स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर ग्रामीण सत्यप्रकाश ने उठाए सवाल
ग्राम पंचायतों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए जो नियम है उसमें स्पष्ट है कि ग्राम सभा अपने अधिकार वाले गांवों में उन स्थानों पर लाइटें लगाएगी जिन्हें सार्वजनिक स्थान के रूप में गिना जाता है लेकिन प्रधानों व पंचायत सदस्यों ने वोट की राजनीति के चलते यह मानक पूरी तरह से दर किनार किए है। यह बात प्रेस के नाम जारी बयान में गांव रोड़ी के ग्रामीण सत्यप्रकाश शर्मा ने कही है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के सभी वार्डों में पंचायत द्वारा 5-5 सोलर लाइट लगाई जा रहीं हैं। उसी कड़ी में वार्ड रौडी के दोनों वार्डों में भी यह लाइटें लगनी थी, लेकिन जहाँ पर लगनी चाहिए थी वहां पर न लगाकर अन्य स्थानों में लगा दी। उन्होंने बताया कि मेरा घर गांव से करीब 5 सौ मीटर दूर है। वहाँ तक पैदल चलना भी मुश्किल है और रात के अंधेरे में तो बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मैने इस बारे प्रधान व पंचायत सदस्य से आग्रह किया था कि मेरे घर की ओर जाने वाले रास्ते मे दो या तीन लाइटें लगा दें,लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी और वह लाइटें नीचे तक ही लगा दी, जबकि वहाँ पर पहले ही कम्पनी द्वारा लाइटें लगा रखी है। उन्होंने बताया कि मैने पंचायत प्रधान को लाइटें लगने के बाद भी कहा की मेरे रास्ते मे भी लाइटें लगा दो तो। उन्होंने कहा कि हमने तो लाइटें दे दी थी इस बारे पंचायत सदस्यों से पूछो। उन्होंने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि वो किसी अधिकारी को भेजकर यहाँ का मौका मुआयना करवाएं व इस रास्ते में भी लाइटें लगवाएं ताकि हमे जो परेशानी हो रही है उससे निजात मिल सके।
जब ग्राम पंचायत प्रधान सुरेंद्र शुक्ला से इस बारे जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि इस पंचायत में प्रत्येक वार्ड मेंबर को पांच-2 सोलर लाइट आवंटित की गई हैं, जो वार्ड मेंबरों द्वारा ग्रामीणों से सलाह लेकर तथा सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित कर दी गई हैं। विभाग से अतिरिक्त लाइट प्राप्त होने पर शेष स्थलों पर भी लगा दी जाएंगी।
