अब पंचायत चुनाव लड़ सकेंगी आशा वर्कर, हाईकोर्ट ने सरकार के आदेशों पर लगाई रोक
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा ने सात याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम राहत दी और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट विक्रांत ठाकुर ने कोर्ट में दलील दी कि आशा वर्कर पार्ट टाइम कर्मचारी हैं और वे किसी सिविल पोस्ट पर नियुक्त नहीं हैं। उनकी सेवाएं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ली जाती हैं तथा उन्हें वेतन नहीं बल्कि मानदेय दिया जाता है। कोर्ट ने इन दलीलों को सही मानते हुए आशा वर्करों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में 3758 पंचायतों के चुनाव होने हैं। इसके लिए 7 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। चुनाव प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद पदों के लिए होंगे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य की करीब 20 हजार आशा वर्कर भी चुनावी मैदान में उतर सकेंगी। राज्य सरकार ने सरकारी खजाने से मानदेय मिलने का हवाला देते हुए इनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी।
