स्टांप पेपर पर लिखा तलाकनामा मान्य नहीं, कोर्ट की मंज़ूरी ज़रूरी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सिर्फ स्टांप पेपर पर आपसी सहमति से तैयार किया गया तलाकनामा विवाह को कानूनी रूप से खत्म नहीं करता। तलाक को वैध बनाने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत की मंजूरी जरूरी है।
कोर्ट ने साफ किया कि पति-पत्नी के बीच समझौता या स्टांप पेपर पर तैयार दस्तावेज अपने आप में तलाक की डिक्री का विकल्प नहीं हो सकता। यानी केवल यह लिख देना कि दोनों पक्ष अलग हो गए हैं, पर्याप्त नहीं है।
अदालत की इस टिप्पणी का सीधा मतलब है कि विवाह संबंध खत्म करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। निजी तौर पर तैयार किए गए दस्तावेज के आधार पर कोई व्यक्ति खुद को कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं मान सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में वैवाहिक स्थिति तय करने के लिए सक्षम अदालत की भूमिका अहम है। इसलिए पति-पत्नी को सिर्फ स्टांप पेपर या आपसी समझौते के भरोसे तलाक की कानूनी स्थिति मान लेने से बचना चाहिए।
