कुनिहार : श्री दुर्गा माता मंदिर में सातवें दिन भी बरसा शब्दरूपी अमृत
रंजीत सिंह। कुनिहार
जिला सोलन की ग्राम पंचायत पट्टा बरावरी के प्राचीन श्री दुर्गा माता मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास शशांक कौशल ने उपस्थित जनसमूह को देवी की कथा में बताया कि दुर्गम नामक दैत्य के अत्याचार से जब सारे के सारे वेद और मंत्र लुप्त हो गए थे, तो यज्ञ नष्ट हो गए, यज्ञ के नष्ट होने से देवों को उनका भाग नहीं मिल पाता था, जिस कारण वर्षा आदि नहीं हो पाती थी, ऐसे समय में जब तीनों लोक में हाहाकार मचा, तो देवों ने भगवती जगदंबा की उपासना की भगवती एक दिव्य स्वरुप में प्रकट हुई, जिसमें देवी के हजारों नेत्र थे और उनकी आंखों से लगातार जल बहता रहा, जिससे देवी का यह स्वरूप शताक्षी कहलाया। देवी ने हाथ में अस्त्र-शस्त्र की जगह विविध प्रकार की साग सब्जियां पकड़ी हुई थी। जिस कारण देवी शाकंभरी कहलाए और अंत में देवी ने जब दुर्गम का वध किया, तो दुर्गम का वध करने से वह दुर्गा कहलाए।
उन्होंने देवी गीता के ऊपर चर्चा करते हुए बताया कि जिस प्रकार श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता कहलाया, उसी प्रकार भगवती जगदंबा ने हिमालय राज को उपदेश दिया, जो देवी गीता कहलाया, इसके अंदर देवी ने अपने स्वरूप पूजन और स्थान आदि का वर्णन करते हुए बताया है कि मैं ज्वालामुखी हिंगलाज मां त्रिपुर तुलजापुर करवीर आदि स्थानों में हमेशा रहती हूं और आसाम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या महा शक्ति पीठ है, जो मेरा सबसे प्रिय स्थान है। कथा मीडिया प्रभारी डीडी कश्यप ने बताया कि स्थानीय व दूर-दराज के क्षेत्रों से सैकड़ाें लोग कथा श्रवण करने आ रहे हैं। कथा के बाद सभी को भंडारे की व्यवस्था भी की जा रही है। 14 मार्च को पूर्णाहुति के साथ कथा को विराम दिया जाएगा।
