दिल्ली के कर्तव्य पथ पर दिखी हिमाचल की संस्कृति की झलक, छह साल बाद आई नजर
भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। वहीं इस बार गणतंत्र दिवस परेड के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने देश के 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया था, जिसमें हिमाचल प्रदेश की झांकी भी शामिल थी। वहीं, सोमवार को हिमाचल प्रदेश की झांकी ने यह दिखाया कि हिमाचल प्रदेश न सिर्फ देवी-देवताओं की भूमि है, बल्कि निडर देशभक्ति की भी भूमि है और इसने अपने बहादुर बेटों और बेटियों को श्रद्धांजलि दी। यह इस विचार पर आधारित थी कि यह राज्य, जिसे 'देवभूमि' या देवताओं की भूमि के रूप में पूजा जाता है, उतना ही 'वीर भूमि', यानी बहादुरों की भूमि भी है।
हिमाचल प्रदेश ने देश को 1,203 वीरता पुरस्कार विजेता दिए हैं, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और 10 महावीर चक्र शामिल हैं, जो भारत के सैन्य इतिहास में वीरता का एक असाधारण रिकॉर्ड है। गणतंत्र दिवस की झांकी ने राज्य की इस अदम्य भावना को श्रद्धांजलि दी। इसने हिमाचल के उन बेटों और बेटियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने पहाड़ों की सहनशक्ति से प्रेरित होकर, बहादुरी और बलिदान के साथ देश की पुकार का जवाब दिया है। झांकी में यह दिखाया गया कि रक्षा बलों में भारत के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में, हिमाचल की विरासत सिर्फ अतीत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके लोगों के चरित्र में गहराई से बसी हुई है। इसका मकसद पवित्रता और वीरता को मिलाना था, जिसमें राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ उसकी गौरवशाली सैन्य परंपरा को भी दिखाया गया।
