कुनिहार : माता यशोदा के श्राप से भक्त सुदामा को सहनी पड़ी गरीबी-आचार्य रामचंद शास्त्री
रंजीत ठाकुर । कुनिहार
विकास खंड सोलन के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पट्टाबरावरी के खडक़ी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया है। कथा के अंतिम दिन आचार्य रामचंद शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं व व्यक्ति के जीवन में गुरू का महत्व क्या है के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बता दें कि इस श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन खड़की निवासी बालकृष्ण पुत्र शिवराम ठाकुर के सौजन्य से किया जा रहा है। कथा के अंतिम रोज आचार्य रामचंद शास्त्री ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रोताओं को श्रवण करवाया। आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण तथा रूकमणी विवाह का उल्लेख करते हुए कहा कि रूकमणी का विवाह उसका भाई शिशुपाल से करवाना चाहता था। शादी की तिथि भी तय हो चुकी थी और नगर में निमंत्रण कार्ड भी बांटने शुरू हो चुके थे। रूकमणी ने श्रीकृष्ण को पत्र लिखा कि मैं आपसे विवाह करना चाहती हूं और मेरा भाई मेरी शादी शिशुपाल से करवाना चाहता है। आप मुझे यहां से ले जाएं अन्यथा मैं जहर खाकर मर जाउऊंगी। भगवान श्रीकृष्ण ने सोच विचार किया और रूकमणी को रथ पर बिठाकर ले गए।
इसके बाद श्रीकृष्ण ने रूकमणी से विवाह रचा लिया। आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की कई लीलाओं का व्याख्यान करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण की 16108 रानियां थी,जिसमें रूकमणी को अनेकों रूपों में जाना जाता है। इसके बाद आचार्य ने श्रीकृष्ण व भक्त सुदामा मिलन का प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगत सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के साथी थे और माता यशोदा के एक श्राप की वजह से भक्त सुदामा को अत्यंत गरीबी का सामना करना पड़ा। जब श्रीकृष्ण को सूचना मिली कि उनके बचपन का मित्र सुदामा उन्हें मिलने के लिए मुख्य द्वार पर पहुंचा हैं तो भगवान श्रीकृष्ण खुशी से झूम उठे और नंगे पांव दौड़ते हुए मुख्यद्वार पर पहुंचे। यहां से वह भक्त सुदामा को अपने महल में ले गए,जहां पर उनकी रानी रूकमणी ने उनके पैर धुलाएं और उनके पांव से कई कांटे भी निकालें। उन्हाेंने कहा कि जब भक्त सुदामा को श्रीकृष्ण नगरी में रहते हुए कई दिन बीत गए तो उन्होंने घर वापसी की जिज्ञासा जाहिर की।
आचार्य ने आगे कहा कि श्रीकृष्ण ने विश्वकर्मा को बुलाकर कहा कि जैसी नगरी वृंदावन की है। वैसी ही नगरी का निर्माण भक्त सुदामा की नगरी में किया जाए। जब सुदामा वापस अपने घर पहुंचा तो वह अपने नगर की सूरत को बदला हुआ देखकर दंग रहे गए। वह अपनी पत्नी सुशीला तक को पहचान नहीं पाएं। सुशीला साड़ी व गहनों से लदी हुई थी। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का चमत्कार देखकर सुदामा भक्त आश्चयचकित रहे क्षेत्रवासियों में भंडारे का भोग वितरित किया गया। इस मौके पर आयोजक कनक देवी, बालकृष्ण, जयचंद, उत्तम चंद कश्यप, राम परिहार, प्रेमचंद कश्यप, केशवा राम व राजकुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। यह जानकारी पैंशनर्ज एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन जिला सोलन के मीडिया प्रभारी डीडी कश्यप ने प्रेस को जारी बयान में दी है।
