हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: 45.30 घंटे तक गरजा सदन, हंगामे और बहस के बीच कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है।
करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए।
सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया।
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान
सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया।
मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।
सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।
45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
