साेलन : 7 वर्ष बच्ची के ईलाज के लिए समाजसेवी आएं आगे, पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन
फर्स्ट वर्डिक्ट। साेलन
कांटी मशवा पंचायत (खील गांव) के रमन कुमार की उम्र 18 वर्ष है। अनुसूचित जाति से संबंध रखता है। ग्रामीण परिवेश में ट्रांसगिरि की कांटीमश्वा पंचायत के खील गांव में जन्म हुआ। दसवीं की परीक्षा में 700 में से 651 अंक प्राप्त किए। 12वीं की परीक्षा में 500 में से 448 अंक हासिल कर परिवार को गौरवान्वित किया। 7 बहन-भाईयों में सबसे बड़ा है। पहाड़ सी चुनौती लेकर आगे की पढ़ाई करने नाहन काॅलेज में दाखिला लिया है। गुरबत ऐसी कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है। सपनों को पंख लगाने रमन नाहन पहुंच जाता है, ताकि काॅलेज की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सके, लेकिन गरीब पहाड़ी युवक के सामने पहाड़ जैसी चुनौती सामने आ गई। चंद महीने पहले ये पता चला कि 7 वर्ष की अमिषा को ब्लड कैंसर की गंभीर बीमारी है। आनन-फानन में पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। पिता दिहाड़ी करें या बेटी की देखभाल। यही नहीं, रमन खुद भी न्यूरो की बीमारी से पीड़ित है।
उल्लेखनीय है कि गांव का युवक हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी पकड़ रखता है। 7 वर्ष की बहन के कैंसर के इलाज की खातिर दिहाड़ी करने को मजबूर हुआ 18 वर्ष का मेधावी रमन बावजूद इसके काॅलेज भी जा रहा है। साथ ही दिहाड़ी लगाकर चंद रुपए भी कमा रहा है। एक जगह रोजाना 8 घंटे की नौकरी करने के बाद 10 दिन की पगार महज एक हजार मिली थी। बेशक ही अपनी दास्तां सुनाते-सुनाते रमन की आंखों में आंसू आ जाते हैं, लेकिन वो हिम्मत नहीं हारता। जब भी अवसाद हावी होने लगता है, तो अपनी डायरी में जीवन की कठिन परीक्षा की कड़वी सच्चाई को शब्दों में उकेर देता है।
(रमन का नंबर 7876715176 , इंदर सिंह पिता का नाम 9805313122)
Indar सिंह, अकाउंट नंबर-08630110025109, ifsc code -UCBA0000863, Google pay N.-8894914116, चतर सिंह (चाचा)।
