एशियन गेम्स गोल्ड पर 33 लाख से नाराज हिमाचल की कबड्डी बेटियां, बोलीं- उपलब्धि के साथ न्याय नहीं
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली हिमाचल की चार खिलाड़ियों ने प्रदेश सरकार की ओर से घोषित पुरस्कार राशि पर सवाल उठाए हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि 33.33-33.33 लाख रुपये की राशि उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि और वर्षों की मेहनत के साथ पूरा न्याय नहीं करती।
हिमाचल की पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर ने सरकार से पुरस्कार राशि पर पुनर्विचार करने की मांग की है। खिलाड़ियों की मांग है कि एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए निर्धारित चार करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि को चारों हिमाचली खिलाड़ियों में बराबर बांटा जाए, जिससे प्रत्येक खिलाड़ी को एक-एक करोड़ रुपये मिलें।
भावना ठाकुर ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर इस मांग को प्रमुखता से रखेंगी। उन्होंने चारों खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपये के साथ सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद वर्षों की मेहनत और संघर्ष से यह मुकाम हासिल किया है।
वही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 28 सितंबर को एशियन गेम्स के हिमाचली पदक विजेताओं के लिए कुल 5.33 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि का ऐलान किया था। इसके तहत चारों कबड्डी खिलाड़ियों को 33.33 लाख रुपये प्रति खिलाड़ी दिए जाने हैं। वहीं मंडी के सावन बरवाल को मैराथन में रजत पदक के लिए 2.50 करोड़ और चंबा की सीमा कुमारी को 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक के लिए 1.50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
सरकार के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स काउंसिल कैश अवॉर्ड रूल्स-2024 के तहत एशियन गेम्स के व्यक्तिगत स्वर्ण पदक के लिए चार करोड़ रुपये का प्रावधान है। कबड्डी टीम के मामले में पुरस्कार राशि टीम के नियमों के अनुसार खिलाड़ियों की भागीदारी के अनुपात में वितरित की जा रही है।
चारों खिलाड़ियों की मांग के बाद अब हिमाचल में एशियन गेम्स की स्वर्णिम उपलब्धि और खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
