हिमाचल: थलोट भूस्खलन का स्थायी समाधान, कीरतपुर-मनाली हाईवे के लिए ₹294 करोड़ मंजूर
कीरतपुर-मनाली फोरलेन के पंडोह-कुल्लू सेक्शन के तहत थलोट क्षेत्र में लगातार हो रही भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार ने 294.10 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि स्वीकृत की है। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम के जरिए साझा की।
इस महत्वपूर्ण निर्णय से हजारों स्थानीय लोगों, पर्यटकों और दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। थलोट क्षेत्र लंबे समय से भूस्खलन के कारण संवेदनशील बना हुआ है। विशेषकर बरसात के मौसम में यहां बार-बार मलबा गिरने से सड़क बंद हो जाती है, जिससे यातायात घंटों बाधित रहता है और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पिछले वर्ष आई प्राकृतिक आपदा के बाद इस मार्ग की स्थिति और अधिक खराब हो गई थी, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
स्वीकृत राशि के तहत भूस्खलन संभावित ढलानों का वैज्ञानिक ढंग से सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। परियोजना में आधुनिक रिटेनिंग वॉल, कंक्रीट स्ट्रेंथनिंग, रॉक बोल्टिंग, जियोटेक्निकल ट्रीटमेंट और उन्नत ड्रेनेज सिस्टम विकसित किए जाएंगे, ताकि वर्षा के दौरान पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके और ढलानों पर दबाव कम हो। विशेषज्ञों की देखरेख में ये कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, जिससे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सके। यह मार्ग पर्यटन और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुल्लू-मनाली, लाहौल-स्पीति और लेह की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यही मुख्य संपर्क मार्ग है। सड़क की मजबूती और सुरक्षा बढ़ने से न केवल यातायात सुचारु रहेगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों को भी नया बल मिलेगा।
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस स्वीकृति पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है। 294.10 करोड़ रुपये की यह राशि थलोट क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगी और लोगों को सुरक्षित एवं बेहतर यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द ही कार्य प्रारंभ कर निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
