काम की शुरुआत की थी उसमें संस्कृत भारती के कार्य का स्वरूप संस्कृत संभाषण के आंदोलन के रूप में था। आज संस्कृत भारती का काम ना केवल संभाषण आंदोलन के रूप में रह गया है अपितु अब इसके कार्य का स्वरूप बहुत व्यापक हो गया है। आज संस्कृत में कई शोध कार्य भी किए जा रहे हैं हिमाचल में हजारों की संख्या में प्रशिक्षित कार्यकर्ता अपनी
योग्यता एवं रूचि के अनुसार संस्कृत के प्रचार प्रसार में योगदान दे रहे हैं। विगत सवा साल से पूरे देश ही नहीं अपितु विश्व एक विकट समस्या से जूझ रहा है ऐसे में सभी कार्य प्रभावित हुए हैं लेकिन फिर भी आपदा को अवसर मानते हुए कुछ लोग जीवन के अमूल्य क्षणों का संचय करके राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में संस्कृत भारती भी निरंतर अपना कार्य विगत 1 वर्ष से कर रही है संस्कृत भारती के कार्यकर्ता संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए दिन-रात समाज के प्रत्येक क्षेत्र में काम कर रहे हैं । लोग न केवल संस्कृत बोले शास्त्रों वेदों पुराणों का अध्ययन कर पाए इसके लिए हर दिन ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण प्रशिक्षण प्रवचन कार्यशाला एवं चर्चा गोष्ठियों का आयोजन मई माह से निरंतर किया जा रहा है। शिक्षण विभाग संपर्क विभाग प्रचार विभाग पत्राचार विभाग केंद्र पुरोहितान संस्कृत विद्यालयिन विभाग इन सब विभागों के दो दो दिन के अभ्यास वर्ग पूर्ण हो चुके हैं संस्कृत भारती के बाद केंद्र महिला प्रकोष्ठ की ओर से इसी माह मधुर मिलन का आयोजन भी किया गया जिसमें संस्कृत बोलने वाली 50 गृहणियों ने सोत्साह भाग लिया। शिक्षण विभाग द्वारा प्रांत के दायित्ववान कार्यकर्ताओं के लिए 6 दिन का "ऑनलाइन माध्यम से कैसे पढ़ाएं" इस हेतु प्रशिक्षण वर्ग चलाया गया। प्रचार विभाग की योजना अनुसार साप्ताहिक वार्ता का हर सप्ताह संस्कृत भारती के यूट्यूब चैनल से हर रविवार को प्रसारण किया जा रहा है। जुलाई के इसी सप्ताह से प्रतिदिन सुभाषित प्रसारित करने की योजना भी बनी है। संपर्क विभाग द्वारा ऐसे समाजिको का चयन कर जिनकी संस्कृत सीखने में रुचि है उनका पंजीकरण करने के बाद 10 दिनों का अभ्यास वर्ग कराया गया जिस का समापन 2 जुलाई 2021 को हुआ। संस्कृत भारती के प्रांत संपर्क प्रमुख आचार्य ओमकार ने प्रचार विभाग को जानकारी देते हुए बताया कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले 102 लोगों ने इस वर्ग हेतु अपना निशुल्क पंजीकरण करवाया उसके बाद तीन भागों में चले। ये वर्ग आज संपन्न हुए। प्रत्येक अभ्यास वर्ग में 34 - 34 लोग नियमित अध्ययनरत थे। जिनका संचालन सुंदर नगर से डॉक्टर ज्ञानेश्वर, कांगड़ा से हीरा सिंह और सोलन से डॉक्टर गिरिराज कर रहे थे इस वर्ग की यह विशेषता रही कि इसमें संस्कृत क्षेत्र से बाहर के लोग उपस्थित थे। इसमें कोई संस्कृत का छात्र या अध्यापक नहीं थे। अब संगठन की योजना है कि लोगों की रुचि को ध्यान में रखते हुए बहुत ही जल्द गीता शिक्षण केंद्र की शुरुआत भी की जाएगी।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक मंडी मधुसूदन ने अपने वक्तव्य में संस्कृत भारती की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्य लोकोपकारक है इनका आयोजन निरंतर होना चाहिए जिससे कि लोगों को अपनी संस्कृति सभ्यता एवं परंपराओं का ज्ञान हो सके। उन्होंने संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता एवं व्यावहारिकता का उल्लेख किया मुख्य वक्ता के रूप में संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख डॉ नंदकुमार ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि संस्कृत भारती के प्रयासों से ज्ञान गंगा की धारा अबाध गति से निरंतर चलने वाली है इसके लिए सामाजिको का संपर्क करके उन्हें संस्कृत का ज्ञान देना जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत भारती के प्रांत उपाध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा ने भी अपने विचार से सब को सरोबार कर दिया। डॉ सुदेश गौतम ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित गणमान्य का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रकार अंत में शांति मंत्र के साथ वर्ग का समापन किया गया।
