Solan:- राष्ट्रपति चुनाव किन्ही पार्टियों या किसी व्यक्ति विशेष के बीच नही, बल्कि 2 विचारधाराओं के बीच है: श्रीनिवास बी वी
प्रस्तावित राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी ने सभी सांसदों, विधायकों से अपील करते हुए कहा कि एक तरफ NDA की प्रत्याशी द्रोपदी मुर्मू उस विचारधारा की उम्मीदवार है जो देश में लगातार लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक मूल्यों पर हमला कर रही है। चाहे काले कृषि कानूनों के माध्यम से किसानों को उद्योगपतियों का गुलाम बनाना हो, अग्निपथ के माध्यम से सेना को कमजोर करना हो, नफरत का माहौल बनाकर देश में हिंसा को बढ़ावा देना हो, छात्र विरोधी नीतियां लाकर छात्रों का भविष्य बर्बाद करना हो, चीन के लगातार हमलों पर भारत की चुप्पी हो, चुनी हुआ लोकतांत्रिक सरकारों को धन-बल और एजेंसियों के जरिये गिराना हो या फिर एजेंसियों और मीडिया को अपने नियंत्रण में करके लोकतंत्र की हत्या करना ही NDA की पिछले 8 सालों की पहचान है, जिसका चेहरा अब द्रोपदी मुर्मू उम्मीदवार के रूप में है। जाहिर है बीजेपी को ऐसे चेहरे की तलाश रायसीना में है, जो रबर स्टाम्प बनकर ऐसी योजनाओं पर अपनी मुहर लगाता रहे और बीजेपी, आरएसएस द्वारा जारी लोकतंत्र की हत्या पर अपनी मौन सहमति प्रदान करता रहे।
भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने कहा कि आठ सालों में न तो प्रधानमंत्री ने कोई प्रेस वार्ता की और न ही NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू ने कोई प्रेस वार्ता करके देश के लिए अपना रोडमैप जनता के सामने रखा। 130 करोड़ के देश में कोई नही जानता कि द्रोपदी मुर्मू इस देश के बारे में क्या सोचती है, उनके क्या विचार है। NDA उन्हें आदिवासी चेहरे के प्रतिनिधित्व के तौर पर आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रोजेक्ट करना चाहती है, लेकिन सवाल ये है कि पिछले 8 सालों में आदिवासियों के साथ जो अत्याचार हुआ उस पर द्रोपदी मुर्मू ने कभी कोई स्टैंड लिया किया? देश बेरोजगारी के गर्क में जा चुका है, महिलाएं सुरक्षित नही है इस पर उनके क्या विचार है ये कोई नही जानता।
भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने यह भी कहा कि ये भी हास्यास्पद है कि बीजेपी एक तरफ राष्ट्रपति पद के लिए आदिवासी उम्मीदवार का श्रेय ले रही और दूसरी तरफ वन अधिकार अधिनियम, 2006 को खत्म कर रही है। अगर जंगल ही नही बचेंगे तो आदिवासी कैसे बचेंगे, और उनके संरक्षण के लिए योजनाएं और कानून नही होंगे तो रायसीना में एक आदिवासी राष्ट्रपति को प्रतिनिधित्व देने का ढकोसला क्यों? ऐसा ही कुछ वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाते समय बीजेपी ने किया था और उन्हें दलितों का चेहरा बताया था, लेकिन आजाद भारत में दलितों के ऊपर सबसे ज्यादा अत्याचार पिछले 8 सालों में हुआ और राष्ट्रपति कोविंद ने प्रधानमंत्री को राजधर्म की सीख देने की जगह खामोश का रास्ता चुना। वही दूसरी तरफ सयुंक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा एक मजबूत दावेदार है, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया है, जो खुलकर देश के वर्तमान हालातों पर अपने विचार रखते आये है। जब सारी संवैधानिक संस्थाएं, एजेंसियां, मीडिया दम तोड़ चुकी हो तब रायसीना में किसी रबर स्टाम्प की नही बल्कि देश के विचारों को आवाज़ देने वाले मजबूत राष्ट्रपति की जरूरत है जो कि यशवंत सिन्हा है।
भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने कहा कि बीजेपी के सांसदों, विधायकों से भी मेरा निवेदन है, ये चुनाव किसी पार्टी का नही बल्कि देश का है। सीक्रेट वोटिंग के दौरान देश के अंतरात्मा की आवाज़ सुने और यशवंत सिन्हा को विजयी बनाये।
