हिमाचल प्रदेश को अतिरिक्त बजट दें केंद्र सरकार: रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सचिवालय में मीडिया को संबोधित करते हुए आगामी केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक सीमावर्ती एवं पर्वतीय राज्य है और यहां की विशेष भौगोलिक व वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार आगामी बजट में राज्य के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान करें। रोहित ठाकुर ने केंद्र से मांग उठाते हुए कहा कि प्रदेश में भारी प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त योजनाओं के पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि जारी की जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में किए गए सराहनीय कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए इन विभागों को और अधिक बजट उपलब्ध करवाया जाए। साथ ही, राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से पर्यटन और बागवानी क्षेत्रों के लिए नई योजनाएँ शुरू कर बजट में विशेष प्रावधान किया जाए। रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए सड़क, रेल और हवाई संपर्क को और मजबूत करना समय की मांग है, इसके लिए केंद्र सरकार कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि स्वीकृत करें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश बाग़वानी और कृषि पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनावों के दौरान सेब को स्पेशल कैटेगरी में शामिल करने का वादा किया था, लेकिन आज स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। केंद्र सरकार की नीतियाँ लगातार सेब बागवानों के हितों के खिलाफ जा रही हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले न्यूज़ीलैंड के साथ FTA (Free Trade Agreement) के तहत सेब पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया गया और अब केंद्र सरकार यूरोपियन देशों के साथ नए समझौते के माध्यम से सेब पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने जा रही है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि एक ओर भाजपा सरकार विदेशी सेब को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश सहित सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी होती थी, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने 50 प्रतिशत हिस्से के बजट को समाप्त कर दिया, जिससे बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
