जिप वार्ड 6 : शीला का नाम विरुद्ध बलदेव का काम
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चूका है। उम्मीदवारों ने चुनावी दंगल में अपनी ताल ठोकनी शुरू कर दी है। सोलन जिला परिषद् चुनाव में इस बार सबसे रोचक जंग वार्ड न 6 सलोगड़ा में देखने को मिलेगी है। यहाँ से भाजपा ने कुमारी शीला को तो कांग्रेस ने बलदेव ठाकुर को मैदान में उतारा है। इस मुकाबले को शीला के नाम विरुद्ध बलदेव के काम के तौर पर देखा जा रहा है।
वार्ड 6 भाजपा की तेजतरार्र नेता कुमारी शीला का वार्ड का है, इसी वार्ड से जीतकर वो जिला परिषद् अध्यक्ष भी रह चुकी है और उनकी मजबूत जमीनी पकड़ के बुते इस वार्ड को भाजपा के गढ़ की तरह देखा जाता है। कुमारी शीला का सरल व्यक्तित्व, सहज उपलब्धता और आम आदमी से जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी मजबूती है। साथ ही उनका राजनैतिक कद भी उन्हें इस चुनाव में फायदा दे सकता है। वे 2012 में सोलन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रह चुकी है और बीते चुनाव में भी पार्टी टिकट की दावेदार रही है। जानकार मानते है की 2022 विधानसभा चुनाव में भी कुमारी शीला का दावा मजबूत होगा।
पर भाजपा के इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए इस बार कांग्रेस ने भी तुरुप का इक्का फेंका है। यहाँ से नौणी पंचायत प्रधान बलदेव ठाकुर कांग्रेस के प्रत्याशी है। बलदेव ठाकुर के कार्यकाल में नौणी पंचायत को एक विशिष्ट पहचान मिली है, इसे हिमाचल प्रदेश की सबसे विकसित पंचायत माना जाता है और इसका पूरा श्रेय बलदेव ठाकुर को जाता है। देश प्रदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें मिल चुके है। साथ ही उनकी ईमानदार छवि भी उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है। दबे मुँह विरोधी विचारधारा के लोग भी बतौर प्रधान बलदेव ठाकुर के काम की सराहना करते है। बलदेव की विकास पुरुष की ये छवि इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है। निश्चित तौर पर बलदेव अपने प्रचार में नौणी मॉडल का जमकर इस्तेमाल करेंगे और ऐसे में विकास के नाम पर यदि मतदान होता है तो उन्हें इसका लाभ मिल सकता है।
दोनों ही मुख्य राजनैतिक दल इस चुनाव के लिए कमर कस चुके है। पर संगठनात्मक तौर पर बात की जाए तो जहाँ संगठन भाजपा की शक्ति है तो कांग्रेस का लचर संगठन उसकी सबसे बड़ी खामी। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी इसी क्षेत्र से आते है पर उनकी राजनीति बंद कमरों तक सिमित दिखती है। विपक्ष में होने के बावजूद कांग्रेस में ऐसा कोई पदाधिकारी नहीं दीखता जो जमीनी लड़ाई लड़ रहा हो। कांग्रेस पूरी तरह विधयक कर्नल धनीराम शांडिल पर आश्रित दिख रही है। उधर भाजपा के पास मजबूत संगठन तो है पर अंतर्कलह जगजाहिर है। ऐसे में कुमारी शीला यदि इस चुनावी समर में परास्त होती है तो 2022 में उनका दावा भी एक तरह से खत्म सा हो जाएगा। इस चुनाव का 2022 कनेक्शन भाजपा में भीतरघात को बढ़ा सकता है। बहरहाल नतीजा जो भी रहे इतना तय है की ये चुनावी मुकाबला बेहद रोचक रहने वाला है।
