सियासी शतरंज में अब महिलाएं मोहरा होंगी और खिलाड़ी होंगे पुरुष!
- रोस्टर ने बदला कई वार्डों का गणित
- चाहवान पति अब पत्नियों को उतार सकते है मैदान में
सोलन। वार्ड नंबर 2, वार्ड नंबर 3, वार्ड नंबर 4, वार्ड नंबर 6, वार्ड नंबर 7, वार्ड नंबर 10, वार्ड नंबर 12, वार्ड नंबर 15 और वार्ड नंबर 16। सोलन नगर निगम के ये तमाम वार्ड ख़ास है क्यूंकि उक्त वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित है। आरक्षण रोस्टर के बाद इनमें से कई वार्डों का सियासी गणित बदल गया है। संभावित है कि कई वार्डों की सियासी शतरंज में अब महिलाएं मोहरा होंगी और खिलाड़ी होंगे पुरुष या ज्यादा स्पष्ट कहे तो पत्नियां चुनाव लड़ेगी और पति बिहाइंड दी स्क्रीन मोर्चा संभालेंगे। दरअसल, रोस्टर के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ही विचारधारा के कई चाह्वानो की स्तिथि एक सी बन चुकी है। कई नेता ऐसे है जो अब पत्नियों को राजनैतिक घमासान में उतारेंगे ताकि अपनी जमीन मजबूत कर सके।
पत्नियों के चुनावी घमासान में उतरने में कोई बुराई नहीं है यदि उक्त नेताओं की पत्नियां सच में राजनीति में सक्रीय हो और दमदार तरीके से जनता की आवाज उठा सके और शहर के विकास में योगदान दे सके। पर यदि उनका रिमोट पतियों के हाथ में रहा तो लोकतान्त्रिक व्यवस्था की इससे बड़ी हार नहीं हो सकती। हालाँकि कुछ नेताओं की पत्नियां पहले से राजनीति में है पर ऐसे अपवाद कम ही है। ऐसे में अब ये मतदाता तो तय करना होगा की वो किसे चुनता है। व्यवस्था ने तो महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने को कदम बढ़ा दिया है पर सही मायने में इसे अमलीजामा पहनाना मतदाता का काम है। उम्मीद है मतदाता प्रत्याशी की काबिलियत देखेगा न की उसके पति या अन्य किसी पुरुष रिश्तेदार की।
शहर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो महिलाएं पीछे नहीं है। कई महिलाएं ऐसी है जो लगातार चुनाव जीत कर अपने अपने वार्ड में कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं स्थानीय निकाय में दमदार तरीके से अपनी बात भी रखती है और जरुरत पड़ने पर पुरुषों को आईना भी दिखाती रही है। एकाध वार्ड तो ऐसे है जहाँ महिला प्रत्याशी इतनी मजबूत है की विरोधियों के लिए कैंडिडेट चुनना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। पर ऐसे अपवाद कम ही है।
उम्मीद है की इस चुनाव में नए चेहरे शहर की राजनीति में आएंगे। महिलाएं बढ़चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिचित करेंगी और मतदाता सिर्फ प्रत्याशी की योग्यता देखेगा।
