कुनिहार : दिनभर बहनें भाइयों की कलाई पर सजा सकेंगी राखी
कुनिहार :इस बार रक्षाबंधन के पर्व पर भद्रा का दखल नहीं रहेगा। भोर में इसका प्रभाव समाप्त हो जाएगा। दिनभर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी सजा सकेंगी। खास बात यह है कि इस बार राखी का पर्व गज केसरी योग में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि करीब तीन दशक बाद ऐसा संयोग बना है। यह बहुत ही लाभकारी है। रक्षाबंधन का पर्व बहनों एवं भाइयों के प्रेम का प्रतीक है। इसमें मुहूर्त व योग बहुत ही मायने रखते हैं। रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा की अड़चनें, योग व ग्रहों के संयोग ठीक न होने से त्योहार का उत्साह फीका पड़ जाता है। इस बार राखी के पर्व पर ग्रहों व भद्रा की अड़चनें नहीं रहेंगी। भाई -बहन का पर्व रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा पर 22 अगस्त को मनाया जाएगा। भद्रा न होने से पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी।कुनिहार के मशहूर पं.कामेश्वर शर्मा ने बताया कि सामान्यत रक्षाबंधन का पर्व श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन के दिन सावन पूर्णिमा पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का शुभ संयोग बन रहा है। गुरु कुंभ राशि में वक्री हैं और इसके साथ चंद्रमा भी रहेगा। इन ग्रहों की वजह से गजकेसरी योग बन रहा है। रक्षाबंधन के दिन सूर्य, मंगल और बुध सिंह राशि में रहेंगे। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। इस राशि में उसका मित्र मंगल भी रहेगा। इस दिन शुक्र कन्या राशि में रहेंगे। ग्रहों के यह योग शुभ फल देने वाले हैं। पूर्णिमा तिथि 22 अगस्त रविवार को शाम 5.33 बजे तक रहेगी। उदया तिथि 22 अगस्त को होने से एक मत से रक्षाबंधन पर्व इस बार 22 अगस्त को ही मनाया जाएगा। 22 को भद्रा प्रात: 6.17 बजे तक रहेगी। इसके बाद भद्रा का दोष नहीं होने से प्रात:काल से लेकर पूर्णिमा तिथि के समापन तक दिनभर राखी बांधी जाएगी। इस प्रकार प्रात: 6.17 से शाम 5.33 बजे तक रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा सकेगा।
