संस्थान बंद करने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा , सुक्खू और जयराम के बिच तीखी नोकझोक
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत मंगलवार को संस्थानों को बंद करने, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के साथ हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार आमने-सामने नजर आए। करीब आधे घंटे तक सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही।
भाजपा विधायकों ने सरकार से पिछले तीन वर्षों के दौरान बंद किए गए और नए खोले गए संस्थानों का विस्तृत ब्यौरा मांगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा और बिलासपुर के विधायक ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पूछा कि 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश में कितने संस्थान बंद, विलय या डिनोटिफाई किए गए हैं।
विधायकों ने संस्थानों का विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार विवरण भी मांगा। इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि बंद किए गए संस्थानों में से कितने संस्थान दोबारा शुरू किए गए और उन्हें दोबारा खोलने के पीछे क्या कारण रहे।
भाजपा विधायकों ने उन संस्थानों को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी, जिनके भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही जिन संस्थानों के भवन अभी तैयार नहीं हुए हैं, उनके निर्माण को लेकर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर भी जवाब मांगा गया।
इसी मुद्दे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करेगी। जहां संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां उन्हें खोला जाएगा और आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत आधारित संस्थान खोलने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने की घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई।
मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। संस्थानों को बंद करने का मामला एक बार फिर मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।
