प्रधानाचार्य के पदोन्नति कोटे का अनुपात 95:5 करने की मांग
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने सरकार से प्रधानाचार्य के पदोन्नति कोटे का अनुपात 95:5 करने की मांग की है। स्कूल प्रवक्ता संघ का कहना है की प्रदेश के स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद खाली होने के कारण स्कूलों में विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक वित्तीय तथा पढ़ाई से संबंधित समस्याएं पैदा होती है। प्रधानाचार्य के पदों के खाली होने के कारण प्रधानाचार्य के कार्य को वरिष्ठ प्रवक्ताओं द्वारा पूरा करना पड़ता है, जिससे उनका अपना काम प्रभावित हो जाता है। संघ ने आरोप लगाया है की पिछले एक वर्ष से प्रधानाचार्य की पदोन्नति नहीं हो रही। ऐसे में कितने ही प्रवक्ता जो अपने सेवाकाल के अंतिम पड़ाव में हैं और अब बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में प्रधानाचार्य के 350 से ज्यादा पद रिक्त चल रहे है परन्तु इन पदों को नहीं भरा जा रहा। संघ का कहना है की पद्दोनति के साथ साथ पद्दोनति कोटा भी स्कूल प्रवक्ताओं के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है। स्कूल प्रवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि 1986 में बनाई गई नई शिक्षा नीति के तहत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई।
इनमें 60 प्रतिशत मुख्याध्यापक और 40 प्रतिशत प्रवक्ता शामिल किए गए। उस समय मात्र 236 प्रवक्ता काम कर रहे थे जबकि, मुख्याध्यापकों की संख्या 1459 रही। यह तय किया गया कि प्रवक्ताओं की संख्या में जैसे-जैसे इजाफा होगा, वैसे-वैसे प्रधानाचार्य पदों के लिए कोटे का पुन: निर्धारण संख्या के आधार पर किया जाता रहेगा। वर्ष 2007 में प्रवक्ताओं की संख्या 12,000 पहुंच गई और मुख्याध्यापकों की संख्या 1100 के लगभग थी परन्तु पदोन्नति का कोटा पुनः निर्धारित नहीं हो पाया। 2008 में बहुत लंबे संघर्ष और जद्दोजेहद के बाद पदोन्नति कोटा 50 : 50 किया गया, परन्तु कोटे का निर्धारण उस समय भी प्रवक्ताओ कि संख्या के आधार पर नहीं हो पाया। आज प्रदेश में प्रवक्ताओं की संख्या 18,500 हो गई है, जिसके चलते प्रवक्ता अब सरकार से इस कोटे को संख्या के आधार पर 95 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। प्रवक्ताओं का तर्क है कि प्रधानाचार्यों की पदोन्नति के लिए दो ही फीडिंग काडर हैं। इनमें स्कूली प्रवक्ता और उच्च विद्यालयों में कार्यरत मुख्याध्यापक शामिल हैं। इनका कहना है कि प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के लिए इन दोनों फीडिंग काडर की वास्तविक संख्या के आधार पर पदों का बंटवारा होना चाहिए। वर्तमान में प्रवक्ता 18,500 और मुख्याध्यापक मात्र 830 हैं जो तर्कसंगत और न्यायोचित नहीं है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अनुसार 23 नवंबर 2018 को पालमपुर में आयोजित प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्यस्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 10 प्रतिशत कोटा बढ़ाने की घोषणा की थी। लेकिन, घोषणा के तीन वर्ष बाद भी यह लागू नहीं हो पाई है, जो प्रवक्ता वर्ग के लिए बहुत बड़ा धोखा है। इनका आरोप है कि प्रदेश की नौकरशाही लगातार इसके बारे में भेदभाव कर रही है। संघ ने कहा कि प्रदेश सरकार पदोन्नति कोटा नहीं बढ़ाती है तो प्रवक्ता संघ आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगा। प्रवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष केसर सिंह ठाकुर, महासचिव संजीव ठाकुर, मुख्य प्रेस सचिव प्रेम शर्मा, शिमला जिला प्रवक्ता संघ अध्यक्ष अध्यक्ष अजय नेगी, सोलन जिला अध्यक्ष चंद्र देव ठाकुर, सिरमौर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, बिलासपुर के प्रधान नरेश ठाकुर, हमीरपुर के प्रधान अनिल कुमार, मंडी जिला अध्यक्ष राजेश सैणी, कांगड़ा जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन राणा, ऊना जिला अध्यक्ष संजीव पराशर, चंबा जिलाध्यक्ष दीप सिंह खन्ना, कुल्लू जिला अध्यक्ष नरेंद्र पाल, किनौर जिला अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि प्रधानाचार्य पदोन्नत की सूची अविलंब शीघ्र जारी की जाए। इसके अतिरिक्त संघ ने सरकार से वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग उठाई है।
