कुनिहार : तीसरे दिन की कथा में भगवान शिव के प्राकट्य रूप की व्याख्या
कुनिहार की प्रसिद्ध प्राचीन शिव तांडव गुफा में चल रही 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन ब्यास पंडित आचार्य नागेश कपिल ने कथा को आगे बढाते हुए भगवान शिव के प्राकट्य की व्याख्या की। शिवलिंग उत्पत्ति व शिवलिंग की पूजा अर्चना के बारे श्रोताओं को बताते हुए कहा कि शिव भगवान सभी देवों में सबसे भोले हैं तभी उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है, वह भाव के भूखे हैं। उनका थोड़ा गुणगान करने मात्र से वह खुश हो जाते हैं और अपने भगत को मनचाहा वरदान देते हैं। आचार्य ने कथा के दौरान गौरक्षा का उपदेश भी श्रोताओं को दिया। हर मनुष्य का फर्ज है कि वह गौरक्षा के लिए हर समय सजग व तत्पर रहे और गौवंश की रक्षा करे। इस अवसर पर गुफा विकास समिति के अध्यक्ष राम रतन तनवर, उपाध्यक्ष अमरीश ठाकुर, गुमान कंवर, लायक राम, हेमन्त, दलीप, दीपक, मनु, मनी झांझी, मुकेश, रवि सहित समिति व शम्भू परिवार के सभी सदस्य व सेंकड़ों श्रोता मौजूद रहे।
